ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच युद्ध टालने को लेकर बातचीत तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी अटकलें जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने इस संकट को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “निर्णायक मोड़” पर पहुंच चुकी है और अगले कुछ दिन बेहद अहम होंगे। ईरान ने कहा- बातचीत के विकल्प खुले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि तेहरान की ओर से बातचीत के सभी रास्ते अब भी खुले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान ने हमेशा अपने वादों का सम्मान किया है और युद्ध टालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दबाव बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके मुताबिक, समस्या का समाधान केवल सम्मानजनक बातचीत से ही निकल सकता है। परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत और प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति नहीं बन पाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अपने प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी शर्तें रखीं, जिन्हें तेहरान ने खारिज कर दिया। इसके बाद ईरान ने पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को 14 बिंदुओं वाला नया प्रस्ताव भेजा। वॉशिंगटन इस प्रस्ताव से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव और अनिश्चितता अभी बनी हुई है। ट्रंप ने टाला सैन्य हमला ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया है। उनके अनुसार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने बातचीत को मौका देने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को उम्मीद है कि जल्द कोई समझौता हो सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि किसी भी समझौते की स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। “जरूरत पड़ी तो बड़ा हमला करेंगे” अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका “एक और बड़ा हमला” करने के लिए तैयार है। ट्रंप के मुताबिक, सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला अगले कुछ दिनों में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार या अगले सप्ताह की शुरुआत तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है। वहीं कई अरब देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर हालात को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर रणनीति पर मतभेद सामने आने की खबर है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत काफी तनावपूर्ण रही और ईरान पर आगे की कार्रवाई को लेकर दोनों की राय अलग-अलग नजर आई। रिपोर्ट के अनुसार, जहां इजराइल ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य अभियान शुरू करने के पक्ष में है, वहीं अमेरिका फिलहाल बातचीत और संभावित समझौते के रास्ते पर जोर देता दिखाई दे रहा है। ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट में बड़ा दावा अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू “बेहद नाराज” थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइली नेतृत्व ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करने तथा उसके अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर दबाव बढ़ाने के पक्ष में है। बताया गया कि नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा हालात में सैन्य दबाव कम करना इजराइल की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। ट्रंप ने टाली हमले की योजना ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान पर प्रस्तावित हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अरब देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि वह अब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना देख रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि बातचीत असफल रहती है तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने के लिए तैयार रहेगा। नया शांति प्रस्ताव तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और कतर सहित कुछ क्षेत्रीय मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से नया शांति प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव का मकसद दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करना और संभावित सैन्य टकराव को टालना है। हालांकि नेतन्याहू इस प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं। “समझौते और युद्ध के बीच खड़ी है दुनिया” ट्रंप ने बुधवार को कनेक्टिकट स्थित कोस्ट गार्ड अकादमी में संबोधन के दौरान कहा कि अमेरिका और ईरान फिलहाल “समझौते और युद्ध के बीच की सीमा” पर खड़े हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “स्थिति बेहद निर्णायक मोड़ पर है। अगर हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिले तो हालात तेजी से बदल सकते हैं। हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं।” क्षेत्रीय तनाव पर बढ़ी वैश्विक नजर ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है। वहीं अरब देशों की कोशिश है कि बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखा जाए।
ठाणे रेलवे स्टेशन के पास स्थित गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में गुरुवार तड़के भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई। हादसे में एक फायरमैन और एक सिक्योरिटी गार्ड ने जान गंवा दी, जबकि दो अन्य दमकलकर्मी घायल हो गए हैं। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा। सुबह 3:45 बजे लगी आग अधिकारियों के मुताबिक, आग गुरुवार सुबह करीब 3:45 बजे गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में लगी। आग लगते ही दमकल विभाग ने “ब्रिगेड कॉल” घोषित कर दी, जिसका मतलब है कि हालात पर काबू पाने के लिए विभाग के अधिकतम संसाधनों को मौके पर भेजा गया। मार्केट कॉम्प्लेक्स में कपड़ों की दुकानों के अलावा सब्जी और फल मंडी भी मौजूद थी। आग की ऊंची लपटें और घना धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में आग ने बाजार के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दो की मौत, दो घायल प्रशांत रोडे ने बताया कि हादसे में एक फायरमैन और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हुई है। वहीं, क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ (RDMC) के प्रमुख यासीन तड़वी के अनुसार, दो अन्य दमकलकर्मी घायल हुए हैं और उनका इलाज जारी है। अधिकारियों ने बताया कि आग “मेजर फायर” श्रेणी की थी, जिसने पूरे बाजार क्षेत्र को प्रभावित किया। कपड़ों की दुकानों से तेजी से फैली आग दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाजार की कई दुकानों में बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामान रखा हुआ था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई। आग की वजह से कई दुकानों का सामान जलकर खाक हो गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत और बचाव अभियान जारी दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। पुलिस और प्रशासन ने इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
Air India Flight AI171 Crash को लेकर एक नया और भावुक दावा सामने आया है। हादसे में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खोने वाले गुजरात के खेड़ा निवासी Roman Vohra ने दावा किया है कि उन्होंने मोर्चरी में पायलट Captain Sumeet Sabharwal का शव “बैठी हुई अवस्था” में देखा था और उनके हाथ अब भी विमान के कंट्रोल पर थे। हादसे में गई थी 260 लोगों की जान Air India की फ्लाइट AI-171 12 जून को Sardar Vallabhbhai Patel International Airport से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद मेघानीनगर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। विमान लंदन जा रहा था। इस भीषण हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी। केवल एक यात्री जीवित बचा था। विमान का संचालन कैप्टन सुमीत सभरवाल और सह-पायलट Clive Kunder कर रहे थे। “मोर्चरी में देखा पायलट का शव” रोमन वोहरा ने बताया कि वह 13 जून को अपने भाई, भतीजी और बुआ के शव की पहचान के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल की मोर्चरी पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मेडिकल क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति मिली थी। उनके अनुसार, कैप्टन सुमीत सभरवाल का शव बाकी शवों से अलग रखा गया था और शरीर कठोर अवस्था में बैठने की मुद्रा में था, मानो वह अभी भी विमान की सीट पर बैठे हों। “पायलट के हाथ कंट्रोल योक पर थे” रोमन वोहरा ने दावा किया कि पायलट के हाथ विमान के कंट्रोल योक पर थे और पैर भी बैठे हुए व्यक्ति की मुद्रा में मुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म और शरीर की बनावट से उन्होंने पायलट की पहचान की। उनके मुताबिक, शव का आगे का हिस्सा और चेहरा ज्यादा नहीं जला था, जबकि पीठ की ओर अधिक जलने के निशान थे। डीएनए मैच के बाद मिला शव रोमन वोहरा ने बताया कि हादसे के बाद कई दिनों तक परिवार के लोग अस्पताल के बाहर इंतजार करते रहे। बाद में डीएनए मिलान के बाद उनके परिजनों के शव सौंपे गए। उन्होंने कहा कि मेडिकल फील्ड से जुड़े होने के कारण वह शरीर की संरचना और अन्य संकेतों के आधार पर पहचान कर सके कि वह शव कैप्टन सभरवाल का ही था। अमेरिकी लॉ फर्म ने उठाए सवाल अमेरिका की लॉ फर्म Chiunuma Law, जो हादसे में मारे गए 115 लोगों के परिवारों का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रही है, ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। फर्म के केस मैनेजर Ayush Rajpal ने कहा कि यदि पायलट आखिरी समय तक विमान को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे, तो केवल अटकलों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हादसे के हर तकनीकी, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और मानवीय पहलू की स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा जांच होनी चाहिए। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया था? Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने जुलाई में जारी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा था कि उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद विमान के इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है कि उसने फ्यूल सप्लाई क्यों बंद की, जबकि दूसरा जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया। AAIB के मुताबिक, फ्यूल सप्लाई बंद होने के बाद इंजन की शक्ति तेजी से कम होने लगी थी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पिछले साल नवंबर में Supreme Court of India ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि हादसे के लिए किसी ने भी मुख्य पायलट को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। अदालत ने कैप्टन सुमीत सभरवाल के 91 वर्षीय पिता से कहा था कि वह किसी तरह का भावनात्मक बोझ अपने ऊपर न लें।
Central Bureau of Investigation (CBI) ने सेना के टेंडरों में कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए Colonel Himanshu Bali को गिरफ्तार किया है। कर्नल हिमांशु बाली Fort William स्थित पूर्वी कमान में सेना आयुध कोर में तैनात थे। सूत्रों के मुताबिक, कर्नल बाली पर करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। सीबीआई की एफआईआर में दावा किया गया है कि उन्होंने कानपुर की एक निजी कंपनी को सेना के टेंडर दिलाने में अनुचित लाभ पहुंचाया और इसके बदले रिश्वत स्वीकार की। क्या है पूरा मामला? सीबीआई के अनुसार यह मामला भारतीय सेना की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि कर्नल हिमांशु बाली ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया। जांच एजेंसी ने मामले में छापेमारी और शुरुआती जांच के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल सीबीआई यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में अन्य अधिकारी या निजी कंपनियां भी शामिल थीं या नहीं। सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश विशेषज्ञों के मुताबिक सेना जैसे संवेदनशील संस्थान में किसी वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी बेहद गंभीर मामला माना जाता है। यह कार्रवाई रक्षा संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है। पूछताछ जारी सीबीआई ने कर्नल हिमांशु बाली से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में टेंडर घोटाले से जुड़े और अहम खुलासे हो सकते हैं।
India और United States के बीच लगभग 40 करोड़ डॉलर की अहम रक्षा डील को मंजूरी मिल गई है। इस समझौते के तहत भारत को अपाचे हेलीकॉप्टरों और एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के रखरखाव, तकनीकी सहायता और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस डील से भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और रक्षा तैयारियां और मजबूत होंगी। अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए 19.82 करोड़ डॉलर की मंजूरी अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत को एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों से जुड़ी सेवाएं और उपकरण बेचने की मंजूरी दे दी गई है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 19.82 करोड़ अमेरिकी डॉलर बताई गई है। इसमें शामिल हैं: तकनीकी सहायता इंजीनियरिंग सपोर्ट लॉजिस्टिक सहायता प्रशिक्षण सेवाएं तकनीकी दस्तावेज रखरखाव संबंधी उपकरण इन सेवाओं को Boeing और Lockheed Martin जैसी अमेरिकी रक्षा कंपनियां उपलब्ध कराएंगी। एम777 हॉवित्जर तोपों को भी मिलेगा सपोर्ट इसके अलावा अमेरिका ने भारत को एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के रखरखाव और सहायता सेवाओं की बिक्री को भी मंजूरी दी है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 23 करोड़ अमेरिकी डॉलर है। इन सेवाओं की जिम्मेदारी ब्रिटेन की रक्षा कंपनी BAE Systems को दी गई है। भारतीय सेना पहले से कर रही इस्तेमाल अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 हॉवित्जर तोपें पहले से भारतीय सेना के बेड़े का हिस्सा हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर अपनी अत्याधुनिक हमला क्षमता और दुश्मन के टैंकों को निशाना बनाने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। वहीं एम777 हॉवित्जर तोपें ऊंचाई वाले इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से तैनात की जा सकती हैं। नियमित तकनीकी सहायता और रखरखाव मिलने से इन हथियार प्रणालियों की प्रभावशीलता लंबे समय तक बनी रहेगी। चीन और पाकिस्तान की बढ़ सकती है चिंता रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत कर रहा है। चीन और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 तोपें पहाड़ी और रणनीतिक क्षेत्रों में भारतीय सेना की ताकत को और बढ़ा सकती हैं। भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी हुई मजबूत यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा और रणनीतिक संबंधों का भी संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। इस तरह की डील से भारत को आधुनिक सैन्य तकनीक और बेहतर ऑपरेशनल सपोर्ट मिलता रहेगा, जबकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी भी और मजबूत होगी।
Kenya में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। राजधानी Nairobi समेत कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हिंसा और झड़पों में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट का असर अब अफ्रीकी देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर केन्या में ईंधन संकट तेजी से गहराता जा रहा है। सड़कों पर उतरे लोग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप सोमवार सुबह नैरोबी के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं। कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कारों और “बोड़ा-बोड़ा” मोटरसाइकिलों को भी रोकने की कोशिश की। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राजधानी का सार्वजनिक परिवहन लगभग ठप पड़ गया। स्कूल बंद रहे और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करने पड़े। ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी केन्या सरकार ने हाल ही में वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार: पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है डीजल की कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत तक उछाल आया है डीजल की कीमत बढ़ने के बाद परिवहन कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिससे हालात और बिगड़ गए। गृह मंत्री ने की मौतों की पुष्टि केन्या के गृह मंत्री Kipchumba Murkomen ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज की हिंसा में चार केन्याई नागरिकों की मौत हुई है और 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं।” उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर सीधे केन्या जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा। सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान केन्या सरकार ने कहा है कि वह डीजल और मिट्टी तेल की बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए लगभग 3 करोड़ 85 लाख डॉलर खर्च कर रही है। इसके अलावा ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए गुणवत्ता मानकों में अस्थायी छूट भी दी गई है। महंगाई और गरीबी से बढ़ा दबाव पूर्वी अफ्रीका की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद केन्या की बड़ी आबादी अब भी आर्थिक संकट से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की लगभग एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। अगर तेल संकट और महंगाई पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में केन्या में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।
Narendra Modi की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिली है। ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी और Jonas Gahr Store के बीच हुई बैठक में हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष, आर्कटिक अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और समुद्री सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे दोनों नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखते हैं। “हरित रणनीतिक साझेदारी” की ओर बढ़े दोनों देश बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे अपने संबंधों को “ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” यानी हरित रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की क्षमता और प्रतिभा को नॉर्वे की तकनीक और निवेश के साथ जोड़कर स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन, ब्लू इकॉनमी और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक समाधान तैयार किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी। भारत-यूरोप संबंधों को बताया नया “स्वर्ण युग” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत और यूरोप के संबंध नए “स्वर्णिम युग” में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। पहलगाम आतंकी हमले पर नॉर्वे के समर्थन का जताया आभार प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के समर्थन में खड़े होने के लिए नॉर्वे का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से एकजुटता दिखाई। भारत और नॉर्वे के संयुक्त बयान में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई। दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद समेत वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। व्यापार, निवेश और रोजगार पर बड़ा फोकस प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुए आर्थिक साझेदारी समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 100 अरब डॉलर का निवेश और लगभग 10 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। दोनों देशों ने: सतत विकास समुद्री ऊर्जा स्वास्थ्य इंजीनियरिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साइबर सुरक्षा डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। अंतरिक्ष और आर्कटिक रिसर्च में नई साझेदारी प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के आर्कटिक अनुसंधान केंद्र “हिमाद्री” के संचालन में सहयोग के लिए नॉर्वे का आभार व्यक्त किया। साथ ही Indian Space Research Organisation (ISRO) और नॉर्वे की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया गया। इससे अंतरिक्ष अनुसंधान और वैज्ञानिक सहयोग को नई गति मिलेगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग होगा मजबूत प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल में नॉर्वे के शामिल होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दोनों समुद्री राष्ट्र समुद्री सुरक्षा, समुद्री अर्थव्यवस्था और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा भारत और नॉर्वे ने वैश्विक दक्षिण के देशों में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं पर मिलकर काम करने के लिए त्रिपक्षीय विकास सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।
अमेरिका के San Diego में स्थित सबसे बड़ी मस्जिद Islamic Center of San Diego के बाहर हुई गोलीबारी की घटना में कुल पांच लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल है। स्थानीय पुलिस और Federal Bureau of Investigation (FBI) मामले की संयुक्त जांच कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिद के पास हुई फायरिंग में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में पुलिस को घटनास्थल के करीब खड़े एक वाहन में दो किशोर संदिग्ध मृत अवस्था में मिले। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि दोनों ने खुद को गोली मारी। 17 और 19 साल के थे संदिग्ध सैन डिएगो पुलिस प्रमुख Scott Wahl ने बताया कि मृत पाए गए दोनों युवकों की उम्र 17 और 19 वर्ष थी। उन्होंने कहा कि मस्जिद परिसर में मौजूद बच्चे और अन्य लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों संदिग्धों की मौत संभवतः आत्मघाती गोलीबारी के कारण हुई है। अधिकारियों ने अभी तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है। FBI ने शुरू की गहन जांच FBI के सैन डिएगो कार्यालय के विशेष एजेंट Mark Remley ने कहा कि घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि हमले के पीछे कोई व्यापक साजिश या अन्य लोग शामिल थे या नहीं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मारे गए तीन लोगों में मस्जिद का एक सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल है। हथियार पर मिले घृणास्पद संदेश जांच एजेंसियों के मुताबिक, संदिग्धों में से एक युवक अपने माता-पिता के घर से हथियार लेकर निकला था। अधिकारियों को एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें नस्लीय श्रेष्ठता और घृणा से जुड़े विचार लिखे गए थे। इसके अलावा घटना में इस्तेमाल किए गए एक हथियार पर आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाले शब्द लिखे मिले हैं। इसी वजह से जांच एजेंसियां इस घटना को संभावित “हेट क्राइम” के तौर पर भी देख रही हैं। मस्जिद और आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद मस्जिद और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस इलाके की निगरानी कर रही है और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में मामले से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।
Benjamin Netanyahu की आपराधिक मामलों में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत में होने वाली उनकी गवाही एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री के वकील ने अदालत को बताया कि नेतन्याहू पूरे दिन सुरक्षा और कूटनीतिक बैठकों में व्यस्त रहेंगे। बताया गया है कि बचाव पक्ष की ओर से यरुशलम जिला अदालत को एक गोपनीय कार्यक्रम भी सौंपा गया, जिसमें देर रात तक निर्धारित बैठकों का उल्लेख किया गया था। पहले भी टल चुकी है पेशी यह पहली बार नहीं है जब नेतन्याहू की अदालत में पेशी टाली गई हो। इससे पहले 27 अप्रैल को भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनकी गवाही अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दी गई थी। इसी वर्ष अदालत ने सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए उनकी कुछ अन्य निर्धारित पेशियां भी रद्द कर दी थीं। सरकारी वकीलों ने जताई नाराजगी सरकारी वकीलों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को अदालत की कार्यवाही के अनुसार अपना कार्यक्रम तय करना चाहिए ताकि जिरह की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। इसके बावजूद अदालत ने नेतन्याहू की अनुपस्थिति की अनुमति देते हुए दूसरे गवाह की गवाही सुनने का फैसला किया। अदालत ने दूसरे गवाह को बुलाया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला यरुशलम जिला अदालत के न्यायाधीशों: Rivka Friedman-Feldman Moshe Bar-Am Oded Shaham की पीठ ने लिया। अब अदालत नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी और राज्य गवाह Shlomo Filber की पत्नी Ilanit Filber की गवाही सुनेगी। ‘केस 4000’ में गंभीर आरोप यह मामला चर्चित “केस 4000” से जुड़ा है, जिसे Bezeq-Walla प्रकरण भी कहा जाता है। इसे नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे सबसे गंभीर मामलों में माना जाता है। आरोप है कि नेतन्याहू ने कारोबारी Shaul Elovitch की टेलीकॉम कंपनी Bezeq को सरकारी स्तर पर लाभ पहुंचाने वाले फैसलों को आगे बढ़ाया। इसके बदले उनसे जुड़े समाचार प्लेटफॉर्म Walla! पर प्रधानमंत्री के पक्ष में सकारात्मक कवरेज प्रकाशित किए जाने का आरोप है। नेतन्याहू ने आरोपों से किया इनकार नेतन्याहू लगातार इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं। उन्होंने कथित “डायरेक्टिव मीटिंग” समेत कई आरोपों को खारिज किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2022 में श्लोमो फिलबर की गवाही में कई विरोधाभास सामने आए थे, जिसके बाद सरकारी वकीलों ने उनके साथ हुए स्टेट विटनेस समझौते को रद्द करने की मांग भी की थी। दिसंबर 2024 से जारी है ट्रायल नेतन्याहू ने पहली बार दिसंबर 2024 में अदालत में गवाही दी थी। जून 2025 से मामले में जिरह का चरण शुरू हुआ, जो अब भी जारी है। इजरायल की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि किसी मौजूदा प्रधानमंत्री के खिलाफ चल रहा यह सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मुकदमों में शामिल है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं की अपील और ईरान के साथ जारी गंभीर बातचीत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। ट्रंप के मुताबिक, Tamim bin Hamad Al Thani, Mohammed bin Salman और Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने उनसे सीधे संपर्क कर सैन्य कार्रवाई को कुछ दिनों के लिए टालने का अनुरोध किया था। “समझौते की संभावना बढ़ी” ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर जारी बयान में कहा कि खाड़ी देशों की ईरान के साथ “गंभीर बातचीत” चल रही है और कूटनीतिक समाधान की संभावना पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इन देशों का मानना है कि यदि अमेरिका कुछ समय इंतजार करे तो बातचीत के जरिए ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। “उम्मीद है हमला हमेशा के लिए टल जाए” ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सैन्य कार्रवाई को “कुछ समय के लिए” रोका है और उम्मीद जताई कि शायद इसकी जरूरत कभी न पड़े। उन्होंने कहा, “अगर बिना बमबारी के मामला सुलझ जाए तो मुझे बहुत खुशी होगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार रहेगा। अमेरिकी सेना को अलर्ट रहने के निर्देश ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth, ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन Daniel Caine और अमेरिकी सेना को किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता पिछले कुछ महीनों में कतर, सऊदी अरब और यूएई पर ईरान समर्थित हमलों का दबाव बढ़ा है। ईरान ने 28 फरवरी के बाद हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सहयोगी देशों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। ऐसे में खाड़ी देशों का एकजुट होकर अमेरिका से सैन्य कार्रवाई टालने का अनुरोध करना क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान फिर मध्यस्थ की भूमिका में रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बताया गया है कि ईरान का संशोधित शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया। हालांकि अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नए प्रस्ताव में पहले की तुलना में केवल सीमित बदलाव किए गए हैं। परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका का दावा है कि ईरान के पास बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम मौजूद है और वह परमाणु हथियार क्षमता की दिशा में बढ़ सकता है। वहीं ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। तेहरान प्रतिबंधों में राहत, जब्त संपत्तियों की वापसी और भविष्य में सैन्य कार्रवाई न होने की गारंटी की मांग कर रहा है। CENTCOM ने जारी रखी नाकेबंदी इस बीच United States Central Command (CENTCOM) ने कहा है कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों पर लागू प्रतिबंधों को सख्ती से लागू कर रही है। CENTCOM के अनुसार, अब तक 85 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का पालन सुनिश्चित किया जा सके। कूटनीति और सैन्य दबाव दोनों जारी अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब भी बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन साथ ही सैन्य विकल्पों को भी खुला रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम एशिया की स्थिति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
भारत-पाकिस्तान विभाजन के लगभग 80 वर्ष बाद पाकिस्तान के ऐतिहासिक शहर Lahore में एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर की कई सड़कों, चौकों और इलाकों के विभाजन-पूर्व नाम फिर से बहाल किए जा रहे हैं। इनमें हिंदू, सिख, जैन और ब्रिटिश दौर से जुड़े नाम शामिल हैं। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने लाहौर की ऐतिहासिक और बहु-सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में यह पहल शुरू की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब कैबिनेट ने मुख्यमंत्री Maryam Nawaz की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुराने नाम बहाल करने की योजना को मंजूरी दी है। बदले गए कई ऐतिहासिक नाम नई पहल के तहत शहर के कई इलाकों और सड़कों को उनके पुराने नाम वापस दिए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर: इस्लामपुरा को फिर से कृष्ण नगर नाम दिया गया बाबरी मस्जिद चौक अब दोबारा जैन मंदिर चौक कहलाएगा सुन्नत नगर का नाम बदलकर फिर संत नगर कर दिया गया मुस्तफाबाद अब दोबारा धर्मपुरा बन गया है इसके अलावा कई प्रसिद्ध स्थानों के नाम भी पुराने स्वरूप में लौटाए जा रहे हैं। लक्ष्मी चौक और क्वींस रोड की वापसी लाहौर का मशहूर लक्ष्मी चौक, जिसे पहले मौलाना जफर अली खान चौक कहा जाने लगा था, अब फिर पुराने नाम से पहचाना जाएगा। इसी तरह: सर आगा खान रोड का नाम फिर डेविस रोड किया गया फातिमा जिन्ना रोड फिर क्वींस रोड बन गई लंबे समय से बाग-ए-जिन्ना कहलाने वाला ऐतिहासिक लॉरेंस गार्डन्स भी अपने औपनिवेशिक दौर के नाम से दोबारा जुड़ रहा है “लोगों ने पुराने नाम कभी नहीं भूले” लाहौर के सांस्कृतिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञ Kamran Lashari ने कहा कि स्थानीय लोगों ने इन नामों को कभी पूरी तरह भुलाया ही नहीं था। उन्होंने कहा, “दुकानदार, रिक्शा चालक और आम लोग रोजमर्रा की बातचीत में आज भी पुराने नामों का इस्तेमाल करते हैं। लक्ष्मी चौक हमेशा लोगों के लिए लक्ष्मी चौक ही रहा।” उनके अनुसार, यह पहल लाहौर की बहु-स्तरीय पहचान को स्वीकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई और पारसी विरासत सभी शामिल हैं। विभाजन के बाद बदले गए थे नाम 1947 के विभाजन से पहले लाहौर संयुक्त पंजाब की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता था। शहर में हिंदू, सिख और मुस्लिम समुदायों की साझा सांस्कृतिक पहचान दिखाई देती थी। लेकिन विभाजन के दौरान हुई हिंसा के बाद बड़ी संख्या में हिंदू और सिख परिवारों को शहर छोड़ना पड़ा। इसके बाद कई इलाकों और ऐतिहासिक स्थलों के नाम बदल दिए गए थे। विरासत संरक्षण पर भी जोर लाहौर में इस समय 100 से अधिक ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और मरम्मत का काम चल रहा है। इसमें औपनिवेशिक दौर की इमारतों, चर्चों और सिख शासनकाल से जुड़े ढांचों की मरम्मत भी शामिल है। Maharaja Ranjit Singh से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों और लाहौर किले में सिख शाही परिवार की अंतिम वंशज Princess Bamba Sutherland की पेंटिंग को भी बहाल किया गया है। नवाज शरीफ की पहल इस विरासत पुनरुद्धार अभियान का नेतृत्व पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Nawaz Sharif कर रहे हैं। उन्हें लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार परियोजना का प्रमुख माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुराने क्रिकेट मैदानों और ऐतिहासिक अखाड़ों को भी दोबारा विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। लाहौर की साझा विरासत फिर चर्चा में यह पहल केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाहौर की उस साझा सांस्कृतिक पहचान को फिर से सामने लाने की कोशिश है, जो विभाजन के बाद धीरे-धीरे धुंधली पड़ गई थी।
नई दिल्ली: Enforcement Directorate (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता Deepak Singla को कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। सिंगला पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंगला और कुछ हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। क्या हैं आरोप? ईडी के अनुसार, दीपक सिंगला और उनके परिवार पर 150 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि को सिंगापुर स्थित कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए भारत वापस लाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिंगला कथित रूप से दिल्ली से गोवा तक अवैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के संचालन में शामिल थे। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ईडी की ओर से पिछले दो वर्षों में दीपक सिंगला के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सिंगला दिल्ली की विश्वास नगर विधानसभा सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। केजरीवाल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई Arvind Kejriwal ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दीपक सिंगला को किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ सक्रिय राजनीति करने और भाजपा में शामिल होने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है। आतिशी ने लगाए गंभीर आरोप गोवा में पार्टी प्रभारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कराकर चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। आतिशी ने कहा कि AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के यहां छापेमारी कर चुनावी डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की कार्रवाई पहले पश्चिम बंगाल में All India Trinamool Congress के नेताओं के खिलाफ भी की गई थी। AAP ने कार्रवाई को बताया “राजनीतिक हथियार” आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल और पंजाब में हुई केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की तरह ही दीपक सिंगला का मामला भी राजनीतिक प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने से इनकार करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और हवाला लेनदेन की आगे जांच कर रही है।
उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पिछले 9 वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रदेश में 17 हजार से अधिक पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) हुए, जिनमें 289 कुख्यात अपराधी मारे गए। आंकड़ों के मुताबिक, योगी सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने कुल 17,043 एनकाउंटर किए। इन कार्रवाइयों में 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 11,834 अपराधी घायल हुए। यानी प्रदेश में औसतन हर दिन करीब 5 पुलिस मुठभेड़ हुईं। पुलिसकर्मियों ने भी दी कुर्बानी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए, जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए। सरकार का दावा है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अपराधियों के मन में भय और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। मेरठ जोन एनकाउंटर में सबसे आगे प्रदेश में सबसे अधिक एनकाउंटर Meerut जोन में दर्ज किए गए। यहां पुलिस ने 4,813 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं। इन कार्रवाइयों में: 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 3,513 अपराधी घायल हुए 97 कुख्यात अपराधी मारे गए मुठभेड़ों के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए। वाराणसी और आगरा जोन भी शीर्ष पर Varanasi जोन में 1,292 एनकाउंटर हुए, जिनमें: 2,426 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई 29 अपराधी मारे गए 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए वहीं Agra जोन एनकाउंटर के मामले में तीसरे स्थान पर रहा। यहां: 2,494 मुठभेड़ हुईं 5,845 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 24 अपराधी मारे गए 968 अपराधी और 62 पुलिसकर्मी घायल हुए कमिश्नरेट में गाजियाबाद सबसे आगे कमिश्नरेट स्तर पर Ghaziabad सबसे आगे रहा, जहां 789 मुठभेड़ों में 18 अपराधियों को मार गिराया गया। इसके अलावा: कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12 अपराधी ढेर हुए लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़ों में 12 अपराधी मारे गए प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधी मारे गए सरकार का दावा: अपराधियों में बढ़ा भय योगी सरकार का कहना है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क और अवैध वसूली के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की गई है। सरकार ने एनकाउंटर के साथ-साथ: गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई संपत्ति कुर्की NSA जैसे सख्त कानूनों का इस्तेमाल भी प्रभावी ढंग से लागू किया है। सरकारी दावे के अनुसार, पुलिस की तेज और कठोर कार्रवाई के कारण कई अपराधियों ने प्रदेश छोड़ दिया या अपराध से दूरी बना ली।
नागपुर स्थित Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) मुख्यालय और हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर की कथित रेकी मामले में सुनवाई के दौरान कई अहम खुलासे हुए हैं। विशेष सत्र न्यायालय में पेश गवाही के अनुसार आरोपी रईस अहमद शेख को इस कथित साजिश के लिए विदेशी फंडिंग मिली थी और उसकी फ्लाइट टिकट अमेरिकी डॉलर में बुक कराई गई थी। मामले में यह जानकारी IndiGo एयरलाइंस की तत्कालीन एयरपोर्ट मैनेजर चारू वर्मा की गवाही के दौरान सामने आई। डॉलर में बुक हुआ था फ्लाइट टिकट अदालत में दी गई गवाही के मुताबिक, आरोपी रईस शेख की यात्रा के लिए इंडिगो फ्लाइट का भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया गया था। इसके लिए “वर्डपे कार्ड” का इस्तेमाल हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह विदेशी फंडिंग से जुड़े संभावित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। सरकारी पक्ष का दावा है कि रईस शेख एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन का सक्रिय सदस्य है और संगठन के निर्देश पर ही नागपुर पहुंचा था। श्रीनगर से मुंबई होते हुए पहुंचा नागपुर जांच के अनुसार, रईस शेख 13 जुलाई 2021 को श्रीनगर से मुंबई होते हुए नागपुर पहुंचा था। वहां उसने RSS मुख्यालय और हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर की कथित रेकी की। इसके बाद वह 15 जुलाई 2021 को नागपुर से दिल्ली होते हुए वापस श्रीनगर लौट गया था। कश्मीर पुलिस की पूछताछ में हुआ खुलासा सितंबर 2021 में कश्मीर पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रईस शेख को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसने नागपुर में रेकी करने की बात कबूल की, जिसके बाद पूरी साजिश का खुलासा हुआ। मामले की जानकारी सामने आने के बाद Maharashtra Anti Terrorism Squad (ATS) ने उसे कश्मीर से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर नागपुर लाया था। जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज फिलहाल आरोपी नागपुर सेंट्रल जेल में बंद है। सुनवाई के दौरान उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। रईस शेख ने कई बार जमानत की मांग की, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसकी सभी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। जांच एजेंसियों के पास ‘पुख्ता सबूत’ सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसियों के पास आरोपी के आतंकवादी संगठन से संबंधों और कथित गतिविधियों से जुड़े ठोस सबूत मौजूद हैं। मामले की जांच अभी भी जारी है और सुरक्षा एजेंसियां विदेशी फंडिंग नेटवर्क समेत कई पहलुओं की जांच कर रही हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों के बाद हलचल तेज हो गई है। Mamata Banerjee ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। चुनाव परिणामों के बाद अब टीएमसी राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने जा रही है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विपक्ष की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा होगी। नगर निकायों को लेकर रणनीति बनेगी पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक का प्रमुख मुद्दा राज्य के नगर निकायों के कामकाज से जुड़ा होगा। पश्चिम बंगाल के कई नगर निकायों में अभी भी टीएमसी का नियंत्रण है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर सहयोग में कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। टीएमसी नेतृत्व इस बात पर चर्चा करेगा कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी अपने नगर निकायों और संगठनात्मक ढांचे को कैसे मजबूत बनाए रखे। अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर KMC का नोटिस यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब Kolkata Municipal Corporation (KMC) ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को कथित अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किया है। KMC अधिनियम की धारा 400(1) के तहत जारी इन नोटिसों में संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। अधिकारियों ने संबंधित संपत्तियों की दीवारों पर नोटिस की प्रतियां भी चस्पा की हैं। शुभेंदु अधिकारी ने दिए थे संकेत पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने पिछले सप्ताह ही इन संपत्तियों की जांच के संकेत दिए थे। उन्होंने बिना नाम लिए अभिषेक बनर्जी को “मिस्टर नेफ्यू” कहकर संबोधित किया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि उनके पास एक कंपनी से जुड़ी 24 संपत्तियों की सूची है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पिछली टीएमसी सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। दो नए जांच आयोग बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो अलग-अलग आयोग बनाने की घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज Biswajit Basu को सौंपी जाएगी। वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच रिटायर्ड जज Samapti Chatterjee की अध्यक्षता में गठित आयोग करेगा। सरकार के अनुसार, दोनों आयोग जून महीने से अपना काम शुरू कर देंगे।
देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों को लेकर Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पहले के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने डॉग लवर्स और विभिन्न NGO की याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कहा कि 7 नवंबर 2025 के अंतरिम आदेश में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। जस्टिस Vikram Nath, Sandeep Mehta और N. V. Anjaria की बेंच ने 29 जनवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। “कुत्तों के काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते” फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में बच्चों और आम लोगों पर आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा, “ABC फ्रेमवर्क 2001 में शुरू किया गया था, लेकिन आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुसार संसाधनों को बढ़ाने और व्यवस्थित योजना बनाने में गंभीर कमी रही है। नसबंदी और टीकाकरण अभियान बिना समुचित योजना के चलाए गए।” स्कूल, अस्पताल और हाईवे से हटाने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए अंतरिम आदेश में राज्यों और National Highways Authority of India (NHAI) को हाईवे, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के आसपास से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो कुत्ते आक्रामक नहीं हैं और रेबीज से संक्रमित नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। कुत्ता काटे तो जिम्मेदारी किसकी? पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि किसी आवारा कुत्ते के हमले में किसी व्यक्ति की चोट या मौत होती है, तो संबंधित नगर निकाय के साथ-साथ नियमित रूप से कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि कोई व्यक्ति रोज कुत्तों को खाना खिलाए, लेकिन उनके काटने पर उसकी कोई जिम्मेदारी न हो।” असम के आंकड़ों पर कोर्ट ने जताई चिंता सुनवाई के दौरान कोर्ट ने असम में डॉग बाइट के मामलों पर चिंता जताई। अदालत के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य में 1.66 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए, जबकि 2025 में केवल जनवरी महीने में ही 20,900 घटनाएं सामने आईं। कोर्ट ने इन आंकड़ों को “बेहद भयावह” बताते हुए राज्यों को स्पष्ट और ठोस कार्ययोजना पेश करने की चेतावनी दी। कैसे शुरू हुआ मामला? यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। उस दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें आवारा कुत्ते बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर हमला करते दिखाई दे रहे थे। इसके बाद 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आठ सप्ताह के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश के खिलाफ डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। बाद में 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में आंशिक बदलाव किया था।
भारतीय पेटेंट कार्यालय ने अमेरिकी दवा कंपनी AbbVie को बड़ा झटका देते हुए हेपेटाइटिस C के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कॉम्बो थेरेपी glecaprevir/pibrentasvir पर पेटेंट देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य और सस्ती दवाओं की उपलब्धता के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस निर्णय से मरीजों को दवा के सस्ते और जेनेरिक विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे इलाज अधिक लोगों की पहुंच में आ पाएगा। पब्लिक हेल्थ ग्रुप्स ने फैसले का किया स्वागत पब्लिक हेल्थ एडवोकेसी संगठन Third World Network ने भारतीय पेटेंट कार्यालय के फैसले का स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि यह आदेश भारत के पेटेंट सुरक्षा प्रावधानों की अहमियत को दर्शाता है, खासकर “प्री-ग्रांट अपोजिशन” जैसी व्यवस्था की, जो गैर-जरूरी पेटेंट एकाधिकारों को रोकने में मदद करती है। संगठन के अनुसार, ऐसे पेटेंट कई बार जरूरी दवाओं की उपलब्धता और उनकी सस्ती पहुंच में बाधा बनते हैं। हेपेटाइटिस C इलाज में अहम है यह थेरेपी AbbVie जिस कॉम्बो थेरेपी के लिए पेटेंट मांग रही थी, उसे हेपेटाइटिस C के इलाज का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। यह दवा दुनिया भर में Mavyret नाम से बेची जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस दवा पर पेटेंट मिल जाता तो कंपनी का बाजार पर एकाधिकार मजबूत हो सकता था, जिससे जेनेरिक दवाओं के उत्पादन और उपलब्धता पर असर पड़ता। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने क्या कहा? भारतीय पेटेंट कार्यालय ने पेटेंट अधिनियम की धारा 15 के तहत आवेदन को खारिज किया है। आदेश में कहा गया कि कंपनी की ओर से आवश्यक जवाब या पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। बाद में AbbVie ने पेटेंट कार्यालय को आवेदन वापस लेने की जानकारी भी दे दी। मरीजों को होगा फायदा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत में हेपेटाइटिस C के मरीजों के लिए सस्ती दवाओं का रास्ता खुला रहेगा। भारत लंबे समय से जेनेरिक दवाओं के बड़े उत्पादक के रूप में जाना जाता है और ऐसे फैसले सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार देशभर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू करने की योजना तैयार की है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल वाटर मेट्रो पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इस ड्राफ्ट को विभिन्न मंत्रालयों के पास चर्चा और सुझावों के लिए भेजा गया है, ताकि जल्द ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को देशभर में लागू किया जा सके। दो चरणों में लागू होगी योजना सरकार इस परियोजना को दो चरणों में लागू करेगी। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज के अलावा बिहार की राजधानी पटना और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी है। दूसरे चरण में असम के तेजपुर और डिब्रूगढ़ जैसे शहरों को इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा अन्य संभावित शहरों का भी सर्वे किया जा रहा है। कोच्चि मॉडल से मिली प्रेरणा अधिकारियों के मुताबिक, केरल की कोच्चि वाटर मेट्रो की सफलता के बाद सरकार अब इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना चाहती है। कोच्चि में इस परियोजना को लोगों का अच्छा समर्थन मिला है और इसे ट्रैफिक कम करने के प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य उन शहरों में जलमार्ग आधारित सार्वजनिक परिवहन विकसित करना है, जहां नदियां, झीलें या नहरें मौजूद हैं। क्या बोले केंद्रीय मंत्री? केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने इस परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि वाटर मेट्रो सिस्टम कम लागत वाला और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम है। उन्होंने बताया कि इसमें पहले से मौजूद जलमार्गों का उपयोग किया जाता है, जिससे बड़े निर्माण कार्यों की जरूरत कम पड़ती है। साथ ही, यह परियोजना कम समय में पूरी की जा सकती है और जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता भी बेहद कम होती है। मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड ईंधन से चलने वाली नावों के इस्तेमाल से प्रदूषण में कमी आएगी और शहरों में सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी। आम लोगों और पर्यटन को मिलेगा फायदा सरकार का मानना है कि वाटर मेट्रो सेवा आम यात्रियों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगी। इससे यात्रा अधिक आरामदायक, सस्ती और तेज होगी। सरकार ने इसके लिए कुछ मानक भी तय किए हैं। प्राथमिकता उन शहरों को दी जाएगी जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। हालांकि, बाढ़ प्रभावित और दूर-दराज के इलाकों में नियमों में छूट दी जा सकती है। 18 शहरों का सर्वे पूरा भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने इस परियोजना की व्यवहार्यता जांच के लिए Kochi Metro Rail Limited की मदद ली है। अब तक 18 शहरों का सर्वे पूरा किया जा चुका है और 17 शहरों की रिपोर्ट भी मंत्रालय को मिल चुकी है। केवल लक्षद्वीप की रिपोर्ट आना बाकी है।
केंद्र सरकार ने नागरिकता प्रक्रिया को और अधिक सख्त एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने नागरिकता नियम, 2009 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले नागरिकता आवेदकों के लिए पासपोर्ट संबंधी जानकारी देना अब अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले को नागरिकता आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। क्या है नया नियम? संशोधित प्रावधानों के अनुसार, अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के वे लोग जो भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें अपने पासपोर्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, यात्रा से संबंधित विवरण और अन्य पहचान दस्तावेज शामिल होंगे। इसके साथ ही आवेदकों की पहचान और यात्रा इतिहास का गहन सत्यापन भी किया जाएगा। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य नागरिकता प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, गलत जानकारी और फर्जीवाड़े को रोकना है। क्यों लिया गया फैसला? सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय में नागरिकता आवेदन से जुड़े दस्तावेजों की जांच को लेकर कई मामलों में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत महसूस की गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नियमों में यह संशोधन किया गया है ताकि आवेदन प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाई जा सके। प्रक्रिया होगी अधिक सख्त नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब संबंधित देशों से आने वाले आवेदकों को दस्तावेजों के सत्यापन की विस्तृत प्रक्रिया से गुजरना होगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जी पहचान और अवैध दस्तावेजों के जरिए नागरिकता हासिल करने के प्रयासों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार ने क्या कहा? गृह मंत्रालय का कहना है कि नागरिकता से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। नए नियमों के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल पात्र और सत्यापित आवेदकों को ही नागरिकता प्रदान की जाए।
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। महानगरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। कोलकाता कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे अधिक 96 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पेट्रोल अब 109.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं डीजल 94 पैसे महंगा होकर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़ने के बाद 96.11 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। 15 मई को भी बढ़े थे दाम इससे पहले 15 मई को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस समय दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया था। उसी दिन अन्य महानगरों में भी ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये, मुंबई में 106.68 रुपये और चेन्नई में 103.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। वहीं डीजल की कीमत कोलकाता में 95.13 रुपये, मुंबई में 93.14 रुपये और चेन्नई में 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गई थी। आम लोगों पर बढ़ेगा असर लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम जनता की दैनिक जिंदगी पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।