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Influenza D Virus Concern Rises

Influenza D Virus पर बढ़ी चिंता: इंसानों को संक्रमित करने की क्षमता, लेकिन शुरुआती इम्यून सिस्टम से बच निकलने में माहिर

surbhi मई 4, 2026 0
Microscopic view of Influenza D virus infecting human respiratory cells in lab research study
Influenza D Virus Human Infection Study

नई दिल्ली: दुनिया अभी तक कोविड-19 जैसी महामारी के असर से पूरी तरह उबर नहीं पाई है, ऐसे में एक नई स्टडी ने वैज्ञानिकों और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है। शोध में पाया गया है कि Influenza D virus इंसानी श्वसन तंत्र की कोशिकाओं को संक्रमित करने में सक्षम है और शुरुआती इम्यून प्रतिक्रिया से बच निकलने की क्षमता रखता है।

क्या है Influenza D Virus?

Influenza D virus आमतौर पर मवेशियों–खासकर गाय और सूअर–में पाया जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में इसके इंसानों तक पहुंचने (zoonotic spillover) की संभावना पर रिसर्च तेज हुई है, खासकर उन लोगों में जो पशुपालन या कृषि से जुड़े हैं।

रिसर्च में क्या सामने आया?

वैज्ञानिकों ने 2011 से 2020 के बीच पशुओं से लिए गए वायरस सैंपल्स पर अध्ययन किया।
इन सैंपल्स को मानव फेफड़ों की कोशिकाओं और श्वसन तंत्र जैसे लैब मॉडल्स पर टेस्ट किया गया।

नतीजे चौंकाने वाले थे:

  • वायरस ने इंसानी कोशिकाओं में प्रभावी रूप से खुद को रिप्लिकेट किया
  • कुछ मामलों में इसका स्तर Influenza A virus के बराबर पाया गया

इम्यून सिस्टम को कैसे चकमा देता है?

इस वायरस की सबसे बड़ी चिंता इसकी “चुपके से हमला” करने की क्षमता है।

  • यह शरीर के शुरुआती इम्यून रिस्पॉन्स को कमजोर कर देता है
  • खासतौर पर Interferon signaling को कम सक्रिय करता है
  • इससे शरीर को वायरस का पता देर से चलता है

हालांकि, अगर शरीर में पहले से एंटीवायरल एक्टिविटी बढ़ाई जाए, तो यह वायरस कमजोर पड़ जाता है।

क्या महामारी का खतरा है?

फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि यह वायरस इंसानों में तेजी से फैल रहा है।
लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि:

  • बहुत छोटे जेनेटिक बदलाव इसे इंसानों में फैलने लायक बना सकते हैं
  • इसकी मौजूदा क्षमता “स्पिलओवर” का संकेत देती है

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

  • पशुपालक
  • डेयरी और फार्म वर्कर्स
  • मवेशियों के संपर्क में रहने वाले लोग

इन समूहों में पहले ही एंटीबॉडी पाए जाने के संकेत मिले हैं।

आगे क्या जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • पशुओं में फैल रहे वायरस की निगरानी बढ़ानी होगी
  • इंसान और पशु के बीच संपर्क वाले क्षेत्रों पर खास ध्यान देना होगा
  • समय रहते रिसर्च और तैयारी जरूरी है
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली: मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक नया डीप लर्निंग मॉडल अब MRI स्कैन के जरिए ब्रेन ट्यूमर की पहचान को और तेज़, सटीक और भरोसेमंद बना सकता है। इस तकनीक का नाम MultiAttenNet है, जो जटिल मामलों में भी ट्यूमर को बेहतर तरीके से पहचानने में सक्षम है। कैसे काम करता है यह AI मॉडल? MultiAttenNet एक हाइब्रिड डीप लर्निंग सिस्टम है, जिसमें: मल्टी-स्केल CNN (Convolutional Neural Networks) ट्रांसफॉर्मर बेस्ड अटेंशन मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक न सिर्फ इमेज के छोटे-छोटे हिस्सों को बारीकी से समझती है, बल्कि पूरे MRI स्कैन का कॉन्टेक्स्ट भी पकड़ती है। इससे अलग-अलग आकार और अनियमित संरचना वाले ट्यूमर की पहचान आसान हो जाती है। फॉल्स पॉजिटिव कम, सटीकता ज्यादा इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है इसका “अडैप्टिव अटेंशन सिस्टम”, जो सिर्फ जरूरी हिस्सों पर फोकस करता है। इससे: गलत अलर्ट (False Positives) कम होते हैं ट्यूमर की लोकेशन और बाउंड्री ज्यादा सटीक मिलती है कितनी है सटीकता? रिसर्च के दौरान इस मॉडल का परीक्षण कई बड़े डेटासेट्स पर किया गया, जिनमें Brain Tumor Segmentation 2023 शामिल है। नतीजे बेहद प्रभावशाली रहे: Accuracy: 98.4% Sensitivity: 96.8% Specificity: 99.2% False Positive Rate: सिर्फ 1.3% यह प्रदर्शन मौजूदा कई एडवांस सिस्टम्स से बेहतर बताया जा रहा है। कम डेटा में भी असरदार इस AI मॉडल की एक खासियत यह भी है कि यह “सेमी-सुपरवाइज्ड लर्निंग” पर काम करता है। यानी: कम लेबल्ड डेटा में भी ट्रेन हो सकता है अनलेबल्ड डेटा का भी उपयोग करता है अलग-अलग क्लीनिकल परिस्थितियों में बेहतर काम करता है डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्या मतलब? ब्रेन ट्यूमर की जल्दी और सही पहचान इलाज के लिए बेहद जरूरी होती है। इस तकनीक से: डॉक्टरों का वर्कलोड कम होगा डायग्नोसिस में एकरूपता (Consistency) बढ़ेगी मरीजों को जल्दी और बेहतर इलाज मिल सकेगा

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नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के समय में सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। खाली समय मिलते ही लोग मोबाइल उठाकर रील्स या शॉर्ट वीडियो देखने लगते हैं। कई बार यह आदत इतनी बढ़ जाती है कि घंटों का समय कब निकल जाता है, इसका पता ही नहीं चलता। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार स्क्रीन देखने और रील्स स्क्रॉल करने से दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है और फोकस करने की क्षमता कम हो जाती है।   क्या है डोपामाइन और इसका असर डोपामाइन दिमाग में बनने वाला एक केमिकल है, जो खुशी और संतुष्टि का एहसास कराता है। जब हम रील्स देखते हैं, गेम खेलते हैं या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, तो दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है। यही वजह है कि बार-बार फोन चेक करने की आदत बन जाती है।लेकिन जब यह आदत जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो दिमाग हर समय उसी तरह की उत्तेजना चाहता है। इससे पढ़ाई, काम या अन्य जरूरी गतिविधियां उबाऊ लगने लगती हैं।   क्या होता है डोपामाइन डिटॉक्स डोपामाइन डिटॉक्स का मतलब डोपामाइन को खत्म करना नहीं, बल्कि उन चीजों से कुछ समय के लिए दूरी बनाना है जो तुरंत खुशी देती हैं। इसका मकसद दिमाग को रीसेट करना होता है, ताकि वह सामान्य गतिविधियों में भी रुचि लेने लगे। यह प्रक्रिया मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने और ध्यान बढ़ाने में मदद करती है।   डोपामाइन ट्रिगर्स कैसे पहचानें   डोपामाइन ट्रिगर्स वे आदतें होती हैं जो हमें तुरंत खुशी देती हैं लेकिन लंबे समय में नुकसान पहुंचाती हैं। बार-बार मोबाइल चेक करना घंटों रील्स स्क्रॉल करना काम को टालना और बाद में पछताना बिना वजह सोशल मीडिया पर समय बिताना अगर कोई आदत आपके कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो वह डोपामाइन ट्रिगर हो सकती है।   कैसे करें डोपामाइन डिटॉक्स रोज 2–4 घंटे मोबाइल से दूरी बनाएं हफ्ते में एक दिन ‘नो स्क्रीन डे’ रखें नोटिफिकेशन बंद या साइलेंट करें सोशल मीडिया से ब्रेक लें किताब पढ़ना, योग और वॉक जैसी आदतें अपनाएं लगातार रील्स देखने की आदत मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। डोपामाइन डिटॉक्स अपनाकर न केवल स्क्रीन टाइम कम किया जा सकता है, बल्कि फोकस और मानसिक शांति भी बढ़ाई जा सकती है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए फल खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है। लेकिन हर चीज की तरह फलों का सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। कई ऐसे फल हैं, जिनका जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर शरीर में गर्मी बढ़ सकती है या पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि किन फलों को सीमित मात्रा में खाना चाहिए।   आम: स्वादिष्ट लेकिन सीमित मात्रा में जरूरी आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है, लेकिन इसमें प्राकृतिक शुगर और कैलोरी काफी अधिक होती है। अधिक मात्रा में आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे मुंह में छाले, पिंपल्स और पेट में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों को खासतौर पर इसका सेवन नियंत्रित करना चाहिए।   पपीता: ज्यादा खाने से हो सकती है परेशानी पपीता पाचन के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन अधिक सेवन करने पर यह पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। कुछ लोगों में इससे एलर्जी या स्किन रिएक्शन भी हो सकता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाएं।   लीची: बढ़ा सकती है शुगर और शरीर की गर्मी लीची में शुगर की मात्रा अधिक होती है। ज्यादा लीची खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है और चक्कर, कमजोरी या सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। खासतौर पर खाली पेट इसका सेवन नुकसानदायक माना जाता है।   अंगूर: पाचन पर डाल सकता है असर अंगूर में भी प्राकृतिक शुगर अधिक होती है। इसका ज्यादा सेवन गैस, ब्लोटिंग और पेट खराब जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। कुछ लोगों में यह ब्लड शुगर को भी प्रभावित कर सकता है।   कटा हुआ तरबूज: सावधानी जरूरी तरबूज गर्मी में राहत देता है, लेकिन लंबे समय तक कटा हुआ तरबूज खुले में रखने से उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ऐसा तरबूज खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है।   संतुलन और सावधानी है जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में फल जरूर खाएं, लेकिन संतुलित मात्रा में। ताजे और साफ फलों का सेवन करें, और किसी भी फल को जरूरत से ज्यादा खाने से बचें। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर ही फल सेहत के लिए लाभकारी साबित होते हैं।

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