अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना “महान दोस्त” बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार (24 मई) रात आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि भारत उन पर और अमेरिका पर “100 प्रतिशत भरोसा” कर सकता है।
यह कार्यक्रम अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर Bharat Mandapam में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कराई। ट्रंप ने कहा, “सबको मेरा नमस्कार कहना। मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। मोदी महान हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के बड़े प्रशंसक हैं और सभी को शानदार शाम की शुभकामनाएं दीं। ट्रंप की बातें कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सुनाने के लिए फोन को माइक्रोफोन के पास रखा गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश पहले कभी इतने करीब नहीं रहे। उन्होंने कहा, “भारत मुझ पर और हमारे देश पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़े, तो वे जानते हैं कि कहां फोन करना है।”
ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड आर्थिक प्रदर्शन और रिकॉर्ड शेयर बाजार की ओर बढ़ रहा है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संगीतकार A. R. Rahman की प्रस्तुति रही। उन्होंने “दिल से”, “मां तुझे सलाम” और “तेरे बिना” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए।
इसके अलावा कार्यक्रम में मार्को रूबियो का जन्मदिन भी मनाया गया। समापन अमेरिकी बैंड Village People की प्रस्तुति के साथ हुआ।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की आजादी की घोषणा ने दुनिया को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून का राज और जवाबदेह सरकार जैसे महत्वपूर्ण मूल्य दिए।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत करने का यह सबसे बेहतर समय है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन, वसंत विहार की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से झारखंड सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर श्री अरवा राजकमल ने सोमवार को भवन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन में उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, रखरखाव, सुरक्षा और अतिथि सेवाओं का विस्तृत जायजा लिया तथा अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मेंटेनेंस और अतिथि सेवाओं की समीक्षा निरीक्षण के दौरान रेजिडेंट कमिश्नर ने अतिथि कक्षों, कॉमन एरिया, भवन परिसर और रसोईघर का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने हाउसकीपिंग, स्वच्छता और रखरखाव कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से भवन संचालन की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में स्थित झारखंड भवन राज्य का प्रतिनिधि संस्थान है, इसलिए यहां आने वाले अतिथियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पार्किंग व्यवस्था सुधारने के निर्देश निरीक्षण के दौरान भवन परिसर में लंबे समय से खड़े छह अनुपयोगी और कंडम वाहनों को लेकर भी चर्चा हुई। रेजिडेंट कमिश्नर ने इन वाहनों की नियमानुसार शीघ्र नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया ताकि पार्किंग स्थल का बेहतर और सुव्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने उपलब्ध स्थान और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तुरंत चालू करने का आदेश भवन की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कुछ सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए। इस पर रेजिडेंट कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कर सभी कैमरों को पुनः क्रियाशील बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आधुनिकीकरण पर रहेगा फोकस रेजिडेंट कमिश्नर ने कहा कि झारखंड भवन में सुविधाओं का निरंतर आधुनिकीकरण और सुधार समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भवन संचालन को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और कार्यकुशल बनाया जाए ताकि आगंतुकों और अतिथियों को बेहतर अनुभव मिल सके। निरीक्षण के अंत में उन्होंने भवन की व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक सुझाव एवं दिशा-निर्देश दिए।
नई दिल्ली: INDIA गठबंधन की समन्वय समिति की बैठक के दौरान सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखने को मिली। इस दौरान ममता बनर्जी भावुक भी नजर आईं। दिल्ली में विपक्षी नेताओं की मुलाकात बनी चर्चा का विषय INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचीं ममता बनर्जी का सोनिया गांधी ने स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच कुछ समय तक बातचीत हुई और मुलाकात की तस्वीरें तेजी से चर्चा में आ गईं। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी दलों के बीच बढ़ते संवाद का संकेत मान रहे हैं। तीन दशक पुराने रिश्तों की फिर हुई चर्चा कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते भारतीय राजनीति के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक रहे हैं। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा का दौर लगातार चलता रहा। बंगाल की राजनीति में कई बार आमने-सामने आए दोनों दल पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी कई चुनावों में प्रतिद्वंद्वी रही हैं। राज्य की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के उभार के साथ कांग्रेस का प्रभाव सीमित होता गया। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल कई मौकों पर एक साथ भी नजर आए हैं। 2024 के चुनाव के बाद बढ़ी थी राजनीतिक दूरी लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिसके बाद कांग्रेस और टीएमसी के रिश्तों में तनाव की चर्चा तेज हो गई थी। INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर हुई बातचीत सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान विपक्षी एकजुटता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। विपक्षी दल आगामी चुनावों को देखते हुए साझा मुद्दों पर साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। 10 जनपथ पर फिर हुई अहम मुलाकात बैठक के अगले दिन ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से उनके आवास 10 जनपथ पर भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत को विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीएमसी की चुनौतियों के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस को संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ममता बनर्जी की विपक्षी नेताओं के साथ लगातार बैठकें राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही हैं। विपक्षी राजनीति में नए संकेत दे रही है यह मुलाकात विश्लेषकों का मानना है कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की संभावनाओं को भी दर्शाती है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में देखने को मिल सकता है।
यूपी के उन्नाव में पेड़ उखड़े, कर्नाटक में गाड़ियां बहीं, MP-राजस्थान में आंधी-बारिश का अलर्ट नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून 5 दिन में 13 राज्यों तक पहुंच गया है। मंगलवार को तेलंगाना में एंट्री कर चुका है। फिलहाल यह मुंबई से करीब 150 किमी दूर है और अगले 48 घंटे में शहर में दस्तक दे सकता है। वहीं, अगले सप्ताह तक यह गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक पहुंच सकता है। मानसूनी हवाओं के असर से कई मैदानी राज्यों में गर्मी कम हुई है। साथ ही प्री-मानसून के कारण कई जगह 50-60kmph रफ्तार से आंधी और तेज बारिश हो रही है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में मंगलवार को आंधी से कई जगह पेड़ उखड़ गए। केरल और कर्नाटक में पिछले 4 दिनों से लगातार बारिश जारी है। मंगलवार को बेंगलुरु और बेलगावी में भारी बारिश के बाद कई सड़कों पर पानी भर गया। कुछ जगहों पर गाड़ियां पानी में बहती नजर आईं। इधर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में गर्मी का असर बना हुआ है। कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट है।