धनबाद। झारखंड पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए धनबाद के वासेपुर में फरार गैंगस्टर हैदर अली उर्फ प्रिंस खान के ठिकाने पर बुलडोजर चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने उसके कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश और पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। संगठित अपराध पर शिकंजा कसने की मुहिम धनबाद पुलिस का कहना है कि प्रिंस खान लंबे समय से फरार है और उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और आपराधिक धमकी सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। हाल के दिनों में कथित रंगदारी और धमकी के मामलों के बाद उसके नेटवर्क पर कार्रवाई और तेज कर दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि गैंग के अन्य सदस्यों और सहयोगियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। सुरक्षा के बीच चला अभियान बुलडोजर कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रशासन ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया और भविष्य में भी संगठित अपराध के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
धनबाद। झारखंड के धनबाद में सक्रिय दो कथित आपराधिक गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वायरल पोस्ट में राहुल सिंह ने गैंगस्टर प्रिंस खान को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है। पोस्ट में राहुल सिंह ने लिखा कि "तुम दुनिया के जिस कोने में रहोगे, वहीं मारेंगे" और अपने देश, काम तथा लोगों से उलझने का परिणाम जल्द भुगतने की चेतावनी दी। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद अपराध जगत में हलचल तेज हो गई है और संभावित गैंगवार की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं। धनबाद का जिक्र कर दी चेतावनी, बढ़ी टकराव की चर्चा राहुल सिंह ने अपने पोस्ट में धनबाद का उल्लेख करते हुए प्रिंस खान को होश में रहने की नसीहत भी दी। उसने दावा किया कि "धनबाद से मारते-मारते पाकिस्तान पहुंच जाएंगे।" हालांकि सोशल मीडिया पर किए गए इन दावों और धमकियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लंबे समय से दोनों कथित गिरोहों के बीच वर्चस्व को लेकर तनाव की चर्चाएं रही हैं और दोनों पर कारोबारियों से रंगदारी मांगने के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर आई यह धमकी दोनों पक्षों के बीच बढ़ते टकराव का संकेत मानी जा रही है। पुलिस का आधिकारिक बयान नहीं, सुरक्षा एजेंसियां रख रही नजर वायरल पोस्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल झारखंड पुलिस या किसी अन्य जांच एजेंसी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की निगरानी की जा रही है और आवश्यक सूचनाएं जुटाई जा रही हैं। पुलिस की ओर से किसी संभावित कार्रवाई या जांच की पुष्टि अभी नहीं की गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर झारखंड में सक्रिय संगठित अपराध, रंगदारी नेटवर्क और सोशल मीडिया के जरिए दी जा रही खुली धमकियों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर सुरक्षा एजेंसियों की आगामी कार्रवाई और मामले में सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों पर टिकी हुई है।
रांची। रांची में गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर कारोबारियों से रंगदारी मांगने का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला हटिया के चांदनी चौक स्थित एक शराब दुकान के संचालक उमाशंकर सिंह से जुड़ा है। उन्हें व्हाट्सएप कॉल, मैसेज और ऑडियो संदेश के जरिए पांच करोड़ रुपये की रंगदारी देने की धमकी दी गई है। रंगदारी नहीं देने पर कारोबारी और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई है। परिवार को जान से मारने की धमकी शिकायत के अनुसार, धमकी देने वाले ने खुद को गैंगस्टर प्रिंस खान बताया और कारोबारी की निजी जानकारी भी साझा की। संदेश में उनकी गाड़ी का नंबर, कारोबार की जगह और मंदिर जाने के समय का जिक्र किया गया। साथ ही उनकी पत्नी, दोनों बेटों और भतीजे की हत्या कराने की धमकी दी गई। धमकी मिलने के बाद कारोबारी ने जगन्नाथपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दुबई नंबर से आया कॉल पुलिस के अनुसार, धमकी दुबई के मोबाइल नंबर (+971545920432) से दी गई। हटिया डीएसपी नीरज कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और तकनीकी टीम की मदद से कॉल और मैसेज की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि धमकी वास्तव में विदेश से दी गई है या इंटरनेट कॉलिंग के जरिए किसी अन्य स्थान से। एक जैसा है धमकी देने का तरीका पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हाल के दिनों में कारोबारियों को धमकी देने का तरीका लगभग एक जैसा है। पहले देर रात करीब 12 बजे व्हाट्सएप पर धमकी भरा संदेश भेजा जाता है। इसके बाद ऑडियो मैसेज और फिर व्हाट्सएप कॉल कर रंगदारी की मांग की जाती है। कॉल करने वाला हर बार खुद को प्रिंस खान बताता है और इसी दुबई नंबर का इस्तेमाल करता है। क्या है मामला ? गौरतलब है कि इससे पहले 8 जून को रांची के पॉल ज्वेलर्स के संचालक सुमन पॉल से भी इसी नंबर से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राजधानी के कारोबारी वर्ग में चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की तकनीकी और साइबर स्तर पर जांच जारी है तथा दोषियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
रांची। झारखंड में लगातार बढ़ रहे गैंगस्टरों के कारनामे के बाद एटीएस एक्शन में है। झारखंड एटीएस के टारगेट पर राज्य में सक्रिय गैंग और उनसे जुड़े गैंगस्टर हैं। फिलहाल एटीएस ने ऐसे 150 गैंगस्टरों की लिस्ट तैयार की है, जो उसके टारगेट पर हैं। बता दें कि हाल के दिनों में प्रिसं खान, राहुल दुबे और राहुल सिंह के कारनामों के कारण राज्य के व्यवसायी और कारोबारी दहशत में हैं। प्रिसं खान ने तो बीते 5-6 दिनों में रांची के व्यवसायियों से कुल 5 करोड़ से ज्यादा की रंगदारी की मांग कर डाली है। इसके बाद से ही कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। 5 जिलों पर खास फोकस झारखण्ड के पांच जिलों में संगठित अपराध के खिलाफ एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी एटीएस ने कार्रवाई शुरू की है। यह कार्रवाई सीधे तौर पर गैंगस्टर नेटवर्क, उनके गुर्गों और आर्थिक सपोर्ट सिस्टम को खत्म करने को लेकर शुरू हुई हैं। रामगढ़, चतरा, हजारीबाग और लातेहार के साथ-साथ राजधानी रांची में भी एटीएस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। करीब एक दर्जन से ज्यादा एसटीएस की टीमें पिछले 20 दिनों से इन जिलों में सक्रिय हैं और घर-घर जाकर संदिग्धों की जानकारी जुटा रही हैं। 150 से ज्यादा गैंगस्टर टारगेट पर एटीएस द्वारा अब तक लगभग 150 गैंगस्टरों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है, जो कुख्यात अपराधी गिरोहों से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच के दायरे में प्रमुख गैंग नेटवर्क शामिल हैं, जिनमें प्रिंस खान गैंग, राहुल सिंह गैंग, राहुल दुबे नेटवर्क, सुजीत सिन्हा गैंग और अमन साव का नेटवर्क तथा पांडेय गिरोह शामिल हैं। इनमें गुर्गों के साथ-साथ संरक्षण देने वाले लोग और कई मामलों में पारिवारिक सदस्य भी जांच के घेरे में हैं। एटीएस की टीमें सीधे वर्तमान और पूर्व अपराधियों के घर पहुंचकर भौतिक सत्यापन कर रही हैं, ताकि गैंगस्टर नेटवर्क की आर्थिक जड़ों तक पहुंचा जा सके। 2 दर्जन से ज्यादा संदिग्ध गायब जांच के दौरान करीब दो दर्जन लोग अभी तक एटीएस के संपर्क में नहीं आए हैं, जिस पर एजेंसी गंभीर है। उनकी लोकेशन और गतिविधियों को लेकर अलग से ट्रैकिंग की जा रही है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी मांगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सामने आया है जहां शहर के दो प्रमुख कारोबारियों से पांच-पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई है। यहां तक कि रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई है, जिससे कारोबारी समुदाय में भय का माहौल बन गया है। पॉल ज्वेलर्स की संचालिका को धमकी जानकारी के अनुसार, रांची के प्रसिद्ध पॉल ज्वेलर्स की संचालिका सुमन पॉल को चार जून की रात एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को प्रिंस खान बताते हुए कहा कि वह दुबई से बोल रहा है। उसने पांच करोड़ रुपये की मांग की और रकम नहीं देने पर सुमन पॉल तथा उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गयी । बाद में व्हाट्सएप पर भी धमकी भरा मैसेज भेजा गया। मामले को लेकर सुमन पॉल ने लालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। बिल्डर से भी मांगे गए पांच करोड़ रुपये इसी तरह लालपुर निवासी बिल्डर उदय शंकर को भी एक अज्ञात नंबर से संदेश भेजकर पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई। पांच जून की रात मिले इस संदेश में खुद को प्रिंस खान बताने वाले व्यक्ति ने रकम नहीं देने पर गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। इसके बाद उदय शंकर ने भी लालपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई। कारोबारियों में बढ़ी चिंता पुलिस की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि विदेश में बैठा गैंगस्टर अपने नेटवर्क के जरिए रांची के कारोबारियों को निशाना बना रहा है। पिछले दो सप्ताह में होटल संचालकों सहित कई व्यापारियों से रंगदारी मांगने के मामले सामने आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि अब तक शहर के आठ से अधिक कारोबारियों को धमकी भरे कॉल और संदेश मिल चुके हैं। पुलिस ने बढ़ाई निगरानी दोनों मामलों में पुलिस जांच कर रही है और कॉल व मैसेज के स्रोत का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार सामने आ रहे रंगदारी के मामलों ने राजधानी में कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रांची। राजधानी रांची में एक बार फिर गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। शहर के प्रसिद्ध जलजोगा रेस्टोरेंट के मालिक मिहिर घोष से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। रंगदारी नहीं देने पर कारोबारी और उनके पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विदेशी नंबर से आया धमकी भरा संदेश मिहिर घोष के अनुसार, 2 जून की सुबह उन्होंने अपने व्हाट्सएप पर एक विदेशी नंबर से भेजा गया धमकी भरा संदेश देखा। संदेश में खुद को दुबई से बोल रहा गैंगस्टर प्रिंस खान बताते हुए 50 लाख रुपये की "प्रोटेक्शन मनी" की मांग की गई। साथ ही दावा किया गया कि कारोबारी और उनके परिवार की रेकी की जा चुकी है और पैसे नहीं देने पर किसी भी सदस्य को निशाना बनाया जा सकता है। धमकी भरे संदेश में कारोबारी के भाई समीर घोष का भी नाम लिया गया और जल्द समझौता नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। कई बार किए गए कॉल मैसेज भेजने के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए भी कई बार संपर्क करने की कोशिश की। जब कारोबारी ने कॉल रिसीव नहीं किया, तो वॉयस मैसेज भेजकर धमकी दी गई कि यदि पुलिस को सूचना दी गई तो अंजाम और भी गंभीर होगा। इस घटना के बाद से कारोबारी और उनका परिवार भय के माहौल में है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले रांची में इससे पहले भी प्रिंस खान के नाम पर कई कारोबारियों से रंगदारी मांगने के मामले सामने आ चुके हैं। मार्च 2026 में एक दवा कारोबारी से एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। वहीं जनवरी 2026 में एक रेस्टोरेंट कारोबारी को धमकाने के बाद उसके प्रतिष्ठान पर फायरिंग की घटना भी हुई थी, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। पुलिस ने शुरू की जांच रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि जलजोगा रेस्टोरेंट के मालिक से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने की शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और धमकी देने वालों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
धनबाद। कोयलांचल के कुख्यात और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधी प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ धनबाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस की टीम ने वासेपुर क्षेत्र में बड़ी दबिश दी। अदालत से प्राप्त आदेश के आलोक में पुलिस ने प्रिंस खान और उसके करीबी सहयोगी गोपी खान के घर पर सार्वजनिक उद्घोषणा (इश्तेहार) चस्पा की है। यह कदम अपराधियों को आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर देने और उसके बाद उनकी संपत्तियों की कुर्की-जब्ती करने की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालती आदेश के बाद वासेपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई धनबाद के वासेपुर स्थित कमरमखदूमी रोड पर शनिवार को पुलिस की हलचल काफी तेज रही। बैंक मोड़ थाना की पुलिस टीम ने भारी सुरक्षा के बीच प्रिंस खान और गोपी खान के आवासों को चिन्हित कर वहां नोटिस चिपकाया। बैंक मोड़ थाना के एएसआई सुनील कुमार रवि ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि ये दोनों आरोपी कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित हैं और लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं। इश्तेहार चस्पा होने के बाद अब पुलिस जल्द ही अदालत से कुर्की-जब्ती का वारंट प्राप्त कर इनकी संपत्तियों को कुर्क करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। रंगदारी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामलों में है तलाश प्रिंस खान पर धनबाद के विभिन्न थानों में रंगदारी, हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। एएसआई सुनील कुमार रवि के अनुसार, विशेष रूप से बैंक मोड़ थाना कांड संख्या 175/2023 और 277/2023 के तहत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लंबे समय से छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस कानूनी प्रक्रिया से फरार चल रहे अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आरोपी न्यायालय या पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके घरों की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। एसएसपी की दोटूक: अपराधियों की धमकियों से न डरें व्यवसायी इस बड़ी कार्रवाई से एक दिन पहले, शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मासिक अपराध समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में पुलिस कप्तान ने अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और संगठित अपराध के खात्मे के सख्त निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत में एसएसपी ने जिले के व्यवसायियों और आम नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी अपराधी द्वारा मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से दी जाने वाली धमकियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर धमकी को गंभीरता से ले रही है और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और भविष्य की रणनीति प्रिंस खान के विदेश में छिपे होने की आशंकाओं के बीच, धनबाद पुलिस अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि प्रिंस खान से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उच्चस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। पुलिस न केवल जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रही है, बल्कि तकनीकी सर्विलांस और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से भी अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। जिले में भय का माहौल पैदा करने वाले संगठित सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस पहले से अधिक आक्रामक और त्वरित कार्रवाई करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि कोयलांचल में शांति व्यवस्था बनी रहे।
मुठभेड़ के बाद पुलिस का एक्शन, आरोपियों को रांची लाया गया धनबाद: झारखंड में अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गुर्गों को धनबाद से रांची शिफ्ट कर दिया गया है। ये सभी आरोपी रांची एयरपोर्ट स्थित एक रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में शामिल बताए जा रहे हैं। रांची एयरपोर्ट थाना की पुलिस टीम रविवार को धनबाद पहुंची और जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दो आरोपियों को अपने साथ रांची ले गई। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भागाबांध में हुई थी पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ जानकारी के मुताबिक, 16 मार्च को धनबाद के भागाबांध इलाके में पुलिस और प्रिंस खान गिरोह के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस एनकाउंटर में तीन अपराधी घायल हो गए थे। घायलों में पलामू के चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ मनीष उर्फ कुबेर और वासेपुर के लाला टोला निवासी अफजल अमन उर्फ बाबर उर्फ राजा खान शामिल हैं। इनके अलावा विक्की डोम भी इस मुठभेड़ में घायल हुआ था। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही रांची भेजे गए आरोपी मुठभेड़ के बाद सभी घायलों को इलाज के लिए धनबाद के SNMMCH अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज पूरा होने के बाद जैसे ही उन्हें छुट्टी मिली, रांची पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और रांची शिफ्ट कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से रांची में पूछताछ की जाएगी, जिससे मामले के कई अहम खुलासे हो सकते हैं। एक आरोपी पहले ही भेजा जा चुका है जेल इस केस में घायल तीसरे आरोपी विक्की डोम को धनबाद पुलिस पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज चुकी है। वहीं बाकी आरोपियों को अब रांची लाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। रेस्टोरेंट में फायरिंग और हत्या का गंभीर आरोप पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों पर रांची एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट में फायरिंग करने और एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मुठभेड़ के जरिए इन्हें पकड़ लिया था। अब इस पूरे मामले में पुलिस अन्य फरार अपराधियों की भी तलाश कर रही है। अपराधियों पर सख्ती जारी, पुलिस का अभियान तेज झारखंड पुलिस लगातार संगठित अपराध के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। इस कार्रवाई को भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
धनबाद: झारखंड के धनबाद में हाल ही में हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद वासेपुर गैंग के नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पूछताछ में गिरफ्तार अपराधियों ने बताया कि कुख्यात गैंगस्टर Prince Khan इस समय पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहां से अपने गिरोह का संचालन कर रहा है। पाकिस्तान में बदली पहचान, आतंकियों से संपर्क की आशंका पुलिस सूत्रों के अनुसार, Prince Khan ने अपना नाम बदलकर “फैज” रख लिया है और वह पाकिस्तान के बहावलपुर में रह रहा है। जांच में सामने आया है कि उसे आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed से समर्थन मिलने की आशंका है। गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल से एक पाकिस्तानी पहचान पत्र भी मिला है, जिसमें उसका नाम “फैज खान” दर्ज है और पता बहावलपुर का बताया गया है। यह इलाका लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है। क्रिप्टो के जरिए हर महीने 1 करोड़ की वसूली पूछताछ में बड़ा खुलासा यह हुआ कि गैंग द्वारा वसूली गई रकम का करीब 1 करोड़ रुपये हर महीने Prince Khan तक पहुंचाया जाता है। यह पैसा सीधे बैंकिंग सिस्टम से नहीं बल्कि क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ट्रांसफर किया जाता है। पुलिस जांच में 65 संदिग्ध बैंक खातों का भी पता चला है, जिनके जरिए इस अवैध नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कुछ खातों से जेल में बंद अपराधी Sujit Sinha के रिश्तेदारों तक भी पैसे भेजे जाने की जानकारी मिली है। गिरोह का ‘मैनेजर’ बना कुबेर पलामू के चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ कुबेर इस पूरे नेटवर्क का अहम कड़ी बताया जा रहा है। वह Sujit Sinha और Prince Khan के बीच मीडिएटर के रूप में काम करता था। कुबेर ही व्यापारियों की जानकारी जुटाता, धमकी भरे संदेश तैयार करता और ऑडियो क्लिप एडिट कर भेजता था। साथ ही रंगदारी से मिली रकम का पूरा हिसाब-किताब भी वही संभालता था। रांची तक फैला नेटवर्क, कई लोग रडार पर जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने धनबाद और बोकारो के अलावा राजधानी रांची में भी अपना नेटवर्क फैला लिया था। रांची में स्थानीय स्तर पर कुछ लोग व्यापारियों की जानकारी जुटाने और वसूली का दबाव बनाने का काम कर रहे थे। पुलिस अब इन संदिग्धों की तलाश में जुट गई है और उनके खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा किए जा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।