फैशन इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी H&M ने अब भारत में अपने ब्यूटी सेगमेंट की भी शानदार शुरुआत कर दी है। H&M Beauty का यह बहुप्रतीक्षित लॉन्च फेस्टिव सीजन के दौरान हुआ है, जो ग्राहकों को मेकअप, फ्रेगरेंस और ब्यूटी टूल्स की एक बड़ी और ट्रेंडी रेंज उपलब्ध कराता है।
H&M Beauty के इस कलेक्शन में 200 से ज्यादा प्रोडक्ट्स शामिल हैं, जो हर तरह के यूजर्स के लिए डिजाइन किए गए हैं।
यह कलेक्शन खासतौर पर फेस्टिव सीजन में आपकी पर्सनैलिटी को और निखारने के लिए तैयार किया गया है।
कंपनी ने कुछ “हीरो प्रोडक्ट्स” भी पेश किए हैं, जो पहले से ही चर्चा में हैं:
फ्रेगरेंस कैटेगरी में नए Eau de Parfum लॉन्च किए गए हैं, जो वेगन फॉर्मूला और लॉन्ग-लास्टिंग खुशबू के साथ आते हैं।
H&M Beauty का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी कीमत और क्वालिटी का संतुलन है।
यानी अब ग्राहक स्टाइल के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी निभा सकते हैं।
यह पूरी रेंज भारत में H&M के स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिससे ग्राहक आसानी से अपनी पसंद के प्रोडक्ट्स खरीद सकते हैं।
यह लॉन्च H&M India के 10 साल पूरे होने के मौके पर किया गया है, जिससे ब्रांड ने फैशन के साथ ब्यूटी को जोड़ते हुए ग्राहकों के लिए एक नया अनुभव तैयार किया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
आधुनिक दौर में ज्वेलरी सिर्फ सजावट का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह अब व्यक्तिगत अभिव्यक्ति, तकनीक और डिजाइन इनोवेशन का संगम बन चुकी है। एक समय था जब फाइन ज्वेलरी को सिर्फ खास मौकों या शादी-ब्याह तक सीमित माना जाता था, लेकिन आज यह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही है। नई पीढ़ी, खासकर जेन Z और मिलेनियल्स, अब ऐसी ज्वेलरी को पसंद कर रहे हैं जो न सिर्फ खूबसूरत हो, बल्कि इंटरैक्टिव, हल्की और उनकी पर्सनैलिटी के साथ मेल खाती हो। ज्वेलरी में नया बदलाव: सिर्फ चमक नहीं, अब ‘रिएक्शन’ भी पहले ज्वेलरी स्थिर होती थी-एक ही तरह से चमकती और दिखती थी। लेकिन अब डिजाइनर ऐसे मटेरियल और तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो रोशनी के साथ बदलते हैं। फोटोक्रोमिक फिनिश और लाइट-सेंसिटिव एनामेल अब ज्वेलरी को सूरज की रोशनी में रंग बदलने की क्षमता देते हैं UV एक्सपोजर के साथ पिगमेंट्स की संरचना बदलती है और रंग में बदलाव आता है रोशनी हटने पर ज्वेलरी फिर अपने मूल रंग में लौट आती है यह तकनीक ज्वेलरी को एक नया आयाम देती है, जहां वह सिर्फ रोशनी को प्रतिबिंबित नहीं करती, बल्कि उसके साथ संवाद भी करती है। ‘फायरफ्लाई इफेक्ट’: अंधेरे में चमकने वाली ज्वेलरी हाल के वर्षों में एक और अनोखा ट्रेंड तेजी से उभरा है-ग्लो-इन-द-डार्क ज्वेलरी। यह ज्वेलरी हल्की रोशनी में एक सॉफ्ट चमक देती है, जो इसे खास बनाती है। यह कोई तेज या भड़कीला इफेक्ट नहीं, बल्कि बेहद सटल और एलिगेंट ग्लो होता है। यह ट्रेंड खासकर उन लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है जो ज्वेलरी में कुछ अलग और यादगार चाहते हैं। हल्की ज्वेलरी: आराम और स्टाइल का संतुलन आज के समय में ज्वेलरी डिजाइन सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगिता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हल्के वजन की ज्वेलरी पूरे दिन पहनने में आरामदायक होती है 14KT, 18KT और 9KT गोल्ड में नए डिजाइन बनाए जा रहे हैं स्मार्ट क्लैप्स और बेहतर स्ट्रक्चर ज्वेलरी को ज्यादा टिकाऊ बनाते हैं विशेषज्ञों के अनुसार, 14KT गोल्ड रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सबसे संतुलित विकल्प माना जाता है, जबकि 18KT अधिक प्रीमियम फिनिश देता है। टेक्नोलॉजी और क्राफ्ट का मेल ज्वेलरी डिजाइन में अब तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है: CAD मॉडलिंग से जटिल और सटीक डिजाइन संभव हो रहे हैं लेजर टेक्नोलॉजी से महीन पैटर्न बनाए जा रहे हैं मटेरियल साइंस से नए इफेक्ट्स जैसे ग्लो और कलर शिफ्ट सुरक्षित रूप से जोड़े जा रहे हैं यह बदलाव पारंपरिक कारीगरी को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि उसे और उन्नत बना रहा है। नई पीढ़ी क्यों कर रही है पसंद? युवा उपभोक्ता अब ज्वेलरी को निवेश या परंपरा से ज्यादा “एक्सप्रेशन” के रूप में देख रहे हैं। वे ऐसी ज्वेलरी चाहते हैं जो रोज पहनी जा सके डिजाइन में यूनिकनेस और पर्सनल टच हो हल्की, टिकाऊ और स्टाइलिश हो यही वजह है कि एक्सपेरिमेंटल ज्वेलरी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। परंपरा और इनोवेशन का संतुलन इस पूरे बदलाव की सबसे खास बात यह है कि परंपरा खत्म नहीं हो रही, बल्कि नए रूप में सामने आ रही है। सोना अब भी कीमती है, कारीगरी अब भी अहम है-लेकिन अब उसमें रंग, रोशनी और तकनीक का नया स्पर्श जुड़ गया है। आज की ज्वेलरी सिर्फ पहनने के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए बनाई जा रही है।
भारतीय घरों में सदियों से इस्तेमाल होने वाला उबटन आज भी स्किन केयर का अहम हिस्सा है, लेकिन बदलते समय और बढ़ते प्रदूषण के बीच अब क्ले मास्क जैसे मॉडर्न विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। सवाल यह है कि टैन हटाने के लिए आखिर कौन सा तरीका ज्यादा असरदार है-पारंपरिक उबटन या नए जमाने का क्ले मास्क? पारंपरिक उबटन: परंपरा और प्राकृतिक देखभाल उबटन भारतीय स्किन केयर का पारंपरिक तरीका रहा है, जिसमें बेसन, हल्दी, चंदन और दूध या गुलाब जल जैसे प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। फायदे: पूरी तरह प्राकृतिक और केमिकल-फ्री स्किन को ठंडक और हल्की एक्सफोलिएशन घर पर आसानी से तैयार कमियां: हर बार समान परिणाम नहीं मिलते बेसन के कण कुछ लोगों की त्वचा को रुखा या इरिटेट कर सकते हैं गहराई से जमा गंदगी और प्रदूषण हटाने में सीमित असर क्ले मास्क: मॉडर्न स्किन केयर का समाधान आज के समय में क्ले मास्क-खासतौर पर Kaolin और Bentonite जैसे क्ले से बने-शहरी जीवनशैली के लिए ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं। फायदे: पोर्स की गहराई तक जाकर गंदगी, तेल और प्रदूषण साफ करते हैं कंट्रोल्ड एक्सफोलिएशन, जिससे स्किन को नुकसान नहीं होता Niacinamide और Vitamin C जैसे एक्टिव इंग्रीडिएंट्स से बेहतर रिजल्ट कमियां: कुछ मास्क ड्राई स्किन पर टाइट महसूस हो सकते हैं (हालांकि नए फॉर्मूले इसे कम करते हैं) कौन सा विकल्प आपकी स्किन के लिए बेहतर? ऑयली स्किन: क्ले मास्क बेहतर, क्योंकि यह एक्स्ट्रा ऑयल सोखता है ड्राई स्किन: हाइड्रेटिंग क्ले मास्क या मॉडर्न उबटन बेहतर सेंसिटिव स्किन: DIY उबटन से बचें, जेंटल क्ले मास्क चुनें कॉम्बिनेशन स्किन: क्ले मास्क सबसे संतुलित विकल्प डेली स्किन केयर क्यों जरूरी है? सिर्फ हफ्ते में एक बार मास्क लगाने से काम नहीं चलता। डेली: एक अच्छा डिटैन फेस वॉश स्किन को साफ और फ्रेश रखता है वीकली: क्ले मास्क डीप क्लीनिंग कर टैन हटाने में मदद करता है
गर्मियों ने दस्तक दे दी है और मार्च से ही तेज धूप ने हाल बेहाल कर दिया है। ऐसे में सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि सही रंग के कपड़े चुनना भी बेहद जरूरी हो जाता है। वैज्ञानिक तौर पर भी यह साबित है कि रंग शरीर के तापमान को प्रभावित करते हैं—कुछ रंग गर्मी को सोखते हैं, तो कुछ उसे रिफ्लेक्ट करते हैं। आइए जानते हैं गर्मियों के लिए 5 ऐसे कूल कलर्स, जो आपको स्टाइलिश भी बनाएंगे और ठंडक भी देंगे 1. सफेद (White) — गर्मियों का किंग सफेद रंग सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट करता है, जिससे शरीर कम गर्म होता है। कॉटन या लिनन की सफेद शर्ट/कुर्ता बेस्ट ऑप्शन है सिंपल, क्लासी और सबसे कूल 2. आसमानी नीला (Sky Blue) — फ्रेश और कूल लुक हल्का नीला रंग आंखों को ठंडक देता है और कम गर्मी सोखता है। हर स्किन टोन पर सूट करता है ऑफिस और कैजुअल दोनों के लिए परफेक्ट 3. बेबी पिंक (Pastel Pink) — सॉफ्ट और ट्रेंडी पेस्टल पिंक न ज्यादा चमकता है, न ज्यादा गर्मी सोखता है। आउटडोर इवेंट्स के लिए बेस्ट ट्रेंडी और एलिगेंट लुक देता है 4. मिंट ग्रीन (Mint Green) — नेचुरल कूलिंग यह रंग आंखों और दिमाग को ठंडक देता है। पसीने के दाग भी कम दिखते हैं कॉलेज और ऑफिस दोनों के लिए शानदार 5. हल्का पीला (Light Yellow) — ब्राइट और एनर्जेटिक नींबू जैसा हल्का पीला रंग गर्मी को रिफ्लेक्ट करता है। आपको फ्रेश और वाइब्रेंट दिखाता है समर वाइब्स के लिए परफेक्ट इन रंगों से करें परहेज काला (Black) नेवी ब्लू डार्क ब्राउन ये रंग ज्यादा गर्मी सोखते हैं, जिससे पसीना और बेचैनी बढ़ती है एक्स्ट्रा समर फैशन टिप्स फैब्रिक का ध्यान रखें: कॉटन, लिनन, शिफॉन पहनें लूज फिटिंग चुनें: हवा का वेंटिलेशन बना रहेगा लाइट कलर्स को प्राथमिकता दें