नई दिल्ली, एजेंसियां। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर रविवार से 5 से 15 जुलाई तक छह देशों की महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस दौरे के दौरान वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका और बेल्जियम का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत के अभियान को गति देना है। खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर जयशंकर 5 से 10 जुलाई के बीच कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान में अपने समकक्षों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, भारतीय प्रवासी समुदाय और पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम प्रमुख एजेंडा रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। UNSC अभियान और भारत-EU सहयोग पर रहेगा फोकस खाड़ी देशों के दौरे के बाद विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 के अस्थायी सदस्य पद के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह ब्रुसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (India-EU Trade and Technology Council) की तीसरी मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। भारत की वैश्विक कूटनीति को मिलेगी नई गति विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता को और मजबूत करेगी। पश्चिम एशिया के प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के मंचों पर भारत की भूमिका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में आए भीषण भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 58,870 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हजारों मौतों की आशंका अमेरिकी United States Geological Survey के आकलन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान और मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र के वेनेजुएला स्थित मानवीय समन्वयक Gianluca Rampolla ने बताया कि संभावित बढ़ती मृत्यु संख्या को देखते हुए सरकार और संयुक्त राष्ट्र लगभग 10,000 बॉडी बैग की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। राहत कार्यों में संसाधनों की कमी भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक La Guaira में राहत अभियान जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर ईंधन और भारी मशीनों की कमी के कारण मलबा हटाने का काम प्रभावित हो रहा है। भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद' भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ऑपरेशन अमिस्ताद (Operation Amistad) के तहत चिकित्सा सहायता अभियान शुरू किया है। भारतीय मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में घायलों का उपचार कर रही हैं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। S. Jaishankar ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर वेनेजुएला में तैनात भारतीय चिकित्सा दलों की सराहना करते हुए उनके मानवीय योगदान को प्रेरणादायक बताया। विदेश मंत्रालय ने साझा किए राहत कार्य Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें भारतीय फील्ड हॉस्पिटल की टीमें प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता देती दिखाई दे रही हैं। साझा किए गए वीडियो में स्थानीय नागरिकों ने भी भारतीय मेडिकल टीमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत की सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। नासा का आकलन NASA के शोधकर्ताओं के अनुसार, हालिया दोहरे भूकंपों से वेनेजुएला के मध्य और उत्तरी हिस्सों में करीब 58,870 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। राहत एजेंसियां अभी भी खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
India Operation Amistad Venezuela: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने बड़ा मानवीय राहत अभियान शुरू किया है। ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और सेना की विशेष मेडिकल टीम लेकर वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने त्वरित मानवीय सहायता मिशन शुरू किया है, जिसे ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ नाम दिया गया है। स्पेनिश भाषा में Amistad का अर्थ ‘दोस्ती’ होता है। यह नाम भारत और वेनेजुएला के बीच सहयोग और मानवीय संबंधों को दर्शाता है। C-17 विमानों से भेजी गई राहत सामग्री भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान हिंडन एयरबेस से वेनेजुएला के लिए रवाना हुए। इनमें शामिल हैं: 35 टन से अधिक राहत सामग्री दवाइयां और चिकित्सा उपकरण आपातकालीन राहत सामग्री दो BHISHM क्यूब्स (पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल) जयशंकर ने दी जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा: “ऑपरेशन अमिस्ताद जारी है। भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। इनमें भूकंप राहत के लिए जरूरी सहायता, भारतीय सेना की फील्ड हॉस्पिटल यूनिट और 35 टन से अधिक राहत सामग्री शामिल है।” क्या हैं BHISHM क्यूब्स? BHISHM (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित और मैत्री) क्यूब्स भारत की स्वदेशी तकनीक से विकसित पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल हैं। इन्हें युद्ध, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर तेजी से चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। मरून कैप में रवाना हुए भारतीय जवान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट से 41 सदस्यीय मेडिकल दल वेनेजुएला भेजा गया है। इसमें 9 मेडिकल अधिकारी शामिल हैं। यह टीम मरून बेरेट (Maroon Cap) में रवाना हुई, जो भारतीय सेना की एयरबोर्न और विशेष बलों की पहचान मानी जाती है। वेनेजुएला में तबाही का मंजर बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए। इन्हें देश में एक सदी के सबसे बड़े भूकंपों में गिना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान काराकस और ला ग्वायरा में हुआ, जहां कई इमारतें ढह गईं और हजारों लोग बेघर हो गए। मौत और घायल आंकड़ा संख्या मृतक 235+ घायल 1500+ लापता हजारों आपात स्थिति घोषित वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में पूर्ण आपात स्थिति घोषित कर दी है। सरकार ने पुनर्निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर 20 करोड़ डॉलर के फंड की घोषणा की है। दुनिया भर से मिल रही मदद भारत के अलावा अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली, मैक्सिको और बोलीविया समेत कई देशों ने भी वेनेजुएला को राहत सहायता देने की घोषणा की है।
फिनलैंड की विदेश मंत्री ने भारत का किया बचाव रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस बार भारत को यूरोप से ही अप्रत्याशित समर्थन मिला है। फिनलैंड की विदेश मंत्री Elina Valtonen ने स्पष्ट कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदते समय पश्चिमी देशों द्वारा तय किए गए प्राइस कैप नियमों का पालन किया है और यही उस व्यवस्था का मूल उद्देश्य भी था। फिनलैंड में आयोजित चर्चित ‘कुल्तारांता टॉक्स’ कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, फिनलैंड की विदेश मंत्री और यूएई की सहायक विदेश मंत्री Lana Nusseibeh एक पैनल चर्चा में शामिल हुए थे। इसी दौरान वाल्टोनेन ने भारत के पक्ष में अपनी बात रखी। "रूसी तेल खरीदने पर रोक नहीं थी" वाल्टोनेन ने कहा कि जब पश्चिमी देशों ने रूस के तेल पर प्राइस कैप लागू किया था, तब इसका उद्देश्य दुनिया को रूसी तेल खरीदने से रोकना नहीं था। उन्होंने कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित न हो और रूस को अत्यधिक मुनाफा न मिले, इसी संतुलन को ध्यान में रखकर यह व्यवस्था बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि भारत ने निर्धारित मूल्य सीमा के भीतर तेल खरीदा, इसलिए उसने नियमों का उल्लंघन नहीं किया। जयशंकर बोले- लागत और उपलब्धता के आधार पर खरीदते हैं तेल रूस से तेल आयात को लेकर पूछे गए सवालों पर विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की ऊर्जा नीति का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत किसी राजनीतिक दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखकर ऊर्जा खरीदता है। जयशंकर ने याद दिलाया कि 2022 में रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव आया था। उस समय यूरोपीय देशों ने मध्य-पूर्व के तेल की बड़ी मात्रा खरीदनी शुरू कर दी थी, जो पहले भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए विकल्प तलाशने पड़े। "अमेरिका ने भी रूसी तेल खरीदने को कहा था" विदेश मंत्री ने चर्चा के दौरान एक महत्वपूर्ण दावा भी किया। उन्होंने कहा कि उस समय अमेरिका ने स्वयं भारत से रूसी तेल खरीद जारी रखने का आग्रह किया था ताकि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनी रहे। जयशंकर ने कहा कि इस मुद्दे को किसी बड़े नैतिक सिद्धांत की तरह पेश करना उचित नहीं है, क्योंकि उस दौर में कई देशों ने व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर फैसले लिए थे। यूरोप की आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारत की विदेश नीति पर चर्चा के दौरान जयशंकर ने यूरोपीय देशों की आलोचना पर भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देश वर्षों से ऐसे देशों को हथियार बेचते रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हुआ है। भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कोई कदम नहीं उठाया, इसलिए आलोचना करते समय इस तथ्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। बदल रहा है भारत का ऊर्जा नक्शा जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत केवल एक ही क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जबकि प्राकृतिक गैस के मामले में अमेरिका शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है। इससे पहले यह स्थान Qatar के पास था। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। भारत के पक्ष को मिली नई मजबूती फिनलैंड की विदेश मंत्री का सार्वजनिक समर्थन भारत के उस तर्क को मजबूती देता है कि उसने रूस से तेल खरीदते समय पश्चिमी देशों द्वारा निर्धारित नियमों का ही पालन किया। ऐसे समय में जब रूस की ऊर्जा निर्यात नीति और यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक बहस जारी है, यह बयान भारत की ऊर्जा रणनीति के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का सख्त रुख खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत कर स्पष्ट कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई उचित नहीं है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की गहरी चिंता और विरोध अमेरिकी पक्ष के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। दो दिनों में दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया गया भारत सरकार ने 48 घंटे के भीतर दूसरी बार भारत में अमेरिकी मिशन के प्रभारी अधिकारी (Charge d’Affaires) Jason Meeks को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण तीन भारतीयों की जान जा चुकी है। भारत ने इसे “टाला जा सकने वाला और दुखद नुकसान” बताया है। MT Settebello हमले में 3 भारतीयों की मौत सरकार के अनुसार, एमटी सेत्तेबेलो (MT Settebello) नामक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। जहाज पर कुल 24 भारतीय मौजूद थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके अलावा अमेरिकी बलों ने ओमान तट के पास गिनी-बिसाउ ध्वज वाले टैंकर MT Jalveer के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइलें दागीं। इस जहाज पर मौजूद सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया। विदेश मंत्रालय ने जताई गहरी चिंता विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। भारत ने अमेरिकी प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तैनात उसकी सैन्य इकाइयां भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। पश्चिम एशिया संघर्ष का भारतीय नाविकों पर असर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस परिवहन होता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और नौसैनिक गतिविधियों ने न केवल समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की नीति का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि देश ने हमेशा कीमत, उपलब्धता और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है। फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतरांता टॉक्स’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यूरोपीय देशों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्विक मुद्दों पर नैतिकता की बात करने वाले देशों को अपने आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए। ‘उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा’ विषय पर आयोजित चर्चा में जयशंकर से रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उस समय वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भारत को व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया, तब रूस का तेल अधिक उपलब्ध था, जबकि यूरोपीय देश मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे थे, जो पारंपरिक रूप से भारत का प्रमुख स्रोत रहा है। यूरोप के रवैये पर उठाए सवाल ऊर्जा नीति पर भारत का पक्ष रखने के बाद जयशंकर ने यूरोप के दृष्टिकोण पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे किसी यूरोपीय देश की सुरक्षा प्रभावित हुई हो, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कई हथियार यूरोप से आए हैं। जब उनसे इस टिप्पणी पर और स्पष्टता मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वर्षों से ऐसे हथियारों की आपूर्ति होती रही है जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। ‘राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। उनके अनुसार, वैश्विक संकट के दौर में हर देश अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है और भारत ने भी वही किया। जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और उससे जुड़े ऊर्जा संबंधी फैसलों को केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अधिकांश देश अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन का मुद्दा विदेश मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि रूस पर प्रतिबंधों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका थी। ऐसे समय में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए, जिससे घरेलू आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से तेल आयात को लेकर भारत और पश्चिमी देशों के बीच समय-समय पर चर्चा होती रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी विदेश और ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों तथा व्यावहारिक आवश्यकताओं पर आधारित है।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez 3 से 7 जून तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। गुरुवार को नई दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई। ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग पर केंद्रित रही मोदी-रोड्रिगेज बैठक बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवाएं, दवा उद्योग, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। भारत के लिए राहत की खबर, तेल आपूर्ति में बढ़ सकती है वेनेजुएला की भूमिका दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनता जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थिरता के बीच नई दिल्ली तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रही है। नई दिल्ली-कराकास संबंधों को मिलेगा नया बल, निवेश के नए अवसरों पर चर्चा दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ नए आर्थिक अवसरों की पहचान पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद बदला समीकरण, फिर बढ़ा भारत-वेनेजुएला तेल कारोबार भारत 2019 तक वेनेजुएला का प्रमुख तेल खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात में गिरावट आई। हालिया घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तेल व्यापार फिर तेजी से बढ़ रहा है और भारत वेनेजुएला के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया है। ईरान संकट के बीच भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत की तलाश पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। भारत अपनी ऊर्जा निर्भरता को केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रखना चाहता। भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त माना जाता है वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत की कई बड़ी रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं। इससे भारत घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी लाभ उठा सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी हुई विस्तृत बातचीत प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले रोड्रिगेज ने S. Jaishankar के साथ भी बैठक की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा की। भारत से पुराना जुड़ाव, छठी बार आधिकारिक यात्रा पर आईं रोड्रिगेज डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले विदेश मंत्री, उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री के रूप में कई बार भारत का दौरा कर चुकी हैं। जून 2026 की यह उनकी भारत यात्रा कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पहली आधिकारिक यात्रा है। नई दिल्ली और कराकास के बीच रणनीतिक साझेदारी को मिल सकती है नई रफ्तार उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस यात्रा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में भारत-वेनेजुएला संबंधों के और गहरे होने की संभावना जताई जा रही है।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper इस सप्ताह भारत दौरे पर आएंगी। भारत पहुंचने से पहले वह चीन की यात्रा करेंगी। उनका यह दौरा वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने और प्रमुख साझेदार देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) के अनुसार, यात्रा के दौरान मंत्रिस्तरीय स्तर की बैठकों में पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध और अफ्रीका में इबोला प्रकोप जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक नई दिल्ली में कूपर गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। दोनों नेता भारत-ब्रिटेन संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। बैठक के बाद कूपर व्यापार, निवेश और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद करेंगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। FTA के बाद संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कूपर का यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर के लगभग एक वर्ष बाद हो रहा है। पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों ने इसे एक महत्वाकांक्षी और भविष्य-केंद्रित समझौता बताया था, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा और बल विशेषज्ञों का मानना है कि कूपर की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती दे सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ब्रिटेन रक्षा, व्यापार, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
Quadrilateral Security Dialogue देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अहम चर्चा हुई। बैठक के बाद जारी साझा बयान में सुरक्षित और बिना रुकावट समुद्री व्यापार पर जोर दिया गया। दिल्ली में हुई इस बैठक में S. Jaishankar समेत चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता पर बातचीत की। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता बैठक में खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। यह इलाका दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि QUAD का यह संदेश अप्रत्यक्ष रूप से Iran पर दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। QUAD ने क्या कहा? साझा बयान में कहा गया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पूरी दुनिया के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। चारों देशों ने कहा कि: समुद्री व्यापार सुरक्षित रहना चाहिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है सप्लाई चेन मजबूत और भरोसेमंद होनी चाहिए ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाया जाएगा समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग QUAD देशों ने समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, पनडुब्बी केबल सुरक्षा, ट्रेनिंग और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। आतंकवाद पर भी सख्त संदेश एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है और आतंकवाद के खिलाफ QUAD देशों की नीति “जीरो टॉलरेंस” की है।
भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर बड़ा रणनीतिक समझौता किया है। दोनों देशों ने इन अहम संसाधनों की सप्लाई, माइनिंग और प्रोसेसिंग को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए नया द्विपक्षीय ढांचा तैयार किया है। इस समझौते को चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। क्वॉड बैठक के बाद हुआ बड़ा ऐलान विदेश मंत्री S. Jaishankar ने मंगलवार को जानकारी दी कि भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए अहम फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला द्विपक्षीय बातचीत और QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद लिया गया। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स बेहद अहम हो चुके हैं। ऐसे में भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना दोनों देशों की प्राथमिकता है। माइनिंग से प्रोसेसिंग तक साथ काम करेंगे दोनों देश इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। दोनों देश मिलकर ऐसी सप्लाई चेन तैयार करेंगे, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हो सके। इसके अलावा फाइनेंसिंग और तकनीकी सहयोग पर भी काम किया जाएगा, ताकि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता बनी रहे। अमेरिका ने भारत को बताया अहम रणनीतिक साझेदार अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी इस समझौते को रणनीतिक रिश्तों का बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स तक भरोसेमंद पहुंच बेहद जरूरी है। रुबियो ने कहा कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्था के लिए रेयर अर्थ संसाधनों की भूमिका और बढ़ने वाली है। क्यों अहम हैं Rare Earth और Critical Minerals? रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, मोबाइल, सेमीकंडक्टर, मिसाइल सिस्टम, सोलर पैनल और हाई-टेक डिफेंस उपकरणों में होता है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इन संसाधनों को लेकर तेजी से रणनीति बना रही हैं। फिलहाल रेयर अर्थ प्रोसेसिंग बाजार पर चीन का बड़ा दबदबा माना जाता है। यही वजह है कि भारत, अमेरिका और कई अन्य देश वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करने में जुटे हैं। चीन पर निर्भरता घटाने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी है। चीन कई बार रेयर अर्थ सप्लाई को लेकर सख्त रवैया अपनाता रहा है। ऐसे में भारत और अमेरिका की यह नई साझेदारी भविष्य में टेक्नोलॉजी, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम साबित हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत की उम्मीद दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez जल्द भारत दौरे पर आ सकती हैं। इस संभावित दौरे को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सस्ते कच्चे तेल की सप्लाई से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बीते 10 दिनों में चार बार ईंधन महंगा हो चुका है, जिससे आम लोगों और उद्योगों पर दबाव बढ़ा है। अमेरिका ने दिया सस्ते तेल का संकेत अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका भारत की जरूरत के अनुसार तेल और गैस उपलब्ध कराने को तैयार है। इसी बीच वेनेजुएला से तेल सप्लाई बढ़ाने के संकेत भी सामने आए हैं। उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए दावे - जैसे अमेरिका द्वारा Nicolás Maduro की गिरफ्तारी - की कोई आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड्स में मादुरो अभी भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति माने जाते हैं। इसलिए इस दावे को सत्यापित जानकारी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। भारत के लिए क्यों अहम है वेनेजुएला का तेल? भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। होर्मुज संकट के बाद पश्चिम एशिया से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोत भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक मौजूद है। यदि भारत को वहां से रियायती दरों पर कच्चा तेल मिलता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। रूस के तेल को लेकर अमेरिका की नाराजगी रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने पर अमेरिका ने पहले चिंता जताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले भारत की रूस से ऊर्जा खरीद पर तीखी टिप्पणी भी की थी। अब अमेरिका भारत को वैकल्पिक सप्लाई चैन देने की कोशिश करता दिख रहा है, जिसमें वेनेजुएला का तेल अहम भूमिका निभा सकता है। एस जयशंकर ने क्या कहा? भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ऊर्जा सुरक्षा पर कहा कि भारत के लिए कई भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा रहा है। जयशंकर ने यह भी कहा कि ऊर्जा बाजार को बाधित नहीं किया जाना चाहिए और भारत अपनी राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार फैसले लेगा। क्या सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत को वेनेजुएला या अमेरिका से स्थिर और रियायती तेल सप्लाई मिलती है, तो तेल कंपनियों पर आयात लागत का दबाव कम हो सकता है। घरेलू ईंधन कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता हो जाएगा, लेकिन वैकल्पिक तेल स्रोत भारत के लिए राहत जरूर दे सकते हैं।
Marco Rubio के भारत दौरे को लेकर पाकिस्तान में भी चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार Najam Sethi ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने की वजह से अमेरिका भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से रूबियो को भारत भेजा गया, ताकि प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत सरकार को संतुष्ट किया जा सके। भारत दौरे पर क्या बोले नजम सेठी सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो क्लिप में नजम सेठी एक टीवी चर्चा के दौरान कहते दिखाई दे रहे हैं कि अमेरिका को अब भारत के साथ अपने संबंध फिर से मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था, टेक सेक्टर और चुनावी फंडिंग में भारतीय समुदाय की बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है।” “भारत ने अमेरिका को संदेश दिया” नजम सेठी ने दावा किया कि भारत ने रूबियो के स्वागत को लेकर प्रोटोकॉल के जरिए अमेरिका को नाराजगी का संकेत दिया। उनके मुताबिक, जब रूबियो भारत पहुंचे तो S. Jaishankar उन्हें रिसीव करने नहीं गए और उनकी जगह विदेश मंत्रालय के एक निचले स्तर के अधिकारी को भेजा गया। सेठी ने कहा कि यह भारत की तरफ से अमेरिका को संदेश देने का तरीका था कि “हम आपसे खुश नहीं हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि भारत पहले से ही अमेरिका का बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रोफेशनल्स और इंडियन-अमेरिकन समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेठी के मुताबिक, ईरान संघर्ष के दौरान भारत अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और Israel के करीब दिखाई दिया, लेकिन अमेरिका ने खुलकर भारत की सराहना नहीं की। इसी वजह से अब रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने मोदी की खुलकर की तारीफ भारत दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने मंच से ट्रंप से फोन पर बात कराई। इस दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और मैं उनका बड़ा प्रशंसक हूं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं और भारत अमेरिका पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। विदेश मंत्री का पद क्यों अहम माना जाता है? अमेरिका में विदेश मंत्री का पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है। Marco Rubio वर्तमान ट्रंप प्रशासन में प्रमुख कूटनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति के बाद सत्ता के उत्तराधिकार क्रम में विदेश मंत्री चौथे स्थान पर होता है। ऐसे में किसी देश की यात्रा और वहां शीर्ष नेताओं से मुलाकात को अमेरिकी विदेश नीति के बड़े संकेत के तौर पर देखा जाता है। भारत दौरे के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी और एस जयशंकर से मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना “महान दोस्त” बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार (24 मई) रात आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि भारत उन पर और अमेरिका पर “100 प्रतिशत भरोसा” कर सकता है। यह कार्यक्रम अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर Bharat Mandapam में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor मौजूद रहे। फोन पर ट्रंप ने भेजा पीएम मोदी को संदेश कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कराई। ट्रंप ने कहा, “सबको मेरा नमस्कार कहना। मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। मोदी महान हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के बड़े प्रशंसक हैं और सभी को शानदार शाम की शुभकामनाएं दीं। ट्रंप की बातें कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सुनाने के लिए फोन को माइक्रोफोन के पास रखा गया। “भारत के पहले कभी इतने करीब नहीं रहे” डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश पहले कभी इतने करीब नहीं रहे। उन्होंने कहा, “भारत मुझ पर और हमारे देश पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़े, तो वे जानते हैं कि कहां फोन करना है।” ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड आर्थिक प्रदर्शन और रिकॉर्ड शेयर बाजार की ओर बढ़ रहा है। कार्यक्रम में एआर रहमान की प्रस्तुति रही आकर्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संगीतकार A. R. Rahman की प्रस्तुति रही। उन्होंने “दिल से”, “मां तुझे सलाम” और “तेरे बिना” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा कार्यक्रम में मार्को रूबियो का जन्मदिन भी मनाया गया। समापन अमेरिकी बैंड Village People की प्रस्तुति के साथ हुआ। जयशंकर बोले- रिश्ते मजबूत करने का सही समय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की आजादी की घोषणा ने दुनिया को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून का राज और जवाबदेह सरकार जैसे महत्वपूर्ण मूल्य दिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत करने का यह सबसे बेहतर समय है।
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भारत और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से पाकिस्तान की जमीन से सक्रिय आतंकी संगठनों को लेकर चिंता जताता रहा है और यह चिंता पूरी तरह नई नहीं है। रूबियो ने यह बयान उस सवाल के जवाब में दिया, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या भारत ने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थ भूमिका को लेकर कोई आपत्ति जताई है। इस पर उन्होंने कहा कि भारत की मुख्य चिंता पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को लेकर रहती है, क्योंकि ये संगठन भारत को निशाना बनाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ईरान मुद्दे पर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भारत ने कोई विशेष आपत्ति दर्ज नहीं कराई। रूबियो के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच जो मुद्दे हैं, उनकी प्रकृति अलग है और बातचीत के दौरान आतंकवाद तथा सुरक्षा से जुड़े विषय जरूर उठे। अजीत डोभाल से हुई अहम बैठक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान से संचालित आतंकी ढांचे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। सूत्रों के मुताबिक, डोभाल ने कहा कि आतंकवाद अब केवल एक विचारधारा नहीं, बल्कि एक पूरा संगठित इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और लगातार काम कर रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ भी विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। ईरान मुद्दे पर क्या बोले रूबियो? ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव पर बात करते हुए रूबियो ने कहा कि बातचीत अभी जारी है और जल्द कोई बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु मुद्दे पर तय समयसीमा के भीतर समाधान निकालने को लेकर एक मजबूत प्रस्ताव तैयार किया गया है। रूबियो ने कहा कि इस पहल को खाड़ी देशों समेत दुनिया के कई देशों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेंगे और किसी खराब समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत की सुरक्षा चिंताओं पर अमेरिका का संकेत मार्को रूबियो के बयान को भारत की लंबे समय से उठाई जा रही आतंकवाद संबंधी चिंताओं पर अमेरिकी समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क का मुद्दा उठाता रहा है।
भारत की अध्यक्षता में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत नई दिल्ली में हो चुकी है। सम्मेलन के तहत ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों की उच्चस्तरीय बैठक जारी है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री S. Jaishankar कर रहे हैं। इस दौरान ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से संयुक्त रूप से मुलाकात की। पीएम मोदी और लाव्रोव की विशेष मुलाकात सम्मेलन के दौरान रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov को प्रधानमंत्री मोदी से अलग से विशेष मुलाकात का अवसर मिला। जानकारी के मुताबिक, लावरोव एकमात्र ऐसे मंत्री थे जिनसे पीएम मोदी ने निजी तौर पर बातचीत की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए अपना अभिवादन भी भेजा। ईरानी विदेश मंत्री से मिले NSA डोभाल वहीं दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। ‘ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा BRICS’ बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा, “भारत की अध्यक्षता में हम बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।” वैश्विक तनाव के बीच अहम बैठक नई दिल्ली में हो रही यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में BRICS मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
वैश्विक तनाव के बीच भारत में अहम कूटनीतिक बैठक नई दिल्ली में गुरुवार को होने वाली BRICS देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले दुनिया के कई अहम देशों के नेता राजधानी पहुंच चुके हैं। इस बैठक में खास तौर पर ईरान और तेल संकट से जुड़ी वैश्विक परिस्थितियां चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और दो दिवसीय इस बैठक में विस्तार किए गए सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। ईरान और रूस के विदेश मंत्री पहुंचे दिल्ली ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची बुधवार देर रात New Delhi पहुंचे। वहीं Russia के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी बैठक में शामिल हो रहे हैं। लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा की। ईरान युद्ध और तेल संकट पर फोकस मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और हालिया संघर्ष, जिसमें Iran और United States तथा Israel की भूमिका बताई जा रही है, ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में बाधा ने कीमतों में अस्थिरता बढ़ा दी है। इस स्थिति का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो ऊर्जा और उर्वरक के लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर हैं। भारत की भूमिका और कूटनीतिक संतुलन विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। भारत का मानना है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक वातावरण में कूटनीतिक सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। ब्रिक्स का विस्तार और बढ़ती चुनौतियां BRICS की शुरुआत 2009 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया और इसमें United Arab Emirates, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हुए। हालांकि इस बार बैठक में यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी सदस्य देश संयुक्त बयान जारी करेंगे या नहीं, क्योंकि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। नई दिल्ली में हो रही यह बैठक वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान युद्ध और तेल संकट ने BRICS देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिन पर सामूहिक रणनीति बनाने की कोशिश की जाएगी।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi के भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि वह मई में नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में लगातार अस्थिरता बनी हुई है और ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक समर्थन मजबूत करने में जुटा है. भारत फिलहाल BRICS का चेयरमैन है और 14-15 मई को विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा. यह बैठक सितंबर 2026 में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है. जयशंकर-अराघची बातचीत के बाद बढ़ी हलचल यह संभावित दौरा भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच हुई हाई-लेवल फोन बातचीत के बाद चर्चा में आया है. माना जा रहा है कि दोनों देशों ने पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुपक्षीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया है. रूस के विदेश मंत्री भी आएंगे भारत रूस ने भी पुष्टि की है कि उसके विदेश मंत्री Sergey Lavrov 14-15 मई को भारत में होने वाली बैठक में शामिल होंगे. रूस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह बैठक वैश्विक मुद्दों और ग्लोबल गवर्नेंस पर गंभीर चर्चा का बड़ा मंच बनेगी. क्या है इस बार BRICS की थीम? भारत की अध्यक्षता में इस बार ब्रिक्स की थीम रखी गई है: “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” इस थीम का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और टिकाऊ विकास पर जोर देना है. क्यों अहम मानी जा रही है यह बैठक? विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बैठक कई वजहों से महत्वपूर्ण है: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बड़े देशों की कूटनीतिक रणनीति पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति पर चर्चा वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट की तैयारी रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Maria Zakharova ने कहा है कि इस बैठक में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने पर विशेष फोकस रहेगा. नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक अब सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक बड़े भू-राजनीतिक मंच के रूप में देखी जा रही है.
नेपाल के प्रधानमंत्री Balen Shah के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। काठमांडू और नई दिल्ली के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत की तैयारियां जारी हैं, वहीं इस बीच United States और China की बढ़ती मौजूदगी ने क्षेत्रीय समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। ‘औपचारिक नहीं, परिणाम वाला दौरा’ – बालेन शाह बालेन शाह ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनका दिल्ली दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि ठोस नतीजों पर आधारित होगा। उन्होंने साफ किया है कि वे पुराने पैटर्न को नहीं दोहराना चाहते और भारत यात्रा के दौरान वास्तविक मुद्दों पर प्रगति चाहते हैं। भारतीय विदेश सचिव का काठमांडू दौरा इसी कड़ी में भारत के विदेश सचिव Vikram Misri 11-12 मई को काठमांडू का दौरा कर सकते हैं। उन्हें नेपाल की ओर से औपचारिक निमंत्रण भी भेजा जा चुका है। इस दौरे का मकसद नेपाल सरकार की प्राथमिकताओं को समझना और बालेन शाह की अपेक्षाओं के अनुसार एजेंडा तय करना है। बताया जा रहा है कि S. Jaishankar और नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal के बीच पहले ही इस दौरे को लेकर बातचीत हो चुकी है। काठमांडू में बढ़ी वैश्विक सक्रियता इस बीच काठमांडू में अमेरिका और चीन दोनों की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। अमेरिकी और चीनी अधिकारी हाल ही में नेपाल का दौरा कर चुके हैं, जिससे साफ है कि नेपाल अब एक अहम रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है। एजेंडा तय करने पर जोर भारतीय विदेश सचिव का दौरा मुख्य रूप से बालेन शाह की भारत यात्रा के एजेंडे को अंतिम रूप देने पर केंद्रित होगा। इसमें भारत द्वारा नेपाल में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा, नई साझेदारियों की संभावनाएं और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा शामिल हो सकती है। प्रोटोकॉल और कूटनीतिक संकेत दिलचस्प बात यह है कि बालेन शाह फिलहाल एक अलग कूटनीतिक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। वे केवल शीर्ष स्तर के नेताओं—राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री—से ही मुलाकात कर रहे हैं और निचले स्तर के अधिकारियों से दूरी बनाए हुए हैं। यह उनके नए ‘स्टैंडर्ड’ सेट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत और Bangladesh के बीच संबंधों को नई दिशा देने की उम्मीदों के बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman का भारत दौरा कई अहम संदेश छोड़ गया। जहां एक ओर ऊर्जा, व्यापार और वीजा जैसे मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई, वहीं दौरे के अंत में प्रत्यर्पण की मांग ने कूटनीतिक समीकरणों को जटिल बना दिया। प्रत्यर्पण की मांग ने बढ़ाया तनाव बांग्लादेश ने एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina और पूर्व गृह मंत्री Asaduzzaman Khan Kamal के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें देश वापस लाना जरूरी है। यह मांग केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश भी मानी जा रही है। भारत के लिए कठिन संतुलन भारत के सामने यह मुद्दा बेहद संवेदनशील बन गया है। एक ओर पड़ोसी देश के साथ रिश्तों को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है, तो दूसरी ओर भारत में रह रही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval के साथ हुई बैठकों में इस विषय पर चर्चा ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि रणनीतिक बातचीत का हिस्सा था। अन्य मुद्दों पर भी बनी सहमति दोनों देशों के बीच वार्ता केवल प्रत्यर्पण तक सीमित नहीं रही। ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा डीजल और उर्वरक आपूर्ति पर सकारात्मक संकेत मेडिकल और बिजनेस वीजा को आसान बनाने पर सहमति व्यापारिक संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम इन पहलुओं से यह भी स्पष्ट हुआ कि दोनों देश रिश्तों को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं, भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद क्यों न हों। नई सरकार का ‘Bangladesh First’ रुख बांग्लादेश की नई सरकार, जिसका नेतृत्व Tarique Rahman कर रहे हैं, ‘Bangladesh First’ नीति पर जोर दे रही है। इसी नीति के तहत प्रत्यर्पण का मुद्दा प्राथमिकता में रखा गया है। रिश्तों के लिए अग्निपरीक्षा यह पूरा घटनाक्रम संकेत देता है कि भारत-बांग्लादेश संबंध एक नए मोड़ पर हैं। जहां सहयोग और साझेदारी की संभावनाएं हैं, वहीं संवेदनशील मुद्दे दोनों देशों के बीच संतुलन की परीक्षा ले सकते हैं। आने वाले समय में भारत का रुख तय करेगा कि यह मामला रिश्तों को मजबूत करेगा या तनाव बढ़ाएगा।
पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 5 अप्रैल 2026 को ईरान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा की। ईरानी विदेश मंत्री अराघची से बातचीत जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव बल्कि द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी विचार-विमर्श किया। ईरानी दूतावास के अनुसार, बातचीत में मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताई गई। कतर के प्रधानमंत्री से भी चर्चा विदेश मंत्री ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से भी फोन पर बात की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके असर पर विस्तार से चर्चा हुई। यूएई के विदेश मंत्री से भी संपर्क इसके अलावा जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी बात की। उन्होंने पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती स्थिति पर विचार साझा किए, हालांकि बातचीत का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया। ऊर्जा आपूर्ति बना मुख्य मुद्दा सूत्रों के मुताबिक, इन सभी बातचीतों में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विशेष चिंता जताई गई। पश्चिम एशिया भारत के लिए तेल और गैस का प्रमुख स्रोत है, ऐसे में क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सख्त चेतावनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को जल्द नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है। होर्मुज स्ट्रेट बंद, बढ़ीं तेल-गैस की कीमतें ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश की ईंधन और उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कूटनीतिक प्रयास जारी भारत ने साफ किया है कि उसकी प्राथमिकता इस संघर्ष को जल्द खत्म कराना और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है। पिछले कुछ हफ्तों से भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है ताकि स्थिति और न बिगड़े।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित सप्लाई के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक के बाद रूस ने भारत को तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की चिंता बढ़ गई थी। रूस का भरोसा: ऊर्जा संकट में बड़ी राहत रूस के उप-प्रधानमंत्री Denis Manturov ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि रूसी कंपनियां भारत को कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई बढ़ाने में सक्षम हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में रूस से भारत को तेल सप्लाई में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस संकट के समय भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उर्वरक आपूर्ति में भी बढ़ोतरी ऊर्जा के साथ-साथ रूस ने उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाने का भी भरोसा दिया है। 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दोनों देशों के बीच यूरिया उत्पादन को लेकर संयुक्त परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं, जो भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूती देंगी। कूटनीतिक स्तर पर बढ़ा सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, उद्योग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही। इसके अलावा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती हाल के समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है। प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद रूस एक बार फिर भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है, जो रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बना रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।