फैशन और ब्यूटी

Venetian Beads Meet Rajasthan Craft in London Show

लंदन क्राफ्ट वीक 2026 में खास प्रदर्शनी: कैसे वेनेशियन ग्लास बीड्स ने राजस्थान में पाई नई पहचान

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Exhibition showcasing Venetian glass beads and Rajasthan beadwork at London Craft Week 2026 cultural display
Exhibition showcasing Venetian glass beads and Rajasthan beadwork at London Craft Week 2026 cultural display

लंदन: सदियों पुराने शिल्प और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की कहानी को नई दृष्टि से पेश करती एक अनोखी प्रदर्शनी London Craft Week 2026 में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। ‘Unbound by Beads: Migration, Memory & Material’ नामक यह प्रदर्शनी दिखाती है कि कैसे वेनेशियन ग्लास बीड्स ने राजस्थान की पारंपरिक कला और पहचान को नया अर्थ दिया।

यह प्रदर्शनी MOI Fine Jewellery, Princess Gauravi Kumari और Princess Diya Kumari Foundation के आर्टिजन कलेक्टिव के सहयोग से तैयार की गई है।

12वीं सदी से राजस्थान तक का सफर

वेनेशियन कारीगर 12वीं सदी से ग्लास बीड्स बनाने की कला में माहिर रहे हैं। 16वीं सदी तक यह शिल्प इतना विकसित हो चुका था कि इन मोतियों का उपयोग व्यापार में मुद्रा के रूप में होने लगा। समुद्री व्यापार मार्गों के जरिए ये बीड्स यूरोप से अफ्रीका और फिर गुजराती व्यापारियों के माध्यम से भारत पहुंचे।

समय के साथ, ये बीड्स पश्चिमी और उत्तरी भारत की स्थानीय परंपराओं का हिस्सा बन गए–खासतौर पर राजस्थान के बाड़मेर जिले में रहने वाले मेघवाल समुदाय में।

महिलाओं की परंपरा और पहचान

प्रदर्शनी का मुख्य फोकस इसी बात पर है कि कैसे इन बीड्स ने मेघवाल समुदाय की मातृसत्तात्मक परंपराओं में जगह बनाई। यहां युवा महिलाएं शादी से पहले अपनी मां और परिवार की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर बीडवर्क तैयार करती हैं, जिसे वे अपने ससुराल लेकर जाती हैं।

यह शिल्प केवल सजावट नहीं, बल्कि पहचान, स्मृति और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।

‘कलेक्टेबल’ की नई परिभाषा

MOI Fine Jewellery के संस्थापक पुजा और कुनाल शाह के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़े सवाल से शुरू हुआ–आखिर कोई वस्तु ‘कलेक्टेबल’ कब बनती है?

उनके शोध में यह सामने आया कि असली मूल्य केवल सोना-हीरा नहीं, बल्कि उस वस्तु की कहानी, परंपरा और भावनात्मक महत्व भी होता है।

तीन भागों में सजी प्रदर्शनी

यह प्रदर्शनी तीन हिस्सों में विभाजित है:

  • Material Histories: बीड्स के वैश्विक सफर की कहानी
  • Living Practice: आज भी जीवित परंपराओं का दस्तावेज़
  • Serai Collection: फाइन ज्वेलरी कलेक्शन, जो इन ऐतिहासिक यात्राओं से प्रेरित है

कारीगरों की दुनिया: बिना बाज़ार के भी जीवित कला

इस प्रोजेक्ट के दौरान एक खास बात सामने आई–यह बीडवर्क पूरी तरह व्यावसायिक नहीं है। मेघवाल समुदाय में इसे खुद के उपयोग और अभिव्यक्ति के लिए बनाया जाता है, न कि बाजार में बेचने के लिए।

यह पहल भारतीय हस्तशिल्प को केवल निर्यात या व्यापार के नजरिए से देखने की सोच को चुनौती देती है।

लक्ज़री की नई सोच

Gauravi Kumari के अनुसार, असली लक्ज़री वह है जो समय, मेहनत और कौशल से बनी हो। यह प्रदर्शनी इसी विचार को मजबूती देती है।

पहचान और विरासत पर नई बहस

‘Unbound by Beads’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यह दर्शकों को अपनी पहचान और विरासत पर नए सिरे से सोचने का मौका देती है। यह दिखाती है कि एक छोटा सा ग्लास बीड भी सदियों की यात्रा और संस्कृति को अपने भीतर समेट सकता है।

यह प्रदर्शनी 13 से 16 मई तक लंदन के The Lavery, Hazel Studio में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित की जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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क्या रोज़ाना ब्रो जेल लगाने से आइब्रो को नुकसान हो सकता है? जानिए एक्सपर्ट की राय

आजकल आइब्रो मेकअप सिर्फ बालों को सेट करने तक सीमित नहीं रह गया है। फ्लफी, लैमिनेटेड या नेचुरल लुक पाने के लिए ब्रो जेल कई लोगों की डेली ब्यूटी रूटीन का हिस्सा बन चुका है। लेकिन रोज़ाना इसका इस्तेमाल करने वालों के मन में एक सवाल जरूर आता है—क्या इससे आइब्रो के बाल कमजोर हो सकते हैं? क्या हर दिन ब्रो जेल लगाना सुरक्षित है? ब्यूटी एक्सपर्ट मोनिका अरांगुएज़न के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में रोज़ ब्रो जेल लगाने से आइब्रो की ग्रोथ या उनकी गुणवत्ता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। असली समस्या तब होती है जब: प्रोडक्ट में बहुत ज्यादा कठोर या ड्राइंग इंग्रीडिएंट्स हों। मेकअप हटाते समय बालों को जोर से रगड़ा जाए। रात में बिना सफाई किए प्रोडक्ट लगा रहने दिया जाए। खराब गुणवत्ता या एक्सपायर्ड प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाए। इन आदतों से आइब्रो के बाल कमजोर होकर टूट सकते हैं। अच्छा ब्रो जेल कैसा होना चाहिए? एक अच्छा ब्रो जेल: बालों को बिना कठोर बनाए सेट करे। आसानी से हट जाए। मॉइस्चराइजिंग और कंडीशनिंग तत्वों से भरपूर हो। त्वचा में खुजली, जलन या रूखापन पैदा न करे। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे प्रोडक्ट्स से बचें जिनमें अत्यधिक ड्राइंग अल्कोहल, तेज़ खुशबू या त्वचा को परेशान करने वाले तत्व मौजूद हों। ब्रो जेल लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान? जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट न लगाएं। ब्रश को बहुत जोर से न चलाएं। दिनभर आइब्रो को बार-बार छूने या सेट करने से बचें। मेकअप हटाते समय रगड़ने के बजाय जेंटल क्लेंजर का इस्तेमाल करें। सोने से पहले आइब्रो की अच्छी तरह सफाई जरूर करें। क्लियर या कलर्ड ब्रो जेल, कौन बेहतर? क्लियर ब्रो जेल उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जिनकी आइब्रो पहले से घनी हैं और जो नेचुरल लुक चाहते हैं। कलर्ड ब्रो जेल पतली या गैप वाली आइब्रो को भरा हुआ और अधिक डिफाइंड दिखाने में मदद करता है। फाइबर वाले जेल वॉल्यूम भी बढ़ाते हैं, लेकिन इन्हें हटाने के लिए अच्छी सफाई जरूरी होती है। आइब्रो को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? रोज़ रात को मेकअप पूरी तरह हटाएं। आइब्रो के आसपास की त्वचा को मॉइस्चराइज रखें। जरूरत से ज्यादा थ्रेडिंग या प्लकिंग से बचें। अच्छी गुणवत्ता वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स चुनें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही प्रोडक्ट और सही तकनीक अपनाई जाए, तो रोज़ाना ब्रो जेल का इस्तेमाल करना नुकसानदायक नहीं है। खूबसूरत आइब्रो सिर्फ स्टाइलिंग से नहीं, बल्कि उनकी सही देखभाल से भी बनती हैं।  

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रश्मिका मंदाना का जेंडर-न्यूट्रल फैशन स्टेटमेंट बना चर्चा का विषय

अभिनेत्री Rashmika Mandanna इन दिनों अपनी आगामी फिल्म Cocktail 2 के प्रमोशन को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान उन्होंने ऐसा फैशन लुक पेश किया, जिसने ग्लैमर और पारंपरिक रेड-कार्पेट स्टाइल से हटकर जेंडर-न्यूट्रल फैशन को नई पहचान दी। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया और फैशन जगत में चर्चा का विषय बन गया है। रिलैक्स्ड टेलरिंग के जरिए पेश किया नया फैशन ट्रेंड प्रमोशनल इवेंट के लिए रश्मिका ने डिजाइनर लेबल Rishta by Arjun Saluja की पाउडर ब्लू स्लीवलेस शर्ट को चुना। इसके साथ उन्होंने The Frankie Shop की ग्रे पिनस्ट्राइप, प्लिटेड और रिलैक्स्ड-फिट ट्राउजर पहनी। यह लुक बेहद सहज, आरामदायक और आधुनिक नजर आया, जो जेंडर-अग्नॉस्टिक ड्रेसिंग की खूबसूरती को दर्शाता है। विंटेज Givenchy टाई बनी पूरे लुक का आकर्षण रश्मिका की स्टाइलिस्ट Priyanka Kapadia ने इस आउटफिट को खास बनाने के लिए प्रपोर्शन और लेयरिंग पर विशेष ध्यान दिया। सॉफ्ट फैब्रिक वाली शर्ट को हाई-वेस्ट वाइड-लेग ट्राउजर के साथ पेयर किया गया। हालांकि इस लुक का सबसे आकर्षक हिस्सा था लक्जरी फैशन हाउस Givenchy की विंटेज ग्रे लोगो टाई। इसे जानबूझकर ढीले अंदाज में पहना गया, जिससे पूरे लुक में ‘बॉरोड-फ्रॉम-द-बॉयज’ एस्थेटिक और आत्मविश्वास का स्पर्श जुड़ गया। एंड्रोजिनस फैशन को पहले भी अपना चुकी हैं रश्मिका यह पहली बार नहीं है जब रश्मिका ने जेंडर-न्यूट्रल या एंड्रोजिनस फैशन को अपनाया हो। Cocktail 2 के प्रमोशनल टूर के दौरान वह पहले भी H&M और Stella McCartney के सहयोग से तैयार किए गए कलेक्शन में नजर आ चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने ओवरसाइज्ड डबल-ब्रेस्टेड वूल ब्लेजर, क्रिस्टल-एम्बेलिश्ड मेश बॉडीसूट और टू-टोन स्ट्रेट-लेग जींस को स्टाइल किया था। उनके इस प्रयोगात्मक फैशन सेंस को फैशन एक्सपर्ट्स ने भी सराहा था। मिनिमल एक्सेसरीज़ ने बढ़ाई आउटफिट की खूबसूरती रश्मिका ने अपने लुक को ओवरस्टाइल करने के बजाय मिनिमल रखा। उन्होंने जूलरी ब्रांड Marvi के कुछ सटल पीसेज़ पहने और फुटवियर के लिए Jimmy Choo के Brigitte 100 पंप्स को चुना। कम एक्सेसरीज़ के बावजूद उनका पूरा लुक बेहद संतुलित और स्टाइलिश दिखाई दिया। नैचुरल मेकअप और सॉफ्ट कर्ल्स ने किया लुक को कम्प्लीट ब्यूटी लुक की बात करें तो अभिनेत्री ने सॉफ्ट और एलिगेंट मेकअप को प्राथमिकता दी। ग्लोइंग बेस, स्मोकी आई मेकअप और न्यूड लिप्स ने उनके चेहरे की नैचुरल खूबसूरती को उभारा। वहीं, बालों को खुले रखते हुए सॉफ्ट और लूज़ कर्ल्स में स्टाइल किया गया, जिसने पूरे लुक में सहजता और परिष्कृत आकर्षण जोड़ दिया। फैशन के जरिए आत्मविश्वास और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का संदेश रश्मिका मंदाना का यह लुक केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि बदलते फैशन ट्रेंड्स का भी संकेत है। आज की युवा पीढ़ी ऐसे आउटफिट्स को पसंद कर रही है जो जेंडर की सीमाओं से परे जाकर आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को महत्व देते हैं। रश्मिका का यह अंदाज उसी सोच को मजबूती से सामने लाता है।  

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Modern Bandhani outfits showcasing traditional tie-dye craftsmanship in contemporary everyday fashion
Bandhani अब सिर्फ शादियों तक सीमित नहीं, रोजमर्रा के फैशन का बन रही हिस्सा

भारतीय पारंपरिक वस्त्र कला बंधनी (Bandhani), जो कभी केवल शादियों, त्योहारों और खास धार्मिक अवसरों तक सीमित मानी जाती थी, अब आधुनिक फैशन की दुनिया में नई पहचान बना रही है। राजस्थान और गुजरात की सदियों पुरानी यह टाई-एंड-डाई कला अब युवाओं की रोजमर्रा की वॉर्डरोब में जगह बना रही है। डिजाइनर्स इसे नए अंदाज में पेश कर रहे हैं, जिससे बंधनी का दायरा पारंपरिक साड़ियों और घाघरों से निकलकर शर्ट, को-ऑर्ड सेट, ड्रेसेस, काफ्तान और जैकेट्स तक पहुंच गया है। परंपरा से जुड़ी है गहरी सांस्कृतिक पहचान बंधनी केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। खासतौर पर गुजरात और राजस्थान में इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व है। लाल रंग की बंधनी दुल्हनों के लिए शुभ मानी जाती है, जो सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। वहीं पीले रंग की बंधनी नए जीवन और शुभ शुरुआत से जुड़ी होती है। गुजराती दुल्हनों के पारंपरिक परिधान घरचोला में बंधनी की विशेष भूमिका आज भी बरकरार है। डिजाइनर्स ने बदला बंधनी का रूप पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय डिजाइनर्स और फैशन लेबल्स ने बंधनी को आधुनिक फैशन से जोड़ने का काम किया है। स्पोर्ट्सवियर से लेकर कैजुअल वियर तक, बंधनी को नए सिल्हूट्स में पेश किया जा रहा है। फैशन ब्रांड्स जैसे NorBlack NorWhite ने इसे एक्टिववियर तक पहुंचाया, जबकि Abraham & Thakore ने अपनी मिनिमलिस्ट डिजाइन भाषा के जरिए बंधनी को डेली वियर का हिस्सा बनाया। वहीं Péro, Dyelogue और 11.11 जैसे लेबल्स इसे समकालीन फैशन में नए प्रयोगों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। नई पीढ़ी को क्यों पसंद आ रही है बंधनी? Dyelogue की संस्थापक रचिता पारेख के अनुसार, बंधनी को हमेशा केवल अवसर विशेष के कपड़े के रूप में देखा जाता था। लेकिन उन्होंने इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आसान और आरामदायक रूप में डिजाइन किया। काफ्तान, शर्ट और हल्के सिल्हूट्स ने युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ाई। इसके अलावा बंधनी के कई परिधान ऐसे होते हैं जिन्हें बार-बार इस्त्री करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे वे यात्रा और नियमित उपयोग के लिए भी सुविधाजनक बन जाते हैं। आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन 11.11 के सह-संस्थापक शनि हिमांशु का मानना है कि बंधनी को आधुनिक बनाने का मतलब उसकी तकनीक बदलना नहीं, बल्कि उसके उपयोग का संदर्भ बदलना है। उनके अनुसार, बंधनी की असली पहचान उन कारीगरों के हाथों में है जो पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं। यदि उसी तकनीक को आधुनिक परिधानों पर लागू किया जाए तो यह नई पीढ़ी तक पहुंच सकती है, बिना अपनी आत्मा खोए। सबसे बड़ी चुनौती: असली बंधनी को बचाए रखना विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मांग के साथ बाजार में प्रिंटेड बंधनी की संख्या भी बढ़ी है, जो असली हस्तनिर्मित बंधनी का विकल्प बनकर सामने आ रही है। लेकिन असली बंधनी हजारों छोटे-छोटे हाथ से बांधे गए गांठों की मेहनत का परिणाम होती है। यही कारण है कि उच्च गुणवत्ता वाली बंधनी आज भी महंगी और दुर्लभ होती जा रही है। कारीगरों की संख्या घटने और श्रम लागत बढ़ने के कारण इस कला को संरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि शर्ट, टॉप और को-ऑर्ड सेट जैसे उत्पादों ने इसे अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। बंधनी का बदलता भविष्य आज बंधनी केवल शादियों और त्योहारों की पहचान नहीं रह गई है। यह ऑफिस मीटिंग, दोस्तों के साथ आउटिंग, छुट्टियों और कैजुअल फैशन का भी हिस्सा बन रही है। डिजाइनर्स का मानना है कि परंपरा और प्रयोग दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते कारीगरों और शिल्प की मूल भावना को केंद्र में रखा जाए। एक समय जो वस्त्र केवल खास मौकों का इंतजार करता था, वह अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है।  

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