Sergey Lavrov

Russia warns of possible major strike on Kyiv amid escalating Ukraine war tensions
रूस ने दी बड़े हमले की चेतावनी, विदेशी नागरिकों से कहा- तुरंत कीव छोड़ें

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। रूस ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा हमला किया जा सकता है। रूस ने विदेशी नागरिकों और राजनयिक मिशनों से जुड़े लोगों से जल्द से जल्द कीव छोड़ने की अपील की है। रूस ने अमेरिका से भी की राजनयिक हटाने की बात रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से फोन पर बातचीत की। इस दौरान रूस ने अमेरिका से कहा कि वह अपने राजनयिक कर्मचारियों को यूक्रेन से बाहर निकाल ले। अमेरिका ने जताई चिंता मार्को रूबियो ने फिलहाल यह साफ नहीं किया कि अमेरिका अपने राजनयिकों को कीव से हटाएगा या नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और इसे खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका युद्ध खत्म कराने के प्रयासों में मदद के लिए तैयार है। यूरोपीय देशों ने कीव छोड़ने से किया इनकार रूस की चेतावनी के बावजूद अभी तक किसी यूरोपीय देश ने कीव छोड़ने का फैसला नहीं किया है। यूरोपीय संघ, फ्रांस और पोलैंड के राजनयिक मिशनों ने साफ कहा है कि वे यूक्रेन की राजधानी में बने रहेंगे। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि फिलहाल खतरे का स्तर पहले जैसा ही है और स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। रूस ने ड्रोन और मिसाइलों से किया हमला यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में बड़े पैमाने पर हमला किया। इन हमलों में 100 से ज्यादा ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन ने कहा कि रूस लगातार प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। रूस ने फिर इस्तेमाल की खतरनाक मिसाइल रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने हाल ही में यूक्रेन पर हाइपरसोनिक ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल से भी हमला किया था। चार साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध में यह तीसरी बार है जब रूस ने इस हथियार का इस्तेमाल किया है। जेलेंस्की ने मांगी और रक्षा प्रणाली यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा है कि रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए यूक्रेन को और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण इन प्रणालियों की उपलब्धता कम हो गई है। 2022 से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच लगातार युद्ध जारी है। अब रूस की नई चेतावनी के बाद आशंका बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में युद्ध और ज्यादा तेज हो सकता है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Russian Foreign Minister Sergey Lavrov speaking during BRICS press conference in New Delhi
‘फोन सरेंडर करो, नहीं तो गन निकाल लेंगे...’ दिल्ली में सर्गेई लावरोव का बयान वायरल

रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान प्रेस वार्ता में उन्होंने एक व्यक्ति को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर सख्त लेकिन मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। हालांकि लावरोव की टिप्पणी गंभीर लहजे में शुरू हुई, लेकिन बाद में उन्होंने ऐसा मजाक किया कि वहां मौजूद लोग हंस पड़े। प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ? बताया जा रहा है कि घटना प्रेस वार्ता शुरू होने से ठीक पहले की है। वायरल वीडियो में लावरोव अपनी बात रख रहे थे, तभी उनकी नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जो मोबाइल फोन पर बात कर रहा था। इस पर उन्होंने पहले अंग्रेजी में कहा, “क्या आप यहां से थोड़ा हट सकते हैं?” इसके बाद उन्होंने दोबारा कहा, “या तो आप हट जाइए या आपका फोन।” ‘मैं मजाक नहीं कर रहा हूं’ जब संबंधित व्यक्ति ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी, तो लावरोव थोड़े सख्त नजर आए। उन्होंने कहा, “क्या आप यहां से जा सकते हैं? मैं मजाक नहीं कर रहा हूं।” वीडियो में इसके बाद लावरोव इधर-उधर देखते दिखाई देते हैं, मानो सुरक्षा कर्मियों या स्टाफ से बात कर रहे हों। फिर आया ‘गन’ वाला मजाक कुछ ही सेकंड बाद लावरोव ने माहौल हल्का करते हुए कहा, “अगर आपने अपना फोन सरेंडर नहीं किया, तो वे बंदूक निकाल लेंगे।” उनकी यह टिप्पणी सुनते ही वहां मौजूद लोग हंस पड़े। सोशल मीडिया पर अब यही क्लिप तेजी से शेयर की जा रही है। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स ने इसे लावरोव का ‘ड्राई ह्यूमर’ बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे प्रेस कार्यक्रम में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश माना। हालांकि, जिस व्यक्ति को यह टिप्पणी कही गई, उसकी पहचान अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। BRICS बैठक में शामिल होने भारत आए थे लावरोव सर्गेई लावरोव 14-15 मई को आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत आए थे। इस बैठक में Seyed Abbas Araghchi समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी हुई है। सख्त बयानों के लिए जाने जाते हैं लावरोव रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर सर्गेई लावरोव अक्सर अपने सख्त और तीखे बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। दिल्ली में उनकी यह हल्की-फुल्की लेकिन सख्त टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का नया विषय बन गई है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meeting Russian Foreign Minister Sergey Lavrov during BRICS Summit in New Delhi
BRICS सम्मेलन में पीएम मोदी की रूसी विदेश मंत्री लाव्रोव से खास मुलाकात, अराघची से मिले अजीत डोभाल

भारत की अध्यक्षता में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत नई दिल्ली में हो चुकी है। सम्मेलन के तहत ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों की उच्चस्तरीय बैठक जारी है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री S. Jaishankar कर रहे हैं। इस दौरान ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से संयुक्त रूप से मुलाकात की। पीएम मोदी और लाव्रोव की विशेष मुलाकात सम्मेलन के दौरान रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov को प्रधानमंत्री मोदी से अलग से विशेष मुलाकात का अवसर मिला। जानकारी के मुताबिक, लावरोव एकमात्र ऐसे मंत्री थे जिनसे पीएम मोदी ने निजी तौर पर बातचीत की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए अपना अभिवादन भी भेजा। ईरानी विदेश मंत्री से मिले NSA डोभाल वहीं दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। ‘ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा BRICS’ बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा, “भारत की अध्यक्षता में हम बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।” वैश्विक तनाव के बीच अहम बैठक नई दिल्ली में हो रही यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में BRICS मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Iranian and Russian foreign ministers arrive in New Delhi for crucial BRICS meeting on oil crisis
ब्रिक्स बैठक के लिए दिल्ली पहुंचे ईरान और रूस के विदेश मंत्री, ईरान युद्ध और तेल संकट छाया रहा मुख्य मुद्दा

वैश्विक तनाव के बीच भारत में अहम कूटनीतिक बैठक नई दिल्ली में गुरुवार को होने वाली BRICS देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले दुनिया के कई अहम देशों के नेता राजधानी पहुंच चुके हैं। इस बैठक में खास तौर पर ईरान और तेल संकट से जुड़ी वैश्विक परिस्थितियां चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और दो दिवसीय इस बैठक में विस्तार किए गए सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। ईरान और रूस के विदेश मंत्री पहुंचे दिल्ली ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची बुधवार देर रात New Delhi पहुंचे। वहीं Russia के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी बैठक में शामिल हो रहे हैं। लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा की। ईरान युद्ध और तेल संकट पर फोकस मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और हालिया संघर्ष, जिसमें Iran और United States तथा Israel की भूमिका बताई जा रही है, ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में बाधा ने कीमतों में अस्थिरता बढ़ा दी है। इस स्थिति का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो ऊर्जा और उर्वरक के लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर हैं। भारत की भूमिका और कूटनीतिक संतुलन विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। भारत का मानना है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक वातावरण में कूटनीतिक सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। ब्रिक्स का विस्तार और बढ़ती चुनौतियां BRICS की शुरुआत 2009 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया और इसमें United Arab Emirates, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हुए। हालांकि इस बार बैठक में यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी सदस्य देश संयुक्त बयान जारी करेंगे या नहीं, क्योंकि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। नई दिल्ली में हो रही यह बैठक वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान युद्ध और तेल संकट ने BRICS देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिन पर सामूहिक रणनीति बनाने की कोशिश की जाएगी।  

surbhi मई 14, 2026 0
Iranian and Indian diplomats discussing BRICS cooperation amid rising US-Iran geopolitical tensions
BRICS बैठक के लिए भारत आ सकते हैं ईरान के उप विदेश मंत्री, अमेरिका से तनाव के बीच अहम होगा दौरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi के भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि वह मई में नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में लगातार अस्थिरता बनी हुई है और ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक समर्थन मजबूत करने में जुटा है. भारत फिलहाल BRICS का चेयरमैन है और 14-15 मई को विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा. यह बैठक सितंबर 2026 में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है. जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद बढ़ी हलचल यह संभावित दौरा भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच हुई हाई-लेवल फोन बातचीत के बाद चर्चा में आया है. माना जा रहा है कि दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुपक्षीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया है. रूस के विदेश मंत्री भी आएंगे भारत रूस ने भी पुष्टि की है कि उसके विदेश मंत्री Sergey Lavrov 14-15 मई को भारत में होने वाली बैठक में शामिल होंगे. रूस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह बैठक वैश्विक मुद्दों और ग्लोबल गवर्नेंस पर गंभीर चर्चा का बड़ा मंच बनेगी. क्या है इस बार BRICS की थीम? भारत की अध्यक्षता में इस बार ब्रिक्स की थीम रखी गई है: “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” इस थीम का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और टिकाऊ विकास पर जोर देना है. क्यों अहम मानी जा रही है यह बैठक? विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बैठक कई वजहों से महत्वपूर्ण है: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बड़े देशों की कूटनीतिक रणनीति पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति पर चर्चा वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट की तैयारी रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Maria Zakharova ने कहा है कि इस बैठक में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने पर विशेष फोकस रहेगा. नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक अब सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक बड़े भू-राजनीतिक मंच के रूप में देखी जा रही है.

surbhi मई 7, 2026 0
Russian and Chinese flags symbolizing energy cooperation amid Iran sanctions and Strait of Hormuz tensions.
ईरान को घेरने की कोशिश, लेकिन रूस को फायदा: चीन को तेल सप्लाई का ऑफर

वॉशिंगटन/बीजिंग/मॉस्को: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और Strait of Hormuz की नाकेबंदी के बीच वैश्विक तेल राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ईरान को आर्थिक रूप से घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इस पूरे संकट का सबसे ज्यादा फायदा रूस को होता दिख रहा है। रूस ने चीन को दिया बड़ा ऑफर चीन दौरे पर पहुंचे रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा कि: रूस, चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है हॉर्मुज रूट बंद होने से जो कमी आई है, उसे रूस भर सकता है उन्होंने बीजिंग में कहा, “रूस बिना किसी शक के चीन और अन्य सहयोगी देशों की ऊर्जा कमी को पूरा कर सकता है।” ट्रंप की रणनीति, लेकिन उल्टा असर Donald Trump ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाए थे, जिनका मकसद था: ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना तेल निर्यात पर रोक लगाना लेकिन: हॉर्मुज की नाकेबंदी से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई इसका फायदा रूस जैसे देशों को मिलने लगा रूस की ‘चांदी’ क्यों हो रही है? पहले रूस के तेल पर प्रतिबंध (Sanctions) लगे थे अब वैश्विक संकट के कारण रूसी तेल की मांग बढ़ गई रूस ज्यादा कीमत पर तेल बेचकर फायदा कमा रहा है अब चीन को अतिरिक्त सप्लाई का प्रस्ताव भी दे दिया रूस-चीन रिश्ते और मजबूत Sergey Lavrov ने Xi Jinping से मुलाकात की और कहा: दोनों देशों के संबंध “किसी भी मुश्किल में न टूटने वाले” हैं ये रिश्ते वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभाते हैं जानकारी के अनुसार: Vladimir Putin जून तक चीन दौरे पर जा सकते हैं 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद रूस-चीन साझेदारी और मजबूत हुई है वैश्विक असर हॉर्मुज रूट बंद होने से तेल सप्लाई बाधित चीन जैसे बड़े आयातक नए स्रोत तलाश रहे रूस को बड़ा आर्थिक फायदा अमेरिका की रणनीति पर सवाल ईरान को अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिशों के बीच वैश्विक ऊर्जा समीकरण बदलते दिख रहे हैं। जहां अमेरिका दबाव बना रहा है, वहीं रूस इस मौके को आर्थिक और रणनीतिक लाभ में बदल रहा है। आने वाले समय में यह टकराव दुनिया की ऊर्जा राजनीति को नई दिशा दे सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Iran-US ceasefire and Middle East tensions.
“War Not Over”: ईरान सीजफायर पर रूस का हमला, अमेरिका-NATO पर साधा निशाना

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच रूस ने ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों पर तीखा हमला भी बोला है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ शब्दों में कहा कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और क्षेत्र में हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। लावरोव ने कहा कि रूस मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति चाहता है, जो किसी एक देश की दादागिरी पर नहीं बल्कि सभी क्षेत्रीय शक्तियों के संतुलन पर आधारित हो। उन्होंने चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई के जरिए इस संकट का समाधान संभव नहीं है और अमेरिका का अभियान इतिहास में एक असफल प्रयास के रूप में दर्ज हो सकता है। रूस ने इस पूरे घटनाक्रम को पश्चिमी शक्तियों की कमजोरी के तौर पर भी पेश किया। NATO, European Union और ब्रिटेन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मॉस्को ने कहा कि ईरान को घेरने की रणनीति पूरी तरह विफल रही है। इससे पश्चिमी सैन्य गठबंधन की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। क्रेमलिन का मानना है कि भले ही पाकिस्तान में बातचीत और अस्थायी युद्धविराम की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन जमीनी हालात अभी भी विस्फोटक हैं। रूस ने स्पष्ट किया कि “War Is Not Over” और क्षेत्र में संघर्ष की आशंका बनी हुई है। इस बीच, इस टकराव का आर्थिक पहलू भी चर्चा में है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के कारण वैश्विक तेल और उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसका सीधा लाभ रूस को मिला। दुनिया के बड़े ऊर्जा निर्यातकों में शामिल रूस की मांग अचानक बढ़ी और कीमतों में उछाल से उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। रूस ने यह भी संकेत दिया कि मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति अब केवल अमेरिका के नियंत्रण में नहीं है। मॉस्को और चीन की बढ़ती सक्रियता ने इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। संयुक्त राष्ट्र में वीटो जैसे कदमों के जरिए यह साफ हो चुका है कि अब वैश्विक फैसले बहुध्रुवीय व्यवस्था में लिए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, रूस का संदेश साफ है-ईरान सीजफायर के बावजूद संकट टला नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की नई लड़ाई शुरू हो चुकी है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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