राष्ट्रीय

Modi Meets Lavrov at BRICS Summit

BRICS सम्मेलन में पीएम मोदी की रूसी विदेश मंत्री लाव्रोव से खास मुलाकात, अराघची से मिले अजीत डोभाल

surbhi मई 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meeting Russian Foreign Minister Sergey Lavrov during BRICS Summit in New Delhi
PM Modi Meets Lavrov at BRICS Summit

भारत की अध्यक्षता में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत नई दिल्ली में हो चुकी है। सम्मेलन के तहत ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों की उच्चस्तरीय बैठक जारी है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री S. Jaishankar कर रहे हैं। इस दौरान ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से संयुक्त रूप से मुलाकात की।

पीएम मोदी और लाव्रोव की विशेष मुलाकात

सम्मेलन के दौरान रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov को प्रधानमंत्री मोदी से अलग से विशेष मुलाकात का अवसर मिला। जानकारी के मुताबिक, लावरोव एकमात्र ऐसे मंत्री थे जिनसे पीएम मोदी ने निजी तौर पर बातचीत की।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए अपना अभिवादन भी भेजा।

ईरानी विदेश मंत्री से मिले NSA डोभाल

वहीं दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग से मुलाकात की।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।

‘ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा BRICS’

बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।

उन्होंने कहा, “भारत की अध्यक्षता में हम बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।”

वैश्विक तनाव के बीच अहम बैठक

नई दिल्ली में हो रही यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में BRICS मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Suvendu Adhikari
अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत, 1.10 करोड़ महिलाओं के खातों में पहुंचे 3,000 रुपये

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत कर दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की 1 करोड़ 10 लाख पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3,000-3,000 रुपये की पहली किस्त डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।   1.60 करोड़ आवेदन आए, 27 लाख आवेदन किए गए खारिज मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्नपूर्णा भंडार योजना के लिए कुल 1.60 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से गहन जांच के बाद 27 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों में नागरिकता या स्थायी निवास को लेकर संदेह था, उन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा गया। शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भारत और पश्चिम बंगाल के करदाताओं के पैसे केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए हैं और इन्हें गैर-भारतीयों को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता और पात्रता का पूरा ध्यान रखा गया है।   लक्ष्मी भंडार योजना की जगह लेगी नई योजना अन्नपूर्णा भंडार योजना ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना का स्थान लिया है। पहले लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को 1,700 रुपये की सहायता मिलती थी। नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे उन्हें घरेलू खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में अधिक मदद मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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A symbolic image of a liver transplant surgery, showing doctors in an operating room as a Delhi High Court ruling allows a 17-year-old boy to donate part of his liver to save his critically ill father.
दिल्ली हाई कोर्ट का मानवीय फैसला: 17 वर्षीय बेटे को पिता की जान बचाने के लिए लिवर दान की अनुमति

  नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक फैसले में 17 वर्षीय नाबालिग को अपने गंभीर रूप से बीमार पिता को लिवर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने Institute of Liver and Biliary Sciences (ILBS) को निर्देश दिया है कि सभी कानूनी, नैतिक और चिकित्सकीय मानकों का पालन करते हुए जल्द से जल्द लिवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की जाए। क्या है मामला? यह मामला एक 17 वर्षीय किशोर की ओर से उसकी मां के माध्यम से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में Human Organ and Tissue Transplantation Act, 1994 के तहत अपने पिता उत्तम कुमार शॉ को लिवर का हिस्सा दान करने की अनुमति मांगी गई थी। पिता लंबे समय से क्रॉनिक लिवर डिजीज से पीड़ित हैं और उनकी स्थिति गंभीर बताई गई है। कोर्ट ने किन आधारों पर दी अनुमति? मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मरीज लिवर सिरोसिस और हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार उनकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प लिवर प्रत्यारोपण है। परिवार के अन्य सदस्यों की मेडिकल जांच के बाद केवल नाबालिग बेटा ही लिवर दान के लिए उपयुक्त पाया गया। नाबालिग का फैसला स्वेच्छा से अदालत ने अपने आदेश में कहा कि करीब साढ़े 17 वर्ष का यह किशोर पूरी तरह स्वस्थ है और उसने बिना किसी दबाव, लालच या बाहरी प्रभाव के केवल अपने पिता की जान बचाने की भावना से अंगदान का निर्णय लिया है। एलजी की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि 29 जून 2026 को सक्षम प्राधिकारी और दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से नाबालिग को अपने पिता को लिवर दान करने की प्रशासनिक अनुमति पहले ही दी जा चुकी थी। अस्पताल को जल्द सर्जरी करने का निर्देश अदालत ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यदि समय रहते अनुमति नहीं दी गई तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसलिए मानवीय आधार पर यह अनुमति देना आवश्यक है। ILBS ने अदालत को आश्वस्त किया कि आदेश मिलते ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और जल्द ही सर्जरी की तारीख तय की जाएगी। क्या कहता है कानून? भारत में सामान्य परिस्थितियों में नाबालिगों द्वारा अंगदान की अनुमति नहीं होती। हालांकि, मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण नियम, 2014 के तहत अत्यंत असाधारण और जीवनरक्षक परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से नाबालिग द्वारा अंगदान की अनुमति दी जा सकती है। अनुच्छेद 226 क्या है? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 देश के उच्च न्यायालयों को यह अधिकार देता है कि वे नागरिकों के मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश या रिट जारी कर सकें। इसी संवैधानिक शक्ति का उपयोग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में मानवीय आधार पर हस्तक्षेप किया।  

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मुंबई में मानसून का कहर: मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, लोकल ट्रेनें प्रभावित

मुंबई,एजेंसियां। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बुधवार को हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़क यातायात बाधित रहा और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंधेरी सबवे में करीब पांच फीट पानी भर जाने के कारण प्रशासन को एहतियातन इसे यातायात के लिए बंद करना पड़ा।   लोकल ट्रेन सेवा पर पड़ा असर भारी बारिश का असर मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पर भी देखने को मिला। वेस्टर्न, सेंट्रल और हार्बर लाइन की कई ट्रेनें देरी से चलीं। हार्बर लाइन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) वायर में तकनीकी खराबी आने से कई लोकल ट्रेनें बीच रास्ते में ही रुक गईं। सुबह के व्यस्त समय में आई इस समस्या से हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू किया, जिसके बाद धीरे-धीरे सेवाएं सामान्य करने का प्रयास किया गया।   बालकनी गिरने से व्यक्ति की मौत दक्षिण मुंबई के बाबुलनाथ रोड स्थित MHADA की 'सूर्यप्रकाश' इमारत में मंगलवार देर रात तीसरी मंजिल की बालकनी का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे में 51 वर्षीय संतोष रामचंद्र भारस्कर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची तथा सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए गए।   कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले चार से पांच दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। वहीं, रेलवे, नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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