धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले के कतरास के सोनारडीह ओपी क्षेत्र अंतर्गत टंडाबार बस्ती में भू-धंसान हुआ है। इसमें दो घर जमींदोज हो गये, जबकि 3 लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि अवैध खनन के कारण यह भू-धंसान हुआ। 3 शव बरामदः इस दर्दनाक भू-धंसान हादसे के बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन लोगों के शव मलबे से बरामद किए गए। यह अभियान देर रात करीब ढाई से तीन बजे तक जारी रहा। मलबे से जिन लोगों के शव निकाले गए, उनकी पहचान मनोहर उरांव, उनकी बेटी गीता देवी और सरिता देवी के रूप में हुई है। हादसे में मनोहर उरांव का घर पूरी तरह धंस हो गया, जिसके नीचे दबकर तीनों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, घटना के समय मनोहर उरांव अपनी बेटी गीता देवी के साथ घर में मौजूद थे। उसी दौरान किसी काम से सरिता देवी उनके घर आई हुई थीं। अचानक हुए भू-धंसान ने तीनों को संभलने का मौका तक नहीं दिया और वे मलबे के नीचे दब गए। पत्नी घर में नहीं थीः मृतक की पत्नी छोटू देवी ने बताया कि हादसे के समय वह घर पर नहीं थीं और पड़ोस में गई हुई थीं। उनके अनुसार, पति, बेटी और सरिता घर के अंदर ही थे, जो इस दुर्घटना की चपेट में आ गए। रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद तीनों के शव बाहर निकाले। लोगों में आक्रोशः वहीं, सरिता देवी की बेटी ने भी बताया कि उनकी मां मनोहर उरांव के घर गई थीं और उसी दौरान यह हादसा हो गया। काफी देर बाद रात में रेस्क्यू अभियान चलाकर शवों को बाहर निकाला जा सका। घटना के बाद परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया होता, तो शायद तीनों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
धनबाद। निरसा में भाकपा (माले) की दो दिवसीय राज्य कमेटी बैठक में पार्टी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आर्थिक संकट, विदेश नीति और मजदूरों की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद निरसा स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश सचिव मनोज भट्ट, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, बगोदर के पूर्व विधायक बिनोद सिंह, माले नेता हालधर महतो, राज्य कमेटी सदस्य सुषमा मेहता और सभा प्रभारी जनार्दन प्रसाद समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। विदेश नीति और वैश्विक हालात पर उठाए सवाल मीडिया से बातचीत में दीपांकर भट्टाचार्य ने इजरायल-ईरान तनाव का हवाला देते हुए कहा कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को युद्ध के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और अमेरिका व इजरायल से युद्ध रोकने की अपील करनी चाहिए। प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर चिंता माले महासचिव ने कहा कि करीब एक करोड़ भारतीय मजदूर ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। आर्थिक हालात और महंगाई पर भी निशाना उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। रसोई गैस की किल्लत और छोटे उद्योगों की खराब स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। लेबर कोड पर कड़ा विरोध दीपांकर भट्टाचार्य ने नए श्रम कानूनों का विरोध करते हुए कहा कि ये मजदूरों के हित में नहीं हैं और इससे उनके अधिकार कमजोर होंगे। चुनाव को लेकर रणनीति का ऐलान बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी पार्टी ने अपनी रणनीति स्पष्ट की। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट के साथ तालमेल के तहत 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है। असम में कांग्रेस और वाम दलों के साथ गठबंधन में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना है, जबकि मेहाली सीट पर झामुमो का समर्थन मिलने की बात कही गई। दक्षिण भारत में भी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी तमिलनाडु में पार्टी ने करीब 14 सीटों पर चुनाव लड़ने और अन्य सीटों पर डीएमके को समर्थन देने की रणनीति बनाई है। वहीं केरल में तीन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है।
धनबाद। नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक में शहर के विकास और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। बाबूडीह स्थित विवाह भवन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता मेयर संजीव सिंह ने की, जहां नए वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व बढ़ाने और आधारभूत सुविधाओं पर खर्च की रूपरेखा तय की गई। राजस्व संग्रह बढ़ाने पर जोर निगम ने वर्ष 2026-27 के लिए कुल राजस्व वसूली का लक्ष्य बढ़ाकर 138.24 करोड़ रुपये निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इस बार आय बढ़ाने के लिए विभिन्न स्रोतों को लेकर स्पष्ट लक्ष्य तय किए गए हैं। होल्डिंग टैक्स पर सबसे ज्यादा निर्भरता राजस्व संरचना में सबसे बड़ा हिस्सा होल्डिंग टैक्स से आने की उम्मीद जताई गई है, जिससे 75 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा विज्ञापन (होर्डिंग), जल उपयोग शुल्क, नक्शा पास और पार्कों से भी आय बढ़ाने की योजना बनाई गई है, हालांकि इन मदों का योगदान अपेक्षाकृत कम रहेगा। करीब 953 करोड़ का बजट, सफाई पर फोकस बैठक में 952.8 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें शहरी सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से सफाई व्यवस्था सुधार को प्राथमिकता दी गई है, जबकि सड़क, नाली और पार्क विकास के लिए 130 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है। जलापूर्ति सुधार के लिए अलग प्रावधान शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और उसके रखरखाव के लिए 20 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि नियमित और बेहतर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। नए कर का प्रस्ताव नहीं, राज्य सरकार को भेजे जाएंगे प्रस्ताव बैठक में किसी नए टैक्स को लागू करने का प्रस्ताव नहीं लाया गया। बोर्ड से स्वीकृति के बाद सभी प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा।
धनबाद। झारखंड-पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित देबूडीह चेकपोस्ट पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बंगाल पुलिस और चुनाव आयोग की टीम ने धनबाद जिले में पदस्थापित एक थानेदार की गाड़ी से भारी मात्रा में नकदी बरामद की। विधानसभा चुनाव को लेकर बरती जा रही सख्ती के बीच हुई इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे को असहज कर दिया है। चेकपोस्ट पर जांच के दौरान पकड़ी गई रकम जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। देबूडीह चेकपोस्ट पर बंगाल पुलिस और निर्वाचन अधिकारियों की टीम आने-जाने वाले हर संदिग्ध वाहन की तलाशी ले रही थी। इसी दौरान जीटी रोड किनारे स्थित धनबाद के एक थानेदार की निजी गाड़ी को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहन के भीतर से ढाई लाख नकद बरामद हुए,चूंकि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण भारी मात्रा में कैश ले जाने पर सख्त पाबंदी है, इसलिए अधिकारियों ने तुरंत इस रकम को अपने कब्जे में ले लिया। 5 घंटे तक चली पूछताछ बरामदगी के बाद इंस्पेक्टर को हिरासत में लेकर लगभग पांच घंटे तक पूछताछ की गई। चुनाव अधिकारियों ने उनसे पैसे के स्रोत, उसे ले जाने के उद्देश्य और गंतव्य के बारे में सवाल पूछे. बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी इस बड़ी राशि के बारे में कोई ठोस दस्तावेज या संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। पुलिस गलियारों में चर्चा है कि यदि मामला केवल स्थानीय पुलिस के बीच होता, तो शायद इसे दबाने की कोशिश की जाती, लेकिन चुनाव आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड की मौजूदगी के कारण नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की गई।
धनबाद। कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। उसकी गैंग में कई लड़कियां हैं, जो इस तस्करी को अंजाम दे रही हैं। रांची के रेस्टोरेंट में 7 मार्च की फायरिंग में पकड़े गए प्रिंस खान के हैंडलर अमन सिंह उर्फ कुबेर से धनबाद पुलिस की पूछताछ में कई और नए चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि रंगदारी के लिए फायरिंग और हत्याएं कराने के लिए गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। प्रिंस खान ने कई हथियार भेजे पुलिस को जानकारी मिली है कि फरवरी में प्रिंस खान ने पाकिस्तान से पठान नामक अपराधी को दो हथियार देकर अमृतसर के रास्ते तरन तारन भेजा था। उससे हथियार रिसीव करने के लिए पलामू का कृष कुमार सिंह उर्फ आयुष वहां गया था। हालांकि, वहां किसी कारण डिलीवरी नहीं मिलने पर वह खाली हाथ रांची लौट गया था। फिर प्रिंस ने उसे 8 फरवरी को मध्यप्रदेश के बुरहानपुर भेजा था, जहां उसे 3 पिस्टल सौंपी गई थी। 20 फरवरी को वही पिस्टल रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड के पास कुबेर और कृष ने शूटरों को दी थीं। उन्हीं से धनबाद में फहीम खान के बेटे इकबाल खान को गोली मारने का फरमान पाकिस्तान से प्रिंस ने जारी किया था। हालांकि, गोली इकबाल के ड्राइवर को लगी थी। फिर 7 मार्च की रात रांची में एयरपोर्ट थाना क्षेत्र की फैमिली रेस्टोंरेंट में भी उन्हीं हथियारों से फायरिंग की गई थी, जिसमें वेटर मनीष की मौत हो गई थी। बाद में 16 मार्च को भागाबांध में मुठभेड़ के बाद कृष पकड़ा गया था और तभी से धनबाद जेल में बंद है। इकबाल की हत्या के लिए रांची से एक लड़की लाई थी हथियार पुलिस को यह भी पता चला कि प्रिंस खान अपने गिरोह के गुर्गों तक हथियार पहुंचाने के लिए लड़कियों का भी इस्तेमाल कर रहा है। गैंग में कई लड़कियां स्पीलर सेल के रूप में शामिल होकर काम कर रही है। उनके जरिए प्रिंस कारोबारियों की जानकारी भी हासिल करता है। पूछताछ में पता चला कि इकबाल को मारने के लिए रांची में अफजल उर्फ बाबर से एक लड़की ही हथियार लेकर धनबाद आई थी। सुधीश को धनबाद-बोकारो, कुबेर को रांची-पलामू की कमान रंगदारी वसूली के लिए प्रिंस खान ने झारखंड में तीन जोन बना रखे हैं। वहां फायरिंग कराने और रुपए वसूलने के लिए एजेंट भी बना रखे हैं, जिनमें कई लड़कियां हैं। धनबाद और बोकारों में सुधीश ओझा, रांची और पलामू में कुबेर और हजारीबाग में अमन खान को उसने इस काम में लगाया है। अमन कुछ माह पहले ही गैंग से जुड़ा है। पलामू में एक रिसार्ट में काम करनेवाले अभिषेक को भी रंगदारी वसूली में लगाया गया था। गैंग के गुर्गों के संपर्क में रहता है प्रिंस खान प्रिंस खान अपने गिरोह के अपराधियों से 4 मोबाइल एप के जरिए संपर्क में रहता है। इनमें वॉट्सएप और मैसेंजर के साथ जंगी एप भी शामिल है। इन एप के जरिए प्रिंस गिरोह के अपराधियों को निर्देश देता है। पुलिस अब टेक्निकल टीम की मदद से इन एप की डिटेल खंगाल रही है। दुबई गए थे सफेदपोश, अब पुलिस पूछेगी जाने का मकसद पुलिस को पता चला है कि दुबई में प्रिंस खान से मिलने के लिए धनबाद और रांची से कई सफेदपोश गए थे। उनमें वासेपुर के कुछ लोग भी शामिल हैं। संदेह है कि वे प्रिंस को कारोबारियों की जानकारी देते हैं और रंगदारी के पैसे के ट्रांजेक्शन में भी मददगार हैं। उन सबका पता लगाया जा रहा है। उनसे दुबई जाने का मकसद पूछा जाएगा।
धनबाद। धनबाद की एक महिला थानेदार भोजपुरी गाने पर ठुमके लगाने के कारण सस्पेंड कर दी गई है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है। वायरल वीडियो में राजगंज थाना प्रभारी अलीशा कुमारी कुछ महिलाओं के साथ डांस करती नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो चैती दुर्गा पूजा के दौरान आयोजित डांडिया नाइट कार्यक्रम का है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां शामिल थीं, उसी दौरान थाना प्रभारी भी वहां मौजूद थीं और मंच के पास डांस करती दिखीं। भोजपुरी गाने पर थिरकती दिखीं थाना प्रभारी वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अलीशा कुमारी लोकप्रिय भोजपुरी गाने “पलंग सागवान” पर महिलाओं के साथ डांस कर रही हैं। उनके साथ एक अन्य महिला पुलिस पदाधिकारी भी नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आते ही यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर बंटी राय इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोग इसे एक सामान्य सामाजिक कार्यक्रम में भागीदारी मान रहे हैं और कह रहे हैं कि पुलिसकर्मी भी समाज का हिस्सा हैं। वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे अनुशासनहीनता बता रहे हैं। उनका कहना है कि वर्दी में इस तरह का व्यवहार पुलिस की गरिमा के खिलाफ है। नियमों को लेकर उठे सवाल मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यह बात सामने आई कि पुलिस नियमावली में वर्दी में इस तरह की गतिविधियों को उचित नहीं माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि इससे वर्दी की मर्यादा प्रभावित होती है और गलत संदेश जाता है। इसी के बाद यह मामला सिर्फ वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया। एसएसपी ने लिया त्वरित एक्शन वीडियो वायरल होने के बाद धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने थाना प्रभारी अलीशा कुमारी को लाइन क्लोज कर दिया है और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। एसएसपी ने साफ कहा है कि अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है। यह देखना अहम होगा कि इसे महज एक सामाजिक कार्यक्रम में भागीदारी माना जाएगा या नियमों के उल्लंघन के तौर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
धनबाद। झारखंड का कोयला शहर धनबाद अब तेजी से प्रदूषण की राजधानी बनता जा रहा है। हाल ही में आई वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में धनबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 124 दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे ज्यादा है। वहीं, पीएम2.5 का स्तर 44.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानक से करीब 9 गुना अधिक है। 12 इलाकों में हालात बेहद खराब रिपोर्ट में धनबाद जिले के 12 प्रमुख क्षेत्रों झरिया, जोड़ापोखर, जामाडोबा, निरसा, गोविंदपुर, कतरास, सिजुआ और अन्य खनन प्रभावित इलाकों को गंभीर प्रदूषण श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में कोयला खनन, ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों के कारण हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। क्यों बिगड़ रही है हवा? विशेषज्ञों के अनुसार, धनबाद में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं: * कोयला खनन और परिवहन से उड़ने वाली धूल * वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या * निर्माण कार्य और सड़कों की धूल * औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं * बढ़ती आबादी और ऊर्जा खपत * स्वास्थ्य पर गंभीर असर डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ता पीएम2.5 स्तर लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। * अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस के मरीज बढ़ रहे हैं * बच्चों और बुजुर्गों की फेफड़ों की क्षमता प्रभावित हो रही है * दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है * लंबे समय में जीवन प्रत्याशा पर असर पड़ सकता है झारखंड के अन्य प्रदूषित शहर * धनबाद – 124 * पाकुड़ – 116 * साहिबगंज – 116 * चाईबासा – 114 * चांडिल – 114 जहां अब भी राहत नेतरहाट, गढ़वा, लातेहार और मेदिनीनगर जैसे इलाकों में हवा अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई है। यहां कम औद्योगिक गतिविधियां और ज्यादा हरित क्षेत्र होने से प्रदूषण कम है। सुधार के लिए क्या जरूरी? * खनन क्षेत्रों में डस्ट कंट्रोल सिस्टम मजबूत करना * सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव * पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ई-वाहनों को बढ़ावा * पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाना * उद्योगों के उत्सर्जन पर सख्त निगरानी
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले में हालिया ओलावृष्टि और भारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। विशेषकर सिंदरी विधानसभा के बलियापुर प्रखंड में खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हरी-भरी फसलें बनीं बर्बादी का मंजर कुछ दिन पहले तक जिन खेतों में भिंडी, करेला, बरबट्टी (लोबिया) और खीरे की फसलें लहलहा रही थीं, अब वहां सिर्फ टूटे पौधे और कीचड़ का दृश्य नजर आ रहा है। ओलावृष्टि की मार से फसलें जमीन पर गिरकर नष्ट हो गईं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पलभर में खत्म हो गई। किसानों का दर्द: “सब कुछ खत्म हो गया” स्थानीय किसान सुरेश महतो बताते हैं कि उनकी पूरी आजीविका इसी खेती पर निर्भर थी, लेकिन अब सब कुछ बर्बाद हो गया है। वहीं किसान लक्ष्मी महतो के अनुसार उन्हें करीब 15 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। किसान तपन महतो ने कहा कि न केवल सब्जियां, बल्कि सरसों की फसल भी नष्ट हो गई, जिससे सालभर की जरूरतें प्रभावित होंगी। आर्थिक संकट और बढ़ी चिंता पहले से ही बढ़ती लागत और महंगाई से जूझ रहे किसानों के लिए यह प्राकृतिक आपदा किसी बड़े झटके से कम नहीं है। फसल बर्बादी के कारण अब उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और भविष्य की चिंता गहरा गई है। सरकार से मदद की उम्मीद इस आपदा के बाद किसान अब सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। वे मुआवजे और राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं, ताकि फिर से खेती शुरू कर सकें। फिलहाल बलियापुर के खेतों में सिर्फ मिट्टी ही नहीं, बल्कि किसानों की टूटी उम्मीदें भी बिखरी पड़ी हैं।
धनबाद। धनबाद के भागाबांध इलाके में हुए चर्चित रेस्टोरेंट फायरिंग केस में पुलिस पूछताछ के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। गैंगस्टर प्रिंस खान के गुर्गों ने कबूल किया है कि उनका इरादा केवल डराने का था, लेकिन घटना में रेस्टोरेंट कर्मी की मौत हो गई। डराने की थी योजना, लेकिन चली जानलेवा गोली गिरफ्तार आरोपी अमन सिंह उर्फ कुबेर और अफजल अमन ने बताया कि ‘द टीटोज फैमिली रेस्टोरेंट’ के संचालक को धमकाने के लिए गोलीबारी की साजिश रची गई थी। कुबेर ने यह भी स्वीकार किया कि उसने प्रिंस खान के निर्देश पर अफजल को पैसे दिए थे। अफजल ने वासेपुर इलाके से हथियार और शूटर की व्यवस्था की, लेकिन शूटर ने डराने के बजाय सीधे गोली मार दी, जिससे कर्मचारी मनीष की मौत हो गई। कम उम्र के युवाओं को जोड़ रहा था गिरोह पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह में कम उम्र के युवकों को शामिल किया जा रहा था। उन्हें पैसे और कमीशन का लालच देकर आपराधिक गतिविधियों में लगाया जाता था। गिरोह के हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती थीं। मुठभेड़ के बाद हुई गिरफ्तारी यह घटना 7 मार्च को रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के कुटियातू स्थित रेस्टोरेंट में हुई थी। इसके बाद पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही थी। 16 मार्च को धनबाद में रांची पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच जारी पुलिस को आरोपियों से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य अपराधियों की तलाश जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
सदियों पुरानी आस्था, हर साल भव्य आयोजन धनबाद: भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी को लेकर पूरे देश में उत्साह देखने को मिलता है, लेकिन धनबाद के चिटाही धाम स्थित रामराज मंदिर की अलग ही पहचान है। यहां बीते करीब 100 वर्षों से रामनवमी का पर्व बेहद भव्य और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है। यह मंदिर आज श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ पूजा का स्थल नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक बन चुका है। पेड़ के नीचे शुरू हुआ था मंदिर, आज बन गया भव्य धाम चिटाही धाम के रामराज मंदिर का इतिहास काफी पुराना और रोचक है। शुरुआत में यहां एक पेड़ के नीचे भगवान राम की पूजा की जाती थी। धीरे-धीरे लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई और यह स्थान एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया। बाद में बाघमारा क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधि ढुल्लू महतो के प्रयासों से मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा वर्ष 2019 में हुई, जिसके बाद इसकी प्रसिद्धि और अधिक बढ़ गई। रामनवमी पर होता है खास शृंगार और पूजा-अर्चना रामनवमी के दिन मंदिर में भगवान श्रीराम और माता सीता का विशेष शृंगार किया जाता है। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक तरीके से सजाया जाता है, जिससे माहौल भक्तिमय हो उठता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। दूर-दराज से आने वाले भक्त भी इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। ध्वज परिवर्तन और महाभंडारा है खास परंपरा इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा ध्वज परिवर्तन है। जहां अन्य जगहों पर रामनवमी के दिन जुलूस या अखाड़ा निकाला जाता है, वहीं यहां विशाल राम ध्वज को बदला जाता है, जो आस्था का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में भव्य महाभंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं और सेवा भाव से जुड़ते हैं। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से बढ़ती है भव्यता रामनवमी के इस आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी विशेष भागीदारी होती है। धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो और बाघमारा के विधायक शत्रुघ्न महतो मुख्य यजमान के रूप में शामिल होते हैं। उनकी उपस्थिति में पूजा-अर्चना संपन्न होती है, जिससे आयोजन को और अधिक भव्य स्वरूप मिलता है। हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या चिटाही धाम का रामराज मंदिर अब धनबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर साल रामनवमी के मौके पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बढ़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि मंदिर की धार्मिक महत्ता और लोगों की आस्था दिन-ब-दिन मजबूत होती जा रही है।
मुठभेड़ के बाद पुलिस का एक्शन, आरोपियों को रांची लाया गया धनबाद: झारखंड में अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गुर्गों को धनबाद से रांची शिफ्ट कर दिया गया है। ये सभी आरोपी रांची एयरपोर्ट स्थित एक रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में शामिल बताए जा रहे हैं। रांची एयरपोर्ट थाना की पुलिस टीम रविवार को धनबाद पहुंची और जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दो आरोपियों को अपने साथ रांची ले गई। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भागाबांध में हुई थी पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ जानकारी के मुताबिक, 16 मार्च को धनबाद के भागाबांध इलाके में पुलिस और प्रिंस खान गिरोह के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस एनकाउंटर में तीन अपराधी घायल हो गए थे। घायलों में पलामू के चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ मनीष उर्फ कुबेर और वासेपुर के लाला टोला निवासी अफजल अमन उर्फ बाबर उर्फ राजा खान शामिल हैं। इनके अलावा विक्की डोम भी इस मुठभेड़ में घायल हुआ था। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही रांची भेजे गए आरोपी मुठभेड़ के बाद सभी घायलों को इलाज के लिए धनबाद के SNMMCH अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज पूरा होने के बाद जैसे ही उन्हें छुट्टी मिली, रांची पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और रांची शिफ्ट कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से रांची में पूछताछ की जाएगी, जिससे मामले के कई अहम खुलासे हो सकते हैं। एक आरोपी पहले ही भेजा जा चुका है जेल इस केस में घायल तीसरे आरोपी विक्की डोम को धनबाद पुलिस पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज चुकी है। वहीं बाकी आरोपियों को अब रांची लाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। रेस्टोरेंट में फायरिंग और हत्या का गंभीर आरोप पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों पर रांची एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट में फायरिंग करने और एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मुठभेड़ के जरिए इन्हें पकड़ लिया था। अब इस पूरे मामले में पुलिस अन्य फरार अपराधियों की भी तलाश कर रही है। अपराधियों पर सख्ती जारी, पुलिस का अभियान तेज झारखंड पुलिस लगातार संगठित अपराध के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। इस कार्रवाई को भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
धनबाद। सरयू राय ने असम विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान देते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। धनबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि असम के आदिवासी अब पूरी तरह स्थानीय माहौल में रच-बस चुके हैं और वे बाहरी राजनीति से ज्यादा स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। “बाहरी हस्तक्षेप को नहीं मिलता ज्यादा महत्व” राय ने कहा कि भले ही असम में कई आदिवासी झारखंड और ओडिशा से गए हों, लेकिन अब वे स्थानीय नेतृत्व और मुद्दों को ही अहम मानते हैं। ऐसे में JMM की सक्रियता वहां कितना असर डालेगी, इस पर उन्होंने संदेह जताया। हेमंत सोरेन पर टिप्पणी उन्होंने हेमंत सोरेन के असम दौरे को “बदले की राजनीति” का हिस्सा बताया। उनका कहना था कि असम के मुख्यमंत्री पहले झारखंड आ चुके हैं, ऐसे में यह राजनीतिक प्रतिक्रिया हो सकती है। कांग्रेस-JMM गठबंधन पर तंज संभावित गठबंधन को लेकर राय ने कांग्रेस पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस “हवा का रुख देखकर” फैसले लेने वाली पार्टी नहीं है। राजनीतिक बहस तेज हालांकि, राय ने यह भी माना कि हेमंत सोरेन की पूरी तरह आलोचना करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, JMM असम में आदिवासी मुद्दों को उठाकर अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस बयान के बाद असम चुनाव में JMM की रणनीति और विपक्षी गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
राजगंज थाने से सामने आया हैरान करने वाला मामला धनबाद जिले के राजगंज थाना से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सड़क हादसे के बाद जब्त की गई एक बाइक रहस्यमय तरीके से थाना परिसर से गायब हो गई। जब मालिक आठ महीने बाद अपनी बाइक लेने पहुंचे, तो उन्हें यह जानकारी मिली, जिससे वे हैरान रह गए। पीड़ित ने लगाए गंभीर आरोप पीड़ित बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के विराजपुर मंझीलाडीह निवासी मटन प्रसाद महतो हैं, जो डीजीएमएस में निजी सहायक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने के कर्मियों ने न सिर्फ बाइक गायब होने पर स्पष्ट जवाब देने से बचने की कोशिश की, बल्कि उन्हें दूसरी बाइक लेने का दबाव भी बनाया गया। ग्रामीण एसपी से की शिकायत इस मामले को लेकर मटन प्रसाद महतो ने ग्रामीण एसपी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाइक पुलिस की निगरानी में थी, ऐसे में उसके गायब होने की जिम्मेदारी भी पुलिस की ही बनती है। कैसे हुआ पूरा मामला? पीड़ित के अनुसार, 21 जुलाई 2025 को वह ड्यूटी से लौटते समय एक सड़क हादसे का शिकार हो गए। खरनी गोड़ के पास एक ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उनकी बाइक के साथ ट्रैक्टर को भी जब्त कर थाने ले आई। इस संबंध में राजगंज थाना में केस दर्ज किया गया था, जो उनके भतीजे मिथुन कुमार साव के बयान पर आधारित था। इलाज के बाद खुला मामला घटना के बाद मटन प्रसाद महतो का इलाज धनबाद से लेकर कोलकाता तक चला। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने अपने भतीजे को थाने भेजकर बाइक लाने को कहा। पहले तो पुलिस ने बाइक होने से ही इनकार कर दिया। बाद में जब परिवार ने दबाव बनाया, तो कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने दूसरी बाइक लेने का सुझाव दिया, जिसे पीड़ित ने सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस पर उठे सवाल इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाने में जब्त वाहन का गायब होना और फिर उसकी भरपाई के लिए दूसरी बाइक लेने का कथित दबाव बनाना, व्यवस्था में बड़ी लापरवाही या गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले से प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। लंबे समय तक जमीन विवाद में रिपोर्ट नहीं देने पर उपभोक्ता फोरम ने अंचल अधिकारी (सीओ) की सैलरी पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद जिला प्रशासन में हलचल तेज हो गई है और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। बार-बार निर्देश के बावजूद नहीं दी गई रिपोर्ट उपभोक्ता फोरम की सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि संबंधित अंचल अधिकारी को कई बार जमीन की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए थे। फोरम यह जानना चाहता था कि संबंधित जमीन रैयती है या गैर आबाद श्रेणी में आती है। इसके बावजूद तय समयसीमा में रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए फोरम ने सख्त रुख अपनाया और सीओ के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दे दिया। जिला प्रशासन को भी दिए गए निर्देश फोरम ने अपने आदेश में जिला प्रशासन को भी स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि इस आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए। आदेश की प्रति उपायुक्त और संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है। यह कदम साफ संकेत देता है कि अब प्रशासनिक लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। क्या है पूरा मामला यह विवाद धनबाद के भूली क्षेत्र की रहने वाली इंदिरा कुमारी की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 2018 में लुबी सर्कुलर रोड स्थित SSLNT कॉलेज के पीछे एक बिल्डर से करीब 1400 वर्ग फीट का फ्लैट बुक कराया था। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद बिल्डर ने समय पर फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं कराई। लगातार देरी के कारण शिकायतकर्ता को जमीन की वैधता पर संदेह होने लगा। जमीन की वैधता पर उठे गंभीर सवाल शिकायतकर्ता ने आशंका जताई कि संबंधित जमीन कहीं छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के दायरे में तो नहीं आती, या फिर यह गैर आबाद जमीन तो नहीं है। इसी संदेह को दूर करने के लिए उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में बिल्डर कंपनी और अन्य संबंधित पक्षों को भी शामिल किया गया है। फोरम ने मांगी थी स्पष्ट स्थिति सुनवाई के दौरान फोरम ने अंचल कार्यालय से जमीन की वास्तविक स्थिति पर स्पष्ट रिपोर्ट मांगी थी, जो इस मामले के समाधान के लिए बेहद जरूरी थी। लेकिन समय पर जानकारी नहीं मिलने से न सिर्फ शिकायतकर्ता को परेशानी हुई, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। लापरवाही पर सख्त संदेश उपभोक्ता फोरम का यह फैसला प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह साफ कर दिया गया है कि आम लोगों से जुड़े मामलों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खासकर जमीन और संपत्ति जैसे संवेदनशील मामलों में अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। पीड़ित को जल्द न्याय की उम्मीद इस सख्त कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की सुनवाई अब तेज होगी और शिकायतकर्ता को जल्द न्याय मिल सकेगा। कुल मिलाकर यह मामला सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है, जिसमें उपभोक्ता फोरम ने सख्त रुख अपनाकर एक मिसाल पेश की है।
धनबाद: झारखंड के धनबाद में हाल ही में हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद वासेपुर गैंग के नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पूछताछ में गिरफ्तार अपराधियों ने बताया कि कुख्यात गैंगस्टर Prince Khan इस समय पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहां से अपने गिरोह का संचालन कर रहा है। पाकिस्तान में बदली पहचान, आतंकियों से संपर्क की आशंका पुलिस सूत्रों के अनुसार, Prince Khan ने अपना नाम बदलकर “फैज” रख लिया है और वह पाकिस्तान के बहावलपुर में रह रहा है। जांच में सामने आया है कि उसे आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed से समर्थन मिलने की आशंका है। गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल से एक पाकिस्तानी पहचान पत्र भी मिला है, जिसमें उसका नाम “फैज खान” दर्ज है और पता बहावलपुर का बताया गया है। यह इलाका लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है। क्रिप्टो के जरिए हर महीने 1 करोड़ की वसूली पूछताछ में बड़ा खुलासा यह हुआ कि गैंग द्वारा वसूली गई रकम का करीब 1 करोड़ रुपये हर महीने Prince Khan तक पहुंचाया जाता है। यह पैसा सीधे बैंकिंग सिस्टम से नहीं बल्कि क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ट्रांसफर किया जाता है। पुलिस जांच में 65 संदिग्ध बैंक खातों का भी पता चला है, जिनके जरिए इस अवैध नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कुछ खातों से जेल में बंद अपराधी Sujit Sinha के रिश्तेदारों तक भी पैसे भेजे जाने की जानकारी मिली है। गिरोह का ‘मैनेजर’ बना कुबेर पलामू के चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ कुबेर इस पूरे नेटवर्क का अहम कड़ी बताया जा रहा है। वह Sujit Sinha और Prince Khan के बीच मीडिएटर के रूप में काम करता था। कुबेर ही व्यापारियों की जानकारी जुटाता, धमकी भरे संदेश तैयार करता और ऑडियो क्लिप एडिट कर भेजता था। साथ ही रंगदारी से मिली रकम का पूरा हिसाब-किताब भी वही संभालता था। रांची तक फैला नेटवर्क, कई लोग रडार पर जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने धनबाद और बोकारो के अलावा राजधानी रांची में भी अपना नेटवर्क फैला लिया था। रांची में स्थानीय स्तर पर कुछ लोग व्यापारियों की जानकारी जुटाने और वसूली का दबाव बनाने का काम कर रहे थे। पुलिस अब इन संदिग्धों की तलाश में जुट गई है और उनके खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा किए जा रहे हैं।
धनबाद। झारखंड के धनबाद में पुलिस और प्रिंस खान के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार अपराधी अमन सिंह उर्फ मनीष व कुबेर ने प्रिंस खान के कई राज पुलिस के समक्ष खोले हैं। दोनों ने पुलिस को जो कुछ बताया है, उसने झारखंड पुलिस की नींद उड़ा दी है। पूछताछ में इन दोनों ने पुलिस को बताया है कि प्रिंस खान फिलहाल अपना नाम बदलकर फैज के नाम से पाकिस्तान के बहावलपुर में शरण ले रखा है। उसे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का समर्थन प्राप्त है। पुलिस को प्रिंस खान का एक आईडी कार्ड भी मिला कुबेर के मोबाइल से पुलिस को प्रिंस खान का एक आईडी कार्ड भी मिला है। जिसमे पाकिस्तान नेशनल आईडी कार्ड में प्रिंस ने अपना नाम बदलकर फैज खान रखा है। आईडी कार्ड में बहावलपुर का एड्रेस दर्ज है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान का बहावलपुर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ माना जाता है। ऐसे में पुलिस का अनुमान है कि प्रिंस खान को पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद का समर्थन मिल चुका है। रंगदारी का पैसा आतंकी के पास भी प्रिंस पहुंचा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रिंस के पास पहुंचता है प्रतिमाह एक करोड़ पुलिस के समक्ष कुबेर ने स्वीकार किया है कि गैंग के सरगना प्रिंस खान के पास प्रत्येक महीने एक करोड़ रुपया भेजा जाता है। गिरोह के सदस्य क्रिप्टोकरेंसी से यह पैसा प्रिंस के खाते में भेजते हैं। पुलिस जांच में वैसे 65 बैंक खातों का ट्रांजेक्शन मिला है, जिसके माध्यम से प्रिंस खान को पैसा भेजा जाता था। इनमें कई खातों से जेल में बंद सुजीत सिन्हा के रिश्तेदार को भी पैसा ट्रांसफर किया गया है। इन संदिग्ध खाता धारकों के बारे में फिलहाल पुलिस जानकारी जुटाकर पूछताछ करने का प्रयास कर रही है। कुबेर है प्रिंस और सुजीत के बीच की कड़ी पलामू स्थित चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ कुबेर दोनों गिरोह के बीच में कड़ी का काम कर रहा था। सुजीत सिन्हा के कहने पर कुबेर ही राज्य के अलग-अलग जिला में रहने वाले सक्रिए सदस्यों की मदद से कारोबारी का पूरा डिटेल के अलावा मोबाइल नंबर मंगाता था और प्रिंस खान को उपलब्ध कराता था। इसके बाद धमकी भरे मैसेज का स्क्रिप्ट भी कुबेर ही तैयार करता था। प्रिंस खान का धमकी भरे लहजे में ऑडियो रिकार्ड कर कुबेर ही एडिट करते हुए फाइनल करता था, जिसके बाद उसे कारोबारी के पास भेजा जाता था। कुबेर रखता है ट्रांजेक्शन का हिसाब रंगदारी से मिले पैसे का ट्रांजेक्शन कहां और कितना हुआ है, इसकी पूरी जानकारी कुबेर ही रखता था। सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान के बीच वह मीडिएटर का काम करता था। वासेपुर का फहीम खान के साले टुन्ना खान का बेटा अफजल अमन भी शूटर को हथियार उपलब्ध कराता था। प्रिंस गैंग से जुड़े कई सफेदपोश पुलिस पूछताछ में कुबेर ने स्वीकार किया है कि वह पैसे की लेन-देन का हिसाब रखता था। कुबेर ने यह भी बताया है कि धनबाद और बोकारो के बाद राजधानी रांची में भी गिरोह ने अपना प्रभाव जमा लिया था। रांची में गिरोह का पूरा काम नामकुम निवासी कौशल पांडे और लालपुर स्थित नगड़ा टोली में रहने वाला राणा राहुल सिंह देखता है। कुबेर ने यह भी बताया है कि शहर के प्रतिष्ठित कारोबारियों की जानकारी जुटाकर प्रिंस खान को उसका नाम और नंबर उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी कौशल के पास है जबकि रंगदारी का पैसा नहीं मिलने पर हथियार और शूटर उपलब्ध कराने का जिम्मा लालपुर का सफेदपोश राणा को दिया गया है। दोनों पहले सुजीत सिन्हा के लिए भी काम करते थे। दोनों ने प्रिंस खान के लिए कई काम भी किये हैं। पुलिस ने अब इन दोनों की तलाश शुरू कर दी है। इन दोनों के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
शपथ ग्रहण के साथ नई सरकार की शुरुआत झारखंड के धनबाद में बुधवार को नगर निगम की नई सरकार का गठन हो गया। धनबाद नगर निगम के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह ने 18 मार्च को पद और गोपनीयता की शपथ ली। उपायुक्त ने उन्हें पदभार दिलाया। उनके साथ ही 55 वार्ड पार्षदों ने भी शपथ ग्रहण किया। आज ही मिलेगा डिप्टी मेयर, मुकाबला दिलचस्प नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर भी हलचल तेज है। आज ही 55 पार्षदों में से किसी एक को डिप्टी मेयर चुना जाएगा। अगर एक से अधिक उम्मीदवार सामने आते हैं तो चुनाव कराया जाएगा, अन्यथा निर्विरोध चयन की घोषणा होगी। देर रात तक चली लॉबिंग, चाय पार्टी में जुटे पार्षद डिप्टी मेयर पद को लेकर मंगलवार देर रात तक जोरदार लॉबिंग देखने को मिली। मेयर संजीव सिंह द्वारा आयोजित चाय पार्टी में 40 से अधिक पार्षदों के शामिल होने का दावा किया गया। इस दौरान उन्होंने सभी को एकजुट रहने और शहर के विकास के लिए साथ काम करने की अपील की। पिछले एक सप्ताह से इस पद को लेकर लगातार खींचतान चल रही थी, जो अब दो प्रमुख उम्मीदवारों तक सिमट गई है। “10 साल से रुके काम पूरे करना पहली प्राथमिकता” शपथ लेने के बाद मेयर संजीव सिंह ने शहरवासियों को बड़ा भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में जो विकास कार्य अधूरे रह गए हैं, उन्हें पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने वादा किया कि आने वाले पांच वर्षों में धनबाद की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी और शहर को नई पहचान मिलेगी। चिरकुंडा में भी नई शुरुआत वहीं दूसरी ओर चिरकुंडा नगर परिषद में भी नई अध्यक्ष ने पदभार संभाल लिया है। सुनीता देवी को उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने शपथ दिलाई। इस मौके पर परिषद के सभी सदस्य और अधिकारी मौजूद रहे। विकास को लेकर बढ़ी उम्मीदें धनबाद और चिरकुंडा में नई नगर सरकार बनने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लंबे समय से रुके विकास कार्यों के अब तेज़ी से पूरे होने की संभावना जताई जा रही है। शहरवासियों को उम्मीद है कि नई टीम बेहतर बुनियादी सुविधाएं और साफ-सुथरा प्रशासन देगी। धनबाद में नई नेतृत्व टीम के साथ विकास की नई उम्मीद जगी है, अब नजर इस बात पर रहेगी कि वादों को जमीन पर कितनी तेजी से उतारा जाता है।
धनबाद। धनबाद के डिमना स्थित MGM अस्पताल का कोल्हान आयुक्त रविरंजन कुमार विक्रम ने औचक निरीक्षण किया और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ओपीडी पंजीकरण, डॉक्टरों की उपस्थिति, सफाई और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का बारीकी से मूल्यांकन किया और मरीजों व उनके परिजनों से बातचीत कर फीडबैक लिया। जहां खामियां मिलीं, वहां उन्होंने तुरंत सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण का अहम फोकस निरीक्षण में सबसे अहम फोकस अस्पताल की ऑक्सीजन आपूर्ति पर रहा। आयुक्त ने तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (LMO) और PSA प्लांट को 31 मार्च 2026 तक चालू करने का अल्टीमेटम दिया और वार्ड तथा ICU में ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को कई अन्य सुधारों के निर्देश दिए, जिनमें खराब एम्बुलेंस की शीघ्र मरम्मत, सभी ICU वार्डों का पूरी तरह संचालन, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लंबित मामलों का समय पर निपटान, वरिष्ठ चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति, ओपीडी सेवाओं को मजबूत करना और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना शामिल है। आयुक्त ने यह भी कहा कि अप्रैल तक अमृत फार्मेसी और जन औषधि केंद्र शुरू किए जाएं और आयुष्मान भारत योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। अस्पताल में पेयजल संकट के लिए करवाई करने के निर्देश अस्पताल में पेयजल संकट के समाधान के लिए मानगो नगर निगम को 20 अप्रैल तक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निष्पादन और पैथोलॉजी जांच व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता बताई गई। अनटाइड फंड का सही और समय पर उपयोग भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। आयुक्त ने कहा निरीक्षण के दौरान उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, जिला परिवहन पदाधिकारी धनंजय, अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा, डॉ. जुझार माझी और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। आयुक्त ने साफ कहा कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी व्यवस्थाओं में तुरंत सुधार दिखना चाहिए। यह कदम अस्पताल की सेवाओं में सुधार लाने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
गिरिडीह और हजारीबाग में होनी थी सप्लाई, बोकारो में अवैध गैस सिलेंडर भंडारण का भी खुलासा धनबाद: झारखंड के धनबाद में अवैध शराब के कारोबार पर प्रशासन ने बड़ा प्रहार किया है। उत्पाद विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए करीब 24 हजार लीटर कच्चा स्पिरिट से भरे एक टैंकर को जब्त किया है। यह स्पिरिट को नकली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। नेशनल हाईवे पर पकड़ा गया संदिग्ध टैंकर यह कार्रवाई तोपचांची थाना क्षेत्र के कोटाल अड्डा स्थित नेशनल हाईवे के पास की गई। टीम ने जीओ पेट्रोल पंप के समीप नागालैंड नंबर (NL-01-L-1775) वाले टैंकर को रोककर जांच की, जिसमें भारी मात्रा में कच्चा स्पिरिट बरामद हुआ। गिरिडीह और हजारीबाग में होनी थी सप्लाई पूछताछ के दौरान टैंकर चालक ने खुलासा किया कि यह स्पिरिट गिरिडीह और हजारीबाग में सक्रिय अवैध शराब निर्माताओं को पहुंचाई जानी थी। इस जानकारी के बाद विभाग ने तुरंत टैंकर को जब्त कर लिया और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी। चालक गिरफ्तार, भेजा गया जेल उत्पाद विभाग ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध धंधे से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी। बोकारो में अवैध गैस सिलेंडर भंडारण का भंडाफोड़ इधर बोकारो जिले में भी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। माराफारी थाना क्षेत्र के बांसगोड़ा इलाके में एक दुकान पर छापेमारी कर अवैध रूप से रखे गए गैस सिलेंडरों को जब्त किया गया। यह कार्रवाई जिला आपूर्ति पदाधिकारी शालिनी खलखो के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने की। जांच के दौरान दुकान के अंदर छुपाकर रखे गए 8 भरे हुए एचपी गैस सिलेंडर और 19 खाली इंडेन सिलेंडर बरामद किए गए। अभियान तेज, अवैध कारोबारियों में हड़कंप प्रशासन की इन लगातार कार्रवाइयों से अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि नकली शराब और अवैध गैस भंडारण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस कार्रवाई को झारखंड में अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस और उत्पाद विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में जुटे हैं।
गुप्त सूचना पर पुलिस का ऑपरेशन झारखंड के धनबाद में पुलिस ने कुख्यात अपराधी प्रिंस खान गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके तीन गुर्गों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई भागाबांध ओपी क्षेत्र में की गई, जहां पुलिस और अपराधियों के बीच हुई गोलीबारी में तीनों बदमाश घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि प्रिंस खान गिरोह के कुछ सदस्य इलाके में मौजूद हैं और किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही धनबाद पुलिस ने इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू किया और संदिग्धों की घेराबंदी कर दी। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने की फायरिंग पुलिस की घेराबंदी के दौरान जब संदिग्ध अपराधियों ने पुलिस को अपने करीब आते देखा, तो उन्होंने मौके से भागने की कोशिश की। इसी दौरान अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस कार्रवाई में गिरोह के तीन बदमाश घायल हो गए। पुलिस ने तुरंत उन्हें पकड़कर अस्पताल पहुंचाया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। दो को गोली लगी, एक का पैर टूटा पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के दौरान दो अपराधियों को गोली लगी, जबकि तीसरा बदमाश भागने के दौरान घायल हो गया। बताया जा रहा है कि एक आरोपी छत से कूदकर भागने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान उसका पैर टूट गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घायल आरोपियों की पहचान पुलिस ने मुठभेड़ में घायल हुए तीनों अपराधियों की पहचान कर ली है। इनमें अमन सिंह उर्फ कुबेर (पलामू निवासी) विक्की डोम (धनबाद निवासी) अफजल उर्फ अमन (वासेपुर निवासी) शामिल हैं। इनमें अमन सिंह और विक्की डोम को गोली लगी है, जबकि अफजल उर्फ अमन का पैर गिरने से टूट गया। घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इलाके की तलाशी ली। इस दौरान आरोपियों के पास से हथियार और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन हथियारों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल पहले किन-किन अपराधों में किया गया था। प्रिंस खान गिरोह से जुड़े हैं आरोपी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी धनबाद के वासेपुर इलाके के फरार अपराधी प्रिंस खान के करीबी बताए जा रहे हैं। प्रिंस खान लंबे समय से फरार है और उस पर धनबाद व आसपास के क्षेत्रों में रंगदारी, धमकी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। गिरोह के नेटवर्क की तलाश में पुलिस फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से गिरोह के नेटवर्क और अन्य सदस्यों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस ने गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
नगर निगम में बढ़ी राजनीतिक हलचल झारखंड के Dhanbad नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव के बाद अब उप महापौर की कुर्सी को लेकर पार्षदों के बीच जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की राजनीति शुरू हो गई है। शुक्रवार को महापौर Sanjeev Singh के सिंह मेंशन स्थित आवास पर आयोजित एक अभिनंदन समारोह में 40 से अधिक पार्षदों की मौजूदगी ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया। अरुण चौहान के नाम का प्रस्ताव समारोह के दौरान कई पार्षदों ने डिप्टी मेयर पद के लिए Arun Chauhan का नाम प्रस्तावित किया। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को कार्यक्रम में मौजूद कई पार्षदों का समर्थन भी मिला। मेयर संजीव सिंह ने सभी पार्षदों का स्वागत करते हुए उन्हें चुनाव में जीत की बधाई दी और शहर के विकास कार्यों में मिलकर काम करने की अपील की। मेयर ने दिया भरोसा मेयर संजीव सिंह ने पार्षदों को आश्वस्त किया कि वे उनकी भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्षद जिस भी उम्मीदवार को डिप्टी मेयर चुनेंगे, उसे उनका पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने पार्षदों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शहर के विकास के लिए एकजुट होकर काम करें, ताकि धनबाद को नई दिशा और गति मिल सके। महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी गरमाया डिप्टी मेयर की दौड़ में अब महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी तेजी से उभर रहा है। इसी कड़ी में Menka Singh भी मैदान में उतर आई हैं। हाल ही में उन्होंने पार्षदों के लिए एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया था, जिसमें उन्होंने ‘आधी आबादी’ के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए समर्थन का दावा किया। जीत के लिए 28 पार्षदों का समर्थन जरूरी डिप्टी मेयर बनने के लिए कम से कम 28 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्षदों की गोलबंदी और तेज होगी और यह चुनाव पूरी तरह ‘नंबर गेम’ पर निर्भर करेगा। आगे और बढ़ेगी सियासी गर्मी फिलहाल नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर माहौल गर्म है। अरुण चौहान और मेनका सिंह के बीच मुकाबला रोचक होता जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्षदों का बहुमत किसके पक्ष में जाता है और आखिरकार उप महापौर की कुर्सी किसे मिलती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।