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Numerology Forecast for June 5

अंक ज्योतिष 5 जून 2026: मूलांक 5 के लिए नेटवर्किंग का सुनहरा मौका, मूलांक 6 को मिलेगा अपनों का साथ

surbhi जून 5, 2026 0
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Numerology Prediction 5 June 2026

Numerology Prediction 5 June 2026: शुक्रवार, 5 जून 2026 का दिन अंक ज्योतिष के अनुसार नई संभावनाओं, रचनात्मकता और सामाजिक मेलजोल का संकेत दे रहा है। अंक 5 के स्वामी बुध और शुक्रवार के स्वामी शुक्र के संयुक्त प्रभाव से आज संवाद, नेटवर्किंग, रिश्तों और नए अवसरों को विशेष महत्व मिलेगा। दिन की कुल ऊर्जा का अंक 3 माना जा रहा है, जो रचनात्मक सोच, सकारात्मकता और अभिव्यक्ति का प्रतीक है।

आइए जानते हैं जन्मतिथि के आधार पर मूलांक 1 से 9 तक का विस्तृत भविष्यफल।

मूलांक 1 (1, 10, 19, 28)

आज नए विचारों और अवसरों को अपनाने का दिन है। कार्यक्षेत्र में लोगों से जुड़ने और संपर्क बढ़ाने से भविष्य के लिए लाभदायक रास्ते खुल सकते हैं। आत्मविश्वास आपकी सबसे बड़ी ताकत रहेगा, लेकिन दूसरों की राय को भी महत्व दें।

सीख: आत्मविश्वास के साथ दूसरों के विचारों का सम्मान करें।
शुभ अंक: 1, 5
शुभ रंग: लाल, नारंगी

मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)

सहयोग और सामंजस्य से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी। आपकी समझदारी और शांत स्वभाव किसी महत्वपूर्ण समस्या का समाधान निकाल सकता है। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा।

सीख: मानसिक शांति बनाए रखें और बदलाव को स्वीकार करें।
शुभ अंक: 2, 3
शुभ रंग: सफेद, पीच

मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)

आज का दिन आपके लिए बेहद अनुकूल है। प्रस्तुति, लेखन, शिक्षण और सार्वजनिक संवाद से जुड़े कार्यों में विशेष सफलता मिलने के संकेत हैं। आपकी सकारात्मक ऊर्जा दूसरों को भी प्रेरित करेगी।

सीख: अपनी रचनात्मकता को खुलकर व्यक्त करें।
शुभ अंक: 3, 5
शुभ रंग: पीला, गोल्डन

मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)

दिन की तेज गति शुरुआत में चुनौतीपूर्ण लग सकती है, लेकिन लचीलापन अपनाने से नए अवसर मिलेंगे। काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। परिवार को समय देना भी आवश्यक है।

सीख: बदलाव को स्वीकार करना ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
शुभ अंक: 4, 5
शुभ रंग: हरा, आसमानी

मूलांक 5 (5, 14, 23)

आज का दिन आपके लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। नेटवर्किंग, यात्रा, व्यापार विस्तार और नए संपर्क बनाने के लिए समय अनुकूल है। आपकी बातचीत और संचार क्षमता नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।

सीख: स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है जब उसके पीछे स्पष्ट उद्देश्य हो।
शुभ अंक: 5, 3
शुभ रंग: फिरोजी, सफेद

मूलांक 6 (6, 15, 24)

कला, डिजाइन, काउंसलिंग और लोगों से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार और प्रियजनों के साथ बिताया गया समय आपको मानसिक संतुष्टि देगा। रिश्तों में भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने से निकटता बढ़ेगी।

सीख: सच्ची प्रशंसा रिश्तों को और मजबूत बनाती है।
शुभ अंक: 6, 3
शुभ रंग: गुलाबी, हल्का नीला

मूलांक 7 (7, 16, 25)

आज ज्ञान और आत्मविश्लेषण से जुड़ी गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। नई जानकारी और सीख भविष्य में उपयोगी साबित हो सकती है। रिश्तों में संवाद के जरिए पुरानी गलतफहमियां दूर करने का अवसर मिलेगा।

सीख: जिज्ञासा ही ज्ञान को विस्तार देती है।
शुभ अंक: 7, 5
शुभ रंग: जामुनी, सिल्वर

मूलांक 8 (8, 17, 26)

आर्थिक मामलों और पेशेवर जीवन के लिए दिन अच्छा है। बातचीत और समझौते से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। अनुशासित दिनचर्या आपको शारीरिक और मानसिक रूप से संतुलित रखेगी।

सीख: सफलता का आनंद अपनों के साथ साझा करने में है।
शुभ अंक: 8, 3
शुभ रंग: भूरा, नीला

मूलांक 9 (9, 18, 27)

ऊर्जा और उत्साह से भरपूर दिन रहेगा। नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक कार्यों में आपको विशेष सफलता मिल सकती है। अपनी बात स्पष्ट रूप से रखें ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न हो।

सीख: साहस और विवेक का संतुलन सफलता दिलाता है।
शुभ अंक: 9, 5
शुभ रंग: लाल, नारंगी

आज का निष्कर्ष

5 जून 2026 का दिन विशेष रूप से मूलांक 5 के लिए नए संपर्क और अवसर लेकर आया है, जबकि मूलांक 6 के जातक परिवार और प्रियजनों के साथ सुखद समय बिताएंगे। संवाद, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच आज सभी मूलांक के लोगों के लिए सफलता की कुंजी साबित हो सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी कब है? जानें सही तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व माना गया है। यह पवित्र मास लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और इसमें किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल अक्षय माना जाता है। ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाने वाली अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी इस वर्ष 12 जून 2026 को पड़ रही है। इस बार यह तिथि कई शुभ योगों के साथ आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और उन्मीलिनी महाद्वादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत और पूजा का महत्व और भी बढ़ गया है। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की होती है विशेष पूजा अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी के दिन भगवान श्रीराम, उनके अनुज लक्ष्मण जी और माता सीता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व भाईचारे, पारिवारिक प्रेम और धर्म के आदर्श मूल्यों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से इस व्रत को करने वाले भक्तों के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। 'चंपक द्वादशी' के नाम से भी प्रसिद्ध है यह पर्व अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी को "चंपक द्वादशी" भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, श्रीराम या श्रीकृष्ण को चंपा के फूल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा विधि प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले या सफेद वस्त्र, चंदन और चंपा के फूल अर्पित करें। मौसमी फल और सात्विक मिठाई का भोग लगाएं। दीपक और धूप जलाकर रामलक्ष्मण द्वादशी व्रत कथा का पाठ करें। श्रीराम के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी का धार्मिक महत्व रुके हुए कार्यों में मिलती है सफलता मान्यता है कि इस दिन श्रीराम और लक्ष्मण जी की पूजा करने से लंबे समय से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने लगती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। परिवार में बढ़ता है प्रेम और सौहार्द यह पर्व भगवान राम और लक्ष्मण के आदर्श भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और भाइयों के बीच प्रेम और विश्वास मजबूत होता है। अक्षय पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति पुरुषोत्तम मास में किए गए दान-पुण्य का फल कभी समाप्त नहीं होता। इस दिन अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से दरिद्रता दूर होने की मान्यता है और साधक के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रद्धा और भक्ति का विशेष दिन अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों और पारिवारिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश भी देती है। इस पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाने वाली मानी जाती है।  

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Aaj Ka Itihas
7 जून की महत्वपूर्ण घटनाएं

1494 – टॉर्डेसिलस संधि पर स्पेन और पुर्तगाल के बीच समझौता हुआ। 1654 – फ्रांस के राजा लुई चौदहवें का राज्याभिषेक हुआ। 1674 – छत्रपति शिवाजी महाराज का रायगढ़ किले में राज्याभिषेक हुआ। 1893 – महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर ट्रेन से उतारा गया। 1914 – पहली आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली के प्रयोग की शुरुआत हुई। 1929 – वेटिकन सिटी स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया। 1942 – द्वितीय विश्व युद्ध की मिडवे की लड़ाई समाप्त हुई। 1981 – इज़राइल ने इराक के ओसिराक परमाणु रिएक्टर पर हवाई हमला किया। 1995 – बोइंग 777 ने व्यावसायिक सेवा शुरू की। 2026 – पूरी दुनिया में विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जा रहा है। 7 जून को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति 1502 – पोप ग्रेगरी तेरहवें, ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू करने के लिए प्रसिद्ध। 1848 – पॉल गॉगैं, प्रसिद्ध फ्रांसीसी चित्रकार। 1917 – डीन मार्टिन, अभिनेता और गायक। 1940 – टॉम जोन्स, प्रसिद्ध गायक। 1952 – लियाम नीसन, हॉलीवुड अभिनेता। 1958 – प्रिंस, अमेरिकी गायक और संगीतकार। 1978 – अन्ना कूर्निकोवा, पूर्व टेनिस खिलाड़ी। 1981 – महेश बाबू, भारतीय अभिनेता। 1985 – अमृता राव, बॉलीवुड अभिनेत्री। 1987 – कंगना रनौत, अभिनेत्री और राजनेता। 1996 – फ्रेंकी डी जोंग, फुटबॉलर। 7 जून को हुए प्रमुख निधन 632 – पैगंबर मुहम्मद का निधन हुआ। 1329 – स्कॉटलैंड के राजा रॉबर्ट द ब्रूस का निधन हुआ। 1954 – एलन ट्यूरिंग, गणितज्ञ और कंप्यूटर वैज्ञानिक का निधन हुआ। 1980 – हेनरी मिलर, प्रसिद्ध लेखक का निधन हुआ। 1993 – ड्रेज़न पेट्रोविच, बास्केटबॉल खिलाड़ी का निधन हुआ। 2011 – जॉर्ज सेम्प्रून, लेखक और राजनेता का निधन हुआ। 2012 – रे ब्रैडबरी, प्रसिद्ध विज्ञान कथा लेखक का निधन हुआ। 2014 – फर्नांडाओ, ब्राजीलियाई फुटबॉलर का निधन हुआ। 2021 – बिक्रमजीत कंवरपाल, भारतीय अभिनेता का निधन हुआ।   कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

Abhishek Singh जून 7, 2026 0
Aaj Ka Rashiphal

आज का राशिफल 7 जून 2026

Aaj Ka Panchang

आज का वैदिक पंचांग | 7 जून 2026, रविवार

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Devotees offering prayers to Lord Surya during Bhanu Saptami with traditional rituals and offerings.
भानु सप्तमी 2026: जीवनभर पाप करने वाली इन्दुमती को कैसे मिला मोक्ष? जानिए व्रत कथा और सूर्यदेव के 108 नामों का महत्व

Bhanu Saptami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 7 जून 2026, रविवार को भानु सप्तमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भगवान सूर्यदेव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य उपासना करने से सुख, समृद्धि, आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भानु सप्तमी व्रत कथा का पाठ करने से व्रत का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। क्या है भानु सप्तमी का महत्व? भानु सप्तमी भगवान सूर्य को समर्पित विशेष तिथि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव को जल अर्पित करने, मंत्र जाप करने और व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस दिन सूर्यदेव के 108 नामों का स्मरण भी विशेष फलदायी माना गया है। भानु सप्तमी की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में इन्दुमती नाम की एक वेश्या रहती थी। उसने अपने जीवन में अनेक पाप किए थे, लेकिन जीवन के अंतिम चरण में उसे अपनी गलतियों का एहसास हुआ और वह मोक्ष प्राप्त करना चाहती थी। इसी उद्देश्य से वह महर्षि वशिष्ठ के पास पहुंची और उनसे प्रार्थना करते हुए बोली, "हे ऋषिवर! मैंने जीवन में कोई पुण्य कार्य नहीं किया है। कृपया ऐसा उपाय बताइए जिससे मुझे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल सके।" इन्दुमती की विनम्र प्रार्थना सुनकर महर्षि वशिष्ठ ने कहा कि भानु सप्तमी का व्रत स्त्रियों के लिए सुख, सौभाग्य, सौंदर्य और मोक्ष प्रदान करने वाला श्रेष्ठ व्रत है। यदि वह श्रद्धापूर्वक सूर्यदेव की पूजा और व्रत का पालन करेगी, तो उसे अवश्य शुभ फल प्राप्त होगा। महर्षि के निर्देशानुसार इन्दुमती ने पूरे विधि-विधान से भानु सप्तमी का व्रत किया, सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया और उनकी आराधना की। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई और स्वर्ग में अप्सराओं की नायिका बनने का सम्मान भी मिला। सूर्यदेव के 108 नामों का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन सूर्यदेव के 108 नामों का जाप करने से आरोग्य, यश, तेज, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भक्त इस दिन "ॐ सूर्याय नमः", "ॐ भास्कराय नमः", "ॐ आदित्याय नमः", "ॐ रवये नमः" और "ॐ श्रीसूर्यनारायणाय नमः" जैसे नामों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यता मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया पश्चाताप और श्रद्धा से की गई उपासना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। इन्दुमती की कथा इसी संदेश को दर्शाती है कि ईश्वर की भक्ति और अच्छे संकल्प से व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है।  

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