Trump Statement

Donald Trump
ट्रम्प का तेल कंपनियों पर सख्त रुख, बोले- कच्चा तेल सस्ता हुआ तो पेट्रोल के दाम भी तुरंत घटाएं जाए

वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली तेल कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं की गई है।   'लोगों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे' ट्रम्प ने कहा कि जब कच्चा तेल लगातार सस्ता हो रहा है, तब भी आम अमेरिकी उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूली जा रही है। उन्होंने तेल कंपनियों से पेट्रोल की कीमत लगभग 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने की अपील की। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से अधिक पैसे लेना स्वीकार्य नहीं है और इसे गैरकानूनी माना जा सकता है।   तेल कंपनियों को दी सख्त चेतावनी राष्ट्रपति ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कंपनियों ने जल्द कीमतों में कटौती नहीं की, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। इससे पहले भी ट्रम्प अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण संबंधी गतिविधियों की जांच के निर्देश दे चुके हैं।   मध्य पूर्व तनाव के बाद बदला बाजार का रुख हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि अब स्थिति कुछ सामान्य होने के साथ तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आने पर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है।   ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में महंगाई और ईंधन की कीमतें आम लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि बाजार में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
US Iran relations
ईरान के साथ समझौते के करीब अमेरिका, ट्रंप बोले- बमबारी से ज्यादा असरदार होगी डील

न्यूयॉर्क, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक मजबूत और प्रभावशाली समझौता होने की संभावना काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही ऐसा समझौता हो सकता है जो सैन्य कार्रवाई से भी अधिक प्रभावी साबित होगा।   न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास सैन्य विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो ईरान के खिलाफ व्यापक बमबारी अभियान चला सकता है, लेकिन इससे क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री व्यापार मार्गों पर गंभीर असर पड़ेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध की तुलना में हस्ताक्षरित समझौता अधिक स्थायी और मजबूत परिणाम देगा।   ‘बमबारी नहीं, समझौता बेहतर विकल्प’ ट्रंप ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है, जिसे वे टालना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक औपचारिक समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकता है।   नाकेबंदी को बताया सबसे प्रभावी हथियार अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। उनके अनुसार, यही दबाव तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल रहा है। ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी कई मामलों में बमबारी से भी अधिक प्रभावशाली साबित हुई है और ईरान अब समझौते के लिए मजबूर होता दिख रहा है।   मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव हाल के दिनों में ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री से भी बातचीत कर संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

Unknown जून 9, 2026 0
Donald Trump speaking about a possible Iran agreement and developments around the Strait of Hormuz
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- जल्द हो सकता है ईरान से समझौता

अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र में लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जा रही है और ईरान के साथ संभावित समझौते पर जल्द फैसला लिया जा सकता है। ईरान ने उनके दावों पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई है और कहा है कि बातचीत अभी जारी है। शांति समझौते पर चल रही है बातचीत पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत हो रही है। दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच शुरुआती स्तर पर कुछ सहमति बनी है और मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम समझौते की घोषणा अभी नहीं हुई है। व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर जल्द निर्णय लेंगे। इसके लिए व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब दो घंटे तक एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समझौते से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक के बाद व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किसी अंतिम फैसले पर सहमति बनी है या नहीं। ईरान के सामने रखीं ये प्रमुख शर्तें ट्रंप ने कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए ईरान को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार करनी होंगी। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार या परमाणु बम विकसित नहीं करेगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को सभी देशों के जहाजों के लिए बिना किसी शुल्क और बाधा के खोलना होगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया या निष्क्रिय किया जाएगा ताकि समुद्री यातायात सामान्य हो सके। होर्मुज में फंसे जहाजों को लेकर ट्रंप का बयान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई के कारण प्रभावित जहाज अब जल्द अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इसी दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि जहाजों के चालक दल अपने परिवारों तक लौट सकते हैं और "अपनी पत्नी को मेरी तरफ से हैलो कहना।" उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बन गई। व्हाइट हाउस ने क्या कहा? व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका तभी किसी शांति समझौते को अंतिम रूप देगा, जब ईरान सभी आवश्यक शर्तों को स्वीकार करेगा। अधिकारी के अनुसार, बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर समझौते पर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक समुदाय की नजर बनी हुई है। यदि समझौता सफल होता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Donald Trump praises Prime Minister Narendra Modi and highlights strong India-US relations during a special event.Trump Praises PM Modi and India-US Ties
पीएम मोदी पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- “मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं”

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना “महान दोस्त” बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार (24 मई) रात आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि भारत उन पर और अमेरिका पर “100 प्रतिशत भरोसा” कर सकता है। यह कार्यक्रम अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर Bharat Mandapam में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor मौजूद रहे। फोन पर ट्रंप ने भेजा पीएम मोदी को संदेश कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कराई। ट्रंप ने कहा, “सबको मेरा नमस्कार कहना। मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। मोदी महान हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के बड़े प्रशंसक हैं और सभी को शानदार शाम की शुभकामनाएं दीं। ट्रंप की बातें कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सुनाने के लिए फोन को माइक्रोफोन के पास रखा गया। “भारत के पहले कभी इतने करीब नहीं रहे” डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश पहले कभी इतने करीब नहीं रहे। उन्होंने कहा, “भारत मुझ पर और हमारे देश पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़े, तो वे जानते हैं कि कहां फोन करना है।” ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड आर्थिक प्रदर्शन और रिकॉर्ड शेयर बाजार की ओर बढ़ रहा है। कार्यक्रम में एआर रहमान की प्रस्तुति रही आकर्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संगीतकार A. R. Rahman की प्रस्तुति रही। उन्होंने “दिल से”, “मां तुझे सलाम” और “तेरे बिना” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा कार्यक्रम में मार्को रूबियो का जन्मदिन भी मनाया गया। समापन अमेरिकी बैंड Village People की प्रस्तुति के साथ हुआ। जयशंकर बोले- रिश्ते मजबूत करने का सही समय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की आजादी की घोषणा ने दुनिया को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून का राज और जवाबदेह सरकार जैसे महत्वपूर्ण मूल्य दिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत करने का यह सबसे बेहतर समय है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Donald Trump speaks about Israel, Benjamin Netanyahu and Iran during a press conference
इजरायल में PM चुनाव लड़ने वाला ट्रंप का दावा, नेतन्याहू और ईरान पर भी दिए बड़े बयान

Donald Trump ने एक बार फिर अपने बयान से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि इजरायल में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और अगर वह चाहें तो वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव भी लड़ सकते हैं। रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “इस समय इजरायल में मेरी लोकप्रियता 99% है। मैं वहां प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ सकता हूं।” “मेरे पास 99% समर्थन है” ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें इजरायल में भारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्हें एक सर्वे मिला, जिसमें उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत बताई गई। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “शायद यह काम खत्म करने के बाद मैं इजरायल जाऊं और वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव लड़ूं।” हालांकि ट्रंप ने इस दौरान किसी सर्वे एजेंसी या आधिकारिक पोल का नाम नहीं बताया। ईरान पर हमले को लेकर क्या बोले ट्रंप? ईरान को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल किसी समझौते को मौका देना चाहते हैं और जल्दबाजी में सैन्य कार्रवाई नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, “हमें स्ट्रेट खोलनी होगी और वह तुरंत खुल जाएगी। हम इसे एक मौका देने जा रहे हैं। मुझे कोई जल्दी नहीं है। मैं कम से कम लोगों की मौत देखना चाहता हूं।” ट्रंप का इशारा Strait of Hormuz की ओर माना जा रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद अहम समुद्री मार्ग है। नेतन्याहू को बताया “शानदार इंसान” प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने Benjamin Netanyahu की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं। वह वही करेंगे जो मैं कहूंगा। वह एक शानदार व्यक्ति हैं। यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि नेतन्याहू के साथ इजरायल में सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है। ईरान को फिर दी चेतावनी इससे पहले ट्रंप ईरान को लेकर भी सख्त चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो “एक और बड़ा हमला” हो सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। ट्रंप और नेतन्याहू पर इनाम की चर्चा इसी बीच ईरान में ट्रंप और नेतन्याहू को लेकर एक नए विवाद ने भी ध्यान खींचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजीजी ने एक नए विधेयक का जिक्र किया है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बिल का नाम “इस्लामिक रिपब्लिक की सैन्य और सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई” रखा गया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस प्रस्ताव में ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या करने वाले व्यक्ति या संगठन को करोड़ों डॉलर का इनाम देने की बात कही गई है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि और संसदीय प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप के बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Donald Trump speaks about Pakistan’s role in the Iran ceasefire during media interaction aboard Air Force One
‘पाकिस्तान पर एहसान किया’, ईरान सीजफायर को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान, शहबाज सरकार के लिए नए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ हुए संघर्षविराम को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। चीन यात्रा से लौटते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने युद्धविराम कराकर “पाकिस्तान पर एहसान किया” है। ट्रंप के इस बयान के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सीजफायर में पाकिस्तान की अहम भूमिका का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और Iran के बीच तनाव कम कराने में पाकिस्तान ने बैकचैनल संपर्कों के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद ने ईरान के पांच सूत्रीय प्रस्ताव को वॉशिंगटन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद युद्धविराम की दिशा में प्रगति हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय मध्यस्थ और संवाद मंच के रूप में पेश करने की कोशिश की है। शहबाज शरीफ और इशाक डार की तारीफ ट्रंप ने बातचीत के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar की भी तारीफ की। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह संकेत भी दिया कि अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में पाकिस्तान से लगातार सहयोग की उम्मीद करता है। होर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए यह संघर्षविराम सिर्फ कूटनीतिक सफलता नहीं बल्कि आर्थिक जरूरत भी था। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव से तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित होने का खतरा था, जिसका असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता था। युद्धविराम के बाद पाकिस्तान को अपने ऊर्जा मार्ग सुरक्षित रखने में राहत मिली है। ट्रंप के बयान के क्या मायने? ट्रंप का “पाकिस्तान पर एहसान” वाला बयान पाकिस्तान के लिए मिश्रित संकेत माना जा रहा है। एक ओर इससे इस्लामाबाद की कूटनीतिक भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत भी दिया है कि पाकिस्तान को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर सीमा पार आतंकवाद, पर ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अफगान सीमा और आतंकवाद पर भी इशारा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने हालिया सुरक्षा घटनाओं का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को अपनी सीमाओं पर सुरक्षा मजबूत करने का संदेश दिया। हाल ही में Bannu में पुलिस चौकी पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल मध्य पूर्व में जारी तनाव, होर्मुज संकट और अमेरिका-ईरान संबंधों के बीच पाकिस्तान की भूमिका ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा दे दी है। फिलहाल अमेरिकी और पाकिस्तानी सरकारों की ओर से बैकचैनल कूटनीति के कई पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Donald Trump speaking about Xi Jinping’s remarks while criticizing Joe Biden’s administration
‘100% सही थे शी जिनपिंग’, अमेरिका की हालत पर ट्रंप का बयान; बाइडेन पर साधा निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने तेज़ प्रगति की, जबकि देश की गिरावट बाइडेन प्रशासन के दौरान हुई। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के उस बयान का जिक्र किया जिसमें अमेरिका को “गिरावट की ओर बढ़ता देश” बताया गया था। ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग की बात से “100 फीसदी सहमत” हैं, लेकिन यह टिप्पणी उनके कार्यकाल पर नहीं बल्कि बाइडेन सरकार के दौर पर लागू होती है। ‘बाइडेन के समय देश कमजोर हुआ’ ट्रंप ने कहा कि बाइडेन प्रशासन के चार वर्षों में अमेरिका को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर काफी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि खुली सीमाओं, ज्यादा टैक्स, गलत व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध ने देश को कमजोर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी और DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इन्क्लूजन) नीतियों की भी आलोचना की। ‘मेरे नेतृत्व में अमेरिका ने जबरदस्त उछाल देखा’ ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने केवल 16 महीनों में बड़ी आर्थिक सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, 401K निवेश मजबूत हुए और अमेरिका फिर से आर्थिक ताकत के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली बनी रही और ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया। ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ रिश्तों में सुधार और रिकॉर्ड निवेश आने का भी दावा किया। ‘शी जिनपिंग ने दी थी बधाई’ ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में रोजगार के अवसर बढ़े और कई नीतिगत बदलावों ने अमेरिका को मजबूत बनाया। हालांकि ट्रंप के इन दावों पर विपक्षी डेमोक्रेटिक नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Donald Trump speaking to media amid rising US-Iran tensions and military conflict debate
“ये अमेरिकी कायर हैं...”, ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, आलोचकों पर साधा निशाना

Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य ताकत पर सवाल उठाने वालों पर तीखा हमला बोला है। चीन दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान सैन्य मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, वे “देशद्रोही” मानसिकता दिखा रहे हैं। ट्रंप ने कहा: “ये अमेरिकी कायर हैं जो हमारे देश के खिलाफ हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान ईरान को “झूठी उम्मीद” देते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। “ईरान की नेवी और एयर फोर्स खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की नौसैनिक और वायु सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक: ईरान के 159 नौसैनिक जहाज अब नष्ट हो चुके हैं ईरानी एयर फोर्स लगभग खत्म हो गई है सैन्य तकनीक और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है हालांकि ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी ट्रंप ने कहा कि ईरान अब आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल “लूजर और एहसान फरामोश लोग” ही अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को घरेलू आलोचकों और विपक्षी नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी किया बचाव इस बीच Pete Hegseth ने भी ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति का बचाव किया। सीनेट एप्रोप्रिएशन सबकमेटी के सामने पेश होते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और Strait of Hormuz में तनाव के बावजूद अमेरिका के पास अभी भी “सभी कार्ड” मौजूद हैं। इंडो-पैसिफिक सहयोगियों को संदेश पीट हेगसेथ ने Dan Caine के साथ सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बढ़ते तनाव से वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल कीमतों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Donald Trump speaking about Iran during an Oval Office address
मेरी एक कॉल से रुकी 8 महिलाओं की फांसी”–ट्रंप का दावा, ईरान की ताकत पर भी बड़ा बयान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। ओवल ऑफिस में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी एक कॉल के बाद ईरान में 8 महिलाओं को दी जाने वाली फांसी रोक दी गई। “एक फोन कॉल से टली फांसी” ट्रंप ने कहा कि ईरान 8 महिलाओं को फांसी देने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप करते हुए कहा–“ऐसा मत करो, पूरी दुनिया देख रही है।” उन्होंने दावा किया कि उनकी इस अपील के बाद फांसी रोक दी गई। विरोध प्रदर्शनों पर गंभीर आरोप ट्रंप के अनुसार, पिछले दो महीनों में ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 42,000 लोगों की मौत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग निहत्थे थे और सिर्फ विरोध करने के कारण मारे गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ईरान की सैन्य ताकत पर दावा ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। उनके मुताबिक: नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है वायुसेना भी काफी हद तक निष्क्रिय हो गई है ड्रोन फैक्ट्रियां 82% तक नष्ट मिसाइल फैक्ट्रियां करीब 90% तक तबाह उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब अमेरिका के साथ समझौता करने को “बेताब” है। अर्थव्यवस्था पर भी असर ट्रंप के अनुसार, अमेरिका की नाकेबंदी (ब्लॉकेड) के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान को तेल से लगभग कोई आय नहीं हो रही और आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। अन्य मुद्दों का भी जिक्र ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान में एक पहलवान समेत कई लोगों को राजनीतिक बयानों के कारण फांसी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां विरोध करने वालों पर सख्ती की जा रही है और मौत के वास्तविक आंकड़े आधिकारिक आंकड़ों से ज्यादा हो सकते हैं। बाजार और रणनीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि डॉव जोन्स इंडेक्स और एसएंडपी 500 नई ऊंचाइयों पर पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने ईरान पर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ईरान का जवाब वहीं, ईरान की ओर से जवाब देते हुए संसद अध्यक्ष ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण मजबूत किया जाएगा और फारस की खाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अमेरिका के किसी भी हस्तक्षेप का मुकाबला करने की बात कही।

surbhi मई 1, 2026 0
Donald Trump comments on Iran deal negotiations and maritime blockade
Donald Trump के दोहरे संकेत: ईरान से डील की बात व बंदरगाहों पर US की सख्त घेराबंदी

अमेरिका और Iran के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump बातचीत और समझौते के संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने ईरान के समुद्री रास्तों पर भारी सैन्य घेराबंदी कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, इस मिशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक, 12 से अधिक युद्धपोत और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं। समुद्र में अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन इस ऑपरेशन में एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। CENTCOM का कहना है कि कोई भी जहाज अगर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाता है या वहां से निकलता है, तो उसे रोका जाएगा और जांच की जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन निगरानी कड़ी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz को बंद नहीं किया गया है। यह घेराबंदी केवल ईरान के बंदरगाहों और तटीय सीमा तक सीमित है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी अमेरिकी सेना पूरी तरह सक्रिय है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ‘डार्क फ्लीट’ पर भी शिकंजा अमेरिका ने उन जहाजों पर भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिन्हें ‘डार्क फ्लीट’ कहा जाता है। ये ऐसे जहाज होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर गुप्त रूप से ईरानी तेल की ढुलाई करते हैं। ट्रंप बोले- ईरान डील के लिए तैयार इसी बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अब समझौते के लिए पहले से ज्यादा तैयार है। उन्होंने कहा, “ईरान आज उन शर्तों को मानने को तैयार है, जिनके लिए वह पहले राजी नहीं था।” ट्रंप ने साफ किया कि किसी भी संभावित डील की सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। सीजफायर टूटा तो फिर जंग राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत असफल रही, तो युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Donald Trump speaking on Iran war with jets and nuclear symbols representing geopolitical tension
ट्रंप का बड़ा दावा: “जंग जीत ली”, बोले-ईरान परमाणु हथियार न रखने पर हुआ सहमत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस जंग को “जीत चुका है” और ईरान अब कभी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है। “ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की न्यूक्लियर क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा: अगर हमला नहीं किया जाता, तो ईरान दो हफ्ते में परमाणु हथियार बना लेता ईरान इसका इस्तेमाल इजरायल और पूरे पश्चिम एशिया में कर सकता था अमेरिकी कार्रवाई ने इस खतरे को पूरी तरह खत्म कर दिया “तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं हमारे विमान” ट्रंप ने यह भी कहा कि जंग में ईरान की नौसेना और वायुसेना खत्म हो चुकी है। उनके मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमान तेहरान और अन्य इलाकों के ऊपर उड़ान भर रहे हैं, जो उनकी सैन्य बढ़त को दिखाता है। “समझौते के लिए तैयार है ईरान” ट्रंप ने कहा कि ईरान अब समझौता करना चाहता है। बातचीत में शामिल प्रमुख नाम: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रूबियो विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जेरेड कुशनर हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह पहले से सब कुछ सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो चुका है। ईरान में “सत्ता परिवर्तन” का दावा ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उनके मुताबिक: मौजूदा नेतृत्व पहले से अलग है नए लोग सत्ता में आए हैं यह बदलाव “रिजीम चेंज” जैसा है पाकिस्तान की एंट्री: मध्यस्थता की पेशकश इस बीच पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर पहल दिखाई है। ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि: पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करना चाहता है शांति वार्ता के लिए “सार्थक और निर्णायक भूमिका” निभाने को तैयार है

surbhi मार्च 25, 2026 0
Missile launches and drones over Middle East conflict map highlighting Iran Israel escalating military tensions
ईरान का साफ संदेश: “पछतावा नहीं, तो जंग जारी” - इजरायल पर मिसाइल-ड्रोन हमले तेज

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने “हमलों पर पछतावा” नहीं जताते, तब तक जंग जारी रहेगी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आखिरी दम तक करेगा। उन्होंने तेहरान के सिविल और डिफेंस ठिकानों पर हुए हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की असली वजह बताया। IRGC का पलटवार: इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले जमीनी स्तर पर संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजरायल के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। खैबर शिकन, इमाद और सज्जील जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कामिकाज़े ड्रोन से हमले तेल अवीव, रामत गन और नेगेव के सैन्य केंद्र टारगेट बीरशेबा में लॉजिस्टिक और कमांड हेडक्वार्टर पर सीधा प्रहार ईरान का दावा है कि इन हमलों ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया। ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान में बदलाव, जल्द होगी डील” इन हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक: ईरान में “नई लीडरशिप” आ चुकी है पुरानी व्यवस्था और खामेनेई अब सीन से बाहर अमेरिका की बातचीत “सही लोगों” से जारी ईरान ने तेल-गैस से जुड़ा बड़ा “तोहफा” दिया ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर ईरान का हमला अराघची ने पश्चिमी देशों पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि: यूक्रेन और गाजा के मामलों में अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं इससे अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो रहा है हालांकि, उन्होंने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमीयर की सराहना की, जिन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। रूस की चेतावनी: न्यूक्लियर खतरा बढ़ा रूस ने भी इस तनाव पर चिंता जताई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हो रहे हमलों को बेहद खतरनाक बताया। रूस के मुताबिक: न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान हुआ तो बड़ा पर्यावरणीय संकट हो सकता है यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

abhishek singh जून 30, 2026 0