भीषण गर्मी से जूझ रहे झारखंड के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में 17 जून तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के प्रवेश की संभावना है। हालांकि उससे पहले भी अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज बदलने के संकेत मिल रहे हैं और कई जिलों में बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की स्थिति बन सकती है।
9 जून को राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार रामगढ़, बोकारो, रांची, गुमला और खूंटी जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवाएं चल सकती हैं।
लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
10 जून को उत्तर-पश्चिमी और आसपास के मध्य क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों में वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से 11 जून से झारखंड के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
11 जून को धनबाद, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़ और रांची में—
इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
वहीं 12 जून से अगले तीन दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहने और बारिश होने के आसार हैं।
बारिश की संभावना के बावजूद सोमवार को राज्य के कई शहरों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हालांकि रामगढ़ में सोमवार को 1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिली।
मौसम विभाग का अनुमान है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 17 जून तक मॉनसून झारखंड में प्रवेश कर सकता है। मॉनसून के आगमन से राज्य में तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। मुहर्रम पर्व को लेकर झारखंड में पुलिस प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है। इस दौरान कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। आईजी अभियान नरेंद्र कुमार सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्यभर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। आईजी अभियान ने यह रिपोर्ट सभी जिलों के एसएसपी, एसपी को भेजकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुहर्रम पर्व 26 जून को मनाए जाने की संभावना रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष मुहर्रम पर्व 26 जून को मनाए जाने की संभावना है, हालांकि चांद दिखने के आधार पर तारीख में बदलाव हो सकता है। पर्व के दौरान मुस्लिम समुदाय द्वारा पारंपरिक रूप से ताजिया और जुलूस निकाले जाते हैं। साथ ही, इमामबाड़ों में प्रत्येक दिन शस्त्र संचालन का अभ्यास और बैंड-बाजा बजाया जाता है। आईजी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों में दोनों समुदायों के लोग मिश्रित रूप से रहते हैं, वहां दूसरे पक्ष द्वारा इसका विरोध किए जाने की आशंका रहती है। पूर्व के वर्षों में हुए कुछ सांप्रदायिक तनावों को देखते हुए इस बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। बिजली के लटकते तारों पर रहेगी विशेष नजर आईजी अभियान ने अपनी रिपोर्ट में साल 2023 में बोकारो जिले के पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको में हुई घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया है। बता दें कि वहां ताजिया भ्रमण के दौरान 11,000 वोल्ट के हाईटेंशन बिजली के तार की चपेट में आने से 13 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनमें से इलाज के दौरान 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे से सबक लेते हुए इस बार बिजली विभाग से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस अधिकारियों को कहा गया है कि वे जुलूस के रास्तों पर नीचे लटके और कमजोर बिजली के तारों को समय रहते दुरुस्त करवाएं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। आईजी अभियान के प्रमुख निर्देश धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: सभी जिलों में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और वहां सुरक्षा बलों के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। शांति समिति की बैठकें: सभी थाना क्षेत्रों में समय रहते शांति समिति की बैठकें आयोजित की जाएं, यदि कोई पुराना या संभावित विवादित बिंदु हो, तो दोनों पक्षों को बिठाकर उसका समाधान पहले ही निकाल लिया जाए। आकस्मिक स्थिति की तैयारी: किसी भी अप्रिय या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक स्तर पर पुलिस और सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। उपद्रवियों पर कार्रवाई: जो लोग पूर्व में सांप्रदायिक तनाव या दंगों में शामिल रहे हैं और वर्तमान में भी उनसे विवाद पैदा करने की आशंका है, ऐसे असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर कड़ी नजर: मुहर्रम के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स की विशेष रूप से मॉनिटरिंग की जाएगी। अफवाह फैलाने या भड़काऊ पोस्ट डालने वालों को चिन्हित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित मार्ग से ही निकलेगा जुलूस: पुलिस पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मुहर्रम का जुलूस केवल प्रशासन द्वारा पहले से तय रूट से ही गुजरे। किसी भी नए मार्ग की अनुमति नहीं दी जाएगी। विवादित रास्तों पर पाबंदी: जुलूस को किसी भी ऐसे मार्ग से ले जाने की अनुमति नहीं होगी, जहां पूर्व में कभी सांप्रदायिक विवाद या तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई हो। अवैध गतिविधियों पर छापेमारी: पर्व के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए पशु तस्करी, अवैध बूचड़खानों, अवैध मादक पदार्थों और शराब के ठिकानों पर सघन छापेमारी कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ड्रोन और वीडियोग्राफी से निगरानी: सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए पुलिस के वाहनों में वीडियोग्राफी की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों और जुलूस के मार्गों पर ड्रोन कैमरों से पल-पल की निगरानी रखी जाएगी। डीजे और भड़काऊ गानों पर रोक: जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार के उत्तेजक, अश्लील या दूसरे समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाने वाले विवादित गानों को डीजे पर बजाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। ऊंची इमारतों पर पुलिस बल की तैनाती: जुलूस के पूरे मार्ग में स्थित सरकारी और गैर-सरकारी ऊंची इमारतों की छतों पर पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की जाएगी, ताकि असामाजिक तत्वों की हरकतों पर नजर रखी जा सके।
रांची। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर मंगलवार को राजधानी रांची के कोकर स्थित समाधि स्थल पर श्रद्धा और सम्मान का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सहित कई जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम नागरिकों ने समाधि स्थल पहुंचकर पुष्प अर्पित किए तथा महान जननायक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सुबह से ही समाधि स्थल पर लोगों का तांता लगा रहा। विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और आदिवासी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, बलिदान और समाज सुधार के कार्यों को याद किया। पूरे परिसर में श्रद्धा और सम्मान का माहौल बना रहा। राज्यपाल ने संघर्ष और बलिदान को किया याद राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भगवान बिरसा मुंडा को महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी समाज के प्रेरणास्रोत के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी शासन और शोषण के खिलाफ संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनका आंदोलन आज भी प्रेरणा देता है। राज्यपाल ने कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए साहस, नेतृत्व और समर्पण का उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने बताया सामाजिक न्याय का प्रतीक मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भी समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान और गौरव में बिरसा मुंडा का योगदान अतुलनीय है। राज्य सरकार उनके सपनों को साकार करने और आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल लोगों ने धरती आबा के आदर्शों को अपनाने और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर पूरा झारखंड उनके प्रति कृतज्ञता और सम्मान से भावुक नजर आया।
रांची। जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप 2026 में भारत का गौरव बढ़ाने वाले झारखंड के हॉकी खिलाड़ियों का मंगलवार को रांची पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। राजधानी स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों के स्वागत के लिए खेल प्रेमियों, परिजनों, कोचों और हॉकी झारखंड के पदाधिकारियों की बड़ी संख्या मौजूद रही। खिलाड़ियों के आगमन के साथ ही एयरपोर्ट परिसर देशभक्ति और खेल भावना से जुड़े नारों से गूंज उठा। पारंपरिक तरीके से किया गया अभिनंदन दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होने के बाद खिलाड़ी अपने गृह राज्य लौटे। एयरपोर्ट पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। खिलाड़ियों को फूल-मालाएं पहनाई गईं, ढोल-नगाड़ों के साथ उनका अभिनंदन किया गया और उपस्थित लोगों ने उनकी उपलब्धि पर गर्व जताते हुए उत्साहवर्धन किया। पुरुष टीम ने जीता स्वर्ण, महिला टीम ने कांस्य पदक जापान के काकामीगाहारा में 29 मई से 6 जून तक आयोजित अंडर-18 एशिया कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। वहीं भारतीय महिला टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों टीमों की सफलता में झारखंड के खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुरुष टीम में झारखंड के आशीष तनी पूर्ति और प्रेमचंद शामिल थे, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। महिला टीम में संदीपा कुमारी, पुष्पा मांझी, सुगन सांगा, खिली कुमारी, नीलम टोपनो और श्रुति कुमारी ने भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम योगदान दिया। झारखंड की हॉकी परंपरा फिर हुई मजबूत हॉकी झारखंड के महासचिव विजय शंकर सिंह ने कहा कि यह राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि झारखंड हमेशा से हॉकी प्रतिभाओं की भूमि रहा है और यहां के खिलाड़ियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इन खिलाड़ियों की सफलता झारखंड के हजारों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। एयरपोर्ट पर "भारत माता की जय", "वंदे मातरम" और "हॉकी जिंदाबाद" के नारों के बीच खिलाड़ियों ने भी राज्यवासियों का आभार व्यक्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने एक बार फिर झारखंड को भारतीय हॉकी के मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित कर दिया है।