स्वास्थ्य

India Bans Paracetamol-Nimesulide Combination Drug

भारत में बैन है पैरासिटामोल-निमेसुलाइड का यह कॉम्बिनेशन, खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी

surbhi जून 24, 2026 0
Medicine tablets and prescription strips highlighting the banned Paracetamol-Nimesulide combination in India.
Banned Paracetamol Nimesulide Combination In India

नई दिल्ली: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना भारत में एक आम आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सेल्फ-मेडिकेशन से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि कुछ दवाओं के गलत कॉम्बिनेशन या अधिक मात्रा का सेवन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

ऐसा ही एक कॉम्बिनेशन है पैरासिटामोल और निमेसुलाइड डिस्पर्सिबल टैबलेट, जिस पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह दवा पहले बुखार और शरीर दर्द में इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन इसके संभावित दुष्प्रभावों को देखते हुए सरकार ने इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी।

क्या है पैरासिटामोल-निमेसुलाइड डिस्पर्सिबल टैबलेट?

डिस्पर्सिबल टैबलेट वह दवा होती है जिसे सेवन से पहले पानी में घोलकर लिया जाता है, ताकि उसका असर जल्दी शुरू हो सके। लेकिन शोधों में पाया गया कि पैरासिटामोल और निमेसुलाइड का यह संयोजन डिस्पर्सिबल रूप में स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत इस कॉम्बिनेशन पर प्रतिबंध लगाया है।

बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं खरीद सकते

पहले यह दवा आसानी से मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे डॉक्टर की सलाह के बिना लेना सुरक्षित नहीं माना जाता। दवा खरीदते समय उसके ब्रांड नाम के साथ लिखे जेनेरिक साल्ट्स को पढ़ना जरूरी है, ताकि आपको पता चल सके कि उसमें कौन-कौन सी दवाएं शामिल हैं।

12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित

सरकार ने 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमेसुलाइड के किसी भी फॉर्मुलेशन के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में इस दवा के दुष्प्रभाव अधिक तेजी से और गंभीर रूप में सामने आ सकते हैं।

100 मिलीग्राम से अधिक डोज की अनुमति नहीं

निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तीव्र दर्द में किया जाता है। सरकार ने दवा निर्माता कंपनियों को निर्देश दिया है कि किसी भी ओरल दवा में इसकी मात्रा 100 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।

लिवर के लिए बन सकती है खतरा

विभिन्न शोधों में निमेसुलाइड के संभावित दुष्प्रभावों पर चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका गलत या लंबे समय तक इस्तेमाल लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और कुछ मामलों में एक्यूट हेपेटाइटिस जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है।

इसी वजह से कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस दवा के अनियंत्रित उपयोग के खिलाफ चेतावनी देते रहे हैं।

दवा लेने से पहले रखें ये बातें ध्यान में

  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक दवा न लें।
  • दवा के पैकेट पर लिखे साल्ट्स जरूर पढ़ें।
  • बच्चों को किसी भी दवा का सेवन कराने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • निर्धारित डोज से अधिक दवा लेने से बचें।
  • किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

स्वास्थ्य

View more
Medicine tablets and prescription strips highlighting the banned Paracetamol-Nimesulide combination in India.
भारत में बैन है पैरासिटामोल-निमेसुलाइड का यह कॉम्बिनेशन, खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी

नई दिल्ली: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना भारत में एक आम आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सेल्फ-मेडिकेशन से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि कुछ दवाओं के गलत कॉम्बिनेशन या अधिक मात्रा का सेवन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा ही एक कॉम्बिनेशन है पैरासिटामोल और निमेसुलाइड डिस्पर्सिबल टैबलेट, जिस पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह दवा पहले बुखार और शरीर दर्द में इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन इसके संभावित दुष्प्रभावों को देखते हुए सरकार ने इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी। क्या है पैरासिटामोल-निमेसुलाइड डिस्पर्सिबल टैबलेट? डिस्पर्सिबल टैबलेट वह दवा होती है जिसे सेवन से पहले पानी में घोलकर लिया जाता है, ताकि उसका असर जल्दी शुरू हो सके। लेकिन शोधों में पाया गया कि पैरासिटामोल और निमेसुलाइड का यह संयोजन डिस्पर्सिबल रूप में स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत इस कॉम्बिनेशन पर प्रतिबंध लगाया है। बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं खरीद सकते पहले यह दवा आसानी से मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे डॉक्टर की सलाह के बिना लेना सुरक्षित नहीं माना जाता। दवा खरीदते समय उसके ब्रांड नाम के साथ लिखे जेनेरिक साल्ट्स को पढ़ना जरूरी है, ताकि आपको पता चल सके कि उसमें कौन-कौन सी दवाएं शामिल हैं। 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित सरकार ने 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमेसुलाइड के किसी भी फॉर्मुलेशन के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में इस दवा के दुष्प्रभाव अधिक तेजी से और गंभीर रूप में सामने आ सकते हैं। 100 मिलीग्राम से अधिक डोज की अनुमति नहीं निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तीव्र दर्द में किया जाता है। सरकार ने दवा निर्माता कंपनियों को निर्देश दिया है कि किसी भी ओरल दवा में इसकी मात्रा 100 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। लिवर के लिए बन सकती है खतरा विभिन्न शोधों में निमेसुलाइड के संभावित दुष्प्रभावों पर चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका गलत या लंबे समय तक इस्तेमाल लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और कुछ मामलों में एक्यूट हेपेटाइटिस जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है। इसी वजह से कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस दवा के अनियंत्रित उपयोग के खिलाफ चेतावनी देते रहे हैं। दवा लेने से पहले रखें ये बातें ध्यान में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक दवा न लें। दवा के पैकेट पर लिखे साल्ट्स जरूर पढ़ें। बच्चों को किसी भी दवा का सेवन कराने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। निर्धारित डोज से अधिक दवा लेने से बचें। किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

surbhi जून 24, 2026 0
A bowl of ice cream served after dinner, highlighting its effects on digestion and overall health.

क्या आप भी डिनर के बाद रोज खाते हैं आइसक्रीम? बढ़ सकता है ब्लोटिंग और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा

Alia Bhatt holding her electrolyte water bottle during a show appearance with Samay Raina.

Alia Bhatt के इलेक्ट्रोलाइट्स वाले पानी पर समय रैना का मजेदार तंज, जानिए आखिर क्या है इसकी खासियत और कैसे बनाएं घर पर

Person practicing deep breathing and relaxation techniques to reduce stress and control cortisol levels.

सिर्फ 3 मिनट का तनाव भी पहुंचा सकता है नुकसान, बढ़ सकता है बीपी और कॉर्टिसोल लेवल, जानें कैसे करें स्ट्रेस मैनेज

Red skin rashes and itching after sun exposure indicating possible sun allergy symptoms.
धूप में निकलते ही होने लगती है खुजली और लाल चकत्ते? जानिए कहीं यह सन एलर्जी का संकेत तो नहीं

गर्मी के मौसम में तेज धूप से बचने की सलाह हर किसी को दी जाती है, क्योंकि इससे सनबर्न, टैनिंग और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए धूप सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर त्वचा समस्या का कारण बन जाती है। यदि धूप में निकलते ही आपकी त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं, तो यह सन एलर्जी (Sun Allergy) का संकेत हो सकता है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, सन एलर्जी केवल धूप से होने वाली सामान्य परेशानी नहीं है, बल्कि यह शरीर के इम्यून सिस्टम की सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया होती है। इससे त्वचा में सूजन, रैशेज और अन्य लक्षण विकसित हो सकते हैं। क्या होती है सन एलर्जी? सन एलर्जी ऐसी स्थिति है, जिसमें सूर्य की किरणों के संपर्क में आने के बाद त्वचा जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगती है। इसका सबसे सामान्य प्रकार पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (Polymorphous Light Eruption) कहलाता है, जिसमें धूप के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर खुजली वाले लाल दाने दिखाई देते हैं। सन एलर्जी के प्रमुख प्रकार 1. पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (PMLE) यह सन एलर्जी का सबसे आम प्रकार है। इसमें हाथ, गर्दन और छाती जैसे हिस्सों पर खुजली वाले लाल दाने निकल आते हैं। यह समस्या महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है। 2. एक्टिनिक प्रुरिगो इस स्थिति में त्वचा पर अत्यधिक खुजली वाले दाने हो सकते हैं और यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। 3. फोटोएलर्जिक रिएक्शन कुछ सनस्क्रीन, परफ्यूम या स्किनकेयर उत्पाद धूप के साथ मिलकर त्वचा पर एलर्जी पैदा कर सकते हैं। 4. सोलर अर्टिकेरिया (Sun Hives) यह सन एलर्जी का गंभीर रूप है, जिसमें धूप के संपर्क में आने के कुछ ही मिनटों के भीतर त्वचा पर पित्ती या उभरे हुए खुजलीदार निशान दिखाई देने लगते हैं। 5. दवाओं के कारण होने वाली संवेदनशीलता कुछ एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं और मुंहासों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती हैं। किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा? हल्के रंग की त्वचा वाले लोग जिनके परिवार में सन एलर्जी का इतिहास हो कुछ विशेष दवाओं का सेवन करने वाले लोग ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित मरीज सन एलर्जी के सामान्य लक्षण धूप में जाने के बाद खुजली होना त्वचा पर लाल चकत्ते या रैशेज सूजन और जलन छोटे दाने या छाले कुछ मामलों में पित्ती (Hives) ये लक्षण मुख्य रूप से चेहरे, गर्दन, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर दिखाई देते हैं। कब लें डॉक्टर की सलाह? यदि धूप में जाने के बाद बार-बार त्वचा पर रैशेज या एलर्जी की समस्या हो रही है और इससे आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर उपचार और उचित सावधानियों से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय तेज धूप में निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें। SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करें। दोपहर की तेज धूप से बचें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करें। यदि कोई स्किनकेयर प्रोडक्ट एलर्जी पैदा कर रहा हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें। त्वचा पर धूप के कारण होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से सन एलर्जी के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और त्वचा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Blood sugar testing and healthy lifestyle habits explained for better diabetes management.

मीठा छोड़ने के बाद भी कंट्रोल नहीं हो रहा ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज मैनेज करने का सही तरीका

Thyroid Eye Disease

थायरॉइड का असर सिर्फ हार्मोन तक सीमित नहीं, आंखों की रोशनी पर भी पड़ सकता है गंभीर प्रभाव

Fresh guava, avocado, jackfruit, blackberries and apricots displayed as healthy fruits rich in nutrients and protein.

कभी सोचा नहीं होगा, अमरूद से भी मिलता है प्रोटीन! जानिए ताकत बढ़ाने वाले 5 फलों के बारे में

Rice Consumption Tips
क्या चावल छोड़ना सच में फायदेमंद है? जानिए शरीर पर इसके असर, फायदे और नुकसान

नई दिल्ली,एजेंसियां। चावल भारतीय भोजन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन वजन घटाने और फिट रहने की कोशिश में कई लोग इसे अपनी डाइट से हटा देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, चावल पूरी तरह छोड़ने का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है और यह उसकी उम्र, स्वास्थ्य और जीवनशैली पर निर्भर करता है। चावल कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्रोत है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसलिए इसे अचानक बंद करने से शरीर में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।   चावल छोड़ने के संभावित फायदे विशेषज्ञों के मुताबिक, चावल की मात्रा कम करने से कुल कैलोरी इनटेक घटता है, जिससे कुछ लोगों का वजन कम हो सकता है। इसके अलावा, कुछ मामलों में ब्लड शुगर नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है, खासकर जब पूरी डाइट संतुलित हो।   नुकसान भी हो सकते हैं नजरअंदाज नहीं चावल छोड़ने से शरीर में ऊर्जा की कमी, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है, क्योंकि कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा का मुख्य स्रोत हैं। अगर इसकी जगह पर्याप्त फाइबर युक्त भोजन नहीं लिया जाए तो पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में ब्राउन राइस या रेड राइस बेहतर विकल्प माने जाते हैं।   किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए डायबिटीज के मरीज, एथलीट, बच्चे, किशोर और गर्भवती महिलाओं को बिना विशेषज्ञ की सलाह के अपनी डाइट में बड़ा बदलाव नहीं करना चाहिए। इन लोगों के लिए संतुलित कार्बोहाइड्रेट जरूरी होता है।   विशेषज्ञों की राय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चावल को पूरी तरह छोड़ने की बजाय उसकी मात्रा और प्रकार पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर है। संतुलित आहार में चावल को सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। कुल मिलाकर, चावल छोड़ना हर किसी के लिए जरूरी या फायदेमंद नहीं है, बल्कि सही डाइट बैलेंस बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Tulsi Ginger Decoction

Monsoon Health Tips: बारिश में बीमारियों से बचाएंगे ये 4 इम्युनिटी बूस्टर काढ़े, घर पर मिनटों में करें तैयार

Cup of green tea with fresh leaves highlighting benefits for oral health and brain function.

सिर्फ वजन घटाने के लिए नहीं, दांतों और दिमाग के लिए भी फायदेमंद है ग्रीन टी, जानिए इसके बड़े लाभ

Doctor explaining ovarian cancer myths and symptoms to women during a health awareness consultation.

हर ओवेरियन सिस्ट कैंसर नहीं होती! जानिए महिलाओं में फैली 5 बड़ी गलतफहमियों की सच्चाई

0 Comments

Top week

झारखंड

वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?