स्वास्थ्य

गर्मियों में खीरा खाने के फायदे और नुकसान सेहत टिप्स
गर्मियों में खीरा खाते हैं? पहले जान लें इसे खाने का सही तरीका

नई दिल्ली,एजेंसियां। गर्मी का मौसम आते ही लोग अपनी डाइट में ठंडी, हल्की और पानी से भरपूर चीजों को शामिल करना शुरू कर देते हैं। इन्हीं में खीरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। खीरा शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन सुधारने, वजन कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोग इसे ऐसे तरीके से खा लेते हैं, जिससे इसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खीरे का गलत सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। खासकर कुछ लोग इसे सुबह खाली पेट या रात में ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, जिससे दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।   खाली पेट या रात में खाने से हो सकती है परेशानी सुबह खाली पेट अधिक मात्रा में खीरा खाने से कुछ लोगों को एसिडिटी, पेट दर्द, गैस या जलन जैसी शिकायत हो सकती है। खीरे में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो हर किसी के पाचन तंत्र को सूट नहीं करती। वहीं, रात में खीरा खाना भी कई लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। रात के समय पाचन तंत्र थोड़ा धीमा काम करता है, ऐसे में खीरा ठीक से पच नहीं पाता और ब्लोटिंग, अपच और गैस की समस्या हो सकती है।   बिना धोए या बहुत ठंडा खीरा खाना भी सही नहीं खीरे को बिना धोए खाना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बाजार में मिलने वाली सब्जियों पर अक्सर धूल, गंदगी, बैक्टीरिया और कीटनाशकों के अंश लगे हो सकते हैं। ऐसे में बिना साफ किए खाया गया खीरा पेट के संक्रमण या अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा, फ्रिज से निकला बहुत ठंडा खीरा तुरंत खाना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे कुछ लोगों को गले में खराश, सर्दी-जुकाम या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए खीरे को कुछ देर सामान्य तापमान पर रखने के बाद खाना बेहतर माना जाता है।   सही तरीका क्या है? खीरे को खाने से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है। चाहें तो इसे हल्के नमक वाले पानी से भी साफ किया जा सकता है। अगर छिलका सख्त या कड़वा लगे तो उसे हटाकर खाना बेहतर होता है। खीरे में हल्का नमक, काली मिर्च या नींबू मिलाकर खाने से स्वाद भी बढ़ता है और पाचन भी बेहतर हो सकता है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
HIV awareness and treatment support in Delhi with healthcare workers and patients
दिल्ली में HIV इलाज की बड़ी चुनौती: सिर्फ 70% मरीज ही उपचार से जुड़े, केंद्र ने जिलास्तर पर तेज की कार्रवाई

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में HIV नियंत्रण को लेकर प्रगति के बावजूद इलाज से जुड़ाव एक बड़ी चिंता बना हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पहचान किए गए मरीजों में से केवल लगभग 70% ही नियमित उपचार से जुड़े हैं। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब जिलास्तर पर विशेष रणनीति के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। ‘सुरक्षा संकल्प कार्यशाला’ में हुई समीक्षा हाल ही में आयोजित ‘सुरक्षा संकल्प कार्यशाला’ में केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय और National AIDS Control Organisation (NACO) ने दिल्ली और हरियाणा में HIV की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में टेस्टिंग, इलाज से जोड़ने (linkage) और मरीजों की निरंतर निगरानी पर जोर दिया गया। दिल्ली में क्या है स्थिति? दिल्ली में करीब 59,079 लोग HIV के साथ जीवन जी रहे हैं और वयस्कों में इसका प्रचलन 0.33% है। हालांकि, असली चुनौती यह है कि जिन लोगों की पहचान हो चुकी है, उन्हें समय पर इलाज शुरू कराया जाए और लंबे समय तक उपचार में बनाए रखा जाए। 7 जिलों पर विशेष फोकस स्थिति सुधारने के लिए दिल्ली के सात जिलों-नॉर्थ, न्यू दिल्ली, शाहदरा, सेंट्रल, साउथ ईस्ट, साउथ और नॉर्थ वेस्ट-को चिन्हित किया गया है, जहां निगरानी और हस्तक्षेप बढ़ाए जाएंगे। क्या हैं मुख्य चुनौतियां? विशेषज्ञों के मुताबिक समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ की है। Dr Neeraj Nischal के अनुसार, “दिल्ली में अस्पताल और विशेषज्ञों की कमी नहीं है, लेकिन मरीजों को इलाज से जोड़ने और लंबे समय तक बनाए रखने में दिक्कतें हैं।” मुख्य कारणों में शामिल हैं: इलाज शुरू करने में देरी सामाजिक कलंक (stigma) उपचार में रुकावट लगातार स्थान बदलने वाली शहरी आबादी क्या हो सकते हैं समाधान? विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि: मरीजों के लिए पोर्टेबल ट्रीटमेंट सिस्टम बनाया जाए एकीकृत (unified) डेटा बेस तैयार हो मल्टी-मंथ दवाओं की सुविधा मिले समुदाय स्तर पर दवा वितरण को बढ़ावा दिया जाए इससे खासकर प्रवासी (migrant) आबादी को इलाज जारी रखने में मदद मिलेगी। हरियाणा की स्थिति बेहतर दिल्ली की तुलना में हरियाणा का प्रदर्शन बेहतर बताया गया है, जहां ट्रीटमेंट कवरेज करीब 81:83:95 के अनुपात में है, हालांकि वहां भी सुधार की जरूरत बनी हुई है। राष्ट्रीय लक्ष्य क्या है? देशभर में 219 जिलों को HIV/AIDS नियंत्रण के लिए प्राथमिकता क्षेत्र घोषित किया गया है, जिनमें दिल्ली के 7 और हरियाणा के 11 जिले शामिल हैं। सरकार वैश्विक 95-95-95 लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और अब इसे बढ़ाकर 95-95-99 करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 2027 तक HIV/AIDS को नियंत्रण में लाया जा सके। मां से बच्चे में संक्रमण रोकने पर जोर अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि समय पर जांच और इलाज के जरिए मां से बच्चे में HIV संक्रमण को पूरी तरह खत्म करना प्राथमिकता में शामिल है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Person feeling fatigue and weakness despite normal medical reports showing early illness warning signs
Early Signs before Serious Illness: रिपोर्ट नॉर्मल, फिर भी थकान? जानें असली वजह

कई लोग दिनभर थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस करते हैं, जबकि मेडिकल चेकअप में सब कुछ नॉर्मल आता है। ऐसे में अक्सर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकते हैं। KIMS अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, शरीर अचानक बीमार नहीं होता, बल्कि पहले से ही छोटे-छोटे संकेत देना शुरू कर देता है। इन्हें समय रहते समझना बेहद जरूरी है। ये लक्षण बिल्कुल नजरअंदाज न करें हर समय थकान और सुस्ती रहना चक्कर आना नींद पूरी न होना बिना कारण शरीर में दर्द ध्यान और सोचने की क्षमता में कमी ये सभी संकेत किसी अंदरूनी समस्या की शुरुआत हो सकते हैं। रिपोर्ट नॉर्मल फिर भी क्यों होती है परेशानी? ज्यादातर टेस्ट बड़ी बीमारियों को पकड़ने के लिए होते हैं शुरुआती बदलाव जैसे: मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी थायरॉइड असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस पाचन संबंधी समस्या ये शुरुआती स्टेज पर टेस्ट में साफ नहीं दिखते ICMR और NIH के अनुसार, कई बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होती हैं। छिपी हुई आम समस्याएं विटामिन B12 और D की कमी डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) नींद की खराब गुणवत्ता थायरॉइड में हल्के बदलाव  ये छोटी दिखने वाली समस्याएं शरीर की ऊर्जा और मूड पर बड़ा असर डालती हैं। क्या करें? बार-बार टेस्ट नहीं, लाइफस्टाइल सुधारें डॉक्टरों के अनुसार, बार-बार टेस्ट कराने से ज्यादा जरूरी है: पर्याप्त और अच्छी नींद संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम तनाव कम करना साथ ही अपने शरीर के संकेतों को समझें-कब, क्यों और कितनी देर तक लक्षण रहते हैं। कब डॉक्टर से मिलें? अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बढ़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Indian adult checking blood report highlighting Vitamin B12 deficiency symptoms
Vitamin B12 Deficiency: उत्तर भारत के 47% लोग शिकार, लगातार थकान को न करें नजरअंदाज

Vitamin B12 Deficiency Symptoms: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, कमजोरी और फोकस की कमी आम हो गई है। लेकिन अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। Indian Journal of Endocrinology and Metabolism में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, उत्तर भारत के करीब 47% लोग विटामिन B12 की कमी से जूझ रहे हैं। इसे ‘साइलेंट’ समस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। क्यों जरूरी है Vitamin B12? विटामिन B12 शरीर के कई जरूरी कामों के लिए अहम है: रेड ब्लड सेल्स (RBC) बनाने में मदद नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखना खाने को ऊर्जा में बदलना दिमाग और याददाश्त को सपोर्ट करना इसकी कमी होने पर शरीर अंदर ही अंदर कमजोर होने लगता है। किन लोगों को ज्यादा खतरा? शाकाहारी (Vegetarians) बुजुर्ग लोग लंबे समय तक कुछ दवाएं लेने वाले जिनका शरीर B12 सही से अब्जॉर्ब नहीं कर पाता ICMR के अनुसार, शाकाहारियों में इसकी कमी ज्यादा देखी जाती है, क्योंकि B12 मुख्य रूप से एनिमल-बेस्ड फूड में पाया जाता है। B12 की कमी के शुरुआती और गंभीर लक्षण शुरुआती लक्षण: हमेशा थकान और कमजोरी ध्यान न लगना (Brain Fog) हल्की सांस फूलना गंभीर लक्षण: हाथ-पैरों में झुनझुनी याददाश्त कमजोर होना चलने-फिरने में बैलेंस बिगड़ना अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह न्यूरोलॉजिकल डैमेज तक पहुंच सकता है। किन चीजों में मिलता है Vitamin B12? नॉन-वेज सोर्स: अंडा मछली चिकन दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स वेज ऑप्शन: दूध, दही, पनीर फोर्टिफाइड सीरियल्स प्लांट-बेस्ड मिल्क ध्यान दें: सामान्य शाकाहारी खाने में B12 बहुत कम होता है। कैसे करें बचाव? संतुलित और पोषक आहार लें जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लें नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराते रहें लंबे समय तक थकान को नजरअंदाज न करें

surbhi मार्च 30, 2026 0
Pregnant woman receiving medical care in hospital highlighting maternal mortality concerns in India report
Lancet Report: हर 10 में से एक मातृ मृत्यु भारत में, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Lancet Maternal Death Report: दुनियाभर में गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण होने वाली मातृ मृत्यु को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। द लैंसेट में प्रकाशित ताज़ा स्टडी के मुताबिक, दुनिया की हर 10 में से एक मां की मौत भारत में होती है, जो एक गंभीर संकेत है। क्या कहती है रिपोर्ट? रिपोर्ट के अनुसार: 2023 में दुनिया भर में करीब 2.4 लाख महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी वजहों से हुई। इनमें से लगभग 24,700 मौतें भारत में दर्ज की गईं। यानी वैश्विक स्तर पर करीब 10% मातृ मृत्यु भारत से जुड़ी है। हालांकि, आंकड़ों का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। 1990 में भारत में मातृ मृत्यु: लगभग 1.19 लाख 2015 में घटकर: 36,900 2023 में और घटकर: 24,700 इसी तरह, मातृ मृत्यु दर (MMR) 1990 में 508 से घटकर 2023 में 116 प्रति 1 लाख जीवित जन्म हो गई है सुधार के बावजूद क्यों बनी हुई है चिंता? विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार अभी अधूरा है और देश में असमानता बड़ी समस्या है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण हैं मातृ मृत्यु के मुख्य कारण स्टडी के मुताबिक, ज्यादातर मौतें ऐसी वजहों से होती हैं जिन्हें रोका जा सकता है: प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एक्लेम्प्सिया जैसी स्थिति) संक्रमण (Infections) पहले से मौजूद बीमारियां इसके अलावा: समय पर इलाज न मिलना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में अंतर ग्रामीण-शहरी असमानता भी बड़ी वजहें हैं। कोविड-19 का भी पड़ा असर एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे हालात और बिगड़े। यही वजह है कि 2015 के बाद सुधार की रफ्तार धीमी पड़ गई। वैश्विक स्थिति भी चिंताजनक 2023 में वैश्विक मातृ मृत्यु दर: 190 प्रति 1 लाख जीवित जन्म जबकि संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य (SDGs): 70 प्रति 1 लाख यानी दुनिया अभी भी लक्ष्य से काफी दूर है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Lose weight by walking
डाइट और एक्सरसाइज़ छोड़ो, सिर्फ वॉक से तीन महीने में घटाएं 4-6 किलो वजन

नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना हर किसी की चाहत है, लेकिन स्ट्रिक्ट डाइट और जिम के लिए समय निकाल पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में रोज़ाना 10,000 कदम चलना एक आसान, सस्ता और प्रभावी तरीका साबित हो सकता है। यह न सिर्फ वजन कम करने में मदद करता है, बल्कि शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।   तीन महीने तक रोज़ 10,000 कदम चलने के फायदे अगर कोई व्यक्ति लगातार तीन महीने तक रोज़ाना 10,000 कदम चलता है, तो शरीर एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक सामान्य व्यक्ति इस दौरान लगभग 300 से 500 कैलोरी प्रति दिन खर्च कर सकता है। लगातार यह आदत बनाए रखने से शरीर में जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है। वजन कम करने के लिए यह तरीका बेहद आसान है और सिर्फ़ वॉक करने से तीन महीने में 4 से 6 किलो तक वजन घटाया जा सकता है।   डाइट का ध्यान रखें तो परिणाम और बेहतर होंगे हालांकि, सिर्फ़ वॉक करने से भी फायदा होता है, लेकिन अगर वॉक के दौरान बाहर का भारी खाना लिया जाए तो वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए हल्का और संतुलित भोजन करना फायदेमंद रहता है। इसके लिए किसी सख्त डाइट की आवश्यकता नहीं है, बस खाने की मात्रा और गुणवत्ता पर थोड़ा ध्यान देना ही काफी है।   सिर्फ वजन नहीं, ये फायदे भी मिलेंगे रोज़ाना 10,000 कदम चलने के अन्य कई हेल्थ फायदे भी हैं। यह दिल की सेहत को बेहतर बनाता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है और मानसिक तनाव को कम करता है। इसके अलावा, इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं, स्टैमिना बढ़ता है और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।   शुरुआत कैसे करें नए लोगों को सीधे 10,000 कदम से शुरुआत करने की बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। शुरुआत 5,000 से 6,000 कदम से करें और फिर धीरे-धीरे इसे 10,000 तक बढ़ाएं। सुबह और शाम के समय वॉक करके अपने दैनिक कदम पूरे किए जा सकते हैं।

Anjali Kumari मार्च 27, 2026 0
Malaria cases increase in summer
गर्मी में क्यों बढ़ते हैं मलेरिया के केस? जानिए वजह और बचाव के तरीके

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी का मौसम शुरू होते ही मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, जिनमें मलेरिया सबसे गंभीर माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, बढ़ते तापमान, नमी और जलभराव जैसी स्थितियां मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।   क्यों बढ़ते हैं गर्मियों में मच्छर? विशेषज्ञ बताते हैं कि मच्छरों की संख्या गर्मी में इसलिए बढ़ती है क्योंकि इस मौसम में पानी जल्दी जमा होता है और लंबे समय तक ठहरा रहता है। कूलर, गमले, टंकी, बाल्टी या निर्माण स्थलों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन जाता है। खासकर मादा Anopheles mosquito मच्छर मलेरिया फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है।   मलेरिया कैसे होता है? मलेरिया एक परजीवी संक्रमण है, जो Plasmodium parasite के कारण होता है। संक्रमित मच्छर के काटने से यह परजीवी शरीर में प्रवेश करता है और पहले लिवर, फिर खून की लाल कोशिकाओं को संक्रमित करता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर एनीमिया, अंगों की खराबी और जानलेवा स्थिति तक पहुंच सकता है।   क्या हैं इसके लक्षण? मलेरिया के लक्षण आमतौर पर 10-15 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं। इसमें तेज बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और उल्टी जैसी समस्याएं शामिल हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत और कन्फ्यूजन भी हो सकता है।   कैसे करें बचाव? मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के प्रजनन को रोकना और खुद को उनके काटने से बचाना है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर नियमित साफ करें और पानी की टंकी ढकी रखें। मच्छरदानी, रिपेलेंट क्रीम और पूरी बाजू के कपड़े पहनना भी मददगार होता है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में बुखार को हल्के में न लें। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर मलेरिया से काफी हद तक बचा जा सकता है।

Anjali Kumari मार्च 26, 2026 0
Coffee reduce stress
क्या कॉफी से कम होगा तनाव? जानें क्या कहती है नई रिसर्च?

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्ट्रेस और डिप्रेशन आम समस्याएं बन चुकी हैं। लोगों के मूड और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ता है। हाल ही में प्रकाशित एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि सीमित मात्रा में कॉफी पीना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।   रिसर्च क्या कहती है?   शोधकर्ताओं ने 4.6 लाख से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया, जिन्हें करीब 13 साल तक ट्रैक किया गया। नतीजों में पाया गया कि जो लोग रोजाना 2-3 कप कॉफी पीते हैं, उनमें डिप्रेशन और चिंता (एंग्जायटी) का खतरा सबसे कम था। इस अध्ययन में “J-शेप्ड” पैटर्न देखा गया, जिसका अर्थ है कि बहुत कम या बिल्कुल कॉफी न पीने से फायदा कम होता है, जबकि 2–3 कप पीने पर मानसिक स्वास्थ्य सबसे ज्यादा बेहतर रहता है। 3 कप से ज्यादा पीने पर फायदे कम हो जाते हैं और कभी-कभी स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है।   कॉफी कैसे काम करती है?   विशेषज्ञों के मुताबिक कॉफी में मौजूद कैफीन मस्तिष्क में मूड को नियंत्रित करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर को सक्रिय करता है। इसके अलावा, इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो दिमाग और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।   ज्यादा कॉफी पीने से नुकसान   अत्यधिक कॉफी पीने से नींद में कमी (इन्सॉम्निया), दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कॉफी का सेवन संतुलित मात्रा में ही किया जाए।   सही तरीका दिन में 2–3 कप तक सीमित रखें। रात में पीने से बचें। खाली पेट ज्यादा कॉफी न लें। संतुलन के साथ सही मात्रा में कॉफी का सेवन मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। नियमित जीवनशैली, पौष्टिक आहार और पर्याप्त नींद के साथ यह लाभ और अधिक प्रभावी हो सकता है।

Anjali Kumari मार्च 26, 2026 0
Person drinking water and healthy beverages to stay hydrated throughout the day
सुबह की कॉफी से लेकर देर रात तक—दिनभर हाइड्रेटेड रहने के आसान और असरदार तरीके

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग फिटनेस और डाइट पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सबसे जरूरी चीज़—पानी पीना—अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। सही हाइड्रेशन सिर्फ प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के हर महत्वपूर्ण कार्य—डाइजेशन, ब्रेन फंक्शन, स्किन हेल्थ और एनर्जी लेवल—को सीधे प्रभावित करता है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे आप सुबह की शुरुआत से लेकर रात तक छोटी-छोटी आदतों के जरिए खुद को पूरी तरह हाइड्रेटेड रख सकते हैं।   क्यों जरूरी है रोज़ हाइड्रेटेड रहना? पानी शरीर के लिए एक “नेचुरल फ्यूल” की तरह काम करता है। इसके नियमित सेवन से: शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनती है टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं दिमाग तेज़ और फोकस बेहतर होता है थकान और मांसपेशियों में ऐंठन से बचाव होता है पाचन बेहतर रहता है   कितना पानी पीना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, औसतन: पुरुष: लगभग 3.7 लीटर प्रतिदिन महिलाएं: लगभग 2.7 लीटर प्रतिदिन हालांकि, भारत जैसे गर्म देशों में या अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, तो यह मात्रा और बढ़ सकती है।   डिहाइड्रेशन के संकेत पहचानें अगर आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो समझिए शरीर को पानी की जरूरत है: मुंह सूखना और होंठ फटना थकान और चिड़चिड़ापन गहरे रंग का यूरिन सिरदर्द या चक्कर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई   सुबह की शुरुआत ऐसे करें रातभर बिना पानी के रहने के बाद शरीर को तुरंत हाइड्रेशन की जरूरत होती है। उठते ही 1–2 गिलास पानी पिएं नींबू पानी लें—यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है बेड के पास पानी रखें ताकि याद रहे   दिनभर हाइड्रेट रहने के स्मार्ट तरीके 1. सिर्फ पानी ही नहीं, ये ड्रिंक्स भी हैं फायदेमंद नारियल पानी नींबू पानी (निंबू पानी) छाछ हर्बल टी ORS (खासकर गर्मियों में) कैफीन और ज्यादा मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाएं।   2. खाने से भी बढ़ाएं हाइड्रेशन कुछ फल और सब्जियां पानी से भरपूर होती हैं: फल: तरबूज, संतरा, अंगूर, खरबूजा सब्जियां: खीरा, टमाटर, लौकी   3. वर्कआउट के दौरान ध्यान रखें एक्सरसाइज से पहले, दौरान और बाद में पानी पिएं इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करें केला, नारियल पानी अच्छे विकल्प हैं   4. ऑफिस में अपनाएं ये आसान टिप्स डेस्क पर पानी की बोतल रखें हर ब्रेक में पानी पिएं मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं बार-बार कॉफी की जगह पानी लें   गर्मी और सर्दी—दोनों में जरूरी है हाइड्रेशन गर्मियों में: थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पानी पिएं धूप से बचें हल्के कपड़े पहनें सर्दियों में: प्यास कम लगती है, फिर भी पानी पिएं सूप और हर्बल टी लें स्किन ड्रायनेस से बचाव होता है   स्किन और एनर्जी के लिए हाइड्रेशन अगर आपकी त्वचा डल लगती है या बार-बार थकान महसूस होती है, तो पानी की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। फायदे: स्किन में नेचुरल ग्लो ड्रायनेस कम एनर्जी लेवल बेहतर फाइन लाइन्स कम नजर आती हैं

kalpana मार्च 26, 2026 0
Man with belly fat measuring waist showing need for weight loss and healthy lifestyle
पुरुषों में जिद्दी पेट की चर्बी: कारण, खतरे और कम करने के असरदार तरीके

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पुरुषों के लिए पेट की जिद्दी चर्बी (Stubborn Belly Fat) एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुकी है। यह सिर्फ दिखने में ही खराब नहीं लगती, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से समझते हैं कि यह समस्या क्यों होती है, इसके क्या संकेत हैं, और इसे कम करने के लिए कौन-कौन से वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।   क्या हैं जिद्दी पेट की चर्बी के प्रमुख संकेत? पुरुषों में पेट की चर्बी अक्सर सामान्य डाइट या एक्सरसाइज से भी कम नहीं होती। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं: बाहर निकला हुआ पेट: लगातार डाइट और वर्कआउट के बावजूद पेट कम न होना कमर का बढ़ता घेरा: Waist size में लगातार वृद्धि विसरल फैट (Visceral Fat): यह आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है और सबसे खतरनाक माना जाता है BMI का बढ़ना: सामान्य स्तर (18.5–24.9) से अधिक होना पेट में भारीपन या असहजता मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लक्षण: हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन रेजिस्टेंस   किन कारणों से बढ़ती है पेट की चर्बी? विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं: खराब खानपान: जंक फूड, ज्यादा शुगर और ट्रांस फैट व्यायाम की कमी: बैठकर काम करने वाली जीवनशैली हार्मोनल बदलाव: उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन में कमी तनाव (Stress): ज्यादा कोर्टिसोल हार्मोन चर्बी बढ़ाता है जेनेटिक फैक्टर: कुछ लोगों में यह समस्या वंशानुगत होती है   स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है? पेट की चर्बी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इसके गंभीर खतरे हैं: दिल की बीमारियों का बढ़ा जोखिम स्ट्रोक की संभावना टाइप-2 डायबिटीज कुछ कैंसर (कोलन, पैंक्रियास आदि) स्लीप एपनिया जैसी समस्या   कैसे पाएं छुटकारा? अपनाएं ये असरदार उपाय 1. संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज हाई प्रोटीन और फाइबर वाली डाइट लें शुगर और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं कार्डियो (जॉगिंग, साइक्लिंग) और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का कॉम्बिनेशन अपनाएं 2. स्ट्रेस मैनेजमेंट योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग अपनाएं पर्याप्त नींद लें (7–8 घंटे) 3. मेडिकल ट्रीटमेंट (डॉक्टर की सलाह से) कुछ दवाएं जैसे Orlistat या Liraglutide मदद कर सकती हैं लेकिन इनका उपयोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें 4. सर्जरी (आखिरी विकल्प) लिपोसक्शन या टमी टक केवल गंभीर मामलों में और डॉक्टर की सलाह पर

kalpana मार्च 26, 2026 0
Common medicines like paracetamol and antibiotics becoming costlier in India
1 अप्रैल से महंगी होंगी 1000 से ज्यादा दवाएं, आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा असर

देशभर में 1 अप्रैल 2026 से जरूरी दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (NLEM) में शामिल 1000 से अधिक दवाओं के दाम बढ़ाने की अनुमति दे दी है। यह बढ़ोतरी औसतन करीब 0.6% होगी, जो Wholesale Price Index के आधार पर तय की गई है। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ दवाओं में वास्तविक बढ़ोतरी इससे अधिक भी महसूस हो सकती है। किन दवाओं पर पड़ेगा असर? इस फैसले का असर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी दवाओं पर पड़ेगा: पैरासिटामोल (बुखार और दर्द के लिए) एजिथ्रोमाइसिन (बैक्टीरियल संक्रमण) सिप्रोफ्लॉक्सासिन एनीमिया, विटामिन और मिनरल्स की दवाएं स्टेरॉयड्स और कुछ कोविड-19 से जुड़ी दवाएं ये सभी दवाएं आम जनता के दैनिक इलाज का हिस्सा हैं, इसलिए इसका असर व्यापक होगा। कीमतें क्यों बढ़ाई गईं? दवा कंपनियों के अनुसार, उत्पादन लागत में तेज वृद्धि इसका मुख्य कारण है: एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट (API) की कीमतों में 30-35% तक उछाल ग्लिसरीन की कीमत में 60% से ज्यादा वृद्धि पैकेजिंग सामग्री जैसे PVC और एल्युमिनियम फॉयल महंगे वैश्विक तनाव (खासतौर पर मध्य-पूर्व संकट) से सप्लाई चेन प्रभावित इन बढ़ती लागतों के कारण कंपनियों के लिए पुराने दामों पर दवाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा था। आम लोगों पर क्या होगा असर? हालांकि आधिकारिक बढ़ोतरी सिर्फ 0.6% है, लेकिन बड़ी संख्या में दवाएं प्रभावित होने के कारण कुल खर्च बढ़ सकता है। मध्यम और गरीब वर्ग पर ज्यादा असर नियमित दवा लेने वाले मरीजों की लागत बढ़ेगी लंबे इलाज वाले मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जरूरी है। क्या करें उपभोक्ता? विशेषज्ञों की सलाह: डॉक्टर की सलाह से ही दवाएं लें अनावश्यक स्टॉक न करें जेनेरिक दवाओं का विकल्प अपनाएं, जो सस्ती हो सकती हैं

kalpana मार्च 26, 2026 0
Protein Rich Foods for Navratri
नवरात्रि 2026: व्रत में ताकत और ऊर्जा बनाए रखने के लिए खाएं ये प्रोटीन रिच फूड्स

नई दिल्ली, एजेंसियां। नवरात्रि का पर्व भक्ति और व्रत का समय होता है, लेकिन लंबे व्रत और सीमित खाने के विकल्पों के कारण शरीर में प्रोटीन और ऊर्जा की कमी हो सकती है। व्रत के दौरान सही पोषण लेना इसलिए बेहद जरूरी है, ताकि थकान न हो और शरीर स्वस्थ रहे। इस दौरान व्रत फ्रेंडली और प्रोटीन रिच फूड्स का सेवन करना सबसे बेहतर तरीका है।   व्रत फ्रेंडली प्रोटीन स्रोत 1. साबूदाना – यह ऊर्जा और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। साबूदाने से बनी खिचड़ी, खीर या तली हुई साबूदाना आपकी व्रत ऊर्जा बनाए रखती हैं।  2. कुट्टू का आटा – आसानी से पचने वाला प्रोटीन प्रदान करता है। कुट्टू की रोटियां और पुड़ियां व्रत में शरीर को ताकत देती हैं।  3. मूंगफली – प्रोटीन और हेल्दी फैट्स से भरपूर, मूंगफली का सेवन व्रत के दौरान भूख और थकान को कम करता है।  4. सोया चंक्स – हाई प्रोटीन वेजिटेरियन विकल्प, जिसे व्रत में सब्जियों के साथ तैयार किया जा सकता है।  5. मखाना – प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत। हल्का भुना मखाना व्रत के दौरान स्नैक के रूप में उपयोगी है।  6. तिल – प्रोटीन और मिनरल्स से भरपूर। तिल के लड्डू या तिल मिल्क शेक से पोषण मिलता है।  7. दही – प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स से भरपूर, दही पचने में आसान है और पेट को स्वस्थ रखता है।    व्रत के दौरान स्वास्थ्य टिप्स   खाने में विविधता रखें और हर दिन अलग प्रोटीन स्रोत लें।  साबूदाना और कुट्टू से बने पकवान आसानी से ऊर्जा प्रदान करते हैं।  पर्याप्त पानी और नारियल पानी का सेवन जरूरी है।  हल्का और पौष्टिक भोजन शरीर को थकान से बचाता है और व्रत को सुखद बनाता है।  विशेष रूप से ध्यान दें कि बाजार में मिलावट वाली सामग्री से परहेज करें। पिछली नवरात्रियों में कुछ लोगों की तबीयत खराब होने की घटनाएं हुई थीं, जैसे कि कुट्टू के आटे की पुड़ियों के कारण। इसलिए हमेशा ताजगी और गुणवत्ता सुनिश्चित करें। व्रत के दौरान प्रोटीन रिच फूड्स का सेवन न केवल ऊर्जा बढ़ाता है, बल्कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। इससे व्रत सफल और स्वास्थ्यपूर्ण अनुभव बनता है।

Juli Gupta मार्च 25, 2026 0
smiling men hiding emotional pain behind humor, reflecting inner struggle and mental health reality
जब दर्द बन जाता है मज़ाक: पुरुषों की हंसी के पीछे छुपी सच्चाई पर एक भावनात्मक नजर

आज की तेज़ रफ्तार और सामाजिक अपेक्षाओं से भरी दुनिया में पुरुषों की भावनाओं को लेकर एक गहरी और अक्सर अनदेखी सच्चाई सामने आती है-वे अपने दर्द को शब्दों में नहीं, बल्कि मज़ाक में बयां करते हैं। “फनी guy” यानी वह व्यक्ति जो हर माहौल को हल्का बना देता है, अक्सर खुद के भीतर भारी भावनाएं छिपाए रहता है। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक सामाजिक पैटर्न की है। हंसी के पीछे छुपी रणनीति बचपन से ही लड़कों को यह सिखाया जाता है कि वे अपनी भावनाओं को सीमित तरीके से व्यक्त करें। गुस्सा स्वीकार्य है, सफलता सराही जाती है, लेकिन दुख, डर या असुरक्षा-इन भावनाओं को अक्सर दबा दिया जाता है। ऐसे में हास्य एक माध्यम बन जाता है-एक ऐसा तरीका जिससे सच्चाई भी कही जाए और माहौल भी भारी न हो। धीरे-धीरे यह आदत नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया बन जाती है। दर्द से पंचलाइन तक का सफर जब कोई पुरुष अपने सबसे कठिन अनुभवों को भी मज़ाक में बदल देता है, तो यह सिर्फ टैलेंट नहीं बल्कि एक सीखी हुई प्रक्रिया होती है। ब्रेकअप की कहानी हो या नौकरी खोने का दर्द-ये सब अक्सर एक मजेदार किस्से में बदल जाते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें समाज में “आसान” और “पसंद आने वाला” बनाती है। लोग उनके आसपास रहना पसंद करते हैं, क्योंकि वे माहौल को हल्का रखते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में वे अपनी असली भावनाओं को धीरे-धीरे पीछे छोड़ देते हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर असर मनोविज्ञान के अनुसार, हास्य एक परिपक्व coping mechanism है, जो तनाव को कम करने और भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। लेकिन जब यही एकमात्र माध्यम बन जाए, तो यह भावनाओं को समझने और स्वीकार करने की प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुष अक्सर हास्य का इस्तेमाल “emotional deflection” यानी भावनाओं से बचने के लिए करते हैं, क्योंकि उन्हें खुलकर महसूस करने और व्यक्त करने का अवसर कम मिलता है। क्या यह कमजोरी है? बिल्कुल नहीं। किसी भी कठिन स्थिति को हंसी में बदल देना एक तरह की भावनात्मक और सामाजिक बुद्धिमत्ता है। यह क्षमता हर किसी में नहीं होती। लेकिन सवाल यह है-क्या हमेशा ऐसा करना जरूरी है? जरूरी है संतुलन हर पल को मजाक में बदलना जरूरी नहीं। कभी-कभी चुप रहना, या यह कहना कि “आज अच्छा नहीं लग रहा”-भी उतना ही जरूरी है। असल में, जो लोग सच में आपके अपने हैं, वे आपकी खामोशी को भी समझेंगे। आपको हर बार “फनी guy” बनने की जरूरत नहीं है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Patient checking blood sugar with memory loss concept highlighting dementia risk
टाइप 1 डायबिटीज से डिमेंशिया का खतरा तीन गुना तक बढ़ा: नई स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे

नई रिसर्च में सामने आया है कि Type 1 Diabetes से पीड़ित बुजुर्गों में Dementia विकसित होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक हो सकता है। साल 2026 की All of Us Cohort Study ने डायबिटीज और डिमेंशिया के बीच गहरे संबंध की ओर संकेत किया है। क्या कहती है रिसर्च शोधकर्ताओं ने All of Us Cohort Study के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लगभग 2.84 लाख लोगों को शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 65 वर्ष थी और इन्हें औसतन 2.5 साल तक फॉलो किया गया। इस दौरान 2,300 से अधिक लोगों में डिमेंशिया के मामले सामने आए। इनमें से करीब 5,500 लोग टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित थे। तीन गुना तक बढ़ा जोखिम विश्लेषण में पाया गया कि टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक था। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ऐसे मरीजों में डिमेंशिया के करीब 64.5% मामलों के पीछे डायबिटीज एक प्रमुख कारण हो सकता है। वहीं Type 2 Diabetes से पीड़ित लोगों में भी खतरा कम नहीं है-इनमें डिमेंशिया का जोखिम दो गुना से अधिक पाया गया। क्यों बढ़ रहा है खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। यही प्रक्रिया दिमाग पर भी असर डाल सकती है, जिससे याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि टाइप 1 डायबिटीज के मरीज हेल्थकेयर सिस्टम के संपर्क में ज्यादा रहते हैं, जिससे उनमें डिमेंशिया का जल्दी पता चलने की संभावना भी अधिक हो सकती है। क्या है इसका मतलब इस स्टडी से यह स्पष्ट होता है कि डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिमागी स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस संबंध को और गहराई से समझने और समय रहते रोकथाम के उपाय करने की जरूरत है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Yoga for double chin
डबल चिन हटाने के लिए जरूर आजमाएं ये 5 असरदार योगासन

नई दिल्ली, एजेंसियां।  डबल चिन अब केवल मोटापे की निशानी नहीं रही। मोबाइल पर झुकी गर्दन, घंटों बैठकर काम करना और कम शारीरिक गतिविधि मिलकर चेहरे के नीचे फैट जमा कर देते हैं और स्किन ढीली बना देते हैं। क्रीम, बेल्ट या महंगे ट्रीटमेंट अस्थायी असर दिखा सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान योग और एक्सरसाइज से ही संभव है।   डबल चिन के मुख्य कारण • गर्दन की मांसपेशियों की कमजोरी • गलत पोस्चर और मोबाइल नेक • बढ़ता वजन • उम्र के साथ स्किन का ढीलापन • कम पानी पीना • डबल चिन कम करने वाले असरदार योगासन   सिंहासन:  जीभ बाहर निकालकर गहरी सांस लें और 10-15 सेकंड रोकें। लाभ: गर्दन और जबड़े की मांसपेशियां टाइट होती हैं।   जालंधर बंध:  ठोड़ी को छाती की ओर झुकाएं और सांस रोककर रखें। लाभ: गर्दन की चर्बी घटाने में मदद।   भुजंगासन:  पेट के बल लेटकर छाती ऊपर उठाएं। लाभ: गर्दन और चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है।   काउ फेस एक्सरसाइज:  होंठ आगे निकालकर ऊपर की ओर देखें और 10 सेकंड तक पकड़ें। लाभ: डबल चिन पर सीधा असर।   ओम जप:  “ओम” का लंबा उच्चारण करें। लाभ: चेहरे की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं।   योग का असर और नियमित अभ्यास   यदि रोजाना 10–15 मिनट इन योगासन का अभ्यास किया जाए और सही पोस्चर अपनाया जाए, तो 3–4 हफ्तों में डबल चिन में फर्क दिखाई देने लगता है। योग के नियमित अभ्यास से न केवल डबल चिन कम होता है, बल्कि चेहरे और गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर फिट और एनर्जेटिक रहता है। बिना खर्च और साइड इफेक्ट के, ये योगासन घर पर आसानी से किए जा सकते हैं।

Anjali Kumari मार्च 24, 2026 0
Natural sherbet recipe
चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए  घर पर बनाएं ये नेचुरल शरबत

नई दिल्ली, एजेंसियां।  चिलचिलाती गर्मियों में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं होता, शरीर को अंदर से ठंडा रखने और हाइड्रेटेड रहने के लिए नेचुरल और ट्रेडिशनल शरबत का सेवन फायदेमंद है। भारतीय घरों में गर्मियों में सौंफ, खस, बेल और गुलाब जैसी चीजों से शरबत तैयार किया जाता है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ ही न्यूट्रिएंट्स और इलेक्ट्रोलाइट्स भी प्रदान करते हैं।   गर्मी में मददगार शरबत   बेल का शरबत: बेल का शरबत लू से बचाव करता है, पाचन में सुधार लाता है और त्वचा को हेल्दी बनाता है। पके हुए बेल का गूदा मैश करके पानी, आइसक्यूब्स, गुड़ या चीनी, काला नमक, काली मिर्च और भुना जीरा पाउडर डालकर तैयार किया जाता है। सत्तू का शरबत: सत्तू प्रोटीन और मिनरल्स से भरपूर होता है। गिलास में सत्तू, पानी, आइसक्यूब्स डालकर अच्छे से घोलें, फिर कटा प्याज, हरी मिर्च, नींबू का रस और मसाले मिलाएं। यह शरबत तुरंत एनर्जी देता है और पाचन में मदद करता है। गुलाब का शरबत: गुलाब का शरबत तुरंत रिलैक्स फील करवाता है। इसके लिए गुलाब की पंखुड़ियों को पानी में उबालकर छान लें, फिर चीनी, नींबू और रोज़ एसेंस डालकर शरबत तैयार करें। खस का शरबत: खस की जड़ों को धोकर पानी में उबालें, उसमें चीनी और शुगर की चाशनी तैयार करें। यह शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और गर्मियों में एनर्जी देता है। सौंफ का शरबत: सौंफ को रात भर पानी में भिगोकर रखें, अगले दिन पीसकर मिश्री और पानी/दूध के साथ शरबत तैयार करें। यह पेट को ठंडा रखता है और डाइजेशन में मदद करता है।   शरबत पीने का महत्व   इन पारंपरिक शरबत को पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है, गर्मी में ठंडक मिलती है और पाचन और एनर्जी स्तर भी बेहतर रहते हैं। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स के बजाय इन नेचुरल शरबत को अपनाना स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी है। इस तरह सौंफ, खस, बेल और गुलाब जैसे शरबत गर्मियों में तुरंत राहत देने और शरीर को ठंडा रखने का आसान और स्वादिष्ट तरीका हैं।

Anjali Kumari मार्च 24, 2026 0
Fennel coriander water
Fennel coriander water: सौंफ और धनिया का पानी: जानें कौन सी बीमारियों में है सबसे ज्यादा असरदार ?

नई दिल्ली, एजेंसियां। सौंफ और धनिया का पानी आजकल हेल्दी रहने वालों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यह पानी न केवल पाचन सुधारने में मदद करता है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने, वजन नियंत्रित रखने और हृदय स्वास्थ्य बेहतर बनाने में भी असरदार है। सौंफ और धनिया में मौजूद पोषक तत्व छोटी-बड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक हैं।   सौंफ और धनिया के पानी के फायदे   बेहतर पाचन: यह मिश्रण पेट की जलन, सूजन, भारीपन और कब्ज जैसी परेशानियों को कम करता है, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। डिटॉक्स और वजन कम करना: सौंफ और धनिया का पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, ब्लोटिंग कम करता है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर वजन कम करने में मदद करता है। शरीर के तापमान को संतुलित रखना: दोनों ही ठंडे तासीर के होते हैं, जो गर्मियों में शरीर का तापमान संतुलित रखते हैं और पेट को ठंडा रखते हैं। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण: यह पानी खराब कोलेस्ट्रॉल कम और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट नसों में जमा वसा को कम कर हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं।इम्यूनिटी बूस्टर: एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचाव में सहायक हैं।   सेवन का सही तरीका   रात में एक गिलास पानी में 1-1 छोटी चम्मच साबुत धनिया और सौंफ को भिगोकर रखें। सुबह इसे 5-10 मिनट तक उबालें, छानकर खाली पेट पिएं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे नियमित रूप से सेवन करने से शरीर फिट, हल्का और एनर्जेटिक रहता है। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या या फिटनेस प्लान के लिए इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।इस प्रकार, सौंफ और धनिया का पानी एक सरल, घरेलू और असरदार उपाय है, जो पाचन, वजन, हृदय स्वास्थ्य और इम्यूनिटी सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है।

Anjali Kumari मार्च 24, 2026 0
Pulses for muscle growth
डाइट में शामिल करें ये दालें, मसल्स होंगे मजबूत और शरीर रहेगा एनर्जेटिक

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रोटीन शरीर को मजबूत बनाने, मसल्स को सही तरीके से काम करने और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। रोज़ाना खाने में इस्तेमाल होने वाली दालें प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होती हैं, लेकिन कुछ दालें दूसरों की तुलना में अधिक प्रोटीन से भरपूर होती हैं।   प्रोटीन से भरपूर प्रमुख दालें   कुल्थी दाल:  कुल्थी दाल में 100 ग्राम सूखी दाल पर लगभग 22-24 ग्राम प्रोटीन होता है। यह दाल फाइबर, आयरन और कैल्शियम से भी भरपूर होती है, जो वजन घटाने और किडनी की पथरी जैसी समस्याओं के लिए फायदेमंद मानी जाती है।   उड़द दाल:  उड़द दाल प्रोटीन का सबसे समृद्ध स्रोत है। इसमें लगभग 25 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम पाया जाता है। यह मसल्स को मजबूत बनाने और शरीर को ताकत देने में मदद करती है।   मसूर और मूंग दाल:  मसूर और मूंग दाल भी प्रोटीन से भरपूर होती हैं। हल्की और आसानी से पचने वाली इन दालों को रोज़ाना की डाइट में शामिल करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।   अरहर दाल:  अरहर दाल में लगभग 20-25% प्रोटीन होता है। इसके अलावा यह फाइबर, आयरन, फोलेट और मैग्नीशियम से भरपूर होती है। नियमित सेवन से पाचन बेहतर होता है, ऊर्जा मिलती है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है।   दाल का सेवन और स्वास्थ्य लाभ विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना कम से कम एक कटोरी दाल का सेवन करना चाहिए। अलग-अलग दालों को मिलाकर मिक्स दाल बनाना या दाल को अंकुरित रूप में खाना प्रोटीन की गुणवत्ता और पाचन क्षमता दोनों बढ़ाता है।दालों को अपनी डाइट में नियमित शामिल करने से शरीर फिट, स्ट्रॉन्ग और एनर्जेटिक रहता है। सही दाल का चुनाव और संतुलित मात्रा में सेवन लंबे समय तक स्वस्थ जीवन की कुंजी है। इस प्रकार, कुल्थी, उड़द, मसूर, मूंग और अरहर दालें प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत हैं, जो आपकी डाइट को मजबूत और संतुलित बनाती हैं।

Anjali Kumari मार्च 24, 2026 0
Black salt (Kala Namak) with spoon and health benefits highlighted for digestion and heart
सेहत का खजाना है काला नमक! पाचन से दिल तक, जानिए इसके जबरदस्त फायदे और सही इस्तेमाल का तरीका

स्वस्थ शरीर के लिए सही खानपान जरूरी हम जो खाते-पीते हैं, वही हमारे शरीर की सेहत तय करता है। संतुलित आहार (Balanced Diet) ही शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी डाइट में सही चीजों को शामिल करें और उनकी मात्रा का भी ध्यान रखें। इन्हीं में एक खास चीज है काला नमक, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी देता है। 1. एसिडिटी और पेट फूलने से राहत काला नमक लीवर में पित्त (Bile) के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या कम होती है। यह पेट में एसिड के स्तर को संतुलित रखता है और रिफ्लक्स की समस्या को भी नियंत्रित करता है। 2. पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत अगर आपको खाना पचाने में दिक्कत होती है, तो काला नमक फायदेमंद साबित हो सकता है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर को जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। 3. दिल की सेहत के लिए लाभकारी काला नमक शरीर में जमा खराब तत्वों (टॉक्सिन) को कम करने में मदद करता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहायक है प्राकृतिक “ब्लड थिनर” के रूप में काम करता है  विशेषज्ञों के अनुसार: रोजाना 6 ग्राम से ज्यादा काला नमक नहीं लेना चाहिए हाई बीपी वाले लोग 3.75 ग्राम तक ही सीमित रखें 4. डायबिटीज में मददगार काला नमक ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। इसकी थोड़ी मात्रा हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करने में मदद करती है, जिससे डायबिटीज मरीजों को फायदा मिल सकता है। 5. मांसपेशियों के लिए फायदेमंद काला नमक में पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। मसल्स क्रैम्प (ऐंठन) से राहत मिलती है शरीर की ताकत और संतुलन बना रहता है   काला नमक के नुकसान भी जान लें जहां काला नमक फायदेमंद है, वहीं इसका अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। इसमें फ्लोराइड और कुछ अन्य तत्व होते हैं, जो ज्यादा मात्रा में लेने पर शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संभावित दुष्प्रभाव: किडनी स्टोन का खतरा थायरॉइड की समस्या दांत और मुंह से जुड़ी परेशानियां

surbhi मार्च 23, 2026 0
Ram Kapoor smiling and showing fitness transformation after losing 55 kg naturally
50 की उम्र में कमाल! Ram Kapoor ने घटाया 55 किलो वजन, बिना सर्जरी बदली जिंदगी

50 की उम्र बनी टर्निंग पॉइंट टीवी और फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित अभिनेता Ram Kapoor इन दिनों अपनी जबरदस्त फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने महज 18 महीनों में 55 किलो वजन घटाकर सभी को हैरान कर दिया। खास बात यह है कि उन्होंने यह बदलाव बिना किसी सर्जरी या सप्लीमेंट के हासिल किया। अभिनेता के अनुसार, 50 साल की उम्र उनके लिए एक चेतावनी साबित हुई। उस समय उनका वजन करीब 140 किलो था और वे स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं से जूझ रहे थे। शूटिंग के दौरान बढ़ा वजन, बिगड़ी सेहत Ram Kapoor ने बताया कि वे अपने करियर के दौरान फिल्मों Neeyat और Jubilee की शूटिंग के वक्त सबसे ज्यादा वजन में थे। उस दौरान उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती थी और सामान्य चलना भी मुश्किल हो गया था। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें डायबिटीज थी, पैर में चोट थी और शारीरिक गतिविधियां करना बेहद कठिन हो गया था। यही वह समय था जब उन्होंने अपने जीवन को बदलने का फैसला लिया। परिवार के लिए लिया बड़ा फैसला अभिनेता ने कहा कि उनके दो बच्चे हैं और वे उनके लिए एक बेहतर उदाहरण बनना चाहते थे। यही सोच उनके बदलाव की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी और धीरे-धीरे अपने लाइफस्टाइल को पूरी तरह बदल दिया। बिना सर्जरी अपनाया ‘ओल्ड-स्कूल’ तरीका जहां कई लोग वजन घटाने के लिए सर्जरी या सप्लीमेंट का सहारा लेते हैं, वहीं Ram Kapoor ने पारंपरिक तरीके को चुना। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से मानसिक और शारीरिक बदलाव का नतीजा है। उनका फोकस इन चीजों पर रहा: संतुलित डाइट नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद शरीर को हाइड्रेट रखना फास्टिंग इंटरवल्स का पालन पहले भी घटाया वजन, लेकिन इस बार सोच बदली अभिनेता ने स्वीकार किया कि वे पहले भी दो बार 30 किलो तक वजन घटा चुके थे, लेकिन बाद में फिर बढ़ गया। इस बार उन्होंने जल्दी परिणाम पाने के बजाय स्थायी बदलाव पर ध्यान दिया। उनका मानना है कि फिटनेस सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली है, जिसमें निरंतर सुधार जरूरी है। मानसिक बदलाव ने दिलाई असली जीत Ram Kapoor ने अपनी मानसिक स्थिति पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वे खुद से निराश और असंतुष्ट हो गए थे, और यही स्थिति उनके लिए बदलाव की शुरुआत बनी। उन्होंने यह भी कहा कि जब इंसान अपने जीवन के सबसे निचले स्तर पर होता है, तभी असली बदलाव की संभावना पैदा होती है। अब 25 साल जैसा महसूस करते हैं आज अभिनेता खुद को पहले से ज्यादा फिट, ऊर्जावान और खुश महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि अब वे बिना रुके 12 घंटे तक चल सकते हैं, जो पहले उनके लिए असंभव था।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Down syndrome symptoms
क्या आपका बच्चा है डाउन सिंड्रोम से प्रभावित? इन लक्षणों से करें पहचान

नई दिल्ली, एजेंसियां। हर साल 21 मार्च को विश्वभर में वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस जेनेटिक स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। डाउन सिंड्रोम एक ऐसी अवस्था है, जो आमतौर पर तब होती है जब 21वें क्रोमोसोम की दो के बजाय तीन कॉपी होती हैं (ट्राइसॉमी 21)। इसका असर बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है।   चेहरे और शारीरिक बनावट से संकेत डाउन सिंड्रोम के कुछ शुरुआती लक्षण बच्चे की बनावट से पहचाने जा सकते हैं। जैसे चपटा चेहरा, छोटी नाक, बादाम के आकार की आंखें और आंखों का ऊपर की ओर झुकाव। इसके अलावा छोटी गर्दन, ढीली मांसपेशियां और हाथ-पैर का आकार छोटा होना भी इसके संकेत हो सकते हैं। कई मामलों में हथेली पर एक ही गहरी रेखा भी देखी जाती है।   विकास में देरी भी अहम संकेत इस सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों में विकास की गति सामान्य बच्चों की तुलना में धीमी हो सकती है। बैठने, चलने और बोलने में देरी होना आम बात है। इसके अलावा सीखने में कठिनाई और बौद्धिक विकास का धीमा होना भी प्रमुख लक्षणों में शामिल है। कुछ बच्चों में जन्मजात हृदय संबंधी समस्याएं भी देखी जा सकती हैं।   जांच और पहचान कैसे करें डॉक्टर जन्म के समय ही शारीरिक लक्षणों के आधार पर शक कर सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान एनटी स्कैन और डबल मार्कर टेस्ट जैसे स्क्रीनिंग टेस्ट से जोखिम का पता लगाया जा सकता है। पुष्टि के लिए कैरियोटाइपिंग टेस्ट किया जाता है, जिससे अतिरिक्त क्रोमोसोम की मौजूदगी का पता चलता है।   समय पर देखभाल है जरूरी हालांकि डाउन सिंड्रोम का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन सही समय पर पहचान और थेरेपी से बच्चे के जीवन में बड़ा सुधार लाया जा सकता है। स्पीच थेरेपी, फिजियोथेरेपी और विशेष शिक्षा के जरिए ऐसे बच्चे भी बेहतर और आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं।

Anjali Kumari मार्च 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0

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