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Railway jobs 2026
Railway jobs 2026: रेलवे में नौकरी का सुनहरा मौका, 10वीं और ITI पास के लिए 2801 पदों पर निकली भर्ती

नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारतीय रेलवे में अप्रेंटिसशिप के तहत 2801 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह मौका खासतौर पर उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्होंने 10वीं पास करने के साथ ITI भी किया है। इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा नहीं होती, बल्कि उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाता है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों के 10वीं और ITI में अच्छे अंक हैं, उनके लिए यह शानदार अवसर साबित हो सकता है। इच्छुक उम्मीदवार 11 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।   क्या है आयु सीमा? इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 11 अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, SC, ST, OBC और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी।   शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए? आवेदन के लिए उम्मीदवार का कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ITI प्रमाणपत्र होना चाहिए। खास बात यह है कि ITI उसी ट्रेड में होना चाहिए, जिस ट्रेड के लिए उम्मीदवार आवेदन करना चाहता है।   आवेदन शुल्क कितना है? इस भर्ती के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा। वहीं SC, ST और सभी महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है।   कैसे होगा चयन? चयन प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है। इसमें कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी। सबसे पहले उम्मीदवारों के 10वीं और ITI के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। मेरिट में शामिल अभ्यर्थियों को आगे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद उनका मेडिकल टेस्ट होगा। सभी चरण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया जाएगा।   कैसे करें आवेदन? उम्मीदवार आवेदन के लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट rrc.scr.indianrailways.gov.in पर जाएं। वहां “Apprentice Recruitment 2026” या “Notification” लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद New Registration करके लॉगिन करें। मांगी गई जानकारी भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट कर दें।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Curd kebabs Recipe
घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसे दही के कबाब, जानें बनाने के आसान रेसिपी

नई दिल्ली, एजेंसियां। अगर आप कुछ ऐसा स्नैक बनाना चाहते हैं जो हल्का भी हो, स्वादिष्ट भी और देखने में भी एकदम रेस्टोरेंट स्टाइल लगे, तो दही के कबाब आपके लिए शानदार विकल्प हैं। ये कबाब बाहर से हल्के कुरकुरे और अंदर से इतने सॉफ्ट व क्रीमी होते हैं कि मुंह में जाते ही घुल जाते हैं। खास बात यह है कि इन्हें बनाने में ज्यादा समय या मेहनत नहीं लगती, फिर भी इनका स्वाद किसी बढ़िया रेस्टोरेंट डिश से कम नहीं होता। शाम की चाय, घर आए मेहमानों या वीकेंड स्नैक के लिए यह एक परफेक्ट रेसिपी है।   क्या-क्या लगेगा बनाने में? दही के कबाब बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज है हंग कर्ड (गाढ़ा दही)। इसके लिए आपको चाहिए डेढ़ कप हंग कर्ड, एक चुटकी काला नमक, आधा टेबलस्पून कटा अदरक, 2 टेबलस्पून कटा धनिया स्टेम, 2 टीस्पून भुना जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक, 2 टेबलस्पून कटा प्याज, 1 कटी हरी मिर्च, 3 टेबलस्पून फ्राइड प्याज, एक-तिहाई कप कद्दूकस किया पनीर, 2 कप ब्रेड क्रम्ब्स और तलने के लिए तेल।   ऐसे तैयार करें कबाब का क्रीमी मिश्रण   सबसे पहले एक बड़े बाउल में हंग कर्ड लें। इसमें काला नमक, अदरक, धनिया स्टेम, भुना जीरा पाउडर, नमक, प्याज, हरी मिर्च, फ्राइड प्याज और कद्दूकस किया हुआ पनीर डालें। अब इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। ध्यान रखें कि दही ज्यादा पतला न हो, वरना कबाब बनाते समय मिश्रण ढीला पड़ सकता है।इस मिश्रण की खुशबू और टेक्सचर ही दही के कबाब को खास बनाते हैं। इसमें दही की क्रीमीनेस, पनीर की सॉफ्टनेस और मसालों का बैलेंस शानदार स्वाद देता है।   कबाब बनाना और फ्राई करना है बेहद आसान अब अपने हाथों पर थोड़ा सा तेल लगाएं और तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे कबाब का आकार दें। इसके बाद इन्हें ब्रेड क्रम्ब्स में अच्छी तरह रोल करें, ताकि बाहर की परत फ्राई होने पर कुरकुरी बने और कबाब टूटे नहीं। अब इन कबाब को 15 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें। यह स्टेप बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे कबाब अच्छे से सेट हो जाते हैं और तलते समय अपना आकार बनाए रखते हैं। इसके बाद एक कढ़ाही में तेल गरम करें और कबाब को मध्यम आंच पर गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें।   ऐसे करें सर्व तैयार दही के कबाब को गरमागरम हरी चटनी, इमली की चटनी या टमाटर सॉस के साथ परोसें। इनका स्वाद इतना शानदार होता है कि एक बार खाने के बाद हर कोई इसकी रेसिपी जरूर पूछेगा।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Dhurandhar 2
Dhurandhar 2: बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास लिखने की दहलीज पर रणवीर सिंह

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर ऐसी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं, जहां अब उनका मुकाबला किसी और स्टार से नहीं, बल्कि खुद रणवीर सिंह से होता दिख रहा है। उनकी फिल्म ‘धुरंधर 2’ ने कमाई के मामले में नया इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। फिल्म की रिकॉर्डतोड़ ओपनिंग और लगातार शानदार प्रदर्शन ने रणवीर को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां वे बतौर लीड स्टार 1000 करोड़ क्लब में शामिल होने वाले पहले बॉलीवुड अभिनेता बन सकते हैं।   ओपनिंग से ही बना दिया बड़ा रिकॉर्ड ‘धुरंधर 2’ ने रिलीज के साथ ही हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में अपनी जगह बना ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन की कमाई में कई बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया। रणवीर ने सिर्फ दूसरे सितारों के रिकॉर्ड नहीं तोड़े, बल्कि अपने ही करियर की बड़ी फिल्मों जैसे ‘सिंबा’, ‘पद्मावत’ और पहली ‘धुरंधर’ को भी पीछे छोड़ दिया। इससे साफ है कि उनकी लोकप्रियता और स्टारडम लगातार नए स्तर पर पहुंच रहा है।   11 दिनों में पहले पार्ट को पीछे छोड़ा फिल्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘धुरंधर 2’ ने महज 11 दिनों में ‘धुरंधर’ के लाइफटाइम कलेक्शन को पार कर लिया। यानी रणवीर सिंह किसी और से नहीं, बल्कि खुद के बनाए मानकों को भी पीछे छोड़ते जा रहे हैं।   देश ही नहीं, विदेश में भी जबरदस्त पकड़ रणवीर सिंह का स्टारडम अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। ‘धुरंधर 2’ ने ओवरसीज मार्केट में भी शानदार प्रदर्शन किया है। खासकर नॉर्थ अमेरिका में रणवीर की फिल्मों का दबदबा देखने को मिल रहा है। ‘धुरंधर’, ‘धुरंधर 2’, ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ और ‘पद्मावत’ जैसी फिल्मों ने विदेशी बाजार में बेहतरीन कमाई की है।   अभिनय और स्टारडम का दुर्लभ संतुलन रणवीर सिंह की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे सिर्फ कमाई करने वाले स्टार नहीं, बल्कि दमदार अभिनय के लिए भी जाने जाते हैं। यही वजह है कि वे व्यावसायिक सफलता और कलात्मक पहचान दोनों को साथ लेकर चल रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या रणवीर सिंह सच में 1000 करोड़ का नया इतिहास रचकर बॉलीवुड में एक अलग ही लीग बना पाएंगे।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Radhakrishna Kishore Budhapahar
बूढ़ापहाड़ पहुंचे वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, विकास कार्यों का लिया जायजा

पलामू। झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पलामू जिले के ऐतिहासिक और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे बूढ़ापहाड़ इलाके का दौरा कर वहां चल रहे विकास कार्यों की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाद वित्त मंत्री ऐसे दूसरे बड़े जनप्रतिनिधि हैं, जिन्होंने इस संवेदनशील इलाके तक पहुंचकर विकास की दिशा में पहल दिखाई है। बूढ़ापहाड़, जो कभी माओवादियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा में लौटता नजर आ रहा है।   विकास के लिए जमीनी निरीक्षण वित्त मंत्री ने इलाके में पहुंचकर सड़क, बुनियादी ढांचे और अन्य विकास योजनाओं की स्थिति का निरीक्षण किया। बूढ़ापहाड़ की चोटी तक पहुंचने के लिए उन्हें करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल सफर भी तय करना पड़ा, जिससे इलाके की भौगोलिक कठिनाइयों का अंदाजा लगाया जा सकता है। दौरे के दौरान उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय जरूरतों और अधूरे कार्यों की जानकारी ली।   ‘सिर्फ पुलिस नहीं, विकास भी जरूरी’ दौरे के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वे ऐसे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील रहा है। उन्होंने साफ कहा कि केवल पुलिस बल के जरिए नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए विकास की मजबूत बुनियाद भी जरूरी है। उनके अनुसार, जब तक शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं गांव-गांव तक नहीं पहुंचेंगी, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं होगा।   जल्द बनेगा विकास का नया खाका वित्त मंत्री ने कहा कि बूढ़ापहाड़ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए जल्द ही सभी विभागों के साथ एक समीक्षा बैठक की जाएगी। इसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दिए गए टास्क की भी समीक्षा होगी और आगे के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इलाके तक पहुंचने वाली सड़क का एक हिस्सा वन भूमि में आता है, जिसके कारण निर्माण में दिक्कतें हैं। फिर भी सरकार एक किलोमीटर आवश्यक सड़क निर्माण को प्राथमिकता देकर अनटायड फंड के जरिए समाधान निकालने का प्रयास करेगी।   नक्सल गढ़ से विकास की ओर बढ़ता बूढ़ापहाड़ बता दें कि बूढ़ापहाड़ 90 के दशक से माओवादियों का बड़ा प्रशिक्षण केंद्र रहा है। सितंबर 2022 में यहां ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ शुरू किया गया था, जिसके बाद इलाके में सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर तेजी आई। अब यह इलाका झारखंड के बदलते परिदृश्य की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Shashi Tharoor
केरल में चुनाव प्रचार के दौरान शशि थरूर के काफिले पर हमला, एक आरोपी हिरासत में

तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। केरलम के मलप्पुरम जिले में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के चुनावी काफिले से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आई है। शुक्रवार शाम वांडूर इलाके में प्रचार कार्यक्रम के लिए जाते समय उनके काफिले को कुछ लोगों ने कथित तौर पर रोक लिया और इस दौरान उनके ड्राइवर व गनमैन पर हमला कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, घटना शाम करीब 7:30 बजे थिरुवल्ली-चेल्लीथोडु पुल के पास हुई, जब सड़क पर जाम जैसी स्थिति बनी हुई थी और काफिले की रफ्तार धीमी हो गई थी।   कैसे हुआ हमला? एफआईआर के मुताबिक, दो वाहनों में सवार करीब पांच लोग अचानक सांसद के वाहन के आगे आ गए और रास्ता रोक दिया। जब गनमैन रतीश के.पी. ने उन्हें हटाने और रास्ता साफ करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ-साथ ड्राइवर पर भी हमला कर दिया। पुलिस का कहना है कि सड़क संकरी थी और सुरक्षा कर्मी ने केवल आगे चल रहे वाहन को थोड़ा आगे बढ़ाने के लिए कहा था, ताकि काफिला निकल सके। इसी बात पर विवाद बढ़ गया।   एक आरोपी हिरासत में, बाकी की तलाश जारी वांडूर पुलिस ने गनमैन की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य हमलावरों की पहचान भी कर ली गई है। कुछ रिपोर्टों में दो वाहनों को जब्त किए जाने और अन्य संदिग्धों को पकड़ने के लिए छापेमारी की बात भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हमला अचानक हुआ या इसके पीछे कोई सुनियोजित मंशा थी।   चुनावी माहौल में बढ़ी सुरक्षा चिंता इस घटना ने केरल में चुनावी माहौल के बीच वीआईपी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है और मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की घटना राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Jharkhand Bar Council election
झारखंड बार काउंसिल चुनाव में मतगणना जारी, गड़बड़ी के आरोपों को अधिकारियों ने किया खारिज

रांची। रांची में झारखंड स्टेट बार काउंसिल के पंचवर्षीय चुनाव की मतगणना लगातार जारी है। 20 मार्च से शुरू हुई यह प्रक्रिया अब अहम चरण में पहुंच चुकी है। शुक्रवार, 3 अप्रैल तक राज्य के लगभग सभी जिला बार संघों में डाले गए प्रथम प्राथमिकता के वोटों की गिनती पूरी कर ली गई है। अब इन मतों के सत्यापन और तकनीकी जांच का काम किया जा रहा है, जिसमें करीब दो दिन का समय लगने की संभावना है। इसके बाद ही द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती शुरू की जाएगी। इस बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों ने भी कुछ देर के लिए माहौल गरमा दिया, हालांकि प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।   गड़बड़ी के आरोपों पर प्रशासन की सफाई चुनाव के दौरान कुछ प्रत्याशियों ने मतगणना और मतदान प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगाए थे। इनमें गजेंद्र कुमार, अजय कुमार, नेहा ठाकुर और अनामिका शर्मा जैसे प्रत्याशियों के नाम सामने आए। लेकिन चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं थे और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश जैसे प्रतीत हो रहे थे। प्रशासन ने इस पूरे मामले को आगे की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई के लिए स्टेट बार काउंसिल को भेज दिया है।   जांच में नहीं मिली कोई अनियमितता इन शिकायतों की जांच सहायक रिटर्निंग ऑफिसर और सेवानिवृत्त जिला जज शिवनारायण सिंह को सौंपी गई थी। उन्होंने मतदान केंद्रों के रजिस्टर, कुल पड़े वोटों की संख्या और बैलेट पेपर लेने के समय किए गए हस्ताक्षरों का बारीकी से मिलान किया। जांच के दौरान किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी या विसंगति सामने नहीं आई। इसी आधार पर प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार करार दिया।   ‘एक भी वोट नहीं मिला’ वाले दावे पर भी उठे सवाल प्रत्याशी अजय कुमार ने दावा किया था कि उन्हें एक भी वोट नहीं मिला, जबकि उनके भतीजे ने उन्हें वोट दिया था। लेकिन जांच के दौरान जब उनसे भतीजे का नाम और अन्य जरूरी जानकारी मांगी गई, तो वे कोई ठोस विवरण नहीं दे सके। इसके बाद उनके इस दावे को भी प्रमाण के अभाव में खारिज कर दिया गया। फिलहाल सभी की नजरें अब अंतिम मतगणना और नतीजों पर टिकी हुई हैं।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
NMACC third anniversary event
NMACC की तीसरी एनिवर्सरी पर बॉलीवुड का मेला, एक मंच पर दिखे कई बड़े सितारे

मुंबई, एजेंसियां। मुंबई में शुक्रवार को आयोजित Nita Mukesh Ambani Cultural Centre (NMACC) की तीसरी वर्षगांठ का जश्न पूरी तरह बॉलीवुड के नाम रहा। इस खास मौके पर नीता अंबानी और मुकेश अंबानी ने शानदार मेजबानी की, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे शामिल हुए। इवेंट की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जहां हर सेलेब्रिटी अपने स्टाइल और फैशन स्टेटमेंट से चर्चा में बना हुआ है।   नीता अंबानी के लुक ने खींचा सबका ध्यान इस खास शाम में नीता अंबानी गोल्डन साड़ी में बेहद एलिगेंट नजर आईं, जबकि मुकेश अंबानी ब्लेजर और ट्राउजर में क्लासी अंदाज में दिखे। दोनों ने मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया और इवेंट की रॉयल थीम ने शाम को और खास बना दिया।   सिद्धार्थ-कियारा और सलमान ने लूटी लाइमलाइट इवेंट में सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की जोड़ी ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। सिद्धार्थ ट्रेडिशनल कुर्ते में नजर आए, जबकि कियारा साड़ी में बेहद खूबसूरत दिखीं। वहीं सलमान खान अपने खास स्वैग में नजर आए और पैपराजी को जमकर पोज दिए। इवेंट में रणवीर सिंह, काजोल, संजय दत्त, अनन्या पांडे, शाहिद कपूर, मीरा कपूर, सोनाली बेंद्रे, सुनील शेट्टी, अनुपम खेर, रितेश देशमुख और

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
coal mafia crackdown
झारखंड में कोयला माफियाओं पर एक्शन, दर्जनों अवैध मुहाने ध्वस्त

धनबाद। झारखंड के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ पुलिस और कोयला कंपनियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की है। सीसीएल के कुजू क्षेत्र और बीसीसीएल के बस्ताकोला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छापेमारी और डोजरिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान दर्जनों अवैध कोयला खदानों के मुहाने बंद किये गये।   जेसीबी की सहायता से बंद किये गये अवैध मुहाने रामगढ़ जिले के मांडू स्थित सेमरा खदान में सीसीएल प्रबंधन ने अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की। कुजू क्षेत्र के महाप्रबंधक के निर्देश पर क्षेत्रीय सुरक्षा बल और परियोजना सुरक्षा टीम ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया। जेसीबी मशीनों की सहायता से खदान तक पहुंचने वाले सभी मुख्य और छोटे रास्तों को गहरे गड्ढे खोदकर पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया। बंद खदानों में अवैध गतिविधि बर्दाश्त नही सीसीएल अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि बंद पड़ी खदानों में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा प्रभारी शिवधर महतो ने मांडू थाना में औपचारिक आवेदन देकर अवैध उत्खनन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।   धनबाद में संयुक्त कार्रवाई उधर, धनबाद के अलकडीहा क्षेत्र में कोयला तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। यहां तिसरा पुलिस, बीसीसीएल प्रबंधन और सीआईएसएफ की संयुक्त टीम ने तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। कुइयां पीओ के नेतृत्व में बंगाली कोठी, कुइंया 5 और 7 नंबर सहित आधा दर्जन से अधिक संवेदनशील स्थलों पर छापेमारी की गई। माफियाओं द्वारा कोयला निकालने के लिए बनाए गए अवैध मुहानों को डोजरिंग कर मिट्टी से भर दिया गया। पिछले सप्ताह ही प्रबंधन ने 40 टन अवैध कोयला जब्त किया था।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Mushroom potato chaap Recipe
मिनटों में बनाएं टेस्टी मशरूम आलू चाप, हर बाइट में मिलेगा जबरदस्त स्वाद

नई दिल्ली, एजेंसियां। अगर आप घर पर कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वाद में भी शानदार हो और देखने में भी बेहद लाजवाब लगे, तो मशरूम आलू चाप आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन है। यह एक ऐसा स्नैक है जो बाहर से कुरकुरा और अंदर से मुलायम होता है। उबले आलू की परत और मसालेदार मशरूम की स्टफिंग इसे खास बनाती है। अच्छी बात यह है कि इसे घर पर आसानी से और कम समय में तैयार किया जा सकता है। चाहे शाम की चाय के साथ सर्व करना हो या अचानक आए मेहमानों के लिए कुछ स्पेशल बनाना हो, यह रेसिपी हर मौके पर फिट बैठती है।   क्या-क्या लगेगा बनाने में? मशरूम आलू चाप बनाने के लिए बहुत ज्यादा जटिल सामग्री की जरूरत नहीं होती। इसके लिए आपको चाहिए—4 उबले आलू, 1 कप बारीक कटे मशरूम, 1 बारीक कटा प्याज, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, आधा-आधा छोटा चम्मच हल्दी, लाल मिर्च और गरम मसाला, थोड़ा धनिया पत्ता, नमक, 1 कप ब्रेड क्रम्ब्स, 2 बड़े चम्मच कॉर्नफ्लोर और तलने के लिए तेल।   ऐसे बनाएं स्वादिष्ट मशरूम आलू चाप सबसे पहले इसकी स्टफिंग तैयार करें। एक कढ़ाई में थोड़ा तेल गर्म करें और उसमें प्याज, हरी मिर्च और अदरक-लहसुन पेस्ट डालकर भून लें। इसके बाद कटे हुए मशरूम डालें और तब तक पकाएं जब तक उनका पानी सूख न जाए। अब इसमें हल्दी, लाल मिर्च, गरम मसाला और नमक डालकर अच्छे से मिलाएं। आखिर में हरा धनिया डालें और मिश्रण को ठंडा होने दें। अब आलू की परत तैयार करें। उबले आलू को अच्छी तरह मैश करें और उसमें थोड़ा नमक मिला लें। इसके बाद आलू की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं। हर लोई को हल्का सा फैलाकर उसके बीच में मशरूम की स्टफिंग रखें और फिर उसे बंद करके टिक्की या चाप का आकार दे दें।   क्रिस्पी कोटिंग और परफेक्ट फ्राई एक कटोरे में कॉर्नफ्लोर को पानी में घोलें। तैयार चाप को पहले इस घोल में डुबोएं और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में लपेट लें। इससे चाप पर शानदार कुरकुरी परत बनती है। अब कढ़ाई में तेल गर्म करें और इन चाप को सुनहरा और क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें।   ऐसे करें सर्व गरमा-गरम मशरूम आलू चाप को हरी चटनी, टमाटर सॉस या मसाला चाय के साथ सर्व करें। यकीन मानिए, इसका स्वाद ऐसा होगा कि मेहमान उंगलियां चाटते रह जाएंगे।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Easter story timeline
Good Friday से Easter Sunday तक क्या हुआ था? जानें 3 दिन और 3 रातों की कहानी

नई  दिल्ली, एजेंसियां। ईसाई धर्म में Good Friday से Easter Sunday तक के तीन दिन बेहद पवित्र और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह समय प्रभु यीशु मसीह के जीवन की सबसे अहम घटनाओं से जुड़ा है उनका बलिदान, क्रूस पर चढ़ाया जाना, मृत्यु, और फिर पुनर्जीवन। यही वजह है कि दुनियाभर के ईसाई इन दिनों को गहरी श्रद्धा, प्रार्थना और आत्मचिंतन के साथ मनाते हैं।   Good Friday: बलिदान और पीड़ा का दिन Good Friday को ईसाई धर्म का सबसे भावनात्मक दिन माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन प्रभु यीशु मसीह को रोमन शासकों के आदेश पर क्रूस (सूली) पर चढ़ाया गया था। इससे पहले उन्हें अपमानित किया गया, कोड़े मारे गए और कांटों का ताज पहनाया गया। अंततः यरुशलम के गोलगोथा नामक स्थान पर उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया। ईसाई मानते हैं कि यीशु ने मानवता के पापों के लिए अपना जीवन बलिदान किया। इसलिए Good Friday शोक का दिन है, लेकिन इसके भीतर प्रेम, क्षमा और त्याग का सबसे बड़ा संदेश भी छिपा है। इस दिन चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं और कई लोग उपवास भी रखते हैं।   Holy Saturday: मौन, शोक और प्रतीक्षा Good Friday के बाद आने वाला शनिवार Holy Saturday कहलाता है। यह दिन बाहरी उत्सव का नहीं, बल्कि भीतर की शांति और प्रतीक्षा का प्रतीक है। ईसाई परंपरा में इसे वह समय माना जाता है जब यीशु का शरीर कब्र में था और उनके अनुयायी गहरे दुख और अनिश्चितता में थे। इस दिन चर्चों में गंभीर वातावरण रहता है। लोग प्रार्थना, ध्यान और मौन के माध्यम से इस आध्यात्मिक यात्रा को महसूस करते हैं। यह दिन सिखाता है कि अंधकार और दुख के बीच भी विश्वास बनाए रखना जरूरी है।   Easter Sunday: पुनर्जीवन और नई आशा का दिन तीसरे दिन यानी Easter Sunday को ईसाई धर्म में सबसे बड़ी खुशखबरी का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन प्रभु यीशु मसीह मृत्यु पर विजय पाकर फिर से जीवित हुए थे। यही घटना Resurrection यानी पुनरुत्थान कहलाती है। Easter Sunday शोक से खुशी, निराशा से आशा और मृत्यु से जीवन की ओर बढ़ने का प्रतीक है। चर्चों में घंटियां बजती हैं, विशेष प्रार्थनाएं होती हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।   इन 3 दिनों का आध्यात्मिक संदेश Good Friday से Easter तक की यह यात्रा केवल धार्मिक घटना नहीं, बल्कि गहरा जीवन संदेश भी देती है। Good Friday त्याग और क्षमा सिखाता है, Holy Saturday धैर्य और विश्वास का पाठ पढ़ाता है, और Easter Sunday नई शुरुआत, उम्मीद और जीवन की जीत का प्रतीक बनता है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Cracked heels causes
फटी एड़ियों से हैं परेशान? जानिए इसके 5 बड़े कारण और आसान घरेलू इलाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। फटी एड़ियां एक बेहद आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है, जो अक्सर सर्दियों, त्वचा के अधिक सूखने या पैरों की सही देखभाल न होने के कारण होती है। शुरुआत में यह केवल ब्यूटी प्रॉब्लम लग सकती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो एड़ियों में गहरी दरारें, दर्द, जलन और कभी-कभी संक्रमण तक हो सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपायों और नियमित केयर से इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।   फटी एड़ियों के 5 मुख्य कारण फटी एड़ियों की सबसे बड़ी वजह त्वचा का सूखापन है। जब पैरों की त्वचा अपनी नमी खो देती है, तो वह सख्त होकर फटने लगती है। इसके अलावा लंबे समय तक खड़े रहना भी एड़ियों पर दबाव बढ़ाता है, जिससे त्वचा पर दरारें बन सकती हैं। शरीर में पानी की कमी भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। पर्याप्त पानी न पीने से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है, जिसका असर पैरों पर भी दिखता है। वहीं, खुले जूते या चप्पल पहनने से पैरों में धूल-मिट्टी ज्यादा जमती है और त्वचा जल्दी खराब होने लगती है।सबसे अहम कारण है सही देखभाल की कमी। अगर पैरों की नियमित सफाई, स्क्रबिंग और मॉइस्चराइजिंग न की जाए, तो एड़ियां जल्दी फटने लगती हैं।   फटी एड़ियों को ठीक करने के आसान घरेलू उपाय फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए सबसे पहले पैरों की सफाई जरूरी है। रोज़ रात को गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डालकर 10 से 15 मिनट तक पैर भिगोना काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे त्वचा मुलायम होती है और जमा गंदगी हटती है। इसके बाद प्यूमिक स्टोन (झांवा) से एड़ियों को हल्के हाथों से रगड़कर डेड स्किन हटाई जा सकती है। ध्यान रहे कि बहुत जोर से रगड़ने से त्वचा और ज्यादा खराब हो सकती है। रात को सोने से पहले नारियल तेल, वैसलीन या गाढ़ा मॉइस्चराइज़र लगाकर मोज़े पहन लेना एड़ियों को गहराई से नमी देता है। इससे दरारें भरने में मदद मिलती है। इसके अलावा हफ्ते में 2-3 बार स्क्रब करना, भरपूर पानी पीना, और पैरों को हमेशा साफ और ढका हुआ रखना भी जरूरी है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Flower festivals in April
अप्रैल के महीने में देखें दुनिया के 6 खूबसूरत फ्लावर फेस्टिवल

नई दिल्ली, एजेंसियां। अप्रैल का महीना ट्रैवल लवर्स और नेचर प्रेमियों के लिए किसी जादुई मौसम से कम नहीं होता। न ज्यादा गर्मी, न कड़ाके की ठंड—बस खिलते फूल, रंग-बिरंगे बाग और खुशबुओं से भरी वादियां। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्सों में अप्रैल के दौरान शानदार फ्लावर फेस्टिवल्स आयोजित किए जाते हैं, जहां प्रकृति अपनी सबसे खूबसूरत शक्ल में नजर आती है। अगर आप अप्रैल 2026 में ट्रैवल प्लान बना रहे हैं, तो ये 6 फ्लावर फेस्टिवल आपकी बकेट लिस्ट में जरूर होने चाहिए।   1. लद्दाख का Apricot Blossom Festival भारत के Ladakh में आयोजित होने वाला यह फेस्टिवल अप्रैल की शुरुआत से ही टूरिस्ट्स को आकर्षित करता है। 2026 के लिए इसकी तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो चुकी हैं, और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक इसका प्रमुख दौर अप्रैल के दूसरे हफ्ते में देखने को मिल सकता है। इस दौरान खुबानी के गुलाबी-सफेद फूल गांवों को किसी पोस्टकार्ड जैसा खूबसूरत बना देते हैं। 2. Sakura Displays, Singapore Singapore के मशहूर Gardens by the Bay में हर साल सकुरा थीम पर खास डिस्प्ले लगाया जाता है। यहां आर्टिफिशियल कूलिंग टेक्नोलॉजी की मदद से जापानी चेरी ब्लॉसम जैसे माहौल को तैयार किया जाता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन अनुभव है जो जापान जाए बिना सकुरा की खूबसूरती देखना चाहते हैं। 3. Japan Cherry Blossom Season Japan का Cherry Blossom Season दुनियाभर में मशहूर है। 2026 में जापान के कई शहरों में सकुरा का पीक सीजन मार्च के अंत से अप्रैल की शुरुआत तक देखा जा रहा है। टोक्यो, क्योटो और आसपास के इलाकों में हनामी यानी फूलों के नीचे पिकनिक मनाने की परंपरा इस मौसम को और खास बना देती है।   4. EPCOT International Flower & Garden Festival, USA EPCOT में होने वाला यह फेस्टिवल बच्चों और फैमिली ट्रैवलर्स के लिए शानदार विकल्प है। 2026 में यह 4 मार्च से 1 जून तक चल रहा है। यहां फूलों से बने डिज्नी कैरेक्टर, बटरफ्लाई गार्डन और थीम्ड टोपियरी इसकी खास पहचान हैं।   5. Amsterdam Tulip Festival Amsterdam का ट्यूलिप सीजन अप्रैल में अपनी पूरी रौनक पर होता है। शहर और आसपास के गार्डन रंग-बिरंगे ट्यूलिप से सज जाते हैं, जिन्हें देखने हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। यह यूरोप के सबसे इंस्टाग्राम-फ्रेंडली फ्लावर एक्सपीरियंस में गिना जाता है।   6. Ashikaga Flower Park, Japan जापान का Ashikaga Flower Park अपने Great Wisteria Festival 2026 के लिए खास तौर पर जाना जाता है। यह फेस्टिवल 11 अप्रैल से 20 मई तक आयोजित हो रहा है। यहां बैंगनी, गुलाबी, सफेद और पीले विस्टेरिया फूलों की सुरंगें और शाम की लाइटिंग एक सपनों जैसी दुनिया बना देती हैं।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
kidney stone blood in urine
किडनी स्टोन में यूरिन से खून आना क्यों होता है? जानें एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली, एजेंसियां। किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी आजकल एक आम लेकिन बेहद तकलीफदेह समस्या बन चुकी है। कई बार इस परेशानी से जूझ रहे मरीजों को यूरिन करते समय खून भी दिखाई देता है, जिससे डर और चिंता बढ़ जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या किडनी स्टोन में यूरिन से खून आना सामान्य है या यह किसी गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, पेशाब में खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमेट्यूरिया (Hematuria) कहा जाता है। यह किडनी स्टोन के मरीजों में देखा जाने वाला एक सामान्य लक्षण हो सकता है। जब किडनी में मौजूद स्टोन दवाओं या प्राकृतिक तरीके से शरीर से बाहर निकलने लगते हैं, तो वे यूरिनरी ट्रैक्ट यानी मूत्र मार्ग से होकर गुजरते हैं। इस दौरान स्टोन की सतह मूत्र नली या आसपास की अंदरूनी परत को हल्का नुकसान पहुंचा सकती है। इसी वजह से वहां से थोड़ी मात्रा में ब्लड निकलता है, जो यूरिन के साथ बाहर आ जाता है।   कब तक सामान्य और कब हो सकता है खतरे का संकेत डॉक्टरों का कहना है कि एक-दो बार हल्का खून आना कई मामलों में बहुत गंभीर नहीं होता, खासकर तब जब स्टोन छोटा हो और बाहर निकल रहा हो। लेकिन यदि बार-बार यूरिन में खून आ रहा है, पेशाब करते समय तेज जलन, बुखार, तेज दर्द, उल्टी या पेशाब रुकने जैसी समस्या भी हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति केवल स्टोन ही नहीं, बल्कि किडनी इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है।   क्या सभी किडनी स्टोन अपने आप निकल जाते हैं? यह पूरी तरह स्टोन के आकार और उसकी लोकेशन पर निर्भर करता है। आमतौर पर 5 मिमी (MM) से छोटे स्टोन दवाओं, पर्याप्त पानी और कुछ मेडिकल मैनेजमेंट की मदद से यूरिन के रास्ते बाहर निकल सकते हैं। लेकिन यदि स्टोन बड़ा हो, अटका हुआ हो या दर्द और ब्लीडिंग बढ़ रही हो, तो सर्जरी या अन्य मेडिकल प्रोसीजर की जरूरत पड़ सकती है।   जांच और इलाज में देरी न करें यदि यूरिन में खून दिखाई दे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और अन्य जांचों से सही कारण का पता लगाया जा सकता है। समय पर इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है और किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Jharkhand Film Festival
Ranchi में 26 से 28 जून तक आयोजित होगा झारखंड फिल्म फेस्टिवल

रांची। झारखंड फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन रांची में 26 से 28 जून तक होगा। राज्यपाल संतोष गंगवार ने “चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल 2026” के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, क्षेत्र प्रचारक रामनवमी जी, विभाग  संपर्क प्रमुख भानु जालान, महानगर प्रचार प्रमुख स्निग्ध रंजन, चित्रपट झारखंड के अध्यक्ष नंद कुमार सिंह तथा कोषाध्यक्ष सुमित मित्तल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।  सरला बिरला स्कूल में होगा आयोजन चित्रपट झारखंड द्वारा  यह फिल्म महोत्सव आगामी 26, 27 एवं 28 जून 2026 को सरला बिरला विश्वविद्यालय  परिसर, टाटीसिल्वे, रांची में आयोजित किया जाएगा। झारखंड के युवा फिल्म निर्माताओं को अवसर इस फिल्म महोत्सव का मुख्य उद्देश्य झारखंड के युवा फिल्म निर्माताओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना तथा क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से झारखंड के फिल्मकार अपनी कला के जरिए राज्य की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही, यह आयोजन सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य भी करेगा। सिर्फ झारखंड के निर्माताओं को मौका इस फिल्म महोत्सव में केवल झारखंड राज्य के फिल्म निर्माता ही अपनी फिल्में जमा कर सकते हैं। प्रतियोगिता में फिल्मों की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं— * लघु फिल्म (अधिकतम 20 मिनट) * वृत्तचित्र (अधिकतम 30 मिनट) * परिसर फिल्म (अधिकतम 15 मिनट; इसमें केवल लघु फिल्म ही मान्य होगी) *पंजीकरण शुल्क:* * लघु फिल्म – ₹500 * वृत्तचित्र – ₹500 * परिसर फिल्म – ₹250 विद्यार्थियों के लिए विशेष रियायत के तहत वे किसी भी श्रेणी में मात्र ₹250 शुल्क देकर अपनी फिल्म जमा कर सकते हैं। झारखंडी भाषाओं की फिल्मे झारखंड में बोली जाने वाली सभी भाषाओं में फिल्में स्वीकार की जाएंगी। हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं की फिल्मों के लिए हिंदी अथवा अंग्रेजी में उपशीर्षक अनिवार्य होगा।   फिल्मों के 12 विषय निर्धारित 1. झारखंड का इतिहास 2. जनजातीय समाज 3. ग्राम विकास 4. महिला सशक्तिकरण 5. पर्यावरण 6. सामाजिक समरसता 7. युवा और नशामुक्ति 8. नागरिक कर्तव्य 9. खेल और प्रतिभा 10. पलायन 11. डिजिटल भारत / तकनीकी परिवर्तन 12. भ्रष्टाचार और पारदर्शिता 1 जुलाई 2023 के बाद निर्मित फिल्में मान्य आयोजन समिति द्वारा यह भी निर्धारित किया गया है कि केवल 1 जुलाई 2023 के बाद निर्मित फिल्में ही मान्य होंगी। फिल्म जमा करने की अंतिम तिथि रविवार, 7 जून 2026 निर्धारित की गई है, जबकि चयनित फिल्मों की सूची 15 जून 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इस फिल्म महोत्सव में कुल ₹2,70,000 का नकद पुरस्कार रखा गया है। यह आयोजन झारखंड के युवाओं के लिए फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करेगा। यह जानकारी चित्रपट झारखंड के सदस्य नवीन सहाय ने दी।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Naxal violence in India
नक्सल मुक्त भारत का सच

नई दिल्ली, एजेंसियां।  केंद्र सरकार ने हाल ही में दावा किया कि भारत नक्सल मुक्त हो गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च को लोकसभा में कहा कि देश अब नक्सलवाद के खतरे से काफी हद तक मुक्त है। लेकिन, क्या यह दावा वाकई सच है या केवल राजनीतिक बयानबाजी है? क्या आंकड़े और घटनाक्रम वाकई नक्सल खतरे को समाप्त करने का संकेत देते हैं, या यह सिर्फ सरकारी आंकड़ों के सहारे बनाई गई एक सकारात्मक छवि है? नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। पिछले छह वर्षों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने या तो आत्मसमर्पण किया है या उन्हें गिरफ्तार किया गया है। बड़ी संख्या में नक्सली मारे भी गये हैं।  सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जनवरी 2020 से 31 जनवरी 2026 तक कुल 4340 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जबकि 3644 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, इस दौरान सुरक्षा बलों ने 666 नक्सलियों को मार गिराया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर भी सरकार खास ध्यान दे रही है। अब तक 2937 माओवादियों का पुनर्वास किया जा चुका है। इनमें 1496 इनामी नक्सली और 1441 बिना इनाम वाले नक्सली शामिल हैं। इनामी नक्सलियों के पुनर्वास पर सरकार ने कुल 5 करोड़ 64 लाख रुपये खर्च किए हैं। सरकार द्वारा चलाए गए अभियान और फोर्स की मुस्तैदी के कारण पिछले एक साल में प्रदेश में कई बड़े नक्सल लीडर्स ने अपने हथियार डाले हैं। वहीं दूसरी ओर जिन लीडर्स ने विचारधारा को जिंदा रखने के लिए फोर्स के सामने चुनौती बनने की कोशिश की, वो मिट्टी में मिल चुके हैं। लेकिन, क्या यह पुनर्वास नीति वास्तव में प्रभावी है? क्या यह सुनिश्चित कर पा रही है कि नक्सल विचारधारा फिर से नहीं उभरेंगा? क्या आदिवासी इलाकों में विकास और रोजगार की कमी को देखते हुए नक्सली  फिर से नहीं सक्रिय  हो पाएंगे? खासकर झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों  की बात करे तो क्या यहां की वास्तविक स्थिति सरकार के दावे से मेल खाती है? छत्तीसगढ़ का बस्तर अब नक्सल मुक्त होकर लाल आतंक के घोर अंधियारे से निकल चुका है। जिस बस्तर में कभी गोलियों की आवाज सन्नाटे को चीरती थी,वहां अब विकास की  बयार बह रही है। बस्तर के जिन जिलों में नक्सली गतिविधियां थी, वहां पर सुरक्षा कैम्प खुल चुके हैं और बचे हुए कुछ माओवादी अपनी जान बचाकर भाग चुके हैं।  केंद्र सरकार ने संसद में इस बात का ऐलान किया कि अब देश नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हो चुका है।    वहीं झारखंड के सारंडा जिला  में सुरक्षा एजेंसियों का अभियान अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। राज्य का लगभग 95 प्रतिशत इलाका नक्सल मुक्त हो चुका है, जबकि बचे हुए इलाकों, खासकर सारंडा वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। भले ही केंद्र सरकार ने नक्सलवाद के पूरे सफाए का दावा किया है, लेकिन हकीकत यह है कि झारखंड में नक्सलियों का अस्तित्व अभी भी बरकरार है। राज्य का सारंडा क्षेत्र आज भी इनाम घोषित नक्सलियों का पनाहगाह बना हुआ है। झारखंड पुलिस मुख्यालय के अनुसार सारंडा में एक करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश और मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर के साथ लगभग 48 नक्सली मौजूद हैं। पिछले छह महीनों से उनकी कोई बड़ी गतिविधि सामने नहीं आई है।  खुफिया विभाग को सूचना मिली है कि एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा कभी भी सरेंडर कर सकता है और पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उनके परिवार के संपर्क में हैं।  झारखंड पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट और 30 मार्च 2026 की अपडेटेड लिस्ट के अनुसार राज्य में इनामी नक्सलियों की संख्या अभी भी 48 है।  आंकड़ों के अनुसार झारखंड में अभी भी 1 करोड़ के दो नक्सली, 25 लाख के दो नक्सली,15 लाख के आठ नक्सली,10 लाख के आठ नक्सली,5 लाख के 16 नक्सली, 2 लाख के पांच नक्सली और 1 लाख  के सात  नक्सली सक्रिय है।  यह लिस्ट दर्शाती है कि नक्सल संगठन अभी भी झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के बॉर्डर क्षेत्रों में सक्रिय हैं।  ऐसी स्थिति में क्या यह दावा करना सही होगा कि भारत नक्सल मुक्त हो गया है? या सिर्फ आंकड़ों और दावों का खेल है? झारखंड और छत्तीसगढ़ इन संवेदनशील क्षेत्रों का हाल देखते हुए नक्सल मुक्त कहना कितना उचित है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Rajpal Yadav
राजपाल यादव ने जेल के दिनों को किया याद, फराह खान से शेयर किया दिल का हाल

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने हाल ही में अपने जीवन के उस मुश्किल दौर को याद किया, जब उन्हें चेक बाउंस मामले में कुछ दिन जेल में बिताने पड़े थे। मशहूर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान राजपाल यादव ने पहली बार जेल के अंदर के अपने अनुभवों को खुलकर साझा किया। इस दौरान वे भावुक भी नजर आए।   फराह खान के सवाल पर खोला दिल का हाल बातचीत के दौरान फराह खान ने जब राजपाल यादव से पूछा कि क्या जेल के अंदर उनके फैंस भी थे, तो उन्होंने बेहद सादगी और गंभीरता से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वहां फैंस जैसी कोई बात नहीं होती, बल्कि वहां केवल सिस्टम, कानून और अनुशासन सबसे बड़ा होता है। राजपाल ने कहा कि जेल के अंदर रहने का अनुभव उन्हें जीवन की सच्चाई और अनुशासन की अहमियत और गहराई से समझा गया।   ‘हर हाल में जीना सीख लिया’ जब फराह ने उनसे पूछा कि क्या इस पूरे अनुभव ने उन्हें गुस्सा या तकलीफ दी, तो राजपाल यादव ने शांत अंदाज में कहा कि उन्होंने हर परिस्थिति में जीना सीख लिया है। उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें कोई विशेष ड्यूटी नहीं दी गई थी, लेकिन वहां जो नियम और अनुशासन थे, उनका पूरी तरह पालन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि उन्हें वहीं रहकर समय बिताना था और उसी स्थिति को स्वीकार करना पड़ा।   मदद करने वालों का जताया आभार राजपाल यादव ने इस मुश्किल समय में उनका साथ देने वाले फैंस, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का भी दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भी सोशल मीडिया या व्यक्तिगत रूप से उनका समर्थन किया, वे उन सभी के प्रति कृतज्ञ हैं।   अब ‘भूत बंगला’ में आएंगे नजर वर्कफ्रंट की बात करें तो राजपाल यादव जल्द ही अक्षय कुमार के साथ फिल्म भूत बंगला में नजर आएंगे। यह फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होगी। इसके अलावा, वे वेलकम टू द जंगल और हैवान जैसी फिल्मों में भी दिखाई देंगे।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Hazaribagh gas agency
हजारीबाग में गैस एजेंसी पर मनमानी का आरोप, प्रशासन के दबाव के बाद शुरू हुआ वितरण

हजारीबाग। हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड में रसोई गैस की भारी किल्लत से आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। एचपी गैस एजेंसी पर मनमानी और लापरवाही के आरोप लगे हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं को पिछले कई दिनों से घरेलू गैस के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा था। बताया जा रहा है कि एजेंसी का कार्यालय और गोदाम करीब 10 से 15 दिनों तक बंद रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई।   लंबी कतारों में खड़े रहे उपभोक्ता गैस नहीं मिलने से परेशान उपभोक्ता लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रहे थे। एजेंसी के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां महिलाएं और बुजुर्ग तक कड़ी धूप में गैस सिलेंडर लेकर खड़े नजर आए। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें हर दिन सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा था, लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा था।   प्रशासन के दबाव के बाद खुला एजेंसी कार्यालय शिकायत मिलने के बाद चौपारण के अंचल अधिकारी (सीओ) संजय यादव निरीक्षण के लिए गैस एजेंसी पहुंचे। वहां उन्होंने पाया कि एजेंसी का ऑफिस और गोदाम दोनों बंद हैं। एजेंसी संचालक और मैनेजर का मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ मिला। इसके बाद प्रशासन की सख्ती बढ़ी और शुक्रवार को एजेंसी ने अपना कार्यालय खोलकर गैस वितरण शुरू किया।   कालाबाजारी और घपले के आरोप ग्राहकों ने एजेंसी पर गैस वितरण में घपले और कालाबाजारी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उपभोक्ता सुनीता देवी ने बताया कि डीएसी (DAC) नंबर आने के बावजूद भी गैस नहीं दी जा रही थी और 10 दिन बाद आने को कहा जा रहा था। लोगों का आरोप है कि एजेंसी की मनमानी और कथित कालाबाजारी के कारण यह संकट पैदा हुआ।   जांच के बाद होगी कार्रवाई एसडीओ जोहान टुडू ने कहा कि एजेंसी बंद रहने की शिकायतों की जांच कराई जा रही है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Ranchi electricity outage
रांची के इन इलाकों में घंटों नहीं रहेगी बिजली

रांची। रांची के लोगों के लिए शनिवार का दिन बिजली कटौती के लिहाज से अहम है। शहर के कई इलाकों में आज निर्धारित समय के अनुसार बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। बिजली विभाग ने बताया है कि आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में पुराने तारों को बदलने, कवर केबल लगाने और नए पोल खड़े करने का कार्य किया जा रहा है। इसी कारण अलग-अलग डिवीजन में कुछ घंटों के लिए बिजली बंद रखी जाएगी।   कोकर इलाके में 6 घंटे तक बिजली रहेगी बाधित कोकर डिवीजन के आरएमसीएच सब डिवीजन अंतर्गत बड़गाईं और न्यू मोरहाबादी फीडर से जुड़े क्षेत्रों में सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक बिजली नहीं रहेगी। इस कटौती का असर कृष्णा पुरी कॉलोनी, हरिहर सिंह रोड, प्रगतिशील कॉलोनी और महावीर नगर जैसे इलाकों में देखने को मिलेगा। विभाग के अनुसार, यहां पुराने खुले तारों को हटाकर कवर केबल लगाने का काम किया जाएगा।   ओरमांझी और इरबा क्षेत्र में भी बिजली कटौती रांची (पूर्वी) डिवीजन के ओरमांझी सब डिवीजन में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। इरबा बाजार टांड़ और आसपास के इलाकों में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली बंद रहेगी। वहीं शिवाजी नगर और बूटी क्षेत्र में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आपूर्ति ठप रहेगी। इन इलाकों में 11 केवी ओरमांझी-1, ओरमांझी-2 और बूटी फीडर पर काम होना है।   डोरंडा डिवीजन में भी असर डोरंडा डिवीजन के अनंतपुर और एचएसएल फीडर से जुड़े क्षेत्रों में भी सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।   बिजली विभाग की अपील विभाग ने कहा है कि यह काम भविष्य में बेहतर, सुरक्षित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे तय समय के अनुसार अपने जरूरी कार्य पहले ही निपटा लें और विभाग का सहयोग करें।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Vishayavaar paathy yojana
विषयवार पाठ्य योजना नहीं देने वाले स्कूली शिक्षक होंगे वेतन से वंचित

रांची। झारखंड शिक्षा परियोजना ने स्कूली शिक्षकों के लिए नया फरमान जारी किया है। इसके मुताबिक अब सभी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से विषयवार पाठ्य योजना तैयार करनी होगी। ऐसा नहीं करने वाले शिक्षकों और पारा शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उनका मई माह तक का वेतन या मानदेय रोक दिया जाएगा। इस संबंध में झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक शशि रंजन ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE) को स्पष्ट निर्देश दिया हैं।  शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है उद्देश्य विभाग का उद्देश्य नए सत्र की शुरुआत से ही शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और शिक्षण प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।   पाठ्य योजना बनाना अनिवार्य निर्देश के अनुसार सभी शिक्षक अपने-अपने विषयों की विस्तृत पाठ्य योजना तैयार करेंगे और उसे प्रधानाध्यापक या संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी से अनुमोदित कराएंगे। इसके बाद ही उस योजना को विद्यालयों में लागू किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि सुनियोजित पाठ्य योजना से छात्रों के सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।   पहले दो महीने ‘आधारभूत कक्षाओं’ पर जोर शिक्षा परियोजना ने यह भी निर्देश दिया है कि अप्रैल और मई महीने में विद्यालयों में ‘आधारभूत आरंभिक कक्षाओं’ का आयोजन किया जाए। इन कक्षाओं का उद्देश्य छात्रों के पूर्व ज्ञान का आकलन करना और उनकी कमजोरियों को दूर करना है। इसके तहत सभी छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट किया जाएगा। इस आकलन के आधार पर छात्रों को ए, बी, सी और डी ग्रेड में वर्गीकृत किया जाएगा। खासतौर पर भाषा विषयों—हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू—में छात्रों के अक्षर ज्ञान, पढ़ने-लिखने की क्षमता और व्याकरण की समझ का मूल्यांकन किया जाएगा।   ब्रिज कोर्स से शिक्षा की मजबूत नींव तैयार होगी नए नामांकित छात्रों और कमजोर विद्यार्थियों के लिए ब्रिज कोर्स भी संचालित किया जाएगा। इसके तहत छात्रों को उनकी समझ के स्तर के अनुसार समूहों में बांटकर पढ़ाया जाएगा। हर विषय की एक घंटी प्रतिदिन अनिवार्य रूप से संचालित की जाएगी, ताकि सभी विषयों में संतुलित सुधार हो सके।   नई समय-सारिणी का होगा पालन बेसलाइन असेसमेंट और प्रारंभिक कक्षाओं के बाद विद्यालयों में सीबीएसई या जैक के अनुरूप समय-सारिणी तैयार की जाएगी। कक्षावार टाइम-टेबल बनाकर उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने कक्षावार और विषयवार सिलेबस भी जारी किया है। शिक्षा विभाग के इस फैसले को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
CSK vs PBKS
IPL 2026: 209 रन बनाकर भी हारी चेन्नई, पंजाब किंग्स की लगातार दूसरी जीत

नई दिल्ली, एजेंसियां। IPL 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स ने चेन्नई को 5 विकेट से हराकर सीजन की अपनी लगातार दूसरी जीत दर्ज की। यह मुकाबला पूरी तरह बल्लेबाजों के नाम रहा, जिसमें दोनों टीमों ने आक्रामक क्रिकेट का शानदार प्रदर्शन किया।   चेन्नई ने खड़ा किया 209 रनों का मजबूत स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 209 रन बनाए। टीम की ओर से युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे ने शानदार पारी खेलते हुए 43 गेंदों में 73 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वहीं शिवम दुबे ने भी तेजतर्रार अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 27 गेंदों पर नाबाद 45 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों की शानदार साझेदारी ने चेन्नई को बड़े स्कोर तक पहुंचाया।   पंजाब की विस्फोटक शुरुआत ने बदला मैच 210 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। ओपनर प्रियांश आर्य और प्रभसिमरन सिंह ने तेज बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 4.2 ओवर में 61 रन जोड़ दिए। प्रियांश आर्य ने महज 11 गेंदों पर 39 रन की तूफानी पारी खेली, जबकि प्रभसिमरन सिंह ने 34 गेंदों में 43 रन बनाए।   श्रेयस अय्यर ने निभाई कप्तानी जिम्मेदारी मध्यक्रम में कप्तान श्रेयस अय्यर ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाया। उन्होंने 29 गेंदों में 50 रन बनाकर टीम की जीत को आसान बनाया। कूपर कॉनॉली ने भी 22 गेंदों में 36 रन का योगदान दिया। पंजाब ने 18.4 ओवर में 5 विकेट खोकर 210 रन बनाते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।   चेन्नई की चिंता बढ़ी, पंजाब का आत्मविश्वास ऊंचा लगातार दूसरी हार के बाद चेन्नई सुपर किंग्स पर दबाव बढ़ गया है, जबकि पंजाब किंग्स जीत की लय में नजर आ रही है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Ramgarh elephant attack
रामगढ़ में हाथियों ने 3 लोगों को कुचलकर ले ली जान

रामगढ़। रामगढ़ जिले के गोला थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों ने कहर बरपाया है। यहां बंदा और मुरपा गांव में हाथियों ने हमला कर तीन लोगों को मार डाला। इससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश है।  मुरपा में वृद्ध को कुचला जानकारी के अनुसार, सबसे पहले मुरपा गांव में महुआ चुनने जा रहे वृद्ध श्याम देव साव पर हाथियों ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हाथियों का झुंड बंदा गांव के बांग्ला भट्ठा क्षेत्र में पहुंचा, जहां शौच के लिए जा रहे दो मजदूरों युगल भुईया और धीरज भुईया पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में दोनों की घटनास्थल पर ही जान चली गई। वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची मौके पर घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। मृतकों की पहचान कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका आरोप है कि इस क्षेत्र में हाथियों का खतरा लगातार बना हुआ है, लेकिन वन विभाग समय रहते कोई चेतावनी जारी नहीं करता। साथ ही, हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने में भी विभाग विफल साबित हो रहा है।    मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा इस संबंध में गोला वन क्षेत्र पदाधिकारी नीलेश पोद्दार ने बताया कि विभाग को पहले हाथियों के दूसरे जिले में होने की जानकारी थी, लेकिन अचानक उनका रुख इस इलाके की ओर हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा। गांव में दहशत फिलहाल गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों को जल्द से जल्द सुरक्षित क्षेत्र में खदेड़ा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद रहकर स्थिति को संभालने और लोगों को शांत कराने का प्रयास कर रही है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0