धनबाद। धनबाद में आजसू नेताओं पर हमला हुआ है। लोयाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत बांसजोड़ा में आजसू नेताओं की बैठक के दौरान अचानक हुए हमले से इलाके में सनसनी फैल गई। बैठक के बीच अज्ञात अपराधियों ने हमला बोल दिया जिसके बाद वहां अफरा-तफरी और भगदड़ की स्थिति बन गई। मिली जानकरी के अनुसार घटना के दौरान फायरिंग भी हुई जिसमें एक युवक घायल हो गया, जबकि कई कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। बैठक के दौरान हुआ हमला हमले में आजसू छात्र नेता हीरालाल महतो समेत कई समर्थकों को चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में हाल के दिनों में मिल रही धमकियों और इलाके में कथित कोयला कारोबार से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान हमला कर दिया गया। फायरिंग में घायल युवक की पहचान किशन रजवार के रूप में हुई है। उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और लोगों में दहशत देखी जा रही है। पुलिस कर रही मामले की जांच लोयाबाद थाना प्रभारी टीकू प्रसाद ने फायरिंग की घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस मामले की जांच में जुटी है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया गया। ग्रामीण एसपी ने कहा कि हमले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और घटना के पीछे की वजहों की भी जांच की जा रही है। एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।
धनबाद। धनबाद जिले के रामकनाली ओपी क्षेत्र स्थित केशलपुर में अवैध कोयला खनन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव की मुखिया प्रेमलता कुमारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अवैध खनन स्थलों पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने उन मुहानों को बंद करने की कोशिश की, जहां बोरे में बड़ी मात्रा में कोयला जमा किया गया था। बमबाजी से फैली दहशत ग्रामीणों के विरोध से बौखलाए अवैध कोयला कारोबारियों ने इलाके में दहशत फैलाने के लिए बमबाजी की। इस घटना के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। गुस्साए ग्रामीणों ने कथित तौर पर मजदूरों को ढोने वाली एक ऑटो में तोड़फोड़ भी की। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भू-धंसान और हादसे का डर ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कोयला खनन से उनके गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लगातार जमीन के नीचे से कोयला निकाले जाने के कारण भू-धंसान का खतरा बढ़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सोनारडीह के टंडाबाड़ी जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की। पुलिस और ग्रामीणों के बीच बहस अवैध खनन बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीण रामकनाली ओपी पहुंचे, जहां पुलिस जवानों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हुई। कुछ समय तक ओपी परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। बाद में सूचना मिलने पर ओपी प्रभारी Alisha Kumari मौके पर पहुंचीं और लोगों को शांत कराया। शिकायत के बाद कार्रवाई ग्रामीणों की लिखित शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन ने मामले की जांच और निगरानी बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
धनबाद। धनबाद में रागिनी सिंह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विधायक के समर्थकों और बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने रणधीर वर्मा चौक पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए बीजेपी महानगर जिला अध्यक्ष श्रवण राय का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके इस्तीफे की मांग भी की। प्रदर्शन के दौरान लगे तीखे नारे विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। “श्रवण राय हाय-हाय”, “महिला सम्मान से खिलवाड़ बंद करो” और “रागिनी सिंह के सम्मान में हम सब मैदान में” जैसे नारों से रणधीर वर्मा चौक गूंज उठा। समर्थकों का आरोप है कि श्रवण राय ने सार्वजनिक मंच से महिला जनप्रतिनिधि के खिलाफ अनुचित टिप्पणी की, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आभार यात्रा के दौरान हुई थी कथित टिप्पणी जानकारी के अनुसार, सांसद ढुल्लू महतो की आभार यात्रा के दौरान श्रवण राय ने कथित रूप से रागिनी सिंह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद से ही विधायक समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई थी। मंगलवार को इसी विरोध के तहत बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। महिला नेताओं ने जताई नाराजगी प्रदर्शन में शामिल बीजेपी नेता रश्मि और सुनीता साहू ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रागिनी सिंह लगातार क्षेत्र की समस्याओं को उठाती रही हैं और विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी समर्थकों ने बीजेपी नेतृत्व से मांग की कि श्रवण राय सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस घटना के बाद बीजेपी संगठन के भीतर भी हलचल तेज हो गई है।
धनबाद। धनबाद के केंदुआडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुंडा के गोधर 6 नंबर एरिया स्थित सब स्टेशन के पीछे बीती रात अचानक भू-धसान हुआ। तेज धमाके के साथ जमीन धंस गई और वहां एक बड़ा गोफ बन गया। इस घटना से आसपास के तीन घरों में दरारें आ गईं, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। घर छोड़कर भागे लोग घटना के तुरंत बाद, स्थानीय लोग अपने-अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। लोगों ने बताया कि जमीन धंसने के बाद इलाके से जहरीली गैस का रिसाव भी हो रहा है, जिससे भय का माहौल और बढ़ गया है। पूरा क्षेत्र डेंजर जोन घोषित सूचना मिलने पर केंदुआडीह थाना प्रभारी प्रमोद पाण्डेय मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) प्रबंधन ने इस क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित कर दिया है। नाराज ग्रामीणों ने बीसीसीएल प्रंबधन को कोसा स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना के लिए बीसीसीएल प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि गोधर इलाके में पहले भी कई बार भू-धसान की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। सुरक्षित स्थान पर आवास की मांग पीड़ित शिवनंदन पासवान और पार्वती देवी ने प्रशासन एवं बीसीसीएल से सुरक्षित स्थान पर आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, गोधर इलाके में लगभग 250 परिवार रहते हैं, जिनकी जान लगातार हो रहे भू-धसान से जोखिम में है। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि घटना के काफी देर बाद तक न तो बीसीसीएल प्रबंधन और न ही प्रशासन के अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे बड़े राजदार मेजर उर्फ सैफी की गिरफ्तारी के बाद अब धनबाद पुलिस के रडार पर प्रिंस खान का भाई गोपी है। पुलिस ने प्रिंस खान के पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की तैयारी कर लीहै। पूछताछ में सैफी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि प्रिंस खान अब दुबई छोड़कर पाकिस्तान में आतंकियों की पनाह में पहुंच चुका है। अब उसका भाई गोपी खान दुबई से ही बैठकर इस पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा है। प्रिंस का साला रितिक और आदिल भी इस समय दुबई में ही मौजूद हैं। प्रिंस खान के परिवार और करीबियों पर शिकंजा इस नए इनपुट के बाद पुलिस अब प्रिंस खान के परिवार और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने जा रही है। सैफी ने कबूला है कि रंगदारी से वसूली गई करोड़ों रुपये की रकम को प्रिंस ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया है। इस खुलासे के बाद गैंग को आर्थिक रूप से मदद करने वाले तमाम रिश्तेदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। माता-पिता के बयानों पर पुलिस को शक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बीते दिनों प्रिंस के माता-पिता से करीब 5 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया है कि उनका अपने बेटों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुलिस को उनके इस बयान पर भरोसा नहीं है। पुलिस कमिश्नर और संबंधित एजेंसियां सैफी से मिले इनपुट्स के आधार पर शहर में सक्रिय गैंग के स्लीपर सेल और अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी और कड़ियों का सत्यापन कर रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेगी धनबाद पुलिस पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस खान के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों (जैसे एनआईए या सीबीआई) की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि दुबई में बैठा गोपी खान नेटवर्क को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। गोपी के खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और धमकी देने के 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। गोपी के खिलाफ सख्त इंटरनेशनल एक्शन के लिए धनबाद पुलिस जल्द ही पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजेगी। बंटी और गॉडविन पर पुलिस की नजर हाल के दिनों में कई नए मुकदमों में नामजद होने के बावजूद प्रिंस का भाई बंटी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। पुलिस को अंदेशा है कि वह भी अपने भाइयों की तरह देश छोड़कर भागने की फिराक में हो सकता है, लिहाजा उस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। वहीं, चाईबासा जेल में बंद गॉडविन पर भी कड़ी नजर है, क्योंकि पुलिस को शक है कि वह जेल के भीतर से ही नए अपराधियों को प्रिंस के गैंग में शामिल करने का खेल रच रहा है। जेल प्रशासन से गॉडविन से मिलने आने वाले हर शख्स का ब्योरा मांगा गया है। व्यवसायी ने खुद को गैंग से अलग बताया इधर, वासेपुर-भूली रोड के रहने वाले कबाड़ गोदाम संचालक सैयद मोहम्मद आरिफ खान उर्फ गोल्डन ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से खुद पर लग रहे आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे प्रिंस के गुर्गे नहीं हैं, बल्कि एक साधारण व्यवसायी हैं, जो कड़ी मेहनत से परिवार चलाते हैं। उनका इस आपराधिक सिंडिकेट से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।
धनबाद। धनबाद की धरती के भीतर दबा 'काला सोना' यानी कोयला, जितना कीमती है, उसके ऊपर का इतिहास उतना ही रक्तरंजित रहा है। कोयले ने यहां की मिट्टी को सिर्फ काला ही नहीं, बल्कि रक्तरंजित भी किया है। 'नोटों की चाहत' और वर्चस्व की ऐसी जंग, जिसने कभी लाठियों के दम पर मजदूरों को हांका, तो कभी अत्याधुनिक बंदूकों से समानांतर सरकार चलाई। आज के संगठित अपराध की जड़ें असल में दशकों पुराने उस 'माफिया कल्चर' में छिपी हैं, जहां कोयला मालिकों के मुखौटे ही यहां के असली कानून बन गए थे। वर्चस्व की जंग और माफिया राज का उदय धनबाद में 1960 के समय लठैतों के दौर से संगठित अपराध तक आज भी कायम है। आज कोयला माफिया सरकार और हुक्मरानों के करीबी बनकर उसी तरह कोयले को लूट कर रहे हैं, जैसे कोल इंडिया के अधीन से पहले कंपनी राज में लूट की जाती थी। तरीका एक ही जैसा है, बस आधुनिक युग में कोयले के लुटेरे अपग्रेड हो गए हैं। मौजूदा समय में धनबाद जिले के बाघमारा, निरसा, झरिया, समेत कई इलाकों के अवैध कोयला उत्खनन के लिए हिट लिस्ट में शामिल हैं। यहां कोयला माफियाओं के खिलाफ खड़े होने वाले लोगों का हश्र बहुत बुरा होता है। फिर चाहे कोई जिला प्रशासन या पुलिस के अधिकारी हो या फिर बीसीसीएल के या सीआईएसफ के जवान या अधिकारी। कोयला माफिया इनपर टूट कर पड़ जाते है। जानलेवा हमला किया जाता है। लेकिन, कोयला माफियाओं का कुछ नहीं होता। हां दिखावे के लिए केस दर्ज किया जाता है, लेकिन किसी की कोई गिरफ्तारी नहीं होती। पुलिस-प्रशासन पर कोयला माफियाओं का हमला 2025 में जून-जुलाई के समय बाघमारा में पुलिस के एक डीएसपी पर कोयला माफियाओं ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इससे पहले सीआईएसफ की एक महिला अधिकारी समेत 8 जवानों को कोयला माफियाओं ने जानलेवा हमला कर घायल कर दिया था। अभी हाल ही में झरिया के बोर्रागढ़ में कोयला माफियाओं ने एक एसआई और उनकी पत्नी के साथ बीच सड़क पर मारपीट की। इतना ही नहीं पुलिस अधिकारी की पत्नी के साथ बदसलूकी की गई। पीड़ित महिला इंसाफ के लिए अपने ही डिपार्टमेंट के लोगों पास हाथ जोड़ती रही, लेकिन हुआ बस वही जो वर्षों से होता रहा है बस खानापूर्ति। यह एक उदाहरण है। ऐसी कई घटनाएं है जो धनबाद में लगभग हर दिन घटती है। 1960 के दशक की तरह ही दबदबा बनाए रखने की कोशिश अब सवाल उठता है कि धनबाद में कोयला माफिया इतने बेखौफ क्यों है? कहां से इन्हें इतनी शक्ति मिलती है, जो किसी को भी अपना निशाना बना देते है। इन्हें कानून का डर क्यों नहीं है। बीते मंगलवार को देर रात भी गिरिडीह जिले में बेखौफ कोयला चोरों ने सीसीएल के सुरक्षा गार्ड पर हमला किया। हमले में एक व्यक्ति की मौत की सूचना है, जबकि कई लोग घायल हैं। कोयला माफियाओं का यह तरीका भी ठीक उसी तरह का है, जैसे धनबाद के कोयला माफियाओं का अब तक रहा है। कोयला माफियाओं के इस दबंग प्रवृति और हिंसक मानसिकता को समझने के लिए धनबाद के पिछले 60 सालों के इतिहास को खंगाला होगा। इसमें जो सच्चाई निकल कर आती है, वह बिल्कुल हैरान करने वाली है। कोयले में वर्चस्व और अवैध कारोबार की कहानी आज से 60 साल पहले ही लिखी गई है। आज का आपराधिक इतिहास भी ठीक उसी तरह चल रहा है जैसे 1960 के दशक में था। रातोरात नहीं खड़ा हुआ माफिया साम्रज्य 1960 के समय यूपी और बिहार में एक कहावत खूब मशहूर थी कि यहां नोट हवा में उड़ते हैं, बस पकड़ने की अक्ल होनी चाहिए। लेकिन, इतिहास गवाह है कि इन उड़ते नोटों को पकड़ने की चाहत ने इस पूरे क्षेत्र को अपराध और आतंक की ऐसी भट्ठी में झोंक दिया, जिसकी आंच आज भी महसूस की जाती है। कोयले की कालिख से उपजा यह माफिया राज कोई रातों-रात खड़ा हुआ तंत्र नहीं है, बल्कि यह दशकों के शोषण, राजनीतिक शह और वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम है। निजी स्वामित्व और 'लठैत संस्कृति' की शुरुआत 1960 के दशक से पहले, जब कोयला खदानें निजी हाथों में थीं, तब अपराध का स्वरूप आज जैसा जटिल नहीं था। उस दौर में खदान मालिक मजदूरों से जबरन काम लेने और उन्हें डराने-धमकाने के लिए 'लठैत' पालते थे। ये लठैत खदान मालिकों के मुख्य हथियार होते थे, जिनका काम उत्पादन बढ़ाना और विरोध के स्वर को दबाना था। इसी दौर ने धनबाद में उस 'बाहुबल' की नींव रखी, जो आगे चलकर संगठित माफिया के रूप में विकसित हुआ। बीपी सिन्हा का दौर और बाहरी अपराधियों का आगमन वह समय बीपी सिन्हा के वर्चस्व का था। प्रशासन से लेकर सरकार तक उनकी तूती बोलती थी। जैसे-जैसे रेल संपर्क बढ़ा और बोकारो-सिंदरी जैसे औद्योगिक केंद्रों की चर्चा फैली, धनबाद अपराधियों के लिए 'एल डोराडो' यानी सोने की लंका बन गया। बिहार और उत्तर प्रदेश के शातिर अपराधी नाम बदलकर यहां की कोलियरियों में मजदूर बनकर रहने लगे। धनबाद के पुराने लोगों के अनुसार उस समय कोयला माफियाओं के पाले अपराधी स्थानीय गुंडों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देते और फिर वापस अपने राज्यों में सुरक्षित छिप जाते थे। 1960 से 1972 के बीच अपराध का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा, उसने धनबाद की सामाजिक संरचना को बदलकर रख दिया। कोयला माफियाओं के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले दर्जनों लोगों की हत्याएं हुई। कई लोगों के शव जलते कोयले के बॉयलर में झोंक दिये गये, तो कई लोगों को खदान के अंदर ही दफन कर दिया गया। जिस फिर कोई नहीं ढूंढ पाया। राष्ट्रीयकरण: जब मजदूर संघ बने अपराध के 'अड्डे'.... कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण (1971-73) के बाद उम्मीद थी कि स्थितियां बदलेंगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। राष्ट्रीयकरण के बाद मजदूर संगठनों की बाढ़ आ गई। जल्द ही इन संगठनों का अपराधीकरण शुरू हो गया और यहीं से 'समानांतर सरकार' चलने की परंपरा शुरू हुई। रात के सन्नाटे में पत्थर मारकर दरवाजे तोड़ने वाले डकैत अब सूट-बूट पहनकर ठेकेदारी और रंगदारी के बड़े खेल में शामिल हो गए। सिन्हा बनाम सिंह: वर्चस्व का वह रक्तरंजित अध्याय धनबाद का इतिहास बीपी सिन्हा और सूर्यदेव सिंह के बीच की तनातनी के बिना अधूरा है। कभी सिन्हा के समर्थक रहे सूर्यदेव सिंह ने जब अपनी अलग राह चुनी, तो कोयलांचल ने वह दौर देखा जहां गोलियां बात करती थीं। फौज की नौकरी छोड़कर आए लोग माफिया समूहों में भर्ती होने लगे और अत्याधुनिक हथियारों ने लाठियों की जगह ले ली। बीपी सिन्हा की हत्या ने इस वर्चस्व की जंग में अंतिम मुहर लगा दी। उनकी मौत के बाद सूर्यदेव सिंह का उदय हुआ और धनबाद में 'किंगमेकर' की भूमिका में एक नया नेतृत्व उभरा, जिसने राजनीति और अपराध के गठजोड़ को नई ऊंचाइयां दीं। जो आज भी कायम है। विरासत के इस बोझ से छुटकारा मुश्कल आज भी धनबाद का कोयलांचल उसी रक्तरंजित विरासत का बोझ ढो रहा है। अपहरण, रंगदारी और वर्चस्व की यह लड़ाई पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है। कोयलांचल में अपराध की जड़ें इतनी गहरी हैं, क्योंकि इनके पीछे 'नोटों की वह चाहत' है जो कभी खत्म नहीं होती। जब तक कोयले के वैध-अवैध कारोबार में पारदर्शिता नहीं आएगी और राजनीतिक संरक्षण का खात्मा नहीं होगा, तब तक धनबाद की हवाओं में बारूद की गंध और कोयले की कालिख बरकरार रहेगी।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान ने फिर से एक वीडियो जारी कर धनबाद SSP प्रभात कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने यहां तक दावा किया है कि धनबाद से दुबई भागने में उसकी मदद किस-किस ने की। प्रिंस खान ने इस दौरान ये भी दावा किया उसे अपराधी किसने बनाया और किस कारण उसने धनबाद छोड़ा। कैसे उसने तत्कालीन बैंक मोड़ थाना प्रभारी को 10 लाख रुपए देकर अपना पासपोर्ट बनवाया। प्रिंस खान का एक और नया वीडियो इस वीडियो के झारखंड में तेजी से वायरल होने के बाद मानो भूचाल आ गया हो। प्रिंस खान के इस वीडियो को भी झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट X पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई सवाल पूछे हैं। साथ ही धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को तत्काल हटाने की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान द्वारा विदेश से जारी कथित वीडियो को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। बाबूलाल मरांडी ने SSP पर उठाए सवाल बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 'आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर ही पुलिस के कथित काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं। धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का मीडिया में वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो न केवल पुलिस को चुनौती दे रहा है, बल्कि एसएसपी के कार्यकाल का मूल्यांकन भी कर रहा है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। पुलिस और क्रिमिनल्स में गैंगवार- बाबूलाल मरांडी बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 'ऐसा प्रतीत होता है कि मानो धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच गैंगवार चल रहा हो। दोनों पक्षों में होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा। फर्क बस इतना है कि एक वर्दी पहनकर कथित वसूली कर रहा है, तो दूसरा बिना वर्दी के। सबसे भयावह पक्ष सत्ता संरक्षण की आशंका है। जब चर्चा आम हो कि करोड़ों की 'बोली' लगाकर संवेदनशील जिलों में पोस्टिंग ली जाती है, तो जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। क्या ऐसी पोस्टिंग कानून सुधारने के लिए है या यह किसी एक्सटॉर्शन लाइसेंस की तरह काम कर रही है?'
धनबाद। धनबाद में ड्रंक एंड ड्राइव जांच अभियान के दौरान बड़ा बवाल हो गया। सीएमआरआई गेट के पास ट्रैफिक पुलिस की टीम वाहन जांच अभियान चला रही थी, तभी एक कार चालक ने पुलिस के रुकने के संकेत को नजरअंदाज करते हुए भागने की कोशिश की। हालांकि पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए वाहन को घेरकर रोक लिया। इसके बाद मौके पर जमकर हंगामा हुआ और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की घटना सामने आई। ब्रेथ एनालाइजर जांच में शराब पीने की पुष्टि ट्रैफिक विभाग के परिचारी प्रवर राकेश कुमार दुबे की शिकायत के अनुसार, सिटी सेंटर की ओर से आ रही टाटा पंच कार (JH10DH6065) को जांच के लिए रोका गया था। कार चालक की पहचान विपुल कुमार सिंह के रूप में हुई। पुलिस द्वारा की गई ब्रेथ एनालाइजर जांच में चालक के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। बताया गया कि शराब की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई। कार्रवाई के दौरान बढ़ा विवाद जांच के बाद जब पुलिस कार्रवाई करने लगी तो चालक आक्रोशित हो गया। आरोप है कि उसने ऑन ड्यूटी पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की और वर्दी उतरवाने तक की धमकी दी। इसी बीच चालक के बुलाने पर उसके दो साथी भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पुलिस और आरोपियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ी, दस्तावेज भी नष्ट किए पुलिस का आरोप है कि हंगामे के दौरान एक ट्रैफिक कर्मी की वर्दी फाड़ दी गई और उन्हें हल्की चोटें भी आईं। मामला थाने पहुंचने के बाद भी शांत नहीं हुआ। आरोपियों ने कथित तौर पर जब्ती सूची फाड़ दी और जब्त वाहन छुड़ाने की कोशिश की। दो आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सरकारी दस्तावेज नष्ट करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। मुख्य आरोपी विपुल कुमार सिंह और अनिमेष कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें बताया जा रहा है कि प्रिंस खान ने विदेश से यह वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में प्रिंस खान ने धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। एसएसपी प्रभात कुमार पर कार्रवाई की मांग प्रिंस खान ने एसएसपी पर कोल माफिया को संरक्षण देने, भूमाफिया से साठ गांठ और व्यापारियों को धमकाने समेत कई आरोप लगाए हैं। इस वीडियो को झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री से धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को तत्काल हटाने और विधिसंवत कार्रवाई की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने निष्पक्ष जांच की मांग की नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान की ओर से विदेश से जारी कथित वीडियो को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस वीडियो ने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो का संपादित हिस्सा साझा करते हुए कहा कि वीडियो में धनबाद के एसएसपी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। माफिया और प्रशासन के गठजोड़ की आशंका नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वीडियो में गरीबों और कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा कराने, माइनिंग माफियाओं से सांठगांठ और वर्दी तथा सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर भय का माहौल बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि अपराधी प्रिंस खान के इन आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हों, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों सौंपी जा रही हैं। इससे जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि सत्ता और प्रभाव के आगे न्याय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। क्या माफियाओं का प्रभाव बढ़ा है मरांडी ने मुख्यमंत्री से सवालिया लहजे में पूछा कि क्या झारखंड का प्रशासनिक तंत्र माफियाओं के प्रभाव में काम कर रहा है? उन्होंने कहा कि राज्य की जनता यह देख रही है कि सरकार कानून के शासन के साथ खड़ी है या फिर माफिया तंत्र के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का विश्वास बनाए रखना है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। मुख्यमंत्री को देंगे पूरा वीडियो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए संयम बरता है। समाज में भय और अराजकता का माहौल न बने, इसलिए वीडियो का केवल संपादित अंश ही सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल पूरा वीडियो वह मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराएंगे, ताकि बाद में यह नहीं कहा जा सके कि सरकार को मामले की जानकारी नहीं थी। जांच की हो न्यायिक निगरानी बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए। साथ ही माइनिंग माफिया, भूमि कब्जा और प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े सभी आरोपों की न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग को भी टैग किया है। इससे इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि झारखंड सरकार इसपर क्या एक्शन लेती है।
धनबाद। धनबाद के वासेपुर का गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। उसे आईएसआई ने एक कैंप में संरक्षण दे रखा है। रंगदारी से मिलने वाला पैसा अब वह आतंकी गतिविधियों में लगा रहा है। यह खुलासा प्रिंस के खास गुर्गे सैफी उर्फ मेजर ने पुलिस के समक्ष किया है। उसने पुलिस को बताया कि दुबई में इंटरपोल की दबिश बढ़ने के बाद प्रिंस काफी परेशान था। दुबई से भागने के लिए उसने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक सहयोगी की मदद ली। उसके साथ वह डंकी रूट से ओमान के रास्ते पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पहुंच गया। वहां उसे आईएसआई के द्वारा संचालित जैश-ए-मोहम्मद के सेंटर में संरक्षण मिला। प्रिंस पंजाब प्रांत में किसके साथ है, सैफी ने उसके बारे में पूरी जानकारी पुलिस को दी है। प्रिंस को पैसे देनेवाले आयेंगे राष्ट्रद्रोह के दायरे मे धनबाद पुलिस का कहना है कि धनबाद से भेजा जा रहे रंगदारी का पैसे से प्रिंस पहले चल-अचल संपत्तियां खरीदता था, लेकिन अब वही पैसा आतंकी गतिविधियों में लगा रहा है। ऐसे में प्रिंस को जो भी रंगदारी दे रहे हैं, नाम सामने आने पर उन पर आतंकी को मदद करने के आरोप में कार्रवाई संभव है। दुबई में एक ही फ्लैट में रह रहीं प्रिंस की दोनों बीविया सैफी ने पुलिस को यह भी जानकारी दी है कि प्रिंस के दुबई से भागने के बाद उसकी दो पत्नियां एक साथ दुबई में एक फ्लैट में रह रही हैं। फरारी के दौरान ही प्रिंस ने दूसरी शादी रचाई थी। वहीं उसका भाई गोपी खान अपनी पत्नी के साथ वहां से 10 किमी दूर दूसरे फ्लैट में रह रहा है। उसके साथ ऋतिक भी रहता है। धनबाद से रंगदारी से मिलने वाले पैसे से सभी वहां ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं। पुलिस की नजर अब गोपी खान पर भी है। एसएसपी प्रभात कुमार, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारियों ने धनबाद थाने में सैफी से कई राउंड में पूछताछ की। अब वायरल पर्चों की होगी फॉरेंसिक जांच पूछताछ में सैफी ने बताया कि सितंबर 2025 से पूर्व वह प्रिंस के लिए किसी वारदात से पूर्व और बाद में पर्चा लिखने का काम करता था। पर्चा में अपना नाम मेजर लिखता था, जिसे धनबाद के गुर्गों को भेजने का काम करता था। गुर्गे धनबाद में पर्चा वायरल करते थे। वहीं प्रिंस का साथ छोड़ने के बाद पलामू के कुबेर के नाम पर पर्चा लिख कर प्रिंस के गुर्गों के माध्यम से वायरल कराता था। पुलिस पूर्व में वायरल पर्चा का फॉरेंसिक जांच कराएगी, जिससे यह पता चल सके कि हैंडराइटिंग किसकी है? रिमांड अवधि खत्म, जेल भेजा गया मेजर एसएसपी प्रभात कुमार, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारियों ने धनबाद थाने में सैफी से कई राउंड में पूछताछ की। तीन दिनों की रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद सैफी को कोर्ट में प्रस्तुत किया। कोर्ट ने सैफी को जेल भेज दिया। इसके पूर्व भी पुलिस ने तीन दिनों की रिमांड पर उससे पूछताछ की थी। रिमांड अवधि ने सैफी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। बता दें कि 19 मार्च को सैफी को कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।
धनबाद। धनबाद के जोड़ापोखर थाना क्षेत्र अंतर्गत जियलगोरा के समीप सोमवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। ऑटो और तेज रफ्तार ट्रेलर की आमने-सामने टक्कर में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ही परिवार के छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। शादी समारोह में जा रहा था परिवार जानकारी के अनुसार, सभी लोग Bokaro जिले के चंदनकियारी थाना क्षेत्र के अमलाबाद के निवासी हैं। परिवार सासाराम-डेहरी में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए निकला था और धनबाद स्टेशन से ट्रेन पकड़ने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में यह हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रेलर ने मारी टक्कर घायल परिवार के मुखिया परमेश्वर ठाकुर ने बताया कि पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो में सवार लोग सड़क पर जा गिरे। इस हादसे में राजमणि देवी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक समेत अन्य छह लोग घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। दो घायलों का इलाज एसएनएमएमसीएच में चल रहा है, जबकि चार अन्य को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस जांच में जुटी जोड़ापोखर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।
धनबाद। धनबाद के पुटकी थाना क्षेत्र स्थित गोपालिचक में बीसीसीएल की आउटसोर्सिंग माइंस में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। इस दुर्घटना में सीनियर सुपरवाइजर रामस्वरूप चौहान की मौके पर ही मौत हो गई। वे गोधर क्षेत्र के रहने वाले थे और रोज की तरह ड्यूटी पर पहुंचे थे। भारी वाहन की चपेट में आने से गई जान जानकारी के अनुसार, घटना के समय रामस्वरूप चौहान माइंस के अंदर कर्मियों को काम पर लगा रहे थे। इसी दौरान एक भारी वोल्वो वाहन उनकी कमर के ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कंपनी की ओर से परिजनों को अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी गई थी, लेकिन जब वे पहुंचे तो उनका शव मिला। सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। खनन के दौरान उठने वाली धूल के कारण दृश्यता कम हो जाती है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती। जांच के आदेश, पुलिस जुटी पड़ताल में कंपनी प्रबंधन ने घटना की जांच कराने की बात कही है। वहीं पुटकी थाना प्रभारी वकार हुसैन ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।
धनबाद। धनबाद में कुख्यात भगोड़े अपराधी प्रिंस खान के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में उसके करीबी गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को एक बार फिर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ में कई अहम खुलासे होने के बाद पुलिस ने जांच और तेज कर दी है। दूसरी बार पुलिस रिमांड पर शैफी शैफी उर्फ मेजर को गिरफ्तारी के बाद पहले तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया था। अब शनिवार को कोर्ट से फिर से तीन दिन की रिमांड मिल गई है। धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय विशेष टीम लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस पूछताछ में प्रिंस खान के पूरे नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। इन्हीं इनपुट के आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई तेज कर दी है और कई नए एंगल पर जांच चल रही है। अब तक 4 गिरफ्तारिया इस केस में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिनमें कुछ जमीन कारोबारी भी शामिल हैं। इनके पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं, जिससे नेटवर्क की गहराई का अंदाजा लगाया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ सफेदपोश और मीडिया से जुड़े लोगों की भी प्रिंस खान से सांठगांठ थी। आरोप है कि ये लोग आर्थिक मदद देने के साथ-साथ धमकी भरे वीडियो के प्रचार-प्रसार में भी शामिल थे। पुलिस अब पूरे गैंग के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे कई और लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
धनबाद। धनबाद में आवारा कुत्तों के झुंड ने 5 साल के मासूम बच्चे को नोंच खाया। घटना, गोनुडीह ओपी क्षेत्र की है जहां आवारा कुत्तों के झुंड ने 5 साल के बच्चे पर हमला कर दिया। मृत बच्चे की पहचान अंकित के रूप में हुई है। घटना के संबंध में मिली जानकरी के मुताबिक, अंकित घर के बाहर खेल रहा था कि तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक उसपर हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्चो को नोंच खाया। गंभीर रूप से घायल अंकित को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पूरी घटना गोंदूडीह ओपी क्षेत्र स्थित भोलानाथ बसेरिया, 4 नंबर यादव बस्ती की है। कुंदन यादव का 5 साल का बेटा अंकित यादव हनुमान मंदिर के पा खेल रहा था, तभी आवारा कुत्तों को झुंड वहां पहुंचा और अंकित को घेरकर हमला कर दिया। कुत्तों ने अंकित के शरीर को कई जगह बुरी तरह नोंच डाला। हमले में बच्चे को गंभीर चोट लगी, जिसकी वजह से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। शोर-शराबा सुनकर स्थानीय लोग पहुंचे तो अंकित को लहूलुहान हालत में पाया। सूचना पर पहुंचे परिजन अंकित के शव की हालत देखकर चीत्कार कर उठे।
धनबाद। धनबाद के वासेपुर में आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्टर प्रिंस खान के साम्राज्य की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। प्रिंस खान के सबसे करीबी सहयोगी सैफ अब्बास नकवी उर्फ सैफी उर्फ मेजर ने पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सैफी के बयानों ने प्रिंस खान की डॉन वाली छवि के पीछे छिपे उसके डरपोक स्वभाव को उजागर कर दिया है। सैफी ने पुलिस को बताया कि प्रिंस खान असल जिंदगी में काफी कमजोर दिल का है। उसने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 3 दिसंबर 2024 को जब धनबाद जेल में गैंगस्टर अमन सिंह की हत्या की खबर प्रिंस तक पहुंची, तो वह बुरी तरह कांपने लगा था। खबर सुनकर वह डर के मारे बेहोश होकर गिर पड़ा और कई दिनों तक सदमे की स्थिति में रहा। जेल और दुबई से संचालित हो रहा नेटवर्क पूछताछ में यह भी सामने आया कि प्रिंस खान के गैंग का संचालन जेल अंदर और दुबई से हो रहा है। दुबई में छिपे गोपी खान और उसके साले रितिक ने कई नए लड़कों को गिरोह से जोड़ा है। वहीं जेल में बंद तीसरे भाई गोडविन खान और हाल ही में जमानत पर बाहर आए बंटी खान की गिरोह में सक्रिय भूमिका के बारे में भी पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली है। सैफी ने रंगदारी वसूली से लेकर हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन का पूरा ब्योरा पुलिस को सौंप दिया है। उसने स्वीकार किया कि नन्हे की हत्या के अलावा पांडरपाला के शहाबुद्दीन की हत्या में भी इसी गैंग का हाथ था। पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी और गिरफ्तारिया सैफी के खुलासे के आधार पर धनबाद पुलिस की स्पेशल टीम ने वासेपुर और जोड़ापोखर इलाकों में छापेमारी की है। इस दौरान दो प्रमुख संदिग्धों कलीम और मुस्तकीम को हिरासत में लिया गया है। कलीम एक जमीन कारोबारी बताया जा रहा है, जिसकी पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं मुस्तकीम खुद को एक मानवाधिकार संगठन का प्रतिनिधि बताकर अपनी संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देता था। पुलिस अब गिरोह के मददगारों और स्लीपर सेल्स की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
धनबाद। देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) के बीच कोलकाता स्थित एसईआर मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कोयला परिवहन, रेक लोडिंग और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत बैठक की शुरुआत आद्रा मंडल में रेक लोडिंग प्रदर्शन की समीक्षा से हुई, जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष की परिचालन चुनौतियों का विश्लेषण किया गया। अधिकारियों ने रेक की समयबद्ध उपलब्धता, लोडिंग-अनलोडिंग प्रक्रिया में सुधार और लॉजिस्टिक समन्वय को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती मांग को देखते हुए कोयला आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने रेलवे के साथ बेहतर तालमेल बनाकर रेक मूवमेंट को तेज और सुचारु बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। रेलवे अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया रेलवे अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया कि परिचालन स्तर पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। बैठक में साइडिंग की कार्यक्षमता बढ़ाने पर खास ध्यान दिया गया, जिससे रेक टर्नअराउंड टाइम कम किया जा सके। इसके अलावा वॉशरी, व्हार्फ और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को गति देने पर सहमति बनी, ताकि कोयला ढुलाई और अधिक सुगम हो सके। भूमि और अनुमतियों से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। वित्तीय वर्ष 2026–27 को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति बनाई गई, जिसमें तकनीकी सुधार और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। यह बैठक कोयला परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले के सोनारडीह ओपी क्षेत्र स्थित टंडाबाड़ी बस्ती में एक बार फिर भू-धंसान की घटना सामने आई है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। गुरुवार को हुई इस घटना में 3 से 4 लोगों के घायल होने की सूचना है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना में घायल एक युवक अरमान की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे असर्फी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं अन्य घायलों का इलाज तिलाटांड़ अस्पताल में चल रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से घायलों की सटीक संख्या की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। गुस्साए लोगों ने NH-32 किया जाम भू-धंसान की घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बोकारो-धनबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-32 को जाम कर दिया। लोगों का आरोप है कि बीसीसीएल और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रशासन और पुलिस मौके पर तैनात घटना की सूचना मिलते ही सीओ गिरिजानंद किस्कू ने बीसीसीएल अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। पुलिस के पहुंचने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया जाएगा। पहले भी हो चुकी है बड़ी घटना गौरतलब है कि इसी टंडाबाड़ी बस्ती में 31 मार्च 2026 को भी भू-धंसान की बड़ी घटना हुई थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा हाल ही में जमीन चार फीट तक धंसने की घटना भी सामने आई थी। स्थायी समाधान की मांग लगातार हो रही घटनाओं से स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
धनबाद। कोयलांचल में एक बार फिर "पावर वार" शुरू हो गया है। यह वार न सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई है, बल्कि कोयलांचल में खुद को साबित करने की कोशिश भी है। इस बार यह जंग धनबाद के सांसद और मेयर के बीच है। यानी इस पावर वार में सांसद ढुल्लू महतो और मेयर संजीव सिंह आमने-सामने हैं। इस पावर वार के पीछे कई गहरे राज छिपे हैं। यह सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई मात्र नहीं है, बल्कि कोयलांचल की सत्ता हासिल करने की भी जंग है। मामला सियासी भी है दोनों को अपना-अपना वजूद साबित करने की जरूरत है, तो जंग के पीछे अभी से ही अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी भी है। यह अलग बात है कि चुनाव में अभी बहुत वक्त है, लेकिन जिस प्रकार संजीव सिंह तमाम विरोधों के बावजूद मेयर की कुर्सी पर काबिज हुए हैं, कई पुराने और दिग्गज नेताओं का समीकरण गड़बड़ा गया है और वे भी नया समीकरण बनाने में जुट गये हैं। चर्चा तो यह भी है कि टिकट के लिए अभी से गोलबंदी शुरू हो गई है। शर्त पर शर्त रखे जा रहे हैं। अगले उम्मीदवार के लिए तैयार हो रही जमीन! धनबाद, झरिया, निरसा, बाघमारा, सिंदरी और टुंडी से भाजपा के कौन उम्मीदवार होंगे, इसकी जमीन अभी से ही तैयार की जाने लगी है और यही जमीन "पावर' की लड़ाई को आगे बढ़ा रही है। पावर की लड़ाई लड़ने वालों को कोई ना कोई बहाना चाहिए, बहना मिलते ही आमने-सामने हो जा रहे हैं। सांसद और मेयर की लड़ाई तो अब जग जाहिर है। दोनों एक दूसरे के खिलाफ बयान बाजी भी कर रहे हैं। संजीव सिंह कतरास इलाके में अपनी सक्रियता तेज किए हुए हैं, तो सांसद ढुल्लू महतो ने शहरी इलाकों में अपने समर्थकों को सक्रिय कर दिया है और खुद भी वह शहरी इलाकों में एक्टिव हैं। सबसे अधिक चर्चा सांसद और पूर्व सांसद की दोस्ती की है। यानी ढुल्लू महतो और पीएन सिंह के बीच की निकटता की। लोग बता रहे हैं कि दो ध्रुव का मिलन आखिर क्यों हुआ? किन शर्तों पर हुआ? क्या इसके पीछे भी विधानसभा की कोई सीट है? हालांकि अभी लोग इन सब बातों को लेकर कयास ही लगा रहे हैं, लेकिन कुछ न कुछ खिचड़ी तो पक ही रही है। कोयलांचल की राजनीति ले रही करवट कोयलांचल में राजनीति जिस हिसाब से करवट ले रही है, जो चर्चाएं चल रही है, भाजपा के नेता और कार्यकर्ता दबी जुबान में जो बता रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि इस राजनीति के पीछे बड़ी वजह है। यह बात भी सच है कि मेयर चुनाव के पहले सांसद ढुल्लू महतो ने संजीव सिंह के बारे में कई बातें कही थी। उन बातों का असर हुआ कि कोयलांचल में गोलबंदी हुई और संजीव सिंह भारी मतों से जीत गए। इसके बाद नए ढंग की राजनीति शुरू हुई है। इस राजनीति के टारगेट में केवल संजीव सिंह ही नहीं बल्कि कई वर्तमान विधायक भी है। कई लोग सतर्क हो गये हैं कि कहीं संजीव सिंह अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी में तो नहीं जुटे हैं। मतलब मौजूदा सांसद के लिए इससे बड़ी चिंता की वजह कोई और हो भी नहीं सकती। यह अलग बात है कि टिकट किसे मिलेगा, किसे नहीं, यह तय करना केंद्रीय नेतृत्व का काम है। लेकिन, केंद्रीय नेतृत्व भी तो सभी पक्षों की रायशुमारी से ही अपनी राय बनाता है। शुभम हत्याकांड को लेकर भी राजनीति कतरास के शुभम हत्याकांड को लेकर भी यहां नए ढंग की राजनीति शुरू हो गई है। संजीव सिंह पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं, तो सांसद ढुल्लू महतो इसकी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि शुभम हत्याकांड में धनबाद पुलिस की जांच तेज हो गई है। धनबाद में नए ग्रामीण एसपी ने कार्यभार संभाल लिया है और उनके कार्यभार ग्रहण करते ही शुभम हत्याकांड पर हल्ला मचा हुआ है। लगातार अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। अपराधियों के नेटवर्क के भी खुलासे की भी मांग हो रही है। दोनों ही पक्ष अपने-अपने ढंग से झंडा उठाये हुए हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कोयलांचल में राजनीति का यह रंग आगे क्या-क्या गुल खिलाता है।
धनबाद। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। Jharkhand Education Tribunal Act 2017 के तहत अब सभी निजी विद्यालयों को फीस, किताब और ड्रेस से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। फीस और री-एडमिशन पर स्पष्ट नियम प्रशासन ने निर्देश दिया है कि स्कूल अपनी वार्षिक फीस का पूरा ब्योरा वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें। अभिभावकों पर एकमुश्त फीस जमा करने का दबाव नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें तिमाही आधार पर भुगतान की सुविधा दी जाएगी। साथ ही री-एडमिशन के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और डेवलपमेंट फीस का उद्देश्य स्पष्ट करना होगा। किताब और ड्रेस को लेकर सख्ती नए नियमों के अनुसार, स्कूलों को नवंबर तक अगले सत्र की किताबों और ड्रेस की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। स्कूल ड्रेस पांच साल से पहले नहीं बदली जा सकेगी और निर्धारित किताबों में भी बार-बार बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूल परिसर में किताब और ड्रेस बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे अभिभावकों को बाजार से सस्ती दर पर सामग्री खरीदने का विकल्प मिलेगा। उल्लंघन पर जुर्माना और जांच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन एक सप्ताह के भीतर करना होगा। इसके बाद पांच सदस्यीय टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा। किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। छात्रों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर इसके साथ ही बीपीएल श्रेणी के छात्रों के लिए 25% सीट आरक्षित रखने, स्कूल बसों में GPS और CCTV अनिवार्य करने तथा चालकों का पुलिस सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन कदमों से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
धनबाद। धनबाद जिले के बाघमारा क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा भू-धसान हुआ, जिससे टांडाबाड़ी बस्ती में 7 से 8 घर पलभर में जमीन में समा गए। घटना बुधवार सुबह हुई, जब अचानक तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने बच्चों और जरूरी सामान के साथ घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए। गनीमत रही कि हादसा सुबह हुआ, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। बेघर हुए परिवार, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप घटना के बाद दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। चिलचिलाती गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना के घंटों बाद भी न तो प्रशासन और न ही संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। इससे लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इलाके में दरारें, खतरे में अन्य घर भू-धसान के बाद इलाके की सड़कों और आसपास की जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि उन्हें जल्द सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए। पहले भी हो चुकी है दर्दनाक घटना गौरतलब है कि 31 मार्च को इसी इलाके में हुए भू-धसान में तीन लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अवैध खनन पर उठे गंभीर सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कोयला उत्खनन के कारण जमीन अंदर से खोखली हो चुकी है, जिससे ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई के अभाव में कोयला माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
धनबाद। झारखंड के आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे करीबी गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी कोलकाता नहीं बल्कि दुबई में हुई है। दुबई में उसे गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया। मेजर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उसे विदेश से भारत लाने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच धनबाद लेकर आई। प्रिंस खान को लेकर बड़े खुलासों की उम्मीद पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग और प्रिंस खान के ठिकानों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। झारखंड के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर प्रिंस खान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सूचना मिली है। करीब चार साल पहले दुबई भागने और इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर है। प्रिंस खान से जुड़ी कुछ अहम जानकारिया धनबाद में कई सालों से प्रिंस खान ने दहशत फैला रखी है अर्से से झारखंड पुलिस को प्रिंस खान की तलाश है 2021 में प्रिंस खान पुलिस से बचने के लिए दुबई भाग गया अब वह दुबई से पाकिस्तान भाग गया है प्रिंस खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में छिपा है पुलिस प्रिंस खान को आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश में है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा ताजा खुफिया इनपुट के अनुसार, प्रिंस खान ने अपना ठिकाना दुबई से बदलकर अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बना लिया है। वह वहीं से रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर के बड़े कारोबारियों को वर्चुअल नंबरों के जरिए रंगदारी के लिए धमकाता है। कभी वासेपुर की गलियों से अपराध शुरू करने वाला प्रिंस खान अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। प्रिंस खान को घोषित किया जाएगा आतंकवादी पाकिस्तान से गतिविधियों को अंजाम देने की सूचना के बाद झारखंड पुलिस अब उसे 'आतंकवादी' घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिंस खान के सिंडिकेट को न केवल अपराधी, बल्कि कई 'व्हाइट कॉलर' लोग और जमीन कारोबारी भी हथियार और धन की आपूर्ति कर समर्थन दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रिंस ने दुबई में एक आंतकी संगठन की मदद से पनाह ली है। और वह झारखंड से वसूले गये रंगदारी के पैसे में उस आतंकी संगठन को कमीशन भी दे रहा है। मेजर की गिरफ्तारी प्रिंस खान के अंत की शुरुआत मेजर की गिरफ्तारी को प्रिंस खान के साम्राज्य के अंत की शुरुआत माना जा रहा है। धनबाद पुलिस के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों की पुलिस भी मेजर को रिमांड पर लेने की तैयारी में है, जहां-जहां उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्रिंस खान के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।