झारखंड

धनबाद में गैंगवार की आहट! राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पर प्रिंस खान को दी खुली धमकी

anjali kumari जून 29, 2026 0
Crime News
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धनबाद। झारखंड के धनबाद में सक्रिय दो कथित आपराधिक गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वायरल पोस्ट में राहुल सिंह ने गैंगस्टर प्रिंस खान को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है। पोस्ट में राहुल सिंह ने लिखा कि "तुम दुनिया के जिस कोने में रहोगे, वहीं मारेंगे" और अपने देश, काम तथा लोगों से उलझने का परिणाम जल्द भुगतने की चेतावनी दी। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद अपराध जगत में हलचल तेज हो गई है और संभावित गैंगवार की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।

 

धनबाद का जिक्र कर दी चेतावनी, बढ़ी टकराव की चर्चा


राहुल सिंह ने अपने पोस्ट में धनबाद का उल्लेख करते हुए प्रिंस खान को होश में रहने की नसीहत भी दी। उसने दावा किया कि "धनबाद से मारते-मारते पाकिस्तान पहुंच जाएंगे।" हालांकि सोशल मीडिया पर किए गए इन दावों और धमकियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लंबे समय से दोनों कथित गिरोहों के बीच वर्चस्व को लेकर तनाव की चर्चाएं रही हैं और दोनों पर कारोबारियों से रंगदारी मांगने के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर आई यह धमकी दोनों पक्षों के बीच बढ़ते टकराव का संकेत मानी जा रही है।

 

पुलिस का आधिकारिक बयान नहीं, सुरक्षा एजेंसियां रख रही नजर


वायरल पोस्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल झारखंड पुलिस या किसी अन्य जांच एजेंसी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की निगरानी की जा रही है और आवश्यक सूचनाएं जुटाई जा रही हैं। पुलिस की ओर से किसी संभावित कार्रवाई या जांच की पुष्टि अभी नहीं की गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर झारखंड में सक्रिय संगठित अपराध, रंगदारी नेटवर्क और सोशल मीडिया के जरिए दी जा रही खुली धमकियों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर सुरक्षा एजेंसियों की आगामी कार्रवाई और मामले में सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों पर टिकी हुई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड

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Jharkhand Teacher Appointment
झारखंड में 1,042 सहायक शिक्षकों को मिला नियुक्ति पत्र, सीएम हेमंत सोरेन बोले- शिक्षा से बदलेगा राज्य का भविष्य

रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1,042 नवचयनित सहायक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। रांची के खेलगांव में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नव नियुक्त शिक्षकों को जॉइनिंग लेटर प्रदान करते हुए उन्हें शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।   इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने से शिक्षकों के साथ-साथ उनके परिवारों के चेहरों पर भी खुशी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक केवल पढ़ाने का कार्य नहीं करता, बल्कि समाज और देश का भविष्य तैयार करता है। सरकारी संस्थानों पर उठने वाले सवालों का जवाब बेहतर कार्य और जिम्मेदार व्यवहार से दिया जा सकता है।   मुख्यमंत्री ने बताया मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने पिछले कार्यकाल सहित अब तक 55 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां दी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में प्रवेश के लिए 50 हजार से अधिक आवेदन आना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे सरकारी स्कूलों के छात्र भी डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकेंगे।   समारोह में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा समारोह में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य गठन के मूल उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक 38,903 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 के सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य झारखंड में शिक्षण गुणवत्ता और शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाना है।

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Betla National Park Closure
1 जुलाई से बेतला नेशनल पार्क में नो एंट्री, तीन महीने बंद रहेगी जंगल सफारी

लातेहार। झारखंड के प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद रखा जाएगा। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देशानुसार इस अवधि में जंगल सफारी, वाहनों की आवाजाही और पार्क के भीतर होने वाली सभी इको-टूरिज्म गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। वन विभाग के अनुसार यह निर्णय मानसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पर्यटक अब 1 अक्टूबर से दोबारा जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे।   पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा फोकस वन अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के मौसम में अधिकांश जंगली जानवरों का प्रजनन काल होता है। ऐसे समय में मानवीय गतिविधियों से उनकी प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। साथ ही मानसून के दौरान जंगल के कच्चे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे सफारी वाहनों के फंसने और हाथी समेत अन्य वन्यजीवों के हमले का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए तीन महीने तक केवल वन विभाग के अधिकारी और पेट्रोलिंग टीम को ही जंगल में प्रवेश की अनुमति रहेगी। पार्क बंद रहने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी भी पहले से अधिक सख्त की जाएगी तथा वॉच टावरों पर वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाई जाएगी।   रेस्ट हाउस खुले रहेंगे, आसपास के पर्यटन स्थलों का उठा सकेंगे आनंद हालांकि पार्क के भीतर प्रवेश और सफारी बंद रहेगी, लेकिन पर्यटकों के लिए वन विभाग के रेस्ट हाउस, कैंटीन और अन्य सुविधाएं पहले की तरह संचालित होती रहेंगी। बेतला आने वाले सैलानी आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे केचकी संगम, पलामू किला, मंडल डैम, सतनदिया, ततहा झरना, मिर्चईया फॉल, कोयल व्यू, सुग्गा बांध और लोध फॉल का भ्रमण कर सकेंगे। बेतला रेंज के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि पार्क बंद रखने के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा और इस दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा तथा अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गश्त और निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Dark monsoon clouds over Jharkhand as rain, thunderstorms, and lightning alert issued across multiple districts.

झारखंड में अगले 5 दिनों तक बारिश का अलर्ट, वज्रपात का खतरा भी बरकरार; कई जिलों में भारी बारिश के आसार

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RIMS Land Case: रिम्स जमीन अतिक्रमण मामले में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, बिल्डर शुभम साबू हिरासत में

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रामेश्वर उरांव को ईडी समन पर गरमाई सियासत, बंधु तिर्की का बीजेपी पर तीखा हमला

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रांची के सोनाहातू में वज्रपात का कहर, फॉरेस्ट गार्ड की मौत, दो वनकर्मी घायल

रांची। रांची जिले के सोनाहातू थाना क्षेत्र में रविवार दोपहर वज्रपात की चपेट में आने से खूंटी वन प्रमंडल के बुंडू वन प्रक्षेत्र में तैनात फॉरेस्ट गार्ड रोशन श्रीवास्तव की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में विभाग के वाहन चालक और एक अन्य वनकर्मी भी घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम काला महादेव क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बन रहे वॉच टावर के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंची थी। इसी दौरान अचानक मौसम बदल गया और तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने से यह हादसा हुआ।   अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित वज्रपात के बाद तीनों घायलों को तत्काल सोनाहातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने रोशन श्रीवास्तव को मृत घोषित कर दिया। इसके बावजूद साथी वनकर्मियों ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ बेहतर इलाज के लिए रांची के देवनिका अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने जांच के बाद उनकी मौत की पुष्टि कर दी। घटना के बाद शव को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।   डीएफओ ने की घटना की पुष्टि खूंटी के डीएफओ दिलीप कुमार यादव ने बताया कि वन विभाग की टीम काला महादेव के पास निर्माणाधीन वॉच टावर का निरीक्षण कर रही थी। इसी दौरान अचानक वज्रपात हुआ, जिसमें फॉरेस्ट गार्ड रोशन श्रीवास्तव की जान चली गई, जबकि वाहन चालक और एक अन्य वनकर्मी घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। विभाग की ओर से आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इस हादसे ने वन विभाग के कर्मचारियों और क्षेत्र के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। मानसून के दौरान लगातार हो रहे वज्रपात को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और ऊंचे इलाकों में जाने से बचने की अपील की है।

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