Narendra Modi

HDFC Bank employees working in hybrid mode amid rising fuel prices and work from home trend
ईंधन संकट के बीच बढ़ा Work From Home का ट्रेंड, HDFC Bank ने दी हाइब्रिड वर्क की सुविधा

HDFC Bank ने अपने कुछ कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है और देश में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह व्यवस्था फिलहाल 30 दिनों के लिए लागू की गई है, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। बैंक ने यह सुविधा मुख्य रूप से बिजनेस एनेबलिंग और कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस से जुड़े कर्मचारियों को दी है। किन कर्मचारियों को मिलेगा Work From Home? HDFC Bank के अनुसार हाइब्रिड मॉडल में शामिल विभागों में: ट्रेजरी ऑपरेशंस क्रेडिट अंडरराइटिंग एंड रिस्क ट्रांजैक्शन बुकिंग डिजिटल बैंकिंग IT सर्विसेज जैसे बिजनेस एनेबलिंग फंक्शंस शामिल हैं। वहीं कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस में: ह्यूमन रिसोर्सेज फाइनेंस एंड अकाउंट्स लीगल एंड कंप्लायंस सेक्रेटेरियल और बोर्ड फंक्शंस को शामिल किया गया है। हालांकि बैंक ने साफ किया है कि उसकी सभी शाखाएं और कस्टमर फेसिंग सर्विसेज पहले की तरह सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ा Hybrid Work Model प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में कंपनियों और लोगों से ईंधन बचाने के लिए Work From Home को बढ़ावा देने की अपील की थी। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% तक तेजी आई है। इसका असर: भारत के आयात बिल चालू खाते के घाटे पेट्रोल-डीजल कीमतों और रुपये की स्थिति पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी वजह से कई कंपनियां अब हाइब्रिड वर्क मॉडल की तरफ लौट रही हैं। दूसरे बैंक भी अपना रहे Hybrid Model IndusInd Bank ने भी हाल ही में कुछ कर्मचारियों के लिए हाइब्रिड मॉडल लागू किया है। वहीं Axis Bank में 2021 से ही नॉन-कस्टमर फेसिंग कर्मचारियों के लिए Hybrid Work Policy लागू है, जिसके तहत कर्मचारियों को सप्ताह में सिर्फ दो दिन ऑफिस आना पड़ता है। Zoho ने किया Work From Home से इनकार जहां कई कंपनियां WFH को बढ़ावा दे रही हैं, वहीं Zoho Corporation के फाउंडर Sridhar Vembu ने साफ कहा है कि उनकी कंपनी फिलहाल Work From Home लागू नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि कंपनी ने हाल ही में अपनी WFH पॉलिसी की समीक्षा की थी और निष्कर्ष निकाला कि खासकर रिसर्च और एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में आमने-सामने बैठकर काम करने से बेहतर नतीजे मिलते हैं। हालांकि ईंधन बचाने के लिए Zoho: इलेक्ट्रिक बस इलेक्ट्रिक कुकिंग और सोलर एनर्जी जैसे विकल्पों पर काम कर रही है। बढ़ती तेल कीमतों का असर कंपनियों की रणनीति पर ईंधन की बढ़ती कीमतों ने अब कंपनियों की वर्क पॉलिसी पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। जहां कुछ कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम की सुविधा देकर ट्रैवल कम करना चाहती हैं, वहीं कुछ कंपनियां ऑफिस कल्चर को ज्यादा प्रभावी मान रही हैं। आने वाले समय में तेल की कीमतों और आर्थिक हालात के आधार पर Work From Home और Hybrid Work Model को लेकर और बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 20, 2026 0
PM Narendra Modi gifts Melody toffee to Italy PM Giorgia Meloni during Rome visit
भारत-इटली रिश्तों में घुली मिठास, पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट की ‘मेलोडी’ टॉफी

Narendra Modi और Giorgia Meloni के बीच बढ़ती दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो गई। मेलोनी ने इस खास गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह मुस्कुराते हुए कहती नजर आईं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें “बहुत बढ़िया टॉफी” गिफ्ट की है। इटली दौरे पर पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंचे हैं। यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही है। भारत और इटली इस समय “जॉइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” के तहत अपने संबंधों को नई मजबूती देने पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कोलोसियम में साथ दिखे मोदी और मेलोनी रोम पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी के साथ मशहूर Colosseum का दौरा भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि रोम पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर किया और फिर ऐतिहासिक कोलोसियम घूमने गए। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए। भारत-इटली सहयोग पर होगी अहम बातचीत बुधवार को पीएम मोदी और मेलोनी के बीच औपचारिक वार्ता होने वाली है। इसमें: व्यापार और निवेश रक्षा सहयोग क्लीन एनर्जी इनोवेशन साइंस और टेक्नोलॉजी सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। रोम में दिखी काशी की झलक पीएम मोदी ने अपने दौरे के दौरान यह भी बताया कि इटालियन कलाकार Giampaolo Tomassetti ने उन्हें वाराणसी की एक खूबसूरत पेंटिंग भेंट की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति टोमासेटी का लगाव चार दशक से भी ज्यादा पुराना है। उन्होंने वैदिक संस्कृति और Mahabharata से जुड़ी कई कलाकृतियों पर काम किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘मेलोडी डिप्लोमेसी’ पीएम मोदी द्वारा मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने को सोशल media पर लोग “मेलोडी डिप्लोमेसी” कहकर भी चर्चा कर रहे हैं। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुर्खियां बटोर चुकी है।   

surbhi मई 20, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses India-Nordic Summit in Norway alongside Nordic leaders
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, बोले- आतंकवाद पर ‘नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स’

Narendra Modi ने Norway में आयोजित तीसरे India-Nordic Summit के बाद आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता या दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आतंकवाद पर हमारा स्पष्ट और एकजुट रुख है — नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स।” भारत और नॉर्डिक देश ‘नेचुरल पार्टनर्स’ पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देश स्वाभाविक साझेदार हैं और टेक्नोलॉजी दोनों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों के संबंधों में तेजी से प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले एक दशक में भारत में नॉर्डिक निवेश 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। वैश्विक शांति और नियम-आधारित व्यवस्था पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे Ukraine का युद्ध हो या पश्चिम एशिया की स्थिति, भारत हमेशा शांति और जल्द समाधान के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव के दौर में भारत और नॉर्डिक देश मिलकर नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। रिसर्च, स्टार्टअप और इनोवेशन में बढ़ेगा सहयोग पीएम मोदी ने कहा कि अनुसंधान और इनोवेशन भारत-नॉर्डिक साझेदारी का अहम आधार बन चुके हैं। दोनों पक्ष विश्वविद्यालयों, रिसर्च लैब्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच सहयोग को और मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक और ध्रुवीय अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी को गहरा करने पर सहमति बनी है। स्वच्छ ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी पर खास फोकस शिखर सम्मेलन में स्थिरता, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती तकनीक, ब्लू इकोनॉमी और हरित विकास जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों की साझेदारी लगातार अधिक मजबूत और गतिशील होती जा रही है, जो भविष्य में वैश्विक विकास और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क के साथ तकनीकी साझेदारी पीएम मोदी ने कहा कि भारत नॉर्डिक देशों की विशेषज्ञता को अपनी प्रतिभा और नवाचार क्षमता के साथ जोड़कर वैश्विक समाधान विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि: Sweden की उन्नत विनिर्माण और रक्षा तकनीक Finland की दूरसंचार और डिजिटल विशेषज्ञता Denmark की साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य तकनीक को भारत की तकनीकी क्षमता के साथ जोड़कर दुनिया के लिए भरोसेमंद समाधान तैयार किए जाएंगे। कौशल विकास और प्रतिभा आवागमन पर भी सहमति प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान के नए अवसर भी विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Vladimir Putin and Xi Jinping expected to attend BRICS Summit 2026 in New Delhi with global leaders
BRICS Summit 2026: पुतिन के साथ शी जिनपिंग भी आ सकते हैं भारत, दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता

BRICS Summit 2026 को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। सितंबर 2026 में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में Vladimir Putin के साथ-साथ Xi Jinping के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, Russia और China दोनों ने भारत को संकेत दिए हैं कि उनके शीर्ष नेता 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में भाग ले सकते हैं। इस बार India BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। 2019 के बाद पहली भारत यात्रा हो सकती है यदि शी जिनपिंग का दौरा तय होता है, तो यह अक्टूबर 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। आखिरी बार वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम में भारत-चीन अनौपचारिक शिखर वार्ता में शामिल होने आए थे। 2020 के बाद बिगड़े थे रिश्ते भारत और चीन के संबंध अप्रैल-मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुए गलवान सैन्य गतिरोध के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए थे। हालांकि अक्टूबर 2024 में Kazan में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उसी दौरान दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी को लेकर सहमति जताई थी। पिछले डेढ़ साल में रिश्तों में आई नरमी पिछले कुछ समय में भारत और चीन के संबंधों में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें दोबारा शुरू हुईं वीजा सेवाएं बहाल की गईं कुछ चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू हुई हालांकि सीमा पर अब भी बड़ी संख्या में सैनिक तैनात हैं और तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विदेश मंत्रियों की बैठक में तय हुआ एजेंडा हाल ही में नई दिल्ली में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, जिसमें शिखर सम्मेलन के एजेंडे पर चर्चा की गई। Sergey Lavrov इस बैठक में शामिल हुए थे, जबकि Wang Yi बीजिंग में व्यस्तता के कारण नहीं आ सके। उनकी जगह भारत में चीन के राजदूत Xu Feihong ने भाग लिया। सूत्रों के मुताबिक, अगर कोई अप्रत्याशित परिस्थिति नहीं बनी तो BRICS देशों की ओर से शीर्ष स्तर पर भागीदारी की जानकारी जल्द आधिकारिक रूप से दी जा सकती है। पुतिन की यात्रा लगभग तय रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के BRICS सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। यह एक साल के भीतर उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। इससे पहले दिसंबर 2025 में वह भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए थे। पश्चिम एशिया युद्ध पर साझा रुख बनाने की कोशिश BRICS संगठन की स्थापना 2006 में हुई थी। शुरुआत में इसमें Brazil, Russia, India, China और South Africa शामिल थे। बाद में Egypt, Ethiopia, Iran, United Arab Emirates और Indonesia भी इस समूह में शामिल हुए। BRICS अब दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ईरान संकट और पश्चिम एशिया युद्ध पर नजर भारत चाहता है कि BRICS देश पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और Iran संकट पर साझा कूटनीतिक रुख अपनाएं। हालांकि इस मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। विशेष रूप से ईरान और United Arab Emirates के अलग-अलग रुख के कारण साझा बयान तैयार करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। पिछले सप्ताह हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में भी इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं बन सकी थी।  

surbhi मई 20, 2026 0
Cartoon depicting Prime Minister Narendra Modi as a snake charmer sparks racism controversy online
पीएम मोदी के ‘स्नेक चार्मर’ कार्टून पर विवाद, नॉर्वे के अखबार पर लगा नस्लवाद का आरोप

Narendra Modi को लेकर नॉर्वे के एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित कार्टून पर विवाद गहरा गया है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इस कार्टून को नस्लवादी, भारत विरोधी और औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित बताया है। यह विवाद नॉर्वे के अखबार Aftenposten में प्रकाशित एक कार्टून को लेकर शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को ‘स्नेक चार्मर’ यानी सपेरे के रूप में दिखाया गया था। कार्टून में क्या दिखाया गया? कार्टून में पीएम मोदी को हाथ में बीन जैसी पाइप पकड़े दिखाया गया है। सामने लकड़ी के बॉक्स में सांप की जगह पेट्रोल स्टेशन के पाइप जैसा चित्र बनाया गया है। यह कार्टून एक ओपिनियन आर्टिकल के साथ प्रकाशित हुआ था, जिसका शीर्षक था — “एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी।” कार्टून सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे भारत की पुरानी और रूढ़िवादी छवि से जोड़ने की कोशिश बताया। सोशल मीडिया पर लोगों का फूटा गुस्सा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और अन्य माध्यमों पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि यह कार्टून पश्चिमी देशों की उस पुरानी सोच को दर्शाता है, जिसमें भारत को “सांप-सपेरों का देश” के रूप में देखा जाता था। एक यूजर ने लिखा कि यह चित्रण साफ तौर पर नस्लवादी है और भारत की आधुनिक छवि को कमजोर करने की कोशिश करता है। कुछ लोगों ने कहा कि पश्चिमी मीडिया के कुछ हिस्से आज भी औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। पीएम मोदी पहले भी उठा चुके हैं यह मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि दुनिया कभी भारत को “सपेरों का देश” मानती थी, लेकिन अब भारत तकनीक, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक नेतृत्व के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। इसी वजह से कार्टून को लेकर लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है। कई यूजर्स का कहना है कि इस तरह का चित्रण आधुनिक भारत की उपलब्धियों को नजरअंदाज करता है। पत्रकार के सवाल के बाद बढ़ा विवाद यह मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया जब नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मीडिया के सवाल नहीं लेने को लेकर एक पत्रकार ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया। इसके बाद प्रकाशित कार्टून को कुछ लोगों ने उसी विवाद से जोड़कर देखा, इस मामले पर अभी तक नॉर्वे सरकार या अखबार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Gold ornaments and temple gold reserves displayed as Finance Ministry denies rumours about monetisation scheme.
Gold Rate Today: क्या सरकार मंदिरों का सोना बेचने जा रही है? वित्त मंत्रालय ने अफवाहों पर दी सफाई

सोने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। दावा किया जा रहा था कि सरकार मंदिरों में रखे गए सोने को मोनेटाइज करने की योजना बना रही है और इसके बदले गोल्ड बॉन्ड जारी किए जाएंगे। लेकिन Ministry of Finance ने इन खबरों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। क्या था दावा? कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि सरकार मंदिर ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों के पास जमा सोने को “Strategic Gold Reserve” घोषित कर सकती है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि मंदिरों के सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने की तैयारी हो चुकी है। इन खबरों के वायरल होने के बाद लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। वित्त मंत्रालय ने क्या कहा? वित्त मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि मंदिरों या धार्मिक संस्थानों के सोने के लिए किसी तरह की नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय के अनुसार: मंदिरों के सोने को लेकर फैलाई जा रही खबरें निराधार हैं सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है मंदिरों के स्तंभों, दरवाजों या ढांचों पर चढ़े सोने को स्ट्रैटजिक रिजर्व घोषित करने की बातें भी झूठी हैं सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक प्रेस रिलीज और सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर जारी जानकारी पर ही भरोसा करें। भारत में कितना सोना मौजूद है? एक अनुमान के अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में करीब 50,000 टन सोना मौजूद है, जिसकी कुल कीमत लगभग 10,000 अरब डॉलर आंकी जाती है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है। पीएम मोदी की अपील क्यों चर्चा में आई? हाल ही में Narendra Modi ने ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच देशवासियों से: पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने खाने के तेल का सीमित उपयोग करने एक साल तक सोना खरीदने से बचने विदेश यात्राएं कम करने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम किया जा सकेगा। सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक: पिछले साल भारत ने करीब 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया सोने का आयात सालाना आधार पर करीब 24% बढ़ा सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते सोना आयात से विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ता है। अफवाहों से सावधान रहने की अपील सरकार ने कहा है कि किसी भी नई स्कीम या फैसले की जानकारी हमेशा आधिकारिक माध्यमों से दी जाती है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट खबरों से बचने की जरूरत है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Norwegian journalist Helle Lyng questions PM Narendra Modi during press event in Oslo, sparking media freedom debate.
नॉर्वे में पीएम मोदी से सवाल पूछने वाली पत्रकार हेले लिंग कौन हैं? विवाद के बाद बढ़ी चर्चा

ओस्लो में प्रधानमंत्री Narendra Modi की प्रेस उपस्थिति के दौरान नॉर्वे की पत्रकार Helle Lyng द्वारा पूछे गए सवालों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक हलकों तक इस घटना पर बहस जारी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ? नॉर्वे दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre के साथ संयुक्त प्रेस संबोधन किया। कार्यक्रम के अंत में जब पीएम मोदी वहां से निकल रहे थे, तभी हेले लिंग ने ऊंची आवाज में पूछा कि “दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से सवाल लेने में दिक्कत क्या है? पीएम मोदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और आगे बढ़ गए। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कौन हैं हेले लिंग? हेले लिंग नॉर्वे के प्रमुख समाचार पत्र Dagsavisen से जुड़ी पत्रकार हैं। इससे पहले वह Nettavisen में भी रिपोर्टिंग कर चुकी हैं। वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मानवाधिकार और लोकतंत्र जैसे मुद्दों पर रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। अमेरिकी चुनाव और वैश्विक कूटनीतिक मामलों को भी उन्होंने कवर किया है। प्रेस स्वतंत्रता पर उठाए सवाल हेले लिंग ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट कर कहा कि पत्रकारों का काम सिर्फ तैयार बयान सुनना नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों से सीधे सवाल पूछना भी है। उन्होंने नॉर्वे की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग का जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकारों को सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पीएम मोदी सीधे जवाब देंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब इस विवाद के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) Sibi George ने भारत के लोकतंत्र और मीडिया व्यवस्था का बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत में संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है और किसी भी अधिकार के उल्लंघन पर अदालत जाने की पूरी स्वतंत्रता है। सिबी जॉर्ज ने यह भी कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही करीब 200 टीवी चैनल अलग-अलग भाषाओं में काम करते हैं और भारत जैसे विशाल लोकतंत्र को बाहरी नजर से पूरी तरह समझना आसान नहीं है। सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ा विवाद? घटना के बाद सोशल मीडिया पर हेले लिंग के पुराने पोस्ट और लेख वायरल होने लगे। कुछ यूजर्स ने उन पर चीन समर्थक होने के आरोप लगाए। उनके कुछ पुराने लेखों और टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट शेयर किए गए, जिनमें चीन की तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों की तारीफ की गई थी। हेले लिंग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी विदेशी सरकार से जुड़ी नहीं हैं और केवल पत्रकारिता कर रही हैं। मानवाधिकार और मीडिया पर जारी बहस इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रेस स्वतंत्रता, राजनीतिक संवाद और मीडिया की भूमिका पर बहस तेज कर दी है। एक पक्ष इसे पत्रकारिता का हिस्सा बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे जानबूझकर पैदा किया गया विवाद मान रहा है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meets Norway PM in Oslo to discuss green energy and Arctic cooperation.
पीएम मोदी का नॉर्वे दौरा: अंतरिक्ष, आर्कटिक रिसर्च और हरित तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर सहमति

Narendra Modi की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिली है। ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी और Jonas Gahr Store के बीच हुई बैठक में हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष, आर्कटिक अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और समुद्री सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे दोनों नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखते हैं। “हरित रणनीतिक साझेदारी” की ओर बढ़े दोनों देश बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे अपने संबंधों को “ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” यानी हरित रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की क्षमता और प्रतिभा को नॉर्वे की तकनीक और निवेश के साथ जोड़कर स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन, ब्लू इकॉनमी और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक समाधान तैयार किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी। भारत-यूरोप संबंधों को बताया नया “स्वर्ण युग” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत और यूरोप के संबंध नए “स्वर्णिम युग” में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। पहलगाम आतंकी हमले पर नॉर्वे के समर्थन का जताया आभार प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के समर्थन में खड़े होने के लिए नॉर्वे का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से एकजुटता दिखाई। भारत और नॉर्वे के संयुक्त बयान में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई। दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद समेत वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। व्यापार, निवेश और रोजगार पर बड़ा फोकस प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुए आर्थिक साझेदारी समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 100 अरब डॉलर का निवेश और लगभग 10 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। दोनों देशों ने: सतत विकास समुद्री ऊर्जा स्वास्थ्य इंजीनियरिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साइबर सुरक्षा डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। अंतरिक्ष और आर्कटिक रिसर्च में नई साझेदारी प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के आर्कटिक अनुसंधान केंद्र “हिमाद्री” के संचालन में सहयोग के लिए नॉर्वे का आभार व्यक्त किया। साथ ही Indian Space Research Organisation (ISRO) और नॉर्वे की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया गया। इससे अंतरिक्ष अनुसंधान और वैज्ञानिक सहयोग को नई गति मिलेगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग होगा मजबूत प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल में नॉर्वे के शामिल होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दोनों समुद्री राष्ट्र समुद्री सुरक्षा, समुद्री अर्थव्यवस्था और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा भारत और नॉर्वे ने वैश्विक दक्षिण के देशों में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं पर मिलकर काम करने के लिए त्रिपक्षीय विकास सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।  

surbhi मई 19, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi receives Sweden’s highest civilian honour during official visit to Stockholm.
स्वीडन ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान, मिला 31वां वैश्विक सम्मान

Narendra Modi को Sweden ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान किसी भी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार को दो दिवसीय दौरे पर स्वीडन पहुंचे, जहां उनका विशेष स्वागत किया गया। इस सम्मान के साथ नरेंद्र मोदी को मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 31 हो गई है। पहले भी कई देशों ने किया सम्मानित प्रधानमंत्री मोदी को इससे पहले Israel, France, Russia, United Arab Emirates, United States, Egypt, Bhutan, Oman और Bahrain समेत कई देशों द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिए जा चुके हैं। स्वीडिश प्रधानमंत्री से हुई अहम बातचीत प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वीडिश समकक्ष Ulf Kristersson के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, हरित ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। उल्फ क्रिस्टर्सन ने गोथेनबर्ग एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की। इससे पहले मोदी वर्ष 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने स्वीडन गए थे। व्यापार और तकनीक पर जोर दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में हरित परिवर्तन, नई प्रौद्योगिकियां, स्टार्टअप, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहा। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। भारत-स्वीडन संबंधों को नई मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान भारत और स्वीडन के मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों का प्रतीक है। दोनों देशों के बीच रक्षा, हरित तकनीक, नवाचार और डिजिटल सहयोग के क्षेत्र में तेजी से साझेदारी बढ़ रही है, जिसे इस दौरे के बाद और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi arrives in the Netherlands for talks on technology and semiconductor cooperation
9 साल बाद नीदरलैंड पहुंचे पीएम मोदी, टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर साझेदारी पर रहेगा खास फोकस

प्रधानमंत्री Narendra Modi नौ साल बाद Netherlands दौरे पर पहुंचे हैं। यह यात्रा भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात नीदरलैंड के प्रधानमंत्री Rob Jetten से होगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, रक्षा, ग्रीन एनर्जी और हाई-टेक सेक्टर से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर सेक्टर पर सबसे ज्यादा जोर इस दौरे का सबसे अहम केंद्र सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इंडस्ट्री को माना जा रहा है। भारत इस समय घरेलू चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में नीदरलैंड की टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ साझेदारी भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासतौर पर ASML पर भारत की नजर है। ASML दुनिया की सबसे बड़ी और उन्नत चिप मशीन बनाने वाली कंपनियों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में चिप निर्माण और एडवांस टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। व्यापार और निवेश बढ़ाने की तैयारी भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। नीदरलैंड भारत में निवेश करने वाले प्रमुख यूरोपीय देशों में शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस यात्रा में नई निवेश योजनाओं और व्यापारिक समझौतों पर भी चर्चा हो सकती है। बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी सेक्टरों में सहयोग बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। वाटर मैनेजमेंट और खेती तकनीक में सहयोग नीदरलैंड को आधुनिक खेती और वाटर मैनेजमेंट तकनीक के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। भारत इन क्षेत्रों में डच विशेषज्ञता का फायदा उठाना चाहता है, खासकर जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और स्मार्ट एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में। नीदरलैंड के राजा और रानी से भी होगी मुलाकात पीएम मोदी की मुलाकात नीदरलैंड के राजा Willem-Alexander और रानी Máxima से भी होने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री के सम्मान में आधिकारिक कार्यक्रम और राजकीय भोज का आयोजन भी किया जाएगा। यूरोप में भारत की नई रणनीति विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा सिर्फ औपचारिक विदेश यात्रा नहीं, बल्कि यूरोप में भारत की नई रणनीतिक नीति का हिस्सा है। Russia-Ukraine War और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के बाद भारत यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक और तकनीकी संबंधों को तेजी से मजबूत कर रहा है। नीदरलैंड को यूरोप का बड़ा व्यापारिक केंद्र माना जाता है। खासतौर पर Port of Rotterdam पूरे यूरोप के लिए प्रमुख व्यापारिक गेटवे के रूप में जाना जाता है। ऐसे में भारत के लिए नीदरलैंड की रणनीतिक और आर्थिक अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Indian and UAE leaders signing major energy agreement for strategic crude oil storage partnership
भारत-UAE के बीच बड़ी ऊर्जा डील, भारत में 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करेगा अबूधाबी

प्रधानमंत्री Narendra Modi की अबू धाबी यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक समझौता हुआ है। इस डील के तहत यूएई भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) स्टोर करेगा। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद हुआ। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और Abu Dhabi National Oil Company के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर समझौता किया गया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि इस समझौते के जरिए भारत के तेल भंडारण ढांचे में यूएई की हिस्सेदारी बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल तक की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक संकट के समय तेल आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। गैस भंडारण और LPG सप्लाई पर भी सहमति दोनों देशों ने रणनीतिक गैस भंडार विकसित करने की दिशा में भी साथ काम करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ADNOC के बीच लंबी अवधि का LPG सप्लाई समझौता हुआ LNG, LPG और कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने पर सहमति बनी ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया विदेश मंत्रालय ने UAE को भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक अहम साझेदार बताया है। UAE ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान किया ऊर्जा क्षेत्र के अलावा यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा भी की है। यह निवेश मुख्य रूप से: बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय सेवाओं लॉजिस्टिक्स तकनीकी परियोजनाओं में किया जाएगा। इनमें: Emirates NBD बैंक का RBL बैंक में निवेश Abu Dhabi Investment Authority का National Infrastructure Investment Fund में निवेश International Holding Company का भारत की Saman Capital में निवेश जैसे समझौते शामिल हैं। रक्षा, शिपबिल्डिंग और AI में भी बढ़ा सहयोग भारत और यूएई ने रक्षा और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी कई अहम समझौते किए हैं। Cochin Shipyard Limited और Dubai Drydocks World के बीच समझौता गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर बनाने पर सहमति समुद्री क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की योजना इसके अलावा दोनों देशों ने भारत में 8-एक्साफ्लॉप सुपरकंप्यूटिंग सुविधा स्थापित करने के लिए टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारत के AI मिशन और एडवांस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी। METRI वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर लॉन्च भारत और यूएई ने सप्लाई चेन और समुद्री व्यापार को मजबूत करने के लिए ‘METRI’ नामक वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर को लागू करने का फैसला किया है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय और यूएई बंदरगाहों के बीच व्यापार को अधिक तेज, सुरक्षित और कुशल बनाना है। होर्मुज स्ट्रेट पर साझा चिंता यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। दोनों देशों ने बातचीत के दौरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। भारत ने हालिया हमलों को लेकर यूएई के साथ एकजुटता भी जताई और संकट की स्थिति में सहयोग का भरोसा दिया।  

surbhi मई 16, 2026 0
Gold jewelry displayed amid rising gold and silver import figures
India Gold Import: पीएम मोदी की अपील से पहले सोने के आयात में जबरदस्त उछाल, चांदी का इंपोर्ट 157% बढ़ा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में सोने और चांदी के आयात के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। Narendra Modi द्वारा लोगों से एक साल तक सोने की खरीद टालने की अपील से पहले अप्रैल महीने में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में बड़ी तेजी दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत का सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत उछलकर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। ऊंची कीमतों के बावजूद बढ़ा गोल्ड इंपोर्ट बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से गोल्ड इंपोर्ट 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतों के बावजूद निवेश और ज्वेलरी डिमांड के चलते आयात में तेजी बनी रही। सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इसका असर आयात पर दिखाई दे सकता है। वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि शुल्क बढ़ने से उपभोग आधारित मांग में कमी आ सकती है और गोल्ड इंपोर्ट घट सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चांदी का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग में आने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। चांदी के आयात में रिकॉर्ड तेजी वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात करीब 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण सिल्वर इंपोर्ट में तेज उछाल देखा गया है। बढ़ा व्यापार घाटा अप्रैल में सोने और चांदी के बढ़े आयात का असर देश के व्यापार घाटे पर भी पड़ा। भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 28.38 अरब डॉलर के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सरकार का फोकस अब विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने पर है। भारत में कहां से आता है सबसे ज्यादा सोना? Switzerland भारत का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर बना हुआ है। देश के कुल गोल्ड इंपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। इसके बाद United Arab Emirates की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और South Africa की करीब 10 प्रतिशत है। अप्रैल में सिर्फ स्विट्जरलैंड से भारत का आयात 26.73 प्रतिशत बढ़कर 1.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत, China के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता माना जाता है। देश में गोल्ड इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meets UAE President Mohamed bin Zayed during strategic talks in Abu Dhabi
PM मोदी की UAE यात्रा में बड़े समझौते, भारत में 5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान; अब नीदरलैंड रवाना

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को अपनी संक्षिप्त लेकिन अहम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) यात्रा के दौरान कई बड़े रणनीतिक समझौते किए। लगभग ढाई घंटे की इस यात्रा में प्रधानमंत्री ने यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के साथ ऊर्जा, रक्षा, निवेश, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान यूएई ने भारत में 5 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करने की घोषणा भी की। यूएई यात्रा के बाद प्रधानमंत्री अपने अगले चरण के विदेश दौरे के लिए Netherlands रवाना हो गए। मिडिल ईस्ट संकट के बीच हुई अहम बैठक प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव की वजह से समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। बैठक के दौरान पीएम मोदी ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की निंदा की और कहा कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत में 5 अरब डॉलर निवेश करेगा UAE प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है। माना जा रहा है कि यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा समझौता विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच सामरिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत: भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की जाएगी पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी LNG और LPG स्टोरेज सुविधाओं पर सहयोग बढ़ेगा दीर्घकालिक LPG आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा रक्षा और तकनीक सहयोग को बढ़ावा भारत और यूएई ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को लेकर भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया। इसके तहत दोनों देश रक्षा तकनीक, इनोवेशन और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुपरकंप्यूटर क्लस्टर विकसित करने को लेकर भी दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इससे तकनीकी विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। गुजरात में बनेगा जहाज मरम्मत केंद्र दोनों देशों के बीच गुजरात के वडीनार में जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करने और बंदरगाह तथा तटीय बुनियादी ढांचे के विकास पर भी सहमति बनी है। साथ ही जहाज मरम्मत और समुद्री क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। एयरपोर्ट पर खास स्वागत यूएई पहुंचने पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने स्वयं एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और विशेष सम्मान के तौर पर यूएई के सैन्य विमानों ने उनके विमान की अगवानी भी की। पांच देशों के दौरे पर हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा पर निकले हैं। यूएई इस दौरे का पहला चरण था। इसके बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। इन यात्राओं का उद्देश्य निवेश, ग्रीन एनर्जी, नई तकनीक, रणनीतिक साझेदारी और व्यापारिक सहयोग को मजबूत करना बताया जा रहा है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Bhojshala complex in Dhar after High Court verdict recognizing it as Maa Saraswati temple
भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हैदराबाद के विधायक टी राजा सिंह ने PM मोदी से की ‘भव्य मंदिर’ बनाने की अपील

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला परिसर को मां सरस्वती यानी मां वाग्देवी का मंदिर माना है और हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह परिसर राजा भोज से जुड़ा हुआ है। इस फैसले के बाद हैदराबाद के गोशामहल से विधायक T. Raja Singh ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से अपील करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की तरह भोजशाला में भी भव्य मंदिर का निर्माण कराया जाना चाहिए। ‘124 साल के संघर्ष के बाद मिला फैसला’ टी राजा सिंह ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि यह फैसला हिंदू समुदाय के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी हिंदू संगठनों ने लगातार इस मुद्दे को उठाया और करीब 124 साल बाद हिंदू पक्ष के समर्थन में फैसला आया है। उन्होंने कहा, “जिस तरह अयोध्या में राम मंदिर बना, उसी तरह भोजशाला मंदिर का भी भव्य निर्माण होना चाहिए। केवल भारत ही नहीं, विदेशों से भी लोग यहां दर्शन करने आएंगे।” 98 दिन तक चला था वैज्ञानिक सर्वे भोजशाला विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में पांच याचिकाएं और तीन इंटरवेंशन आवेदन दाखिल किए गए थे। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने 15 मई को यह फैसला सुनाया। इससे पहले अदालत के आदेश पर 2024 में परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कराया गया था। हिंदू पक्ष के वकीलों के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले में लगातार 24 दिनों तक सुनवाई की थी और 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष के वकील ने फैसले को बताया ऐतिहासिक हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार देते हुए भोजशाला परिसर को राजा भोज से जुड़ा स्थल माना है। उन्होंने बताया कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को परिसर के संरक्षण की जिम्मेदारी जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही पहले का वह आदेश भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। लंदन संग्रहालय में रखी प्रतिमा की वापसी पर भी निर्देश अदालत ने उस प्रतिमा की वापसी की मांग पर भी सरकार को विचार करने का निर्देश दिया है, जो फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में रखी हुई बताई जाती है। वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को भी सरकार के सामने अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि देने पर भी विचार करने को कहा गया है। क्या है भोजशाला विवाद? धार स्थित भोजशाला परिसर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। 1935 में धार रियासत ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी थी। 1995 में हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की इजाजत दी गई। 2003 में यह व्यवस्था फिर लागू हुई। 2013 और 2016 में वसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ने पर विवाद बढ़ा। 2022 में हिंदू पक्ष ने अदालत में नई याचिकाएं दाखिल कीं। 2024 में कोर्ट के आदेश पर 98 दिनों तक सर्वे हुआ। 15 मई 2026 को हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष के समर्थन में फैसला सुनाया। ‘अब वहां केवल पूजा होगी’ हिंदू पक्ष के वकीलों का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद अब भोजशाला परिसर में केवल हिंदू पूजा-अर्चना होगी। साथ ही सरकार को स्थल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष आगे की कानूनी रणनीति पर विचार कर रहा है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meets UAE President in Abu Dhabi for major energy and LPG supply agreements.
UAE दौरे में भारत को बड़ी राहत, LPG सप्लाई और तेल भंडार पर हुए दो बड़े समझौते

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के United Arab Emirates दौरे के दौरान भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो अहम समझौतों पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत को LPG और तेल आपूर्ति के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है। अबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार (15 मई) को अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में UAE की राजधानी Abu Dhabi पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी और UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। LPG सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता दोनों देशों के बीच एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इससे भारत को लंबे समय तक स्थिर LPG आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में UAE के साथ यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर भी सहमति भारत और UAE के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को लेकर भी समझौता हुआ है। इससे भविष्य में वैश्विक संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भारत को अतिरिक्त ऊर्जा सुरक्षा मिल सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करेगी। पीएम मोदी ने जताया आभार वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने UAE सरकार के स्वागत और सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि UAE वायुसेना द्वारा भारतीय विमान को एस्कॉर्ट किया जाना भारत के लोगों के सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने हालिया प्राकृतिक आपदा के दौरान UAE द्वारा संवेदनाएं व्यक्त करने पर भी धन्यवाद दिया। UAE पर हमलों की कड़ी निंदा पीएम मोदी ने मध्य-पूर्व के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “यूएई को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। कठिन परिस्थितियों में आपने जिस संयम और साहस का परिचय दिया है, वह सराहनीय है।” ‘होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहना जरूरी’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का खुला, सुरक्षित और निर्बाध रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत हर स्थिति में UAE के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तेल संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच भारत-UAE की यह नई ऊर्जा साझेदारी आने वाले समय में भारत के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi with UAE President in Abu Dhabi discussing Hormuz Strait and regional security
UAE पहुंचे पीएम मोदी, बोले- ‘होर्मुज स्ट्रेट का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी’

प्रधानमंत्री Narendra Modi अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में शुक्रवार को United Arab Emirates पहुंचे। अबू धाबी पहुंचने पर UAE के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी को सम्मान स्वरूप गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पश्चिम एशिया संकट पर हुई अहम चर्चा अबू धाबी में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने का समर्थक रहा है। ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना जरूरी’ पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देना चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में गिना जाता है। UAE पर हमलों की निंदा प्रधानमंत्री मोदी ने UAE पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि UAE को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात में UAE ने जिस संयम और समझदारी के साथ स्थिति को संभाला है, वह सराहनीय है। ‘भारत हर हाल में UAE के साथ’ प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर भी चर्चा हुई है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi receiving guard of honour during UAE visit in Abu Dhabi
पीएम मोदी पहुंचे UAE, अबू धाबी में मिला गार्ड ऑफ ऑनर; राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से की मुलाकात

प्रधानमंत्री Narendra Modi शुक्रवार को अपने विदेश दौरे के पहले चरण में United Arab Emirates पहुंचे। अबू धाबी पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय हालात को लेकर अहम चर्चा हुई। “मुश्किल वक्त में भारत UAE के साथ” बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने UAE में हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि इस कठिन समय में भारत पूरी मजबूती के साथ UAE के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत और UAE के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश मिलकर आगे बढ़ते रहेंगे। पीएम मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को जल्द से जल्द पूरी तरह खोलना जरूरी है ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। ऊर्जा और निवेश पर रहेगा फोकस पीएम मोदी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और UAE के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और निवेश संबंधों को और मजबूत करना है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान दोनों देशों के बीच LPG सप्लाई और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। OPEC से बाहर निकलने के फैसले के बाद बढ़ी अहमियत UAE द्वारा तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC से बाहर निकलने के फैसले के बाद भारत-UAE ऊर्जा साझेदारी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच दोनों देशों का सहयोग ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? Ministry of External Affairs के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत और UAE के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।   

surbhi मई 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meeting Russian Foreign Minister Sergey Lavrov during BRICS Summit in New Delhi
BRICS सम्मेलन में पीएम मोदी की रूसी विदेश मंत्री लाव्रोव से खास मुलाकात, अराघची से मिले अजीत डोभाल

भारत की अध्यक्षता में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत नई दिल्ली में हो चुकी है। सम्मेलन के तहत ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों की उच्चस्तरीय बैठक जारी है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री S. Jaishankar कर रहे हैं। इस दौरान ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से संयुक्त रूप से मुलाकात की। पीएम मोदी और लाव्रोव की विशेष मुलाकात सम्मेलन के दौरान रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov को प्रधानमंत्री मोदी से अलग से विशेष मुलाकात का अवसर मिला। जानकारी के मुताबिक, लावरोव एकमात्र ऐसे मंत्री थे जिनसे पीएम मोदी ने निजी तौर पर बातचीत की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए अपना अभिवादन भी भेजा। ईरानी विदेश मंत्री से मिले NSA डोभाल वहीं दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। ‘ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा BRICS’ बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा, “भारत की अध्यक्षता में हम बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।” वैश्विक तनाव के बीच अहम बैठक नई दिल्ली में हो रही यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में BRICS मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi during UAE visit discussions focused on energy security and strategic cooperation
पीएम मोदी का UAE दौरा आज से, एनर्जी सिक्योरिटी पर रह सकता है सबसे बड़ा फोकस

प्रधानमंत्री Narendra Modi शुक्रवार से अपने पांच देशों के दौरे की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस दौरे का पहला पड़ाव United Arab Emirates होगा, जहां वह अबू धाबी में कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए इस दौरे में एनर्जी सिक्योरिटी सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है। पश्चिम एशिया तनाव के बीच अहम दौरा पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सख्ती और समुद्री गतिविधियों पर असर से दुनिया भर के तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक सहयोग मजबूत करने की कोशिश में है। UAE के राष्ट्रपति से होगी अहम मुलाकात सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी अबू धाबी में UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात करेंगे। इस दौरान LPG सप्लाई, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। बताया जा रहा है कि भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र में नए समझौतों पर भी सहमति बन सकती है। LPG और तेल भंडारण पर हो सकते हैं बड़े समझौते मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Indian Oil Corporation और ADNOC के बीच LPG सप्लाई को लेकर रणनीतिक साझेदारी की घोषणा हो सकती है। इसके अलावा इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और ADNOC के बीच तेल भंडारण को लेकर भी अहम डील होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी। छह दिनों में पांच देशों का दौरा विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी छह दिनों में पांच देशों का दौरा करेंगे। UAE के बाद वह Netherlands जाएंगे। इसके बाद उनका दौरा Sweden, Norway और आखिर में Italy में समाप्त होगा। सरकार का कहना है कि इस दौरे का उद्देश्य सिर्फ ऊर्जा सहयोग नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी, व्यापार और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना भी है।    

surbhi मई 15, 2026 0
Fuel station display showing increased petrol and diesel prices amid political reactions in India
पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही कांग्रेस का हमला, बोली- “महंगाई मैन मोदी, चुनाव खत्म अब वसूली शुरू”

देश में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए उन्हें “महंगाई मैन मोदी” बताया और कहा कि चुनाव खत्म होते ही जनता से “रिकवरी” शुरू कर दी गई है। कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच अब ईंधन की कीमतों में इजाफा आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ाएगा। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने चुनावों के दौरान कीमतें नहीं बढ़ाईं, लेकिन नतीजों और राजनीतिक प्रक्रिया पूरी होने के कुछ दिनों बाद ही तेल कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए। पार्टी ने इसे “जनता से वसूली” करार दिया। पेट्रोल-डीजल और CNG के दाम बढ़े 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। वहीं CNG की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा किया गया है। पिछले चार साल में यह पहली बार है जब पेट्रोल और डीजल के दामों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, जिसकी वजह से कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था। इसी कारण कीमतों में संशोधन करना पड़ा। चुनाव खत्म होने के बाद बढ़े दाम असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने के करीब 16 दिन बाद यह फैसला सामने आया है। विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी माहौल में जनता की नाराजगी से बचने के लिए कीमतें रोकी गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत समेत कई देशों पर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में महंगाई और परिवहन लागत पर इसका असर पड़ सकता है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Young shoppers exploring lab-grown diamond and silver jewelry amid rising gold prices in India
सोने की बढ़ती कीमतों के बीच बदल रहा ज्वेलरी ट्रेंड, 2026 में लोग अपना रहे ये नए विकल्प

महंगे गोल्ड ज्वेलरी से हटकर नए विकल्पों की ओर बढ़ रहे लोग भारत में सोना हमेशा से निवेश और पारंपरिक शान का प्रतीक माना जाता रहा है, लेकिन 2026 में लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की पसंद बदलनी शुरू कर दी है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी लोगों से फिलहाल गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी। ऐसे में अब नई पीढ़ी पारंपरिक गोल्ड ज्वेलरी के बजाय दूसरे विकल्पों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रही है। लैब-ग्रोउन डायमंड्स बने नया स्टेटस सिंबल 2026 में ज्वेलरी इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव लैब-ग्रोउन डायमंड्स को लेकर देखा जा रहा है। युवा वर्ग अब प्राकृतिक हीरों की बजाय लैब में तैयार किए गए डायमंड्स को पसंद कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह कम कीमत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लैब-ग्रोउन डायमंड्स की कीमत प्राकृतिक हीरों की तुलना में लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक कम होती है। दिखने में ये बिल्कुल असली हीरों जैसे लगते हैं और इन्हें अधिक टिकाऊ और एथिकल विकल्प माना जा रहा है। सिल्वर ज्वेलरी की फिर बढ़ी डिमांड एक समय बजट विकल्प मानी जाने वाली सिल्वर ज्वेलरी अब फैशन ट्रेंड बन चुकी है। ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर नेकलेस, झुमके और विंटेज डिजाइन वाले आभूषण युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इंडो-वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ सिल्वर ज्वेलरी का कॉम्बिनेशन लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती गोल्ड कीमतों के बीच सिल्वर एक स्टाइलिश और किफायती विकल्प बनकर उभरा है। पुरानी विरासत वाली ज्वेलरी को मिल रहा नया महत्व अब लोग नई भारी-भरकम गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के बजाय परिवार की पुरानी ज्वेलरी को दोबारा इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। पुराने कुंदन सेट, मंदिर ज्वेलरी और पारंपरिक चूड़ियों को नया डिजाइन देकर दोबारा पहना जा रहा है। इस ट्रेंड को सिर्फ फैशन नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और टिकाऊ लाइफस्टाइल से भी जोड़ा जा रहा है। परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही ज्वेलरी अब फिर से खास बनती जा रही है। रेंटल ज्वेलरी का बढ़ा क्रेज भारतीय शादियों में भारी गोल्ड ज्वेलरी पहनने का चलन लंबे समय से रहा है, लेकिन अब युवा पीढ़ी शादी के लिए ज्वेलरी किराए पर लेना ज्यादा पसंद कर रही है। कई ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म अब ब्राइडल ज्वेलरी रेंट पर उपलब्ध करा रहे हैं। इससे लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और लोग ट्रेंडिंग डिजाइन भी आसानी से पहन सकते हैं। बदलती सोच के साथ बदल रहा ज्वेलरी मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय ज्वेलरी बाजार में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब लोग केवल निवेश नहीं बल्कि स्टाइल, सुविधा और टिकाऊ विकल्पों को ध्यान में रखकर खरीदारी कर रहे हैं।  

surbhi मई 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0