नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में रसीले और मीठे आमों की भरमार हो जाती है। फलों का राजा कहलाने वाला आम स्वाद के साथ-साथ पोषण का भी बेहतरीन स्रोत है। आमतौर पर लोग इसे शेक, जूस या आइसक्रीम के रूप में खाना पसंद करते हैं, लेकिन यह फल सिर्फ इन्हीं विकल्पों तक सीमित नहीं है। आम से कई ऐसी स्वादिष्ट और पौष्टिक रेसिपीज तैयार की जा सकती हैं, जो रोजमर्रा के भोजन में नया स्वाद जोड़ने के साथ परिवार और मेहमानों को भी पसंद आएंगी। स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना आम में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा देने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ गर्मियों में सीमित मात्रा में आम को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। यदि आप हर दिन एक ही तरह से आम खाकर ऊब चुके हैं, तो इस सीजन में कुछ नई रेसिपीज आजमाकर स्वाद का आनंद ले सकते हैं। नमकीन और मीठे व्यंजनों की लंबी सूची आम से बनने वाले व्यंजनों की सूची काफी लंबी है। नमकीन विकल्पों में कच्चे आम की पुदीना चटनी, खट्टी-मीठी चटनी, पारंपरिक आम का अचार, मैंगो सालसा, आम और दही डिप, आम पुलाव, मैंगो पोहा, आम सूजी के ढोकले, आम मसाला छाछ और आम-ककड़ी सलाद शामिल हैं। ये व्यंजन भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ गर्मियों में ताजगी भी देते हैं। वहीं मीठे व्यंजनों में आम की ठंडाई, नारियल के साथ तैयार मैंगो लड्डू, मैंगो शेक स्मूदी, मैंगो चीज बॉल्स, आम पैनकेक, मैंगो मिल्क पुडिंग, आम पापड़ रोल, आम मोंटे मलाई और घर पर बनी मैंगो आइसक्रीम जैसी रेसिपीज बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती हैं। इन व्यंजनों को घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और खास मौकों पर भी परोसा जा सकता है। गर्मियों की रसोई में लाएं नया प्रयोग विशेषज्ञों का मानना है कि आम को केवल फल या पेय के रूप में ही नहीं, बल्कि विभिन्न पारंपरिक और फ्यूजन रेसिपीज में भी शामिल किया जा सकता है। इससे भोजन का स्वाद बढ़ने के साथ पोषण भी मिलता है। यदि आप इस सीजन में कुछ नया बनाने की सोच रहे हैं, तो आम से तैयार होने वाली ये 20 रेसिपीज आपकी रसोई को स्वाद, ताजगी और विविधता से भर सकती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अक्सर दोपहर या रात के खाने के बाद दाल बच जाती है, जिसे दोबारा खाने का मन नहीं करता। ऐसे में कई बार यह दाल बेकार चली जाती है। लेकिन थोड़ी-सी रचनात्मकता से इसी बची हुई दाल को एक स्वादिष्ट, पौष्टिक और कुरकुरा दाल पराठा बनाकर परिवार के लिए बेहतरीन नाश्ता या डिनर तैयार किया जा सकता है। यह रेसिपी न सिर्फ खाने की बर्बादी रोकती है, बल्कि स्वाद और पोषण दोनों का बेहतरीन मेल भी है। दाल पराठा बनाने का तरीका दाल पराठा बनाने के लिए बची हुई दाल के साथ गेहूं का आटा, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, अदरक-लहसुन का पेस्ट, अजवाइन, हल्दी, लाल मिर्च, गरम मसाला और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। इसमें थोड़ा-सा तेल या घी डालने से पराठे अधिक खस्ते और स्वादिष्ट बनते हैं। दाल पराठा बनाने की आसान रेसिपी सबसे पहले एक बड़े बर्तन में आटा लें और उसमें सभी मसाले एवं सब्जियां मिलाएं। इसके बाद बची हुई दाल डालकर आटा गूंथ लें। यदि दाल में पर्याप्त नमी हो तो अलग से पानी डालने की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत महसूस होने पर थोड़ा-सा पानी मिलाकर मुलायम आटा तैयार करें। आटे को 5 से 10 मिनट ढककर रख दें ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए। अब आटे की मध्यम आकार की लोइयां बनाकर मनचाहे आकार में बेल लें। गर्म तवे पर पराठे को दोनों तरफ से हल्का सेंकने के बाद घी या तेल लगाकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक पकाएं। तैयार दाल पराठा दही, अचार, हरी चटनी या मक्खन के साथ परोसें। यह रेसिपी उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो स्वाद के साथ पोषण भी चाहते हैं। साथ ही यह किचन में फूड वेस्टेज कम करने का आसान और स्वादिष्ट तरीका भी है। सप्ताहांत या व्यस्त दिनों में यह झटपट बनने वाला पराठा पूरे परिवार को जरूर पसंद आएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में तेज धूप और बढ़ते तापमान का सबसे अधिक असर त्वचा पर दिखाई देता है। लंबे समय तक धूप में रहने के कारण कई लोगों का चेहरा लाल पड़ जाता है, त्वचा में जलन होने लगती है और खिंचाव महसूस होने लगता है। यह स्थिति आमतौर पर सनबर्न (Sunburn) के कारण होती है, जो सूरज की हानिकारक यूवी किरणों के संपर्क में आने से पैदा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते सही देखभाल न करने पर त्वचा को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है। ठंडे पानी से करें शुरुआत धूप से घर लौटने के बाद सबसे पहले चेहरे को ठंडे या सामान्य तापमान वाले पानी से धोना चाहिए। इससे त्वचा का तापमान कम होता है और जलन से राहत मिलती है। हालांकि बर्फ को सीधे चेहरे पर लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। चेहरा धोने के बाद मुलायम तौलिए से हल्के हाथों से सुखाना बेहतर माना जाता है। एलोवेरा जेल देगा तुरंत राहत सनबर्न से प्रभावित त्वचा के लिए एलोवेरा एक प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और कूलिंग गुण त्वचा की लालिमा और जलन को कम करने में मदद करते हैं। ताजा एलोवेरा जेल को 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगाकर रखने से त्वचा को ठंडक और नमी मिलती है। खीरा और गुलाब जल भी हैं फायदेमंद खीरे में भरपूर मात्रा में पानी और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो त्वचा को ठंडक पहुंचाने का काम करते हैं। खीरे के स्लाइस चेहरे पर रखने या उसका रस लगाने से सूजन और जलन कम हो सकती है। वहीं गुलाब जल त्वचा को ताजगी देने और लालिमा कम करने में मदद करता है। फ्रिज में रखा ठंडा गुलाब जल चेहरे पर लगाने से अतिरिक्त राहत मिल सकती है। शरीर को रखें हाइड्रेट विशेषज्ञों का कहना है कि सनबर्न से उबरने के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखना भी जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और नारियल पानी का सेवन करने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बना रहता है, जिससे त्वचा तेजी से रिकवर कर सकती है। गंभीर लक्षण दिखें तो डॉक्टर से लें सलाह यदि सनबर्न के साथ त्वचा पर छाले, अत्यधिक सूजन, तेज दर्द या एलर्जी जैसी समस्या दिखाई दे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर उपचार गंभीर त्वचा समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रसोई में पूड़ी, कचौड़ी, पकौड़े और अन्य तली-भुनी चीजें अक्सर बनाई जाती हैं। ऐसे में कढ़ाई में काफी मात्रा में तेल बच जाता है। कई लोग इस तेल को फेंक देते हैं, जबकि कुछ बिना साफ किए बार-बार इस्तेमाल करते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों ही तरीके सही नहीं हैं। यदि तेल केवल एक बार उपयोग हुआ है और अधिक जला नहीं है, तो उसे साफ कर सीमित मात्रा में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले तेल को ठंडा होने दें पूड़ी या अन्य खाद्य पदार्थ तलने के तुरंत बाद तेल को छानने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। गर्म तेल को संभालना खतरनाक हो सकता है। तेल को सामान्य तापमान तक ठंडा होने दें ताकि उसमें मौजूद आटे, मसालों और जले हुए कण नीचे बैठ जाएं। यह तेल को साफ करने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। महीन छलनी या मलमल के कपड़े से छानें तेल पूरी तरह ठंडा होने के बाद उसे स्टील की महीन छलनी या साफ मलमल के कपड़े से छान लें। इससे आटे के छोटे कण, मसाले और जले हुए टुकड़े अलग हो जाते हैं। छना हुआ तेल अधिक साफ दिखाई देता है और उसका स्वाद भी बेहतर बना रहता है। यह तरीका तेल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है। रंग और गंध की जांच करना न भूलें तेल का दोबारा उपयोग करने से पहले उसकी गुणवत्ता जांचना जरूरी है। यदि तेल का रंग बहुत गहरा भूरा या काला हो गया है, उसमें तेज जली हुई गंध आ रही है या वह गर्म करने पर धुआं छोड़ रहा है, तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा तेल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। सही तरीके से करें स्टोर छाने हुए तेल को साफ और सूखे एयरटाइट कंटेनर में रखें। इसे नमी, धूप और अधिक गर्मी से दूर रखना चाहिए। उचित स्टोरेज से तेल लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है और उसकी गुणवत्ता बनी रहती है। दोबारा उपयोग करते समय रखें सावधानी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बचे हुए तेल का उपयोग हल्की फ्राइंग, सब्जी या तड़का लगाने जैसे कार्यों में किया जाए। एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से बचना चाहिए। साथ ही पुराने और नए तेल को मिलाकर उपयोग करना भी उचित नहीं माना जाता। स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता रसोई में तेल की बचत करना अच्छी बात है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता नहीं होना चाहिए। यदि तेल कई बार उपयोग हो चुका है या उसकी गुणवत्ता खराब हो गई है, तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय सुरक्षित तरीके से नष्ट करना ही बेहतर विकल्प है। सही सावधानी अपनाकर आप तेल की बचत भी कर सकते हैं और परिवार की सेहत का भी ध्यान रख सकते हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। बंगाल की पहचान सिर्फ रसगुल्ले, मिष्टी दोई या झालमुड़ी तक सीमित नहीं है। यहां की समृद्ध पाक परंपरा में ऐसे कई व्यंजन शामिल हैं, जो अपने अनोखे स्वाद, खुशबू और पारंपरिक बनाने की शैली के लिए देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। मसालों के संतुलित उपयोग, सरसों के तेल की खास महक और स्थानीय सामग्री से तैयार बंगाली भोजन हर फूड लवर को आकर्षित करता है। आइए जानते हैं बंगाल की उन आठ लोकप्रिय डिशेज के बारे में, जो हर किसी को एक बार जरूर चखनी चाहिए। शुक्तो से होती है बंगाली थाली की शुरुआत बंगाली भोजन में शुक्तो का विशेष स्थान है। करेला, कच्चा केला, बैंगन और सहजन जैसी सब्जियों से तैयार यह व्यंजन कड़वे और हल्के मीठे स्वाद का अनोखा मिश्रण पेश करता है। इसे अक्सर भोजन की शुरुआत में परोसा जाता है। कोसा मांसो मटन प्रेमियों की पहली पसंद कोसा मांसो बंगाल की सबसे लोकप्रिय नॉन-वेज डिशेज में से एक है। धीमी आंच पर मसालों के साथ पकाया गया मटन बेहद स्वादिष्ट और गाढ़ी ग्रेवी वाला होता है। इसे लूची या पराठे के साथ खाना पसंद किया जाता है। भपा इलिश की खुशबू बनाती है खास हिल्सा मछली से बनने वाली भपा इलिश बंगाल की पहचान मानी जाती है। सरसों के पेस्ट, हरी मिर्च और सरसों के तेल में भाप से पकाई गई यह डिश अपने अलग स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। छोलार दाल और आलू पोस्तो का सादगी भरा स्वाद नारियल के टुकड़ों के साथ बनाई जाने वाली छोलार दाल त्योहारों और खास अवसरों की शान होती है। वहीं खसखस और आलू से तैयार आलू पोस्तो साधारण सामग्री के बावजूद बेहतरीन स्वाद के लिए जाना जाता है। चिंगरी मलाई करी और बासंती पुलाव का शाही अंदाज नारियल के दूध और झींगा मछली से तैयार चिंगरी माछेर मलाई करी बंगाल के शाही व्यंजनों में गिनी जाती है। इसके साथ परोसा जाने वाला बासंती पुलाव केसर, काजू और किशमिश की वजह से खास स्वाद देता है। पायेश से होता है भोजन का मीठा समापन बंगाली खीर यानी पायेश शुभ अवसरों और उत्सवों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूध, चावल और गुड़ से तैयार यह मिठाई भोजन को यादगार बना देती है। बंगाल का स्वाद बना रहा है लोगों को दीवाना इन पारंपरिक व्यंजनों की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि बंगाली खान-पान सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। शुक्तो से लेकर पायेश तक, हर डिश बंगाल की समृद्ध पाक विरासत की कहानी बयां करती है और खाने के शौकीनों को बार-बार बंगाल के स्वाद की ओर खींच लाती है।
कोलकाता, एजेंसियां। भारत में गोलगप्पा, पानी-पुरी और पुचका भले ही एक जैसे दिखते हों, लेकिन स्वाद और बनाने के तरीके में इन तीनों के बीच बड़ा अंतर है। खासकर कोलकाता का पुचका केवल एक स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि शहर की संस्कृति और खानपान की पहचान बन चुका है। बंगाल की राजधानी की गलियों में मिलने वाला पुचका अपने खास मसाले, कुरकुरे खोल और खट्टे-तीखे पानी की वजह से देशभर के फूड लवर्स को आकर्षित करता है। बनावट और स्वाद में सबसे अलग है पुचका कोलकाता का पुचका सूजी और गेहूं के आटे के विशेष मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसका आकार सामान्य गोलगप्पों की तुलना में थोड़ा बड़ा और अधिक कुरकुरा होता है। यही वजह है कि एक पुचका खाते ही उसमें भरे मसाले और पानी का स्वाद लंबे समय तक याद रहता है। आलू के मसाले में छिपा है असली राज जहां दिल्ली के गोलगप्पों में अक्सर उबले मटर या साधारण आलू का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं पुचका की भरावन खास तरीके से तैयार की जाती है। इसमें मैश किए हुए आलू, काले चने, भुना मसाला, अदरक और हरी मिर्च मिलाई जाती है। मसालों का यह मिश्रण पुचका को तीखा, चटपटा और बेहद स्वादिष्ट बनाता है। गंधराज नींबू वाला पानी बनाता है खास पुचका का सबसे बड़ा आकर्षण उसका पानी होता है। इमली, पुदीना और मसालों के साथ गंधराज नींबू की सुगंध इसे अलग पहचान देती है। यही वजह है कि इसका स्वाद मुंबई की पानी-पुरी या दिल्ली के गोलगप्पों से काफी अलग महसूस होता है। सरसों के तेल की खुशबू बढ़ाती है स्वाद पुचका के मसाले में सरसों के तेल की हल्की महक बंगाल के पारंपरिक स्वाद को दर्शाती है। यह फ्लेवर इसे अन्य राज्यों के समान व्यंजनों से अलग और अधिक आकर्षक बनाता है। खाने का तरीका भी है अनोखा कोलकाता में पुचका आमतौर पर साल के पत्तों से बने दोने में परोसा जाता है। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार इसे अधिक खट्टा या ज्यादा तीखा बनवा सकते हैं। पुचका खत्म होने के बाद मिलने वाली मसालेदार सूखी पापड़ी भी इसके अनुभव को खास बना देती है। स्वाद के साथ संस्कृति का भी प्रतीक पुचका सिर्फ एक स्नैक नहीं, बल्कि बंगाल की खाद्य संस्कृति का हिस्सा है। इसकी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्वाद, पारंपरिक मसाले और अनोखा अंदाज किसी भी साधारण व्यंजन को खास बना सकते हैं। यही कारण है कि कोलकाता का पुचका आज भी देश के सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड्स में गिना जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अगर आपको रेस्टोरेंट में मिलने वाला परतदार, नरम और कुरकुरा मालाबार पराठा पसंद है, तो अब इसका स्वाद घर पर भी आसानी से लिया जा सकता है। सही तकनीक और कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप बाजार जैसा मालाबार पराठा तैयार कर सकते हैं। इसकी खास पहचान इसकी कई परतें और मुलायम बनावट होती है, जो इसे साधारण पराठों से अलग बनाती है। किन चीजों की होगी जरूरत? मालाबार पराठा बनाने के लिए 2 कप मैदा, स्वादानुसार नमक, 1 छोटी चम्मच चीनी, 4-5 बड़े चम्मच तेल या घी और गुनगुना पानी या दूध की जरूरत होती है। दूध का उपयोग करने से पराठा और अधिक मुलायम बनता है। मुलायम आटा है सफलता की कुंजी सबसे पहले मैदा, नमक और चीनी को अच्छी तरह मिलाएं। इसमें धीरे-धीरे गुनगुना पानी या दूध डालकर नरम और चिकना आटा गूंथ लें। आटे पर थोड़ा तेल लगाकर उसे कम से कम 1 से 2 घंटे के लिए ढककर रख दें। इससे आटे में लचीलापन आता है और पराठा आसानी से बेलने योग्य बन जाता है। ऐसे बनेंगी परफेक्ट लेयर्स आराम किए हुए आटे की मध्यम आकार की लोइयां बनाएं। प्रत्येक लोई को बहुत पतला बेलें, फिर उस पर घी या तेल लगाएं। इसके बाद रोटी को पंखे की तरह फोल्ड करें या पतली पट्टियों में काटकर एक साथ लपेट लें। अब इसे जलेबी की तरह गोल घुमाकर फिर से लोई का आकार दें। धीमी आंच पर सेंकें तैयार लोई को हल्के हाथों से दबाकर फैलाएं और गर्म तवे पर रखें। दोनों तरफ घी या तेल लगाकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंकें। मध्यम आंच पर पकाने से पराठा अंदर तक अच्छी तरह तैयार होता है। परतें खोलने का खास तरीका मालाबार पराठे की असली खूबसूरती उसकी खुली हुई परतों में होती है। तवे से उतारने के बाद पराठे को दोनों हथेलियों से हल्के दबाव के साथ किनारों से अंदर की ओर दबाएं। इससे उसकी परतें अलग-अलग खुल जाती हैं और वह बिल्कुल होटल स्टाइल दिखाई देता है। गरमा-गरम मालाबार पराठे को वेज कोरमा, पनीर की सब्जी या अपनी पसंदीदा करी के साथ परोसें और घर बैठे रेस्टोरेंट जैसा स्वाद लें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अगर आप रोज-रोज एक जैसे स्नैक्स खाकर बोर हो चुके हैं और कुछ हेल्दी व टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं, तो मखाना कैरेमल पॉप्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। यह स्नैक बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। खास बात यह है कि इसमें स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मखाना कैरेमल पॉप्स हल्के मीठे स्वाद और जबरदस्त क्रंच के कारण तेजी से लोगों की पसंद बन रहे हैं। इसे घर पर बहुत कम समय और मेहनत में तैयार किया जा सकता है। शाम की चाय, मूवी टाइम या बच्चों की छोटी भूख मिटाने के लिए यह एक शानदार स्नैक माना जा रहा है। बनाने के लिए जरूरी सामग्री इस हेल्दी स्नैक को बनाने के लिए 2 कप मखाना, 2 बड़े चम्मच घी, 4 बड़े चम्मच गुड़ पाउडर या ब्राउन शुगर, 1 छोटा चम्मच शहद, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, एक चुटकी नमक और थोड़े कटे हुए बादाम या पिस्ता की जरूरत होगी। ऐसे बनाएं मखाना कैरेमल पॉप्स सबसे पहले एक पैन में घी गर्म करें और उसमें मखानों को धीमी आंच पर 5 से 7 मिनट तक भून लें। जब मखाने अच्छे से क्रिस्पी हो जाएं तो उन्हें अलग निकाल लें।इसके बाद उसी पैन में बचा हुआ घी डालें और उसमें गुड़ पाउडर या ब्राउन शुगर डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं। जब मिश्रण कैरेमल जैसा बनने लगे तो उसमें शहद, इलायची पाउडर और नमक मिलाएं। अब भुने हुए मखानों को इस मिश्रण में डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर मखाने पर कैरेमल की परत चढ़ जाए। चाहें तो ऊपर से ड्राई फ्रूट्स भी डाल सकते हैं। तैयार मखानों को बटर पेपर या प्लेट पर फैलाकर 5 मिनट तक ठंडा होने दें। ठंडा होते ही ये और ज्यादा क्रंची हो जाएंगे। इन्हें एयरटाइट कंटेनर में 4 से 5 दिन तक स्टोर किया जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शाम की चाय हो या बच्चों की हल्की भूख, बिस्किट लगभग हर घर की पसंद होते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर बिस्किट मैदे और प्रिजर्वेटिव्स से बने होते हैं, जो सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं माने जाते। ऐसे में अगर घर पर ही गेहूं के आटे से स्वादिष्ट और खस्ता बिस्किट तैयार किए जाएं, तो यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि इन बिस्किट्स को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री या मेहनत की जरूरत नहीं होती। घर की रसोई में मौजूद चीजों से ही इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। बिस्किट बनाने के लिए जरूरी सामग्री गेहूं के आटे के बिस्किट बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा, आधा कप पिसी चीनी, 4 से 5 बड़े चम्मच देसी घी या तेल, आधा चम्मच इलायची पाउडर, थोड़ा सफेद तिल या सौंफ और एक चुटकी नमक की जरूरत होती है। आटा गूंथने के लिए हल्का गुनगुना दूध या पानी इस्तेमाल किया जा सकता है। सही मोयन से आएगा खस्ता स्वाद बिस्किट को बाजार जैसा खस्ता बनाने के लिए मोयन सबसे अहम भूमिका निभाता है। सबसे पहले आटे में चीनी, इलायची और नमक मिलाएं। इसके बाद घी डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह रगड़ें। जब आटा मुट्ठी में दबाने पर बंधने लगे, तो समझिए मोयन सही है। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा दूध या पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें। आटा ज्यादा मुलायम नहीं होना चाहिए, वरना बिस्किट कुरकुरे नहीं बनेंगे। आटे को 10 से 15 मिनट ढककर रख दें। धीमी आंच पर तलें या बेक करें आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें हल्का दबाएं और मनचाहा आकार दें। डिजाइन बनाने के लिए कांटे या चाकू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही में हल्का गर्म तेल या घी लें और धीमी आंच पर बिस्किट्स को सुनहरा होने तक तलें। अगर हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो इन्हें 180 डिग्री सेल्सियस पर ओवन या एयर फ्रायर में 15 से 20 मिनट तक बेक भी किया जा सकता है। हफ्तों तक रहेगा स्वाद बरकरार तलने या बेक करने के बाद बिस्किट्स को पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडे होने के बाद ये और ज्यादा कुरकुरे हो जाते हैं। इन्हें एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करने पर कई दिनों तक ताजा रखा जा सकता है। घर पर बने ये आटा बिस्किट स्वादिष्ट होने के साथ सेहतमंद भी होते हैं। यही वजह है कि एक बार इन्हें खाने के बाद बाजार के बिस्किट फीके लगने लगते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुबह का नाश्ता शरीर को दिनभर ऊर्जा देने का काम करता है, लेकिन कई लोग जल्दबाजी में ऐसी चीजें खा लेते हैं जो फायदे की बजाय नुकसान पहुंचाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार खाली पेट गलत खानपान पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है और दिनभर थकान, गैस व सुस्ती महसूस हो सकती है। हेल्दी और संतुलित नाश्ता वजन नियंत्रण, बेहतर मेटाबॉलिज्म और मानसिक फोकस बनाए रखने में मदद करता है। तला-भुना खाना बढ़ा सकता है परेशानी सुबह-सुबह पूड़ी, कचौड़ी, समोसा या अन्य ऑयली फूड खाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे भोजन से पेट भारी महसूस हो सकता है और खाना देर से पचता है। इसके कारण एसिडिटी, गैस और आलस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक इस तरह का नाश्ता वजन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का कारण भी बन सकता है। पैकेज्ड जूस और मीठे सीरियल से बचें कई लोग पैकेज्ड जूस या मीठे सीरियल को हेल्दी समझते हैं, लेकिन इनमें शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर अचानक गिर जाता है, जिससे शरीर में कमजोरी और जल्दी भूख लगने लगती है। लगातार ज्यादा शुगर वाला नाश्ता मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है। सिर्फ चाय या कॉफी पर निर्भर रहना सही नहीं केवल चाय या कॉफी पीकर दिन की शुरुआत करना शरीर को जरूरी पोषण नहीं देता। खाली पेट ज्यादा चाय या कॉफी लेने से एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है। इससे शरीर में कमजोरी, थकान और फोकस की कमी महसूस हो सकती है। प्रोसेस्ड और इंस्टेंट फूड भी नुकसानदायक इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड स्नैक्स और पैकेज्ड फूड में प्रिजर्वेटिव और सोडियम की मात्रा अधिक होती है। ये शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं देते और गट हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। नियमित रूप से ऐसे फूड खाने से पाचन कमजोर हो सकता है और शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास सुबह नाश्ता बनाने के लिए ज्यादा समय नहीं होता। ऐसे में कई लोग हेल्दी खाना छोड़कर बाहर का जंक फूड खाना पसंद कर लेते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। लेकिन अगर घर में सीमित सामान भी हो, तब भी कुछ आसान और पौष्टिक नाश्ते तैयार किए जा सकते हैं। आजकल ऐसे ब्रेकफास्ट आइडिया काफी पसंद किए जा रहे हैं जो जल्दी बन जाएं, पेट भरें और शरीर को दिनभर ऊर्जा भी दें। खासकर कामकाजी लोग, छात्र और बच्चों के लिए कम समय में बनने वाली रेसिपी बहुत उपयोगी मानी जाती हैं। केला-ओट्स और सूजी-दही जैसी साधारण चीजों से कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट और हेल्दी नाश्ता तैयार किया जा सकता है। केला और ओट्स से बनाएं स्वादिष्ट बनाना पैनकेक फिटनेस पसंद लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प बनाना पैनकेक हेल्दी और आसान नाश्तों में गिना जाता है। केला शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है, जबकि ओट्स पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं। यही वजह है कि यह नाश्ता बच्चों से लेकर फिटनेस पसंद करने वाले लोगों तक को पसंद आता है। आवश्यक सामग्री इस रेसिपी के लिए केवल दो चीजों की जरूरत होती है— • पका हुआ केला • ओट्स अगर चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए शहद या ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, लेकिन मूल रेसिपी सिर्फ दो सामग्री से ही तैयार हो जाती है। बनाने की आसान विधि सबसे पहले केले को अच्छी तरह मैश कर लें। इसके बाद उसमें ओट्स मिलाकर अच्छे से मिक्स करें और कुछ मिनट के लिए छोड़ दें ताकि ओट्स नरम हो जाएं। अब नॉन-स्टिक पैन को हल्का गर्म करें और तैयार मिश्रण को छोटे पैनकेक या टिक्की की तरह डालें। इसे धीमी आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पकाएं। कुछ ही मिनटों में हेल्दी और टेस्टी पैनकेक तैयार हो जाएंगे। सूजी और दही से तैयार करें स्पंजी सूजी ब्रेड या इडली कम तेल वाला स्वादिष्ट नाश्ता सूजी और दही से बनने वाली यह डिश हल्की, हेल्दी और स्वादिष्ट मानी जाती है। इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और गर्मियों में यह झटपट तैयार हो जाती है। सामग्री और विधि इसके लिए सूजी, दही और थोड़ा नमक चाहिए। सबसे पहले सूजी और दही को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें और करीब आधे घंटे के लिए रख दें। इससे सूजी फूल जाएगी और डिश स्पंजी बनेगी। अब इसमें नमक मिलाकर इडली की तरह स्टीम करें या सैंडविच मेकर में हल्का तेल लगाकर बैटर डालें। दोनों तरफ से पकाने पर यह क्रिस्पी और स्वादिष्ट बन जाती है। इसे चटनी या सॉस के साथ परोसा जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में इन दिनों कोरियन ड्रामा और के-पॉप के साथ-साथ कोरियन खाने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है। कोरियन डिशेज में ‘किमची’ सबसे लोकप्रिय मानी जाती है। आमतौर पर यह फर्मेंटेड पत्तागोभी से बनाई जाती है, जिसे तैयार होने में कई दिन लग जाते हैं। लेकिन अगर आप तुरंत कुछ तीखा, चटपटा और क्रंची खाना चाहते हैं, तो खीरे की किमची यानी ‘ओई किमची’ एक शानदार विकल्प हो सकती है। यह डिश बनाने में बेहद आसान है और खास बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए किसी महंगी सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती। घर में मौजूद साधारण चीजों से ही कुछ मिनटों में स्वादिष्ट किमची तैयार की जा सकती है। स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद खीरे की किमची सिर्फ स्वाद में ही बेहतरीन नहीं होती, बल्कि सेहत के लिए भी काफी लाभकारी मानी जाती है। खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। वहीं इसमें इस्तेमाल होने वाला लहसुन, अदरक और सिरका पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। यह लो-कैलोरी डिश है, इसलिए वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोग भी इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। गर्मियों में यह एक हल्का और हेल्दी स्नैक विकल्प बन सकती है। किमची बनाने के लिए जरूरी सामग्री खीरे की किमची तैयार करने के लिए 2 से 3 ताजे खीरे, नमक, लहसुन, अदरक, सोया सॉस, सफेद सिरका या नींबू का रस, लाल मिर्च पाउडर, थोड़ा शहद या चीनी और भुने हुए सफेद तिल की जरूरत होती है। ऐसे तैयार करें क्रंची किमची सबसे पहले खीरे को काटकर उसमें नमक मिलाएं और 15 से 20 मिनट तक छोड़ दें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए। इसके बाद लहसुन, अदरक, सोया सॉस, सिरका, मिर्च पाउडर और शहद मिलाकर मसाला तैयार करें। खीरे का पानी निकालकर उसमें यह मसाला अच्छी तरह मिलाएं और ऊपर से सफेद तिल डाल दें। यह किमची तुरंत खाई जा सकती है, लेकिन 1-2 घंटे फ्रिज में रखने से इसका स्वाद और बढ़ जाता है। इसे फ्राइड राइस, नूडल्स या शाम के हेल्दी स्नैक के रूप में परोसा जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। मोमोज आज के समय का सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड बन चुका है। बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई मोमोज का दीवाना है। हालांकि, कई लोग घर पर मोमोज बनाने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन मोमोज शीट तैयार करना उन्हें मुश्किल लगता है। कभी आटा ज्यादा मोटा हो जाता है तो कभी पतला, जिससे मोमोज का स्वाद और शेप दोनों बिगड़ जाते हैं। ऐसे में अब सोशल मीडिया पर बिना मोमोज शीट और बिना आटा गूंथे मोमोज बनाने की आसान रेसिपी तेजी से वायरल हो रही है। सिर्फ कुछ चीजों से तैयार होंगे सॉफ्ट मोमोज इस आसान रेसिपी के लिए आपको अलग से मोमोज शीट खरीदने या घंटों आटा गूंथने की जरूरत नहीं पड़ेगी। घर में मौजूद मैदा और सब्जियों की मदद से आप स्वादिष्ट और हेल्दी मोमोज तैयार कर सकते हैं। खास बात यह है कि यह तरीका बेहद आसान है और पहली बार बनाने वाले लोग भी इसे आसानी से ट्राई कर सकते हैं। ऐसे तैयार करें स्वादिष्ट स्टफिंग मोमोज बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें। इसमें बारीक कटी पत्ता गोभी, गाजर, प्याज और शिमला मिर्च डालकर तेज आंच पर हल्का भून लें। स्वाद के अनुसार नमक, काली मिर्च और सोया सॉस मिलाएं। स्टफिंग को ज्यादा देर तक नहीं पकाना है, ताकि सब्जियों का क्रंच बना रहे। स्टफिंग में थोड़ा पनीर मिलाने से इसकी बॉल्स आसानी से बन जाती हैं और टूटती नहीं हैं। बिना शीट के ऐसे बनेंगे मोमोज अब एक बाउल में सूखा मैदा और दूसरे बाउल में पानी रखें। तैयार स्टफिंग की छोटी-छोटी बॉल्स बना लें। हर बॉल को पहले सूखे मैदे में अच्छी तरह लपेटें, फिर पानी में डुबोकर बाहर निकालें। इसके बाद दोबारा मैदे में लपेटें। यह प्रक्रिया 3 से 4 बार दोहराएं। ऐसा करने से स्टफिंग के ऊपर मैदे की एक पतली परत तैयार हो जाएगी, जो मोमोज शीट का काम करेगी। स्टीम करने के बाद तैयार होंगे सॉफ्ट मोमोज सभी तैयार बॉल्स को स्टीमर या इडली कुकर में 10 से 12 मिनट तक स्टीम करें। जब मोमोज हल्के चमकदार दिखने लगें, तो समझ जाएं कि वे तैयार हैं। इन्हें तीखी लाल चटनी या मेयोनीज के साथ गर्मागर्म सर्व किया जा सकता है। हेल्दी और टेस्टी स्नैक का बढ़िया विकल्प घर पर बने मोमोज बाजार के मुकाबले ज्यादा हेल्दी माने जाते हैं क्योंकि इनमें तेल और मसालों का इस्तेमाल सीमित मात्रा में होता है। वीकेंड स्नैक्स या शाम की हल्की भूख के लिए यह रेसिपी एक शानदार विकल्प बन सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल बाजार में मिलने वाली Tomato Sauce और चटनियों में मिलावट, केमिकल और प्रिजर्वेटिव को लेकर लगातार खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में कई जगहों पर नकली सॉस बनाने के मामले भी सामने आए, जहां रंग, स्टार्च और केमिकल मिलाकर सॉस तैयार की जा रही थी। ऐसे में बच्चों और परिवार की सेहत को लेकर लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की कई सॉस में जरूरत से ज्यादा शुगर, आर्टिफिशियल कलर और प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं, जो लंबे समय में सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही वजह है कि अब लोग घर पर हेल्दी और शुद्ध टोमेटो सॉस बनाने की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। घर की बनी सॉस होगी ज्यादा हेल्दी घर पर बनी टोमेटो सॉस स्वादिष्ट होने के साथ पूरी तरह शुद्ध और पौष्टिक भी होती है। इसमें आप अपनी पसंद के अनुसार मिठास और मसालों को नियंत्रित कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें किसी तरह का कृत्रिम रंग या हानिकारक प्रिजर्वेटिव नहीं होता। टोमेटो सॉस बनाने के लिए जरूरी सामग्री इस आसान रेसिपी के लिए 1 किलो लाल पके टमाटर, 2 चम्मच चीनी, स्वादानुसार नमक, आधा कप सिरका, लाल मिर्च पाउडर, 2-3 लहसुन की कलियां और चाहें तो काली मिर्च व दालचीनी की जरूरत होगी। ऐसे बनाएं स्वादिष्ट टोमेटो सॉस सबसे पहले टमाटरों को धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर इन्हें 10 से 15 मिनट तक उबालें, ताकि टमाटर नरम हो जाएं। ठंडा होने के बाद इन्हें मिक्सर में पीसकर स्मूद पेस्ट तैयार कर लें। अगर बिल्कुल मुलायम सॉस चाहिए तो पेस्ट को छलनी से छान सकते हैं। अब इस पेस्ट को कड़ाही में डालकर धीमी आंच पर पकाना शुरू करें। इसमें चीनी, नमक, लाल मिर्च और बाकी मसाले मिलाएं। लगातार चलाते रहें ताकि सॉस नीचे चिपके नहीं। करीब 15-20 मिनट में सॉस गाढ़ी होने लगेगी और इसकी खुशबू पूरे किचन में फैल जाएगी। सिरका बढ़ाएगा शेल्फ लाइफ जब सॉस अच्छी तरह गाढ़ी हो जाए, तब इसमें सिरका डालें और 5 मिनट तक और पकाएं। सिरका सॉस को लंबे समय तक खराब होने से बचाने में मदद करता है। इसके बाद सॉस को ठंडा कर कांच की साफ और सूखी बोतल में भर लें। महीनों तक रहेगा फ्रेश अगर साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और सॉस को फ्रिज में स्टोर किया जाए, तो यह 2 से 3 महीने तक आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है। घर की बनी यह हेल्दी टोमेटो सॉस समोसे, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज और बच्चों के स्नैक्स के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।
रांची। अगर आप भी होटल या रेस्टोरेंट जैसा गाढ़ा, मसालेदार और स्वाद से भरपूर बोनलेस चिकन मसाला घर पर बनाना चाहते हैं, तो यह आसान रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है। सही मसालों और खास कुकिंग तकनीक की मदद से आप घर में ही शानदार चिकन करी तैयार कर सकते हैं, जिसका स्वाद बिल्कुल रेस्टोरेंट जैसा लगेगा। खास बात यह है कि इस रेसिपी में काजू और टमाटर की ग्रेवी चिकन को बेहद क्रीमी और रिच फ्लेवर देती है। स्वाद बढ़ाने वाली खास सामग्री इस रेसिपी के लिए 750 ग्राम बोनलेस चिकन, टमाटर, हरी मिर्च, काजू, प्याज और कई साबुत मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। काजू और टमाटर का पेस्ट ग्रेवी को गाढ़ा बनाता है, जबकि दालचीनी, इलायची और लौंग चिकन में शानदार खुशबू जोड़ते हैं। कश्मीरी लाल मिर्च रंग और स्वाद दोनों को बेहतर बनाती है। ऐसे तैयार करें रेस्टोरेंट स्टाइल चिकन सबसे पहले चिकन को नमक और हल्दी के साथ साफ करके अलग रख लें। फिर टमाटर, हरी मिर्च और काजू का स्मूद पेस्ट तैयार करें। कड़ाही में तेल गर्म करके जीरा, इलायची, लौंग, तेज पत्ता और दालचीनी भूनें। इसके बाद प्याज और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर सुनहरा होने तक पकाएं। अब चिकन डालकर तेज आंच पर अच्छे से फ्राई करें। इसमें हल्दी, लाल मिर्च, धनिया और जीरा पाउडर मिलाकर कुछ मिनट पकाएं। फिर तैयार टमाटर-काजू पेस्ट डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। जरूरत के अनुसार पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें और ऊपर से हरा धनिया डालें। चिकन खाने के फायदे चिकन प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, वजन नियंत्रित रखने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है। चिकन में मौजूद विटामिन-B और ट्रिप्टोफैन दिमाग और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा, हल्का और एनर्जी से भरपूर रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में सत्तू एक बेहतरीन देसी सुपरफूड माना जाता है, जो स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षों से सत्तू का सेवन किया जाता रहा है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करते हैं। साथ ही यह पाचन को बेहतर बनाकर शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है। सत्तू का शरबत देता है तुरंत एनर्जी गर्मी में सत्तू का शरबत सबसे लोकप्रिय और हेल्दी ड्रिंक माना जाता है। इसे ठंडे पानी, नींबू, काला नमक और भुने जीरे के साथ तैयार किया जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ लू और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है। सत्तू पराठा और लिट्टी-चोखा का स्वाद सत्तू पराठा स्वाद और पोषण दोनों से भरपूर होता है। इसमें प्याज, हरी मिर्च और मसाले मिलाकर स्टफिंग तैयार की जाती है। वहीं बिहार की प्रसिद्ध डिश लिट्टी-चोखा भी सत्तू से बनाई जाती है, जो लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है। फिटनेस के लिए सत्तू चीला अगर आप हेल्दी और हाई-प्रोटीन ब्रेकफास्ट चाहते हैं तो सत्तू चीला बेहतरीन विकल्प है। इसमें सब्जियां और मसाले मिलाकर घोल तैयार किया जाता है और तवे पर हल्के तेल में पकाया जाता है। यह वजन कम करने वालों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। सत्तू लड्डू से मिलेगी ताकत सत्तू के लड्डू स्वादिष्ट होने के साथ शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं। देसी घी, गुड़ और ड्राई फ्रूट्स से बने ये लड्डू बच्चों और कमजोर लोगों के लिए खासतौर पर लाभकारी माने जाते हैं। गर्मियों में कम थकान महसूस करने और शरीर को ताकत देने के लिए सत्तू से बनी ये डिशेज बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय घरों में पूड़ी हर खास मौके की शान मानी जाती है, लेकिन रोज एक जैसी गेहूं या मैदे की पूड़ी खाना कई बार बोरिंग लगने लगता है। ऐसे में अब लोग स्वाद के साथ हेल्दी विकल्प भी तलाश रहे हैं। पालक, चुकंदर, मेथी, बाजरा और ओट्स जैसी पौष्टिक चीजों से बनी पूड़ियां इन दिनों काफी पसंद की जा रही हैं। ये न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देती हैं। खास बात यह है कि रंग-बिरंगी और अलग स्वाद वाली ये पूड़ियां बच्चों को भी खूब पसंद आती हैं। पालक और चुकंदर पूड़ी बनीं पहली पसंद पालक पूड़ी आयरन और फाइबर से भरपूर होती है। पालक को पीसकर आटे में मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। इसे दही या आलू की सब्जी के साथ खाया जा सकता है। वहीं चुकंदर पूड़ी अपने गुलाबी रंग और हेल्दी गुणों की वजह से काफी लोकप्रिय है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। मेथी और बाजरा पूड़ी से मिलेगा हेल्दी ट्विस्ट मेथी पूड़ी पाचन को बेहतर बनाने में मदद करती है और सर्दियों में खास तौर पर पसंद की जाती है। दूसरी ओर बाजरा पूड़ी वजन कम करने वालों के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है, क्योंकि इसमें फाइबर और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। ओट्स, मूंग दाल और चावल की पूड़ी भी हैं शानदार विकल्प ओट्स और मूंग दाल से बनी पूड़ी प्रोटीन से भरपूर होती है और फिटनेस पसंद करने वाले लोगों के लिए बेहतरीन मानी जाती है। वहीं चावल के आटे की पूड़ी कुरकुरी और स्वाद में अलग होती है। इसे चटनी या मसालेदार सब्जी के साथ खाया जा सकता है। अजवाइन-मसाला और जूस फ्लेवर पूड़ी का नया ट्रेंड अजवाइन, सौंफ और मेथी दाने से बनी मसाला पूड़ी खुशबूदार और स्वादिष्ट होती है। इसके अलावा अब लोग सब्जियों और फलों के जूस से आटा गूंथकर नई फ्लेवर वाली पूड़ियां भी बना रहे हैं, जो स्वाद और सेहत दोनों का शानदार कॉम्बिनेशन हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से कुकिंग ऑयल का कम इस्तेमाल करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्यादा तेल का सेवन न केवल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालता है। भारत हर साल बड़ी मात्रा में कुकिंग ऑयल आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी खर्च होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा तेल वाला भोजन मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। यही कारण है कि अब लोग ऑयल-फ्री और हेल्दी रेसिपीज़ की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। बिना तेल भी बन सकता है स्वादिष्ट खाना कई लोगों को लगता है कि बिना तेल के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन सही सामग्री और कुकिंग तकनीक अपनाकर हेल्दी और टेस्टी डिश तैयार की जा सकती हैं। ये डिश खासतौर पर वजन घटाने वालों, फिटनेस पसंद करने वालों और हार्ट हेल्थ का ध्यान रखने वालों के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं। ऑयल-फ्री वेज उपमा सूजी से बनने वाला उपमा हल्का और पौष्टिक नाश्ता माना जाता है। इसे बनाने के लिए सूजी को ड्राई रोस्ट किया जाता है और उसमें गाजर, मटर, बीन्स जैसी सब्जियां मिलाई जाती हैं। करी पत्ता, हरी मिर्च और नींबू इसका स्वाद बढ़ाते हैं। स्टीम्ड ढोकला और ओट्स चीला बेसन और दही से बनने वाला स्टीम्ड ढोकला बिना तेल के आसानी से तैयार किया जा सकता है। यह लो-कैलोरी और प्रोटीन से भरपूर स्नैक माना जाता है। वहीं, ओट्स और वेजिटेबल चीला फिटनेस फूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे नॉन-स्टिक पैन पर बहुत कम या बिना तेल के बनाया जा सकता है। मूंग दाल खिचड़ी और योगर्ट बाउल मूंग दाल खिचड़ी हल्की और आसानी से पचने वाली डिश मानी जाती है। दाल, चावल और सब्जियों से बनी यह खिचड़ी बिना तड़के के भी स्वादिष्ट लगती है। इसके अलावा, फ्रूट और दही से बना योगर्ट बाउल हेल्दी और झटपट तैयार होने वाला विकल्प है। इसमें दही, मौसमी फल, चिया सीड्स और ड्राई फ्रूट्स मिलाए जाते हैं। हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ता रुझान विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डाइटिंग नहीं, बल्कि हेल्दी खाने की आदतें अपनाना जरूरी है। कम तेल वाला भोजन वजन नियंत्रित रखने के साथ दिल को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आम पापड़ गर्मियों का एक ऐसा पारंपरिक स्वाद है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। हल्का खट्टा और मीठा स्वाद बचपन की यादें ताजा कर देता है। अच्छी बात यह है कि बाजार जैसा स्वादिष्ट आम पापड़ अब घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है और इसमें ज्यादा चीनी या प्रिजर्वेटिव्स की जरूरत नहीं पड़ती। आम पापड़ बनाने के लिए जरूरी सामग्री घर पर आम पापड़ बनाने के लिए बहुत कम चीजों की जरूरत होती है। इसके लिए 4 से 5 पके हुए मीठे आम, स्वादानुसार चीनी, एक चुटकी काला नमक और थोड़ा सा घी चाहिए। अगर आम ज्यादा मीठे हों तो चीनी कम इस्तेमाल की जा सकती है। वहीं, खट्टा स्वाद पसंद करने वाले लोग इसमें थोड़ा नींबू का रस भी मिला सकते हैं। ऐसे तैयार करें आम का पल्प सबसे पहले आमों को अच्छी तरह धोकर उनका छिलका हटा लें और गूदा निकाल लें। इसके बाद गूदे को मिक्सर में डालकर स्मूद पेस्ट बना लें ताकि उसमें रेशे या गुठली का हिस्सा न रहे। अब इस पल्प को एक कढ़ाई में धीमी आंच पर पकाएं। इसमें चीनी और काला नमक मिलाकर लगातार चलाते रहें ताकि मिश्रण जले नहीं। करीब 10 से 15 मिनट बाद जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए, तब गैस बंद कर दें। धूप में सुखाकर करें तैयार अब एक ट्रे या स्टील की थाली पर हल्का घी लगाएं और तैयार मिश्रण को पतली परत में फैला दें। इसे 2 से 3 दिनों तक तेज धूप में सुखाएं और रात में अंदर रख दें। अच्छी तरह सूखने के बाद आम पापड़ को मनचाहे आकार में काट लें। इसे एयरटाइट डिब्बे में स्टोर किया जा सकता है, जिससे यह लंबे समय तक खराब नहीं होता। घर का बना आम पापड़ स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हेल्दी भी माना जाता है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। चिकन और मटन का अचार आजकल खाने के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है। मसालेदार स्वाद और लंबे समय तक इस्तेमाल की सुविधा के कारण लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर एक सवाल रहता है कि आखिर चिकन या मटन का अचार कितने दिनों तक सुरक्षित रहता है और कब तक इसे बिना किसी डर के खाया जा सकता है। अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो अब आपका कंफ्यूजन दूर होने वाला है। फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार, चिकन और मटन का अचार सही तरीके से तैयार किया जाए और अच्छी तरह स्टोर किया जाए तो यह लगभग 15 दिनों से लेकर 3 महीने तक सुरक्षित रह सकता है। इसकी शेल्फ लाइफ इस बात पर निर्भर करती है कि अचार में किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है और उसे किस तरह रखा गया है। अगर साफ-सफाई और स्टोरेज में थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो अचार जल्दी खराब हो सकता है। तेल और मसालों की होती है अहम भूमिका विशेषज्ञों का कहना है कि मांसाहारी अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में तेल, नमक और मसालों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। सरसों का तेल, तिल का तेल, हल्दी, लाल मिर्च, लहसुन और अदरक जैसे मसाले प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव का काम करते हैं। कई लोग इसमें सिरका, नींबू या इमली का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे अचार का स्वाद बढ़ने के साथ-साथ उसकी टिकाऊ क्षमता भी मजबूत होती है। नमी से जल्दी खराब हो सकता है अचार फूड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकन या मटन का अचार बनाते समय सबसे जरूरी बात यह है कि उसमें पानी बिल्कुल नहीं जाना चाहिए। थोड़ी सी नमी भी अचार को खराब कर सकती है। इसलिए मांस को मसालों के साथ अच्छी तरह पकाने के बाद पूरी तरह ठंडा करके ही सूखे कांच के जार में रखना चाहिए। अचार निकालते समय भी हमेशा साफ और सूखे चम्मच का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। गीले चम्मच के इस्तेमाल से अचार में फफूंदी लगने और बदबू आने का खतरा बढ़ जाता है। अगर इसे फ्रिज में रखा जाए या ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर किया जाए, तो इसकी शेल्फ लाइफ और बढ़ सकती है। खराब अचार की पहचान कैसे करें? अगर अचार से अजीब गंध आने लगे, उसका रंग बदल जाए या उस पर सफेद परत दिखाई देने लगे, तो उसे खाने से बचना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही तरीके से रखा गया चिकन या मटन का अचार लंबे समय तक स्वाद, खुशबू और गुणवत्ता बनाए रख सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में Mango की बहार छा जाती है। फलों का राजा कहलाने वाला आम सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि अलग-अलग रेसिपी के लिए भी बेहद खास माना जाता है। आमतौर पर लोग आमरस, शेक या चटनी बनाते हैं, लेकिन अब किचन में कुछ नया ट्राय करने का ट्रेंड बढ़ रहा है। ऐसे में आम से बनने वाली यूनिक डिशेज़ आपके खाने को और भी खास बना सकती हैं। मैंगो सालसा: हल्का और हेल्दी विकल्प अगर आप कुछ फ्रेश और हेल्दी खाना चाहते हैं तो मैंगो सालसा बेहतरीन ऑप्शन है। कटे हुए आम, प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और नींबू के रस से तैयार यह डिश खट्टा-मीठा स्वाद देती है। इसे स्नैक्स या नाचोज के साथ परोसा जा सकता है। आम का पुलाव: मीठा-नमकीन का अनोखा स्वाद आम का पुलाव एक फ्यूजन डिश है जिसमें बासमती चावल, पके आम के टुकड़े और हल्के मसालों का इस्तेमाल होता है। ड्राई फ्रूट्स के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। मैंगो पास्ता: इटैलियन ट्विस्ट के साथ देसी फ्लेवर मैंगो पास्ता आजकल काफी ट्रेंड में है। इसमें क्रीमी मैंगो सॉस बनाकर पास्ता के साथ मिलाया जाता है। इसका फ्लेवर बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आता है। आम की कुल्फी: ठंडक भरा स्वाद गर्मियों में आम की कुल्फी एक परफेक्ट डेज़र्ट है। दूध, क्रीम और आम के गूदे से बनी यह कुल्फी घर पर आसानी से तैयार की जा सकती है और बाजार जैसी ही स्वादिष्ट होती है। आम की खीर: पारंपरिक मिठाई में नया ट्विस्ट चावल, दूध और चीनी से बनी खीर में आम का पल्प मिलाकर इसे और भी रिच बनाया जाता है। यह खास मौकों के लिए एक शानदार डेज़र्ट है। अगर आप इस गर्मी कुछ नया और स्वादिष्ट ट्राय करना चाहते हैं, तो आम से बनी ये 5 डिश आपके किचन में जरूर शामिल करें। ये रेसिपीज़ न सिर्फ आसान हैं, बल्कि मेहमानों को भी इंप्रेस करने का शानदार तरीका हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।