Healthy Lifestyle

Rugda Recipe
रुगड़ा का स्वाद चखा है? झारखंड के देसी मशरूम के आगे फैल हो जाएंगे  चिकन-मटन

रांची। मानसून शुरू होते ही झारखंड के जंगलों में मिलने वाला रुगड़ा (पुटू) मशरूम बाजारों की रौनक बढ़ा देता है। यह देसी जंगली मशरूम केवल बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता है और स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। स्वाद और पौष्टिकता के कारण इसे झारखंड का पारंपरिक खजाना माना जाता है। सीमित समय के लिए मिलने वाला यह मशरूम हर साल लोगों को बेसब्री से इंतजार कराता है।   साल के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है रुगड़ा रुगड़ा मुख्य रूप से झारखंड के साल के जंगलों में मिट्टी के अंदर उगता है। इसे स्थानीय भाषा में पुटू भी कहा जाता है। सफेद और गोल आकार वाले इस मशरूम को मिट्टी हटाकर सावधानी से निकाला जाता है। इसकी प्राकृतिक उपलब्धता सीमित होने के कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा अधिक रहती है।   स्वाद और पोषण का अनोखा मेल रुगड़ा का स्वाद इतना अलग और लाजवाब होता है कि कई लोग इसकी तुलना चिकन और मटन से करते हैं। पकने के बाद इसका बाहरी हिस्सा हल्का कुरकुरा और अंदर का भाग बेहद मुलायम हो जाता है। सावन के दौरान मांसाहार से परहेज करने वाले लोगों के लिए यह स्वादिष्ट और पौष्टिक शाकाहारी विकल्प माना जाता है।   खरीदते और साफ करते समय रखें सावधानी चूंकि रुगड़ा मिट्टी के अंदर उगता है, इसलिए इसे पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी होता है। खरीदते समय एक-दो रुगड़ा काटकर देख लेना चाहिए ताकि वह अंदर से ताजा और सुरक्षित हो। अच्छी गुणवत्ता वाला रुगड़ा स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।   ऐसे बनाएं स्वादिष्ट रुगड़ा करी रुगड़ा करी बनाने के लिए सबसे पहले मशरूम को अच्छी तरह धोकर बीच से काट लें और हल्का भून लें। इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म कर जीरा, प्याज और टमाटर भूनें। फिर हल्दी, धनिया, लाल मिर्च और नमक जैसे मसाले डालकर अच्छी तरह पकाएं। अब इसमें भुना हुआ रुगड़ा मिलाकर धीमी आंच पर कुछ मिनट पकाएं। अंत में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर इसे गर्मागर्म चावल या रोटी के साथ परोसें। स्वाद और पोषण से भरपूर यह पारंपरिक झारखंडी व्यंजन मानसून का आनंद कई गुना बढ़ा देता है।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Carom seeds (ajwain) with warm water as a natural home remedy that may help relieve migraine symptoms.
माइग्रेन के दर्द में अजवाइन का सहारा? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ और कैसे करें सही इस्तेमाल

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव, नींद की कमी और अनियमित खानपान ने माइग्रेन की समस्या को आम बना दिया है। यह केवल साधारण सिरदर्द नहीं, बल्कि एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो कई घंटों तक व्यक्ति की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित कर सकती है। माइग्रेन के दौरान सिर के एक हिस्से में तेज दर्द, मतली, उल्टी, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। दवाओं के अलावा कुछ घरेलू उपाय भी माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है अजवाइन, जो लगभग हर भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाती है। आयुर्वेद में लंबे समय से अजवाइन का उपयोग पाचन, गैस, सर्दी-जुकाम और सिरदर्द जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है। क्यों होता है माइग्रेन? विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें सिर के एक हिस्से में बार-बार तेज दर्द होता है। यह दर्द 4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसके साथ कई लोगों को मतली, उल्टी, धुंधला दिखाई देना और चिड़चिड़ापन भी महसूस होता है। माइग्रेन के सामान्य ट्रिगर हैं: लगातार मानसिक तनाव पर्याप्त नींद न लेना हार्मोनल बदलाव लंबे समय तक भूखे रहना कुछ विशेष खाद्य पदार्थ तेज रोशनी और तेज आवाज माइग्रेन में कैसे फायदेमंद है अजवाइन? अजवाइन में थाइमोल (Thymol) नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है। शोध के अनुसार इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और दर्द कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन में: पाचन शक्ति बढ़ाने वाले गुण वात और कफ को संतुलित करने की क्षमता गैस और अपच कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स को कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन के संभावित फायदे 1. तनाव कम करने में मदद अजवाइन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक माने जाते हैं। तनाव कम होने से माइग्रेन के एपिसोड की तीव्रता भी कम हो सकती है। 2. पाचन सुधारकर राहत कई लोगों में गैस, अपच और पेट की गड़बड़ी माइग्रेन का कारण बनती है। अजवाइन पाचन को बेहतर बनाकर इस ट्रिगर को कम करने में मदद कर सकती है। 3. सूजन कम करने में सहायक शरीर में सूजन भी माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ा सकती है। अजवाइन के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन का इस्तेमाल कैसे करें? 1. अजवाइन की गर्म पोटली 2 से 4 चम्मच अजवाइन को तवे पर हल्का गर्म करें। इसे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। समय-समय पर इसकी हल्की सुगंध लें। इससे बंद नाक खुलने, रक्त संचार बेहतर होने और सिरदर्द में कुछ राहत महसूस हो सकती है। 2. अजवाइन का पानी 2 कप पानी में 2 चम्मच अजवाइन डालें। इसे कुछ मिनट तक उबालें। छानकर सुबह और शाम हल्का गुनगुना पी सकते हैं। यह पाचन बेहतर रखने में मदद कर सकता है, जिससे माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स कम हो सकते हैं। माइग्रेन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोज 7-8 घंटे की नींद लें। तेज रोशनी और तेज आवाज से बचें। लंबे समय तक खाली पेट न रहें। प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक कैफीन से दूरी बनाएं। योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम करें। अपने माइग्रेन ट्रिगर्स की पहचान कर उनसे बचने की कोशिश करें।

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Doctor checking a patient's blood pressure while explaining the connection between hypertension and thyroid disorders.
बार-बार बढ़ रहा है BP? सिर्फ नमक नहीं, थायरॉइड की गड़बड़ी भी हो सकती है वजह, जानिए डॉक्टर की सलाह

भारत में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आमतौर पर लोग हाई बीपी की वजह अधिक नमक, मोटापा, तनाव, धूम्रपान या खराब लाइफस्टाइल को मानते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बार-बार बढ़ता ब्लड प्रेशर किसी हार्मोनल समस्या, खासकर थायरॉइड डिसऑर्डर का भी संकेत हो सकता है। कार्डियक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्लड प्रेशर दवाइयों के बावजूद बार-बार बढ़ रहा है या नियंत्रित नहीं हो रहा, तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। कैसे जुड़ा है थायरॉइड और हाई ब्लड प्रेशर? थायरॉइड ग्रंथि शरीर में बनने वाले T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है, तब रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर, विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (निचला स्तर), बढ़ सकता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है? हाइपोथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है। साथ ही रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम होने लगता है। यही कारण है कि शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए दबाव बढ़ सकता है, जिससे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई बीपी और थायरॉइड के बीच संबंध को देखते हुए दोनों स्थितियों की जांच एक साथ करना बेहतर माना जाता है। कब करानी चाहिए थायरॉइड जांच? यदि आपको— बार-बार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, दवा लेने के बावजूद बीपी नियंत्रित न हो, लगातार थकान महसूस हो, वजन बढ़ रहा हो, ठंड ज्यादा लगती हो, दिल की धड़कन धीमी रहती हो, तो डॉक्टर की सलाह पर TSH, T3 और T4 टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। हाइपोथायरॉइडिज्म में किन दवाओं में बरतें सावधानी? विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों में पहले से ही दिल की धड़कन धीमी हो सकती है। ऐसे में कुछ बीपी की दवाएं, जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, धड़कन को और धीमा कर सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के आसान उपाय हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड दोनों स्थितियों में स्वस्थ जीवनशैली काफी मददगार साबित होती है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। योग और कार्डियो एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। नमक का सेवन सीमित रखें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर DASH डाइट अपनाएं। पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की जांच कराते रहें। डॉक्टर की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की समस्या कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए जिन लोगों को लगातार हाई बीपी की शिकायत रहती है, उन्हें थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। वहीं थायरॉइड के मरीजों को भी समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना चाहिए ताकि किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या से बचा जा सके।  

surbhi जून 29, 2026 0
healthy diet tips
चुकंदर खाने का सही तरीका जानिए, विशेषज्ञों ने बताए बड़े फायदे

नई दिल्ली। चुकंदर को सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सही तरीके से सेवन करना जरूरी है ताकि शरीर को पूरा फायदा मिल सके। चुकंदर में आयरन, फोलेट, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो खून की कमी दूर करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। 1. सुबह खाली पेट सेवन सबसे बेहतर   स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, चुकंदर का सेवन सुबह खाली पेट करना अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है और ऊर्जा बनी रहती है।   2.जूस की बजाय सलाद है ज्यादा फायदेमंद   विशेषज्ञों का मानना है कि चुकंदर को जूस की बजाय सलाद के रूप में खाना ज्यादा लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। 3.गाजर और आंवला के साथ सेवन से बढ़ते हैं फायदे   चुकंदर को गाजर और आंवला के साथ मिलाकर सेवन करने से इसके पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट्स का लाभ बढ़ जाता है, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक हो सकता है। 4.सीमित मात्रा और सावधानी जरूरी   विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि रोजाना 1 मध्यम आकार का चुकंदर या 150–200 मिलीलीटर जूस पर्याप्त है। अधिक सेवन से पेट संबंधी समस्या हो सकती है। किडनी स्टोन के मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Blood sugar testing and healthy lifestyle habits explained for better diabetes management.
मीठा छोड़ने के बाद भी कंट्रोल नहीं हो रहा ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज मैनेज करने का सही तरीका

आज के समय में डायबिटीज भारत में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है। मोटापा, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि डायबिटीज सिर्फ ज्यादा चीनी या मिठाई खाने से होती है और अगर चीनी खाना बंद कर दिया जाए तो ब्लड शुगर पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है। क्या सिर्फ चीनी खाने से होती है डायबिटीज? विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज केवल चीनी खाने से नहीं होती। यह एक मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, आनुवंशिक कारण और असंतुलित आहार जैसी कई चीजें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक यही स्थिति टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है? इंसुलिन एक हार्मोन है, जो पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाता है और शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। परिणामस्वरूप ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। डायबिटीज के प्रमुख कारण मोटापा और बढ़ा हुआ वजन पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ा सकती है। वजन कम करने से डायबिटीज के जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है। शारीरिक गतिविधियों की कमी नियमित व्यायाम न करने से शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर प्रभावित होता है। पारिवारिक इतिहास यदि माता-पिता, दादा-दादी या अन्य करीबी रिश्तेदारों को डायबिटीज है, तो इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। तनाव और नींद की कमी लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का जोखिम रहता है। सिर्फ चीनी नहीं, इन चीजों से भी बनाएं दूरी ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए केवल मिठाई छोड़ना पर्याप्त नहीं है। इन चीजों का सेवन भी सीमित करना चाहिए— व्हाइट ब्रेड मैदा और उससे बनी चीजें प्रोसेस्ड फूड केक, पेस्ट्री और बेकरी उत्पाद अत्यधिक नमक शुगरी ड्रिंक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स ब्लड शुगर कंट्रोल करने का सही तरीका डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए इन बातों का पालन जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक आहार लें। रोजाना नियमित व्यायाम करें। वजन को नियंत्रित रखें। पर्याप्त नींद लें। तनाव कम करने की कोशिश करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें। समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें। डायबिटीज एक बहुआयामी बीमारी है और इसका इलाज सिर्फ चीनी छोड़ने तक सीमित नहीं है। सही जीवनशैली अपनाकर और डॉक्टर की सलाह का पालन करके ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में होने वाली जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Yoga Day Special
Yoga Day Special: बालकनी में लगाएं ये 7 पौधे, तनाव होगा दूर और योग-ध्यान का मिलेगा दोगुना लाभ

नई दिल्ली, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यदि आप घर में योग और ध्यान के लिए शांत वातावरण बनाना चाहते हैं, तो अपनी बालकनी को हरियाली से सजाना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। गार्डनिंग विशेषज्ञों का मानना है कि पौधों की देखभाल न केवल एक अच्छी हॉबी है, बल्कि यह तनाव कम करने और मानसिक सुकून पाने का प्रभावी तरीका भी है। कुछ पौधे ऐसे हैं जो हवा को शुद्ध करने के साथ सकारात्मक माहौल बनाने में भी मदद करते हैं।   स्नेक प्लांट स्नेक प्लांट इस सूची में सबसे लोकप्रिय है। यह कम देखभाल में आसानी से बढ़ता है और दिन-रात ऑक्सीजन छोड़ने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यह हवा में मौजूद कई हानिकारक तत्वों को कम करने में भी सहायक माना जाता है।   एरेका पाम एरेका पाम घर और बालकनी को हराभरा लुक देने के साथ वातावरण को ताजगी से भर देता है। वहीं रोजमेरी और लैवेंडर अपनी प्राकृतिक खुशबू के कारण तनाव कम करने और मन को शांत करने के लिए लोकप्रिय हैं। ध्यान और मेडिटेशन के दौरान इनकी सुगंध आरामदायक अनुभव देती है।   चमेली चमेली के सुगंधित फूल भी मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का एहसास कराते हैं। वहीं एलोवेरा कम देखभाल वाला पौधा है, जो स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में मदद करता है। गुलदाउदी अपने रंग-बिरंगे फूलों से बालकनी की सुंदरता बढ़ाने के साथ ताजगी का एहसास कराती है।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों में पानी देना, मिट्टी के संपर्क में रहना और हरियाली के बीच समय बिताना तनाव कम करने में सहायक हो सकता है। ऐसे में योग दिवस पर अपनी बालकनी में इन पौधों के बीच योग या ध्यान करना मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का बेहतर अनुभव दे सकता है।

anjali kumari जून 20, 2026 0
Cup of green tea with fresh leaves highlighting benefits for oral health and brain function.
सिर्फ वजन घटाने के लिए नहीं, दांतों और दिमाग के लिए भी फायदेमंद है ग्रीन टी, जानिए इसके बड़े लाभ

ग्रीन टी को आमतौर पर वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने वाले पेय के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसके फायदे केवल वेट लॉस तक सीमित नहीं हैं। इसमें मौजूद कैटेचिन, पॉलीफेनॉल, ईजीसीजी (EGCG) और एल-थीनिन जैसे शक्तिशाली तत्व शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। खासकर यह दांतों, मसूड़ों और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। ग्रीन टी में क्यों होते हैं इतने फायदे? ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कई पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनॉल और ईजीसीजी शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। दांतों और ओरल हेल्थ के लिए ग्रीन टी के फायदे 1. कैविटी का खतरा कम कर सकती है ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन ऐसे बैक्टीरिया की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो दांतों में सड़न और कैविटी का कारण बनते हैं। इससे दांतों की सतह पर बैक्टीरिया के चिपकने का जोखिम भी कम हो सकता है। 2. मसूड़ों को रख सकती है स्वस्थ ग्रीन टी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मसूड़ों की सूजन और ब्लीडिंग को कम करने में मदद कर सकते हैं। नियमित सेवन से पीरियोडोंटल डिजीज का जोखिम कम होने की संभावना भी बताई गई है। 3. मुंह की बदबू से दिला सकती है राहत मुंह की दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में ग्रीन टी मददगार हो सकती है। इससे ओरल हाइजीन बेहतर बनी रहती है और सांसों की बदबू कम हो सकती है। दिमाग और याददाश्त के लिए भी फायदेमंद 1. बढ़ा सकती है एकाग्रता ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थीनिन का संयोजन मानसिक सतर्कता और फोकस को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यह दिमाग को सक्रिय बनाए रखने में सहायक माना जाता है। 2. याददाश्त को दे सकती है मजबूती कुछ अध्ययनों के अनुसार, ग्रीन टी का नियमित सेवन मूड को बेहतर बनाने और उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में होने वाली गिरावट के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। ध्यान रखें ग्रीन टी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ सीमित मात्रा में ग्रीन टी का सेवन बेहतर परिणाम दे सकता है।  

surbhi जून 19, 2026 0
International Yoga Day
‘रन फॉर योग’ में दौड़ा धनबाद

धनबाद। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर धनबाद में खासा उत्साह है। इसे लेकर शुक्रवार को ‘रन फॉर योग’ का आयोजन हुआ, जिसमें धनबाद के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। लोगों ने दिया ये संदेश जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। DC आदित्य रंजन के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत रणधीर वर्मा चौक से हुई। इसके बाद प्रतिभागी दौड़ते हुए सिटी सेंटर पहुंचे, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे रास्ते लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। हर तबके के लोग हुए शामिल ‘रन फॉर योग’ में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी, खेल प्रेमी, छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि समेत बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। सभी ने जोश के साथ दौड़ में हिस्सा लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों को योग के महत्व और उसके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि नियमित योग करने से न सिर्फ शरीर फिट रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। योग को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प दौड़ में शामिल लोगों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग को जन-जन तक पहुंचाने और इसे जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। साथ ही स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की बात कही। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही लोगों से अपील की कि 21 जून 2026 को मेमको मोड़ स्थित मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय योग कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर योग दिवस को सफल बनाएं।

anjali kumari जून 19, 2026 0
weight loss tips
क्या आप भी वजन घटाने के लिए भूखे रहते हैं? ऐसे करने से हो सकती है गंभीर मानसिक बीमारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्लिम और फिट दिखने की चाह में कई लोग खाना-पीना कम कर देते हैं या लंबे समय तक भूखे रहते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। लगातार वजन बढ़ने के डर से भोजन से दूरी बनाना एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia Nervosa) जैसी गंभीर और जानलेवा मानसिक बीमारी का कारण बन सकता है। यह एक ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति खुद को मोटा समझता है और वजन बढ़ने के डर से पर्याप्त भोजन नहीं करता।   विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और शरीर 'स्टार्वेशन मोड' में चला जाता है। इससे शरीर फैट जलाने के बजाय उसे जमा करने लगता है। यदि समय रहते इस समस्या का इलाज न कराया जाए तो कुपोषण, अत्यधिक कमजोरी और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।   क्या हैं इसके प्रमुख लक्षण? एनोरेक्सिया नर्वोसा के सामान्य लक्षणों में तेजी से वजन घटना, कैलोरी गिनने की आदत, भोजन से बचना, अत्यधिक व्यायाम करना, अपने शरीर को लेकर असंतोष, बार-बार वजन मापना, सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना और खाना खाने के बाद तुरंत बाथरूम जाना शामिल हैं। इसके अलावा हर समय ठंड लगना, थकान, बाल झड़ना, चक्कर आना, धीमी हृदय गति और महिलाओं में मासिक धर्म अनियमित होना भी इसके संकेत हो सकते हैं।   क्यों होती है यह बीमारी? विशेषज्ञों का मानना है कि एनोरेक्सिया नर्वोसा के पीछे आनुवंशिक कारण, मानसिक तनाव, कम आत्मविश्वास, सोशल मीडिया का दबाव, शरीर को लेकर नकारात्मक सोच और पारिवारिक इतिहास जैसी कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं। किशोरियों और युवा महिलाओं में इसका खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है, हालांकि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।   समय पर इलाज है जरूरी डॉक्टरों के अनुसार एनोरेक्सिया का इलाज मेडिकल देखरेख, मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी) और संतुलित पोषण संबंधी सलाह के संयुक्त प्रयास से किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं और जान का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

anjali kumari जून 18, 2026 0
Healthy foods like carrots, tomatoes, oats, nuts and yogurt arranged to show nutritious food pairings.
सिर्फ हेल्दी खाना काफी नहीं, सही फूड कॉम्बिनेशन से शरीर को मिलते हैं ज्यादा पोषक तत्व; न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए 8 असरदार पेयर

हम अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या खाना है, लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ एक-दूसरे के साथ मिलकर ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट तभी शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं जब उन्हें सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। फैमिली फिजिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सिल्जा शेफर के मुताबिक, कोई एक सुपरफूड या फूड कॉम्बिनेशन खराब खानपान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन कुछ खास संयोजन शरीर को पोषक तत्वों का अधिक लाभ दिलाने में मदद करते हैं। 1. गाजर या कद्दू के साथ ऑलिव ऑयल गाजर और कद्दू में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर में विटामिन A में बदलता है। यह पोषक तत्व वसा की मौजूदगी में बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। फायदा: आंखों, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए लाभकारी। 2. टमाटर के साथ एवोकाडो या अच्छा तेल टमाटर में मौजूद लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। इसे शरीर में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हेल्दी फैट की जरूरत होती है। फायदा: हृदय और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद। 3. सब्जियों पर नट्स और बीजों की टॉपिंग बादाम, अखरोट, चिया सीड्स या कद्दू के बीज जैसी चीजें हेल्दी फैट और फाइबर प्रदान करती हैं। फायदा: फैट-सॉल्युबल विटामिन्स के अवशोषण में मदद और अतिरिक्त पोषण। 4. प्रोटीन और विटामिन C का संयोजन कोलेजन के निर्माण के लिए शरीर को प्रोटीन के साथ विटामिन C की भी आवश्यकता होती है। बेहतरीन उदाहरण: दही और बेरीज दाल और शिमला मिर्च मछली और नींबू फायदा: त्वचा, कनेक्टिव टिश्यू और घाव भरने की प्रक्रिया को समर्थन। 5. ओट्स के साथ बेरीज या सेब ओट्स में मौजूद प्लांट-बेस्ड आयरन विटामिन C के साथ ज्यादा अच्छी तरह अवशोषित होता है। फायदा: आयरन की कमी से बचाव में मदद। 6. दाल या बीन्स के साथ टमाटर और शिमला मिर्च दालों में मौजूद नॉन-हीम आयरन को शरीर बेहतर तरीके से उपयोग कर सके, इसके लिए विटामिन C जरूरी है। फायदा: शाकाहारी लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी। 7. हल्दी के साथ काली मिर्च हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने आप में कम अवशोषित होता है, लेकिन काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन इसकी जैव उपलब्धता को कई गुना बढ़ा देता है। फायदा: सूजन और इंफ्लेमेशन से जुड़ी समस्याओं में मददगार। 8. प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स का साथ प्रीबायोटिक्स (फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ) अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं, जबकि प्रोबायोटिक्स सीधे फायदेमंद बैक्टीरिया प्रदान करते हैं। बेहतरीन उदाहरण: दही या केफिर के साथ फल दलिया और योगर्ट फायदा: आंतों के स्वास्थ्य और माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद। सिर्फ फूड कॉम्बिनेशन ही नहीं, संतुलित जीवनशैली भी जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि पोषक तत्वों का अवशोषण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। आंतों का स्वास्थ्य, हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ बीमारियां भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।  

surbhi जून 15, 2026 0
Person relaxing outdoors during weekend therapy with nature, reading and stress-free lifestyle activities
Weekend Therapy: वीकेंड पर अपनाएं ये 6 आसान तरीके, हफ्तेभर की थकान होगी दूर, शरीर और दिमाग दोनों रहेंगे फ्रेश

Weekend Therapy: सिर्फ छुट्टी नहीं, खुद को रीचार्ज करने का मौका है वीकेंड पूरे सप्ताह ऑफिस, पढ़ाई, बिजनेस और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच लोग शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाते हैं। ऐसे में वीकेंड केवल आराम का दिन नहीं, बल्कि खुद को फिर से ऊर्जा से भरने का अवसर भी होता है। हालांकि कई लोग शनिवार और रविवार का ज्यादातर समय मोबाइल चलाने या देर तक सोने में बिताते हैं, जिससे शरीर और दिमाग को वास्तविक आराम नहीं मिल पाता। यदि आप वीकेंड का सही उपयोग करें तो आने वाले सप्ताह की शुरुआत नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ कर सकते हैं। 1. पूरी करें अधूरी नींद, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं कामकाजी दिनों में अक्सर पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती। वीकेंड पर शरीर को आराम देने के लिए अच्छी और गहरी नींद लेना जरूरी है। हालांकि बहुत ज्यादा देर तक सोना भी नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य समय से एक-दो घंटे अधिक आराम करना शरीर और दिमाग को तरोताजा रखने के लिए पर्याप्त होता है। अच्छी नींद मानसिक तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है। 2. कुछ घंटों के लिए करें डिजिटल डिटॉक्स मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन आज हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं। लगातार सोशल मीडिया और ईमेल्स देखने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। वीकेंड पर कम से कम चार से पांच घंटे के लिए फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस से दूरी बनाएं। डिजिटल डिटॉक्स से आंखों को आराम मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। 3. प्रकृति के करीब बिताएं समय बंद कमरों और व्यस्त शहरों की जिंदगी से निकलकर थोड़ी देर प्रकृति के बीच समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। सुबह या शाम किसी पार्क में टहलना, हरियाली के बीच बैठना या ताजी हवा में गहरी सांस लेना मन को शांति देता है। प्रकृति के संपर्क में रहने से सकारात्मक भावनाएं बढ़ती हैं और तनाव कम होता है। 4. अपने शौक को दें समय भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने पसंदीदा शौक भूल जाते हैं। वीकेंड पर कुछ समय उन गतिविधियों के लिए निकालें जो आपको खुशी देती हैं। चाहे किताब पढ़ना हो, संगीत सुनना, पेंटिंग करना, गार्डनिंग करना या कोई नया हुनर सीखना—अपनी पसंद का काम करने से मन प्रसन्न रहता है और मानसिक दबाव कम होता है। 5. मसाज और गुनगुने पानी से दें शरीर को राहत लगातार काम करने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव और थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में गुनगुने पानी से स्नान करना या हल्के तेल से मसाज करना फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा गुनगुने पानी में सेंधा नमक डालकर कुछ देर पैर डुबोकर बैठने से भी शरीर को आराम मिलता है। यह तरीका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने और शारीरिक थकान कम करने में मदद करता है। 6. परिवार और दोस्तों के साथ बिताएं क्वालिटी टाइम काम का दबाव और व्यस्त दिनचर्या कई बार लोगों को भावनात्मक रूप से भी थका देती है। वीकेंड पर परिवार, दोस्तों या प्रियजनों के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। खुलकर बातचीत करना, हंसी-मजाक करना और पुरानी यादें साझा करना तनाव कम करने का प्रभावी तरीका माना जाता है। छोटी-छोटी आदतें बदल सकती हैं आपका पूरा वीकेंड वीकेंड का सही इस्तेमाल केवल आराम करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से बेहतर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यदि आप अच्छी नींद, डिजिटल डिटॉक्स, प्रकृति के साथ समय, अपनी हॉबी, रिलैक्सेशन और अपनों के साथ बातचीत जैसी आदतों को अपनाते हैं, तो न सिर्फ आपकी थकान दूर होगी बल्कि आप नए सप्ताह की शुरुआत भी अधिक उत्साह और ऊर्जा के साथ कर पाएंगे।  

surbhi जून 13, 2026 0
Shilpa Shetty performing plank exercises and yoga poses as part of her fitness routine.
51 की उम्र में भी सुपरफिट हैं शिल्पा शेट्टी, प्लैंक और योग का यह कॉम्बिनेशन है उनकी फिटनेस का राज

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा 51 साल की हो चुकी हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और एनर्जी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। 1993 में फिल्म बाजीगर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शिल्पा ने वर्षों से योग, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया हुआ है। शिल्पा का मानना है कि फिटनेस केवल शरीर को आकार देने का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का भी माध्यम है। वह हमेशा समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) पर जोर देती हैं और साफ-सुथरे खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। प्लैंक एक्सरसाइज से बनाती हैं मजबूत कोर हाल ही में शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर अपने वर्कआउट रूटीन की झलक साझा की थी। इस रूटीन में उन्होंने कई तरह की प्लैंक एक्सरसाइज शामिल की हैं, जिनमें— एक्सटेंडेड आर्म प्लैंक विद हिप एक्सटेंशन साइड एल्बो प्लैंक विद हिप डिप्स एल्बो प्लैंक विद हिप एब्डक्शन और एडडक्शन इन सभी एक्सरसाइज को वह 15-20 रेपिटेशन के तीन सेट में करती हैं। यह रूटीन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ कंधों, हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों की सहनशक्ति भी बढ़ाता है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे वर्कआउट के लिए केवल एक योगा मैट और करीब 20 मिनट का समय चाहिए। शिल्पा इसे अपनी "वॉशबोर्ड एब्स की रेसिपी" बताती हैं। हालांकि, वह नए लोगों को सलाह देती हैं कि शुरुआत आसान एक्सरसाइज से करें और धीरे-धीरे एडवांस रूटीन की तरफ बढ़ें। योग और मेडिटेशन भी हैं फिटनेस का अहम हिस्सा शिल्पा शेट्टी केवल जिम वर्कआउट पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि योग और मेडिटेशन को भी अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनका कहना है कि योग शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी संतुलित करता है। सेतु बंधासन से मिलता है मानसिक और शारीरिक लाभ सेतु बंधासन (ब्रिज पोज) गर्दन, कंधों और पीठ को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक माना जाता है। अर्ध हलासन और नौकासन से मजबूत होती हैं पेट की मांसपेशियां अर्ध हलासन और नौकासन दोनों ही कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले प्रमुख योगासन माने जाते हैं। इनसे— पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। पाचन तंत्र बेहतर होता है। रीढ़ की लचक बढ़ती है। शरीर का पोश्चर सुधरता है। आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती में भी वृद्धि होती है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस फिलॉसफी यही संदेश देती है कि नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवनशैली के जरिए किसी भी उम्र में स्वस्थ और फिट रहा जा सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
Person performing Navasana yoga pose to strengthen core muscles and improve balance
100 सिट-अप्स से भी ज्यादा असरदार है यह योगासन, पेट की चर्बी घटाने के साथ Cortisol भी करता है कम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही लोगों की प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में योग का एक खास आसन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे विशेषज्ञ 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर प्रभावी मानते हैं। यह आसन है नौकासन (Navasana) या Boat Pose, जो न केवल पेट और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है बल्कि तनाव कम करने और शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नौकासन शरीर की गहरी मांसपेशियों पर काम करता है और नियमित अभ्यास से शरीर की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाता है। यही कारण है कि इसे योग की सबसे प्रभावशाली कोर-स्ट्रेंथ एक्सरसाइज में गिना जाता है। 100 सिट-अप्स जितना असरदार क्यों माना जाता है नौकासन? अमेरिका की Auburn University at Montgomery द्वारा किए गए एक अध्ययन में नौकासन को योग और पिलेट्स की सबसे प्रभावी कोर एक्सरसाइज में शामिल किया गया। प्रसिद्ध योग शिक्षक Sharath Jois का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति इस आसन को 25 गहरी सांसों तक सही तरीके से होल्ड करता है, तो इसका प्रभाव 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर हो सकता है। पेट, पीठ और कूल्हों को बनाता है मजबूत योग प्रशिक्षकों के अनुसार, नौकासन केवल एब्स तक सीमित नहीं है। यह पेट की मांसपेशियों, हिप फ्लेक्सर्स, ग्लूट्स, पेल्विक मसल्स और पीठ को भी मजबूत करता है। इस आसन के दौरान कोर को सक्रिय रखने से पेट के अंदरूनी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक हो सकता है। तनाव कम करने में भी मददगार नौकासन का फायदा केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। साल 2023 में जर्नल Biomedicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले छात्रों में छह सप्ताह के भीतर कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम हुआ। नौकासन करते समय संतुलन बनाए रखना, सांसों को नियंत्रित करना और मन को केंद्रित रखना पड़ता है। यही प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। दिमाग की क्षमता भी बढ़ाता है नौकासन एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर को संतुलन और स्थिरता दोनों बनाए रखनी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बैलेंसिंग अभ्यास मस्तिष्क और शरीर के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं। नियमित अभ्यास से एकाग्रता, फोकस और न्यूरोमस्कुलर कनेक्शन बेहतर होता है। यही वजह है कि इसे शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। नौकासन करने का सही तरीका जमीन पर सीधे बैठ जाएं और पैरों को सामने फैलाएं। घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे पैरों को सीधा करके शरीर को V आकार में लाने का प्रयास करें। रीढ़ को सीधा रखें और छाती को खुला रखें। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं। नजर हल्की ऊपर रखें और कोर को सक्रिय रखें। 5 से 10 गहरी सांसों तक इस स्थिति में बने रहें। आराम करें और 3 से 5 बार दोहराएं। शुरुआती लोग घुटनों को मोड़कर आसान रूप में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। इन गलतियों से बचें पीठ को गोल कर लेना सांस रोककर रखना कंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करना क्षमता से अधिक पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करना विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन में ऊंचाई से ज्यादा स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। किन लोगों को नहीं करना चाहिए नौकासन? निम्न समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना नौकासन नहीं करना चाहिए: कमर की गंभीर चोट हिप फ्लेक्सर स्ट्रेन हर्निया हाल ही में हुई पेट की सर्जरी गर्भावस्था के कुछ चरण

surbhi जून 8, 2026 0
Person experiencing eye irritation while sitting in an air-conditioned room and using a laptop
AC रूम में ज्यादा बैठने से बढ़ सकती है आंखों की जलन, जानिए कारण और बचाव के आसान उपाय

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही लोगों की प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में योग का एक खास आसन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे विशेषज्ञ 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर प्रभावी मानते हैं। यह आसन है नौकासन (Navasana) या Boat Pose, जो न केवल पेट और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है बल्कि तनाव कम करने और शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नौकासन शरीर की गहरी मांसपेशियों पर काम करता है और नियमित अभ्यास से शरीर की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाता है। यही कारण है कि इसे योग की सबसे प्रभावशाली कोर-स्ट्रेंथ एक्सरसाइज में गिना जाता है। 100 सिट-अप्स जितना असरदार क्यों माना जाता है नौकासन? अमेरिका की Auburn University at Montgomery द्वारा किए गए एक अध्ययन में नौकासन को योग और पिलेट्स की सबसे प्रभावी कोर एक्सरसाइज में शामिल किया गया। प्रसिद्ध योग शिक्षक Sharath Jois का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति इस आसन को 25 गहरी सांसों तक सही तरीके से होल्ड करता है, तो इसका प्रभाव 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर हो सकता है। पेट, पीठ और कूल्हों को बनाता है मजबूत योग प्रशिक्षकों के अनुसार, नौकासन केवल एब्स तक सीमित नहीं है। यह पेट की मांसपेशियों, हिप फ्लेक्सर्स, ग्लूट्स, पेल्विक मसल्स और पीठ को भी मजबूत करता है। इस आसन के दौरान कोर को सक्रिय रखने से पेट के अंदरूनी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक हो सकता है। तनाव कम करने में भी मददगार नौकासन का फायदा केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। साल 2023 में जर्नल Biomedicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले छात्रों में छह सप्ताह के भीतर कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम हुआ। नौकासन करते समय संतुलन बनाए रखना, सांसों को नियंत्रित करना और मन को केंद्रित रखना पड़ता है। यही प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। दिमाग की क्षमता भी बढ़ाता है नौकासन एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर को संतुलन और स्थिरता दोनों बनाए रखनी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बैलेंसिंग अभ्यास मस्तिष्क और शरीर के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं। नियमित अभ्यास से एकाग्रता, फोकस और न्यूरोमस्कुलर कनेक्शन बेहतर होता है। यही वजह है कि इसे शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। नौकासन करने का सही तरीका जमीन पर सीधे बैठ जाएं और पैरों को सामने फैलाएं। घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे पैरों को सीधा करके शरीर को V आकार में लाने का प्रयास करें। रीढ़ को सीधा रखें और छाती को खुला रखें। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं। नजर हल्की ऊपर रखें और कोर को सक्रिय रखें। 5 से 10 गहरी सांसों तक इस स्थिति में बने रहें। आराम करें और 3 से 5 बार दोहराएं। शुरुआती लोग घुटनों को मोड़कर आसान रूप में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। इन गलतियों से बचें पीठ को गोल कर लेना सांस रोककर रखना कंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करना क्षमता से अधिक पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करना विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन में ऊंचाई से ज्यादा स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। किन लोगों को नहीं करना चाहिए नौकासन? निम्न समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना नौकासन नहीं करना चाहिए: कमर की गंभीर चोट हिप फ्लेक्सर स्ट्रेन हर्निया हाल ही में हुई पेट की सर्जरी गर्भावस्था के कुछ चरण

surbhi जून 8, 2026 0
Glass of ice water placed beside a meal highlighting its impact on digestion
बर्फ वाला पानी पीने से क्या सच में खराब हो जाता है पाचन? जानिए एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं

गर्मी बढ़ते ही ज्यादातर लोग फ्रिज का ठंडा या बर्फ वाला पानी पीकर राहत महसूस करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक ठंडा पानी, खासकर भोजन के तुरंत बाद पीना, पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इससे कुछ लोगों को गैस, अपच, पेट भारी लगना या असहजता जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ठंडा पानी पाचन पर कैसे असर डालता है? विशेषज्ञों के अनुसार शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है। जब बहुत ठंडा पानी पेट में पहुंचता है, तो कुछ समय के लिए पाचन तंत्र का तापमान कम हो सकता है। इससे भोजन को पचाने वाले एंजाइमों की कार्यक्षमता अस्थायी रूप से धीमी पड़ सकती है, जिसके कारण भोजन को पचने में अधिक समय लग सकता है। फैट पचाने में हो सकती है दिक्कत पाचन विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत ठंडा पानी वसायुक्त (फैटी) भोजन के बाद पीने से कुछ लोगों में फैट के टूटने और पाचन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। हालांकि यह कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अपच और भारीपन की शिकायत बढ़ सकती है। ब्लड सर्कुलेशन पर भी पड़ सकता है असर अत्यधिक ठंडा पानी पीने से पेट और आंतों के आसपास की रक्त वाहिकाएं कुछ समय के लिए सिकुड़ सकती हैं। इससे पाचन अंगों तक रक्त प्रवाह अस्थायी रूप से कम हो सकता है, जिसके कारण पाचन की गति प्रभावित हो सकती है। किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत? एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) से पीड़ित लोग Irritable Bowel Syndrome (IBS) के मरीज बार-बार अपच की समस्या वाले लोग भोजन के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने वाले लोग भारी वर्कआउट के तुरंत बाद बर्फ वाला पानी पीने वाले लोग क्या करें? सामान्य तापमान का पानी पीने की आदत डालें। भोजन के तुरंत बाद बहुत ठंडा पानी पीने से बचें। गर्मियों में घड़े का पानी बेहतर विकल्प हो सकता है। अदरक, पुदीना और सौंफ जैसी हर्बल ड्रिंक्स पाचन में मदद कर सकती हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर पिएं, लेकिन अत्यधिक बर्फ वाला पानी नियमित आदत न बनाएं।

surbhi जून 8, 2026 0
Person taking a short walk after a meal to help manage blood sugar and improve digestion.
हाई ब्लड शुगर से हैं परेशान? खाना खाने के बाद सिर्फ 10 मिनट टहलने से मिल सकता है बड़ा फायदा, डॉक्टर ने बताया कैसे

आजकल बदलती जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं में से एक है खाना खाने के बाद हल्की सैर करना। कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. आशीष मेहरोत्रा के अनुसार, भोजन के बाद 10 से 20 मिनट तक टहलना ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। खाना खाने के बाद शरीर में क्या होता है? भोजन करने के बाद शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है, जो खून में पहुंचता है। यदि भोजन में कार्बोहाइड्रेट या मीठी चीजें अधिक हों तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में हल्की वॉक करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और वे ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा के रूप में करने लगती हैं। इससे खून में मौजूद अतिरिक्त शुगर कम होने लगती है और ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहता है। खाना खाने के बाद टहलने के फायदे 1. ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी को रोकता है भोजन के बाद होने वाले शुगर स्पाइक को कम करने में मदद मिलती है, जो डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। 2. इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार नियमित वॉक करने से शरीर इंसुलिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देता है, जिससे ग्लूकोज आसानी से कोशिकाओं तक पहुंच पाता है। 3. पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत खाने के बाद टहलने से बाउल मूवमेंट बेहतर होता है और पेट फूलना, भारीपन तथा अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। 4. वजन नियंत्रित रखने में मददगार हल्की शारीरिक गतिविधि कैलोरी बर्न करने में मदद करती है, जिससे मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है। 5. हार्ट और मेटाबॉलिज्म को फायदा ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये आदतें खाना खाने के बाद 10-20 मिनट तक टहलें। ज्यादा मीठा और ओवरईटिंग से बचें। भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शुगरी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें। प्रोटीन, हेल्दी फैट और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वाला संतुलित आहार लें। नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें। भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें। यदि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज है तो नियमित ब्लड शुगर जांच करवाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने के बाद की छोटी-सी सैर लंबे समय में ब्लड शुगर नियंत्रण, बेहतर पाचन और अच्छी नींद जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ पहुंचा सकती है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Vitamin D rich foods and sunlight exposure linked to blood sugar and diabetes management
विटामिन डी की कमी बढ़ा सकती है डायबिटीज का खतरा, इंसुलिन के सही कामकाज में निभाता है अहम भूमिका

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान और धूप से दूरी के कारण विटामिन डी की कमी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक इस जरूरी विटामिन की कमी केवल हड्डियों को ही नहीं, बल्कि शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम विटामिन डी स्तर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। इंसुलिन के लिए क्यों जरूरी है विटामिन डी? विटामिन डी केवल कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की मजबूती तक सीमित नहीं है। यह इंसुलिन के उत्पादन और उसके प्रभावी कार्य में भी मदद करता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो रक्त में मौजूद शुगर को नियंत्रित करता है। अध्ययनों के अनुसार, जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। डायबिटीज के साथ बढ़ सकता है अन्य बीमारियों का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को विटामिन डी की कमी और डायबिटीज दोनों हैं, तो माइक्रोवैस्कुलर जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसका असर शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है, जिससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं: डायबिटिक रेटिनोपैथी (आंखों की बीमारी) डायबिटिक नेफ्रोपैथी (किडनी को नुकसान) डायबिटिक न्यूरोपैथी (नसों की कमजोरी) विटामिन डी की कमी से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जो रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाकर ब्लड फ्लो को प्रभावित कर सकती है। विटामिन डी की कमी के संकेत लगातार थकान और कमजोरी मांसपेशियों में दर्द हड्डियों में दर्द बार-बार बीमार पड़ना ऊर्जा की कमी ब्लड शुगर नियंत्रण में परेशानी विटामिन डी की कमी कैसे दूर करें? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान उपाय अपनाकर विटामिन डी के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है: रोज सुबह 20 से 30 मिनट धूप में समय बिताएं। आहार में अंडा, मशरूम, फैटी फिश, दूध और दही शामिल करें। नियमित रूप से व्यायाम, योग और वॉक करें। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी सप्लीमेंट लें। जरूरत पड़ने पर 25(OH)D टेस्ट करवाएं। क्या केवल विटामिन डी की कमी से डायबिटीज होती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि डायबिटीज एक बहु-कारक बीमारी है। केवल विटामिन डी की कमी को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। हालांकि, पर्याप्त विटामिन डी स्तर बनाए रखना बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।  

surbhi जून 4, 2026 0
Person drinking water in summer to reduce dehydration and kidney stone risk
गर्मियों में पानी कम पीना पड़ सकता है भारी, बढ़ रहा है किडनी स्टोन का खतरा; जानिए कारण, लक्षण और बचाव

गर्मियों के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकलता है। यदि इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिया जाए, तो शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर किडनी की सेहत पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में किडनी स्टोन के मामलों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण शरीर में पानी की कमी है। कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सिंह सोमवंशी के मुताबिक, जब शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो पेशाब अधिक गाढ़ा हो जाता है। इससे उसमें मौजूद कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे तत्वों की सांद्रता बढ़ जाती है, जो आपस में मिलकर क्रिस्टल बनाते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल किडनी स्टोन का रूप ले लेते हैं। कैसे बनती है किडनी स्टोन? गर्म मौसम में अत्यधिक पसीना आने से शरीर से पानी तेजी से निकलता है। यदि इस पानी की भरपाई नहीं की जाती, तो पेशाब की मात्रा कम हो जाती है और उसमें मौजूद खनिज पदार्थ घुलने के बजाय जमा होने लगते हैं। यही जमा हुए कण धीरे-धीरे पथरी का रूप ले लेते हैं। किन लोगों को अधिक खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों में किडनी स्टोन का जोखिम अधिक होता है, जैसे: लंबे समय तक धूप या गर्म वातावरण में काम करने वाले लोग पर्याप्त पानी पिए बिना ज्यादा व्यायाम करने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैफीन और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने वाले बार-बार डिहाइड्रेशन का शिकार होने वाले पहले किडनी स्टोन की समस्या झेल चुके लोग खानपान भी बढ़ा सकता है जोखिम गर्मियों में प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक वाले स्नैक्स और शुगर युक्त पेय पदार्थों का सेवन किडनी स्टोन बनने की संभावना बढ़ा सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर के मिनरल संतुलन को प्रभावित करते हैं और पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षण किडनी स्टोन होने पर शरीर कई संकेत देता है, जिन पर ध्यान देना जरूरी है: पीठ, पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द पेशाब करते समय जलन या दर्द पेशाब में खून आना या रंग बदलना बार-बार पेशाब की इच्छा होना मतली, उल्टी, बुखार या कंपकंपी पेशाब की मात्रा कम होना यदि इन लक्षणों के साथ बुखार भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। किडनी स्टोन से बचाव के आसान उपाय रोजाना कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं। तरबूज, खीरा, खरबूजा और खट्टे फलों का सेवन बढ़ाएं। नमकीन, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से दूरी बनाएं। सॉफ्ट ड्रिंक्स, शराब और कैफीन का सीमित सेवन करें। प्यास लगने का इंतजार न करें, समय-समय पर पानी पीते रहें। धूप में काम करने या बाहर रहने पर पानी की मात्रा और बढ़ाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को हाइड्रेटेड रखना है। गर्मियों में पानी पीने की आदत को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।  

surbhi जून 4, 2026 0
Stressed person holding head while working, highlighting mental and physical effects of chronic stress
हर समय तनाव में रहना पड़ सकता है भारी, दिमाग से लेकर दिल तक पर पड़ सकता है गंभीर असर

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। नौकरी का दबाव, आर्थिक चुनौतियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव लोगों की मानसिक शांति को प्रभावित कर रहा है। हालांकि थोड़े समय का तनाव सामान्य माना जाता है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहता है तो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव न केवल व्यक्ति के व्यवहार और सोचने की क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि यह हृदय, पाचन तंत्र, नींद और शरीर की कई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। तनाव का दिमाग पर क्या असर पड़ता है? 1. निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है लगातार तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को प्रभावित करता है, जो सोचने, समझने, निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति छोटे-छोटे फैसले लेने में भी कठिनाई महसूस कर सकता है और गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती है। 2. याददाश्त और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है लंबे समय तक तनाव में रहने से दिमाग का हिप्पोकैम्पस हिस्सा प्रभावित हो सकता है, जो नई चीजें सीखने और याद रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस कारण व्यक्ति को बातें भूलने, ध्यान भटकने और नई जानकारी को याद रखने में परेशानी होने लगती है। 3. चिंता और डिप्रेशन का खतरा शुरुआत में तनाव केवल बेचैनी, चिड़चिड़ापन या चिंता के रूप में दिखाई देता है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर मानसिक समस्याओं का रूप ले सकता है। लगातार तनाव के कारण: एंग्जायटी बढ़ सकती है डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है आत्मविश्वास कम हो सकता है भावनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है 4. प्रोडक्टिविटी में गिरावट जब दिमाग लगातार तनाव में रहता है तो किसी भी काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। व्यक्ति जल्दी थक जाता है और उसकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। इसका प्रभाव नौकरी, पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन सभी पर दिखाई देने लगता है। नींद पर पड़ता है सीधा असर तनाव की स्थिति में व्यक्ति अक्सर एक ही समस्या के बारे में बार-बार सोचता रहता है। इससे रात में नींद आने में देर हो सकती है या बार-बार नींद टूट सकती है। खराब नींद के कारण: दिनभर थकान महसूस होती है ऊर्जा कम हो जाती है चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है मानसिक प्रदर्शन प्रभावित होता है तनाव का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? 1. हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है तनाव के दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती है और रक्तचाप बढ़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। 2. मांसपेशियों में दर्द और अकड़न लगातार तनाव में रहने पर शरीर की मांसपेशियां तनावग्रस्त रहती हैं। इससे गर्दन, कंधों और पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है। 3. पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है तनाव का असर सीधे हमारे पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। इसके कारण: अपच गैस पेट दर्द कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं उभर सकती हैं। 4. वजन बढ़ने का खतरा कई लोग तनाव के दौरान जरूरत से ज्यादा खाना खाने लगते हैं, जिसे इमोशनल ईटिंग कहा जाता है। इससे: कैलोरी का सेवन बढ़ता है वजन बढ़ सकता है मोटापे का खतरा बढ़ जाता है तनाव कम करने के आसान तरीके विशेषज्ञों के अनुसार तनाव को नियंत्रित करने के लिए कुछ सरल आदतें अपनाई जा सकती हैं: रोजाना 20-30 मिनट वॉक करें मेडिटेशन और योग का अभ्यास करें पर्याप्त नींद लें दोस्तों और परिवार से बातचीत करें पसंदीदा संगीत सुनें सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करें प्रकृति के बीच समय बिताएं यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे या चिंता और उदासी लगातार महसूस हो, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। तनाव केवल मन की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय रहते इसके संकेतों को पहचानना और उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है।  

surbhi जून 3, 2026 0
Traditional Japanese superfoods including miso soup, umeboshi, kuzu, sauerkraut, and kukicha tea for gut health
जापानी महिलाओं की लंबी उम्र का राज! आंतों को स्वस्थ रखने वाले 5 सुपरफूड्स जिन्हें आप भी डाइट में शामिल कर सकते हैं

बेहतर पाचन और लंबी उम्र के लिए जापानी खानपान बना प्रेरणा दुनियाभर में जापान को लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ अच्छी आनुवंशिकता नहीं, बल्कि उनकी संतुलित जीवनशैली और पोषण से भरपूर खानपान भी बड़ी वजह है। जापान के लोग वर्षों से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते आ रहे हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स, प्रोबायोटिक्स और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये न केवल आंतों की सेहत को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 खास जापानी सुपरफूड्स के बारे में जो गट हेल्थ और माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। 1. फर्मेंटेड पत्ता गोभी (सॉकरक्राउट) जापानी भोजन में फर्मेंटेड फूड्स का महत्वपूर्ण स्थान है। फर्मेंटेड पत्ता गोभी, जिसे सॉकरक्राउट भी कहा जाता है, प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बढ़ावा देती है। साथ ही इसमें विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो इसे एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट बनाती है। इसे भोजन से पहले छोटी मात्रा में सलाद या साइड डिश के रूप में खाया जा सकता है। 2. कुजु (Kuzu) कुजु एक पारंपरिक जापानी आटा है जो कुडज़ू पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है। इसे प्राकृतिक थिकनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पाचन तंत्र को आराम पहुंचाने, रक्त शर्करा को संतुलित रखने और शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। कुजु का उपयोग सूप, सॉस और हर्बल पेय बनाने में किया जाता है। 3. उमेबोशी पेस्ट उमेबोशी एक विशेष प्रकार के जापानी फल से तैयार किया गया फर्मेंटेड पेस्ट है। यह प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर माना जाता है। कम कैलोरी और कम वसा वाला यह खाद्य पदार्थ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। कई लोग इसे भोजन से पहले थोड़ी मात्रा में लेते हैं, जबकि कुछ इसे हर्बल ड्रिंक या चाय में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। 4. कुकिचा चाय जापान में लोकप्रिय कुकिचा चाय साधारण चाय की पत्तियों से नहीं, बल्कि पौधे की टहनियों और डंठलों से बनाई जाती है। इसमें कैफीन की मात्रा बेहद कम होती है, जबकि विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चाय पाचन में मदद करती है और शरीर के एसिड-बेस संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकती है। 5. मिसो सूप मिसो सूप जापान के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में से एक है। कई जापानी परिवार इसे नाश्ते में भी शामिल करते हैं। फर्मेंटेड सोयाबीन, समुद्री नमक और कोजी से तैयार मिसो प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन और कई आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। क्यों जरूरी है स्वस्थ माइक्रोबायोम? विशेषज्ञों के अनुसार, आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया केवल पाचन ही नहीं बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को भी प्रभावित करते हैं। संतुलित माइक्रोबायोम सूजन को कम करने, पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण और शरीर की समग्र कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। डाइट में धीरे-धीरे करें शामिल हालांकि ये सभी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं, लेकिन किसी भी नए फर्मेंटेड या विशेष खाद्य पदार्थ को डाइट में धीरे-धीरे शामिल करना बेहतर होता है। जिन लोगों को विशेष स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें आहार में बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। जापानी खानपान से जुड़े ये सुपरफूड्स दिखाते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली केवल महंगे सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि सही और संतुलित भोजन से भी हासिल की जा सकती है।  

surbhi जून 2, 2026 0
Summer Fashion
धूप से बचना है तो सही कपड़ों का करें चुनाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में लोग आमतौर पर तेज धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सनस्क्रीन ही पर्याप्त नहीं है। सूरज की हानिकारक UVA और UVB किरणों से बचाव में कपड़ों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सही फैब्रिक और रंग के कपड़े त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों को काफी हद तक रोक सकते हैं।   क्या है UPF फैब्रिक? विशेषज्ञों के अनुसार, जिस तरह सनस्क्रीन में SPF रेटिंग होती है, उसी तरह कपड़ों में UPF (Ultraviolet Protection Factor) रेटिंग होती है। UPF 50+ वाले कपड़े सूर्य की लगभग 98 प्रतिशत UV किरणों को रोकने में सक्षम माने जाते हैं। ये कपड़े माइक्रो-पॉलिएस्टर, नायलॉन, बांस, कॉटन और लिनन जैसे विशेष फैब्रिक से बनाए जाते हैं और इन्हें UV सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है।   गहरे रंग के कपड़े क्यों हैं बेहतर? अक्सर माना जाता है कि गहरे रंग के कपड़े धूप को अधिक सोखते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यही गुण उन्हें UV किरणों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है। काला, गहरा नीला और गहरा लाल रंग सूर्य की हानिकारक किरणों को अवशोषित कर त्वचा तक पहुंचने से रोकते हैं। इसलिए हल्के रंगों की तुलना में गहरे रंग के कपड़े अधिक प्रभावी माने जाते हैं।   ऐसे कपड़े करें चयन धूप से बचाव के लिए लंबे और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना फायदेमंद होता है। लंबी आस्तीन वाली शर्ट, हाई कॉलर वाले परिधान और हल्के लेकिन घने फैब्रिक वाले कपड़े बेहतर सुरक्षा देते हैं। ओवरसाइज्ड शर्ट और श्रग भी त्वचा को सीधे धूप के संपर्क में आने से बचाते हैं।   पुराने कपड़ों से बचें विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार धुले और फीके पड़ चुके कपड़ों की UV सुरक्षा क्षमता कम हो जाती है। इसलिए लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे पतले या घिसे हुए कपड़ों की जगह अच्छी गुणवत्ता वाले नए कपड़े पहनना अधिक सुरक्षित माना जाता है।   टोपी और सनग्लास भी जरूरी धूप से संपूर्ण सुरक्षा के लिए चौड़ी टोपी, सनग्लास और सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही कपड़ों और एक्सेसरीज का चुनाव करके गर्मियों में त्वचा को धूप के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

Unknown जून 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0