हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री की उभरती अभिनेत्री दिव्यांका सिरोही की अचानक मौत ने फैंस और परिवार दोनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। महज 30 साल की उम्र में उनका यूं अचानक दुनिया से चले जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
दिव्यांका की मौत के बाद उनका साल 2023 का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में उन्होंने नीली जैकेट और पगड़ी पहने तस्वीर साझा करते हुए लिखा था–“शिव मुझे अपने साथ ले चलो।”
यह पोस्ट उनके प्रोफाइल पर पिन था, जिसके कारण अब फैंस इसे उनका आखिरी संदेश मान रहे हैं। इस पोस्ट को देखकर कई लोग भावुक हो गए हैं और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 अप्रैल को दिव्यांका अपने घर पर थीं, जब अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। वह बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रारंभिक तौर पर हार्ट अटैक को मौत की वजह माना जा रहा है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
परिवार के मुताबिक, जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन दिव्यांका पूरी तरह सामान्य थीं। उन्होंने अपने भाई के साथ खाना भी खाया था।
हालांकि, उन्होंने हल्की तबीयत खराब होने की बात कही थी। इसके बाद उनका भाई काम से बाहर चला गया और दिव्यांका घर पर अकेली थीं। जब परिवार के अन्य सदस्य लौटे, तो उन्होंने दिव्यांका को मृत अवस्था में पाया।
परिजनों ने यह भी बताया कि उनका शरीर अकड़ा हुआ था और हल्की सूजन भी दिखाई दे रही थी।
दिव्यांका की अचानक मौत के बाद सोशल मीडिया पर फैंस कई सवाल उठा रहे हैं, खासकर कम उम्र में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को लेकर। कई लोगों ने इसे चिंताजनक ट्रेंड बताया है और इसकी वजह जानने की मांग की है।
दिव्यांका सिरोही का जन्म 1996 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुआ था। उन्होंने बीसीए की पढ़ाई की, लेकिन बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TikTok पर उनके वीडियोज वायरल होने के बाद उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने हरियाणवी फिल्मों और म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा और तेजी से लोकप्रियता हासिल की।
उनकी असामयिक मौत ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरी इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
साउथ सुपरस्टार Allu Arjun और निर्देशक Atlee की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Raaka’ को लेकर चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। अभिनेत्री Deepika Padukone की दूसरी प्रेग्नेंसी की खबर सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि फिल्म में उनका रोल छोटा कर दिया जाएगा या उन्हें रिप्लेस किया जा सकता है। अब फिल्म के निर्माताओं ने इन सभी अफवाहों को खारिज कर दिया है। मेकर्स ने दी सफाई फिल्म से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ‘Raaka’ की शूटिंग तय योजना के अनुसार जारी है और दीपिका पादुकोण इस प्रोजेक्ट में एक बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। टीम के अनुसार, सेट पर काम पूरी ऊर्जा के साथ चल रहा है और किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। प्रेग्नेंसी के दौरान भी जारी शूटिंग दीपिका पादुकोण ने हाल ही में अपने पति Ranveer Singh के साथ दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा की, जिससे उनके फैंस काफी खुश हैं। इसके बावजूद, वह ‘Raaka’ की शूटिंग जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेत्री फिल्म में एक्शन सीक्वेंस भी शूट कर रही हैं, हालांकि सभी जरूरी सावधानियों के साथ। पहले भी प्रेग्नेंसी में किया काम यह पहली बार नहीं है जब दीपिका प्रेग्नेंसी के दौरान काम कर रही हैं। इससे पहले, 2024 में अपनी पहली प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने फिल्म Kalki 2898 AD की शूटिंग की थी और प्रमोशनल इवेंट्स में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। ‘Raaka’ में दूसरी बार Atlee के साथ सहयोग ‘Raaka’ में दीपिका और Atlee की यह दूसरी साझेदारी है। फिल्म का अनाउंसमेंट वीडियो पहले ही रिलीज हो चुका है, जिसमें दीपिका के दमदार एक्शन अवतार की झलक देखने को मिली थी। वहीं, हाल ही में अल्लू अर्जुन के जन्मदिन पर फिल्म से उनका फर्स्ट लुक भी सामने आया, जिसमें उनका फियरस अंदाज नजर आया। इसके अलावा, दीपिका जल्द ही Shah Rukh Khan की फिल्म ‘King’ के कुछ हिस्सों की शूटिंग भी पूरी करेंगी।
वेब सीरीज पंचायत के नए सचिव जी के रूप में पहचान बना चुके विनोद सूर्यवंशी ने अपने संघर्ष भरे सफर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआती दिनों में उन्हें न सिर्फ संघर्ष करना पड़ा, बल्कि कई बार अपमानजनक व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। ‘गलती से इंडस्ट्री में आया’ विनोद सूर्यवंशी ने बताया कि उनका अभिनय में आना पूरी तरह से अनियोजित था। उन्होंने कहा कि एक दोस्त के कहने पर वे पहली बार शूटिंग सेट पर पहुंचे, जहां उन्हें भीड़ में खड़े होने के लिए 500 रुपये मिलते थे। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें नाश्ता और खाना मिलने के साथ-साथ दिन के अंत में पैसे मिलना, उनकी पिछली नौकरी से बेहतर लगा। इससे पहले वे एक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में 12 घंटे की शिफ्ट में महज 8,000 रुपये महीने कमाते थे, जबकि जूनियर आर्टिस्ट बनने के बाद उनकी आमदनी 10-12 हजार रुपये तक पहुंच गई। सेट पर मिला अपमानजनक व्यवहार हालांकि आमदनी में सुधार हुआ, लेकिन काम का माहौल अक्सर निराशाजनक रहा। विनोद ने बताया कि जूनियर कलाकारों के साथ अक्सर खराब व्यवहार किया जाता था। उन्हें गालियां दी जाती थीं और सम्मान नहीं मिलता था। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सहायक निर्देशक ही सबसे ज्यादा अपमानजनक रवैया अपनाते थे, जबकि बड़े कलाकार आमतौर पर सीधे तौर पर अपमान नहीं करते थे। ‘थाली छीन ली गई’ – जिंदगी का टर्निंग पॉइंट विनोद ने एक घटना का जिक्र किया, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने बताया कि एक बार जब वे एक कमरे में खाना खाने गए, तो एक सीनियर एक्टर ने उनकी थाली छीन ली और पूछा कि वे कौन हैं। जब उन्होंने खुद को जूनियर आर्टिस्ट बताया, तो उन्हें वहां से हटाकर अलग जगह खाने के लिए कहा गया। विनोद के मुताबिक, यह घटना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। उन्होंने उसी समय ठान लिया कि वे अभिनय में कुछ बड़ा करेंगे, ताकि उन्हें कम से कम सम्मान के साथ जीने का मौका मिले। रंग-रूप के आधार पर रिजेक्शन संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के बाद भी उन्हें अपने लुक्स की वजह से कई बार रिजेक्ट किया गया। उन्होंने बताया कि टीवी ऑडिशन के दौरान ‘अमीर दिखने वाले’ कलाकारों को प्राथमिकता दी जाती थी। यहां तक कि भिखारी के किरदार के लिए भी उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि वे उस रोल के लिए फिट नहीं हैं। धीरे-धीरे मिली पहचान लंबे संघर्ष के बाद विनोद सूर्यवंशी को टेलीविजन पर पहला बड़ा मौका मिला। इसके बाद उनकी कमाई में भी सुधार हुआ और उन्हें रोजाना 700 रुपये से बढ़कर 2500 रुपये तक मिलने लगे। उन्होंने आगे चलकर जॉली एलएलबी 3 में अक्षय कुमार के साथ काम किया और वेब सीरीज ‘जनावर’ का भी हिस्सा बने। आज ‘पंचायत’ में उनके किरदार ने उन्हें नई पहचान दिलाई है, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी इंडस्ट्री के उस सख्त सच को उजागर करती है, जहां सफलता तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होता।
तमिल सिनेमा की चर्चित फिल्म लव इंश्योरेंस कंपनी (LIK) अब बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ खोती नजर आ रही है। अभिनेता प्रदीप रंगनाथन की इस साइंस-फिक्शन कॉमेडी ड्रामा ने दूसरे सोमवार को महज 50 लाख रुपये की कमाई की, जो इसके अब तक के प्रदर्शन में सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। दूसरे हफ्ते में गिरावट ने बढ़ाई चिंता फिल्म ने दूसरे हफ्ते के शुरुआती चार दिनों में कुल 4.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। हालांकि, पहले हफ्ते के मुकाबले यह प्रदर्शन काफी कमजोर है। 11 दिनों में फिल्म की कुल कमाई 39.50 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए इसकी रफ्तार धीमी पड़ती जा रही है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म इस हफ्ते के अंत तक करीब 1.50 करोड़ रुपये और जोड़ सकती है, लेकिन इसके बाद थिएटर रन लगभग खत्म होने की कगार पर है। 50 करोड़ क्लब तक पहुंचना मुश्किल रुझानों के अनुसार, लव इंश्योरेंस कंपनी भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपये के आंकड़े से नीचे ही सिमट सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह प्रदीप रंगनाथन के करियर की सबसे कम कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो जाएगी। दिन-वार कमाई पर नजर फिल्म ने पहले तीन दिनों में शानदार शुरुआत की थी–पहले दिन 7.75 करोड़, दूसरे दिन 9.50 करोड़ और तीसरे दिन 8 करोड़ रुपये की कमाई हुई। लेकिन इसके बाद कलेक्शन लगातार गिरता गया और दूसरे सोमवार को यह घटकर 50 लाख रुपये रह गया। क्या है फिल्म की कहानी? यह फिल्म साल 2040 की एक ऐसी दुनिया पर आधारित है, जहां तकनीक इंसानों की जिंदगी के हर फैसले को नियंत्रित करती है–यहां तक कि प्यार भी। कहानी वासु नाम के एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक ऐसी लड़की से प्यार कर बैठता है जिसे सिस्टम “अनमैच” मानता है। जब एक कंपनी दावा करती है कि उसका ऐप हर रिश्ते को परफेक्ट बना सकता है, तब वासु का प्यार उस दावे को चुनौती देता है। फिल्म में प्रेम, तकनीक और कॉरपोरेट नियंत्रण के बीच संघर्ष को दिखाया गया है। फिल्म में कृति शेट्टी, एस जे सूर्या, गौरी जी किशन और योगी बाबू भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। आखिरी पड़ाव पर फिल्म शुरुआती अच्छी ओपनिंग के बावजूद ‘लव इंश्योरेंस कंपनी’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। कमजोर वर्ड ऑफ माउथ और लगातार गिरते कलेक्शन ने इसके बॉक्स ऑफिस सफर को सीमित कर दिया है।