Psoriasis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली systemic therapies को लेकर लंबे समय से यह चिंता बनी हुई है कि क्या ये दवाएं मरीजों में गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ाती हैं। अब ब्रिटेन के बड़े रियल-वर्ल्ड डेटा रजिस्टर BADBIR पर आधारित एक नई स्टडी ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर systemic treatments के बीच गंभीर संक्रमण के खतरे में बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखा, हालांकि कुछ दवाओं के साथ संक्रमण का जोखिम थोड़ा अधिक पाया गया।
यह अध्ययन British Association of Dermatologists Biologic Interventions Register (BADBIR) के डेटा पर आधारित था। इसमें Psoriasis से पीड़ित 18,976 वयस्क मरीजों के 46,770 treatment episodes का विश्लेषण किया गया।
मरीजों को इलाज शुरू होने से लेकर दवा बंद होने, मृत्यु या अंतिम फॉलो-अप तक ट्रैक किया गया।
इस स्टडी में “serious infection” उन मामलों को माना गया, जिनमें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, IV एंटीमाइक्रोबियल थेरेपी की जरूरत पड़ी या संक्रमण के कारण मृत्यु हुई।
अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत आयु 45.6 वर्ष थी और औसत BMI 31.6 kg/m² दर्ज किया गया।
पूरे अध्ययन के दौरान गंभीर संक्रमण की दर 27.67 घटनाएं प्रति 1,000 person-years रही।
हालांकि जिन मरीजों को पहले भी गंभीर संक्रमण हो चुका था, उनमें दोबारा संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा पाया गया। इस समूह में संक्रमण की दर 78.70 प्रति 1,000 person-years रही।
शोधकर्ताओं ने पाया कि Apremilast और Secukinumab के साथ गंभीर संक्रमण का खतरा Adalimumab की तुलना में थोड़ा अधिक दिखाई दिया।
हालांकि sensitivity analyses में ये परिणाम पूरी तरह स्थिर नहीं रहे, इसलिए वैज्ञानिकों ने इन निष्कर्षों को सावधानी से देखने की सलाह दी है।
अध्ययन में recurrent event analysis भी किया गया, जिसमें एक ही मरीज में बार-बार होने वाले संक्रमणों को शामिल किया गया।
इस विश्लेषण में Risankizumab के साथ गंभीर संक्रमण का जोखिम कई अन्य therapies की तुलना में कम पाया गया।
विशेष रूप से इसकी तुलना Brodalumab, Etanercept और standard systemic therapies से की गई।
स्टडी के मुताबिक गंभीर संक्रमण से जुड़ी मौतें बहुत कम दर्ज की गईं। इसकी दर केवल 1.81 प्रति 1,000 person-years रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन Psoriasis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली systemic therapies की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण real-world evidence देता है।
रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर दवाओं के बीच संक्रमण जोखिम में कोई बड़ा अंतर नहीं है, लेकिन जिन मरीजों को पहले संक्रमण हो चुका हो या जिनकी immunity कमजोर हो, उनके लिए इलाज चुनते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए treatment selection हमेशा individual risk profile को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Psoriasis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली systemic therapies को लेकर लंबे समय से यह चिंता बनी हुई है कि क्या ये दवाएं मरीजों में गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ाती हैं। अब ब्रिटेन के बड़े रियल-वर्ल्ड डेटा रजिस्टर BADBIR पर आधारित एक नई स्टडी ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर systemic treatments के बीच गंभीर संक्रमण के खतरे में बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखा, हालांकि कुछ दवाओं के साथ संक्रमण का जोखिम थोड़ा अधिक पाया गया। क्या है BADBIR स्टडी? यह अध्ययन British Association of Dermatologists Biologic Interventions Register (BADBIR) के डेटा पर आधारित था। इसमें Psoriasis से पीड़ित 18,976 वयस्क मरीजों के 46,770 treatment episodes का विश्लेषण किया गया। मरीजों को इलाज शुरू होने से लेकर दवा बंद होने, मृत्यु या अंतिम फॉलो-अप तक ट्रैक किया गया। इस स्टडी में “serious infection” उन मामलों को माना गया, जिनमें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, IV एंटीमाइक्रोबियल थेरेपी की जरूरत पड़ी या संक्रमण के कारण मृत्यु हुई। कितने मरीजों में दिखा गंभीर संक्रमण? अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत आयु 45.6 वर्ष थी और औसत BMI 31.6 kg/m² दर्ज किया गया। पूरे अध्ययन के दौरान गंभीर संक्रमण की दर 27.67 घटनाएं प्रति 1,000 person-years रही। हालांकि जिन मरीजों को पहले भी गंभीर संक्रमण हो चुका था, उनमें दोबारा संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा पाया गया। इस समूह में संक्रमण की दर 78.70 प्रति 1,000 person-years रही। किन दवाओं के साथ दिखा ज्यादा जोखिम? शोधकर्ताओं ने पाया कि Apremilast और Secukinumab के साथ गंभीर संक्रमण का खतरा Adalimumab की तुलना में थोड़ा अधिक दिखाई दिया। हालांकि sensitivity analyses में ये परिणाम पूरी तरह स्थिर नहीं रहे, इसलिए वैज्ञानिकों ने इन निष्कर्षों को सावधानी से देखने की सलाह दी है। किस दवा में दिखा कम संक्रमण जोखिम? अध्ययन में recurrent event analysis भी किया गया, जिसमें एक ही मरीज में बार-बार होने वाले संक्रमणों को शामिल किया गया। इस विश्लेषण में Risankizumab के साथ गंभीर संक्रमण का जोखिम कई अन्य therapies की तुलना में कम पाया गया। विशेष रूप से इसकी तुलना Brodalumab, Etanercept और standard systemic therapies से की गई। संक्रमण से मौत के मामले कितने गंभीर? स्टडी के मुताबिक गंभीर संक्रमण से जुड़ी मौतें बहुत कम दर्ज की गईं। इसकी दर केवल 1.81 प्रति 1,000 person-years रही। मरीजों और डॉक्टरों के लिए क्या है इसका मतलब? विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन Psoriasis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली systemic therapies की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण real-world evidence देता है। रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर दवाओं के बीच संक्रमण जोखिम में कोई बड़ा अंतर नहीं है, लेकिन जिन मरीजों को पहले संक्रमण हो चुका हो या जिनकी immunity कमजोर हो, उनके लिए इलाज चुनते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए treatment selection हमेशा individual risk profile को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 9 मई को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से भगवान Krishna की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करने से शुभ फल मिलते हैं, जबकि छोटी-छोटी गलतियां पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करना शुभ माना जाता है और किन बातों से बचना चाहिए। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करें? भगवान कृष्ण को पीले वस्त्र पहनाएं भगवान Krishna को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें और मुकुट में मोरपंख जरूर लगाएं। इससे पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। भोग में तुलसी दल जरूर रखें धार्मिक मान्यता के अनुसार बिना तुलसी के भगवान कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए माखन-मिश्री, फल या अन्य प्रसाद में तुलसी दल अवश्य रखें। मंत्र जाप और भजन करें इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही भजन-कीर्तन और Bhagavad Gita का पाठ करने से मन को शांति मिलती है। दान-पुण्य करें जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गौ सेवा करें भगवान कृष्ण को गोपाल कहा जाता है। इस दिन गाय को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इसे विशेष पुण्यदायी कार्य माना गया है। मध्यरात्रि में करें पूजा भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए रात 12 बजे विशेष आरती और पूजा का महत्व माना जाता है। इस समय घंटी, शंख और भजन के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या न करें? तामसिक भोजन से बचें इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। घर का वातावरण सात्विक और शांत रखना शुभ माना जाता है। अन्न और चावल का सेवन न करें यदि आप व्रत कर रहे हैं तो चावल और सामान्य अन्न से परहेज करें। फलाहार में साबूदाना, कुट्टू का आटा और फल ग्रहण किए जा सकते हैं। तुलसी के पत्ते न तोड़ें जन्माष्टमी के दिन तुलसी तोड़ना अशुभ माना जाता है। पूजा के लिए आवश्यक तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। काले कपड़े पहनने से बचें पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता। पीले, सफेद या लाल रंग के कपड़े पहनना बेहतर माना गया है। क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन झूठ बोलने, किसी की निंदा करने और क्रोध करने से बचना चाहिए। दिन में ज्यादा न सोएं धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन आलस्य नहीं करना चाहिए। समय को भजन, ध्यान और धार्मिक पाठ में लगाना अधिक शुभ माना जाता है। क्या है धार्मिक मान्यता? मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धा से पूजा करने से भगवान Krishna भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। दांपत्य जीवन में सुख, संतान सुख और मानसिक शांति के लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
हनुमान जयंती भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है। जहां उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेलुगु हनुमान जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व 12 मई (मंगलवार) को मनाया जाएगा। तिथि और मुहूर्त दशमी तिथि प्रारंभ: 11 मई 2026, दोपहर 3:24 बजे दशमी तिथि समाप्त: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे तेलुगु परंपरा के अनुसार, इस दिन व्रत, पूजा और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। 41 दिनों की दीक्षा परंपरा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व सिर्फ एक दिन का नहीं होता, बल्कि 41 दिनों की दीक्षा के रूप में मनाया जाता है। इस दीक्षा की शुरुआत: 2 अप्रैल 2026 समापन: 12 मई 2026 (हनुमान जयंती) भक्त इस अवधि में संयम, व्रत और विशेष पूजा का पालन करते हैं। दक्षिण भारत में हनुमान जी का महत्व हनुमान जी को भक्ति, शक्ति और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। रामायण के अनुसार, कर्नाटक के अंजनाद्रि पर्वत को उनका जन्मस्थान माना जाता है। दक्षिण भारत में हनुमान जी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है: कर्नाटक: हनुमंथा, आंजनेय आंध्र-तेलंगाना: हनुमंतुडु, आंजनेयुडु तमिलनाडु: आंजनेयार पूजा विधि (सरल तरीके से) सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान को साफ कर दीपक जलाएं हनुमान जी को सिंदूर, चोला, फूल, फल, पान, गुड़-चना अर्पित करें हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद बांटें विशेष महत्व तेलुगु हनुमान जयंती पर की गई पूजा से साहस, शक्ति और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति मानी जाती है। अगर आप दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती मनाना चाहते हैं, तो 12 मई 2026 का दिन बेहद खास है। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाती है।