रांची। रांची के सदर थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ मारपीट और उसके चेहरे पर कालीख पोतकर घुमाने का मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना को लेकर पीड़िता ने 29 मार्च को सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महिला खूंटी जिले की रहने वाली है। वह फिलहाल रांची में किराए के मकान में रहती है। उसने आरोप लगाया कि उसी दिन पंकज कुमार नामक व्यक्ति उसके घर पहुंचा। उसने गाली-गलौज करते हुए उसे जबरन घर से बाहर खींच लिया। 2 महिलाओं को चप्पल की माला पहनाई पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने न केवल उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसे और एक अन्य महिला को चप्पलों की माला पहनाई। इसके बाद उनके चेहरे पर कालिख पोतकर पूरे मोहल्ले में घुमाया गया, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके बेटे और परिचितों पर वाहन चोरी का आरोप लगाते हुए हिंसक व्यवहार किया, उसके कपड़े फाड़ दिए और गलत नीयत से पकड़ने की कोशिश की। महिला समेत 2 आरोपी जेल भेजे गये मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। जांच के बाद मुख्य आरोपी पंकज कुमार सिंह उर्फ पंकज और सनताना कुमारी को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
रांची से एक बड़ी चोरी की घटना सामने आई है, जिसने बिजली व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिठोरिया थाना क्षेत्र के सत कनादू गांव स्थित बिजली ग्रिड से करीब 1000 किलोग्राम तांबा चोरी कर लिया गया। इस चोरी की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई जा रही है। ट्रांसफार्मर को बनाया निशाना जानकारी के अनुसार, अपराधियों ने एसएसटी 33/4 KV ट्रांसफार्मर को निशाना बनाया और उसमें लगे तांबे को निकालकर फरार हो गए। इतनी बड़ी मात्रा में तांबे की चोरी यह संकेत देती है कि वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी योजना बनाई गई थी। डीएसपी के नेतृत्व में जांच शुरू घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी Amar Kumar Pandey के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उनके साथ इंस्पेक्टर असित मोदी, थाना प्रभारी सतीश पांडे और एसआई संतोष यादव भी मौजूद थे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। तकनीकी टीम और डॉग स्क्वायड की मदद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता ली है। साथ ही डॉग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की टीम को भी बुलाया गया है, ताकि अपराधियों के बारे में ठोस सुराग मिल सके। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इस चोरी के पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ हो सकता है। बिजली आपूर्ति पर असर की आशंका इस बड़ी चोरी के बाद इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए तेजी से काम कर रहा है, ताकि आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। जल्द गिरफ्तारी का दावा पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र में स्वयंभू बाबा अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि वह लोगों को ठगने के लिए अंधविश्वास और डर का सहारा लेता था। नकली सांप से रचता था ‘चमत्कार’ जांच एजेंसियों के मुताबिक, अशोक खरात रिमोट कंट्रोल से चलने वाले नकली सांपों का इस्तेमाल करता था। इन सांपों को हिलाकर वह ‘दैवी शक्ति’ का भ्रम पैदा करता और लोगों को विश्वास दिलाता कि उसके पास अलौकिक शक्तियां हैं। इमली के बीज को बना देता था ‘मंत्रित वस्तु’ खरात साधारण इमली के बीजों को पॉलिश कर ‘चमत्कारी’ बताकर बेचता था। इनकी कीमत 100 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक वसूली जाती थी। इसके अलावा वह नकली रत्न और पत्थर भी लोगों को ऊंची कीमत पर बेचता था। डर और रसूख से बनाता था प्रभाव खुद को तांत्रिक बताने वाला यह बाबा अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए बाघ की खाल जैसी प्रतिबंधित वस्तुएं दिखाता था। इससे लोगों में डर और विश्वास दोनों पैदा कर उन्हें अपने जाल में फंसाता था। यौन शोषण और ठगी के गंभीर आरोप पुलिस ने उसे एक महिला के साथ लंबे समय तक यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके संपर्क में कई प्रभावशाली लोग भी थे, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। आलीशान जिंदगी और विदेश यात्राएं जांच के दायरे में बताया जा रहा है कि अशोक खरात ने करीब 150 विदेशी यात्राएं की हैं। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इन यात्राओं के लिए पैसा कहां से आया। उच्चस्तरीय जांच जारी महाराष्ट्र सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित की है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
गया: बिहार के गया एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। बैंकॉक से आई एक फ्लाइट की जांच के दौरान कस्टम विभाग ने 8.5 किलोग्राम हाई-क्वालिटी मारिजुआना (हाइड्रोपोनिक वीड) बरामद किया है। इस कार्रवाई में एक विदेशी महिला सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 8.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे इस नेटवर्क की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बैंकॉक फ्लाइट से खुला तस्करी का राज यह कार्रवाई उस समय हुई जब बैंकॉक से आई फ्लाइट FD-122 के यात्रियों की नियमित जांच की जा रही थी। जांच के दौरान अधिकारियों को चार अलग-अलग बैग में छिपाकर रखा गया मारिजुआना मिला। गिरफ्तार आरोपियों में थाई नागरिक वासना बोंगको के अलावा राहुल मिश्रा, मो. सलीम, वसीम तैयब मेमन और तबरेज नफासत शामिल हैं। क्या है हाइड्रोपोनिक वीड? हाइड्रोपोनिक वीड मारिजुआना की एक उच्च गुणवत्ता वाली किस्म होती है, जिसे खास तकनीक के जरिए नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है। इसकी पोटेंसी और गुणवत्ता ज्यादा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग काफी अधिक रहती है। इसी वजह से इसकी कीमत भी बेहद ऊंची होती है और तस्करों के लिए यह मुनाफे का बड़ा जरिया बन चुकी है। लावारिस बैगों से भी मिला ड्रग्स डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस और कस्टम विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस साल जनवरी से अब तक 60.5 किलोग्राम मारिजुआना जब्त किया जा चुका है, जिसकी कीमत 60 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। हाल ही में एयरपोर्ट पर मिले दो लावारिस बैगों की जांच में भी करीब 10 किलोग्राम मारिजुआना बरामद हुआ था। ये बैग 14 मार्च को थाई एयरवेज की फ्लाइट से आए थे, जिन्हें तस्करों ने पकड़ के डर से छोड़ दिया था। पहले भी हो चुकी हैं बड़ी बरामदगी इससे पहले 7 जनवरी को भी अधिकारियों ने 17 किलोग्राम और 28 दिसंबर को एक अन्य मामले में 8.8 किलोग्राम मारिजुआना जब्त किया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह साफ संकेत मिल रहा है कि गया एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का अहम ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में लगातार बरामदगी के बाद कस्टम विभाग, डीआरआई और सीआईएसएफ के बीच समन्वय और मजबूत किया गया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, खासकर बैंकॉक रूट से आने वाले यात्रियों की जांच अब और सख्ती से की जा रही है। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जांच से खुल सकते हैं बड़े खुलासे इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस नेटवर्क के असली सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।
झारखंड के चतरा जिले से एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक जवान ने अपने ही सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे कैंप में हड़कंप मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंप में देर रात चली गोली, मचा हड़कंप यह घटना चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र स्थित शिला ओपी पिकेट की है, जहां सशस्त्र सीमा बल की 35वीं बटालियन तैनात है। मंगलवार रात करीब 10 बजे अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। साथी जवान जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि जवान खून से लथपथ पड़ा हुआ था। मृतक की पहचान देवघर जिले के रहने वाले प्रह्लाद कुमार सिंह के रूप में हुई है। सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जवान ने अपनी ही सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। घटना के तुरंत बाद पुलिस और SSB के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी गई। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चतरा सदर अस्पताल भेज दिया गया है। परिवार में मचा कोहराम बुधवार सुबह जैसे ही जवान का शव अस्पताल पहुंचा, परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक के भाई ने बताया कि मंगलवार शाम को ही उनकी आखिरी बातचीत हुई थी और उस समय सब कुछ सामान्य लग रहा था। अचानक इस घटना की खबर मिलने से पूरा परिवार सदमे में है। ‘क्रिकेट खेलने जा रहा हूं’ कहकर निकले थे परिजनों के अनुसार, घटना के दिन शाम करीब 5 बजे प्रह्लाद सिंह ने फोन पर बताया था कि वे क्रिकेट खेलने जा रहे हैं और उसके बाद प्रार्थना सभा में शामिल होंगे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनके आत्महत्या की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया। पीछे छोड़ गए परिवार 2017 में SSB में भर्ती हुए थे 2018 में शादी हुई थी एक छोटी बच्ची के पिता थे हाल ही में एक महीने की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर लौटे थे हर एंगल से जांच में जुटी पुलिस फिलहाल पुलिस और SSB प्रशासन आत्महत्या के कारणों की जांच कर रहे हैं। मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद या अन्य किसी कारण को ध्यान में रखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है। अभी तक आत्महत्या की असली वजह सामने नहीं आ सकी है। गंभीर सवाल छोड़ गई घटना यह घटना न केवल सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि तनाव और दबाव की स्थिति में समय रहते मदद मिलना कितना जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।