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Pregnant woman receiving medical care in hospital highlighting maternal mortality concerns in India report
Lancet Report: हर 10 में से एक मातृ मृत्यु भारत में, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Lancet Maternal Death Report: दुनियाभर में गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण होने वाली मातृ मृत्यु को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। द लैंसेट में प्रकाशित ताज़ा स्टडी के मुताबिक, दुनिया की हर 10 में से एक मां की मौत भारत में होती है, जो एक गंभीर संकेत है। क्या कहती है रिपोर्ट? रिपोर्ट के अनुसार: 2023 में दुनिया भर में करीब 2.4 लाख महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी वजहों से हुई। इनमें से लगभग 24,700 मौतें भारत में दर्ज की गईं। यानी वैश्विक स्तर पर करीब 10% मातृ मृत्यु भारत से जुड़ी है। हालांकि, आंकड़ों का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। 1990 में भारत में मातृ मृत्यु: लगभग 1.19 लाख 2015 में घटकर: 36,900 2023 में और घटकर: 24,700 इसी तरह, मातृ मृत्यु दर (MMR) 1990 में 508 से घटकर 2023 में 116 प्रति 1 लाख जीवित जन्म हो गई है सुधार के बावजूद क्यों बनी हुई है चिंता? विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार अभी अधूरा है और देश में असमानता बड़ी समस्या है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण हैं मातृ मृत्यु के मुख्य कारण स्टडी के मुताबिक, ज्यादातर मौतें ऐसी वजहों से होती हैं जिन्हें रोका जा सकता है: प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एक्लेम्प्सिया जैसी स्थिति) संक्रमण (Infections) पहले से मौजूद बीमारियां इसके अलावा: समय पर इलाज न मिलना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में अंतर ग्रामीण-शहरी असमानता भी बड़ी वजहें हैं। कोविड-19 का भी पड़ा असर एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे हालात और बिगड़े। यही वजह है कि 2015 के बाद सुधार की रफ्तार धीमी पड़ गई। वैश्विक स्थिति भी चिंताजनक 2023 में वैश्विक मातृ मृत्यु दर: 190 प्रति 1 लाख जीवित जन्म जबकि संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य (SDGs): 70 प्रति 1 लाख यानी दुनिया अभी भी लक्ष्य से काफी दूर है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Patient checking blood sugar with memory loss concept highlighting dementia risk
टाइप 1 डायबिटीज से डिमेंशिया का खतरा तीन गुना तक बढ़ा: नई स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे

नई रिसर्च में सामने आया है कि Type 1 Diabetes से पीड़ित बुजुर्गों में Dementia विकसित होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक हो सकता है। साल 2026 की All of Us Cohort Study ने डायबिटीज और डिमेंशिया के बीच गहरे संबंध की ओर संकेत किया है। क्या कहती है रिसर्च शोधकर्ताओं ने All of Us Cohort Study के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लगभग 2.84 लाख लोगों को शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 65 वर्ष थी और इन्हें औसतन 2.5 साल तक फॉलो किया गया। इस दौरान 2,300 से अधिक लोगों में डिमेंशिया के मामले सामने आए। इनमें से करीब 5,500 लोग टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित थे। तीन गुना तक बढ़ा जोखिम विश्लेषण में पाया गया कि टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक था। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ऐसे मरीजों में डिमेंशिया के करीब 64.5% मामलों के पीछे डायबिटीज एक प्रमुख कारण हो सकता है। वहीं Type 2 Diabetes से पीड़ित लोगों में भी खतरा कम नहीं है-इनमें डिमेंशिया का जोखिम दो गुना से अधिक पाया गया। क्यों बढ़ रहा है खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। यही प्रक्रिया दिमाग पर भी असर डाल सकती है, जिससे याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि टाइप 1 डायबिटीज के मरीज हेल्थकेयर सिस्टम के संपर्क में ज्यादा रहते हैं, जिससे उनमें डिमेंशिया का जल्दी पता चलने की संभावना भी अधिक हो सकती है। क्या है इसका मतलब इस स्टडी से यह स्पष्ट होता है कि डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिमागी स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस संबंध को और गहराई से समझने और समय रहते रोकथाम के उपाय करने की जरूरत है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Person using laptop and mobile with tired eyes highlighting digital eye strain and screen fatigue
डिजिटल आई स्ट्रेन बना बड़ी समस्या: मोबाइल-लैपटॉप यूज करने वालों के लिए जरूरी सावधानियां

आज के डिजिटल दौर में लगातार मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन पर समय बिताना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका सीधा असर आपकी आंखों पर पड़ रहा है? “डिजिटल आई स्ट्रेन” (Computer Vision Syndrome) अब एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिससे आंखों में थकान, सूखापन और धुंधलापन जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। क्या है डिजिटल आई स्ट्रेन? डिजिटल आई स्ट्रेन कोई मिथक नहीं, बल्कि एक वास्तविक समस्या है। मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन पर लगातार नजरें टिकाए रखने से आंखों में थकान, जलन और सिरदर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसे आमतौर पर “कंप्यूटर विजन सिंड्रोम” भी कहा जाता है। स्क्रीन से आंखों को कैसे बचाएं? अगर आप रोजाना लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करते हैं, तो ये आसान उपाय आपकी आंखों को सुरक्षित रख सकते हैं: 1. अपनाएं 20-20-20 नियम हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और थकान कम होती है। 2. बार-बार पलक झपकाएं कम पलक झपकाने से आंखें सूख जाती हैं। इसलिए काम करते समय नियमित रूप से पलक झपकाना जरूरी है। जरूरत हो तो आर्टिफिशियल आई ड्रॉप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 3. स्क्रीन सेटिंग्स करें सही ब्राइटनेस को संतुलित रखें नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करें इससे आंखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। 4. ग्लेयर (चमक) कम करें स्क्रीन पर पड़ने वाली तेज रोशनी को कम करें। एंटी-ग्लेयर स्क्रीन या सही एंगल में डिवाइस रखने से आंखों को राहत मिलती है। 5. स्क्रीन की सही पोजिशन रखें स्क्रीन आंखों से 20–28 इंच दूर हो स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा आंखों के बराबर या थोड़ा नीचे हो यह आदत आंखों और गर्दन दोनों के लिए फायदेमंद है। 6. कमरे की लाइटिंग संतुलित रखें अंधेरे कमरे में काम न करें और स्क्रीन बहुत ज्यादा चमकीली न रखें। सही रोशनी आंखों के तनाव को कम करती है। 7. डॉक्यूमेंट स्टैंड का इस्तेमाल करें अगर काम के दौरान कागज और स्क्रीन दोनों देखना पड़ता है, तो डॉक्यूमेंट स्टैंड का उपयोग करें। इससे आंखों और गर्दन की मूवमेंट कम होती है। 8. बीच-बीच में ब्रेक लें लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से बचें। थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर टहलना आंखों को आराम देता है। 9. फालतू स्क्रीन टाइम कम करें मनोरंजन के लिए मोबाइल या टीवी का इस्तेमाल सीमित करें। इससे आंखों की थकान और सूखापन कम होगा। 10. सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखें सोने से कम से कम 1 घंटे पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें। यह आंखों को आराम देने के साथ नींद भी बेहतर बनाता है। 11. नियमित आंखों की जांच कराएं समय-समय पर आंखों की जांच कराना जरूरी है, ताकि किसी भी समस्या का पता समय रहते चल सके।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
chana for weight loss
भुना, भीगा या उबला चना: सेहत के लिए कौन सा है सबसे ज्यादा फायदेमंद?

नई दिल्ली, एजेंसियां। चना को अक्सर “शाकाहारियों का मीट” कहा जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन और मांसपेशियों के विकास में भी मदद करता है। लोग इसे अलग-अलग तरीकों से खाते हैं—भीगा हुआ, उबला हुआ या भुना हुआ। लेकिन सवाल यह है कि इनमें से सबसे ज्यादा फायदेमंद कौन सा है?   भीगा हुआ चना: एनर्जी और पाचन के लिए बेहतर   भीगा हुआ चना सुबह खाली पेट खाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। रातभर पानी में भिगोने से इसमें पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है। यह पाचन को सुधारता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है। इसमें मौजूद फाइबर और विटामिन शरीर को दिनभर ऊर्जा देते हैं। हालांकि, इसे अच्छी तरह चबाकर खाना जरूरी है, वरना गैस या भारीपन हो सकता है।   उबला हुआ चना: आसान पाचन और मसल्स के लिए फायदेमंद   उबला हुआ चना उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जिनका पाचन तंत्र कमजोर है। उबालने से चना नरम हो जाता है, जिससे इसे पचाना आसान हो जाता है। जिम जाने वाले या मांसपेशियां बनाने वाले लोगों के लिए यह अच्छा स्रोत है। इसे उबालते समय थोड़ा नमक या अदरक डालने से इसका स्वाद और पाचन दोनों बेहतर हो जाते हैं।   भुना हुआ चना: वजन घटाने वालों के लिए सुपरफूड   भुना हुआ चना कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर वाला होता है, इसलिए यह वजन घटाने में मददगार माना जाता है। यह भूख को नियंत्रित करता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा विकल्प बनता है। छिलके के साथ खाने पर यह दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद है।   आखिर कौन सा है सबसे बेहतर?   दरअसल, सबसे फायदेमंद विकल्प आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आप एनर्जी और बेहतर पाचन चाहते हैं, तो भीगा हुआ चना बेहतर है। कमजोर पाचन या मसल्स बिल्डिंग के लिए उबला चना सही रहेगा। वहीं, वजन कम करने या ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए भुना चना सबसे अच्छा विकल्प है।

Anjali Kumari मार्च 18, 2026 0
natural sleep tips
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये 5 आसान उपाय, करवटों से मिलेगी राहत और मिलेगा सुकून

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी और गहरी नींद लेना लोगों के लिए चुनौती बन गया है। देर रात तक मोबाइल चलाना, तनाव, अनियमित दिनचर्या और गलत खान-पान की आदतें नींद को प्रभावित कर रही हैं। इसका असर सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। कई लोग रातभर करवटें बदलते रहते हैं और सबह उठकर थकान महसूस करते हैं।   दवाइयों के बजाय अपनाएं प्राकृतिक उपाय   नींद की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय कुछ आसान घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय अपनाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। ये उपाय शरीर को प्राकृतिक तरीके से रिलैक्स करते हैं और नींद को बेहतर बनाते हैं।   सोने से पहले गुनगुना दूध पिएं   रात को सोने से पहले गुनगुना दूध पीना बहुत लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को शांत करते हैं और दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करते हैं। इससे जल्दी और गहरी नींद आने में सहायता मिलती है।   तलवों की मालिश से मिलेगा आराम   सोने से पहले पैरों के तलवों पर सरसों के तेल या घी से हल्की मालिश करना भी फायदेमंद है। यह उपाय शरीर की थकान दूर करता है और मन को शांत करता है। आयुर्वेद में इसे बेहतर नींद के लिए असरदार तरीका माना गया है।   स्क्रीन से दूरी बनाना है जरूरी   सोने से पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है, जिससे नींद आने में दिक्कत होती है। इसलिए सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल का उपयोग बंद कर दें।   हल्का भोजन करें   रात के समय हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। भारी और तला-भुना खाना पाचन को प्रभावित करता है और नींद में बाधा डालता है। हल्का खाना शरीर को आराम देता है और बेहतर नींद में मदद करता है।   आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सहारा   ब्राह्मी और अश्वगंधा जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती हैं। ये शरीर और दिमाग को शांत करती हैं, जिससे नींद अच्छी आती है। हालांकि, इनका सेवन किसी विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।बनाते समय रखें ये खास ध्यान कोफ्ते तलते समय आंच धीमी रखें ताकि वे अंदर तक अच्छे से पकें और टूटें नहीं। साथ ही ग्रेवी को ज्यादा पतला न रखें, क्योंकि मलाई कोफ्ता गाढ़ी ग्रेवी में ही ज्यादा स्वादिष्ट लगता है।

Anjali Kumari मार्च 18, 2026 0
yogurt nutrition tips
दही के साथ नमक बेहतर या चीनी? जान लें सेहत के लिए सही ऑप्शन

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में सेहतमंद रहने के लिए विशेषज्ञ अक्सर Yogurt यानी दही को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। दही शरीर को ठंडक देता है, पाचन को बेहतर बनाता है और इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करता है। हालांकि कई लोग दही को सीधे खाने के बजाय उसमें नमक या चीनी मिलाकर खाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन दोनों में से कौन सा तरीका सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है।   दही में नमक मिलाकर खाने के फायदे कुछ लोग दही में नमक मिलाकर खाना पसंद करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज की समस्या है, तो उसके लिए दही में चीनी की जगह हल्का नमक मिलाकर खाना बेहतर माना जाता है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा नहीं रहता।हालांकि जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें दही में नमक मिलाने से बचना चाहिए। ज्यादा नमक का सेवन ब्लड प्रेशर को और बढ़ा सकता है। इसलिए ऐसे लोगों के लिए यह विकल्प सही नहीं माना जाता।   दही में चीनी मिलाकर खाने के फायदे दही में चीनी मिलाकर खाने का चलन भी काफी आम है। कई हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दही और चीनी का कॉम्बिनेशन पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है। यह पेट की समस्याओं को कम करने और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है।लेकिन जो लोग वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं या जिन्हें डायबिटीज है, उन्हें दही में चीनी मिलाकर खाने से बचना चाहिए। ज्यादा चीनी का सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकता है।   आखिर कौन सा विकल्प चुनें? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दही में नमक या चीनी मिलाने से पहले अपनी सेहत और जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों के लिए नमक वाला दही बेहतर हो सकता है, जबकि जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर है उन्हें नमक से बचना चाहिए। हालांकि सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि दही को बिना नमक या चीनी मिलाए ही खाया जाए। सादा दही खाने से इसके पोषक तत्व शरीर को पूरी तरह मिलते हैं और यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में भी मदद करता है। इसलिए अगर आप दही के पूरे स्वास्थ्य लाभ लेना चाहते हैं, तो इसे संतुलित मात्रा में और सही समय पर अपनी डाइट में शामिल करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
Raw mango benefits in summer
गर्मी में जरूर खाएं कच्चा आम, शरीर को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में कच्चे आम की बहार देखने को मिलती है। खट्टे और चटपटे स्वाद वाला कच्चा आम भारतीय घरों में चटनी, अचार और पन्ना बनाने के लिए खूब इस्तेमाल किया जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। कच्चे आम में विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। लू और डिहाइड्रेशन से बचाव गर्मियों में कच्चा आम शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। इससे बनने वाला आम पन्ना लू से बचाने में काफी कारगर माना जाता है। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन की समस्या को कम करता है। पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत कच्चे आम में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसका सेवन करने से कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। साथ ही यह पित्त के स्राव को बढ़ाकर भोजन को जल्दी पचाने में मदद करता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक कच्चा आम विटामिन C का अच्छा स्रोत है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। इसके नियमित सेवन से मौसमी बीमारियों और संक्रमण से बचाव में मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद विटामिन A आंखों और त्वचा के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। वजन कम करने में मददगार पके आम की तुलना में कच्चे आम में शुगर और कैलोरी की मात्रा कम होती है। यही वजह है कि इसे वजन कम करने वाली डाइट में भी शामिल किया जा सकता है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करता है और शरीर में फैट बर्न करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। लिवर और दांतों के लिए भी लाभकारी कच्चा आम लिवर को साफ रखने में मदद करता है और लिवर से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं इसे चबाकर खाने से मसूड़ों की समस्या और सांसों की बदबू भी कम हो सकती है। सेवन करते समय रखें सावधानी विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे आम का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए। अधिक मात्रा में खाने से गले में खराश या पेट दर्द की समस्या हो सकती है। इसे हल्के नमक या गुड़ के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
Jaljeera benefits summer
जलजीरा या शिकंजी? गर्मियों में कौन सा है बेहतर ड्रिंक, जानें दोनों के फायदे

नई दिल्ली, एजेंसियां । गर्मियों के मौसम में तेज धूप और पसीने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। ऐसे में लोग शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाले पेय पदार्थों की तलाश करते हैं। भारतीय घरों में इस जरूरत को पूरा करने के लिए अक्सर दो पारंपरिक ड्रिंक सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं Jaljeera और Shikanji। दोनों ही पेय शरीर को हाइड्रेट रखने और गर्मी से राहत देने के लिए जाने जाते हैं। हालांकि अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि गर्मियों में इन दोनों में से कौन सा ड्रिंक ज्यादा फायदेमंद है।   शिकंजी के फायदे शिकंजी मुख्य रूप से नींबू, पानी, काला नमक और मसालों से तैयार की जाती है। इसमें मौजूद लेमन शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है। शिकंजी का सेवन करने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है, जिससे थकान जल्दी दूर होती है। नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन C होता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और एसिडिटी या सीने में जलन को कम करने में भी सहायक होता है।अगर इसमें चीनी की जगह शहद मिलाया जाए तो यह मेटाबॉलिज्म को तेज कर वजन कम करने में भी मदद कर सकती है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ रखने में भी सहायक होते हैं। जलजीरा के फायदे दूसरी ओर जलजीरा एक मसालेदार और खट्टा पेय है, जिसमें जीरा, काला नमक, पुदीना और हींग जैसे मसाले मिलाए जाते हैं। इसमें मौजूद Cumin और Mint पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। जलजीरा गैस, अपच और पेट भारी होने जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। यह एक लो-कैलोरी ड्रिंक भी माना जाता है, इसलिए वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।इसके अलावा गर्मियों में लू से बचाव और शरीर को ठंडक देने में भी जलजीरा काफी असरदार माना जाता है। कौन सा है बेहतर समर ड्रिंक? अगर पेट से जुड़ी समस्या, गैस या भारीपन महसूस हो रहा है, तो जलजीरा ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। वहीं तेज धूप से आने के बाद तुरंत ऊर्जा और ताजगी चाहिए तो शिकंजी एक बेहतर विकल्प हो सकती है।

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
Fresh sliced raw onions served in salad, known for cooling benefits during summer heat
Benefits Of Eating Raw Onion: गर्मियों में कच्चा प्याज खाने के हैं कई फायदे, शरीर को रखता है ठंडा

  गर्मी का मौसम शुरू होते ही तेज धूप और बढ़ता तापमान लोगों की सेहत पर असर डालने लगता है। ऐसे में लोग ऐसी चीजें खाने की कोशिश करते हैं जो शरीर को ठंडा रखने में मदद करें। आमतौर पर माना जाता है कि Raw Onion यानी कच्चा प्याज गर्मियों में शरीर को ठंडक देने और लू से बचाने में सहायक हो सकता है।   पोषक तत्वों से भरपूर है कच्चा प्याज हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार कच्चा प्याज कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन C, फोलेट, पोटैशियम और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।   गर्मियों में शरीर को रखता है हाइड्रेट कच्चे प्याज में पानी की मात्रा अच्छी होती है, जिससे गर्म मौसम में शरीर को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है। यह शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है और डिहाइड्रेशन के खतरे को कम कर सकता है।   शरीर को देता है ठंडक गर्मियों में कच्चा प्याज अपने कूलिंग इफेक्ट के लिए जाना जाता है। इसे खाने से शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद मिलती है। यह पसीना आने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा देता है, जिससे शरीर स्वाभाविक रूप से ठंडा रहता है। इसलिए इसे सलाद या खाने के साथ साइड डिश के रूप में खाना फायदेमंद माना जाता है।   इम्यूनिटी और पाचन को बनाता है बेहतर कच्चे प्याज में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं। वहीं इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है।   ब्लड शुगर को भी रख सकता है नियंत्रित कच्चे प्याज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें मौजूद कुछ तत्व ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। इसलिए Diabetes से जूझ रहे लोग भी इसे सीमित मात्रा में अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे प्याज का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में खाने से कुछ लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Yellowing eyes and eyelids indicating possible liver disease or early liver cancer symptoms
Liver Cancer Symptoms: आंखों में दिखें ये संकेत तो हो जाएं सावधान, लिवर की बीमारी का हो सकता है संकेत

  हमारी आंखें सिर्फ देखने का माध्यम ही नहीं हैं, बल्कि कई बार शरीर में होने वाली बीमारियों के संकेत भी देती हैं। खासकर Liver Cancer और अन्य लिवर से जुड़ी बीमारियों के कुछ लक्षण आंखों में भी दिखाई दे सकते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर बीमारी से बचाव संभव हो सकता है।   शरीर में लिवर की अहम भूमिका लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने का काम करता है। लेकिन लंबे समय तक शराब का सेवन, Hepatitis B या Hepatitis C संक्रमण, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी समस्याएं लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि लिवर लंबे समय तक खराब रहता है तो यह स्थिति Cirrhosis में बदल सकती है, जो आगे चलकर लिवर फेलियर या लिवर कैंसर का कारण बन सकती है।   आंखों में दिखने वाले लिवर की बीमारी के लक्षण 1. आंखों का पीला पड़ना (पीलिया) लिवर की गंभीर बीमारी का सबसे आम लक्षण आंखों का पीला पड़ना है, जिसे Jaundice कहा जाता है। यह तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बढ़ जाता है और लिवर उसे बाहर नहीं निकाल पाता। 2. आंखों में सूखापन लिवर की समस्या के कारण शरीर में विटामिन A की कमी हो सकती है, जिससे आंखों में सूखापन और जलन की समस्या होने लगती है। 3. रात में देखने में परेशानी विटामिन A की कमी के कारण कई लोगों को रात में साफ दिखाई देने में दिक्कत होने लगती है। 4. पलकों के आसपास पीले दाग या गांठ कुछ मामलों में पलकों के आसपास पीले रंग की छोटी गांठें दिखाई देती हैं, जिन्हें Xanthelasma कहा जाता है। यह शरीर में फैट और लिवर से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है।   कब बढ़ जाता है खतरा? एक्सपर्ट्स के अनुसार जब लिवर में ट्यूमर बढ़ने लगता है, तो वह बाइल डक्ट पर दबाव डाल सकता है। इससे शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण आंखें और त्वचा पीली पड़ सकती हैं। इसके साथ ही गहरा पेशाब, खुजली, थकान और भूख कम लगना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।   समय पर जांच है जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि अगर आंखों में इस तरह के लक्षण लंबे समय तक दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में बीमारी का पता चलने पर इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से लिवर को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Person doing aerobic exercise as study links short workouts to improved brain function
सिर्फ 15 मिनट की एक्सरसाइज से तेज हो सकता है दिमाग! नई स्टडी में बड़ा खुलासा

  नियमित व्यायाम न केवल शरीर को फिट रखता है बल्कि दिमाग को भी तेज बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हाल ही में हुई एक नई रिसर्च में सामने आया है कि जैसे-जैसे व्यक्ति की फिटनेस लेवल बढ़ती है, वैसे-वैसे एक्सरसाइज के बाद दिमाग को फायदा पहुंचाने वाले प्रोटीन का स्राव भी अधिक होता है। यह अध्ययन University College London के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया और इसे प्रतिष्ठित जर्नल Brain Research में प्रकाशित किया गया है।   फिटनेस बढ़ने से दिमाग को ज्यादा फायदा रिसर्च में शुरुआत में शारीरिक रूप से कम सक्रिय लोगों को शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों को 12 सप्ताह तक सप्ताह में तीन बार साइकिलिंग करने का प्रशिक्षण दिया गया। अध्ययन के दौरान पाया गया कि जैसे-जैसे उनकी फिटनेस में सुधार हुआ, वैसे-वैसे एक्सरसाइज के बाद उनके शरीर में Brain‑Derived Neurotrophic Factor (BDNF) नामक प्रोटीन का स्तर भी बढ़ने लगा। यह प्रोटीन दिमाग की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है।   सिर्फ 15 मिनट की एक्सरसाइज भी है असरदार शोधकर्ताओं के अनुसार मध्यम से तेज गति वाली एरोबिक एक्सरसाइज के केवल 15 मिनट भी शरीर में BDNF रिलीज करने के लिए पर्याप्त होते हैं। BDNF दिमाग में नए न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिकाएं) और नए सिनैप्स यानी कोशिकाओं के बीच कनेक्शन बनाने में मदद करता है। साथ ही यह पहले से मौजूद न्यूरॉन्स को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक होता है।   12 हफ्तों में दिखा बड़ा बदलाव इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो लोग पहले कम सक्रिय थे, वे अगर लगातार 12 हफ्तों तक नियमित एक्सरसाइज करते हैं तो उनका दिमाग एक छोटी-सी 15 मिनट की एक्सरसाइज पर भी ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया देने लगता है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0