Donald Trump

Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu responds to reports alleging plans to target Iranian negotiators during US-Iran peace talks.
ईरानी वार्ताकारों की हत्या की साजिश वाली रिपोर्ट पर इजराइल का खंडन, बोला- 'यह पूरी तरह फेक न्यूज'

तेल अवीव: इजराइल ने अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान ईरान के वरिष्ठ वार्ताकारों को निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस रिपोर्ट को "पूरी तरह झूठा" और "फेक न्यूज" करार दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि रिपोर्ट का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट में क्या कहा गया था? अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कुछ वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि इजराइल कथित तौर पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को निशाना बनाने की योजना बना सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता ईरान की ओर से युद्धविराम और शांति वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। अमेरिका की चिंता का दावा रिपोर्ट में कहा गया था कि अप्रैल में चल रही वार्ताओं के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ईरानी वार्ताकारों पर हमला हुआ तो शांति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है और क्षेत्र में संघर्ष दोबारा तेज हो सकता है। इसी कारण अमेरिका ने कथित तौर पर क्षेत्र के कुछ देशों के माध्यम से ईरान को संभावित खतरे के प्रति सतर्क करने का प्रयास किया था। संघर्ष और खुफिया सहयोग को लेकर भी दावा रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी तथा इस अभियान में अमेरिकी खुफिया जानकारी का उपयोग किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ट्रंप-नेतन्याहू संबंधों का भी जिक्र रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजराइल के करीबी संबंधों के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2026 के दौरान लेबनान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर कई मौकों पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके आधार पर रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि क्षेत्रीय तनाव और शांति वार्ता को लेकर दोनों सहयोगी देशों के बीच कुछ मतभेद उभर सकते हैं। इजराइल ने किया स्पष्ट इनकार इजराइली सरकार ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल इस मामले पर अमेरिका या ईरान की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
US President Donald Trump speaks at a US Independence Day event as Iran begins funeral ceremonies for former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran.
खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप का तंज, बोले- 'हम अच्छे हैं, इसलिए ईरान को एक हफ्ते का समय दिया'

वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोला। अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने "इंसानियत" दिखाते हुए ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव चर्चा में आ गया है। क्या बोले ट्रंप? अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर माउंट रशमोर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान को पूरी तरह झुका दिया। वे समझौता करना चाहते हैं। हमने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी, क्योंकि हम अच्छे हैं।" हालांकि ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त जानकारी या आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया। तेहरान में शुरू हुए अंतिम संस्कार कार्यक्रम इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार (4 जुलाई) से शुरू हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सड़कों पर उमड़े हजारों लोग राजधानी तेहरान में सुबह से ही बड़ी संख्या में शोकाकुल लोग ग्रैंड मोसल्ला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। कई लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और उनके हाथों में झंडे तथा बैनर थे। शहर के प्रमुख मार्गों पर खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। शिया परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालु छाती पीटकर शोक व्यक्त करते नजर आए। 9 जुलाई को होगा सुपुर्द-ए-खाक ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की विभिन्न रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ट्रंप के ताजा बयान पर ईरान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Ali Khamenei Funeral
खामेनेई को अंतिम विदाई: तेहरान में जुटे लाखों लोग, 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि पहुंचे

तेहरान, एजेंसियां। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में तेहरान में शुरू हो गई हैं। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ रही है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष बाघेर गालिबाफ और देश के अन्य शीर्ष नेता खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सुरक्षा कारणों से उनके बेटे मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। समारोह में शिया परंपरा के अनुसार मातम, धार्मिक अनुष्ठान और श्रद्धांजलि कार्यक्रम जारी हैं।   100 से अधिक देशों की मौजूदगी, भारत ने भेजा आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ईरान के अनुसार अंतिम संस्कार में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये के शीर्ष नेताओं ने स्वयं भाग नहीं लिया और अपने प्रतिनिधिमंडल भेजे। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन समारोह में शामिल हुए। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर तथा इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया के शीर्ष नेता भी तेहरान पहुंचे।   मेगा सुरक्षा और सात दिन तक चलेंगे कार्यक्रम अंतिम संस्कार को लेकर तेहरान में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सेना और पुलिस की भारी तैनाती के साथ मुख्य मार्गों पर सैन्य वाहनों से निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए मेट्रो और सरकारी बस सेवाएं मुफ्त कर दी गई हैं, जबकि होटलों में रियायत और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था भी की गई है। अंतिम यात्रा तेहरान, कुम, कर्बला, नजफ होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।   इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान को अंतिम संस्कार पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है, जिसके बाद उसे अमेरिका के साथ वार्ता करनी होगी। वहीं ईरान ने अपने प्रमुख परमाणु ठिकानों के निरीक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अंतिम संस्कार के बाद अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Donald Trump Netnyahu
ट्रंप और नेतन्याहू जल्द करेंगे मुलाकात, पश्चिम एशिया में सुरक्षा और ईरान पर होगी अहम चर्चा

वॉशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर बातचीत के दौरान जल्द अमेरिका में मुलाकात करने पर सहमति जताई है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में ईरान, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय सहयोग प्रमुख मुद्दे रहेंगे।   ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा रहेगा मुख्य एजेंडा   सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और हाल के तनावपूर्ण घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देश पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी विचार करेंगे।   अमेरिका-इजरायल संबंधों को मिलेगी नई दिशा   हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई थीं, लेकिन ताजा बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। माना जा रहा है कि यह बैठक क्षेत्रीय कूटनीति और भविष्य की संयुक्त रणनीति तय करने में अहम साबित हो सकती है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
America Jobs
अमेरिका में सुस्त पड़ा जॉब मार्केट, जून में सिर्फ 57 हजार नई नौकरियां

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं।   ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।   बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है।   श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है।   टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks during an interview while discussing U.S.-Iran peace talks, sanctions, military operations and the Strait of Hormuz.
ट्रंप का बड़ा दावा: 'ईरान ने लगभग सभी शर्तें मान लीं', बताया क्यों नहीं बंद किया गया होर्मुज स्ट्रेट

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख शर्तें स्वीकार कर ली हैं और हाल के सैन्य अभियानों के बाद उसकी सैन्य क्षमता और अर्थव्यवस्था दोनों गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी हैं। अमेरिकी मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका ने लगातार कई दिनों तक सैन्य अभियान चलाकर ईरान की रक्षा क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया। 'बार-बार नष्ट किए गए ईरान के रडार' CNBC को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के रडार सिस्टम को कई बार निशाना बनाया। उन्होंने कहा, "जब-जब ईरान ने नया रडार लगाने की कोशिश की, हमने उसे फिर से नष्ट कर दिया। पिछले सप्ताह भी हमने उनका रडार सिस्टम खत्म किया। अब उन्हें तीसरी बार पूरी व्यवस्था फिर से तैयार करनी होगी।" ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो अमेरिका के पास आगे की कार्रवाई के लिए सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं। 'ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट चुकी है' ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई करीब 300 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं। ट्रंप के अनुसार, "वे कुछ भी नहीं कमा रहे हैं। उनके शीर्ष नेता जा चुके हैं, दूसरे और तीसरे स्तर के कई नेता भी बाहर हो चुके हैं। उनकी सेना के अधिकांश वरिष्ठ जनरल अब नहीं रहे।" होर्मुज स्ट्रेट क्यों नहीं किया बंद? ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने रणनीतिक रूप से होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया, क्योंकि इससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा, "अगर मैं सख्त फैसला लेकर अगले कुछ वर्षों के लिए होर्मुज स्ट्रेट बंद कर देता, जहां से दुनिया का करीब 20 से 21 प्रतिशत तेल गुजरता है, तो कच्चे तेल की कीमत 350 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती और वैश्विक मंदी आ सकती थी।" 'अमेरिकी नौसेना ने सुरक्षित निकाले तेल टैंकर' ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने तनावपूर्ण हालात के बावजूद तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की। उन्होंने कहा, "हर रात हमारी नौसेना दक्षिणी मार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकाल रही थी। एक रात हमने 22 तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकाला। यह बहुत बड़ी मात्रा में तेल था और पूरी कार्रवाई बेहद सफल रही।" शांति वार्ता के बीच बढ़ी कूटनीतिक हलचल ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हालांकि, ट्रंप के सैन्य और आर्थिक दावों पर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, उनके कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu speaking during a public address, warning that Israel is prepared to launch further military action against Iran if necessary.
ईरान को इजरायल की खुली चेतावनी, नेतन्याहू बोले- जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे हमला

  यरुशलम: Benjamin Netanyahu ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इजरायल दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के मामले में किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहेगा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। 'जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी करेंगे कार्रवाई' नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ पहले की गई सैन्य कार्रवाइयों ने इजरायल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया। उन्होंने कहा कि यदि इजरायल की सुरक्षा को फिर से खतरा महसूस हुआ, तो ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा तनाव नेतन्याहू का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और परमाणु मुद्दों पर सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। दोनों पक्ष संघर्षविराम को व्यापक राजनीतिक समझौते में बदलने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में संभावित राहत और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। इजरायल ने दोहराया अपना रुख इजरायल पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह ऐसे किसी भी समझौते से स्वयं को बाध्य नहीं मानेगा, जो उसकी दृष्टि में ईरान की सैन्य या परमाणु क्षमताओं को बढ़ावा देता हो। इजरायली नेतृत्व का कहना है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर वह एकतरफा कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ट्रंप ने संयम बरतने की अपील की वहीं, Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम एशिया में दोबारा सैन्य तनाव बढ़ना किसी के हित में नहीं होगा और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Mumbai Rain
मुंबई में मानसून का कहर: मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, लोकल ट्रेनें प्रभावित

मुंबई,एजेंसियां। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बुधवार को हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़क यातायात बाधित रहा और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंधेरी सबवे में करीब पांच फीट पानी भर जाने के कारण प्रशासन को एहतियातन इसे यातायात के लिए बंद करना पड़ा।   लोकल ट्रेन सेवा पर पड़ा असर भारी बारिश का असर मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पर भी देखने को मिला। वेस्टर्न, सेंट्रल और हार्बर लाइन की कई ट्रेनें देरी से चलीं। हार्बर लाइन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) वायर में तकनीकी खराबी आने से कई लोकल ट्रेनें बीच रास्ते में ही रुक गईं। सुबह के व्यस्त समय में आई इस समस्या से हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू किया, जिसके बाद धीरे-धीरे सेवाएं सामान्य करने का प्रयास किया गया।   बालकनी गिरने से व्यक्ति की मौत दक्षिण मुंबई के बाबुलनाथ रोड स्थित MHADA की 'सूर्यप्रकाश' इमारत में मंगलवार देर रात तीसरी मंजिल की बालकनी का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे में 51 वर्षीय संतोष रामचंद्र भारस्कर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची तथा सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए गए।   कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले चार से पांच दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। वहीं, रेलवे, नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
The US Supreme Court building in Washington, D.C., as it upholds a block on Donald Trump’s birthright citizenship executive order.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को दिया झटका, अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता बरकरार

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को नागरिकता नीति के मुद्दे पर बड़ा कानूनी झटका लगा है। Supreme Court of the United States ने ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश पर रोक को बरकरार रखा है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) से वंचित करने का प्रयास किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इस मामले में कार्यकारी आदेश को लागू नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अमेरिका में जन्मे बच्चों को फिलहाल पहले की तरह नागरिकता मिलती रहेगी। क्या था ट्रंप प्रशासन का आदेश? ट्रंप प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर कहा था कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) नहीं हैं, तो केवल अमेरिका में जन्म लेने के आधार पर उस बच्चे को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। इस आदेश को कई राज्यों, नागरिक अधिकार संगठनों और प्रभावित परिवारों ने अदालत में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले पर अंतिम संवैधानिक फैसला अभी शेष हो सकता है, लेकिन फिलहाल निचली अदालत द्वारा लगाई गई रोक जारी रहेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े अधिकारों की महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। सामूहिक याचिका के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई यह मामला New Hampshire की एक अदालत में दायर सामूहिक (Class Action) याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ट्रंप प्रशासन का आदेश हजारों परिवारों और अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। क्या कहता है 14वां संशोधन? अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के Citizenship Clause के अनुसार: "संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिक बने तथा उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाले सभी व्यक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका और उस राज्य के नागरिक हैं, जहां वे निवास करते हैं।" इसी प्रावधान के आधार पर अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) का सिद्धांत लंबे समय से लागू है। ट्रंप प्रशासन को लगातार कानूनी चुनौतियां यह हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सामने आए प्रमुख मामलों में से एक है। नागरिकता नीति पर आया यह फैसला प्रशासन की आव्रजन (इमिग्रेशन) नीति के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
A digitally created image of a giant golden eagle on the White House Truman Balcony shared by Donald Trump, later questioned as AI-generated.
'गोल्डन गिफ्ट' पर ट्रंप घिरे, फैक्ट चेक में AI-जनरेटेड निकली व्हाइट हाउस की तस्वीर

  वॉशिंगटन: अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के जश्न के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर व्हाइट हाउस के लिए एक कथित "Golden Gift" की तस्वीर साझा की, लेकिन बाद में मीडिया की जांच में यह तस्वीर AI-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई) पाई गई। क्या था ट्रंप का दावा? ट्रंप ने पोस्ट में व्हाइट हाउस की Truman Balcony पर एक विशाल सुनहरे बाज (Golden Eagle) की तस्वीर साझा की। तस्वीर में बाज अपने फैले हुए पंखों के साथ बालकनी पर बैठा दिखाई देता है, जबकि बालकनी पर अमेरिकी ध्वज वाले एक बड़े शील्ड (कवच) को भी दर्शाया गया है। पोस्ट के साथ ट्रंप ने लिखा: "व्हाइट हाउस के 250वें जन्मदिन के वर्ष के लिए एक गोल्डन गिफ्ट।" इसके बाद व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने भी इस पोस्ट को रीशेयर किया। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? अमेरिकी समाचार चैनल CNN की पड़ताल में दावा किया गया कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है। जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु: वास्तविक Truman Balcony की बनावट और रेलिंग तस्वीर से मेल नहीं खाती। तस्वीर में दिखाया गया विशाल सुनहरा बाज वास्तव में वहां मौजूद नहीं था। शील्ड पर केवल 11 सितारे दिखाई देते हैं, जबकि अमेरिकी इतिहास के अनुसार मूल 13 उपनिवेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऐसे प्रतीकों में सामान्यतः 13 सितारे होते हैं। फोटोग्राफर ने भी पेश किया सबूत फ्रीलांस फोटोग्राफर Andrew Leyden ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद रात करीब 9:30 बजे ट्रूमैन बालकनी की वास्तविक तस्वीरें साझा कीं। उनकी तस्वीरों में न तो कोई विशाल सुनहरा बाज दिखाई दिया और न ही वह शील्ड, जिसका जिक्र ट्रंप की पोस्ट में था। नए पासपोर्ट डिजाइन पर भी चर्चा इसी बीच ट्रंप ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कथित 'लिमिटेड एडिशन' अमेरिकी पासपोर्ट का डिजाइन भी साझा किया। पोस्ट किए गए डिजाइन में: ट्रंप को ऐतिहासिक Resolute Desk पर बैठे हुए दिखाया गया है। पृष्ठभूमि में United States Declaration of Independence का चित्रण है। नीचे ट्रंप के हस्ताक्षर भी प्रदर्शित किए गए हैं। ट्रंप ने इसके साथ संदेश लिखा: "Welcome, but be good." AI कंटेंट को लेकर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों और सरकारी संस्थानों द्वारा साझा की जाने वाली AI-जनरेटेड तस्वीरों की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में व्हाइट हाउस या ट्रंप की ओर से AI-जनरेटेड तस्वीर साझा किए जाने के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
US Ambassador Sergio Gor speaking at the USISPF Leadership Summit 2026 while discussing the India-US trade deal and strategic partnership.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सुनाया पीएम मोदी और ट्रंप से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

  नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता (ट्रेड डील) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और समझौते को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर तेजी से मजबूत भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और गहरी होगी। भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना गोर ने कहा कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अत्याधुनिक तकनीक, विमानन, नवाचार और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ेगा। ट्रंप और पीएम मोदी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा अपने संबोधन के दौरान सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और प्रधानमंत्री Narendra Modi से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने सुबह करीब छह बजे प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने की इच्छा जताई। जब उन्हें बताया गया कि भारत और अमेरिका के समय में बड़ा अंतर है, तो ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, "मोदी जाग रहे होंगे, वो मेरी तरह कम सोते हैं।" गोर के अनुसार, ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी मित्र मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत संबंध हैं। '50 साल बाद भी दोस्त रहेंगे दोनों देश' गोर ने बताया कि नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री ने उनसे कहा था कि आने वाले 50 वर्षों में भी भारत और अमेरिका मजबूत साझेदार बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के साझा मूल्य इस रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं। AI, टेक्नोलॉजी और एविएशन पर रहेगा जोर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र होंगे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उन्नत प्रौद्योगिकी एविएशन नवाचार भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि अगले दो वर्ष भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होंगे। व्यापार वार्ता में हुई अहम प्रगति गोर ने बताया कि 22 से 24 जून के बीच नई दिल्ली में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer के बीच महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। इन बैठकों में व्यापार समझौते की प्रगति की समीक्षा की गई और निवेश, आर्थिक सहयोग तथा व्यापार विस्तार पर चर्चा हुई। जल्द हो सकता है समझौता सर्जियो गोर ने विश्वास जताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर सहमति बन सकती है। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देगा तथा भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर खोलेगा।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Donald Trump
ट्रम्प का तेल कंपनियों पर सख्त रुख, बोले- कच्चा तेल सस्ता हुआ तो पेट्रोल के दाम भी तुरंत घटाएं जाए

वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली तेल कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं की गई है।   'लोगों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे' ट्रम्प ने कहा कि जब कच्चा तेल लगातार सस्ता हो रहा है, तब भी आम अमेरिकी उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूली जा रही है। उन्होंने तेल कंपनियों से पेट्रोल की कीमत लगभग 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने की अपील की। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से अधिक पैसे लेना स्वीकार्य नहीं है और इसे गैरकानूनी माना जा सकता है।   तेल कंपनियों को दी सख्त चेतावनी राष्ट्रपति ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कंपनियों ने जल्द कीमतों में कटौती नहीं की, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। इससे पहले भी ट्रम्प अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण संबंधी गतिविधियों की जांच के निर्देश दे चुके हैं।   मध्य पूर्व तनाव के बाद बदला बाजार का रुख हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि अब स्थिति कुछ सामान्य होने के साथ तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आने पर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है।   ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में महंगाई और ईंधन की कीमतें आम लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि बाजार में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni responds to comments by US President Donald Trump during a media interaction in Rome.
'अमेरिका के सामने नहीं झुकेंगे', ट्रंप के आरोपों पर जॉर्जिया मेलोनी का पलटवार, कहा- साझेदारी बराबरी की होती है

  रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इटली और अमेरिका के संबंध बराबरी और साझेदारी पर आधारित हैं, न कि किसी के सामने झुकने पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न तो अमेरिका विरोधी है और न ही किसी विदेशी नेता के दबाव में काम करती है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ कई बार तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ऐसा अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कर रही थीं। मेलोनी ने दिया जवाब एक इटैलियन समाचार संस्थान को दिए इंटरव्यू में मेलोनी ने ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "मैं न पहले किसी के सामने झुकी थी और न आगे झुकूंगी। अमेरिका के साथ हमारा रिश्ता मजबूत साझेदारी और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है।" उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की ताकत उनकी एकजुटता में है और उन्होंने हमेशा इसी सोच के साथ काम किया है। 'लोकप्रियता विदेश नीति से तय नहीं होती' मेलोनी ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज किया कि उनकी लोकप्रियता अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाने की वजह से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता के साथ रिश्तों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर आधारित है कि उनकी सरकार इटली के राष्ट्रीय हितों की कितनी मजबूती से रक्षा करती है। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा इटली के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और आगे भी देती रहूंगी।" सैन्य समझौतों पर भी दिया बयान इटली की प्रधानमंत्री ने अमेरिका और इटली के बीच मौजूद सैन्य समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इटली में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों से जुड़े समझौतों का सम्मान किया जाएगा और उन्हें एकतरफा तरीके से बदला नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। ट्रंप को अप्रत्यक्ष संदेश मेलोनी ने बिना नाम लिए ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता को लेकर किसी और को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और बेहतर होगा कि हर नेता अपने काम पर ध्यान दे। अमेरिका दौरा भी टला इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया। सरकार की ओर से दौरा रद्द करने का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US Ambassador to India Sergio Gor speaks at the US-India Strategic Partnership Forum, discussing progress on the India-US trade agreement.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, दिसंबर में G20 के लिए अमेरिका जा सकते हैं पीएम मोदी: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

  वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल करीब एक प्रतिशत बातचीत बाकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता जल्द अंतिम रूप ले लेगा। 'सिर्फ एक प्रतिशत बातचीत बाकी' वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि करीब 18 महीने से दोनों देशों के बीच इस समझौते पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, "हम ट्रेड डील के अंतिम चरण में हैं। अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल लगभग एक प्रतिशत बातचीत बाकी है और हम इसे जल्द पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।" गोर ने कहा कि यह समझौता भारत और अमेरिका दोनों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगा। 20 वर्षों के रिश्तों का अगला पड़ाव उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध दो दशकों से लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे में इस समझौते को व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। गोर के मुताबिक, यूरोप के साथ अमेरिका के व्यापारिक समझौतों के बाद भारत के साथ यह डील दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगी। पीएम मोदी दिसंबर में अमेरिका आ सकते हैं सर्जियो गोर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में आयोजित होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिका का दौरा कर सकते हैं। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, गोर ने कहा, "विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान उन्हें अमेरिका आने का निमंत्रण दिया था। हमें उम्मीद है कि वे दिसंबर में G20 के लिए यहां आएंगे।" भारत सरकार की ओर से इस यात्रा को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ट्रंप और मोदी के रिश्तों की भी सराहना अमेरिकी राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत संबंध दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप आज भी अपनी पिछली भारत यात्रा को बेहद यादगार बताते हैं और अक्सर उसका उल्लेख करते हैं। फिलीपींस में होगी QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक सर्जियो गोर ने यह भी जानकारी दी कि QUAD (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्रियों की अगली बैठक लगभग दो सप्ताह बाद फिलीपींस में आयोजित होगी। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian Foreign Ministry officials amid conflicting statements over possible nuclear talks in Doha.
दोहा वार्ता पर ट्रंप के दावे को ईरान ने किया खारिज, कहा- अमेरिका से किसी बैठक का कार्यक्रम नहीं

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर एक बार फिर विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में जल्द बातचीत होगी, लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई बैठक तय नहीं की गई है। ट्रंप बोले- दोहा में होगी बातचीत वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता का मुख्य विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे और ईरान भी इस बात से सहमत है। ट्रंप के मुताबिक, इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत होगी। Truth Social पर भी किया दावा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भी पोस्ट कर लिखा कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया है और मंगलवार को दोहा में बातचीत होगी। उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठक में किन-किन प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। ईरान ने तुरंत किया खंडन ट्रंप के दावे के कुछ ही समय बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई वार्ता या बैठक निर्धारित नहीं है। उनके बयान के बाद दोहा में संभावित बातचीत को लेकर स्थिति और अधिक अस्पष्ट हो गई है। संघर्षविराम के बीच बढ़ी अनिश्चितता दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चले तनाव और सैन्य टकराव के बाद हाल ही में संघर्षविराम की स्थिति बनी है। ऐसे समय में वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावों ने कूटनीतिक प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की तैयारी की खबर समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर संभावित प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं। वहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान इस सप्ताह कतर में एक तकनीकी टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस तकनीकी दल की यात्रा का अमेरिकी अधिकारियों की किसी संभावित मौजूदगी या वार्ता से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं अमेरिका और ईरान की ओर से सामने आए अलग-अलग बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत को लेकर अभी कोई स्पष्ट सहमति दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में दोहा में संभावित वार्ता होगी या नहीं, इस पर फिलहाल संशय बना हुआ है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian officials amid conflicting claims over possible US-Iran talks in Doha.
ट्रंप का दावा- दोहा में बैठक के लिए ईरान ने किया अनुरोध, तेहरान ने किया खंडन

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच संभावित वार्ता को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में बैठक होगी। ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि इस सप्ताह किसी भी तरह की बैठक या वार्ता तय नहीं है। ट्रंप बोले- ईरान ने मांगी बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका से बैठक का अनुरोध किया है और यह बैठक अगले दिन दोहा में आयोजित होगी। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट पर हो सकती है चर्चा यदि अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में वार्ता होती है तो उसका मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को कम करना हो सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के दिनों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है। अमेरिकी अधिकारी का दावा- सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने फिलहाल सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहने तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रह सकती है। ईरान ने बैठक की खबरों को किया खारिज दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से नकार दिया है। सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट कहा कि इस सप्ताह किसी भी कार्य समूह की बैठक निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि कतर के साथ नियमित संपर्क और परामर्श जारी है, लेकिन दोहा में किसी तकनीकी बैठक की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, औपचारिक वार्ता तभी शुरू होगी जब दोनों पक्ष समय, स्थान और अन्य आवश्यक शर्तों पर सहमत होंगे। कतर निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में कतर लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर संपर्क जारी है और विभिन्न माध्यमों से बातचीत की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। विरोधाभासी दावों से बनी असमंजस की स्थिति ट्रंप के दावे और ईरान के आधिकारिक खंडन के बाद संभावित वार्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर अमेरिका बैठक होने की बात कह रहा है, जबकि ईरान किसी भी निर्धारित वार्ता से इनकार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और कूटनीतिक प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaks as Iran warns of halting US talks following American military strikes and rising tensions in the Gulf.
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन-कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले; वार्ता रोकने की चेतावनी

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पूरी तरह रोक दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा विवाद ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संचालन और सुरक्षा पर उसका नियंत्रण है तथा उसकी सीधी भागीदारी के बिना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का आरोप है कि अंतरिम समझौते के बावजूद कुछ देशों ने उसकी भूमिका को नजरअंदाज करते हुए जलडमरूमध्य में नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश की, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। ओमान मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भी हमले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित ओमान समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर भी दो बार हमले किए हैं। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जलमार्ग को वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानता रहा है। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस की लगभग पांचवें हिस्से की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी, इसलिए क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विदेश मंत्री अराघची का सख्त संदेश इराक यात्रा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से हालात और खराब होंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की मौजूदा व्यवस्था से अलग कोई नया तंत्र लागू करने की कोशिश की गई, तो इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में देरी होगी और क्षेत्रीय टकराव और बढ़ सकता है। कुवैत ने ड्रोन और मिसाइलें मार गिराने का दावा किया कुवैत की सेना के अनुसार, रविवार सुबह अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और कई ड्रोन को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। कुवैत में अमेरिकी सेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है, जिसके कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बहरीन में रिहायशी इमारत को नुकसान बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमलों के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हुई। इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई। सरकार की ओर से जारी तस्वीरों में इमारत की ऊपरी मंजिल को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दिया। बहरीन ने हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, समुद्र में एक व्यापारी पोत पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार नेटवर्क, हवाई रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों सहित कई रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है। वार्ता पर मंडराया संकट ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहता है, तो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह ठप हो सकती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
US airstrikes target Iranian military sites after alleged drone attack on a commercial cargo ship in the Strait of Hormuz
ट्रंप की डील मतलब… छिटपुट हमले! फिर भिड़े ईरान-अमेरिका, बरसाने लगे बारूद; होर्मुज फिर हुआ ब्लॉक

  US-Iran Attack Hormuz Strait: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के आरोप के बाद अमेरिका ने ईरान के मिसाइल, ड्रोन भंडारण ठिकानों और तटीय रडार केंद्रों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ताजा घटनाक्रम के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही एक बार फिर बाधित हो गई है। ड्रोन हमले के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि उसकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार यह कार्रवाई 25 जून को M/V Ever Lovely नामक सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई। CENTCOM ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और अमेरिकी बल लगातार समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए सहयोग कर रहे हैं। कार्रवाई के बाद अमेरिकी सेना ने हमलों का 37 सेकंड का वीडियो भी जारी किया। अमेरिका ने ईरान पर लगाया युद्धविराम उल्लंघन का आरोप अमेरिका का दावा है कि मालवाहक जहाज ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी उस पर ड्रोन हमला किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया। CENTCOM ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। हमलों की जगह का खुलासा नहीं अमेरिका ने यह नहीं बताया कि ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। उधर ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के ताहेरोयेह घाट के पास देर रात विस्फोटों की आवाज सुनी गई। सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया कि क्षेत्र में किसी प्रोजेक्टाइल के गिरने से धमाके हुए। ट्रंप बोले- युद्धविराम का 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित ड्रोन हमले को युद्धविराम समझौते का "मूर्खतापूर्ण उल्लंघन" बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि एक ड्रोन ने बेहद महंगे मालवाहक जहाज को सीधे निशाना बनाया, जबकि तीन अन्य ड्रोन को मार गिराया गया। ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि युद्धविराम का मतलब पूरी तरह गोलीबारी बंद होना नहीं, बल्कि हिंसा में कमी आना है। ताजा घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। जेडी वेंस ने दी सख्त चेतावनी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यदि ईरान की ओर से दोबारा हमला किया गया तो अमेरिका उसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि ईरान को समझौते के किसी पहलू पर आपत्ति है तो बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा। ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। IRGC ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने फिर किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई की तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने शांति समझौते के अनुच्छेद-5 का उल्लंघन किया है। ईरान का कहना है कि जिस मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति निर्धारित मार्ग से अलग रास्ता अपनाया था। फिर ठप हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद यहां समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया था। बाद में युद्धविराम के बाद सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हुई थी। अब ताजा हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद एक बार फिर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल से लागू है युद्धविराम अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है। इसके बावजूद बीच-बीच में समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच 17 जून को 14 सूत्रीय शांति समझौते पर सहमति बनी थी, जिसमें सैन्य गतिविधियां रोकने और 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया गया था। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच पहली दौर की वार्ता भी हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 28 और 29 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है, जहां स्थायी शांति समझौते के अगले चरण पर चर्चा की जाएगी।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
US military aircraft and Iranian missile launch imagery representing renewed military escalation between the United States and Iran following attacks in the Strait of Hormuz.
अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने: ड्रोन और मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक, ईरान ने सैन्य ठिकानों पर किया जवाबी हमला

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार को अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर हमला किया। इसके कुछ ही समय बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में हुए हालिया समझौते के बाद पहली प्रत्यक्ष सैन्य भिड़ंत माना जा रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कार्गो जहाज पर हमले के बाद अमेरिका की कार्रवाई अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कमर्शियल कार्गो शिप पर हमला किया। इस घटना के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर ड्रोन और मिसाइल से जुड़े सैन्य ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बयान जारी कर कहा कि कार्रवाई के दौरान चुनिंदा सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। हालांकि, हमलों में हुए नुकसान या हताहतों की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। IRGC का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमला अमेरिकी हमलों के कुछ ही देर बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया। ईरान ने कहा कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का "कड़ा और निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और इस हमले में कितना नुकसान हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ट्रंप ने पहले ही दिए थे जवाबी कार्रवाई के संकेत अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के खिलाफ संभावित जवाबी कदम के संकेत दिए थे। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका कार्गो जहाज पर हुए हमले का जवाब देगा, तो ट्रंप ने कहा, "आपको जल्द ही पता चल जाएगा।" इसके कुछ समय बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। क्षेत्र में बढ़ा तनाव अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में तनाव को फिर बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Donald Trumph
डोनाल्ड ट्रंप की 100% टैरिफ चेतावनी से बढ़ी वैश्विक चिंता, भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को 100% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, जो अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल सर्विसेज टैक्स (Digital Services Tax - DST) लागू करेंगे। इस बयान के बाद वैश्विक व्यापार जगत में नई हलचल शुरू हो गई है। फिलहाल यह चेतावनी मुख्य रूप से यूरोपीय देशों को लेकर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति व्यापक रूप से लागू होती है तो भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।   क्या है डिजिटल सर्विसेज टैक्स?   डिजिटल सर्विसेज टैक्स (DST) वह कर है, जिसे कुछ देश बड़ी डिजिटल कंपनियों—जैसे Google, Meta, Amazon और Apple—की स्थानीय डिजिटल आय पर लगाते हैं। अमेरिका लंबे समय से ऐसे टैक्स का विरोध करता रहा है और इसे अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण मानता है।   ट्रंप ने क्या कहा?   ट्रंप ने कहा कि यदि कोई देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लागू करता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामान पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसा कदम मौजूदा व्यापार समझौतों से ऊपर माना जाएगा।   भारत पर क्या होगा असर?   भारत फिलहाल इस चेतावनी का सीधा लक्ष्य नहीं है, लेकिन इसका असर कई तरीकों से पड़ सकता है: यदि अमेरिका इस नीति का दायरा बढ़ाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय आईटी और टेक कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबारी माहौल अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार तनाव बढ़ने पर वैश्विक सप्लाई चेन और निवेश प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ सकता है। शेयर बाजार में टेक और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।   विशेषज्ञ क्या मानते हैं?   अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फिलहाल भारत के लिए तत्काल खतरे की स्थिति नहीं है, क्योंकि ट्रंप की ताज़ा चेतावनी मुख्य रूप से यूरोपीय देशों के डिजिटल टैक्स को लेकर है। हालांकि यदि यह विवाद आगे बढ़ता है, तो वैश्विक व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव देखा जा सकता है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
U.S. President Donald Trump reacts after the Senate blocks a proposal to limit presidential military powers on Iran
ट्रंप को सीनेट में बड़ी राहत: ईरान पर राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियां सीमित करने वाला प्रस्ताव गिरा, दो रिपब्लिकन सांसदों ने बदला रुख

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान नीति के मोर्चे पर बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी सीनेट ने उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की शक्तियों पर कांग्रेस का नियंत्रण बढ़ाना था। मतदान के दौरान दो रिपब्लिकन सीनेटरों के अंतिम समय में रुख बदलने से ट्रंप प्रशासन को राहत मिल गई। प्रस्ताव के रुकने के बाद ट्रंप ने इसे ईरान के लिए "कड़ा संदेश" बताया और अपने सहयोगी सांसदों का धन्यवाद किया। ट्रंप ने जताई खुशी, बोले- ईरान के लिए चेतावनी सीनेट में मतदान के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "वाह! सीनेट ने ईरान पर अपना वोट बदल दिया। रैंड पॉल और बिल कैसिडी ने अपना रुख बदला। नेता जॉन थ्यून, लिंडसे ग्राहम, बर्नी मोरेनो और सभी का धन्यवाद। यह वोट ईरान के लिए एक चेतावनी है।" ट्रंप का कहना है कि राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव अमेरिका की कूटनीतिक और रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता था। राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर लगाम लगाने की कोशिश नाकाम सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी आवश्यक हो। सीनेट ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और इस तरह राष्ट्रपति की मौजूदा युद्ध शक्तियों को सीमित करने की कोशिश फिलहाल विफल हो गई। दो रिपब्लिकन सांसदों ने बदला फैसला इस मतदान का सबसे बड़ा मोड़ दो रिपब्लिकन सांसदों के रुख बदलने से आया। सीनेटर रैंड पॉल ने इस बार 'प्रेजेंट' वोट किया, यानी उन्होंने पक्ष या विपक्ष में मतदान नहीं किया। सीनेटर बिल कैसिडी ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के खिलाफ मतदान किया। अंतिम मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका और परिणाम 47-50-1 रहा। रैंड पॉल बोले- शांति वार्ता के लिए दिया राष्ट्रपति को मौका मतदान से पहले रैंड पॉल ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी युद्ध शक्तियों को लेकर राय नहीं बदली है। उन्होंने लिखा कि उनका 'प्रेजेंट' वोट राष्ट्रपति को स्थायी शांति के लिए बातचीत करने की अधिक गुंजाइश देने के उद्देश्य से है। बिल कैसिडी ने पहले उठाए सवाल, फिर बदला रुख सीनेटर बिल कैसिडी ने पहले ट्रंप प्रशासन से ईरान संघर्ष को लेकर कई सवाल पूछे थे। उनका कहना था कि सांसदों और जनता को युद्ध की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। बाद में उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने उन्हें विस्तृत जानकारी दी, जिससे उनकी कई चिंताएं दूर हो गईं। इसके बाद उन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। कुछ रिपब्लिकन ने किया समर्थन, डेमोक्रेट में भी दिखी अलग राय रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स और लिसा मुर्कोव्स्की ने राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव का विरोध किया। इससे साफ हुआ कि ईरान नीति को लेकर मतभेद केवल पार्टी लाइनों तक सीमित नहीं हैं। राष्ट्रपति की शक्तियों पर बहस जारी अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों का तर्क है कि यदि कोई फैसला अमेरिका को बड़े सैन्य संघर्ष की ओर ले जा सकता है, तो उसमें कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए। वहीं ट्रंप समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय राष्ट्रपति के पास त्वरित निर्णय लेने की पर्याप्त संवैधानिक शक्तियां बनी रहनी चाहिए। ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच सीनेट का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत माना जा रहा है, जबकि राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में बहस आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0