देशभर में हर सुबह की तरह आज 4 अप्रैल 2026 को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए हैं। आज ज्यादातर महानगरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। हालांकि उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है।
देश के प्रमुख महानगरों में आज पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वहीं, नोएडा में पेट्रोल 13 पैसे महंगा होकर ₹94.90 पर पहुंच गया है, जबकि बिहार के मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
यह उतार-चढ़ाव स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के कारण देखा जा रहा है।
डीजल की कीमतें भी आज अधिकतर शहरों में स्थिर बनी हुई हैं।
झारखंड के रांची में डीजल 25 पैसे महंगा हुआ है, जबकि जमशेदपुर में 18 पैसे की गिरावट दर्ज की गई है।
फ्यूल की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों पर निर्भर करती हैं:
इन्हीं वजहों से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं।
आप SMS के जरिए भी अपने शहर का फ्यूल रेट आसानी से चेक कर सकते हैं:
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारतीय एविएशन कंपनी SpiceJet के शेयरों में शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली, जब London की अदालत से कंपनी के खिलाफ बड़ा फैसला सामने आया। दो दिनों तक लगातार अपर सर्किट लगाने के बाद स्टॉक में यह गिरावट निवेशकों की बदलती धारणा को दर्शाती है। शेयर में गिरावट, तेजी पर लगा ब्रेक शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में SpiceJet का शेयर करीब 2.4% गिरकर 11.41 रुपये पर आ गया। इससे पहले कंपनी के शेयर में लगातार दो सत्रों में 10% से अधिक की तेजी देखी गई थी और गुरुवार को यह 11.69 रुपये पर बंद हुआ था। UK कोर्ट का आदेश: 8 मिलियन डॉलर का भुगतान Commercial Court London ने SpiceJet को लगभग 8 मिलियन डॉलर (करीब 70 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला विमान इंजन लीज देने वाली कंपनी Sunbird France 02 SAS के पक्ष में आया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SpiceJet के पास इस मामले में बचाव का कोई ठोस आधार नहीं था। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि कंपनी ने सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया, जबकि उसे पर्याप्त अवसर दिया गया था। विवाद की जड़: बकाया किराया और मेंटेनेंस शुल्क यह मामला जनवरी 2022 से लंबित लीज रेंट और नवंबर 2020 से जुड़े मेंटेनेंस बकाया से संबंधित है। जुलाई 2022 में लीज़र ने डिफॉल्ट नोटिस जारी किया था 2022 के अंत से 2023 के मध्य के बीच तीन इंजन वापस ले लिए गए अब इस फैसले के बाद लीज़र भारत में Delhi High Court का रुख कर सकते हैं, जिससे SpiceJet पर कानूनी और वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। पहले से ही वित्तीय संकट में कंपनी SpiceJet पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है: Boeing 737 MAX की ग्राउंडिंग का असर COVID-19 pandemic के कारण ऑपरेशन्स पर भारी असर लगातार घाटा और बैलेंस शीट पर दबाव ऑडिटर्स द्वारा “going concern” को लेकर अनिश्चितता जताई गई प्रतिस्पर्धा और बाजार हिस्सेदारी पर असर कंपनी को नए प्रतिस्पर्धियों जैसे Akasa Air से भी कड़ी चुनौती मिल रही है, जिससे बाजार हिस्सेदारी पर असर पड़ा है। इसके अलावा, लीज विवाद और सीमित फ्लीट भी कंपनी की ग्रोथ में बाधा बन रहे हैं। लंबी अवधि में कमजोर प्रदर्शन हालांकि हाल के दिनों में शेयर में तेजी देखी गई थी, लेकिन बड़ा ट्रेंड अब भी कमजोर है: पिछले 1 साल में SpiceJet का शेयर करीब 74% गिर चुका है वहीं Nifty 50 ने इसी अवधि में लगभग 4.1% की बढ़त दर्ज की है
इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) के शेयरों में गुरुवार को करीब 2% की गिरावट देखने को मिली, जबकि कंपनी को हाल ही में एक बड़ा ऑर्डर मिलने की खबर आई थी। शुरुआती कारोबार में स्टॉक करीब ₹3,923 पर ट्रेड करता दिखा, जिससे एक दिन पहले आई तेज तेजी का कुछ हिस्सा खत्म हो गया। NTPC ऑर्डर के बावजूद क्यों गिरे शेयर? हालांकि NTPC से जुड़े बड़े टेंडर में L&T को प्राथमिक बोलीदाता (Preferred Bidder) चुना गया है, लेकिन बाजार में मुनाफावसूली (Profit Booking) और वैश्विक अनिश्चितता के कारण शेयर में गिरावट आई। ब्रोकरेज फर्म CLSA ने L&T पर ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹4,842 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा स्तर से अच्छी बढ़त की संभावना दर्शाता है। कितनी बड़ी है यह डील? CLSA के मुताबिक: यह करीब $3.7 बिलियन (लगभग ₹30,000 करोड़) का टेंडर है 4.5 GW पावर इक्विपमेंट से जुड़ा प्रोजेक्ट L&T का पांचवां सबसे बड़ा ऑर्डर इस ऑर्डर से FY27 में कंपनी के ऑर्डर इनफ्लो में करीब 6% की बढ़ोतरी हो सकती है। मिडिल ईस्ट जोखिम को मिलेगा सहारा विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील पश्चिम एशिया (West Asia) से आने वाले कमजोर ऑर्डर मोमेंटम के असर को संतुलित करेगी। L&T के कुल ऑर्डर बुक का करीब 54% हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र से आता है, जो सरकार के कैपेक्स (Capital Expenditure) फोकस को भी दर्शाता है। BHEL पर बढ़त और मजबूत मार्केट शेयर BHEL के मुकाबले L&T ने: 3.2 GW प्रोजेक्ट्स जीते FY27 में करीब 49% मार्केट शेयर बनाए रखने की संभावना यह कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को मजबूत करता है। एक दिन पहले आई थी जोरदार तेजी गौरतलब है कि बुधवार को L&T के शेयरों में 7.6% की तेजी आई थी। इसकी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की खबरें थीं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा था। हालांकि, गुरुवार को फिर से तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बाजार में दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर निर्भरता L&T का बिजनेस काफी हद तक विदेशी बाजारों पर निर्भर है: FY25 (दिसंबर तक) में 55% ऑर्डर इनफ्लो विदेश से दिसंबर तिमाही में 49% ऑर्डर इंटरनेशनल कुल रेवेन्यू का 54% हिस्सा विदेशी बाजारों से इस वजह से पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव सीधे निवेशकों की भावना को प्रभावित करता है। लंबी अवधि में मजबूत प्रदर्शन हालिया गिरावट के बावजूद: पिछले 1 साल में L&T का शेयर 28.5% चढ़ा वहीं Nifty 50 में केवल 7% की बढ़त यह दर्शाता है कि लंबी अवधि में स्टॉक ने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया है।
इंडिगो की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation के शेयरों में 8 अप्रैल को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान शेयर 11% तक उछल गया, जो पिछले करीब 4 सालों की सबसे बड़ी इंट्राडे बढ़त है। पिछले 6 कारोबारी दिनों में से 5 दिन शेयर हरे निशान में रहा है और इस दौरान यह करीब 20% तक चढ़ चुका है, जिससे निवेशकों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। तेजी की 3 बड़ी वजहें 1. AERA का बड़ा फैसला एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) ने: लैंडिंग और पार्किंग चार्ज में 25% कटौती की यह राहत 3 महीने के लिए लागू होगी इससे एयरलाइन कंपनियों का ऑपरेटिंग कॉस्ट घटेगा, जो सीधे मुनाफे को बढ़ाएगा। 2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम की खबर के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 15% गिरावट ब्रेंट क्रूड $95 प्रति बैरल से नीचे एयरलाइन सेक्टर के लिए यह बेहद पॉजिटिव है, क्योंकि फ्यूल उनकी लागत का बड़ा हिस्सा होता है। 3.फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का असर इंडिगो ने 2 अप्रैल से: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया अब यात्रियों को ₹275 से ₹950 तक अतिरिक्त देना होगा इससे कंपनी की कमाई (Revenue) बढ़ने की उम्मीद है। नए CEO से बढ़ा भरोसा कंपनी ने William Walsh को नया CEO नियुक्त किया वे पहले British Airways के CEO रह चुके हैं साथ ही IATA के डायरेक्टर जनरल भी रहे हैं उनके अनुभव से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर का हाल इंट्राडे हाई: ₹4,744 (+11.1%) सुबह ट्रेड: करीब ₹4,673 (+9.5%) पिछले 6 दिनों में: +20.3% उछाल हालांकि 2026 में अब तक: करीब 8.3% गिरावट