नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देश में श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। New Labour Codes के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले कई महत्वपूर्ण अधिकारों को आसान और तेज बनाया गया है। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर ग्रेच्युटी (Gratuity) और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (F&F) पर पड़ा है। 1 साल में ही मिलेगा ग्रेच्युटी का लाभ अब तक किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक लगातार नौकरी करना जरूरी होता था। लेकिन नए नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में यह अवधि घटाकर 1 साल कर दी गई है। इस बदलाव से खासतौर पर उन कर्मचारियों को फायदा होगा जो कम अवधि के लिए नौकरी करते हैं या बार-बार जॉब बदलते हैं। 2 दिन में करना होगा F&F सेटलमेंट Code on Wages, 2019 के तहत अब कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने के बाद सिर्फ 2 कार्यदिवस के भीतर उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा। इसमें शामिल होंगे: बकाया वेतन लीव इनकैशमेंट अन्य सभी भुगतान पहले कंपनियों को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए 45 से 90 दिन तक का समय मिल जाता था। सभी परिस्थितियों में लागू होगा नियम यह नया नियम हर स्थिति में लागू होगा: कर्मचारी का इस्तीफा रिटायरमेंट छंटनी (Layoff) अगर कोई कंपनी इस नियम का पालन नहीं करती, तो यह कानूनी उल्लंघन माना जाएगा। कर्मचारी इसके खिलाफ श्रम विभाग में शिकायत कर सकता है और देरी से भुगतान पर ब्याज का दावा भी कर सकता है। 30 दिनों में मिलेगा ग्रेच्युटी भुगतान ग्रेच्युटी के लिए पात्र बनने के बाद कंपनी को 30 दिनों के भीतर इसका भुगतान करना अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के बाद आर्थिक राहत जल्दी मिलेगी। कर्मचारियों के लिए क्या मायने हैं ये बदलाव? इन नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा, पारदर्शिता और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। ग्रेच्युटी अब ज्यादा लोगों के लिए सुलभ होगी नौकरी छोड़ने के बाद पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी
भारत के आईटी नियमों और कंटेंट टेकडाउन पॉलिसी को लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की ताज़ा नेशनल ट्रेड एस्टीमेट रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के डिजिटल नियम विदेशी टेक कंपनियों के लिए व्यापार में बाधा बन रहे हैं। वहीं भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि देश का ‘सामाजिक ताना-बाना’ और सुरक्षा, व्यापारिक हितों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। अमेरिका की क्या हैं आपत्तियां? USTR की रिपोर्ट में भारत के डिजिटल नियमों पर कई सवाल उठाए गए हैं: कंटेंट हटाने की समय सीमा अव्यावहारिक बताई गई नियम तोड़ने पर कंपनी अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को जोखिमपूर्ण बताया कंटेंट टेकडाउन आदेशों में तेजी और कथित ‘राजनीतिक प्रेरणा’ पर चिंता डेटा गवर्नेंस और इंटरनेट शटडाउन को डिजिटल व्यापार के लिए बाधा बताया रिपोर्ट के अनुसार, ये नियम ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए भारत में काम करना कठिन बना सकते हैं। भारत का जवाब: ‘सोशल फैब्रिक’ सबसे ऊपर भारत सरकार ने अमेरिकी रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा: “हमारे लिए अपने सामाजिक ताने-बाने की रक्षा करना, किसी भी कंपनी के व्यावसायिक हितों से ज्यादा जरूरी है।” सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि: डीपफेक और फेक न्यूज एक गंभीर खतरा बन चुके हैं सरकार का उद्देश्य इंटरनेट को सुरक्षित और जिम्मेदार बनाना है दुनिया भर में प्लेटफॉर्म भी ऐसे कंटेंट पर सख्ती कर रहे हैं IT नियमों में क्या बदलाव हुए? हाल ही में भारत ने IT नियमों में कुछ अहम संशोधन किए हैं: केवल वरिष्ठ अधिकारी ही टेकडाउन आदेश जारी कर सकते हैं आदेश के लिए स्पष्ट कानूनी आधार देना अनिवार्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तेजी से कार्रवाई करनी होगी ‘डिजिटल संप्रभुता’ बनाम ‘ट्रेड हित’ पॉलिसी विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद दो अलग सोच के बीच है: अमेरिका: खुला डिजिटल बाजार और कंपनियों की स्वतंत्रता भारत: डिजिटल संप्रभुता और सामाजिक सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विकासशील देशों के नियामक फैसलों को अक्सर विकसित देशों के नजरिए से आंका जाता है, जिससे ऐसे विवाद सामने आते हैं।
अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर लगभग 90 मिनट तक ऐसा आक्रामक और रणनीतिक भाषण दिया, जिसने पूरे सदन का माहौल बदल दिया। उनका यह संबोधन केवल एक राजनीतिक जवाब नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित सियासी हमला था, जिसमें उन्होंने आंकड़ों, इतिहास और तर्कों के जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की। खामोशी से शुरुआत, रणनीति की तैयारी भाषण देने से करीब दो घंटे पहले ही अमित शाह सदन में मौजूद थे। वे शांत बैठकर हर वक्ता की बात ध्यान से सुन रहे थे और अहम बिंदुओं को नोट कर रहे थे। इस दौरान विपक्ष की बेंच काफी हद तक खाली दिखीं- Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और Dimple Yadav जैसे बड़े चेहरे मौजूद नहीं थे। बहस के बीच भावनात्मक मोड़ बीजेपी सांसद Nishikant Dubey ने अपने परिवार की निजी त्रासदी का जिक्र किया, जिसमें उनके दादा की नक्सलियों द्वारा हत्या की बात सामने आई। इससे बहस का माहौल भावनात्मक हो गया। वहीं अभिनेत्री और सांसद Kangana Ranaut ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, जिससे सदन में हंगामा भी हुआ। 6:04 बजे शुरू हुआ ‘मुख्य प्रहार’ शाम 6:04 बजे अमित शाह बोलने के लिए खड़े हुए और सीधे इतिहास से शुरुआत की। उन्होंने Indira Gandhi पर नक्सल विचारधारा को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया, जिस पर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। ‘गरीबी नहीं, नक्सलवाद से फैली गरीबी’ अपने भाषण के दौरान शाह ने विपक्ष के तर्क को पलटते हुए कहा: “नक्सलवाद गरीबी की वजह से नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद की वजह से गरीबी फैली।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नक्सल हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी- “जो हथियार उठाएंगे, उन्हें समझाया जाएगा, नहीं मानेंगे तो बल का इस्तेमाल होगा।” तारीख, डेटा और रणनीतिक रोडमैप अमित शाह ने अपने तर्कों को मजबूत करने के लिए कई अहम तारीखें पेश कीं: 20 अगस्त 2019: पुनर्वास और मुख्यधारा में लाने की नीति की शुरुआत 24 अगस्त 2024: भारत को 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य उन्होंने दावा किया कि सरकार की रणनीति और लगातार कार्रवाई से देश नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। 90 मिनट में बदला पूरा माहौल करीब 7:25 बजे जब उनका भाषण खत्म हुआ, तब तक सदन में कई बार हंगामा और नारेबाजी हो चुकी थी। लेकिन यह साफ था कि अमित शाह ने बहस की दिशा तय कर दी थी। उनका यह भाषण एक राजनीतिक प्रदर्शन जैसा था-जो खामोशी से शुरू हुआ और आक्रामक अंदाज में खत्म हुआ।
पटना/नालंदा, 31 मार्च 2026: बिहार के नालंदा जिले में स्थित Sheetla Temple में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक धार्मिक आयोजन के दौरान भारी भीड़ उमड़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 8 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। क्या हुआ था घटनास्थल पर? मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। भीड़ इतनी अधिक हो गई कि हालात बेकाबू हो गए और अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और दबने से यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ गई। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मौके से सामने आई तस्वीरों में मंदिर परिसर में भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल साफ देखा जा सकता है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पिछले साल Sri Venkateswara Swamy Temple में भी भगदड़ में 9 लोगों की मौत हो गई थी। बड़ा सवाल: सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठ रहे सवाल? यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते।
नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हुई अहम सर्वदलीय बैठक में भारत ने अपनी कूटनीतिक स्थिति साफ कर दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट कहा कि भारत वैश्विक राजनीति में “दलाल देश” की भूमिका नहीं निभा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब Shehbaz Sharif ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश करते हुए बातचीत की मेजबानी की इच्छा जताई है। बैठक में क्या हुआ? यह उच्चस्तरीय बैठक रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें गृह मंत्री Amit Shah, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सरकार ने विपक्ष को जानकारी दी कि भारत की प्राथमिकता इस समय दो अहम मुद्दे हैं: खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना पाकिस्तान की भूमिका पर सरकार का जवाब बैठक में विपक्ष ने पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर सवाल उठाए। इस पर S. Jaishankar ने कहा कि पाकिस्तान का यह रोल नया नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 1980 के दशक से ही अमेरिका-ईरान संवाद में पाकिस्तान एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को “नई रणनीति” के रूप में देखना सही नहीं होगा। कूटनीतिक स्तर पर भारत की पहल सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से बातचीत में स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को जल्द समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका असर सभी देशों पर पड़ रहा है। भारत ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी है और आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्थिति और बढ़ती जटिलता पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को और जटिल बना दिया है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये बैकचैनल कूटनीति में सक्रिय बताए जा रहे हैं ईरान ने सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार किया है अमेरिका ने सीमित समय के लिए हमलों पर रोक के संकेत दिए हैं इस बीच, क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर पड़ रहा है। सरकार बनाम विपक्ष: आरोप-प्रत्यारोप जहां सरकार ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता का बचाव किया, वहीं विपक्ष ने इसे “अपर्याप्त प्रतिक्रिया” बताया और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
LPG सिलेंडर बुकिंग को लेकर सोशल मीडिया और कुछ खबरों में फैल रही नई नियमों की चर्चाओं पर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। सरकार ने कहा है कि LPG बुकिंग को लेकर कोई नया नियम लागू नहीं किया गया है और पुरानी व्यवस्था ही जारी है। क्या था वायरल दावा? कुछ रिपोर्ट्स और पोस्ट में कहा जा रहा था कि: उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थियों को 45 दिन इंतजार करना होगा अन्य उपभोक्ताओं के लिए 25 या 35 दिन का अलग नियम लागू होगा सरकार ने इन सभी दावों को भ्रामक और गलत बताया है। क्या हैं असली नियम? सरकार के मुताबिक LPG बुकिंग के लिए पहले से लागू नियम ही जारी हैं: शहरी क्षेत्रों में: 25 दिन बाद बुकिंग ग्रामीण क्षेत्रों में: 45 दिन बाद बुकिंग यह नियम सभी उपभोक्ताओं पर समान रूप से लागू होता है, इसमें कोई अलग कैटेगरी नहीं है। जल्दी बुकिंग करने पर क्या होगा? अगर कोई उपभोक्ता तय समय से पहले गैस बुक करने की कोशिश करता है: सिस्टम अपने आप बुकिंग को ब्लॉक कर देगा यह समय पिछली डिलीवरी की तारीख से गिना जाता है गैस की कमी पर क्या बोली सरकार? सरकार ने साफ किया: देश में LPG की कोई कमी नहीं है सभी उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध है लोगों को घबराकर बार-बार बुकिंग करने की जरूरत नहीं अंतरराष्ट्रीय स्थिति का असर रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। क्या रखें ध्यान? सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचें तय समय के बाद ही LPG बुकिंग करें
पूर्वी सिहंभूम। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड में सुवर्णरेखा नदी किनारे द्वितीय विश्व युद्ध काल का 227 किलोग्राम वजनी बम मिलने से हड़कंप मच गया है। दशकों पुराना यह अनएक्सप्लोडेड ऑर्डिनेंस (UXO) आज भी बेहद खतरनाक बताया जा रहा है। सेना ने संभाली कमान मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की स्पेशल बम निरोधक टीम मौके पर पहुंच चुकी है। लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने ऑपरेशन की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को इस बम को निष्क्रिय करने के लिए हाई-रिस्क डिफ्यूज ऑपरेशन चलाया जाएगा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुरक्षा के मद्देनजर बम स्थल के एक किलोमीटर दायरे को पूरी तरह खाली करा लिया गया है। इलाके में नो-एंट्री लागू कर दी गई है और बैरिकेडिंग की गई है। साथ ही पश्चिम बंगाल सीमा से सटे गांवों को भी अलर्ट पर रखा गया है। ऑपरेशन के दौरान हवाई गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। ऐसे किया जा रहा है सुरक्षित बम को निष्क्रिय करने के लिए उसके चारों ओर बालू भरी बोरियों का घेरा बनाया गया है और करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में सुरक्षित रखा गया है, ताकि संभावित विस्फोट की ऊर्जा जमीन के भीतर ही सीमित रहे। रिमोट से होगा ऑपरेशन जानकारी के मुताबिक, यह डिफ्यूज ऑपरेशन करीब एक किलोमीटर दूर से रिमोट सिस्टम के जरिए किया जाएगा, जिससे किसी भी खतरे की स्थिति में जोखिम कम किया जा सके। आठ दिन पहले चला था पता करीब आठ दिन पहले स्थानीय लोगों ने इस बम को देखा था, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने तुरंत सेना को सूचना दी। बम पर “AN-M64 500-LB American Made” अंकित है, जिससे इसकी पहचान द्वितीय विश्व युद्ध के बम के रूप में हुई है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रियों और उनके परिवार के चिकित्सा खर्च को लेकर सख्त कदम उठाया है। अब राज्य के बाहर किसी भी अस्पताल में इलाज कराने से पहले मुख्यमंत्री से पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा। इस संबंध में गृह विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसे कोलकाता गजट में प्रकाशित किया गया है। नए नियम के तहत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री इसके दायरे में आएंगे। साथ ही उनके कुछ परिजनों को भी इस सुविधा में शामिल किया गया है। क्यों लिया गया फैसला? सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य चिकित्सा खर्चों पर नियंत्रण रखना और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। अधिकारियों के मुताबिक, हाल के वर्षों में कुछ मामलों में बिना गंभीर बीमारी के भी अन्य राज्यों में इलाज कराकर भारी-भरकम बिल जमा किए गए थे, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। पहले क्या थी व्यवस्था? पहले मंत्रियों को राज्य के बाहर इलाज कराने के लिए किसी तरह की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं थी। इसी कारण कई बार मेडिकल खर्च को लेकर विवाद भी सामने आए थे। किन पर लागू होगा नियम? इस नई व्यवस्था में मंत्रियों के परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल होंगे, जैसे: अविवाहित बेटियां आश्रित माता-पिता 18 वर्ष तक के आश्रित भाई-बहन किन अस्पतालों में मिलेगा लाभ? अब चिकित्सा सुविधाओं का दायरा बढ़ा दिया गया है। इसमें शामिल हैं: सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त अस्पताल पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2017 के तहत पंजीकृत निजी अस्पताल और नर्सिंग होम कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी शामिल? नई व्यवस्था के तहत निम्न सेवाएं कवर होंगी: डॉक्टर से परामर्श पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच दवाएं और टीकाकरण सर्जरी और दंत चिकित्सा खर्च कैसे होगा कवर? सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह मुफ्त रहेगा निजी या पंजीकृत अस्पतालों में इलाज पर सरकार खर्च वहन करेगी या प्रतिपूर्ति देगी इसके अलावा डॉक्टर के निजी चैंबर, मंत्री आवास पर इलाज, अस्पताल के उच्च श्रेणी के वार्ड और विशेष नर्सिंग सेवाओं का खर्च भी योजना के तहत कवर किया जाएगा।
सरायकेला: झारखंड के सारंडा क्षेत्र से एक बार फिर विकास कार्यों की वास्तविक तस्वीर सामने आई है। कोल्हान रक्षा संघ द्वारा नोवामुंडी प्रखंड के पोखरिया गांव में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। इस दौरान वन अधिकार से लेकर कुपोषण, पेंशन, रोजगार और शिक्षा तक कई गंभीर मुद्दे सामने आए, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए। वन अधिकारों से वंचित ग्रामीण बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा वन पट्टा का रहा। ग्रामीणों ने बताया कि राजस्व गांव होने के बावजूद उन्हें अब तक वन अधिकार नहीं मिला है। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आने के बावजूद संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी पर लोगों ने गहरा आक्रोश जताया। कुपोषण की भयावह स्थिति गांव में महिलाओं और बच्चों के बीच कुपोषण की स्थिति चिंताजनक पाई गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पोषाहार केंद्र से नियमित रूप से भोजन नहीं मिल रहा है। बच्चों और महिलाओं में कुपोषण के स्पष्ट लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करते हैं। योजनाएं कागजों तक सीमित? ‘मंईयां सम्मान योजना’ को लेकर भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 300 पात्र महिलाओं में से सिर्फ एक को ही योजना का लाभ मिला है। इससे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। घटती औसत आयु बना चिंता का विषय बैठक में यह तथ्य सामने आया कि क्षेत्र में लोगों की औसत आयु काफी कम है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीच 48 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या बेहद कम पाई गई। विशेषज्ञ इसे कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जोड़कर देख रहे हैं। पेंशन और रोजगार का संकट वृद्धावस्था पेंशन कई महीनों से बंद होने की शिकायत सामने आई। वहीं रोजगार के अभाव में ग्रामीण जंगल से पत्ता, लकड़ी और दातुन बेचकर जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन वन विभाग की कार्रवाई का डर इस जीविका को भी अस्थिर बना रहा है। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली शिक्षा के क्षेत्र में भी हालात बेहद खराब हैं। पूरे गांव में केवल एक स्कूल है, जो एक पारा शिक्षक के भरोसे चल रहा है। यह स्थिति ग्रामीण शिक्षा तंत्र की जमीनी चुनौतियों को उजागर करती है। बैठक में कौन-कौन रहे शामिल? इस बैठक की अध्यक्षता डिबार जोंकों ने की। इसके अलावा कई सामाजिक कार्यकर्ता और मुंडा-माणकी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और अपनी समस्याएं साझा कीं। बड़ा सवाल: क्या बदलेगी तस्वीर? कोल्हान रक्षा संघ की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि सारंडा जैसे सुदूर इलाकों में विकास योजनाओं का लाभ अभी भी पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करेगा या फिर ये समस्याएं यूं ही बनी रहेंगी।
घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, निजी नावों पर रोक; देव सूर्य मंदिर में भीड़ को देखते हुए खास व्यवस्था आस्था के महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन बिहार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर बड़े बदलाव किए हैं। राजधानी पटना से लेकर औरंगाबाद के प्रसिद्ध देव सूर्य मंदिर तक विशेष इंतजाम लागू किए गए हैं। पटना में कड़े सुरक्षा इंतजाम जिला प्रशासन ने शहर के 164 स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। करीब 287 दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी तैनात किए गए हैं, जो 18 सेक्टरों में विभाजित होकर निगरानी कर रहे हैं। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक मैनेजमेंट और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। नदियों में निजी नावों पर पूरी तरह रोक 22 मार्च की शाम से लेकर 25 मार्च तक नदियों में निजी नावों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। घाटों पर SDRF और NDRF की टीमें, गोताखोर, मेडिकल स्टाफ और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। आपात स्थिति के लिए जिला नियंत्रण कक्ष और डायल 112 को सक्रिय रखा गया है। जानिए पटना का नया ट्रैफिक प्लान चैती छठ के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं- अशोक राजपथ के सभी एंट्री प्वाइंट बंद कारगिल चौक से दीदारगंज तक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद जेपी गंगा पथ पर आवागमन और पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित जेपी सेतु पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक दीघा मोड़ से आशियाना मोड़ की ओर गाड़ियों के आवागमन पर रोक सोनपुर, छपरा और हाजीपुर जाने के लिए महात्मा गांधी सेतु का इस्तेमाल करने की सलाह छठ व्रतियों के लिए कुछ विशेष रूट तय किए गए हैं, जबकि आम वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से जाने को कहा गया है। देव सूर्य मंदिर, औरंगाबाद में खास व्यवस्था औरंगाबाद स्थित देव सूर्य मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर के पास वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। मंदिर से पहले ही अलग-अलग जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था पार्किंग से मंदिर तक 3-5 KM के लिए प्रशासनिक वाहन उपलब्ध पूरे मार्ग में सिविल वॉलंटियर्स और स्काउट्स तैनात श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घर से निकलने से पहले ट्रैफिक प्लान जरूर देख लें, तय रूट का पालन करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सावधानी बरतें।
नई तकनीक के सहारे सबूत सुरक्षित, निगरानी विभाग ने तेज की कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब कार्रवाई और तेज होती नजर आ रही है। राज्य के संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने करीब 200 आरोपित अफसरों की डिजिटल फाइल तैयार कर ली है। इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और दोषियों को जल्द सजा दिलाना है। तकनीक के सहारे मजबूत हुई जांच भ्रष्टाचार के मामलों में अक्सर सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में देरी की शिकायतें आती रही हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। निगरानी विभाग ने लगभग 7 लाख रुपये की लागत से एक विशेष ‘ओपन टेक्स्ट फॉरेंसिक इमेजर’ मशीन को शामिल किया है। यह मशीन जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों-जैसे पेन ड्राइव, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों-का सटीक क्लोन तैयार करती है। एक बार डेटा इसमें सुरक्षित हो जाने के बाद उसमें किसी तरह का बदलाव संभव नहीं होता, जिससे जांच की विश्वसनीयता बढ़ गई है। 200 अफसरों की तैयार हुई प्रोफाइल इसी तकनीक के माध्यम से अब तक करीब 200 संदिग्ध अफसरों और कर्मचारियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर लिया गया है। इसमें उनके खिलाफ मौजूद साक्ष्य और केस से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां शामिल हैं। इसके लिए विशेषज्ञों और तकनीशियनों की अलग टीम भी तैनात की गई है, जो डेटा को सुरक्षित रखने और कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित कर रही है। स्पीडी ट्रायल के लिए बनी खास टीम मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एसपी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में 10 सदस्यों की एक विशेष टीम गठित की गई है। इस टीम में डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। टीम का मुख्य काम मामलों की नियमित निगरानी करना और गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना है, ताकि सुनवाई में देरी न हो। कोर्ट को सौंपी गई आरोपितों की सूची निगरानी विभाग ने 200 आरोपित अफसरों की सूची अदालत को भी सौंप दी है। इससे अब मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। 25 साल में पहली बार इतनी सख्ती गौरतलब है कि वर्ष 2025 में 29 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को सजा सुनाई गई, जो पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक है। इसे निगरानी विभाग की सख्त कार्रवाई और बेहतर समन्वय का परिणाम माना जा रहा है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने विदाई भाषण में जहां 54 वर्षों के लंबे संसदीय अनुभव को साझा किया, वहीं माहौल को हल्का बनाने वाला एक बयान भी दे दिया, जिस पर सदन में मुस्कान छा गई-यहां तक कि नरेंद्र मोदी भी हंसी नहीं रोक सके। खड़गे ने अपने संबोधन की शुरुआत भावुक अंदाज़ में करते हुए कहा कि विदाई का पल हमेशा कठिन होता है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कोई भी व्यक्ति वास्तव में “रिटायर” नहीं होता। उन्होंने माना कि दशकों के अनुभव के बाद भी सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। हल्के अंदाज़ में सियासी टिप्पणी अपने भाषण के दौरान खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का जिक्र करते हुए चुटकी ली- “देवगौड़ा जी ने मोहब्बत हमसे की और शादी मोदी जी के साथ कर ली।” उनकी इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे और माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया। साथियों के योगदान का जिक्र खड़गे ने कई वरिष्ठ सांसदों के योगदान को याद किया। उन्होंने रामदास अठावले की खास शैली और कविताओं का उल्लेख किया, वहीं शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी जैसे साथियों की तैयारी और सक्रियता की सराहना की। संसदीय मर्यादा पर जोर अपने भाषण के अंत में खड़गे ने सदन में सहयोग और शालीनता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संवाद और आपसी समझ ही संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं, जबकि दूरी और टकराव से गलतफहमियां बढ़ती हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा के 37 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इस मौके पर खड़गे ने उम्मीद जताई कि जाने वाले सदस्य आगे भी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में योगदान देते रहेंगे।
झारखंड के चतरा जिले से एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक जवान ने अपने ही सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे कैंप में हड़कंप मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंप में देर रात चली गोली, मचा हड़कंप यह घटना चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र स्थित शिला ओपी पिकेट की है, जहां सशस्त्र सीमा बल की 35वीं बटालियन तैनात है। मंगलवार रात करीब 10 बजे अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। साथी जवान जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि जवान खून से लथपथ पड़ा हुआ था। मृतक की पहचान देवघर जिले के रहने वाले प्रह्लाद कुमार सिंह के रूप में हुई है। सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जवान ने अपनी ही सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। घटना के तुरंत बाद पुलिस और SSB के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी गई। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चतरा सदर अस्पताल भेज दिया गया है। परिवार में मचा कोहराम बुधवार सुबह जैसे ही जवान का शव अस्पताल पहुंचा, परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक के भाई ने बताया कि मंगलवार शाम को ही उनकी आखिरी बातचीत हुई थी और उस समय सब कुछ सामान्य लग रहा था। अचानक इस घटना की खबर मिलने से पूरा परिवार सदमे में है। ‘क्रिकेट खेलने जा रहा हूं’ कहकर निकले थे परिजनों के अनुसार, घटना के दिन शाम करीब 5 बजे प्रह्लाद सिंह ने फोन पर बताया था कि वे क्रिकेट खेलने जा रहे हैं और उसके बाद प्रार्थना सभा में शामिल होंगे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनके आत्महत्या की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया। पीछे छोड़ गए परिवार 2017 में SSB में भर्ती हुए थे 2018 में शादी हुई थी एक छोटी बच्ची के पिता थे हाल ही में एक महीने की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटे थे हर एंगल से जांच में जुटी पुलिस फिलहाल पुलिस और SSB प्रशासन आत्महत्या के कारणों की जांच कर रहे हैं। मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद या अन्य किसी कारण को ध्यान में रखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है। अभी तक आत्महत्या की असली वजह सामने नहीं आ सकी है। गंभीर सवाल छोड़ गई घटना यह घटना न केवल सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि तनाव और दबाव की स्थिति में समय रहते मदद मिलना कितना जरूरी है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ये दोनों जहाज अब भारत के तट की ओर बढ़ चुके हैं और जल्द ही अपने-अपने बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं। भारतीय झंडे वाले ये गैस टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं। इनमें से ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है, जबकि ‘नंदा देवी’ कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा। बातचीत से निकला समाधान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मामले में पर्दे के पीछे की कूटनीतिक कोशिशों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि यह अनुमति भारत और ईरान के बीच सीधे संवाद का नतीजा है। जयशंकर के अनुसार, तेहरान के साथ लगातार बातचीत के जरिए जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू कराना सबसे प्रभावी तरीका साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी भी जारी है और भारत अपने अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भी बातचीत जारी रखेगा। कोई ‘डील’ नहीं, रिश्तों का असर इस मुद्दे पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसके बदले में ईरान को भारत से कोई रियायत मिली है। इस पर जयशंकर ने साफ कहा कि यह किसी लेन-देन का मामला नहीं है। उनके मुताबिक भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और उसी भरोसे के आधार पर यह समाधान संभव हो पाया है। प्रधानमंत्री की बातचीत का भी असर बताया जा रहा है कि भारतीय जहाजों को अनुमति मिलने से पहले नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की गई थी। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यही रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति दुनिया भर में होती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी, ऐसे में भारतीय जहाजों को अनुमति मिलना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
ओडिशा के कटक स्थित SCB Medical College and Hospital में सोमवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया। अस्पताल के ट्रॉमा केयर विभाग की ICU में लगी भीषण आग में 10 मरीजों की मौत हो गई, जबकि 11 अस्पताल कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। ये कर्मचारी आग के बीच मरीजों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। जानकारी के अनुसार यह घटना देर रात करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच हुई, जब ICU में गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा था। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट-सर्किट बताई जा रही है। आग तेजी से फैलने के कारण ICU में अफरा-तफरी मच गई। दमकल की टीमों ने पाया आग पर काबू आग की सूचना मिलते ही फायर सर्विस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस दौरान अस्पताल के कर्मचारियों, पुलिस और मरीजों के परिजनों की मदद से ICU में भर्ती मरीजों को तुरंत अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया। कुल 23 मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया, लेकिन कई मरीजों की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी। अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री घटना की जानकारी मिलते ही मोहन चरण माझी और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि ट्रांसफर के दौरान 7 मरीजों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य मरीजों ने बाद में दम तोड़ दिया। मुआवज़े और जांच के आदेश मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए न्यायिक जांच के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि आग लगने की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सके। यह हादसा एक बार फिर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सिडनी सेमिनार में बोले – ‘पीएम मोदी बेहद समर्पित और अलग सोच वाले नेता’ कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की कार्यशैली और समर्पण की खुलकर प्रशंसा की है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित एक सेमिनार के दौरान कार्नी ने कहा कि मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सिडनी में Lowy Institute द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कार्नी ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से हुई अपनी मुलाकात के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि मोदी का काम के प्रति समर्पण और ऊर्जा उन्हें दुनिया के अन्य नेताओं से अलग बनाती है। ‘मोदी बेहद मेहनती और लक्ष्य पर केंद्रित नेता’ कार्नी ने कहा कि चाहे वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल रहा हो या फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, मोदी लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहा, “वह बेहद अलग तरह के नेता हैं। पिछले 25 वर्षों में उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सप्ताहांत पर भी वह अक्सर जनसभाओं में शामिल होते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग उनकी रैलियों में पहुंचते हैं।” UPI और वित्तीय सुधारों की भी सराहना कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था में हुए बदलावों की भी तारीफ की। उन्होंने विशेष रूप से Unified Payments Interface (UPI) का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोगों तक सीधे और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता पहुंचाने में मदद मिली है। कार्नी के अनुसार, मोदी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और बीच में किसी तरह की गड़बड़ी या रिसाव न हो। इस दिशा में डिजिटल भुगतान प्रणाली और वित्तीय सुधारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। भारत-कनाडा संबंधों में ‘नई शुरुआत’ कार्नी की हालिया भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देना था। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में आई ठंडक के बाद अब सहयोग के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में तकनीक, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान हुआ। ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर कार्नी ने कहा कि कनाडा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि कनाडा की कंपनी Cameco ने भारत को दीर्घकालिक आधार पर यूरेनियम आपूर्ति करने के लिए समझौता किया है। इसके साथ ही दोनों देश रक्षा सहयोग समझौते को भी फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक संबंध कनाडाई प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्ते हैं। उनके अनुसार, कनाडा में लगभग 20 लाख लोग भारतीय मूल के हैं और हर साल हजारों लोग दोनों देशों के बीच यात्रा करते हैं। इन गहरे सामाजिक और आर्थिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।