स्वास्थ्य

Too Much Screen Time Can Exhaust Your Brain

ऑनलाइन रहने की आदत दिमाग को बुरी तरह थका सकती है, अकेले नींद से नहीं मिलता आराम: डॉक्टर

surbhi जून 10, 2026 0
Person using a smartphone and laptop for long hours, showing the effects of excessive screen time on mental health.
Excessive Screen Time Can Cause Mental Fatigue

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट जहां नई चीजें सीखने और दुनिया से जुड़े रहने का अवसर देते हैं, वहीं इनका अत्यधिक इस्तेमाल शरीर और दिमाग पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ऑनलाइन रहने की आदत मानसिक थकान को बढ़ा रही है और सिर्फ नींद लेने से इस समस्या से पूरी तरह राहत नहीं मिलती।

कैलाश दीपक हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. बिपिन कुमार शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने से मस्तिष्क को लगातार भारी मात्रा में जानकारी प्रोसेस करनी पड़ती है, जिससे मानसिक ऊर्जा तेजी से खत्म होने लगती है।

क्यों थकने लगता है दिमाग?

विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स प्रभावित होता है। यह हिस्सा निर्णय लेने, ध्यान केंद्रित करने और भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होता है।

जब यह हिस्सा लगातार ओवरलोड रहता है, तो व्यक्ति में निम्न समस्याएं दिखाई देने लगती हैं—

  • ध्यान लगाने में कठिनाई
  • चिड़चिड़ापन
  • भावनात्मक सुन्नता
  • लगातार थकान महसूस होना
  • मानसिक तनाव बढ़ना

डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की मानसिक थकान केवल अच्छी नींद से पूरी तरह दूर नहीं होती, बल्कि दिमाग को डिजिटल आराम (Digital Detox) की भी जरूरत होती है।

कैसे बदल रहा है इंटरनेट हमारे दिमाग को?

लगातार स्क्रॉलिंग और बार-बार ऐप्स बदलने की आदत मस्तिष्क को तेज उत्तेजनाओं का आदी बना देती है। इससे किसी एक काम पर लंबे समय तक फोकस बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा—

  • नोटिफिकेशन और लाइक्स डोपामाइन को बार-बार सक्रिय करते हैं।
  • धीरे-धीरे डिजिटल कंटेंट पर निर्भरता बढ़ने लगती है।
  • आत्म-नियंत्रण और निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • रिसर्च के अनुसार, अत्यधिक इंटरनेट उपयोग मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में ग्रे मैटर के घनत्व को भी प्रभावित कर सकता है।

सिर्फ दिमाग ही नहीं, शरीर के अन्य अंग भी होते हैं प्रभावित

आंखों पर असर

लगातार स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। इसके लक्षण हैं—

  • आंखों में सूखापन
  • जलन
  • धुंधला दिखाई देना
  • सिरदर्द

गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दबाव

लंबे समय तक झुककर मोबाइल देखने से "टेक नेक" की समस्या हो सकती है, जिससे गर्दन और ऊपरी रीढ़ में दर्द बढ़ सकता है।

मांसपेशियों में तनाव

कीबोर्ड और टचस्क्रीन के लगातार उपयोग से कंधों, हाथों और कलाइयों में दर्द या रिपिटिटिव स्ट्रेन इंजरी की समस्या हो सकती है।

दिल और वजन पर असर

अधिक स्क्रीन टाइम शारीरिक गतिविधियों को कम कर देता है, जिससे—

  • मोटापे का खतरा बढ़ता है
  • ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है
  • हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है

नींद और इम्यूनिटी पर प्रभाव

स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, जिससे हार्मोनल संतुलन, मेटाबॉलिज्म और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

क्या करें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—

  • स्क्रीन टाइम सीमित करें।
  • हर 30-40 मिनट में छोटा ब्रेक लें।
  • सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद करें।
  • नियमित व्यायाम और आउटडोर गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का संतुलित उपयोग ही बेहतर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की कुंजी है।

 

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  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Person performing Navasana yoga pose to strengthen core muscles and improve balance
100 सिट-अप्स से भी ज्यादा असरदार है यह योगासन, पेट की चर्बी घटाने के साथ Cortisol भी करता है कम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही लोगों की प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में योग का एक खास आसन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे विशेषज्ञ 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर प्रभावी मानते हैं। यह आसन है नौकासन (Navasana) या Boat Pose, जो न केवल पेट और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है बल्कि तनाव कम करने और शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नौकासन शरीर की गहरी मांसपेशियों पर काम करता है और नियमित अभ्यास से शरीर की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाता है। यही कारण है कि इसे योग की सबसे प्रभावशाली कोर-स्ट्रेंथ एक्सरसाइज में गिना जाता है। 100 सिट-अप्स जितना असरदार क्यों माना जाता है नौकासन? अमेरिका की Auburn University at Montgomery द्वारा किए गए एक अध्ययन में नौकासन को योग और पिलेट्स की सबसे प्रभावी कोर एक्सरसाइज में शामिल किया गया। प्रसिद्ध योग शिक्षक Sharath Jois का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति इस आसन को 25 गहरी सांसों तक सही तरीके से होल्ड करता है, तो इसका प्रभाव 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर हो सकता है। पेट, पीठ और कूल्हों को बनाता है मजबूत योग प्रशिक्षकों के अनुसार, नौकासन केवल एब्स तक सीमित नहीं है। यह पेट की मांसपेशियों, हिप फ्लेक्सर्स, ग्लूट्स, पेल्विक मसल्स और पीठ को भी मजबूत करता है। इस आसन के दौरान कोर को सक्रिय रखने से पेट के अंदरूनी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक हो सकता है। तनाव कम करने में भी मददगार नौकासन का फायदा केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। साल 2023 में जर्नल Biomedicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले छात्रों में छह सप्ताह के भीतर कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम हुआ। नौकासन करते समय संतुलन बनाए रखना, सांसों को नियंत्रित करना और मन को केंद्रित रखना पड़ता है। यही प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। दिमाग की क्षमता भी बढ़ाता है नौकासन एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर को संतुलन और स्थिरता दोनों बनाए रखनी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बैलेंसिंग अभ्यास मस्तिष्क और शरीर के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं। नियमित अभ्यास से एकाग्रता, फोकस और न्यूरोमस्कुलर कनेक्शन बेहतर होता है। यही वजह है कि इसे शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। नौकासन करने का सही तरीका जमीन पर सीधे बैठ जाएं और पैरों को सामने फैलाएं। घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे पैरों को सीधा करके शरीर को V आकार में लाने का प्रयास करें। रीढ़ को सीधा रखें और छाती को खुला रखें। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं। नजर हल्की ऊपर रखें और कोर को सक्रिय रखें। 5 से 10 गहरी सांसों तक इस स्थिति में बने रहें। आराम करें और 3 से 5 बार दोहराएं। शुरुआती लोग घुटनों को मोड़कर आसान रूप में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। इन गलतियों से बचें पीठ को गोल कर लेना सांस रोककर रखना कंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करना क्षमता से अधिक पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करना विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन में ऊंचाई से ज्यादा स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। किन लोगों को नहीं करना चाहिए नौकासन? निम्न समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना नौकासन नहीं करना चाहिए: कमर की गंभीर चोट हिप फ्लेक्सर स्ट्रेन हर्निया हाल ही में हुई पेट की सर्जरी गर्भावस्था के कुछ चरण

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