अमेरिका के San Diego में स्थित सबसे बड़ी मस्जिद Islamic Center of San Diego के बाहर हुई गोलीबारी की घटना में कुल पांच लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल है। स्थानीय पुलिस और Federal Bureau of Investigation (FBI) मामले की संयुक्त जांच कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिद के पास हुई फायरिंग में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में पुलिस को घटनास्थल के करीब खड़े एक वाहन में दो किशोर संदिग्ध मृत अवस्था में मिले। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि दोनों ने खुद को गोली मारी। 17 और 19 साल के थे संदिग्ध सैन डिएगो पुलिस प्रमुख Scott Wahl ने बताया कि मृत पाए गए दोनों युवकों की उम्र 17 और 19 वर्ष थी। उन्होंने कहा कि मस्जिद परिसर में मौजूद बच्चे और अन्य लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों संदिग्धों की मौत संभवतः आत्मघाती गोलीबारी के कारण हुई है। अधिकारियों ने अभी तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है। FBI ने शुरू की गहन जांच FBI के सैन डिएगो कार्यालय के विशेष एजेंट Mark Remley ने कहा कि घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि हमले के पीछे कोई व्यापक साजिश या अन्य लोग शामिल थे या नहीं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मारे गए तीन लोगों में मस्जिद का एक सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल है। हथियार पर मिले घृणास्पद संदेश जांच एजेंसियों के मुताबिक, संदिग्धों में से एक युवक अपने माता-पिता के घर से हथियार लेकर निकला था। अधिकारियों को एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें नस्लीय श्रेष्ठता और घृणा से जुड़े विचार लिखे गए थे। इसके अलावा घटना में इस्तेमाल किए गए एक हथियार पर आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाले शब्द लिखे मिले हैं। इसी वजह से जांच एजेंसियां इस घटना को संभावित “हेट क्राइम” के तौर पर भी देख रही हैं। मस्जिद और आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद मस्जिद और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस इलाके की निगरानी कर रही है और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में मामले से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।
रांची। रांची जिले के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। जेल में बंद एक महिला बंदी के साथ यौन शोषण के आरोपों की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हो गई है। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देश पर गठित जांच टीम के समक्ष पीड़िता ने खुद के साथ हुए यौन उत्पीड़न की बात को स्वीकार किया है। पीड़िता का आरोप है कि जेल के भीतर ही उच्च अधिकारियों द्वारा उसका शारीरिक शोषण किया गया। जस्टिस एसएन प्रसाद के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस एसएन प्रसाद ने सोमवार को संज्ञान लिया था। उन्होंने झालसा सचिव कुमारी रंजना को इस कथित यौन शोषण प्रकरण की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराने का कड़ा निर्देश दिया। जस्टिस एसएन प्रसाद के आदेश के तुरंत बाद रांची जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया, जो जांच के लिए सीधे होटवार जेल पहुंची। जेलर और जेल अधीक्षक पर लगे गंभीर आरोप जेल पहुंची जांच टीम ने पीड़ित महिला बंदी से बंद कमरे में गहन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान पीड़िता ने अपने बयान में सीधे तौर पर जेल के शीर्ष अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया। महिला का आरोप है कि: जेल के जेलर और जेल अधीक्षक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसके साथ जेल के अंदर यौन शोषण किया। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने अपनी प्रारंभिक तफ्तीश, पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यौन शोषण की इस घटना को सत्य पाया है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार, झालसा को सौंपी जाएगी – जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और पुख्ता बनाने के लिए टीम ने केवल पीड़िता ही नहीं, बल्कि कई अन्य पक्षों के भी बयान दर्ज किए हैं। – पीड़ित महिला बंदी का मुख्य बयान दर्ज किया गया। – जेल के पीएलवी (पारा लीगल वालंटियर) और जेल डॉक्टर के बयान लिए गए। – आरोपी जेल अधिकारियों सहित अन्य संदेहास्पद कर्मियों से पूछताछ की गई। – जेल के सभी वार्डों का बारीकी से निरीक्षण किया गया, ताकि सुरक्षा और सीसीटीवी फुटेज आदि की स्थिति को समझा जा सके। – इस पूरी प्रक्रिया के बाद टीम ने एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर झालसा को भेज दी है। यह रिपोर्ट जल्द ही झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस एसएन प्रसाद के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद दोषियों पर कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाया था मुद्दा बताते चलें कि इस मामले को सबसे पहले राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर होटवार जेल में बंद महिला बंदी के साथ हो रहे अत्याचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। मरांडी ने अपने पत्र में बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा था कि जेल अधीक्षक द्वारा महिला बंदी का यौन शोषण किए जाने के कारण वह गर्भवती हो गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि जेल प्रशासन के रसूखदार लोग इस पूरे मामले को दबाने और सबूतों को मिटाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। पीड़िता को मुफ्त कानूनी सहायता और सुरक्षा के निर्देश मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डालसा सचिव ने बताया कि पीड़ित महिला को कानूनी न्याय दिलाने के लिए पैनल अधिवक्ता के माध्यम से निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करा दी गई है। इसके साथ ही जांच टीम ने जेल प्रशासन को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि, पीड़ित महिला की सुरक्षा और स्वास्थ्य का समुचित ध्यान रखा जाए.उसे जेल के भीतर हर आवश्यक सुरक्षा और सुविधाएं प्रदान की जाएं, ताकि उस पर किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक दबाव न बनाया जा सके।
रांची। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में नौकरी दिलाने के नाम पर झारखंड में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा और हजारीबाग समेत कई इलाकों के करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। मामले की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है, जबकि आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने खलारी थाना में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे और भतीजे को BCCL में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए भरोसा जीत लिया और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तक दिखाए। मेडिकल जांच और ट्रेनिंग का नाटक पीड़ितों के अनुसार, युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया और फिर मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद बायोमीट्रिक हस्ताक्षर और कथित ट्रेनिंग प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। अभ्यर्थियों को पोस्टिंग लिस्ट दिखाकर विश्वास दिलाया गया कि उनकी नौकरी पक्की हो चुकी है, लेकिन बाद में किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला। नेटवर्क मार्केटिंग की तरह चला गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी ठगी को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह चलाया। लोगों को पहले नौकरी का लालच दिया गया और फिर उनसे नए उम्मीदवार जोड़ने को कहा गया। इसी तरह रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे जुटाकर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए गए। बंगाल और धनबाद से जुड़े तार मामले में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी सागर चक्रवर्ती और धनबाद के सिजुआ निवासी मुस्तकीम अंसारी के नाम सामने आए हैं। दोनों खुद को राजनीतिक प्रभाव वाला व्यक्ति बताते थे। पुलिस के अनुसार, कई आरोपियों के मोबाइल बंद हैं और उनकी तलाश जारी है। खलारी थाना पुलिस ने कहा है कि पैसों के लेनदेन का सत्यापन किया जा रहा है और जल्द आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पाकुड़। पाकुड़ जिले के महेशपुर में पुलिस ने एक गैंगरेप मामले का खुलासा किया है। इस मामले में दो नाबालिगों सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी एसपी अनुदीप सिंह ने दी। एसपी ने बताया कि महेशपुर थाना क्षेत्र में 16 मई की रात एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ सात लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। अनुसंधान के बाद गिरफ्तारी महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार के नेतृत्व में एक छापेमारी टीम का गठन किया गया। टीम ने वैज्ञानिक, मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान शुरू किया। छापेमारी के दौरान अविनाश सोरेन, बबूटा सोरेन, अंसार टुडू, बबनु हेंब्रम और कार्तिक मुर्मू को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में दो नाबालिगों को भी निरुद्ध किया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित नाबालिग से आवश्यक जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला था और टीम को इसके त्वरित उद्भेदन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। फिलहाल, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
सिमडेगा। कोलेबिरा थाना क्षेत्र के नवाटोली गांव में शनिवार की भोर करीब चार बजे दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 22 वर्षीय जेबा परवीन को उनके प्रेमी ने घर में घुसकर गोली मार दी, क्योंकि उन्होंने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। हमलावर घटना के बाद फरार हो गया। जेबा परवीन को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया और रांची के रिम्स रेफर किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले तीन-चार दिनों से लगातार जेबा परवीन और उसके परिवार पर शादी का दबाव डाल रहा था। कोलेबिरा पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में डर और आक्रोश फैलाया है और यह दिखाता है कि प्रेम संबंधों में उत्पन्न विवाद कितने खतरनाक रूप ले सकते हैं।
London में एक पूर्व इमाम को महिलाओं और बच्चियों के साथ रेप और यौन शोषण के गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। आरोपी Abdul Halim Khan धार्मिक प्रभाव और अंधविश्वास का इस्तेमाल कर पीड़ितों को डराता था। अदालत में सामने आया कि वह खुद के भीतर “जिन्न” होने और “काला जादू” करने की शक्ति होने का दावा करता था। इसी डर का फायदा उठाकर वह महिलाओं और नाबालिग लड़कियों का शोषण करता था। कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद Snaresbrook Crown Court में हुई सुनवाई के बाद जस्टिस लेस्ली कथबर्ट ने आरोपी को लाइफ इम्प्रिजनमेंट की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि पैरोल पर विचार किए जाने से पहले आरोपी को कम से कम 20 साल जेल में बिताने होंगे। 21 मामलों में दोषी करार अब्दुल हलीम खान को 2004 से 2015 के बीच सात महिलाओं और बच्चियों के साथ रेप, यौन उत्पीड़न और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों समेत कुल 21 मामलों में दोषी पाया गया। जूरी ने उसे 9 रेप, 4 यौन उत्पीड़न और कई गंभीर यौन अपराधों में दोषी ठहराया। बांग्लादेशी मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को बनाया निशाना जांच में सामने आया कि आरोपी ने खास तौर पर पूर्वी लंदन के Tower Hamlets इलाके में रहने वाले बांग्लादेशी मुस्लिम समुदाय की महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाया। उसे पता था कि धार्मिक गुरु होने के कारण समुदाय में उसका प्रभाव है और पीड़ित सामाजिक बदनामी या डर की वजह से उसके खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगी। ‘काला जादू’ का डर दिखाकर करता था धमकी अदालत में बताया गया कि आरोपी पीड़ितों को धमकाता था कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो वह उनके परिवार पर “काला जादू” कर देगा। इसी डर और धार्मिक विश्वास का फायदा उठाकर वह वर्षों तक अपराध करता रहा। 50 से ज्यादा गवाह, लंबी जांच के बाद खुला मामला Metropolitan Police और Crown Prosecution Service ने इस मामले की लंबी जांच की। जांच के दौरान: 50 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए 10 मोबाइल फोन की जांच हुई सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं को समझाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली गई पीड़ितों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनकी गवाही पहले से रिकॉर्ड कराई गई थी। आरोपी ने खुद को बताया निर्दोष पूरी जांच और सुनवाई के दौरान आरोपी लगातार खुद को निर्दोष बताता रहा। उसने आरोपों को साजिश करार दिया और कहा कि बदला लेने के लिए झूठे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अदालत ने सभी सबूतों और गवाहियों के आधार पर उसे दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई। अदालत की टिप्पणी अदालत ने कहा कि आरोपी ने धार्मिक विश्वास और सामाजिक सम्मान का बेहद गलत तरीके से इस्तेमाल किया और कमजोर महिलाओं व बच्चियों का शोषण किया।
महिला ने प्राइवेट बस में गैंगरेप का लगाया आरोप राष्ट्रीय राजधानी New Delhi में एक महिला ने प्राइवेट बस में गैंगरेप का आरोप लगाया है। मामले के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक घटना महिला की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस ने बस भी की जब्त अधिकारियों ने बताया कि घटना में इस्तेमाल की गई बस को भी जब्त कर लिया गया है। जांच में सामने आया है कि बस “Royal Travels & Cargo” नामक कंपनी की थी, जिसका कार्यालय फरीदाबाद में स्थित बताया गया है। पुलिस फिलहाल आरोपियों से पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है। रात में बस में बैठाने का आरोप शिकायत के अनुसार महिला को रात के समय समय पूछने के बहाने बस में बैठाया गया। इसके बाद चलती बस में कई लोगों द्वारा उसके साथ करीब दो घंटे तक दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि बस दिल्ली के रानी बाग इलाके में कई किलोमीटर तक घूमती रही। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले की तुलना निर्भया कांड से करते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता की स्थिति बनी हुई है। पुलिस जांच जारी दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और सभी जरूरी सबूत जुटाए जा रहे हैं। फिलहाल दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
रामगढ़। रामगढ़ के चर्चित रजरप्पा ज्वेलरी लूटकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्य आरोपी सुभानी अंसारी उर्फ ललका की पत्नी और दामाद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर लूटे गए सोना-चांदी के आभूषण भी बरामद किए हैं। इस मामले में अब तक कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दिनदहाड़े हुई थी करोड़ों की लूट गौरतलब है कि 21 अप्रैल 2026 को Shiv Shankar Jewellers में हथियारबंद अपराधियों ने दिनदहाड़े धावा बोलकर करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए थे। घटना रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर-रजरप्पा मोड़ पर हुई थी। लूट के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। घटना के बाद Mukesh Kumar Lunayat के निर्देश पर SIT का गठन किया गया था। पुलिस ने 48 घंटे के भीतर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 180 आभूषण, एक पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस, तीन बाइक और एक चारपहिया वाहन बरामद किया था। गुप्त सूचना पर हुई गिरफ्तारी पुलिस को 10 मई को गुप्त सूचना मिली थी कि मुख्य आरोपी के घर में लूट का सामान छिपाकर रखा गया है। इसके बाद छापेमारी कर बरकट्ठी निवासी नाजमा खातून और उसके दामाद शहनवाज हुसैन को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके घर से करीब 49 ग्राम सोना और 1.35 किलोग्राम चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। फरार मास्टरमाइंड की तलाश तेज रामगढ़ एसपी ने बताया कि मामले की जांच और छापेमारी लगातार जारी है। इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड का मास्टरमाइंड माने जा रहे कुख्यात अंतरराज्यीय अपराधी Vibhash Paswan की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर बाकी लूटे गए आभूषण भी बरामद कर लिए जाएंगे।
बोकारो। बोकारो पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नया मोड़ बस स्टैंड से 47 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, तस्कर इस अवैध गांजा की खेप को बस के माध्यम से बिहार भेजने की तैयारी कर रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में गांजा जब्त कर लिया गया, जबकि तस्कर मौके से फरार हो गए। बरामद गांजा की कीमत लगभग 5 से 7 लाख रुपये आंकी गई है। गुप्त सूचना के बाद बनी विशेष टीम सिटी डीएसपी Alok Ranjan ने बताया कि 9 मई की शाम पुलिस अधीक्षक Nathu Singh Meena को सूचना मिली थी कि बीएस सिटी थाना क्षेत्र स्थित नया मोड़ बस स्टैंड से अवैध गांजा बिहार भेजा जाने वाला है। सूचना मिलते ही एसपी के निर्देश पर डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। दो प्लास्टिक बोरों से मिला गांजा छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने पवनसुत बस पड़ाव के चबूतरे पर संदिग्ध अवस्था में रखे दो प्लास्टिक के बोरों की तलाशी ली। जांच में दोनों बोरों से 47 पैकेट में बंद करीब 47 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक तस्कर इसे बस के जरिए बिहार भेजने की फिराक में थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज इस मामले में बीएस सिटी थाना कांड संख्या 89/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान दो संदिग्ध तस्करों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
सीवान, एजेंसियां। बिहार के सीवान में सोमवार सुबह अचानक बड़ी पुलिस कार्रवाई हुई। इससे राज्य में हड़कंप मच गया है। यहां सीवान में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और RJD विधायक ओसामा शहाब के आवास पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान DIG और SP समेत नगर थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही और पूरे इलाके को घेर लिया गया। पुलिस की यह कार्रवाई एक पुराने जमीन विवाद और कब्जे के आरोपों से जुड़ी बताई जा रही है। सर्च वारंट के साथ छापा शिकायत के आधार पर कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद टीम ने छापा मारा और घर के अंदर दस्तावेजों की जांच शुरू की। सुबह 8 बजे से शुरू हुई छापेमारी जानकारी के मुताबिक पुलिस टीम ने सुबह करीब 8 बजे ओसामा शहाब के नए आवास को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद घर के अंदर तलाशी अभियान चलाया गया और पूछताछ भी की गई। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस कार्रवाई में सीवान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद शामिल रहे। DIG और SP के नेतृत्व में छापा DIG और SP की मौजूदगी में पूरी छापेमारी को अंजाम दिया गया, जिससे मामला और गंभीर माना जा रहा है। ओसामा शहाब पहले से ही कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं और हाल के दिनों में उन पर जमीन विवाद से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। अब इस ताजा रेड के बाद सीवान की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इस कार्रवाई पर नजर बना ली है। छापेमारी के दौरान इलाके में आम लोगों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त बल तैनात रखा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
सीवान, एजेंसियां। बिहार के सीवान में सोमवार सुबह अचानक बड़ी पुलिस कार्रवाई हुई। इससे राज्य में हड़कंप मच गया है। यहां सीवान में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और RJD विधायक ओसामा शहाब के आवास पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान DIG और SP समेत नगर थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही और पूरे इलाके को घेर लिया गया। पुलिस की यह कार्रवाई एक पुराने जमीन विवाद और कब्जे के आरोपों से जुड़ी बताई जा रही है। सर्च वारंट के साथ छापा शिकायत के आधार पर कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद टीम ने छापा मारा और घर के अंदर दस्तावेजों की जांच शुरू की। सुबह 8 बजे से शुरू हुई छापेमारी जानकारी के मुताबिक पुलिस टीम ने सुबह करीब 8 बजे ओसामा शहाब के नए आवास को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद घर के अंदर तलाशी अभियान चलाया गया और पूछताछ भी की गई। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस कार्रवाई में सीवान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद शामिल रहे। DIG और SP के नेतृत्व में छापा DIG और SP की मौजूदगी में पूरी छापेमारी को अंजाम दिया गया, जिससे मामला और गंभीर माना जा रहा है। ओसामा शहाब पहले से ही कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं और हाल के दिनों में उन पर जमीन विवाद से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। अब इस ताजा रेड के बाद सीवान की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इस कार्रवाई पर नजर बना ली है। छापेमारी के दौरान इलाके में आम लोगों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त बल तैनात रखा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
शिलॉन्ग कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उठे कई सवाल इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय के शिलॉन्ग स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार में गहरा आक्रोश और दुख देखने को मिल रहा है। कोर्ट से जमानत, लेकिन सवालों के घेरे में फैसला जानकारी के मुताबिक, सोनम रघुवंशी ने लीगल एड सेल के माध्यम से जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया से जुड़े कुछ तकनीकी कारणों के आधार पर यह निर्णय लिया गया। हालांकि, इस फैसले ने पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। राजा के परिवार का दर्द: “इंसाफ की उम्मीद टूट गई” राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने कोर्ट के फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा था, लेकिन यह फैसला बेहद निराश करने वाला है। उनका कहना है कि यदि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं, तो उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी। उन्होंने यहां तक कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। भाई का आरोप: “गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामी बनी आधार” राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि सोनम को जमानत इसलिए मिली क्योंकि पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के समय आवश्यक प्रक्रिया और कारणों का सही उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि अब वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। क्या है पूरा मामला? यह मामला इंदौर के राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस से जुड़ा है। आरोप है कि 21 मई 2025 को शादी के बाद राजा और उनकी पत्नी सोनम हनीमून के लिए शिलॉन्ग गए थे। कुछ दिनों बाद दोनों लापता हो गए। बाद में 2 जून को राजा का शव सोहरा इलाके के एक झरने के पास गहरी खाई से बरामद हुआ था। इस मामले में सोनम रघुवंशी सहित कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन पर साजिश और हत्या के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि सभी आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। आगे क्या होगा? परिवार का कहना है कि वे इस फैसले को चुनौती देंगे और उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। वहीं, मामला अब फिर से कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
चाईबासा। चाईबासा के मंझारी थाना क्षेत्र के कासिया गांव में एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने अपनी 65 वर्षीय भाभी पार्वती भूमिज की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। शुरुआत में मृतका की मौत को सामान्य माना जा रहा था, लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान गर्दन और गाल पर गहरे चोट के निशान दिखने से परिजनों को शक हुआ। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूला जुर्म पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और संदेह के आधार पर मृतका के देवर दुलाई भूमिज को हिरासत में लिया। सख्त पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच जारी है। पहले भी कर चुका है पत्नी की हत्या पुलिस के अनुसार आरोपी का आपराधिक इतिहास काफी गंभीर रहा है। वर्ष 2011 में उसने अपनी पत्नी इंद्रावती भूमिज की हत्या मसाला पीसने वाले पत्थर से वार कर की थी। इस मामले में उसे 13 साल की उम्रकैद की सजा हुई थी। हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद वह गांव लौटा था और अब उसने इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या के कारणों की जांच जारी फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने अपनी भाभी की हत्या क्यों की। गांव में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। हजारीबाग में सड़क हादसे में वायुसेना जवान की मौत वहीं हजारीबाग में एक सड़क हादसे में वायुसेना के जवान दीपक कुमार (34) की मौत हो गई। बस और मोटरसाइकिल की टक्कर में उनकी मौके पर ही जान चली गई। वह छुट्टी पर घर आए थे और एक शादी में जा रहे थे।
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले के आसनसोल से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान को 10 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लालच देकर जाल में फंसाया यह घटना रविवार दोपहर की है, जब लाल बाजार इलाके के पास दो छोटी बच्चियां (उम्र 5 और 10 वर्ष) कच्चे आम चुनने के लिए सरकारी क्वार्टरों की ओर गई थीं। आरोपी जवान, जिसकी पहचान रमाकांत विश्वकर्मा (40) के रूप में हुई है, ने बच्चियों को अधिक आम देने का प्रलोभन दिया। वह उन्हें अपनी स्कूटी पर बैठाकर एक सुनसान क्वार्टर में ले गया, जहाँ उसने बड़ी बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची की बहादुरी और लोगों का गुस्सा बच्ची द्वारा शोर मचाए जाने पर आरोपी घबराकर मौके से फरार हो गया। जैसे ही यह खबर स्थानीय निवासियों तक पहुँची, क्षेत्र में भारी जनाक्रोश फैल गया। न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों ने: शीतलपुर गेट नंबर 3 पर सड़क जाम कर दी। CISF कैंप के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई पीड़िता के पिता और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई। आरोपी जवान को कुछ ही घंटों के भीतर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस के अनुसार: आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोपी चुनाव ड्यूटी पर नहीं, बल्कि कोयला खदानों की सुरक्षा के नियमित कार्य में तैनात था। वर्तमान में स्थिति को देखते हुए पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
चित्रकूट में दर्दनाक घटना, दोनों लड़कियां गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां यमुना नदी में स्नान के दौरान कुछ युवकों द्वारा वीडियो बनाए जाने के बाद मानसिक तनाव में आई दो किशोरियों ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। यमुना में नहाते समय बनाया गया वीडियो पुलिस के मुताबिक, दोनों किशोरियां गुरुवार को यमुना नदी में स्नान करने गई थीं। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनकी तस्वीरें खींचीं और वीडियो बना लिया। इस घटना की जानकारी जब घरवालों को मिली तो उन्होंने लड़कियों को डांट-फटकार लगाई। मानसिक तनाव में उठाया खौफनाक कदम परिवार की डांट से आहत होकर दोनों किशोरियों ने शुक्रवार को जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत पहाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। बेहतर इलाज के लिए बांदा रेफर प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को पहले कर्वी जिला अस्पताल भेजा गया। वहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा रेफर कर दिया गया। फिलहाल दोनों का इलाज जारी है। तीन टीमों का गठन, आरोपियों की तलाश तेज चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन अलग-अलग पुलिस टीमें बनाई गई हैं। पहली टीम अस्पताल में इलाज पर नजर रख रही है। दूसरी टीम पीड़ित परिवार के संपर्क में है। तीसरी टीम वीडियो बनाने वालों की पहचान कर उनकी तलाश में जुटी है। पुलिस ने शुरू की गहन जांच पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वीडियो बनाने वाले लोगों की तलाश के लिए आसपास के क्षेत्रों में छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शांति निकेतन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महिदापुर इलाके में, एक होम (आश्रय गृह) में रहने वाली नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कर्मभूमि पर हुई इस दरिंदगी ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। "काकू, मैं आपकी बेटी जैसी हूं": पीड़िता की रुलाई अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रही पीड़िता ने जो आपबीती सुनाई, वह किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। पीड़िता के अनुसार, आरोपी वे लोग थे जिन्हें वह 'काकू' (चाचा) कहकर बुलाती थी और पिता समान मानती थी। नाबालिग ने बताया कि वह दरिंदों के सामने गिड़गिड़ाती रही और उनके पैर पकड़कर गुहार लगाती रही कि वह उनकी अपनी बेटी की तरह है। लेकिन उन हैवानों पर मासूम की चीखों का कोई असर नहीं हुआ; वे उसकी बेबसी का मजाक उड़ाते रहे और बारी-बारी से उसके साथ कुकर्म किया। प्रमुख घटनाक्रम और ग्रामीणों का आक्रोश आंदोलन की चेतावनी: घटना की खबर मिलते ही महिदापुर के ग्रामीण उग्र हो गए। उन्होंने शांति निकेतन थाने का घेराव किया और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। अल्टीमेटम: प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर सभी अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। अस्पताल में इलाज: पीड़िता की गंभीर शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे बोलपुर उप-मंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिसिया कार्रवाई की स्थिति मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच तेज कर दी गई है और संदिग्धों की पहचान भी कर ली गई है। हालांकि, ताजा जानकारी मिलने तक आधिकारिक रूप से किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीण इस बात से सबसे अधिक आहत हैं कि यह घटना विश्व भारती जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के निकट घटी है, जो शांति और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।
19 वर्षीय युवती ने लगाए गंभीर आरोप, आरोपी निजी कंपनी में करता था काम मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी पूर्व महिला सहकर्मी को लगातार परेशान करने, उसका पीछा करने और अश्लील तस्वीरें व वीडियो भेजने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। ऑफिस WhatsApp ग्रुप से मिला नंबर पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसने जिस टेली-कॉलिंग कंपनी में काम किया था, वहां आरोपी से कभी सीधे बातचीत नहीं हुई थी। लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद आरोपी ने उसका मोबाइल नंबर कथित तौर पर ऑफिस के WhatsApp ग्रुप से हासिल किया और उसे मैसेज व कॉल करना शुरू कर दिया। लगातार अश्लील मैसेज और मानसिक प्रताड़ना युवती के अनुसार, आरोपी लगातार आपत्तिजनक संदेश और अश्लील सामग्री भेजता रहा। उसने कई बार चेतावनी दी, लेकिन आरोपी ने हरकतें बंद नहीं कीं। इसके बाद मामला और गंभीर होता चला गया। इंटरफेथ रिलेशन का दबाव डालने का आरोप पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी उस पर एक अंतरधार्मिक संबंध बनाने का दबाव डालता था। उसके मुताबिक आरोपी ने कई बार आपत्तिजनक बातें कही और उसे रिश्ते के लिए मनाने की कोशिश की। गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने आरोपी के खिलाफ महिला की गरिमा भंग करने, पीछा करने और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) से जुड़े कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77 (गोपनीयता का उल्लंघन), 78 (पीछा करना), 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्द या व्यवहार) समेत IT एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं मामले की जांच जारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहराई से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी ने अन्य महिलाओं को भी इसी तरह परेशान किया था। यह घटना महाराष्ट्र में चल रहे एक अन्य संवेदनशील मामले के बीच सामने आई है, जिसमें IT सेक्टर की कुछ कंपनियों में महिला कर्मचारियों से जुड़े उत्पीड़न के आरोप भी चर्चा में हैं।
रांची। रांची स्थित धुर्वा थाना क्षेत्र में जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में हुए गार्ड हत्याकांड का पुलिस ने बेहद तेजी से खुलासा कर दिया है। इस घटना ने पूरे इलाके में डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया था, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने लोगों को राहत दी है। तेज कार्रवाई से पुलिस को मिली सफलता घटना की जानकारी मिलते ही धुर्वा थाना और रांची पुलिस की कई टीमों को जांच में लगाया गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगातार छापेमारी की, संदिग्धों से पूछताछ की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। महज 10 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी समेत सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत भी जब्त किए हैं, जिससे जांच को मजबूत आधार मिला है। मंदिर परिसर में हत्या से बढ़ी चिंता मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मंदिर परिसर में जुट गई और लोगों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। इस वारदात से इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था, जिसे पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने काफी हद तक नियंत्रित किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आएंगे अहम खुलासे रांची पुलिस ने बताया कि मामले का सफल उद्भेदन कर लिया गया है। एसएसपी राकेश रंजन 25 अप्रैल को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हत्या के कारण, आरोपियों की भूमिका और पूरी जांच प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा करेंगे। इस खुलासे से मामले के पीछे की असली वजह सामने आने की उम्मीद है।
कर्नाटक के बागलकोट जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अवैध संबंध के शक में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की पड़ोसी के घर में कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। मृतका की पहचान 32 वर्षीय सोमू के रूप में हुई है। वह बुधवार रात टोडलाबागी गांव में अपने पड़ोसी के घर गई थीं। इसी दौरान आरोपी पति मलप्पा वहां पहुंचा और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। पुलिस के अनुसार, मलप्पा को अपनी पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने का शक था। उसे सूचना मिली थी कि जिस समय उसकी पत्नी पड़ोसी के घर पर थी, उसी दौरान वह व्यक्ति भी वहां आया था। गुस्से में मलप्पा मौके पर पहुंचा और विवाद के दौरान पत्नी पर हमला कर दिया। हमले में सोमू की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि मृतका की पहले हार्ट बाईपास सर्जरी हो चुकी थी। वह अपने पीछे 9 और 7 साल के दो बच्चों को छोड़ गई हैं। Bagalkote पुलिस ने आरोपी मलप्पा को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है।
दिल्ली के चर्चित IRS अधिकारी की बेटी हत्याकांड में जांच के दौरान रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी राहुल मीणा ने कथित तौर पर 22 वर्षीय UPSC अभ्यर्थी के साथ दुष्कर्म के बाद उसे छत से नीचे घसीटा और बायोमेट्रिक लॉकर खोलने के लिए उसकी उंगलियों का इस्तेमाल करने की कोशिश की। जब फिंगरप्रिंट से लॉकर नहीं खुला, तो आरोपी ने स्क्रूड्राइवर और अन्य औजारों की मदद से उसे तोड़ डाला। इसके बाद वह नकदी और जेवरात लेकर फरार हो गया। CCTV में कैद हुई पूरी वारदात पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी को घर की सुरक्षा व्यवस्था और अंदरूनी बनावट की पूरी जानकारी थी। वह सुबह उस समय घर में दाखिल हुआ, जब पीड़िता के माता-पिता जिम गए हुए थे। CCTV फुटेज में वह घर में प्रवेश करते और करीब एक घंटे बाद कपड़े बदलकर बैग के साथ निकलते दिखाई दिया। कोर्ट में कबूला गुनाह गिरफ्तारी के बाद दिल्ली की अदालत में पेश किए जाने पर राहुल मीणा ने कहा, "मुझसे अपराध हो गया... गलती हो गई।" कोर्ट ने उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। 12 घंटे में दो राज्यों में दो रेप जांच में यह भी सामने आया है कि दिल्ली आने से कुछ घंटे पहले आरोपी ने राजस्थान के अलवर में भी एक महिला से कथित दुष्कर्म किया था। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। फिलहाल आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, हत्या और लूट समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
14 साल की लड़की की हत्या केस में नए गंभीर आरोप अमेरिका में इंडी पॉप सिंगर D4vd (असली नाम डेविड बर्क) से जुड़े हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में नया मोड़ सामने आया है। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने दावा किया है कि आरोपी के iCloud अकाउंट और फोन से बड़ी मात्रा में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) मिला है। 21 वर्षीय सिंगर पर 14 साल की लड़की सेलिस्टे रिवास हर्नांडेज़ की हत्या का आरोप है, जिनके शरीर के टुकड़े सितंबर 2025 में उनकी टेस्ला कार से बरामद हुए थे। अदालत में खुलासा: iCloud में 8 टेराबाइट डेटा लॉस एंजिल्स कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजकों ने बताया कि आरोपी के डिजिटल डिवाइसेज़ से “अत्यंत विशाल मात्रा” में डेटा मिला है। iCloud अकाउंट में लगभग 8 टेराबाइट डेटा पाया गया अभी तक केवल 1 टेराबाइट डेटा की जांच पूरी हुई है बाकी डेटा में क्या है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है अधिकारियों के अनुसार, डेटा की मात्रा इतनी अधिक है कि जांच में काफी समय लग रहा है। संवेदनशील डिजिटल सबूत, सुरक्षित सिस्टम पर जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि सभी डिजिटल फाइलें सीधे वकीलों को नहीं दी जा सकतीं। इसके बजाय, बचाव पक्ष के वकीलों को विशेष सुरक्षित सिस्टम के जरिए न्यायिक सुविधा केंद्र में जाकर सबूत देखने की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा वायरटैप रिकॉर्डिंग और ग्रैंड जूरी गवाही जैसे अन्य डिजिटल सबूत भी अभी सील (sealed) हैं और जल्द खुल सकते हैं। हत्या का आरोप और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खुलासे प्रोसीक्यूटर्स के अनुसार, पीड़िता सेलिस्टे हर्नांडेज़ की मौत कई गंभीर चोटों के कारण हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि: शरीर पर तेज धार वाले हथियार से कई वार किए गए छाती, पेट और लिवर को गंभीर नुकसान हुआ शरीर के अंगों को क्षत-विक्षत किया गया सटीक मृत्यु समय अभी तक स्पष्ट नहीं है कैसे सामने आया मामला? रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता का शव सितंबर 2025 में एक टेस्ला कार से बरामद हुआ था, जो आरोपी सिंगर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। यह कार कई हफ्तों से एक इलाके में खड़ी थी। स्थानीय लोगों को बदबू आने पर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद जांच में यह भयावह मामला सामने आया। रिश्ते और अपहरण की जांच भी जारी जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि आरोपी और पीड़िता के बीच कथित तौर पर संबंध थे। हालांकि यह पहलू अभी अदालत में जांच के अधीन है। पीड़िता पहले अप्रैल 2024 से लापता थी, और उसके लापता होने से लेकर घटनास्थल तक पहुंचने की पूरी कड़ी अभी स्पष्ट नहीं है। आरोपी ने आरोपों से किया इनकार डेविड बर्क ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने हत्या, यौन अपराध और शव को क्षत-विक्षत करने जैसे सभी आरोपों से इनकार किया है। डिजिटल सबूतों से गहराता केस यह मामला अब केवल हत्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भारी मात्रा में डिजिटल सबूतों और गंभीर आपराधिक आरोपों की वजह से और जटिल होता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब iCloud डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आधार पर केस को आगे बढ़ा रही हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।