मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री अनन्या पांडे ने हाल ही में आयोजित एक प्रतिष्ठित अवॉर्ड समारोह में अपने फैशन स्टेटमेंट से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। फिल्म 'केसरी चैप्टर 2' में अपने शानदार अभिनय के लिए सम्मानित हुईं अनन्या ने रेड कार्पेट पर मशहूर लेबनानी फैशन डिजाइनर Elie Saab के प्री-फॉल 2026 कलेक्शन का खूबसूरत ब्लैक एन्सेंबल पहनकर Y2K फैशन ट्रेंड को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
अनन्या ने ब्लैक लेस से तैयार एम्बेलिश्ड हाल्टर-नेक टॉप को मैचिंग मैक्सी स्कर्ट के साथ स्टाइल किया। पूरे आउटफिट में नाजुक ब्लैक लेस, बेज लाइनिंग, फ्लोरल एप्लीके वर्क, सीक्विन्स और क्रिस्टल एम्बेलिशमेंट का इस्तेमाल किया गया था, जिसने उनके लुक को बेहद आकर्षक और रॉयल बनाया। स्कर्ट का लंबा ट्रेल रेड कार्पेट पर उनके स्टाइल में चार चांद लगा रहा था।
स्टाइलिस्ट प्रियंका कापड़िया ने इस लुक को मिनिमल एक्सेसरीज़ के साथ पूरा किया। अनन्या ने आर्ट डेको-इंस्पायर्ड डायमंड और पर्पल जेमस्टोन डैंगलर ईयररिंग्स, डायमंड व सिट्रीन हगी ईयररिंग्स और कीमती पत्थरों से सजी रिंग्स पहनीं।
मेकअप में उन्होंने 1960 के दशक के ओल्ड हॉलीवुड ग्लैमर से प्रेरित लुक अपनाया। ल्यूमिनस हाईलाइटर, शार्प विंग्ड आईलाइनर, ब्रॉन्ज्ड शोल्डर्स, न्यूड ग्लॉसी लिप्स और स्लीक वेट-लुक हेयरस्टाइल ने उनके पूरे लुक को बेहद एलिगेंट बना दिया।
अनन्या का यह आउटफिट Elie Saab के 'Indelible Love' कलेक्शन का हिस्सा है। यह कलेक्शन लेबनान की राजधानी बेरूत और वहां की महिलाओं की खूबसूरती, मजबूती और शालीनता को समर्पित है। इसमें 1950 से 1970 के दशक के बीच 'Paris by the Sea' कहे जाने वाले बेरूत की ग्लैमरस विरासत को मोनोक्रोम रंगों, शानदार फैब्रिक्स, लेस वर्क और शानदार एम्बेलिशमेंट के जरिए दर्शाया गया है।
यह पहला मौका नहीं है जब अनन्या पांडे ने Elie Saab का डिजाइन पहना हो। इससे पहले वह मुंबई के एक अवॉर्ड शो में डिजाइनर के Spring/Summer 2007 आर्काइव हाल्टरनेक गाउन और लंदन में आयोजित एक ज्वेलरी इवेंट में Fall/Winter 2025-26 कलेक्शन की शीयर ड्रेस पहनकर भी चर्चा में रही थीं।
अनन्या पांडे का यह लेटेस्ट रेड कार्पेट लुक एक बार फिर साबित करता है कि Y2K फैशन, क्लासिक ब्लैक आउटफिट और ओल्ड हॉलीवुड ग्लैमर का मेल आज भी फैशन प्रेमियों के बीच सबसे बड़ा ट्रेंड बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सुबह उठते ही अधिकांश लोग सिर्फ पानी से चेहरा धो लेते हैं और मानते हैं कि रात में अच्छी तरह चेहरा साफ करने के बाद सुबह दोबारा फेसवॉश की जरूरत नहीं होती। लेकिन स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। रातभर त्वचा पर पसीना, अतिरिक्त तेल (सीबम), स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेष और धूल-मिट्टी के सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं, जिन्हें केवल पानी से हटाया नहीं जा सकता। फेशियलिस्ट क्रिस्टीना गालमिशे के अनुसार, सुबह त्वचा की सही तरीके से सफाई करना स्वस्थ और दमकती त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ त्वचा साफ रहती है, बल्कि बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन भी बेहतर तरीके से काम करते हैं। क्या रातभर में त्वचा गंदी हो जाती है? भले ही सुबह उठने पर चेहरे पर गंदगी दिखाई न दे, लेकिन रातभर के दौरान त्वचा पर कई तरह के अवशेष जमा हो जाते हैं, जैसे— पसीना अतिरिक्त सीबम (तेल) नाइट क्रीम या सीरम के अवशेष बालों से आने वाला तेल मृत त्वचा कोशिकाएं यदि इन्हें साफ नहीं किया जाए तो रोमछिद्र (पोर्स) बंद हो सकते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स, मुंहासे और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सुबह फेस क्लींजिंग करने के फायदे नियमित रूप से सुबह फेसवॉश करने से कई लाभ मिलते हैं— त्वचा से पसीना, तेल और रातभर के अवशेष हटते हैं। ब्लैकहेड्स और मुंहासों का खतरा कम होता है। त्वचा में ऑक्सीजन का प्रवाह और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। स्किन टेक्सचर और प्राकृतिक निखार में सुधार आता है। विटामिन C, हायलूरोनिक एसिड और अन्य एक्टिव इंग्रीडिएंट्स बेहतर तरीके से काम करते हैं। त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) मजबूत होती है। सुबह चेहरा धोने का सही तरीका 1. अपनी स्किन टाइप के अनुसार फेस क्लींजर चुनें ऑयली या कॉम्बिनेशन स्किन: नियासिनामाइड या सैलिसिलिक एसिड युक्त जेल या फोम क्लींजर चुनें। ड्राई या सेंसिटिव स्किन: सल्फेट-फ्री या क्रीम-बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें। 2. हाथों से करें मसाज कॉटन पैड की बजाय अपनी उंगलियों से लगभग 30 सेकंड तक हल्के गोलाकार (सर्कुलर) मोशन में चेहरे की मसाज करें। इससे त्वचा अच्छी तरह साफ होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। 3. गुनगुने पानी से धोएं बहुत गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी और लिपिड बैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि बहुत ठंडा पानी क्लींजर को पूरी तरह हटाने में प्रभावी नहीं होता। 4. साफ तौलिये से हल्के हाथों से सुखाएं चेहरे को रगड़ने की बजाय हल्के-हल्के थपथपाकर सुखाएं। बेहतर होगा कि रोजाना साफ तौलिये का इस्तेमाल करें। सिर्फ पानी से चेहरा धोना क्यों पर्याप्त नहीं है? सिर्फ पानी त्वचा पर मौजूद तेल, पसीना और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेषों को पूरी तरह नहीं हटा पाता। ऐसे में बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन त्वचा में सही तरीके से अवशोषित नहीं हो पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि साफ त्वचा ही स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के लिए सबसे बेहतर आधार होती है। इसलिए सुबह फेस क्लींजर और पानी दोनों का इस्तेमाल करना त्वचा को स्वस्थ, साफ और चमकदार बनाए रखने का आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक स्किनकेयर इंग्रीडिएंट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसका दावा है कि यह बिना किसी इंजेक्शन या कॉस्मेटिक प्रक्रिया के चेहरे को भरा-भरा और युवा दिखा सकता है। इस इंग्रीडिएंट का नाम है Volufiline। TikTok, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हजारों यूजर्स इसे अंडर-आई एरिया, गालों और होंठों के आसपास लगाकर अपने पहले और बाद के परिणाम साझा कर रहे हैं। कई लोग इसे "बॉटल में फिलर" तक कह रहे हैं। लेकिन क्या वास्तव में Volufiline फिलर्स का विकल्प बन सकता है? या फिर यह सिर्फ एक और वायरल ब्यूटी ट्रेंड है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय और इसके पीछे की सच्चाई। क्या है Volufiline? Volufiline एक ट्रेडमार्क्ड कॉस्मेटिक इंग्रीडिएंट है, जिसे Hydrogenated Polyisobutene और Anemarrhena Asphodeloides Root Extract के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसका मुख्य सक्रिय तत्व Sarsasapogenin माना जाता है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह फैट सेल्स को परिपक्व होने और उनमें लिपिड स्टोर करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। सरल भाषा में कहें तो इसका उद्देश्य त्वचा के नीचे मौजूद फैट सेल्स को बड़ा दिखाना है, जिससे चेहरे पर अतिरिक्त वॉल्यूम दिखाई दे सके। क्या वैज्ञानिक रिसर्च इसके दावों का समर्थन करती है? कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जैश्री शरद के अनुसार, Volufiline को लेकर उपलब्ध अधिकांश रिसर्च प्रयोगशाला में अलग किए गए फैट सेल्स पर की गई है, न कि बड़े पैमाने पर इंसानों पर किए गए क्लीनिकल ट्रायल्स पर। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है जो यह साबित करता हो कि Volufiline लंबे समय तक चेहरे की वॉल्यूम बढ़ाने में सक्षम है, खासकर तब जब इसका उपयोग बंद कर दिया जाए। क्यों मुश्किल है चेहरे के फैट तक पहुंचना? त्वचा के नीचे मौजूद फैट लेयर डर्मिस से भी नीचे स्थित होती है। अधिकांश स्किनकेयर प्रोडक्ट्स त्वचा की ऊपरी परतों तक ही सीमित रहते हैं। डॉ. शरद बताती हैं कि जब तक किसी प्रोडक्ट में अत्याधुनिक डिलीवरी टेक्नोलॉजी न हो, तब तक किसी क्रीम या सीरम का चेहरे के फैट सेल्स तक गहराई से पहुंचना और उन्हें बड़ा करना बेहद मुश्किल है। यही कारण है कि वैज्ञानिक समुदाय अभी तक Volufiline को वास्तविक वॉल्यूम बढ़ाने वाला समाधान नहीं मानता। फिर लोगों को रिजल्ट क्यों दिखाई देते हैं? सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे कई "पहले और बाद" की तस्वीरों का सबसे बड़ा कारण हाइड्रेशन हो सकता है। Volufiline युक्त अधिकांश प्रोडक्ट्स में समृद्ध मॉइस्चराइजिंग तत्व मौजूद होते हैं, जो— त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करते हैं डिहाइड्रेशन लाइन्स को कम करते हैं त्वचा को स्मूद और सॉफ्ट बनाते हैं चेहरे को अस्थायी रूप से भरा-भरा दिखाते हैं विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रभाव वास्तविक फैट बढ़ने के बजाय त्वचा की बेहतर नमी और कंडीशनिंग का परिणाम होता है। क्या Volufiline फिलर या Botox का विकल्प है? सीधा जवाब है—नहीं। फिलर्स कैसे काम करते हैं? डर्मल फिलर्स त्वचा के नीचे इंजेक्ट किए जाते हैं और सीधे वॉल्यूम को बढ़ाते या पुनर्स्थापित करते हैं। Botox कैसे काम करता है? Botox मांसपेशियों की गतिविधि को अस्थायी रूप से कम करता है, जिससे झुर्रियां कम दिखाई देती हैं। Volufiline क्या करता है? Volufiline केवल एक टॉपिकल कॉस्मेटिक इंग्रीडिएंट है, जो मुख्य रूप से त्वचा की नमी और अस्थायी प्लंपिंग में मदद कर सकता है। फिलहाल ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो इसे Botox या फिलर्स के बराबर प्रभावी साबित करता हो। किन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है? Volufiline उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो— त्वचा को अधिक हाइड्रेटेड दिखाना चाहते हैं हल्का प्लंपिंग इफेक्ट चाहते हैं इंजेक्शन या कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं से बचना चाहते हैं स्किनकेयर रूटीन में अतिरिक्त मॉइस्चराइजिंग चाहते हैं हालांकि, ऑयली या एक्ने-प्रोन त्वचा वाले लोगों को हल्के और नॉन-कॉमेडोजेनिक फॉर्मूले चुनने की सलाह दी जाती है।
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर अपनी शादी से पहले ही फैशन प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। पिछले साल अक्टूबर में रोहन ठक्कर के साथ उनकी सगाई की तस्वीरें सामने आने के बाद से ही फैंस उनकी शादी से जुड़ी हर अपडेट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब अंशुला के प्री-वेडिंग प्रेयर सेरेमनी की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें उनका भव्य ब्राइडल लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अंशुला कपूर ने इस खास मौके के लिए डिजाइनर रिधि बंसल और सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट मोहित राय के लेबल 'Itrh' का कस्टम-मेड लहंगा चुना। इस शानदार आउटफिट को तैयार करने में कारीगरों को कुल 1,600 घंटे का समय लगा, जो इसकी बारीक कारीगरी और शाही अंदाज को दर्शाता है। बनारसी सिल्क और पारंपरिक कढ़ाई का खूबसूरत मेल लहंगे की स्कर्ट बनारसी सिल्क टिश्यू ब्रोकेड से तैयार की गई थी, जिसे पोल्की, घुंघरू, आरी (मिरर) वर्क और जरी-जरदोजी कढ़ाई से सजाया गया था। इसके साथ पहना गया हाई-नेक ब्लाउज इस पूरे लुक का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा। ब्लाउज पर भी पोल्की एम्बेलिशमेंट और एंटीक गोल्ड फिनिश धागों से डबका, बदला और गोटा वर्क किया गया था। ब्लाउज को मोतियों और घुंघरुओं से और अधिक आकर्षक बनाया गया, जिससे यह एक ज्वेलरी पीस जैसा दिखाई दे रहा था। माना जा रहा है कि इस तरह का हाई-नेक और हैवी एम्बेलिश्ड ब्लाउज आने वाले ब्राइडल सीजन का बड़ा ट्रेंड बन सकता है। दो दुपट्टों ने बढ़ाई शाही भव्यता अंशुला ने अपने लुक को और खास बनाने के लिए दो अलग-अलग दुपट्टे कैरी किए। पहला मेटैलिक टिश्यू दुपट्टा था, जिस पर हाथ से की गई बारीक कढ़ाई देखने को मिली। वहीं दूसरा पारंपरिक फुलकारी दुपट्टा था, जिसमें ज्वेल टोन फ्लोरल मोटिफ्स बने हुए थे। फुलकारी दुपट्टा पंजाबी दुल्हनों के ट्रूसो का एक अहम हिस्सा माना जाता है और इसने उनके लुक में सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरती जोड़ दी। ज्वेलरी ने पूरा किया रॉयल ब्राइडल लुक अंशुला कपूर की ज्वेलरी भी उनके आउटफिट जितनी ही आकर्षक रही। उन्होंने कान चेन के साथ ईयर कफ और झुमके पहने, जिन्हें क्लासिक जूड़े में खूबसूरती से पिन किया गया था। इसके अलावा जूड़े के लिए विशेष हेयर पिन और मांग के बीचों-बीच सजा मांग टीका उनके लुक में चार चांद लगा रहा था। उनका भव्य पोल्की नेकलेस ब्लाउज की ज्वेल्ड डिटेलिंग के साथ इतनी खूबसूरती से मेल खा रहा था कि दोनों एक-दूसरे का विस्तार प्रतीत हो रहे थे। अंशुला कपूर का यह प्री-वेडिंग लुक पारंपरिक भारतीय शिल्प, आधुनिक डिजाइन और शाही भव्यता का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है। अब फैंस उनकी शादी के बाकी समारोहों और ब्राइडल लुक्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।