Income Tax Department ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जारी किए गए नए ITR फॉर्म (ITR-1 से ITR-7) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये बदलाव उन सभी टैक्सपेयर्स के लिए अहम हैं जो 31 जुलाई 2026 तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले हैं। यह फॉर्म वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए लागू होंगे।
इस बार सबसे बड़ा बदलाव टैक्सपेयर्स की पर्सनल डिटेल्स से जुड़ा है, खासकर एड्रेस और संपर्क जानकारी को लेकर।
नए ITR फॉर्म में अब टैक्सपेयर्स को सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो पते (Primary और Secondary Address) देने का विकल्प दिया गया है।
इसके साथ ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को भी अब दो भागों में बांटा गया है:
इस बदलाव का उद्देश्य टैक्स विभाग के पास बेहतर और वैकल्पिक संपर्क जानकारी उपलब्ध कराना है।
अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य की ओर से ITR भरता है, तो उसे “प्रतिनिधि” कहा जाता है।
पहले जहां प्रतिनिधि से कई तरह की जानकारियां मांगी जाती थीं, वहीं अब प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है। अब सिर्फ तीन डिटेल्स देनी होंगी:
इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया अधिक आसान और यूजर-फ्रेंडली हो गई है।
नए फॉर्म में डुअल रिपोर्टिंग (दोहरी जानकारी) की व्यवस्था खत्म कर दी गई है।
पहले कैपिटल गेन को ट्रांसफर की तारीख के आधार पर अलग-अलग दिखाना पड़ता था, लेकिन अब:
इससे फॉर्म भरना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा।
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य:
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
न्यूयॉर्क: वैश्विक बाजारों के लिए राहत भरी खबर के बीच अमेरिकी शेयर बाजारों ने ऐतिहासिक तेजी दर्ज की। Dow Jones Industrial Average, S&P 500 और Nasdaq Composite ने मजबूत बढ़त के साथ रिकॉर्ड स्तर छू लिए। इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह रही तेल कीमतों में तेज गिरावट और Strait of Hormuz के दोबारा खुलने की खबर। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे प्रमुख इंडेक्स सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन Dow Jones Industrial Average 868.71 अंक (1.79%) उछलकर 49,447.43 पर बंद हुआ S&P 500 84.78 अंक (1.20%) बढ़कर 7,126.06 पर पहुंचा Nasdaq Composite 365.78 अंक (1.52%) की तेजी के साथ 24,468.48 पर बंद हुआ नैस्डैक लगातार 13वें सत्र में बढ़त के साथ 1992 के बाद का सबसे लंबा रैली रिकॉर्ड दर्ज करने में सफल रहा। हॉरमुज़ जलडमरूमध्य खुलने से आई राहत Abbas Araqchi ने घोषणा की कि Strait of Hormuz से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर दी गई है। यह फैसला लेबनान में सीजफायर के बाद आया। इससे पहले Donald Trump ने संकेत दिए थे कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता जल्द शुरू हो सकती है, जिससे निवेशकों में सकारात्मक माहौल बना। तेल में 11% गिरावट, महंगाई का डर कम कच्चे तेल की कीमतों में 11% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता कम हुई। हॉरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का परिवहन होता है। सेक्टर में मिला-जुला रुख ऊर्जा सेक्टर 2.9% गिरा, जिसमें Exxon Mobil और Chevron प्रमुख गिरावट वाले शेयर रहे कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई, जहां क्रूज कंपनियों के शेयर उछले इंडस्ट्रियल सेक्टर भी 1.8% की मजबूती के साथ आगे रहा स्मॉल-कैप इंडेक्स Russell 2000 ने 2.1% की बढ़त के साथ रिकॉर्ड क्लोजिंग दर्ज की, जो दर्शाता है कि गिरती ऊर्जा कीमतों से छोटे कारोबारों को ज्यादा फायदा मिल रहा है। कुछ जोखिम अब भी बरकरार हालांकि बाजार में तेजी है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शिपिंग सेक्टर को अब भी युद्ध-जोखिम बीमा, संभावित खतरों और अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है। टेक और कॉरपोरेट अपडेट Netflix के शेयर 9.7% गिर गए, क्योंकि कंपनी ने कमजोर तिमाही अनुमान दिया एल्यूमिनियम कंपनी Alcoa के शेयर भी कमजोर नतीजों के कारण 6.8% टूटे
नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोने और चांदी के इंपोर्ट को अधिक पारदर्शी और संगठित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने नई अधिसूचना जारी कर उन बैंकों की सूची में बदलाव किया है, जिन्हें विदेशों से कीमती धातुएं मंगाने की अनुमति होगी। यह फैसला Foreign Trade Policy 2023 के तहत लिया गया है। कब से लागू होंगे नए नियम? नई संशोधित सूची 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी। यानी अगले तीन वर्षों के लिए सरकार ने सोना-चांदी के इंपोर्ट का एक स्पष्ट और नियंत्रित ढांचा तय कर दिया है। 15 बैंकों को ‘डबल’ अधिकार: सोना और चांदी दोनों का इंपोर्ट Reserve Bank of India (RBI) ने कुल 15 बैंकों को सोना और चांदी दोनों के इंपोर्ट की अनुमति दी है। इनमें शामिल हैं: प्राइवेट सेक्टर बैंक: HDFC Bank ICICI Bank Axis Bank Kotak Mahindra Bank IndusInd Bank Federal Bank Yes Bank RBL Bank Karur Vysya Bank सरकारी बैंक: State Bank of India Punjab National Bank Bank of India Indian Overseas Bank विदेशी बैंक: Deutsche Bank Industrial and Commercial Bank of China सिर्फ सोना इंपोर्ट करने का अधिकार किनके पास? सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी बैंक दोनों धातुओं का इंपोर्ट नहीं कर सकते। इन बैंकों को केवल सोना (Gold) इंपोर्ट करने की अनुमति दी गई है: Union Bank of India Sberbank आम लोगों पर क्या होगा असर? सरकार के इस फैसले का सीधा असर बाजार की पारदर्शिता और कीमतों की स्थिरता पर पड़ेगा। जब सोना-चांदी का इंपोर्ट केवल अधिकृत बैंकों के जरिए होगा, तो: अवैध इंपोर्ट पर लगाम लगेगी कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव कम होगा शुद्धता और सप्लाई चेन बेहतर होगी Directorate General of Foreign Trade ने इस बदलाव को ‘हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर 2023’ के तहत लागू किया है, जिससे पूरे सिस्टम को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाया जा सके।
मुंबई, एजेंसियां। गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह के कारोबार में मजबूत शुरुआत के बाद अंत तक बाजार अपनी बढ़त कायम नहीं रख सका और गिरावट के साथ बंद हुआ। BSE Sensex 122.56 अंकों की गिरावट के साथ 77,988.68 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 34.55 अंक फिसलकर 24,196.75 के स्तर पर आ गया। दिनभर 1000 अंकों से ज्यादा का उतार-चढ़ाव कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 78,730.32 का उच्चतम स्तर छुआ, लेकिन बाद में मुनाफावसूली के चलते 77,674.93 तक गिर गया। इस तरह पूरे दिन में बाजार में 1,000 अंकों से अधिक की अस्थिरता देखी गई। यह दर्शाता है कि निवेशकों के बीच अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर दबाव शुरुआती तेजी के बाद बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर के शेयरों में बिकवाली हावी हो गई। HDFC Bank, Kotak Mahindra Bank और Bajaj Finance जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा ONGC और Titan Company भी नुकसान में रहे। कुछ शेयरों में रही मजबूती हालांकि, गिरावट के बीच कुछ कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया। Infosys, Adani Ports, Bharat Electronics और ट्रेंट जैसे शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे बाजार को आंशिक सहारा मिला। मुनाफावसूली और वैश्विक संकेत बने कारण विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर दबाव बना। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ कमी आई है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है। विदेशी निवेशकों का रुख और आगे का संकेत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सत्र में खरीदारी की थी, जिससे बाजार को सपोर्ट मिला था। हालांकि, गुरुवार को निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। जानकारों का मानना है कि बाजार फिलहाल स्थिरता की तलाश में है और आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी।