Abbas Araghchi

Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf and Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi pay emotional tribute to former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei at Tehran's Grand Mosalla.
खामेनेई को अंतिम विदाई: गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद

तेहरान: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में देश के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेता भावुक नजर आए। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ की आंखों में आंसू दिखाई दिए, जबकि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भी श्रद्धांजलि के दौरान भावुक हो गए। तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में खामेनेई का ताबूत अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसे ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से सजाया गया था। श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग और वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचे। विदाई सभा में उमड़ा जनसैलाब श्रद्धांजलि समारोह में गालिबाफ और अराघची समेत कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, धार्मिक नेता और सैन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रार्थना के दौरान गालिबाफ हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दिए और अंतिम विदाई देते समय भावुक हो गए। अराघची, जो हाल के वर्षों में अमेरिका के साथ कूटनीतिक वार्ताओं में ईरान का प्रमुख चेहरा रहे हैं, भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान गहरे शोक में दिखाई दिए। गालिबाफ की जनता से अपील श्रद्धांजलि सभा के दौरान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता की उपस्थिति दुनिया को यह संदेश देगी कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता की विरासत के साथ खड़ा है। छह दिन तक चलेंगे अंतिम संस्कार कार्यक्रम सरकारी कार्यक्रम के अनुसार खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े आयोजन छह दिनों तक जारी रहेंगे। अधिकारियों का अनुमान है कि इन कार्यक्रमों में 1.5 से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। इसे देखते हुए तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। तेहरान से मशहद तक निकलेगा अंतिम यात्रा का काफिला कार्यक्रम के तहत: तेहरान की सड़कों पर अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद पवित्र शहर कोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा। 9 जुलाई को पार्थिव शरीर को उनके गृहनगर मशहद ले जाया जाएगा। वहीं इमाम रज़ा दरगाह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इसके अलावा पड़ोसी देश इराक के शिया धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों नजफ और कर्बला में भी श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। क्षेत्रीय सुरक्षा पर नजर अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दौरान बड़ी भीड़ और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए पूरे देश में हाई सिक्योरिटी अलर्ट लागू किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों और जुलूस मार्गों पर विशेष निगरानी रख रही हैं।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu responds to reports alleging plans to target Iranian negotiators during US-Iran peace talks.
ईरानी वार्ताकारों की हत्या की साजिश वाली रिपोर्ट पर इजराइल का खंडन, बोला- 'यह पूरी तरह फेक न्यूज'

तेल अवीव: इजराइल ने अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान ईरान के वरिष्ठ वार्ताकारों को निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस रिपोर्ट को "पूरी तरह झूठा" और "फेक न्यूज" करार दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि रिपोर्ट का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट में क्या कहा गया था? अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कुछ वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि इजराइल कथित तौर पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को निशाना बनाने की योजना बना सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता ईरान की ओर से युद्धविराम और शांति वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। अमेरिका की चिंता का दावा रिपोर्ट में कहा गया था कि अप्रैल में चल रही वार्ताओं के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ईरानी वार्ताकारों पर हमला हुआ तो शांति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है और क्षेत्र में संघर्ष दोबारा तेज हो सकता है। इसी कारण अमेरिका ने कथित तौर पर क्षेत्र के कुछ देशों के माध्यम से ईरान को संभावित खतरे के प्रति सतर्क करने का प्रयास किया था। संघर्ष और खुफिया सहयोग को लेकर भी दावा रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी तथा इस अभियान में अमेरिकी खुफिया जानकारी का उपयोग किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ट्रंप-नेतन्याहू संबंधों का भी जिक्र रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजराइल के करीबी संबंधों के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2026 के दौरान लेबनान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर कई मौकों पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके आधार पर रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि क्षेत्रीय तनाव और शांति वार्ता को लेकर दोनों सहयोगी देशों के बीच कुछ मतभेद उभर सकते हैं। इजराइल ने किया स्पष्ट इनकार इजराइली सरकार ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल इस मामले पर अमेरिका या ईरान की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Iranian and U.S. officials engage in diplomatic efforts amid Middle East tensions, as reports claim senior Iranian negotiators faced alleged security threats during peace talks.
शांति वार्ता के बीच ईरानी नेताओं पर हमले की साजिश! रिपोर्ट में बड़ा दावा, इजरायल की 'टारगेट लिस्ट' में थे अराघची और गालिबाफ

तेहरान/वॉशिंगटन: इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते पर बातचीत के दौरान इजरायल कथित तौर पर ईरान के शीर्ष वार्ताकारों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा था। हालांकि, इन दावों की किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बड़ा दावा अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघचीऔर संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ कथित तौर पर इजरायल की टारगेट लिस्ट में शामिल थे। दोनों नेता युद्धविराम और शांति वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को आशंका थी कि यदि इन नेताओं पर हमला होता है तो शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो सकती है। अमेरिका ने जताई थी चिंता रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में शुरू हुई वार्ताओं के दौरान वॉशिंगटन ने क्षेत्र के कुछ मित्र देशों के जरिए ईरान को संभावित सुरक्षा खतरे की जानकारी भी पहुंचाई थी। अमेरिकी अधिकारियों को डर था कि वार्ता में शामिल नेताओं पर किसी भी तरह का हमला पूरे कूटनीतिक प्रयास को पटरी से उतार सकता है। ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति का दावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाना युद्ध की शुरुआत से ही इजरायल की कथित रणनीति का हिस्सा रहा है। दावे के मुताबिक, इजरायल की सूची में वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी जैसे अन्य प्रमुख नेताओं के नाम भी शामिल थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी सुरक्षा का खतरा रिपोर्ट के अनुसार, इसी वर्ष अप्रैल में जब अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ वार्ता के सिलसिले में इस्लामाबाद पहुंचे थे, तब भी उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई थी। बताया गया है कि पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को अपने लड़ाकू विमानों की सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। वापसी के दौरान ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने कथित खुफिया सूचना के आधार पर विमान को संभावित खतरे की चेतावनी दी। तेहरान की जगह मशहद में उतारा गया विमान रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संभावित सुरक्षा खतरे को देखते हुए ईरानी विमान को तेहरान के बजाय मशहद हवाई अड्डे पर उतारा गया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने सड़क मार्ग से करीब आठ घंटे की यात्रा कर तेहरान पहुंचकर अपना सफर पूरा किया। आधिकारिक पुष्टि नहीं रिपोर्ट में किए गए सभी दावों की अब तक स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो इजरायल, न अमेरिका और न ही ईरान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की गई है। ऐसे में इन दावों को फिलहाल मीडिया रिपोर्ट के तौर पर ही देखा जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaks as Iran warns of halting US talks following American military strikes and rising tensions in the Gulf.
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन-कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले; वार्ता रोकने की चेतावनी

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पूरी तरह रोक दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा विवाद ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संचालन और सुरक्षा पर उसका नियंत्रण है तथा उसकी सीधी भागीदारी के बिना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का आरोप है कि अंतरिम समझौते के बावजूद कुछ देशों ने उसकी भूमिका को नजरअंदाज करते हुए जलडमरूमध्य में नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश की, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। ओमान मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भी हमले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित ओमान समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर भी दो बार हमले किए हैं। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जलमार्ग को वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानता रहा है। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस की लगभग पांचवें हिस्से की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी, इसलिए क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विदेश मंत्री अराघची का सख्त संदेश इराक यात्रा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से हालात और खराब होंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की मौजूदा व्यवस्था से अलग कोई नया तंत्र लागू करने की कोशिश की गई, तो इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में देरी होगी और क्षेत्रीय टकराव और बढ़ सकता है। कुवैत ने ड्रोन और मिसाइलें मार गिराने का दावा किया कुवैत की सेना के अनुसार, रविवार सुबह अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और कई ड्रोन को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। कुवैत में अमेरिकी सेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है, जिसके कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बहरीन में रिहायशी इमारत को नुकसान बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमलों के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हुई। इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई। सरकार की ओर से जारी तस्वीरों में इमारत की ऊपरी मंजिल को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दिया। बहरीन ने हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, समुद्र में एक व्यापारी पोत पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार नेटवर्क, हवाई रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों सहित कई रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है। वार्ता पर मंडराया संकट ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहता है, तो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह ठप हो सकती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaks during a press conference, warning about the Strait of Hormuz amid rising regional tensions.
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ईरान ने दी होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी, अमेरिका को बताया 'धोखेबाज'

  तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा और विदेशी शक्तियां होर्मुज के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती रहीं, तो इस जलडमरूमध्य को खुला रखना संभव नहीं होगा। रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल ईरान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य देश ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। होर्मुज पर विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि ऐसा हुआ तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग अराघची ने कहा कि समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है और अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह युद्धविराम लागू कराए तथा इजरायली हमलों को रोके। अमेरिका पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी अमेरिका के खिलाफ तीखा बयान दिया। संगठन के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने कहा कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है और वह बार-बार अपने वादों से पीछे हटता है। उन्होंने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा, "जैसा हमने पहले भी कहा था, दुश्मन धोखेबाज है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह किसी भी समय अपने वादे तोड़ सकता है।" 'हमले का मिलेगा और कड़ा जवाब' आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों की ओर से कोई नया सैन्य हमला किया गया तो ईरान पहले से अधिक ताकत के साथ जवाब देगा। मोहेबी ने कहा कि यदि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि ईरान इस मार्ग को बंद करने की दिशा में कदम उठाता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Iranian and American delegations at the Bürgenstock resort in Switzerland amid tense nuclear and regional security talks.
कैमरे चलते रहे, ईरानी प्रतिनिधिमंडल उठकर चला गया; जेडी वेंस देखते रह गए, स्विट्जरलैंड वार्ता की शुरुआत में बढ़ा तनाव

  बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): अमेरिका और ईरान के बीच रविवार (21 जून) को स्विट्जरलैंड में शुरू हुई बहुप्रतीक्षित वार्ता की शुरुआत ही तनावपूर्ण माहौल में हुई। बातचीत शुरू होने से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सेशन और हाथ मिलाने के कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके कुछ देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई की नई चेतावनी पर नाराजगी जताते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक स्थल से बाहर निकल गया। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में हुई पहली बैठक अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में आयोजित किया गया। बैठक में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। पाकिस्तान और कतर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। यह वार्ता हाल ही में हुए 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) के तहत शुरू हुई है, जिसके अनुसार अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत होगी। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी है। हाथ मिलाने और फोटो सेशन से ईरान का इनकार ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और आयोजकों ने बातचीत शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के नेताओं के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो सेशन की व्यवस्था की थी। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। दोनों नेता निर्धारित फोटो सेशन से पहले ही बैठक कक्ष से बाहर निकल गए। कैमरे में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कमरे से बाहर निकलने से ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से संक्षिप्त बातचीत की। इसके बाद वह अचानक मुड़े और पूरे ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कक्ष से बाहर चले गए। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिससे वार्ता की शुरुआत में ही दोनों पक्षों के बीच मौजूद अविश्वास और तनाव उजागर हो गया। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी नाराजगी सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई संबंधी हालिया बयान ने ईरानी पक्ष की नाराजगी बढ़ा दी। ईरान का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत के दौरान इस तरह की सार्वजनिक चेतावनियां वार्ता के माहौल को प्रभावित करती हैं और आपसी भरोसे को कमजोर करती हैं। आगे की बातचीत पर दुनिया की नजर शुरुआती तनाव के बावजूद दोनों पक्षों के बीच वार्ता प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर की कोशिश है कि बातचीत का अगला दौर सकारात्मक माहौल में आगे बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में शुरू हुई यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Indian women's cricket team reacts after losing to South Africa in the Women's T20 World Cup 2026.
महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026: टीम इंडिया पर मंडराया बाहर होने का खतरा, दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद बिगड़े समीकरण

नई दिल्ली: महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार ने भारतीय टीम की सेमीफाइनल की राह मुश्किल कर दी है। पाकिस्तान और नीदरलैंड्स को हराकर शानदार शुरुआत करने वाली टीम इंडिया तीसरे मुकाबले में प्रोटियाज टीम के सामने टिक नहीं सकी। अब सिर्फ एक हार ने ग्रुप-1 के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। ग्रुप-1 में कैसी है स्थिति? ग्रुप-1 में ऑस्ट्रेलिया लगातार तीन जीत के साथ शीर्ष पर है। भारत ने तीन मैचों में दो जीत हासिल की हैं और फिलहाल दूसरे स्थान पर मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के अंक समान हैं, लेकिन बेहतर नेट रन रेट के कारण अफ्रीकी टीम को बढ़त हासिल है। वहीं पाकिस्तान और नीदरलैंड्स की लगातार तीन हार के बाद उनकी नॉकआउट की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? आईसीसी के नियमों के अनुसार प्रत्येक ग्रुप से सिर्फ दो टीमें ही नॉकआउट चरण में पहुंचेंगी। भारत को अब अपने बचे हुए मुकाबले बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने हैं। अगर भारतीय टीम बांग्लादेश को हराने में सफल रहती है लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार जाती है, तो उसके कुल 6 अंक होंगे। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका के सामने बांग्लादेश और नीदरलैंड्स जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीमें हैं। यदि प्रोटियाज टीम दोनों मुकाबले जीत लेती है, तो वह 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना सकती है और भारत बाहर हो सकता है। हालांकि अगर ऑस्ट्रेलिया अपने आगामी मैचों में हारती है या अन्य परिणाम भारत के पक्ष में जाते हैं, तो टीम इंडिया के लिए उम्मीदें बनी रह सकती हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच का हाल भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 159 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने अनुभवी बल्लेबाज मारिजाम काप की शानदार 81 रन की पारी की बदौलत लक्ष्य को 5 गेंद शेष रहते और 6 विकेट से हासिल कर लिया। मैच के दौरान राधा यादव ने मारिजाम काप के दो अहम कैच छोड़े, जब वह 27 और 66 रन के निजी स्कोर पर थीं। यही चूक अंत में भारतीय टीम पर भारी पड़ गई। अब टीम इंडिया के लिए हर मुकाबला करो या मरो जैसा बन गया है और सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए अगले मैचों में जीत बेहद जरूरी होगी।  

surbhi जून 22, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran allegations as tensions rise over Indian ships in Strait of Hormuz
ईरान ने भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया? ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने आरोपों को बताया झूठ

ट्रंप ने ईरान पर लगाया भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे विफल कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और ईरान की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए चिंताजनक है। ओमान तट के पास हमलों के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामला एमटी सेटेबेलो जहाज का रहा, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं को लेकर भारत पहले ही चिंता जता चुका है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। ईरान ने ट्रंप के आरोपों को किया खारिज ट्रंप के आरोपों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत में ईरानी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईरान का कहना है कि यह आरोप लोगों का ध्यान उन घटनाओं से हटाने की कोशिश है, जिनमें हाल के दिनों में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान भारतीय जहाज प्रभावित हुए और भारतीय नागरिकों की जान गई। तेहरान ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध हैं और भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप तथ्यहीन है। प्रस्तावित शांति समझौते पर भी बढ़ा विवाद इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से सामने आया समझौते का कथित मसौदा वास्तविक सहमति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत जानकारी सच्चाई से दूर है और वार्ता में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व से जल्द स्पष्ट रुख अपनाने की अपील भी की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दी सफाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी समझौते को लेकर फैल रही अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को कोई नकद भुगतान नहीं किया जा रहा है और न ही सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले आर्थिक सहायता दी जाएगी। उनके अनुसार, किसी भी आर्थिक राहत को ईरान द्वारा तय शर्तों के पालन से जोड़ा गया है। ईरान बोला- समझौता पहले से ज्यादा करीब वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम? होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल और गैस आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव, जहाजों पर हमले और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Donald Trump and Iranian officials discuss draft peace agreement amid hopes of ending conflict
अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म होने की उम्मीद? ड्राफ्ट समझौते पर बनी सहमति, जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान

युद्धविराम की दिशा में बड़ी प्रगति, समझौते का मसौदा तैयार अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों ने शांति समझौते के एक ड्राफ्ट (मसौदा) के शब्दों पर सहमति बना ली है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है और मध्यस्थ देश इसे अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति है और समझौता पहले से कहीं ज्यादा करीब दिखाई दे रहा है। ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री ने भी दिए सकारात्मक संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच समझौता जल्द हो सकता है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि किसी समझौते के इतने करीब दोनों देश पहले कभी नहीं पहुंचे थे। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मसौदा अभी आंतरिक समीक्षा के दौर से गुजर रहा है और अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। क्या जल्द होगा समझौते पर हस्ताक्षर? ईरान की ओर से संकेत मिले हैं कि आने वाले दिनों में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हस्ताक्षर किसी आमने-सामने बैठक के बजाय ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यम से भी किए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस प्रारंभिक समझौते का मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है। परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को फिलहाल इस समझौते से अलग रखा गया है और उन पर बाद में अलग चरण में बातचीत की जाएगी। किन मुद्दों पर अब भी बनी हुई है असहमति? हालांकि बातचीत में काफी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिले और विदेशों में जमा उसकी संपत्तियां मुक्त की जाएं। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि किसी भी राहत से पहले ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ कदम उठाने होंगे। यही कारण है कि अंतिम समझौते से पहले कुछ शर्तों पर और बातचीत हो सकती है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता? इस संभावित समझौते का भारत पर भी सीधा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, समझौते में Strait of Hormuz को फिर से पूरी तरह खोलने की दिशा में कदम शामिल हो सकते हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव कम होता है और जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो तेल की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ जाएगी। इजरायल अभी भी बातचीत का हिस्सा नहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, Israel इस वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। इजरायली नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रख सकता है और जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से फैसले लेने का अधिकार सुरक्षित रखता है। अगले कुछ दिन होंगे बेहद अहम कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के भीतर सभी स्तरों पर मंजूरी मिल जाती है, तो आने वाले कुछ दिनों में आधिकारिक समझौते की घोषणा हो सकती है। इससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने, वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा बहाल होने की उम्मीद बढ़ जाएगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.
अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

  वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा यह दावा किए जाने के बाद कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। वहीं ईरान ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा। दक्षिणी ईरान में कई स्थानों पर हमले अमेरिकी कार्रवाई के बाद दक्षिणी ईरान के विभिन्न इलाकों से विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत, बंदर अब्बास, सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ हमले रणनीतिक सैन्य ठिकानों और निगरानी प्रणालियों को निशाना बनाकर किए गए। बताया जा रहा है कि कार्रवाई में लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। हेलीकॉप्टर हादसे के बाद बढ़ा तनाव पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर गश्त के दौरान एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर पर हमला किया गया। अमेरिका का आरोप है कि हेलीकॉप्टर को एक ईरानी ड्रोन ने निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हेलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक बचा लिया गया। उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका इस घटना का जवाब देगा। एयर डिफेंस सिस्टम बने निशाना अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में ईरान के कई एयर डिफेंस सिस्टम, रडार प्रतिष्ठानों और निगरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस अभियान को "आत्मरक्षा में उठाया गया कदम" बताया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। ईरान ने दी सख्त प्रतिक्रिया ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी हमलों के बाद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है और देश की सशस्त्र सेनाएं हर चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार हैं। अराघची ने विदेशी सैन्य बलों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि बाहरी हस्तक्षेप क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाता है और इससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पहले भी दिया था जवाबी कार्रवाई का संकेत ईरानी मीडिया ने हमलों से पहले सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा था कि यदि हेलीकॉप्टर घटना को आधार बनाकर ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई की गई तो उसका "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिकी आरोपों को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है और हेलीकॉप्टर गिराने के दावे पर भी स्पष्ट टिप्पणी से परहेज किया है। वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaking about attack on Ayatollah Khamenei's office during conflict.
खामेनेई के दफ्तर पर हमले में बाल-बाल बचे थे अराघची, बोले- दो दिन तक नहीं पता था सुप्रीम लीडर जिंदा हैं या नहीं

  ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका-इजरायल संघर्ष के दौरान हुए एक बड़े हमले को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि संघर्ष के शुरुआती दिनों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय पर हुए हमले के समय वह उसी इमारत में मौजूद थे और मलबे के बीच से निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। अराघची के अनुसार, हमले के बाद दो दिनों तक उन्हें यह भी नहीं पता था कि खामेनेई किस स्थिति में हैं। हमले के वक्त खामेनेई के कार्यालय में मौजूद थे अराघची लेबनान के टीवी चैनल अल-मयादीन को दिए इंटरव्यू में अराघची ने बताया कि संघर्ष के शुरुआती घंटों में खामेनेई के कार्यालय को निशाना बनाया गया था। उस समय वे भी वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा, “विस्फोट के बाद मेरी पहली चिंता अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की स्थिति को लेकर थी। उस समय हालात बेहद अराजक थे और इमारत के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे।” दो दिन तक नहीं मिली खामेनेई की जानकारी अराघची ने बताया कि हमले के बाद लगातार दो दिनों तक उन्हें खामेनेई के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इस दौरान पूरा ध्यान राहत, बचाव और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर केंद्रित रहा। उनके मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार खामेनेई को सुरक्षित बंकर या विशेष स्थान पर जाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। ‘जब तक जनता सुरक्षित नहीं, मैं भी नहीं’ विदेश मंत्री के अनुसार, खामेनेई का मानना था कि यदि आम ईरानी नागरिकों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध नहीं है, तो वे भी किसी विशेष सुरक्षा सुविधा का लाभ नहीं लेंगे। अराघची ने दावा किया कि खामेनेई ने कहा था कि देश की जनता जिस स्थिति का सामना करेगी, वही स्थिति वे भी स्वीकार करेंगे। उन्होंने युद्ध के दौरान खामेनेई के नेतृत्व और फैसलों की भी सराहना की। खाड़ी देशों को पहले ही दी गई थी चेतावनी इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले उन्होंने कई खाड़ी देशों का दौरा किया था और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में क्षेत्रीय सैन्य अड्डों का उपयोग किया गया, तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति ही तनाव बढ़ाने का एक प्रमुख कारण रही है। ईरान की प्रतिक्रिया ने विरोधियों को चौंकाया अराघची ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान की जवाबी क्षमता को कम आंका था। उनके अनुसार, बड़े पैमाने पर हमलों के बावजूद ईरान ने बहुत कम समय में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे विरोधी पक्ष की रणनीतिक गणनाएं प्रभावित हुईं। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया की तीव्रता ने कई देशों को आश्चर्य में डाल दिया। नेतृत्व परिवर्तन पर भी दिया बयान ईरानी विदेश मंत्री ने देश के नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मोजतबा खामेनेई राष्ट्रीय मामलों और शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं तथा सरकारी संस्थानों के साथ उनका नियमित संवाद बना हुआ है। ईरान की आधिकारिक व्यवस्था में सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े किसी भी बदलाव पर अंतिम पुष्टि केवल संबंधित संवैधानिक संस्थाओं द्वारा ही की जा सकती है। कैसे शुरू हुआ था 2026 का संघर्ष? 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। इस अभियान में परमाणु ठिकानों, मिसाइल अड्डों, वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-IV’ के तहत मिसाइल और ड्रोन हमले किए। संघर्ष का प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया में देखा गया और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी इसका असर पड़ा। फिलहाल अप्रैल 2026 से संघर्षविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तनावपूर्ण बयानबाजी जारी है। ऐसे में क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran nuclear deal and enriched uranium conditions.
ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी, बोले- यूरेनियम सौंपो या नष्ट करो, तभी होगी डील

Donald Trump ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर परमाणु समझौता करना है तो Iran को अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार या तो अमेरिका को सौंपना होगा या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट करना होगा। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका “आधा-अधूरा समझौता” नहीं करेगा। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के “एनरिच्ड यूरेनियम” को तुरंत अमेरिका को सौंपा जा सकता है, जहां उसे नष्ट किया जाएगा। दूसरा विकल्प यह है कि ईरान की सहमति से किसी तय स्थान पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में उसे खत्म किया जाए। उन्होंने यूरेनियम को “न्यूक्लियर डस्ट” बताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी परमाणु एजेंसियां करेंगी। परमाणु मुद्दे पर बढ़ी बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद रहा है। अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान सिद्धांत रूप में अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने पर सहमत हो सकता है। इसे संभावित परमाणु समझौते की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कतर में हुई अहम बैठक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Qatar में ईरानी प्रतिनिधिमंडल और मध्यस्थों के बीच बातचीत हुई। ईरान की तरफ से वरिष्ठ नेता Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। बातचीत में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को खोलने का मुद्दा भी शामिल है। ट्रंप बोले- या शानदार समझौता होगा, या कुछ नहीं ट्रंप ने कहा कि अमेरिका केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेगा जो “बेहद अहम और सार्थक” हो। उन्होंने लिखा, “ईरान के साथ डील या तो शानदार होगी, या फिर कोई डील नहीं होगी।” ईरान ने क्या कहा? ईरान ने संकेत दिए हैं कि कई मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन उसने अमेरिकी अधिकारियों के बदलते बयानों पर चिंता भी जताई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि कई मामलों में प्रगति हुई है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि समझौता तुरंत हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के बदलते रुख से बातचीत जटिल हो रही है।  

surbhi मई 26, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meeting Russian Foreign Minister Sergey Lavrov during BRICS Summit in New Delhi
BRICS सम्मेलन में पीएम मोदी की रूसी विदेश मंत्री लाव्रोव से खास मुलाकात, अराघची से मिले अजीत डोभाल

भारत की अध्यक्षता में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत नई दिल्ली में हो चुकी है। सम्मेलन के तहत ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों की उच्चस्तरीय बैठक जारी है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री S. Jaishankar कर रहे हैं। इस दौरान ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से संयुक्त रूप से मुलाकात की। पीएम मोदी और लाव्रोव की विशेष मुलाकात सम्मेलन के दौरान रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov को प्रधानमंत्री मोदी से अलग से विशेष मुलाकात का अवसर मिला। जानकारी के मुताबिक, लावरोव एकमात्र ऐसे मंत्री थे जिनसे पीएम मोदी ने निजी तौर पर बातचीत की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए अपना अभिवादन भी भेजा। ईरानी विदेश मंत्री से मिले NSA डोभाल वहीं दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। ‘ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा BRICS’ बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा, “भारत की अध्यक्षता में हम बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।” वैश्विक तनाव के बीच अहम बैठक नई दिल्ली में हो रही यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में BRICS मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Iranian and Russian foreign ministers arrive in New Delhi for crucial BRICS meeting on oil crisis
ब्रिक्स बैठक के लिए दिल्ली पहुंचे ईरान और रूस के विदेश मंत्री, ईरान युद्ध और तेल संकट छाया रहा मुख्य मुद्दा

वैश्विक तनाव के बीच भारत में अहम कूटनीतिक बैठक नई दिल्ली में गुरुवार को होने वाली BRICS देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले दुनिया के कई अहम देशों के नेता राजधानी पहुंच चुके हैं। इस बैठक में खास तौर पर ईरान और तेल संकट से जुड़ी वैश्विक परिस्थितियां चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और दो दिवसीय इस बैठक में विस्तार किए गए सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। ईरान और रूस के विदेश मंत्री पहुंचे दिल्ली ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची बुधवार देर रात New Delhi पहुंचे। वहीं Russia के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी बैठक में शामिल हो रहे हैं। लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा की। ईरान युद्ध और तेल संकट पर फोकस मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और हालिया संघर्ष, जिसमें Iran और United States तथा Israel की भूमिका बताई जा रही है, ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में बाधा ने कीमतों में अस्थिरता बढ़ा दी है। इस स्थिति का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो ऊर्जा और उर्वरक के लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर हैं। भारत की भूमिका और कूटनीतिक संतुलन विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। भारत का मानना है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक वातावरण में कूटनीतिक सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। ब्रिक्स का विस्तार और बढ़ती चुनौतियां BRICS की शुरुआत 2009 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया और इसमें United Arab Emirates, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हुए। हालांकि इस बार बैठक में यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी सदस्य देश संयुक्त बयान जारी करेंगे या नहीं, क्योंकि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। नई दिल्ली में हो रही यह बैठक वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान युद्ध और तेल संकट ने BRICS देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिन पर सामूहिक रणनीति बनाने की कोशिश की जाएगी।  

surbhi मई 14, 2026 0
Chinese and Iranian foreign ministers meeting in Beijing to discuss Middle East ceasefire and regional tensions
युद्ध के बाद पहली बार चीन-ईरान की बड़ी बैठक, युद्धविराम पर हुई अहम चर्चा

Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच चीन और ईरान के विदेश मंत्रियों की पहली अहम मुलाकात हुई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग पहुंचकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की. दोनों नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति, युद्धविराम और शांति प्रक्रिया को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. वांग यी ने कहा- व्यापक युद्धविराम जरूरी बीजिंग में हुई बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि दो महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष को अब रोका जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए व्यापक युद्धविराम बेहद जरूरी है. वांग यी ने कहा कि दुश्मनी का दोबारा शुरू होना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और सभी पक्षों को बातचीत और कूटनीतिक समाधान के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए. युद्ध शुरू होने के बाद पहली उच्चस्तरीय मुलाकात 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब ईरान और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच आमने-सामने बातचीत हुई है. चीन लंबे समय से ईरान का महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक साझेदार रहा है. ऐसे में इस मुलाकात को मिडिल ईस्ट संकट के बीच बेहद अहम माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाये रखने और तनाव कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दिये हैं. चीन ने शांति वार्ता पर दिया जोर न्यूज एजेंसी AP के अनुसार, बैठक के दौरान चीनी पक्ष ने स्पष्ट कहा कि बातचीत और समझौते के जरिए ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है. चीन ने कहा कि युद्धविराम को मजबूत करना और सभी पक्षों को संवाद की प्रक्रिया में शामिल रखना बेहद जरूरी है, ताकि मिडिल ईस्ट में बड़ा युद्ध टाला जा सके. अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते की चर्चा इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गयी हैं. सूत्रों के मुताबिक, दोनों देश 14 सूत्रीय समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान से अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को लंबे समय तक रोकने की मांग की है. अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान कम से कम 20 वर्षों तक परमाणु संवर्धन गतिविधियों को बंद रखे. वहीं ईरान कथित तौर पर पांच वर्षों तक कार्यक्रम सीमित रखने के प्रस्ताव पर सहमत होने की बात कर रहा है. हालांकि अब तक किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. वैश्विक शक्तियां लगातार युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रही हैं, क्योंकि इस संघर्ष का असर तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Iranian delegation meets Pakistani leaders in Islamabad amid US-Iran tensions and mediation efforts
ईरान-अमेरिका के बीच फिलहाल सीधी बातचीत नहीं, पाकिस्तान निभाएगा मध्यस्थ की भूमिका

इस्लामाबाद पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi शुक्रवार को एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं होगी। अराघची अपने दौरे के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif, सेना प्रमुख Asim Munir और विदेश मंत्री Ishaq Dar से मुलाकात करेंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने कहा कि पाकिस्तान ही तेहरान की चिंताओं और प्रस्तावों को वॉशिंगटन तक पहुंचाएगा। हॉर्मुज और परमाणु मुद्दे पर टिकी निगाहें दूसरी ओर, अमेरिका भी वार्ता को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner के जल्द इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान अमेरिकी मांगों को ध्यान में रखते हुए एक नया प्रस्ताव तैयार कर रहा है। अमेरिका की प्रमुख शर्तों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और Strait of Hormuz में जहाजों की निर्बाध आवाजाही शामिल है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजारों और समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद बढ़ गई है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir meeting Iran Foreign Minister Abbas Araghchi in Tehran during diplomatic visit
ईरान पहुंचे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर, अमेरिका-ईरान तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें तेज

  तेहरान में उच्चस्तरीय मुलाकात पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर अपने महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे, जहां उनका स्वागत ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में एक अहम कूटनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है। वार्ता के नए दौर की तैयारी सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच संभावित दूसरे दौर की बातचीत के लिए आधार तैयार करना है। इससे पहले हुई चर्चाएं किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच पाई थीं, जिसके बाद तनाव लगातार बढ़ता गया। अब पाकिस्तान की भूमिका एक मध्यस्थ के रूप में फिर से सामने आ रही है, जो दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। बैकचैनल डिप्लोमेसी में पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद लगभग ठप पड़े थे, जिसके बाद बैकचैनल डिप्लोमेसी को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें शुरू हुईं। पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और दोनों पक्षों के बीच भरोसा बनाने का प्रयास किया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि अगर यह संवाद आगे बढ़ता है, तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाधान निकल सकता है। इस्लामाबाद शांति वार्ता की पृष्ठभूमि इस पूरे घटनाक्रम की नींव 11 और 12 अप्रैल को हुई इस्लामाबाद शांति वार्ता से जुड़ी है। यह बैठक बेहद अहम मानी गई क्योंकि यह 1979 की ईरानी क्रांति के बाद पहली बार था जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि आमने-सामने बातचीत के लिए बैठे थे। हालांकि यह वार्ता किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन इसे एक शुरुआती और ऐतिहासिक प्रयास के रूप में देखा गया, जिसने आगे बातचीत की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया। खाड़ी क्षेत्र में तनाव और कूटनीतिक दबाव पिछले कुछ हफ्तों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान-अमेरिका संबंधों को लेकर। ऐसे माहौल में पाकिस्तान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि वह दोनों देशों के बीच संवाद का एक भरोसेमंद माध्यम बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों की राय अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि आसिम मुनीर की यह यात्रा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कदम नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। अगर बातचीत सफल होती है, तो इससे न केवल ईरान-अमेरिका तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट पर भी असर पड़ सकता है। ईरान दौरे पर गए पाक सेना प्रमुख की यह पहल एक बार फिर यह संकेत देती है कि कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। हालांकि हालात अभी भी जटिल हैं, लेकिन बातचीत और मध्यस्थता की कोशिशें यह उम्मीद जरूर जगा रही हैं कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव को कम किया जा सकता है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Strait of Hormuz with commercial ships navigating amid geopolitical tension and Iranian naval monitoring
हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन ईरानी गार्ड ने लगाए नए नियम – अमेरिका और तेल बाजार पर असर

  ईरान के बयान से बढ़ी उलझन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्धविराम अवधि के दौरान यह समुद्री रास्ता सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” रहेगा। लेकिन इसी घोषणा के बाद स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की सख्त शर्तें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ किया है कि इस मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को पहले उनकी अनुमति लेनी होगी। साथ ही तय मार्ग का ही उपयोग करना होगा। सैन्य जहाजों के प्रवेश पर अब भी रोक जारी है। इसे गार्ड ने “नई व्यवस्था” बताया है। ईरान के अंदर ही बयान पर असहमति ईरान के ही कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों ने विदेश मंत्री के बयान पर सवाल उठाए हैं। तस्नीम न्यूज ने इसे “अधूरा और भ्रम पैदा करने वाला” बताया, जबकि मेहर न्यूज ने कहा कि रणनीतिक हालात को देखते हुए यह मार्ग पूरी तरह बंद रहना चाहिए। अमेरिका और ट्रंप का दावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल चुका है और उन्होंने ईरान को धन्यवाद भी दिया। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक समझौता पूरा नहीं हो जाता। तेल बाजार पर असर इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तेल कीमतें करीब 10 प्रतिशत तक नीचे आ गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के अलग-अलग बयानों और सैन्य शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। इससे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर आने वाले दिनों में भी असर देखने को मिल सकता है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir meeting Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi in Tehran for peace talks
US-Iran तनाव: क्या पाकिस्तान कराएगा सुलह? तेहरान पहुंचे आर्मी चीफ मुनीर, 21 अप्रैल को खत्म होगा सीजफायर

  तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे हैं। तेहरान में हाई-लेवल बातचीत तेहरान में आसिम मुनीर का स्वागत ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया। यह मुलाकात अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले दूसरे दौर की वार्ता को सफल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। अराघची ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से पश्चिम एशिया में शांति कायम करने की उम्मीद बढ़ी है। शांति के लिए पाकिस्तान की कूटनीति पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर पेश कर रहा है। इससे पहले इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शुरुआती बातचीत भी कराई गई थी। अब इस पूरी प्रक्रिया का लक्ष्य है— अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध खत्म करना एक स्थायी समझौते की दिशा में बढ़ना क्षेत्र में युद्ध की संभावना को टालना 21 अप्रैल को खत्म होगा सीजफायर इस बीच डोनाल्ड ट्रंप का रुख सख्त नजर आ रहा है। उन्होंने संकेत दिया है कि वह मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, जो 21 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में बातचीत से कोई बड़ा और सकारात्मक नतीजा निकल सकता है। सऊदी अरब भी बना अहम कड़ी दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के जेद्दा में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इस दौरान: शांति प्रयासों पर चर्चा हुई पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी कोशिशों से ही सीजफायर संभव हुआ स्थायी समझौते की दिशा में सहयोग की बात हुई आगे क्या? पश्चिम एशिया की नजर अब अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है। अगर बातचीत सफल रही, तो क्षेत्र में स्थायी शांति की राह खुल सकती है। लेकिन अगर वार्ता विफल होती है और सीजफायर खत्म होता है, तो तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। फिलहाल, पाकिस्तान की मध्यस्थता इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम कड़ी बनकर उभर रही है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Donald Trump discussing US-Iran negotiations with Strait of Hormuz highlighted on a geopolitical map.
अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू होने के संकेत, लेकिन Donald Trump की 2 सख्त शर्तें

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में वार्ता का नया दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, इस बार अमेरिका ने बातचीत से पहले दो अहम शर्तें रख दी हैं। बताया जा रहा है कि वार्ता का अगला दौर एक बार फिर Islamabad में हो सकता है, जहां पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी। क्या हैं अमेरिका की शर्तें? पहली शर्त: होर्मुज स्ट्रेट को खोलना होगा अमेरिका चाहता है कि Strait of Hormuz को पूरी तरह और बिना किसी रुकावट के खोला जाए। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। अमेरिका ने साफ किया है कि अगर ईरान जहाजों की आवाजाही रोकेगा, तो उसके जहाजों को भी गुजरने नहीं दिया जाएगा। दूसरी शर्त: ईरानी टीम को मिले पूरा अधिकार अमेरिका की दूसरी शर्त है कि बातचीत करने वाली ईरानी टीम के पास अंतिम फैसला लेने का अधिकार हो। वॉशिंगटन चाहता है कि इस्लामाबाद में जो भी समझौता हो, उसे Iran के सभी बड़े संस्थान मंजूरी दें। ईरान के अंदर बढ़ रहे मतभेद रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आ रहे हैं। एक तरफ राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और विदेश मंत्री Abbas Araghchi जैसे राजनीतिक नेता हैं दूसरी तरफ शक्तिशाली Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) है बताया जा रहा है कि पहले दौर की वार्ता में IRGC के कुछ अधिकारियों ने राजनीतिक टीम को जवाब देने से रोक दिया था। ट्रंप का दावा Donald Trump ने कहा है कि उन्हें “सही लोगों” की तरफ से संपर्क मिला है और ईरान समझौते के लिए तैयार हो सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होने की संभावना तो बनी है, लेकिन ट्रंप की सख्त शर्तें और ईरान के अंदरूनी मतभेद इस प्रक्रिया को मुश्किल बना सकते हैं। अब देखना होगा कि कूटनीति तनाव कम कर पाती है या हालात और बिगड़ते हैं।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
US-Iran high-level talks collapse in Islamabad after Strait of Hormuz and nuclear dispute tensions
अमेरिका-ईरान वार्ता फेल: अराघची बोले–“दुश्मनी का जवाब अब दुश्मनी से”

Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली हाई-लेवल बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। इस वार्ता के टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। अराघची का आरोप–अमेरिका ‘वादे से मुकरा’ ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि समझौता लगभग तय था, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका ने अपनी शर्तें बदल दीं। उन्होंने ‘मैक्सिमलिज्म’ का आरोप लगाते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने जरूरत से ज्यादा मांग रखकर बातचीत को विफल कर दिया। अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर अमेरिका अच्छी नीयत दिखाता, तो जवाब भी वैसा ही मिलता–लेकिन अब “दुश्मनी का जवाब दुश्मनी से दिया जाएगा।” जेडी वेंस का तंज अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भी इस बैठक में शामिल थे। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका। वेंस ने कहा कि यह विफलता अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदायक है। किन मुद्दों पर फंसी बात? रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत दो बड़े मुद्दों पर अटक गई: Strait of Hormuz पर नियंत्रण ईरान का परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन ईरानी मीडिया ने अमेरिकी रुख को ‘अवास्तविक’ बताया और कहा कि बुनियादी समझौते का ढांचा तक तैयार नहीं हो पाया। ट्रंप की धमकियों पर ईरान का जवाब ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि Donald Trump की धमकियों का कोई असर नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी–“अगर अमेरिका लड़ाई चाहता है, तो हम भी तैयार हैं, और अगर बातचीत करेगा तो हम भी तर्क से जवाब देंगे।”  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0