टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री Divyanka Tripathi इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर सुर्खियों में हैं। जहां एक ओर उनके परिवार में खुशियों का माहौल है, वहीं दूसरी ओर एक भ्रामक खबर ने उन्हें और उनके पति Vivek Dahiya को नाराज कर दिया है। कपल ने हाल ही में एक अखबार में प्रकाशित खबर पर आपत्ति जताते हुए साफ किया कि उनकी प्रेग्नेंसी को लेकर दी गई जानकारी पूरी तरह गलत है।
दरअसल, एक अखबार में ‘लेट मदरहुड’ और IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से जुड़ी रिपोर्ट के साथ दिव्यांका और विवेक की तस्वीर प्रकाशित की गई थी। इस खबर में बिना पुष्टि उनके केस को IVF से जोड़ दिया गया, जिसे लेकर दोनों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
दिव्यांका त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह आधुनिक मेडिकल साइंस और IVF जैसी तकनीकों का सम्मान करती हैं, क्योंकि यह कई कपल्स के लिए उम्मीद की किरण है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी प्रेग्नेंसी पूरी तरह से नेचुरल है। उन्होंने बिना तथ्यों की पुष्टि किए इस तरह की खबरें प्रकाशित करने को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि हर कपल की अपनी व्यक्तिगत यात्रा होती है, जिसे संवेदनशीलता के साथ पेश किया जाना चाहिए।
वहीं विवेक दहिया ने भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी तस्वीर को गलत संदर्भ में इस्तेमाल करना गलत है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले संबंधित व्यक्ति से पुष्टि जरूर की जानी चाहिए, ताकि गलत जानकारी फैलने से रोका जा सके।
गौरतलब है कि दिव्यांका और विवेक ने साल 2016 में शादी की थी। लगभग एक दशक बाद उनके घर नन्हे मेहमान के आने की खबर से परिवार और फैंस दोनों ही बेहद उत्साहित हैं।
दिव्यांका त्रिपाठी को सबसे ज्यादा लोकप्रियता Yeh Hai Mohabbatein में ‘इशिता भल्ला’ के किरदार से मिली थी, जबकि विवेक दहिया भी इसी शो का हिस्सा रह चुके हैं। दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने हमेशा सराहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारतीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah के कलाकार पिछले कई वर्षों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं। इस शो ने न सिर्फ इन्हें जबरदस्त पहचान दिलाई, बल्कि इनकी कमाई और नेट वर्थ में भी लगातार इजाफा हुआ है। आइए जानते हैं शो के प्रमुख कलाकारों की संपत्ति और कौन है सबसे ज्यादा अमीर। Dilip Joshi (जेठालाल गड़ा) शो की सफलता का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले दिलीप जोशी ने अपने किरदार ‘जेठालाल’ से घर-घर में पहचान बनाई है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और अभिनय ने उन्हें दर्शकों का फेवरेट बना दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी कुल नेट वर्थ करीब 47 करोड़ रुपये है, जो उन्हें इस शो का सबसे अमीर अभिनेता बनाती है। Mandal Chandwadkar (आत्माराम भिड़े) सोसाइटी के सख्त सेक्रेटरी ‘भिड़े’ का किरदार निभाने वाले मंदार चंदवाडकर भी कमाई के मामले में पीछे नहीं हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ करीब 42 करोड़ रुपये बताई जाती है। Munmun Dutta (बबीता जी) बबीता जी के किरदार में नजर आने वाली मुनमुन दत्ता अपनी ग्लैमरस इमेज और एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 40 करोड़ रुपये के आसपास मानी जाती है। Tanuj Mahashabde (कृष्णन अय्यर) अय्यर का किरदार निभाने वाले तनुज महाशब्दे भी दर्शकों को खूब हंसाते हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ करीब 30 करोड़ रुपये है। Amit Bhatt (चंपकलाल गड़ा) जेठालाल के पिता ‘चंपकलाल’ के रूप में अमित भट्ट ने शो में खास जगह बनाई है। उनकी कुल नेट वर्थ करीब 16.4 करोड़ रुपये बताई जाती है। Sonalika Joshi (माधवी भिड़े) माधवी भिड़े का किरदार निभाने वाली सोनालिका जोशी भी शो के साथ लंबे समय से जुड़ी हुई हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ करीब 10 करोड़ रुपये है। कौन है सबसे अमीर? इन आंकड़ों के अनुसार, दिलीप जोशी (जेठालाल) इस शो के सबसे अमीर अभिनेता हैं। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि भिड़े (मंदार चंदवाडकर) की संपत्ति बबीता जी और चंपकलाल से भी ज्यादा बताई जाती है, जो कई लोगों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है।
चेन्नई, एजेंसियां। अदिवी सेश और मृणाल ठाकुर स्टारर ‘डकैत: एक प्रेम कथा’ 10 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। अनुराग कश्यप की यह एक्शन-थ्रिलर पहले 27 मार्च को रिलीज होनी थी, लेकिन बाद में इसकी तारीख आगे बढ़ा दी गई। फिल्म में रोमांस, एक्शन और क्राइम का मिश्रण देखने को मिलेगा। कहानी एक भगोड़े अपराधी हरि और उसकी प्रेमिका जूलियट के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी जिंदगी सालों बाद फिर एक खतरनाक मोड़ पर आकर मिलती है। 155 मिनट की फिल्म, U/A सर्टिफिकेट के साथ तैयार फिल्म को U/A सर्टिफिकेट मिला है और इसका रनटाइम 155 मिनट (2 घंटे 35 मिनट) बताया जा रहा है। ट्रेलर के अनुसार, फिल्म में भावनात्मक प्रेम कहानी के साथ-साथ हाई-वोल्टेज एक्शन और पुलिस-क्रिमिनल चेज भी देखने को मिलेगी। फिल्म में अनुराग कश्यप भी अहम भूमिका में हैं, जो एक पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आएंगे। यूएसए में दमदार एडवांस बुकिंग, भारत में भी उम्मीदें फिल्म की एडवांस बुकिंग ने खासकर यूएसए मार्केट में उत्साह बढ़ा दिया है। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की प्रीमियर प्री-सेल्स 225K डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी है और इसे अदिवी सेश के करियर की सबसे बड़ी यूएस प्रीमियर ओपनिंग माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने 339 लोकेशंस पर 145,634 डॉलर से ज्यादा की एडवांस सेल्स दर्ज की, जबकि 659 शो के लिए 9,000 से अधिक टिकटें पहले ही बिक चुकी थीं। पहले दिन 2.5 से 3 करोड़ की कमाई का अनुमान भारत में फिल्म की ओपनिंग को लेकर शुरुआती अनुमान 2.5 करोड़ से 3 करोड़ रुपये नेट के बीच लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अगर वर्ड ऑफ माउथ मजबूत रहा तो फिल्म की कमाई में तेजी आ सकती है। ‘डकैत: एक प्रेम कथा’ को कपल्स, एक्शन लवर्स और थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अब देखना होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना बड़ा धमाका कर पाती है।
टीवी शो Sarabhai vs Sarabhai में ‘रोशेश’ के किरदार से पहचान बनाने वाले एक्टर Rajesh Kumar की जिंदगी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। करोड़ों के कर्ज से जूझते हुए सब्जी बेचने तक का उनका संघर्ष अब लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है। एक्टिंग छोड़ी, गांव लौटकर शुरू की खेती कुछ साल पहले राजेश कुमार ने ग्लैमर की दुनिया को छोड़कर अपने गांव Bihar लौटने का फैसला किया। उन्होंने जैविक खेती की शुरुआत की और एक ऐप लॉन्च कर अपनी उपज बेचने की कोशिश की। हालात इतने मुश्किल हो गए कि उन्हें अपने बेटे के स्कूल के बाहर सब्जी का ठेला लगाकर सब्जियां बेचनी पड़ीं। 2 करोड़ का कर्ज, लेकिन नहीं मानी हार राजेश कुमार ने खुलासा किया था कि खेती के बिजनेस में उन्हें 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। बैंक की किश्तें बाउंस होने लगीं क्रेडिट कार्ड एजेंट घर आने लगे बैंक खाते में सिर्फ ₹2,500 तक बच गए हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष करते रहे। बहनों ने छोड़ी विदेश की नौकरी हाल ही में उन्होंने बताया कि उनकी बहनें, जो पिछले 25 साल से अमेरिका और फिनलैंड में रह रही थीं, उन्होंने भी अपनी नौकरी छोड़ दी और अब बिहार में उनके साथ खेती कर रही हैं। उनकी बड़ी बहन ने अपने भाई के 50वें जन्मदिन पर नौकरी छोड़कर भारत आना ही सबसे बड़ा तोहफा बताया और खेती की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। चुनौतियां अब भी बरकरार गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी 2G पर निर्भर 5G आने में अभी समय लगेगा इसके बावजूद परिवार खेती को आगे बढ़ाने में जुटा है। बाढ़ ने तोड़ी मेहनत, फिर भी जारी संघर्ष 2019 में पालघर में 20 एकड़ जमीन पर शुरू की गई खेती को बड़ा झटका लगा, जब अचानक आई बाढ़ में 15,000 से ज्यादा पौधे नष्ट हो गए। इसके बाद कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब भी बाकी है थोड़ा कर्ज राजेश कुमार के मुताबिक, अब वह अपने आर्थिक संकट से काफी हद तक उबर चुके हैं। अभी केवल 10-15% कर्ज बाकी है जल्द ही खेती से जुड़ा एक नया और अलग प्रोजेक्ट लाने की तैयारी में हैं क्यों खास है यह कहानी? यह कहानी सिर्फ एक एक्टर की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानता। यह बताती है कि संघर्ष के बाद सफलता जरूर मिलती है।