मुंबई में अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'Cocktail 2' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान अभिनेत्री कृति सेनन ने अपने फैशन स्टेटमेंट से एक बार फिर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कृति ने लंदन स्थित अल्बानियाई डिजाइनर Nensi Dojaka की शानदार ब्लैक-एंड-व्हाइट शीयर मैक्सी ड्रेस पहनकर रेड कार्पेट पर ग्लैमरस अंदाज में एंट्री की।
कृति की यह असिमेट्रिक मैक्सी ड्रेस डिजाइनर Nensi Dojaka के Spring/Summer 2025 कलेक्शन का हिस्सा है। आउटफिट में वन-शोल्डर फिटेड ब्लैक बॉडिस के साथ फ्लोई आइवरी शिफॉन स्कर्ट दी गई थी। ड्रेस में मौजूद शीयर डिटेलिंग और कट-आउट्स ने इसे बोल्ड लेकिन एलिगेंट लुक दिया।
Nensi Dojaka अपने डिजाइनों में 90 के दशक की मिनिमलिस्ट स्टाइल और लिंजरी एलिमेंट्स को मॉडर्न रेडी-टू-वियर फैशन के साथ जोड़ने के लिए जानी जाती हैं और कृति का यह लुक उसी सिग्नेचर स्टाइल को बखूबी दर्शाता है।
कृति ने अपने आउटफिट के साथ अलग-अलग ब्रांड्स की जूलरी को मिक्स करके बोहेमियन टच दिया। उन्होंने Curio Cottage के ईयररिंग्स, Ahsiam का ईयर कफ और Silverstreak व Sikkaa Jewellery के एक्सेसरीज़ पहने।
फुटवियर के तौर पर उन्होंने ग्लैडिएटर-स्टाइल सैंडल चुने, जो पूरे लुक के साथ बेहतरीन तालमेल में नजर आए।
मेकअप की बात करें तो कृति ने न्यूड लिपस्टिक, सॉफ्ट स्मोकी आईज और ग्लोइंग बेस के साथ मिनिमल लेकिन आकर्षक लुक अपनाया। वहीं खुले और स्ट्रेट ब्लो-ड्राय हेयरस्टाइल ने उनके पूरे लुक को और निखार दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कृति के इस आउटफिट में उनकी फिल्म 'Cocktail 2' के किरदार Ally की झलक भी देखने को मिली। ड्रेस की बोल्ड और फ्री-स्पिरिटेड स्टाइल उनके ऑन-स्क्रीन कैरेक्टर की पर्सनैलिटी को दर्शाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत में लंबे समय तक सोना और हीरे की ज्वेलरी महिलाओं के जीवन में विरासत, शादी या किसी खास पारिवारिक समारोह के जरिए आती रही है। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। नई पीढ़ी की महिलाएं किसी गिफ्ट या प्रस्ताव का इंतजार करने के बजाय अपनी मेहनत की कमाई से खुद के लिए फाइन ज्वेलरी खरीद रही हैं। अब ज्वेलरी सिर्फ भावनात्मक या पारिवारिक धरोहर नहीं रह गई है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, उपलब्धि और व्यक्तिगत पसंद का प्रतीक बनती जा रही है। पहली सैलरी से खुद को दे रही हैं खास तोहफा कई युवा महिलाएं अपनी पहली नौकरी या किसी बड़े करियर माइलस्टोन को यादगार बनाने के लिए खुद को ज्वेलरी गिफ्ट कर रही हैं। 24 वर्षीय कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट इंद्राणी भट्टाचार्जी ने अपनी पहली सैलरी से खुद के लिए सोने की अंगूठी खरीदी। उनके मुताबिक, यह अनुभव उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता का अहसास दिलाने वाला था। वहीं 29 वर्षीय कंटेंट राइटर प्राची गोडबोले ने अपनी पहली नौकरी मिलने के बाद खुद को लैब-ग्रोन डायमंड ब्रेसलेट गिफ्ट किया। उनके अनुसार, पहले हीरे सिर्फ सगाई या शादी से जुड़े प्रतीक लगते थे, लेकिन अब वे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। उपलब्धियों का जश्न बन रही है ज्वेलरी 35 वर्षीय फैशन डिजाइनर दीक्षा जायसवाल ने कई वर्षों तक बचत करने के बाद कोच्चि के एक ज्वेलर से अपने लिए 18 कैरेट गोल्ड और 5 कैरेट रूबी वाली कस्टम रिंग बनवाई। उनका कहना है कि किसी और के गिफ्ट का इंतजार करने के बजाय खुद को यह अवसर देना अपने आप में एक उपलब्धि थी। रिपोर्ट में भी सामने आया नया ट्रेंड BoF-McKinsey State of Fashion 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 42 प्रतिशत महिलाएं पहले की तुलना में अब खुद के लिए ज्यादा ज्वेलरी खरीद रही हैं। यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में ज्वेलरी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ग्रोथ ड्राइवर्स में से एक माना जा रहा है। रोजमर्रा की जिंदगी के लिए चुन रही हैं हल्की और उपयोगी ज्वेलरी आज की महिलाएं भारी पारंपरिक गहनों की जगह ऐसी फाइन ज्वेलरी पसंद कर रही हैं, जिन्हें रोजाना पहना जा सके। कई बिजनेस वुमन और प्रोफेशनल महिलाओं का मानना है कि लॉकर में बंद रहने वाले भारी गहनों की बजाय हल्के, स्टाइलिश और बहुउपयोगी डिजाइन ज्यादा व्यावहारिक हैं। लैब-ग्रोन डायमंड बने युवाओं की पसंद महंगे प्राकृतिक हीरों के मुकाबले लैब-ग्रोन डायमंड युवा महिलाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनकी शुरुआती कीमत 6,000 से 10,000 रुपये के बीच होने के कारण यह एक किफायती विकल्प बनकर उभरे हैं। कई महिलाएं अब अपनी पसंद, जीवन के नए अध्याय या व्यक्तिगत उपलब्धियों को यादगार बनाने के लिए कस्टमाइज्ड रिंग्स और डायमंड ज्वेलरी खरीद रही हैं। ज्वेलरी का बदलता मतलब जहां पहले ज्वेलरी किसी रिश्ते, विरासत या समारोह का प्रतीक होती थी, वहीं अब यह महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बनती जा रही है। अब महिलाएं सिर्फ ज्वेलरी पाने का इंतजार नहीं कर रहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर, अपने समय पर और अपनी कमाई से उसे चुन रही हैं।
अगर आप दिनभर की भागदौड़ के बीच अपनी पसंदीदा खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखना चाहते हैं, तो सॉलिड परफ्यूम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। पारंपरिक परफ्यूम की भारी कांच की बोतलों और बार-बार स्प्रे करने की झंझट से अलग, सॉलिड परफ्यूम छोटे, सुविधाजनक और ट्रैवल-फ्रेंडली होते हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें सीधे पल्स पॉइंट्स पर लगाया जाता है, जिससे खुशबू नियंत्रित रहती है और आसपास के लोगों को परेशान किए बिना लंबे समय तक बनी रहती है। मोम, तेल और बटर बेस्ड फॉर्मूला होने के कारण ये त्वचा पर धीरे-धीरे एक्टिव होते हैं और सामान्य स्प्रे परफ्यूम की तुलना में ज्यादा समय तक टिक सकते हैं। क्यों बढ़ रही है सॉलिड परफ्यूम की लोकप्रियता? आज की व्यस्त जीवनशैली में सुबह लगाया गया परफ्यूम अक्सर शाम तक फीका पड़ जाता है। यात्रा, पसीना, एयर कंडीशनिंग और लंबे कार्यदिवस के कारण खुशबू की तीव्रता कम हो जाती है। ऐसे में सॉलिड परफ्यूम दिन के दौरान आसान टच-अप का विकल्प बनकर उभरे हैं। इनकी खास बात यह है कि इनमें लीकेज का डर नहीं होता, ओवर-स्प्रे की समस्या नहीं होती और इन्हें आसानी से हैंडबैग या पॉकेट में रखा जा सकता है। 6 सॉलिड परफ्यूम जो आपके बैग में होने चाहिए 1. Diptyque Orphéon Solid Perfume यह रिफिलेबल कॉम्पैक्ट पैक में आता है और इसमें सीडर, टोंका बीन, जुनिपर बेरी और जैस्मिन की खुशबू का मिश्रण मिलता है। इसकी वुडी और स्मोकी फ्रेगरेंस इसे बेहद प्रीमियम बनाती है। 2. Dior Miss Dior Mini Miss लगभग ₹7,700 कीमत वाला यह लग्जरी फ्रेगरेंस स्टिक रोज और सैंडलवुड नोट्स के साथ आता है। इसका स्लिम डिज़ाइन इसे लिपस्टिक जैसा लुक देता है, जिससे इसे कहीं भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। 3. The Bare Bar Colors of Autumn ₹499 की कीमत वाला यह बजट-फ्रेंडली विकल्प गर्म, मसालेदार और वुडी खुशबू पसंद करने वालों के लिए बेहतरीन है। इसका टिन पैक इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आदर्श बनाता है। 4. Forest Essentials Parijat ₹4,200 की कीमत वाला यह अल्कोहल-फ्री सॉलिड परफ्यूम पारिजात फूल की सुगंध पर आधारित है। इसमें आम और महुआ बटर का इस्तेमाल किया गया है, जो त्वचा को भी पोषण देता है। 5. The Joon Shop Solid 3 – Clean Fruity ₹3,200 की कीमत वाला यह परफ्यूम लाइम, वायलेट और मस्क नोट्स के साथ आता है। इसकी फ्रेश और हल्की खुशबू ऑफिस और दिनभर के उपयोग के लिए उपयुक्त है। 6. Sol de Janeiro Cheirosa 62 Jelly Perfume Balm ₹3,200 की कीमत वाला यह परफ्यूम पिस्ता, साल्टेड कैरामेल और वैनिला नोट्स के साथ आता है। मीठी और बीच-वेकेशन जैसी खुशबू पसंद करने वालों के लिए यह शानदार विकल्प है। सॉलिड परफ्यूम खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? खुशबू के साथ-साथ फॉर्मूलेशन भी देखें। ट्रैवल फ्रेंडली पैकेजिंग को प्राथमिकता दें। यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है तो अल्कोहल-फ्री विकल्प चुनें। लंबे समय तक टिकने वाले वुडी और मस्क बेस्ड फ्रेगरेंस अधिक प्रभावी होते हैं। सॉलिड परफ्यूम पारंपरिक परफ्यूम का विकल्प नहीं हैं, लेकिन दिनभर खुशबू बनाए रखने और आसान टच-अप के लिए ये एक स्मार्ट और स्टाइलिश समाधान जरूर बन चुके हैं।
भारतीय शादी में दुल्हन की परिभाषा अब बदल चुकी है एक समय था जब भारतीय दुल्हनों को दो वर्गों में बांटा जाता था—पारंपरिक और आधुनिक। लाल लहंगा पहनने वाली दुल्हन पारंपरिक मानी जाती थी, जबकि अलग रंगों और डिजाइनों को अपनाने वाली आधुनिक। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज की भारतीय दुल्हन केवल फैशन ट्रेंड्स का अनुसरण नहीं करती, बल्कि अपने व्यक्तित्व, संस्कृति, परिवार और पसंद के अनुसार अपनी शादी का लुक चुनती है। डिजाइनर्स का मानना है कि अब दुल्हनों की कई अलग-अलग पहचान उभरकर सामने आई हैं, जो उनके पहनावे और सोच दोनों में दिखाई देती हैं। पारंपरिक दुल्हन: विरासत और भावनाओं से जुड़ा चुनाव आज भी बड़ी संख्या में दुल्हनें लाल रंग को अपनी पहली पसंद मानती हैं। लेकिन यह चुनाव केवल परंपरा निभाने के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे भावनात्मक जुड़ाव भी होता है। लाल, सिंदूरी और मरून रंग भारतीय विवाह संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं। बचपन से देखी गई शादी की तस्वीरें, पारिवारिक रस्में और मां-दादी की साड़ियां इस रंग को विशेष महत्व देती हैं। ऐसी दुल्हनें बनारसी सिल्क, कांजीवरम साड़ी, पोल्की ज्वेलरी, मंदिर आभूषण और हस्तशिल्प से बने परिधानों को प्राथमिकता देती हैं। इनके लिए शादी का जोड़ा सिर्फ एक ड्रेस नहीं बल्कि परिवार की विरासत का हिस्सा होता है। मिनिमलिस्ट दुल्हन: कम लेकिन खास नई पीढ़ी की कई दुल्हनें अब सादगी को प्राथमिकता दे रही हैं। ये दुल्हनें भारी-भरकम लुक के बजाय ऐसे कपड़े और आभूषण चुनती हैं जिनका व्यक्तिगत महत्व हो। एक खूबसूरत कांजीवरम साड़ी, सीमित लेकिन खास ज्वेलरी और सोच-समझकर चुनी गई रस्में इनकी पहचान बन रही हैं। इनके लिए हर चीज का कोई न कोई अर्थ होना जरूरी है। आइवरी दुल्हन: सफेद रंग का बढ़ता आकर्षण पिछले कुछ वर्षों में आइवरी, पर्ल, क्रीम और शैंपेन रंगों ने भारतीय ब्राइडल फैशन में मजबूत जगह बनाई है। डेस्टिनेशन वेडिंग और मल्टी-डे सेलिब्रेशन में ये रंग खास तौर पर पसंद किए जा रहे हैं। हल्के रंगों के साथ जरी वर्क, हाथ की कढ़ाई और एंटीक जड़ाऊ ज्वेलरी का संयोजन बेहद आकर्षक माना जा रहा है। इस ट्रेंड में रंग से ज्यादा महत्व टेक्सचर, कारीगरी और बारीक डिटेलिंग को दिया जाता है। डेस्टिनेशन ब्राइड: लोकेशन के हिसाब से स्टाइल समुद्र किनारे, पहाड़ों में या ऐतिहासिक महलों में होने वाली शादियों ने ब्राइडल फैशन को नया आयाम दिया है। डेस्टिनेशन ब्राइड अपने आउटफिट्स का चयन मौसम, जगह और समारोह के माहौल को ध्यान में रखकर करती है। समुद्र तट पर हल्के और फ्लोई फैब्रिक, पहाड़ी इलाकों में आरामदायक सिल्हूट और हेरिटेज लोकेशन के लिए क्लासिक डिजाइन पसंद किए जाते हैं। इनकी पूरी वेडिंग वार्डरोब अक्सर कई अलग-अलग कार्यक्रमों और स्थानों के अनुसार तैयार की जाती है। हैंडलूम ब्राइड: परंपरा और शिल्प की नई वापसी हैंडलूम आधारित ब्राइडल फैशन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कई दुल्हनें अब ऐसे कपड़े चुन रही हैं जिनमें भारतीय बुनकरों की कला और पारंपरिक शिल्प की झलक दिखाई देती है। हैंडवोवन सिल्क, ब्रोकेड और पारंपरिक जरी वाले परिधान केवल फैशन स्टेटमेंट नहीं बल्कि भारतीय कारीगरी को समर्थन देने का माध्यम भी बन रहे हैं। ऐसी दुल्हनें दिखावे से ज्यादा शिल्प और कहानी को महत्व देती हैं। मैक्सिमलिस्ट दुल्हन: भव्यता ही पहचान कुछ दुल्हनों के लिए शादी जीवन का सबसे बड़ा उत्सव होती है और वे इसे पूरी भव्यता के साथ मनाना चाहती हैं। भारी एम्ब्रॉयडरी, चमकदार क्रिस्टल वर्क, लंबी ट्रेल वाली चुनरी, भव्य ज्वेलरी और रॉयल लुक इस श्रेणी की पहचान हैं। इनके लिए शादी एक ग्रैंड सेलिब्रेशन होती है जिसमें हर चीज आकर्षण का केंद्र बनती है। आर्टसी ब्राइड: अलग पहचान बनाने की चाह आर्टसी दुल्हनें परंपरा को अपने अंदाज में पेश करती हैं। इनके लुक में कला, सिनेमा, विंटेज फैशन और रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है। अलग तरीके से पहनी गई साड़ी, अनोखी ज्वेलरी, हस्तलिखित निमंत्रण, कलात्मक सजावट और व्यक्तिगत स्पर्श इनकी शादी को खास बनाते हैं। ये दुल्हनें ट्रेंड्स का अनुसरण करने के बजाय अपना खुद का स्टाइल बनाना पसंद करती हैं। अब दुल्हनें खुद तय कर रही हैं अपनी पहचान फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ब्राइडल फैशन में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि अब दुल्हनें यह नहीं पूछतीं कि उन्हें कैसा दिखना चाहिए। वे यह तय कर रही हैं कि अपने सबसे खास दिन पर वे खुद का कौन-सा रूप दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहती हैं। यही वजह है कि आज भारतीय शादियों में पारंपरिक लाल लहंगे से लेकर आइवरी साड़ी, हैंडलूम ड्रेप्स और आर्टिस्टिक स्टाइलिंग तक हर तरह की पहचान को जगह मिल रही है।