पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति में एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी Leander Paes ने औपचारिक रूप से Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थाम लिया है। उनकी एंट्री ऐसे समय पर हुई है जब राज्य में चुनावी माहौल तेजी से गरमा रहा है और सभी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर रणनीति को धार दे रही हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ औपचारिक स्वागत Leander Paes को पार्टी में शामिल करने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और भाजपा नेता Sukanta Majumdar मौजूद रहे। Kiren Rijiju ने पेस की उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहचान दिलाई और अब वे राजनीति के जरिए देश की सेवा करेंगे। “अब देश और युवाओं की सेवा का समय” BJP में शामिल होने के बाद Leander Paes ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने पिछले 40 वर्षों में खेल के जरिए देश का प्रतिनिधित्व किया है और अब वे युवाओं और देश की सेवा के लिए राजनीति में कदम रख रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और पार्टी नेतृत्व का आभार भी जताया। खेल से राजनीति तक का सफर Leander Paes भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक रहे हैं: 1996 बार्सिलोना ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल डेविस कप और ग्रैंड स्लैम में शानदार प्रदर्शन विंबलडन समेत कई अंतरराष्ट्रीय खिताब उनकी लोकप्रियता और पहचान को देखते हुए BJP को उम्मीद है कि यह कदम खासकर युवाओं और शहरी वोटर्स के बीच असर डाल सकता है। चुनावी समीकरण पर क्या असर? Leander Paes की एंट्री को BJP के लिए एक “स्टार पावर” रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे पार्टी की छवि को मजबूती मिल सकती है युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बन सकता है हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी लोकप्रियता वोट में कितनी तब्दील होती है। निष्कर्ष पश्चिम बंगाल की राजनीति में Leander Paes की एंट्री ने चुनावी मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। खेल के मैदान से राजनीति के मैदान तक उनका यह सफर BJP के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे।
गांधीनगर/अहमदाबाद, 31 मार्च 2026: Narendra Modi आज गुजरात दौरे पर हैं, जहां वे राज्य को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सड़क, रेलवे, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में ये प्रोजेक्ट्स राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने वाले माने जा रहे हैं। सम्राट संप्रति म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री Samrat Samprati Museum का उद्घाटन करेंगे, जो जैन धर्म की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। यह म्यूजियम सम्राट संप्रति के नाम पर है, जो अहिंसा और धर्म प्रचार के लिए प्रसिद्ध रहे। सड़क और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स Ahmedabad-Dholera Expressway का उद्घाटन (₹5,100 करोड़ से अधिक) इदर-बडोली बाईपास और NH-754K अपग्रेड का शिलान्यास गांधीनगर-कोबा-एयरपोर्ट रोड पर फ्लाईओवर प्रोजेक्ट इन प्रोजेक्ट्स से ट्रैफिक जाम में कमी और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। रेलवे कनेक्टिविटी को बढ़ावा रेल सेक्टर में भी कई अहम प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित किए जाएंगे: कनालूस-जामनगर और राजकोट-कनालूस डबलिंग गांधीधाम-आदिपुर सेक्शन अपग्रेड हिम्मतनगर-खेड़ब्रह्मा गेज कन्वर्जन इसके साथ ही नई ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिससे यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी। ऊर्जा और शहरी विकास में बड़ा निवेश 4.5 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता वाला पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट (₹3,650 करोड़) 5,300 करोड़ रुपये के 44 अर्बन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स ये परियोजनाएं राज्य में ऊर्जा क्षमता और शहरी ढांचे को मजबूत करेंगी। स्वास्थ्य और पर्यटन सेक्टर को बढ़ावा अहमदाबाद और गांधीनगर के अस्पतालों में 858 बेड की नई सुविधाएं Rani ki Vav में लाइट एंड साउंड शो Sharmishtha Lake में वॉटर स्क्रीन प्रोजेक्शन इन प्रोजेक्ट्स का मकसद स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाना है। क्या है इस दौरे का बड़ा संदेश? प्रधानमंत्री का यह दौरा साफ संकेत देता है कि केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विरासत-तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास पर जोर दे रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मार्च को गुजरात दौरे पर जाएंगे, जहां वे कई शहरी विकास (Urban Development) परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब गुजरात 2005 से शुरू हुई अपनी शहरी विकास यात्रा के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। 20 साल में बदला गुजरात का शहरी चेहरा राज्य सरकार के मुताबिक, पिछले दो दशकों में गुजरात में शहरीकरण और बुनियादी ढांचे में तेजी से विकास हुआ है। सड़कों, स्ट्रीट लाइट, पानी की पाइपलाइन और सीवरेज सिस्टम का विस्तार ग्रीन स्पेस और टाउन प्लानिंग योजनाओं का विकास गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग गुजरात में सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क को मजबूत किया गया है: अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में ओवरब्रिज और अंडरब्रिज द्वारका-बेट द्वारका को जोड़ने वाला सुदर्शन सेतु शुरू बड़े प्रोजेक्ट: जामनगर-भटिंडा हाईवे, वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 430 KM नमो शक्ति एक्सप्रेसवे और 680 KM सोमनाथ-द्वारका एक्सप्रेसवे प्रस्तावित मेट्रो, बुलेट ट्रेन और रेलवे का विस्तार अहमदाबाद मेट्रो फेज-2 पूरा, गांधीनगर से बेहतर कनेक्टिविटी सूरत मेट्रो के लिए 24 ट्रेनसेट तैयार मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट प्रगति पर 89 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास, 18 तैयार एयरपोर्ट और उड़ान सेवाओं का विस्तार राजकोट में हिरासर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित सूरत इंटरनेशनल एयरपोर्ट तैयार UDAN योजना के तहत कई शहरों में फ्लाइट कनेक्टिविटी बढ़ी AMRUT और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत काम 630 करोड़ से अधिक के जल प्रोजेक्ट, 82 हजार से ज्यादा घरों को फायदा 575 करोड़ की सीवरेज योजनाएं 6 स्मार्ट सिटी में 359 प्रोजेक्ट, ज्यादातर पूरे PM आवास योजना से 9 लाख से ज्यादा घर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 9.19 लाख से अधिक घर राजकोट में Lighthouse प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक तकनीक से निर्माण PMAY 2.0 के तहत 1 लाख से ज्यादा नए घर मंजूर बजट और भविष्य की तैयारी 2026-27 बजट में शहरी विकास के लिए 33,504 करोड़ रुपये ‘स्वर्णिम जयंती शहरी विकास योजना’ के लिए 16,116 करोड़ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए 1,278 करोड़
नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष पर देश का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था से लेकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा तक महसूस किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें ईरान, अमेरिका और इजरायल शामिल हैं। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसका प्रभाव भारत में भी गैस आपूर्ति पर देखने को मिल रहा है। भारत के सामने बहुआयामी चुनौतियां प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा कि यह संकट भारत के लिए आर्थिक, सामरिक और मानवीय-तीनों स्तरों पर गंभीर चुनौतियां लेकर आया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से भारत के व्यापारिक और ऊर्जा संबंध गहरे हैं, और कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। 3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देते हुए अब तक लगभग 3.75 लाख भारतीयों को खाड़ी देशों से सुरक्षित वापस लाने में सफलता हासिल की है। इसे सरकार की बड़ी मानवीय और कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा संकट से निपटने की रणनीति प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत पहले से ही 41 देशों से ऊर्जा आयात करता है और मौजूदा संकट के बाद वैकल्पिक स्रोतों की खोज को और तेज किया गया है। हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सरकार ने LPG और अन्य ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका, रूस और नाइजीरिया जैसे देशों से आयात बढ़ाया है। बावजूद इसके, कुछ क्षेत्रों में गैस की कमी की आशंका बनी हुई है, हालांकि सरकार का दावा है कि उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। वैश्विक शांति की अपील प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के देश इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक है। भारत भी कूटनीतिक स्तर पर शांति और स्थिरता के पक्ष में लगातार प्रयास कर रहा है।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम, केरल और पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। राजधानी दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत शीर्ष नेतृत्व ने इन राज्यों में चुनावी गणित और संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया। असम: गठबंधन के साथ चुनावी मैदान Assam में पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। Asom Gana Parishad Bodoland People's Front इन दलों के साथ सीट शेयरिंग के जरिए चुनावी मजबूती बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। बताया जा रहा है कि 89 सीटों पर गहन चर्चा हुई है और जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी की जा सकती है। इस रणनीति में मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की अहम भूमिका रही है। केरल: 100 सीटों पर बड़ा दांव Kerala में पार्टी ने इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई है। 140 सदस्यीय विधानसभा में से 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का लक्ष्य रखा गया है। पहली सूची में ही कई बड़े नामों को टिकट दिया गया है: Rajeev Chandrasekhar – नेमोम सीट George Kurian – कांजिराप्पिली सीट गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में पार्टी को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। ऐसे में यह रणनीति राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश मानी जा रही है। बंगाल: पहली बार सत्ता में आने का लक्ष्य West Bengal में पार्टी ने इस बार ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य रखा है। बीजेपी 150 से अधिक सीटों पर मजबूत लड़ाई की तैयारी में है। पहले ही 144 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है, जिसमें प्रमुख चेहरे शामिल हैं: Suvendu Adhikari Dilip Ghosh राज्य की कुल 294 सीटों में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress भी 291 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुका है। चुनावी टाइमलाइन और सियासी समीकरण Kerala में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है। वहीं कांग्रेस और वाम दल भी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। बीजेपी का यह पूरा प्लान दर्शाता है कि पार्टी उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जहां अब तक उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि यह रणनीति जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने विदाई भाषण में जहां 54 वर्षों के लंबे संसदीय अनुभव को साझा किया, वहीं माहौल को हल्का बनाने वाला एक बयान भी दे दिया, जिस पर सदन में मुस्कान छा गई-यहां तक कि नरेंद्र मोदी भी हंसी नहीं रोक सके। खड़गे ने अपने संबोधन की शुरुआत भावुक अंदाज़ में करते हुए कहा कि विदाई का पल हमेशा कठिन होता है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कोई भी व्यक्ति वास्तव में “रिटायर” नहीं होता। उन्होंने माना कि दशकों के अनुभव के बाद भी सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। हल्के अंदाज़ में सियासी टिप्पणी अपने भाषण के दौरान खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का जिक्र करते हुए चुटकी ली- “देवगौड़ा जी ने मोहब्बत हमसे की और शादी मोदी जी के साथ कर ली।” उनकी इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे और माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया। साथियों के योगदान का जिक्र खड़गे ने कई वरिष्ठ सांसदों के योगदान को याद किया। उन्होंने रामदास अठावले की खास शैली और कविताओं का उल्लेख किया, वहीं शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी जैसे साथियों की तैयारी और सक्रियता की सराहना की। संसदीय मर्यादा पर जोर अपने भाषण के अंत में खड़गे ने सदन में सहयोग और शालीनता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संवाद और आपसी समझ ही संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं, जबकि दूरी और टकराव से गलतफहमियां बढ़ती हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा के 37 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इस मौके पर खड़गे ने उम्मीद जताई कि जाने वाले सदस्य आगे भी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में योगदान देते रहेंगे।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ये दोनों जहाज अब भारत के तट की ओर बढ़ चुके हैं और जल्द ही अपने-अपने बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं। भारतीय झंडे वाले ये गैस टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं। इनमें से ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है, जबकि ‘नंदा देवी’ कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा। बातचीत से निकला समाधान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मामले में पर्दे के पीछे की कूटनीतिक कोशिशों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि यह अनुमति भारत और ईरान के बीच सीधे संवाद का नतीजा है। जयशंकर के अनुसार, तेहरान के साथ लगातार बातचीत के जरिए जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू कराना सबसे प्रभावी तरीका साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी भी जारी है और भारत अपने अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भी बातचीत जारी रखेगा। कोई ‘डील’ नहीं, रिश्तों का असर इस मुद्दे पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसके बदले में ईरान को भारत से कोई रियायत मिली है। इस पर जयशंकर ने साफ कहा कि यह किसी लेन-देन का मामला नहीं है। उनके मुताबिक भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और उसी भरोसे के आधार पर यह समाधान संभव हो पाया है। प्रधानमंत्री की बातचीत का भी असर बताया जा रहा है कि भारतीय जहाजों को अनुमति मिलने से पहले नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की गई थी। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यही रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति दुनिया भर में होती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी, ऐसे में भारतीय जहाजों को अनुमति मिलना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
असम: प्रधानमंत्री Narendra Modi के असम दौरे का शनिवार को दूसरा दिन है। PM सुबह Silchar पहुंचे, जहां उन्होंने करीब ₹23,550 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। अपने संबोधन में उन्होंने असम के विकास, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। PM मोदी ने कहा कि सिलचर को बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है, जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर एक अनोखी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यहां बांग्ला, असमिया और विभिन्न जनजातीय परंपराओं की आवाज सुनाई देती है और यही विविधता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है। कांग्रेस पर तीखा हमला प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि Indian National Congress ने लंबे समय तक असम और नॉर्थ ईस्ट को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीतियों ने यहां के युवाओं को गुमराह किया और उन्हें हिंसा व आतंकवाद के रास्ते पर धकेल दिया। PM ने कहा कि भाजपा की सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों, स्कॉलरशिप और कौशल विकास के नए अवसर खोले हैं। उनके मुताबिक, आज असम विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है और भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी अहम भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। “कांग्रेस झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री चला रही” प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सोशल मीडिया के जरिए गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने “झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री” खोल रखी है। उन्होंने युवाओं से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि कांग्रेस के पास देश के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं है। नॉर्थ ईस्ट को मिला नया कनेक्शन मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से दूर रखा था, लेकिन भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से मजबूती से जोड़ा है। उनके मुताबिक आज नॉर्थ ईस्ट दक्षिण एशिया को जोड़ने वाला सेतु बनता जा रहा है। किसानों और चाय बागान श्रमिकों का जिक्र प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के विकास में किसानों और चाय बागान श्रमिकों का बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत असम के किसानों को अब तक हजारों करोड़ रुपये की सहायता मिल चुकी है। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि चाय बागानों में काम करने वाले हजारों परिवारों को भूमि अधिकार देकर उन्हें सुरक्षा और सम्मान देने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। बराक वैली बनेगी विकास का नया केंद्र मोदी ने कहा कि आने वाले समय में बराक वैली केवल कृषि उत्पादन के लिए ही नहीं बल्कि कृषि शिक्षा और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। यहां नए एग्रीकल्चर कॉलेज के निर्माण की शुरुआत की गई है, जिससे युवाओं को कृषि स्टार्टअप और आधुनिक खेती के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में रेलवे कनेक्टिविटी और इलेक्ट्रिफिकेशन पर तेजी से काम हो रहा है और इसका बड़ा फायदा बराक घाटी को मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र टूरिज्म, उद्योग और कृषि विकास का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran ने BRICS देशों से एकजुटता की अपील की है, जिससे India के सामने कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। मौजूदा समय में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है और इस कारण संकट पर साझा रुख तय करना भारत के लिए जटिल हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच अब तक चार बार बातचीत हो चुकी है। हालिया बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारतीय विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar से पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर BRICS देशों की एकजुटता की मांग की। मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की भी बातचीत इससे पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बात कर क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और असैन्य ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा व सामान की निर्बाध आपूर्ति भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। रूस से भी हुई चर्चा पश्चिम एशिया संकट को लेकर Subrahmanyam Jaishankar ने रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov से भी फोन पर बातचीत की। माना जा रहा है कि BRICS देशों के बीच एक संतुलित और सभी के लिए स्वीकार्य संयुक्त बयान तैयार करने को लेकर प्रारंभिक स्तर पर चर्चा चल रही है। BRICS में रुख तय करना मुश्किल विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS में साझा रुख तय करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके कई सदस्य सीधे तौर पर इस क्षेत्रीय तनाव से जुड़े हैं। इनमें Iran के साथ-साथ United Arab Emirates और Saudi Arabia भी शामिल हैं। ईरान की क्या मांग ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के कथित हमलों के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा करने की अपील की और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में BRICS देशों की भूमिका को अहम बताया। इस साल के अंत में BRICS शिखर सम्मेलन भारत में प्रस्तावित है, ऐसे में पश्चिम एशिया संकट पर सदस्य देशों के बीच संतुलित रुख तय करना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi 13 और 14 मार्च 2026 को असम के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य को 47,800 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इन परियोजनाओं में सड़क, रेल, ऊर्जा, जलमार्ग, पर्यटन और कृषि से जुड़े बड़े निवेश शामिल हैं। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री कोकराझार, गुवाहाटी और सिलचर में कई परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और भूमि पूजन करेंगे। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से असम ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। कामाख्या मंदिर तक बनेगा आधुनिक रोपवे प्रधानमंत्री गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ Kamakhya Temple तक पहुंच को आसान बनाने के लिए रोपवे परियोजना की आधारशिला रखेंगे। यह रोपवे कामाख्या रेलवे स्टेशन को सीधे मंदिर परिसर से जोड़ेगा। इसमें आधुनिक मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला तकनीक का उपयोग किया जाएगा और इसकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 17 हजार यात्रियों को ले जाने की होगी। इस परियोजना से तीर्थयात्रियों की यात्रा अधिक आरामदायक होगी, समय की बचत होगी और गुवाहाटी शहर में यातायात का दबाव भी कम होगा। असम माला 3.0: 900 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण प्रधानमंत्री कोकराझार में राज्य की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना असम माला 3.0 का भूमि पूजन करेंगे। इस योजना के तहत पूरे राज्य में 900 KM से अधिक सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और अंतरराज्यीय संपर्क को मजबूत करना है। इसके अलावा बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद क्षेत्र में करीब 1,100 करोड़ रुपये की लागत से छह सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया जाएगा। इनमें चार फ्लाईओवर और दो बड़े पुल शामिल हैं, जो क्षेत्र में ट्रैफिक जाम कम करने और ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद करेंगे। रेलवे को भी मिलेगा बड़ा विस्तार रेलवे क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की जाएंगी। प्रधानमंत्री कोकराझार जिले के बाशबारी में रेलवे की POH वर्कशॉप की आधारशिला रखेंगे, जिससे रेलवे रखरखाव प्रणाली मजबूत होगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके साथ ही तीन नई रेल सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी: कामाख्या–चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस गुवाहाटी–न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस नारंगी–अगरतला एक्सप्रेस इन ट्रेनों से पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी देश के अन्य हिस्सों, खासकर दक्षिण भारत और पूर्वी भारत से और मजबूत होगी। किसानों को पीएम-किसान की 22वीं किस्त प्रधानमंत्री गुवाहाटी में पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त भी जारी करेंगे। इसके तहत देशभर के 9.3 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में सीधे 2,000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। इसके अलावा चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे वितरित किए जाएंगे, जिससे हजारों परिवारों को पहली बार अपनी जमीन का कानूनी अधिकार मिलेगा। इससे उन्हें आवास, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी। ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश ऊर्जा क्षेत्र में भी कई परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की जाएंगी। प्रधानमंत्री कोपिली जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन करेंगे, जिसकी लागत लगभग 2,300 करोड़ रुपये है और इससे क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही नुमालीगढ़–सिलीगुड़ी पाइपलाइन क्षमता विस्तार परियोजना का उद्घाटन किया जाएगा, जिससे नुमालीगढ़ रिफाइनरी की क्षमता 3 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी। प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर भारत गैस ग्रिड के पहले चरण का भी उद्घाटन करेंगे, जो गुवाहाटी को नुमालीगढ़, गोहपुर और ईटानगर से जोड़ेगा। असम-मेघालय के बीच बनेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर सिलचर में प्रधानमंत्री शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे। लगभग 22,860 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 166 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड चार-लेन कॉरिडोर असम और मेघालय के बीच कनेक्टिविटी को नया आयाम देगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद गुवाहाटी से सिलचर की यात्रा का समय 8.5 घंटे से घटकर लगभग 5 घंटे रह जाएगा। जलमार्ग, व्यापार और स्थानीय उद्योग को बढ़ावा प्रधानमंत्री बिश्वनाथ घाट और नेमाटी में क्रूज टर्मिनल का शिलान्यास करेंगे, जिससे ब्रह्मपुत्र नदी में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही गुवाहाटी में पीएम एकता मॉल का उद्घाटन किया जाएगा। इस मॉल में “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” और GI टैग वाले उत्पादों के स्थायी स्टॉल होंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग को बड़ा बाजार मिलेगा। पूर्वोत्तर के विकास के लिए महत्वपूर्ण दौरा विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा पूर्वोत्तर भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सड़क, रेल, ऊर्जा, पर्यटन और कृषि से जुड़ी ये परियोजनाएं क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेंगी। सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ना और इसे दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए व्यापारिक गेटवे के रूप में विकसित करना है।
देश में LPG आपूर्ति को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जनता के साथ लगातार संपर्क में रहें और किसी भी तरह की गलत जानकारी या घबराहट फैलाने की कोशिशों पर कड़ी नजर रखें। सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे अहम है कि सरकार और मंत्री सीधे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं, ताकि किसी तरह की अफवाह या भ्रम की स्थिति न बने। जनता से संपर्क बनाए रखने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से लगातार संवाद बनाए रखें। जनता की चिंताओं को सुनें, उन्हें वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं और जमीनी स्तर पर हालात की निगरानी करते रहें। ‘भारत की तैयारियां मजबूत हैं’ प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत की तैयारियां कई पड़ोसी देशों और अन्य राष्ट्रों की तुलना में अधिक मजबूत हैं और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वैश्विक परिस्थिति से जुड़ी चुनौती प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है। ऐसे में भारत की रणनीति भी वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की जा रही है। अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर बैठक में यह भी कहा गया कि जो लोग मौजूदा स्थिति को लेकर अनावश्यक घबराहट फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर विशेष निगरानी रखी जाए। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी को तुरंत रोका जाए और सही तथ्य लोगों तक पहुंचाए जाएं। सोशल मीडिया पर तथ्य आधारित जवाब देने के निर्देश प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विपक्ष या अन्य स्रोतों से फैलाए जा रहे दावों का तुरंत और तथ्य आधारित जवाब दिया जाए, ताकि गलत सूचनाओं से माहौल खराब न हो।
राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जेडीयू द्वारा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को दोबारा मौका नहीं दिए जाने के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उनकी ‘साइलेंट वफादारी’ का इनाम दे सकती है और संभव है कि उन्हें मनोनयन के जरिए फिर से राज्यसभा में भेजा जाए। नीतीश कुमार के फैसले से बदला सियासी समीकरण जेडीयू ने इस बार हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए दोबारा नामित नहीं किया है। उनकी जगह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद उच्च सदन में जाने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया। इसके साथ ही पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार राज्यसभा भेजने का निर्णय लेकर अपनी पुरानी परंपरा भी बदल दी। हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ऐसे में उनका दोबारा नामांकन न होने से राज्यसभा के उपसभापति पद पर भी चुनाव की संभावना बढ़ गई है। बीजेपी दे सकती है नया अवसर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी हरिवंश नारायण सिंह को उनकी वफादारी का इनाम दे सकती है। यह भी चर्चा है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के कार्यकाल के बाद खाली होने वाली मनोनीत सीट पर उन्हें मौका मिल सकता है। मुश्किल दौर में भी मोदी सरकार का दिया साथ हरिवंश नारायण सिंह को बीजेपी के करीब माना जाता है। जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर विपक्षी गठबंधन का दामन थाम लिया था, तब भी हरिवंश ने केंद्र की मोदी सरकार का समर्थन जारी रखा था। यहां तक कि जब 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था और जेडीयू ने भी इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया था, तब भी हरिवंश नारायण सिंह कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने समारोह के दौरान राष्ट्रपति का संदेश भी पढ़कर सुनाया था। जेडीयू के भीतर भी हुआ था विवाद इस घटना को लेकर जेडीयू के कुछ नेताओं ने नाराजगी भी जताई थी। पार्टी सांसद ललन सिंह ने उस समय हरिवंश नारायण सिंह के रुख पर तीखी टिप्पणी की थी। हालांकि हरिवंश ने इस विवाद पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और मामला शांत हो गया। मोदी-नीतीश के बीच ‘सेतु’ माने जाते हैं हरिवंश दिल्ली के राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि हरिवंश नारायण सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। कहा जाता है कि उनकी भूमिका के कारण ही नीतीश कुमार की दोबारा एनडीए में वापसी संभव हो पाई, जिसका फायदा लोकसभा चुनावों में बीजेपी को मिला। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्यसभा चुनाव और उपसभापति पद को लेकर बीजेपी क्या फैसला लेती है और हरिवंश नारायण सिंह के राजनीतिक भविष्य की दिशा क्या होती है।
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के हालिया दौरे को लेकर उठे ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ के विवाद ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को जन्म दे दिया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu के सिलीगुड़ी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर उठे सवालों के बीच अब बंगाल सरकार ने अपनी ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण केंद्र सरकार को भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार, राज्य की मुख्य सचिव Nandini Chakravorty ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट में उन परिस्थितियों और प्रशासनिक कारणों का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जिनकी वजह से राष्ट्रपति के स्वागत के समय मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और कुछ वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद नहीं थे। क्या है पूरा विवाद दरअसल, 7 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया था। आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रपति Droupadi Murmu के राज्य दौरे के दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) जैसे शीर्ष अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित नहीं थे। केंद्र ने इसे राष्ट्रपति से जुड़े प्रोटोकॉल के महत्वपूर्ण नियमों का उल्लंघन माना है। इन नियमों को ‘ब्लू बुक’ के नाम से जाना जाता है, जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों के दौरे के दौरान सुरक्षा और औपचारिक व्यवस्थाओं के लिए सख्त दिशानिर्देश तय किए गए हैं। रिपोर्ट में क्या कहा गया राज्य सरकार की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सफाई दी गई है। सबसे पहले मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की अनुपस्थिति के कारणों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रशासनिक और कार्यक्रम संबंधी परिस्थितियों के चलते मुख्यमंत्री उस समय कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकीं। इसके अलावा राष्ट्रपति के दौरे के दौरान आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय आदिवासी और संथाल सम्मेलन’ के कार्यक्रम स्थल में अचानक किए गए बदलाव के पीछे के प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों का भी विस्तृत विवरण रिपोर्ट में दिया गया है। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दौरे से जुड़े हर प्रशासनिक फैसले का रिकॉर्ड रखा गया था और संबंधित दस्तावेज भी केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट के साथ संलग्न किए गए हैं। ‘ब्लू बुक’ के नियम और संवैधानिक गरिमा भारत में राष्ट्रपति से जुड़े कार्यक्रमों के लिए ‘ब्लू बुक’ एक अत्यंत गोपनीय दस्तावेज माना जाता है। इसमें यह स्पष्ट रूप से तय किया गया है कि जब भी राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर पहुंचते हैं, तो राज्य के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति स्वागत के दौरान अनिवार्य होती है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इसे संभावित ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि उस समय लिए गए सभी फैसले प्रशासनिक बाध्यताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किए गए थे। पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकार के बीच प्रोटोकॉल को लेकर टकराव का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई घटनाओं ने दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ाया है। मई 2021 में चक्रवात ‘यास’ के बाद Narendra Modi की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के देरी से पहुंचने और रिपोर्ट सौंपकर लौट जाने को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य सचिव Alapan Bandyopadhyay को केंद्र सरकार ने दिल्ली तलब किया था, जिससे केंद्र और राज्य के बीच संवैधानिक टकराव की स्थिति बन गई थी। इसी तरह, पूर्व राज्यपाल Jagdeep Dhankhar के कार्यकाल के दौरान भी राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई बार विश्वविद्यालयों और सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल को लेकर विवाद सामने आए थे। फिलहाल राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ा यह मामला भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।
नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संसदीय चुनावों में नई राजनीतिक ताकत बनकर उभरी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतिनिधि सभा की अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार Balen Shah के नेतृत्व में RSP की इस जीत को नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को टेलीफोन पर Balen Shah और RSP अध्यक्ष Rabi Lamichhane से बातचीत कर उन्हें जीत की बधाई दी। 165 में से 125 सीटों पर जीत नेपाल के संसदीय चुनावों में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत 165 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ। सोमवार शाम तक 163 सीटों के नतीजे सामने आ चुके थे, जिनमें RSP ने 125 सीटें जीतकर करीब 76 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमा लिया। करीब साढ़े तीन साल पुरानी इस पार्टी ने देशभर में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक राजनीतिक दलों के कई दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ दिया। ओली का गढ़ भी ढहा Balen Shah ने पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli को झापा-5 सीट से 68,348 मतों के बड़े अंतर से हराया। यह अंतर नेपाल के संसदीय इतिहास में किसी भी उम्मीदवार की सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जा रहा है। झापा-5 को लंबे समय से ओली का मजबूत गढ़ माना जाता रहा था। दो-तिहाई बहुमत की ओर RSP आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत भी RSP करीब 48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ आगे चल रही है। अगर यह रुझान कायम रहता है, तो 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में पार्टी को लगभग 184 सीटें मिल सकती हैं, जो दो-तिहाई बहुमत के करीब होगा। 1991 के बाद पहली बार किसी एक पार्टी को इतना बड़ा जनादेश मिलने की संभावना बन रही है। मोदी ने जताई सहयोग की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने Balen Shah और Rabi Lamichhane को चुनावी जीत की बधाई दी और भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साझा प्रयासों से आने वाले वर्षों में भारत और नेपाल के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। वहीं RSP अध्यक्ष Rabi Lamichhane ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी पार्टी आपसी सम्मान और साझा समृद्धि पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक पर्यटन, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी जताई।
प्रधानमंत्री Narendra Modi सोमवार को ‘सबका साथ, सबका विकास: जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति’ विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण वेबिनार को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। सरकार के अनुसार इस वेबिनार का उद्देश्य बजट में घोषित योजनाओं और नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार, उद्योग जगत और विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करना है। इस वेबिनार में शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, आयुष, पर्यटन और आतिथ्य जैसे कई अहम क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में बेहतर नीति समन्वय और नई पहल के जरिए युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था को रोजगार से जोड़ने के तरीकों पर चर्चा होगी। इसमें युवाओं के लिए नए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने, आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देने जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे कौशल हासिल करें, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना वेबिनार में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) जैसे रचनात्मक क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने पर भी चर्चा की जाएगी। इसके तहत कंटेंट क्रिएटर लैब विकसित करने और इस क्षेत्र में विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह सेक्टर आने वाले समय में युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकता है। स्वास्थ्य और आयुष क्षेत्र पर चर्चा कार्यक्रम में क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों को मजबूत करने और नए आयुष संस्थानों की स्थापना से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। साथ ही आयुष आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जाएगा। पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के विकास पर फोकस वेबिनार में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इसमें सतत पर्यटन मार्गों का विकास, पूर्वोत्तर क्षेत्र में बौद्ध सर्किट का विस्तार और विरासत पर्यटन को मजबूत करने जैसे विषय शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। कार्यक्रम का ढांचा कैसा होगा यह वेबिनार तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद विभिन्न विषयों पर अलग-अलग ब्रेकआउट सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि चर्चा करेंगे। अंत में समापन सत्र में इन चर्चाओं के निष्कर्ष और आगे की कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। छात्र और शिक्षक भी जुड़ सकेंगे इस कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए University Grants Commission (UGC) ने देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक छात्रों और शिक्षकों को इस वेबिनार से जोड़ें। छात्र और शिक्षक इसे ऑनलाइन देख सकेंगे। यह वेबिनार वेबएक्स, यूट्यूब, फेसबुक और एक्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाइव प्रसारित किया जाएगा, ताकि देशभर के लोग इस चर्चा का हिस्सा बन सकें।
सिडनी सेमिनार में बोले – ‘पीएम मोदी बेहद समर्पित और अलग सोच वाले नेता’ कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की कार्यशैली और समर्पण की खुलकर प्रशंसा की है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित एक सेमिनार के दौरान कार्नी ने कहा कि मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सिडनी में Lowy Institute द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कार्नी ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से हुई अपनी मुलाकात के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि मोदी का काम के प्रति समर्पण और ऊर्जा उन्हें दुनिया के अन्य नेताओं से अलग बनाती है। ‘मोदी बेहद मेहनती और लक्ष्य पर केंद्रित नेता’ कार्नी ने कहा कि चाहे वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल रहा हो या फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, मोदी लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहा, “वह बेहद अलग तरह के नेता हैं। पिछले 25 वर्षों में उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सप्ताहांत पर भी वह अक्सर जनसभाओं में शामिल होते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग उनकी रैलियों में पहुंचते हैं।” UPI और वित्तीय सुधारों की भी सराहना कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था में हुए बदलावों की भी तारीफ की। उन्होंने विशेष रूप से Unified Payments Interface (UPI) का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोगों तक सीधे और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता पहुंचाने में मदद मिली है। कार्नी के अनुसार, मोदी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और बीच में किसी तरह की गड़बड़ी या रिसाव न हो। इस दिशा में डिजिटल भुगतान प्रणाली और वित्तीय सुधारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। भारत-कनाडा संबंधों में ‘नई शुरुआत’ कार्नी की हालिया भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देना था। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में आई ठंडक के बाद अब सहयोग के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में तकनीक, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान हुआ। ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर कार्नी ने कहा कि कनाडा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि कनाडा की कंपनी Cameco ने भारत को दीर्घकालिक आधार पर यूरेनियम आपूर्ति करने के लिए समझौता किया है। इसके साथ ही दोनों देश रक्षा सहयोग समझौते को भी फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक संबंध कनाडाई प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्ते हैं। उनके अनुसार, कनाडा में लगभग 20 लाख लोग भारतीय मूल के हैं और हर साल हजारों लोग दोनों देशों के बीच यात्रा करते हैं। इन गहरे सामाजिक और आर्थिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज