स्वास्थ्य

Easy Yoga Poses to Improve Flexibility at Home

घर पर करें ये आसान Yoga Poses, शरीर की जकड़न होगी दूर और बढ़ेगी Flexibility

surbhi मई 22, 2026 0
Beginners practicing easy yoga poses at home to improve flexibility and reduce body stiffness naturally
Easy Yoga Poses for Flexibility at Home

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों कुर्सी पर बैठना, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन पर झुके रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी हमारे शरीर को धीरे-धीरे अकड़ा हुआ बना देती है। कमर दर्द, कंधों में जकड़न, टाइट हैमस्ट्रिंग और खराब पोश्चर जैसी समस्याएं अब बेहद आम हो चुकी हैं। ऐसे में योग न केवल शरीर को लचीला बनाने में मदद करता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की मूवमेंट को बेहतर बनाने में भी कारगर साबित होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, Flexibility का मतलब सिर्फ स्प्लिट्स करना या कठिन योगासन करना नहीं है। असली उद्देश्य है रोजमर्रा की जिंदगी में शरीर को बिना दर्द और जकड़न के आसानी से मूव कर पाना। नियमित योग अभ्यास से शरीर की Mobility बेहतर होती है, यानी जोड़ों और मांसपेशियों की मूवमेंट अधिक सहज हो जाती है।

वेलनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि शुरुआत करने वालों को योग को किसी प्रतियोगिता की तरह नहीं लेना चाहिए। शरीर को जबरदस्ती स्ट्रेच करने के बजाय धीरे-धीरे कंट्रोल्ड मूवमेंट पर ध्यान देना जरूरी है।

शरीर में जकड़न क्यों होती है?

लंबे समय तक बैठे रहने से हिप फ्लेक्सर्स टाइट हो जाते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से गर्दन और कंधों पर दबाव बढ़ता है और पोश्चर बिगड़ता है। वहीं, एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग की कमी जोड़ों की मूवमेंट को सीमित कर देती है। यही वजह है कि आजकल Flexibility और Mobility दोनों पर एक साथ काम करने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों में सबसे ज्यादा जकड़न इन हिस्सों में देखने को मिलती है:

  • Hips
  • Hamstrings
  • Shoulders
  • Spine
  • Ankles

इन हिस्सों की जकड़न के कारण आगे झुकना, बैठना, स्क्वाट करना और लंबे समय तक चलना तक मुश्किल हो सकता है।

Yoga करने का सही समय क्या है?

योग करने का कोई एक तय समय नहीं है। यह आपकी दिनचर्या और शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है।

  • सुबह योग करने से शरीर की stiffness कम होती है और एनर्जी मिलती है।
  • शाम को योग करने से दिनभर की थकान और तनाव कम होता है।
  • Workout के after stretching करने से muscles ज्यादा effectively खुलती हैं क्योंकि शरीर पहले से warm होता है।

Beginners के लिए 5 आसान Yoga Poses

1. Cat-Cow Pose

यह pose spine को gently activate करता है और लंबे समय तक बैठने से हुई stiffness को कम करने में मदद करता है।

कैसे करें:

  • हाथों और घुटनों के बल आएं।
  • सांस अंदर लेते हुए पेट नीचे करें और छाती ऊपर उठाएं।
  • सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी अंदर की ओर लाएं।
  • इसे 8–10 बार धीरे-धीरे दोहराएं।

2. Downward Facing Dog

यह pose shoulders, calves, hamstrings और spine को stretch करता है।

कैसे करें:

  • हाथ और पैरों के बल शरीर को उल्टे V आकार में उठाएं।
  • घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखें।
  • Spine को लंबा करने पर फोकस करें।

Beginner Tip:
अगर heels जमीन तक नहीं पहुंचतीं तो चिंता न करें। शुरुआत में knees bend रखना बिल्कुल ठीक है।

3. Low Lunge

यह pose लंबे समय तक बैठने से tight हुए hips और lower back को खोलने में मदद करता है।

कैसे करें:

  • एक पैर आगे रखें और दूसरा घुटना जमीन पर टिकाएं।
  • Front knee को ankle के ऊपर रखें।
  • धीरे-धीरे hips को आगे की तरफ ले जाएं।
  • 20–30 सेकंड तक hold करें।

4. Cobra Pose

यह pose chest और shoulders खोलता है, posture सुधारता है और spine को मजबूत बनाता है।

कैसे करें:

  • पेट के बल लेट जाएं।
  • हथेलियों को ribs के पास रखें।
  • सांस लेते हुए धीरे-धीरे chest उठाएं।
  • कंधों को relaxed रखें।

Beginner Tip:
हाथों पर ज्यादा जोर देने के बजाय back muscles का इस्तेमाल करें।

5. Child’s Pose

यह pose शरीर और दिमाग दोनों को रिलैक्स करता है और recovery में मदद करता है।

कैसे करें:

  • घुटनों के बल बैठें।
  • शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
  • माथे को जमीन या cushion पर टिकाएं।
  • 6–10 गहरी सांसों तक इसी स्थिति में रहें।

Beginners को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे बड़ी गलती है शरीर को जरूरत से ज्यादा push करना। Yoga कभी भी दर्द देने वाला नहीं होना चाहिए।

इन गलतियों से बचें:

  • जबरदस्ती deep stretch करना
  • Joints को lock करना
  • Bounce करते हुए stretch करना
  • बिना तैयारी के difficult backbends और inversions करना

अगर कोई pose blocked महसूस हो तो शरीर को force करने के बजाय modifications का इस्तेमाल करें।

कितनी बार Yoga करना चाहिए?

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे sessions से ज्यादा जरूरी है consistency। रोज सिर्फ 10–15 मिनट योग करने से भी शरीर की flexibility, posture और mobility में बड़ा बदलाव आ सकता है।

अगर समय हो तो 45–60 मिनट का complete session जिसमें breathing exercises और relaxation शामिल हों, और भी बेहतर माना जाता है।

योग की शुरुआत करने के लिए आपको सिर्फ थोड़ा-सा खाली स्थान, एक योग मैट और नियमित अभ्यास की जरूरत है। धीरे-धीरे शरीर खुद बेहतर तरीके से respond करने लगता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों बैठकर काम करना और गलत खानपान की वजह से पेट निकलना एक आम समस्या बन गया है। बढ़ती तोंद न सिर्फ शरीर की फिटनेस और लुक को प्रभावित करती है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी से Type 2 Diabetes, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।   ऐसे में लोग वजन कम करने के लिए जिम, डाइटिंग और कई तरह के उपाय अपनाते हैं, लेकिन हर किसी के पास इसके लिए समय या बजट नहीं होता। योग को पेट की चर्बी कम करने का एक आसान और असरदार तरीका माना जाता है। नियमित योग करने से शरीर लचीला रहता है और मानसिक तनाव भी कम हो सकता है।   भुजंगासन से पेट और कमर को मिलता है फायदा Bhujangasana को कोबरा पोज भी कहा जाता है। यह योगासन पेट और कमर की मांसपेशियों पर खिंचाव पैदा करता है, जिससे पेट की चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में भी सहायक माना जाता है।   नौकासन तेजी से कैलोरी बर्न करने में मददगार Naukasana पेट की चर्बी घटाने के लिए बेहद लोकप्रिय योगासन है। इस आसन में शरीर नाव की तरह दिखाई देता है। यह सीधे पेट की मांसपेशियों पर असर डालता है और नियमित अभ्यास से तोंद कम करने में मदद कर सकता है।   पवनमुक्तासन से सुधरता है पाचन Pawanmuktasana गैस, कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए जाना जाता है। यह आसन पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने के साथ पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है।   फलकासन और सूर्य नमस्कार भी हैं असरदार Phalakasana यानी प्लैंक पोज पूरे शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे पेट और कमर के आसपास की चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं Surya Namaskar को फुल बॉडी वर्कआउट माना जाता है, जो कैलोरी बर्न करने और शरीर को फिट रखने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित योग, संतुलित आहार और अच्छी दिनचर्या अपनाने से पेट की चर्बी कम करने में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में बाजार में मिलने वाला जामुन स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना माना जाता है। हल्के खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह मौसमी फल शरीर को ठंडक देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। जामुन में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन सुधारने में सहायक होते हैं।   डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद जामुन को डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। खासतौर पर जामुन के बीजों का पाउडर पारंपरिक रूप से शुगर कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सीमित मात्रा में नियमित सेवन से ग्लूकोज लेवल संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।   पाचन और इम्यूनिटी को करता है मजबूत जिन लोगों को कब्ज, गैस, अपच या एसिडिटी जैसी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए जामुन काफी फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। वहीं विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी मजबूत कर संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।   लू और कमजोरी से बचाने में मददगार गर्मी में लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में जामुन शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाकर हाइड्रेट रखने में मदद करता है। आयरन से भरपूर होने के कारण यह शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने और खून की कमी दूर करने में भी सहायक माना जाता है। कमजोरी और थकान महसूस करने वाले लोगों के लिए इसका सेवन लाभदायक हो सकता है।   वजन और त्वचा के लिए भी फायदेमंद कम कैलोरी और अधिक फाइबर वाला जामुन वजन कम करने वालों के लिए अच्छा विकल्प है। इसे खाने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को हेल्दी, साफ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं।

Anjali Kumari मई 20, 2026 0
curry leaves storage

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