आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर देर रात खाना खाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डिनर का समय हमारी मेटाबॉलिक हेल्थ, नींद और लंबी उम्र पर बड़ा असर डाल सकता है। हाल ही में longevity और regenerative medicine विशेषज्ञ Dr Saranya Wyles ने बताया कि शाम को जल्दी खाना खाना शरीर की प्राकृतिक circadian rhythm के साथ बेहतर तालमेल बनाता है और इससे overall health को फायदा मिल सकता है। शाम 6 बजे से पहले डिनर को माना बेहतर Mayo Clinic में cellular ageing और regenerative medicine विशेषज्ञ डॉ. सारन्या वायल्स का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ नियमित समय पर डिनर करने को प्राथमिकता देती हैं। उनके अनुसार, आदर्श रूप से शाम का खाना 6 बजे से पहले खा लेना चाहिए। वहीं रविवार को उनके घर में डिनर का समय और जल्दी, यानी करीब 4:30 बजे रखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी खाना खाने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी circadian rhythm सही तरीके से काम करती है, जिससे digestion और metabolic health बेहतर बनी रहती है। क्या है Circadian Rhythm? Circadian rhythm शरीर की 24 घंटे चलने वाली जैविक प्रक्रिया है, जो सूरज की रोशनी और दिन-रात के चक्र से प्रभावित होती है। यही प्रक्रिया तय करती है कि शरीर में कौन-से हार्मोन कब रिलीज होंगे, नींद कैसी होगी और ऊर्जा का स्तर कैसा रहेगा। Nutritionist और hormone विशेषज्ञ Hannah Alderson के अनुसार cortisol hormone, जिसे stress hormone भी कहा जाता है, सुबह सबसे अधिक सक्रिय होता है और दिनभर धीरे-धीरे कम होता जाता है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करना शरीर को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि उस समय शरीर आराम की तैयारी कर रहा होता है, न कि digestion की। देर रात खाना क्यों हो सकता है नुकसानदायक? विशेषज्ञों के मुताबिक: देर रात भारी भोजन करने से digestion प्रभावित हो सकता है नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है इंसुलिन sensitivity कम हो सकती है शरीर का metabolic balance बिगड़ सकता है हालांकि बहुत ज्यादा भूखे पेट सोना भी नींद को प्रभावित कर सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जाता है। हेल्दी डिनर के लिए अपनाती हैं ‘Modular Dinner’ तरीका डॉ. सारन्या वायल्स ने अपने व्यस्त शेड्यूल में healthy eating बनाए रखने के लिए “Modular Dinner” strategy अपनाई हुई है। इसका मतलब है कि सप्ताहांत में खाने की बेसिक तैयारी कर ली जाए और फिर सप्ताह के दिनों में कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार किया जा सके। इसके तहत वह पहले से तैयार रखती हैं: कटे हुए गाजर, खीरा, टमाटर और सेलरी स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे फल चिकन या टोफू जैसे प्रोटीन स्रोत क्विनोआ जैसे whole grains उनका कहना है कि slow cooker का इस्तेमाल समय बचाने में काफी मदद करता है। रंग-बिरंगे भोजन को देती हैं प्राथमिकता एक dermatologist और longevity expert होने के नाते डॉ. वायल्स खाने में रंगों की विविधता को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार अलग-अलग रंगों वाली सब्जियां और फल शरीर को phytonutrients प्रदान करते हैं, जो कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद करते हैं। वह खास तौर पर इन खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने की सलाह देती हैं: बैंगनी शकरकंद ब्रोकली कद्दू हरी पत्तेदार सब्जियां Gut Health पर भी ध्यान जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी metabolic health के लिए gut health भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए डॉ. वायल्स प्रोबायोटिक और fermented foods को डाइट में शामिल करती हैं, जैसे: दही Kimchi Sauerkraut इसके अलावा Omega-3 से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे: Salmon Sardines Avocado और olive oil, turmeric, salt और pepper जैसे मसालों और healthy dressings को भी वह जरूरी मानती हैं। क्या कहती है यह रिसर्च? विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक सख्त नियमों से ज्यादा जरूरी है consistency यानी नियमितता। समय पर भोजन करना, संतुलित डाइट लेना और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार जीवनशैली अपनाना metabolic health को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों के बजट पर असर डाला है। अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक तेल संकट के कारण ईंधन महंगा हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति को फिटनेस सुधारने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। छोटी दूरी के लिए बाइक या कार छोड़कर पैदल चलना और साइकिल का इस्तेमाल करना न केवल खर्च कम करेगा, बल्कि शरीर को भी फिट बनाएगा। पैदल चलने से तेजी से बर्न होती है कैलोरी विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना 1 से 2 किलोमीटर पैदल चलने की आदत वजन घटाने में मददगार हो सकती है। नियमित वॉकिंग से शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और फैट तेजी से बर्न होने लगता है। फिटनेस एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 30 मिनट तेज गति से चलने पर करीब 120 से 200 कैलोरी तक बर्न की जा सकती है। इससे मोटापा कम करने और शरीर को एक्टिव रखने में मदद मिलती है। साइकिलिंग से दिल और मांसपेशियां रहेंगी मजबूत Cycling को सबसे प्रभावी कार्डियो एक्सरसाइज में से एक माना जाता है। 30 मिनट साइकिल चलाने से लगभग 200 से 300 कैलोरी तक बर्न हो सकती है। इससे पैरों, जांघों और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और दिल की सेहत में सुधार होता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित साइकिलिंग करने वाले लोगों में मोटापा और Type 2 Diabetes का खतरा कम हो सकता है। फिट रहने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल व्यायाम ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण भी जरूरी है। कम नींद और ज्यादा तनाव शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ाते हैं जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। गर्मियों में तला-भुना भोजन और शक्कर वाली ड्रिंक्स कम लेकर पानी, फल और हल्का भोजन अपनाने से शरीर अधिक स्वस्थ और सक्रिय रह सकता है।
तेज गर्मी के बाद छोटी गलतियां बन सकती हैं बड़ी परेशानी गर्मियों में बाहर से घर लौटने के बाद लोग अक्सर राहत पाने के लिए कुछ ऐसी आदतें अपना लेते हैं जो बाद में सेहत पर भारी पड़ सकती हैं। तेज धूप, पसीना और गर्म हवाओं के बीच शरीर पहले से ही थका और गर्म होता है। ऐसे में अचानक की गई कुछ गलतियां सर्दी-जुकाम, पेट दर्द, कमजोरी और स्किन प्रॉब्लम्स का कारण बन सकती हैं। अगर आप भी गर्मी में खुद को फिट और हेल्दी रखना चाहते हैं, तो इन 5 गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। 1. बाहर से आते ही ठंडा पानी पीना धूप से लौटने के बाद शरीर का तापमान काफी बढ़ जाता है। ऐसे में तुरंत फ्रिज का बर्फीला पानी पीना नुकसान पहुंचा सकता है। इससे गले में खराश, खांसी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बेहतर होगा कि घर आने के बाद 10-15 मिनट आराम करें और फिर सामान्य तापमान का पानी पिएं। 2. तुरंत AC या कूलर के सामने बैठ जाना गर्मी से राहत पाने के लिए कई लोग घर आते ही सीधे एसी या कूलर के सामने बैठ जाते हैं। लेकिन शरीर के गर्म होने पर अचानक ठंडी हवा लगने से तापमान तेजी से बदलता है। इस वजह से सिरदर्द, बदन दर्द और सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी हो सकती है। पहले कुछ देर सामान्य तापमान में रहें, फिर धीरे-धीरे ठंडी जगह पर जाएं। 3. पसीने में तुरंत नहाना बहुत ज्यादा पसीने में भीगने के तुरंत बाद ठंडे पानी से नहाना शरीर के लिए नुकसानदायक माना जाता है। ऐसा करने से नसों पर असर पड़ सकता है और कमजोरी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है। पहले शरीर को सामान्य होने दें और पसीना सूखने के बाद ही नहाएं। 4. तुरंत भारी या तला-भुना खाना खाना धूप और गर्मी से लौटने के बाद शरीर पहले से ही थका होता है। ऐसे समय में भारी, मसालेदार या तला-भुना खाना खाने से पाचन खराब हो सकता है। इससे गैस, अपच और आलस महसूस हो सकता है। बेहतर होगा कि पहले नींबू पानी, छाछ या हल्के फल लें और कुछ देर बाद भोजन करें। 5. पसीने वाले कपड़ों में ज्यादा देर रहना गर्मी में भीगे हुए कपड़ों में लंबे समय तक रहने से स्किन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे खुजली, लाल दाने और फंगल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। बाहर से घर लौटते ही सूखे और साफ कपड़े पहन लेना चाहिए। गर्मियों में इन बातों का रखें खास ध्यान गर्मी के मौसम में शरीर को अचानक ठंडक देने की बजाय धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाना ज्यादा जरूरी होता है। सही आदतें अपनाकर आप खुद को बीमारियों से बचा सकते हैं और पूरे मौसम में स्वस्थ रह सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर जल्दबाजी में खड़े होकर पानी पी लेते हैं। हालांकि यह आदत सामान्य लगती है, लेकिन कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पारंपरिक मान्यताएं इसे शरीर के लिए नुकसानदायक मानती हैं। माना जाता है कि पानी पीने का तरीका भी हमारी सेहत पर गहरा असर डालता है। पाचन तंत्र पर पड़ सकता है असर खड़े होकर पानी पीने से पानी तेजी से पेट तक पहुंचता है, जिससे पाचन तंत्र को उसे सही तरीके से प्रोसेस करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इससे गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं आराम से बैठकर धीरे-धीरे पानी पीने से शरीर पानी को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। जोड़ों में दर्द और कमजोरी की आशंका बुजुर्गों के अनुसार लंबे समय तक खड़े होकर पानी पीने की आदत जोड़ों पर असर डाल सकती है। इससे घुटनों में दर्द, जोड़ों में अकड़न और कमजोरी की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि इसका वैज्ञानिक प्रमाण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, फिर भी सही आदत अपनाना बेहतर माना जाता है। किडनी और हाइड्रेशन पर प्रभाव मान्यताओं के अनुसार तेजी से पानी पीने पर किडनी पानी को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती। इससे शरीर को पर्याप्त हाइड्रेशन नहीं मिल पाता और थकान, कमजोरी व ड्राईनेस जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। हार्ट और लंग्स पर भी पड़ सकता है असर कुछ लोगों को खड़े होकर पानी पीने पर सीने में भारीपन या बेचैनी महसूस हो सकती है। माना जाता है कि तेजी से पानी शरीर में जाने से ऑक्सीजन और तरल पदार्थों का संतुलन थोड़ी देर के लिए प्रभावित हो सकता है। क्या है पानी पीने का सही तरीका? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा शांत होकर बैठकर पानी पीना चाहिए। पानी को छोटे-छोटे घूंट में पीना बेहतर माना जाता है। बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से भी बचना चाहिए और भोजन के तुरंत बाद पानी पीने के बजाय कुछ समय का अंतर रखना चाहिए।
आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में थकान, ब्लोटिंग, लो एनर्जी और स्किन ब्रेकआउट जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। कई बार ये शरीर में बढ़ती सूजन यानी inflammation के संकेत हो सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें, जैसे पर्याप्त पानी पीना और सही ड्रिंक्स का चुनाव करना, शरीर को अंदर से सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। खासतौर पर ऐसे पेय जिनमें अदरक, हल्दी, ग्रीन टी या चिया सीड्स जैसे तत्व हों, शरीर की प्राकृतिक anti-inflammatory प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि इन ड्रिंक्स को बनाने के लिए महंगे इंग्रीडिएंट्स या जटिल रेसिपी की जरूरत नहीं होती। किचन में मौजूद साधारण चीजों से इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। 1. हल्दी और काली मिर्च की चाय हल्दी में मौजूद curcumin को प्राकृतिक anti-inflammatory तत्व माना जाता है। वहीं काली मिर्च इसके अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करती है। सामग्री 1 कप पानी आधा चम्मच हल्दी पाउडर या ताजी हल्दी आधा चम्मच कद्दूकस किया अदरक एक चुटकी काली मिर्च 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) थोड़ा दूध (वैकल्पिक) बनाने का तरीका पानी उबालकर उसमें हल्दी, अदरक और काली मिर्च डालें। 5 से 7 मिनट तक पकने दें। छानकर कप में निकालें और चाहें तो शहद या दूध मिलाएं। इसे गर्मागर्म पिएं। 2. अदरक और नींबू पानी अदरक को पाचन और सूजन कम करने में मददगार माना जाता है, जबकि नींबू शरीर को तरोताजा महसूस कराता है। सामग्री डेढ़ कप पानी 1 इंच अदरक के टुकड़े आधे नींबू का रस 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) बनाने का तरीका अदरक को पानी में 5-10 मिनट तक उबालें। फिर गैस बंद करके उसमें नींबू रस और शहद मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 3. पुदीना वाली ग्रीन टी ग्रीन टी में antioxidants पाए जाते हैं, जबकि पुदीना इसे और ज्यादा refreshing बना देता है। सामग्री 1 ग्रीन टी बैग या 1 चम्मच ग्रीन टी 1 कप गर्म पानी 4-5 पुदीना पत्तियां 1 नींबू स्लाइस (वैकल्पिक) बनाने का तरीका ग्रीन टी और पुदीना को 2-3 मिनट तक गर्म पानी में डालकर रखें। फिर छान लें। चाहें तो नींबू मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 4. टार्ट चेरी स्प्रिट्जर टार्ट चेरी जूस को रिकवरी और शरीर की सूजन कम करने से जोड़कर देखा जाता है। सामग्री आधा कप बिना शक्कर वाला टार्ट चेरी जूस आधा कप स्पार्कलिंग वॉटर बर्फ थोड़ा नींबू रस बनाने का तरीका गिलास में बर्फ डालें, फिर चेरी जूस और स्पार्कलिंग वॉटर मिलाएं। ऊपर से नींबू रस डालकर हल्के से मिक्स करें। 5. खीरा, पुदीना और चिया वॉटर यह ड्रिंक शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद कर सकती है। सामग्री 2 कप पानी 5-6 खीरे के स्लाइस 5 पुदीना पत्तियां 1 चम्मच चिया सीड्स चौथाई नींबू का रस बनाने का तरीका पानी में खीरा, पुदीना और चिया सीड्स डालें। 15-20 मिनट तक छोड़ दें ताकि चिया फूल जाए। फिर नींबू रस मिलाकर पिएं। क्यों जरूरी है consistency? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोई भी ड्रिंक जादुई इलाज नहीं होती। लेकिन रोजाना sugary drinks की जगह ज्यादा पौष्टिक और hydrating विकल्प चुनना लंबे समय में शरीर को फायदा पहुंचा सकता है। छोटे लेकिन लगातार किए गए बदलाव अक्सर बड़े wellness trends से ज्यादा असरदार साबित होते हैं।
भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई चाहता है कि उसका दिन आसान, संतुलित और तनाव मुक्त बीते। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दिन की शुरुआत जिस तरह होती है, वही पूरे दिन के मूड और प्रोडक्टिविटी को तय करती है। अगर सुबह सही आदतों के साथ शुरू हो, तो न सिर्फ काम आसान हो जाते हैं, बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी बनी रहती है। यहां जानिए ऐसी 5 आसान सुबह की आदतें, जो आपकी दिनचर्या को पूरी तरह बदल सकती हैं। 1. दिन की शुरुआत पॉजिटिव सोच से करें सुबह उठते ही कुछ पल शांति से बिताएं और सकारात्मक विचारों के साथ दिन की शुरुआत करें। भगवान का स्मरण या कृतज्ञता व्यक्त करना मन को स्थिर करता है इससे दिनभर के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है 2. खाली पेट एक गिलास पानी जरूर पिएं रातभर सोने के बाद शरीर को हाइड्रेशन की जरूरत होती है। सुबह गुनगुना या सामान्य पानी पीना शरीर को डिटॉक्स करता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है शरीर में ताजगी लाता है 3. ताजी हवा और हल्की धूप लें सुबह उठकर कुछ समय खुले वातावरण में बिताना बेहद फायदेमंद होता है। खिड़की खोलकर या बाहर जाकर फ्रेश एयर लें हल्की धूप शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देती है दिमाग फ्रेश रहता है और आलस दूर होता है 4. हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें सुबह शरीर को एक्टिव करना जरूरी है। लाइट स्ट्रेचिंग या 10–15 मिनट की वॉक करें इससे शरीर की जकड़न दूर होती है पूरे दिन के लिए एनर्जी मिलती है 5. दिन की प्लानिंग करें सुबह का समय दिमाग के लिए सबसे शांत और साफ होता है। दिनभर के कामों की प्राथमिकता तय करें जरूरी मीटिंग्स और टास्क पहले प्लान करें इससे भागदौड़ कम होती है और स्ट्रेस घटता है
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पोषण की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है, और इन्हीं में से एक है मैग्नीशियम की कमी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह जरूरी मिनरल हमारे शरीर में 300 से अधिक बायोकेमिकल प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है–जिसमें मसल और नर्व फंक्शन, ब्लड प्रेशर कंट्रोल, एनर्जी प्रोडक्शन, मेटाबॉलिज्म और हड्डियों का विकास शामिल है। पोषण विशेषज्ञ सामंथा डिएरास के मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत वयस्क रोजाना आवश्यक 320 से 420 मिलीग्राम मैग्नीशियम की मात्रा पूरी नहीं कर पाते। इसकी कमी से मूड स्विंग, मसल क्रैम्प्स, थकान और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, सही डाइट अपनाकर इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। ये हैं 13 मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स 1. कीवी (Kiwi) छोटा सा फल लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर। इसमें विटामिन C, E, K, फाइबर और लगभग 31 mg मैग्नीशियम पाया जाता है। 2. खीरा (Cucumber) 95% पानी से भरपूर खीरा भी मैग्नीशियम (लगभग 16 mg) और अन्य जरूरी मिनरल्स का अच्छा स्रोत है। 3. स्क्वैश (Squash) बटरनट और एकॉर्न स्क्वैश में 60-65 mg तक मैग्नीशियम होता है, साथ ही फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी। 4. डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate) स्वाद के साथ सेहत भी–यह मैग्नीशियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद है। 5. एवोकाडो (Avocado) हेल्दी फैट, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर यह फल ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करता है। 6. नट्स (Nuts) बादाम, काजू जैसे नट्स मैग्नीशियम, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। 7. दालें (Legumes) चना, राजमा, ब्लैक बीन्स जैसी दालों में मैग्नीशियम के साथ आयरन और विटामिन B भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। 8. बादाम (Almonds) एक सर्विंग बादाम से लगभग 20% दैनिक मैग्नीशियम की जरूरत पूरी हो सकती है। 9. हरी पत्तेदार सब्जियां (Leafy Greens) पालक, केल जैसी सब्जियां मैग्नीशियम के साथ फाइबर और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करती हैं। 10. बीज (Seeds) चिया, फ्लैक्स और कद्दू के बीज मैग्नीशियम के पावरहाउस हैं, जो हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हैं। 11. साबुत अनाज (Whole Grains) ये फाइबर और मिनरल्स से भरपूर होते हैं और डायबिटीज व हार्ट डिजीज के खतरे को कम करते हैं। 12. केला (Banana) मैग्नीशियम के साथ-साथ पोटैशियम से भरपूर, जो ब्लड प्रेशर कंट्रोल में सहायक है। 13. सैल्मन (Salmon) 100 ग्राम सैल्मन में लगभग 30 mg मैग्नीशियम होता है और यह सूजन कम करने में मदद करता है। क्या हैं इसके नुकसान? विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक फूड्स से मिलने वाला मैग्नीशियम आमतौर पर सुरक्षित होता है। लेकिन सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन डायरिया और पाचन समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। कैसे करें मैग्नीशियम ट्रैक? एक वयस्क को रोजाना 310 से 420 mg मैग्नीशियम की जरूरत होती है, जो उम्र, लिंग और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है। अगर आपको थकान, सिरदर्द या मसल क्रैम्प्स जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
कई लोग दिनभर थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस करते हैं, जबकि मेडिकल चेकअप में सब कुछ नॉर्मल आता है। ऐसे में अक्सर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकते हैं। KIMS अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, शरीर अचानक बीमार नहीं होता, बल्कि पहले से ही छोटे-छोटे संकेत देना शुरू कर देता है। इन्हें समय रहते समझना बेहद जरूरी है। ये लक्षण बिल्कुल नजरअंदाज न करें हर समय थकान और सुस्ती रहना चक्कर आना नींद पूरी न होना बिना कारण शरीर में दर्द ध्यान और सोचने की क्षमता में कमी ये सभी संकेत किसी अंदरूनी समस्या की शुरुआत हो सकते हैं। रिपोर्ट नॉर्मल फिर भी क्यों होती है परेशानी? ज्यादातर टेस्ट बड़ी बीमारियों को पकड़ने के लिए होते हैं शुरुआती बदलाव जैसे: मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी थायरॉइड असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस पाचन संबंधी समस्या ये शुरुआती स्टेज पर टेस्ट में साफ नहीं दिखते ICMR और NIH के अनुसार, कई बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होती हैं। छिपी हुई आम समस्याएं विटामिन B12 और D की कमी डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) नींद की खराब गुणवत्ता थायरॉइड में हल्के बदलाव ये छोटी दिखने वाली समस्याएं शरीर की ऊर्जा और मूड पर बड़ा असर डालती हैं। क्या करें? बार-बार टेस्ट नहीं, लाइफस्टाइल सुधारें डॉक्टरों के अनुसार, बार-बार टेस्ट कराने से ज्यादा जरूरी है: पर्याप्त और अच्छी नींद संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम तनाव कम करना साथ ही अपने शरीर के संकेतों को समझें-कब, क्यों और कितनी देर तक लक्षण रहते हैं। कब डॉक्टर से मिलें? अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बढ़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
मानसिक तनाव से निपटने में योग का बढ़ता महत्व आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। यह किसी एक लिंग तक सीमित नहीं है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि पुरुष इस समस्या को खुलकर स्वीकार नहीं करते। समाज में बचपन से ही उन्हें मजबूत रहने और कमजोरी न दिखाने की सीख दी जाती है, जिसके कारण कई बार वे अपने मानसिक तनाव को दबा लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि डिप्रेशन को शुरुआती चरण में ही पहचान कर उसका समाधान किया जाए, तो इससे बाहर निकलना संभव है। काउंसलिंग और चिकित्सकीय उपचार के साथ-साथ जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव भी बहुत मददगार साबित होते हैं। इसी में योग एक प्रभावी तरीका माना जाता है, जो मन और शरीर दोनों को संतुलित करने में सहायक है। शोध में सामने आए योग के फायदे अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था Harvard Medical School की मानसिक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार नियमित योग अभ्यास कई तरह से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। शोध में पाया गया है कि योग- तनाव के प्रभाव को कम करता है डिप्रेशन और एंग्जायटी से उबरने में मदद करता है शरीर और मन को शांत रखता है ऊर्जा और सकारात्मकता बढ़ाता है एक अन्य अध्ययन में यह भी सामने आया कि योग के दौरान किए जाने वाले श्वास-प्रश्वास अभ्यास (Breathing Techniques) मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। रोज घर पर कर सकते हैं ये 7 योगासन 1. अधो मुख श्वानासन (Downward Facing Dog) यह आसन शरीर की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और दिमाग में रक्त संचार बढ़ाकर तनाव कम करने में मदद करता है। 2. उत्तानासन (Standing Forward Fold) इस आसन से दिमाग शांत होता है और चिंता व मानसिक थकान कम होती है। 3. उत्कटासन (Chair Pose) यह आसन शरीर की ताकत बढ़ाता है और आत्मविश्वास को मजबूत करता है। 4. वीरभद्रासन-I (Warrior Pose) यह योगासन शरीर को संतुलित बनाता है और मानसिक दृढ़ता बढ़ाने में मदद करता है। 5. उर्ध्व मुख श्वानासन (Upward Facing Dog) यह आसन छाती को खोलता है और शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ाता है। 6. नौकासन (Boat Pose) यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और शरीर में स्थिरता लाता है। 7. सेतु बंधासन (Bridge Pose) यह आसन रीढ़ को मजबूत करता है और दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से मिल सकते हैं बेहतर परिणाम योग विशेषज्ञों का कहना है कि इन आसनों का नियमित अभ्यास मानसिक तनाव को कम करने और शरीर को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि गंभीर डिप्रेशन की स्थिति में पेशेवर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और बेहतर शारीरिक स्वास्थ्य हासिल कर सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।