बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले में गुरुवार रात सिविल डिफेंस विभाग की ओर से आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को परखने के लिए व्यापक मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। रात करीब 9 बजे शहर में अचानक सायरन बजने से लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान मेडिकेंट हॉस्पिटल पर काल्पनिक 'बम हमले' और उषा पेट्रोल पंप के पास आपात स्थिति का अभ्यास किया गया। शुरुआत में कई लोग इसे वास्तविक घटना समझ बैठे, लेकिन बाद में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह केवल सुरक्षा तैयारियों का हिस्सा था। रेस्क्यू ऑपरेशन का किया गया अभ्यास मॉकड्रिल के दौरान सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, फायर ब्रिगेड, सिविल डिफेंस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। अभ्यास के तहत घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और एंबुलेंस के माध्यम से सदर अस्पताल पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की भी जांच की गई। डीसी और एसपी ने संभाली कमान मॉकड्रिल के दौरान उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहे। उन्होंने पूरे अभ्यास की निगरानी की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए इस तरह के अभ्यास बेहद जरूरी हैं। आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर जोर जिला प्रशासन ने बताया कि इस मॉकड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों की तैयारियों का आकलन करना और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना था। अधिकारियों के अनुसार, सभी विभागों ने तत्परता और समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। साथ ही स्थानीय लोगों ने भी अभ्यास में सहयोग दिया। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसी वास्तविक आपदा या संकट की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले के जरीडीह थाना क्षेत्र स्थित जैनामोड़ बाजार में मंगलवार रात सर्राफा व्यवसायी से हथियार के बल पर लूट की वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी। बाइक सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने मां आभूषणालय के संचालक रंजीत बरणवाल पर हमला कर पिस्तौल के बल पर उनका बैग लूट लिया। बैग में करीब सवा लाख रुपये नकद के अलावा अन्य जरूरी सामान भी रखा था। घटना रात करीब नौ बजे की है, जब व्यवसायी दुकान बंद कर अपने घर लौट रहे थे। रंजीत बरणवाल के अनुसार रंजीत बरणवाल के अनुसार, रास्ते में पहले एक बदमाश ने बांस की लाठी से उन पर हमला किया। इसके बाद दूसरे बदमाश ने उनकी छाती पर पिस्तौल सटा दी और गाली-गलौज करते हुए बैग छीन लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी बाइक से मौके से फरार हो गए। अचानक हुई इस घटना से व्यवसायी घबरा गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे घटना की सूचना मिलते ही जरीडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है तथा बदमाशों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा। व्यापारियों में नाराजगी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद जैनामोड़ के व्यापारियों में भारी आक्रोश है। जैनामोड़ व्यवसाय संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाजार जैसे व्यस्त इलाके में इस तरह की लूट की घटना पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। व्यवसाय संघ के मनोज सिंह और स्थानीय जनप्रतिनिधि कवि शरण बरनवाल ने कहा कि अपराधियों के मन से पुलिस का डर खत्म हो चुका है। उन्होंने बाजार क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी निगरानी मजबूत करने और अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की, ताकि व्यापारियों और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम हो सके।
बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। तिलैया पंचायत के कारीपानी गांव में एक युवक ने शराब के नशे में अपने ही पिता की टांगी से हमला कर हत्या कर दी। घटना शुक्रवार देर रात की है। वारदात के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई, जबकि पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त टांगी भी बरामद कर ली है। पिता की फटकार के बाद हुआ खूनी विवाद जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय अर्जुन करमाली अपने मामा के घर आयोजित एक कार्यक्रम से देर रात नशे की हालत में घर लौटा था। उसकी शराब पीने की आदत से परेशान पिता जयलाल करमाली (63) ने उसे समझाते हुए फटकार लगाई। उन्होंने बेटे से कहा कि उसकी शराब की लत के कारण परिवार में हमेशा तनाव बना रहता है और उसकी पत्नी भी मारपीट से तंग आकर मायके चली गई है। पिता की बात सुनकर अर्जुन गुस्से में आपा खो बैठा। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ी और आवेश में आकर उसने घर में रखी टांगी उठाकर पिता के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से जयलाल करमाली की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोपी को भागने नहीं दिया। उसे पकड़कर घर में ही बांध दिया गया और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही जगेश्वर बिहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा हत्या में प्रयुक्त टांगी भी जब्त कर ली है। थाना प्रभारी प्रकाश यादव ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच जारी है। मुखिया ने जताया दुख शनिवार सुबह तिलैया पंचायत की मुखिया चिंता देवी घटनास्थल पहुंचीं और घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति परिवार और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने लोगों से नशे से दूर रहने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की अपील की। इस घटना ने एक बार फिर शराब की लत से उत्पन्न सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं को उजागर कर दिया है।
बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब 17 वर्षीय एक किशोरी अपने प्रेमी की रिहाई की मांग को लेकर करीब 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस, प्रशासन और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद किशोरी को सुरक्षित नीचे उतारा गया। क्या है पूरा मामला? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किशोरी का प्रेमी किसी मामले में न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में है। प्रेमी की गिरफ्तारी से नाराज किशोरी ने विरोध जताने के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ने जैसा खतरनाक कदम उठा लिया। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन पुलिस अधिकारियों ने पहले किशोरी से बातचीत की और उसे समझाने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से लगातार बातचीत जारी रही। काफी देर तक चले प्रयास के बाद किशोरी सुरक्षित नीचे उतर आई। इसके बाद राहत की सांस ली गई। लोगों की लगी भीड़ मोबाइल टावर पर किशोरी के चढ़ने की खबर फैलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया। पुलिस ने की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी समस्या का समाधान कानून के दायरे में रहकर करें। इस तरह जान जोखिम में डालकर विरोध करना न केवल खतरनाक है बल्कि इससे बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
बोकारो। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के छात्र आदित्य मिश्रा 12वीं साइंस में नेशनल टॉप बने हैं। अब तक विज्ञान संकाय में झारखंड स्टेट टॉपर रहे आदित्य का पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के उपरांत कुल प्राप्तांक 99.20 प्रतिशत से बढ़कर 99.60 प्रतिशत हो गया है। आदित्य ने विगत 13 मई, 2026 को घोषित परीक्षा-परिणाम में अपने बायोलॉजी के रिजल्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली को चुनौती दी थी। उन्होंने री-इवैल्युएशन के लिए सीबीएसई को आधिकारिक रूप से आवेदन किया, जिसका परिणाम उनकी अपेक्षा के अनुरूप और सुखद रहा। पुनर्मूल्यांकन में आदित्य के बायोलॉजी के मार्क्स अब 96 से बढ़कर 99 हो हो गए। इसके साथ ही अब वह कानपुर की छात्रा सोनाक्षी गोयल के साथ संयुक्त रूप से विज्ञान संकाय के नेशनल टॉपर हो गए। अब इन दोनों विद्यार्थियों के कुल प्राप्तांक 99.60 प्रतिशत हैं। 3 विषयों में मिले 100-100 अंक आदित्य ने तीन विषयों – इंग्लिश कोर, केमिस्ट्री और पेंटिंग में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। जबकि, फिजिक्स में उन्हें 99 अंक मिले। उक्त विषयों के अलावा अन्य सभी में उन्होंने ए1 ग्रेडिंग अर्जित की है। स्कूल ने किया सम्मानित आदित्य के प्रदर्शन से डीपीएस बोकारो प्रबंधन खुश है। सोमवार को विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने आदित्य को उनके पिता प्रजेश चन्द्र मिश्रा के साथ सम्मानित किया। प्राचार्य ने उन्हें माला पहनाई और मिठाई खिलाकर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना व्यक्त की। डॉ. गंगवार ने आदित्य की इस उपलब्धि को न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे बोकारो और समस्त झारखंड प्रदेश के लिए अत्यंत ही गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आदित्य शुरू से ही प्रतिभावान छात्र रहा है और अपनी मेधाविता, लगन व परिश्रम की बदौलत विद्यालय के कुशल शिक्षकों को मार्गदर्शन में राष्ट्रीय मानचित्र पर उसने डीपीएस बोकारो का परचम लहराया है। इस मौके पर विद्यालय के वरीय उपप्राचार्य अंजनी भूषण व उपप्राचार्या शालिनी शर्मा सहित अन्य शिक्षकगण मौजूद रहे।
बोकारो। बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र के बाजार टांड में शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। खासमहाल से कोयला स्लरी लादकर उत्तर प्रदेश के बनारस जा रहा 14 चक्का ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में ट्रक के खलासी 28 वर्षीय अबू सुफेयान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल चालक गिरजेश कुमार दुबे अस्पताल से इलाज के बाद फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। कई दुकानों और मकानों को भारी नुकसान प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज रफ्तार के कारण ट्रक असंतुलित होकर सड़क किनारे बने कई दुकानों और मकानों से टकरा गया। हादसे में गणेश साहु के करीब 14 हजार ईंट, गैराज और मकान की 10 फीट लंबी दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके अलावा मोहन महतो की स्टील फर्नीचर दुकान, प्रमोद के घर का बाहरी हिस्सा, प्रदीप की चाय दुकान और सड़क किनारे खड़ी अनुपम साव की पिकअप वैन भी क्षतिग्रस्त हो गई। बिजली आपूर्ति भी हुई बाधित ट्रक की टक्कर से डीवीसी के ऐश पौंड तक जाने वाली बिजली लाइन के दो पोल और बंच केबल टूटकर गिर गए, जिससे आसपास के इलाके की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। हादसे के बाद कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायल चालक पुलिस को चकमा देकर भागा सूचना मिलते ही बेरमो एसडीपीओ रविंद्र कुमार सिंह, बोकारो थर्मल थाना प्रभारी पिंकू कुमार यादव समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से चालक को मलबे से निकालकर डीवीसी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। पुलिस ने मृतक अबू सुफेयान के शव को पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया है। दुर्घटनाग्रस्त ट्रक और सड़क पर बिखरे कोयले को हटाकर यातायात बहाल करने का काम किया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
बोकारो। बोकारो जिले में होने वाली NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए जिले के सभी आठ परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। प्रत्येक केंद्र पर दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट), पुलिस पदाधिकारी और वरीय प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता को रोका जा सके। हर परीक्षा केंद्र पर रहेगी प्रशासन की निगरानी जिला प्रशासन के अनुसार, परीक्षा शुरू होने से पहले सभी केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वरीय अधिकारियों को अलग-अलग परीक्षा केंद्रों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि परीक्षा केंद्रों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा, जिससे अनधिकृत लोगों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। समय से पहुंचने की अपील प्रशासन ने अभ्यर्थियों से परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंचने की अपील की है। प्रवेश के समय एडमिट कार्ड और वैध पहचान पत्र की गहन जांच की जाएगी। निर्धारित समय के बाद पहुंचने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। नकल और गड़बड़ी पर होगी सख्त कार्रवाई जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान नकल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग या किसी भी प्रकार की अनियमित गतिविधि पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी परीक्षा केंद्रों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही परीक्षार्थियों से भी नियमों का पालन करने और परीक्षा प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की गई है, ताकि री-एग्जाम पूरी तरह निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
बोकारो। बोकारो जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र के कुर्मीडीह से 6 जून को लापता हुए एक बच्चे को पुलिस ने ओडिशा के पुरी से सकुशल बरामद कर लिया है। त्वरित कार्रवाई, तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के दम पर पुलिस ने महज पांच दिनों के भीतर बच्चे का पता लगाकर उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। बरामदगी के समय बच्चे की मां भी मौके पर मौजूद थीं। तीन विशेष टीमों ने चलाया सर्च अभियान बच्चे के लापता होने की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना के निर्देश पर तीन विशेष टीमों का गठन किया गया। टीमों ने बच्चे की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस ने बोकारो रेलवे स्टेशन सहित कुल आठ रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच के दौरान फुटेज में बच्चा पहले बोकारो रेलवे स्टेशन और फिर मुरी स्टेशन पर ट्रेन में सवार होता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके संभावित यात्रा मार्ग का पता लगाते हुए ओडिशा के पुरी तक तलाश अभियान चलाया, जहां से उसे सुरक्षित बरामद कर लिया गया। हाईकोर्ट की गंभीरता को देखते हुए हुई त्वरित कार्रवाई मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट भी गंभीर है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की और कम समय में बच्चे को सुरक्षित खोज निकाला। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण भटका बच्चा प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चे के पिता अमित गुप्ता एक आपराधिक मामले में जेल में बंद हैं, जबकि उसकी मां दिल्ली में नौकरी करती हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चा मानसिक रूप से परेशान होकर घर छोड़कर चला गया था। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों पर नियमित ध्यान दें और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।
बोकारो। बोकारो जिले के राधानगर पंचायत के समीप लावाटांड़ क्षेत्र में रेलवे ट्रैक से तीन युवकों के शव बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। एक साथ तीन लोगों के शव मिलने से आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुट गयी। वहीं सूचना मिलने पर जीआरपी बोकारो की टीम मौके पर पहुंची और तीनों शवों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मृतकों की पहचान और मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है। मौत का कारण पता लगा रही पुलिस पुलिस को मौके से कई दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिसके आधार पर तीनों शव की पहचान को लेकर जांच की जा रही है। पुलिस हर एक एंगल से जांच में जुट गयी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इन तीनों की मौत ट्रेन के चपेट में आने से हुई है या फिर कोई और ही कारण है। मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही वजह का खुलासा हो पायेगा।
बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड स्थित कुसुमडीह क्षेत्र में हाथियों के हमले में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल की पहचान केरी (टीकाहारा) निवासी 40 वर्षीय कार्तिक बेसरा के रूप में हुई है। उनका इलाज रामगढ़ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में तीन हाथियों का झुंड घूम रहा था। वन विभाग की ओर से लोगों को सतर्क करते हुए उस रास्ते से पैदल नहीं गुजरने की चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके कार्तिक बेसरा देर रात अपने घर लौटने के लिए पैदल निकल पड़े। मंदिर के पास हाथियों से हुआ सामना बताया जा रहा है कि दामोदर नदी पर बने पुल को पार करने के बाद जैसे ही कार्तिक बेसरा कुसुमडीह स्थित मंदिर के पास पहुंचे, उनका सामना हाथियों के झुंड से हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक हाथी ने उन्हें पटक दिया और कमर के बाईं ओर कुचल दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे कार्तिक मिली जानकारी के मुताबिक कार्तिक बेसरा अपनी पत्नी के साथ गोला प्रखंड के शीशाटांड़ स्थित एक रिश्तेदार के घर गए थे। किसी बात को लेकर विवाद होने के बाद वे रात में ही पैदल घर लौटने निकल पड़े थे। इसी दौरान यह हादसा हुआ। घटना की सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार में मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन को घायल के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए सतर्क रहें और वन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के सत्यापन के दौरान लाभुकों से पैसे वसूली का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आंगनबाड़ी केन्द्र चौफान उत्तरी की सेविका कुमारी सीमा को तत्काल प्रभाव से पद से चयनमुक्त कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, 22 मई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आंगनबाड़ी सेविका पर योजना के लाभुकों से भौतिक सत्यापन के नाम पर पैसे लेने का आरोप लगाया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जांच समिति ने पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी। जांच रिपोर्ट में आरोपों की हुई पुष्टि जांच समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट पाया गया कि आंगनबाड़ी सेविका द्वारा लाभुकों से रुपये की वसूली की गई थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चौफान उत्तरी आंगनबाड़ी केन्द्र, कोड संख्या-20355020112 की सेविका कुमारी सीमा को चयनमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और लाभुकों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीसी ने दी सख्त चेतावनी अजय नाथ शाहदेव ने कहा कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, अनियमितता या लाभुकों से अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी बाधा और पारदर्शिता के साथ पहुंचना चाहिए। इस कार्रवाई के बाद जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन की सख्ती साफ दिखाई दे रही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है।
बोकारो। बोकारो पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नया मोड़ बस स्टैंड से 47 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, तस्कर इस अवैध गांजा की खेप को बस के माध्यम से बिहार भेजने की तैयारी कर रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में गांजा जब्त कर लिया गया, जबकि तस्कर मौके से फरार हो गए। बरामद गांजा की कीमत लगभग 5 से 7 लाख रुपये आंकी गई है। गुप्त सूचना के बाद बनी विशेष टीम सिटी डीएसपी Alok Ranjan ने बताया कि 9 मई की शाम पुलिस अधीक्षक Nathu Singh Meena को सूचना मिली थी कि बीएस सिटी थाना क्षेत्र स्थित नया मोड़ बस स्टैंड से अवैध गांजा बिहार भेजा जाने वाला है। सूचना मिलते ही एसपी के निर्देश पर डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। दो प्लास्टिक बोरों से मिला गांजा छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने पवनसुत बस पड़ाव के चबूतरे पर संदिग्ध अवस्था में रखे दो प्लास्टिक के बोरों की तलाशी ली। जांच में दोनों बोरों से 47 पैकेट में बंद करीब 47 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक तस्कर इसे बस के जरिए बिहार भेजने की फिराक में थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज इस मामले में बीएस सिटी थाना कांड संख्या 89/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान दो संदिग्ध तस्करों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
बोकारो। बोकारो में हुए ट्रेजरी घोटाले मामले में Criminal Investigation Department (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। यह घोटाला सरकारी फंड में गड़बड़ी और फर्जी निकासी से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी कड़ी में CID ने एक होम गार्ड जवान को गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियां पिछले कुछ समय से ट्रेजरी से हो रहे संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखे हुए थीं। इसी दौरान उन्हें कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर यह गिरफ्तारी की गई। आरोप है कि सरकारी खजाने से फर्जी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं के जरिए पैसे निकाले गए थे। CID खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां CID की टीम अब इस घोटाले के पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच का फोकस यह जानने पर है कि पैसे की निकासी किस स्तर पर हुई और किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। डिजिटल लेन-देन और सिस्टम की भी जांच सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में डिजिटल ट्रांजैक्शन और ट्रेजरी से जुड़े तकनीकी सिस्टम की भी बारीकी से जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि फर्जीवाड़ा किस तरीके से किया गया और इसमें किस तरह की तकनीकी खामियों का फायदा उठाया गया। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी संभव अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई शुरुआती चरण में है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। प्रशासन इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बोकारो। बोकारो में सामने आए ट्रेजरी घोटाले ने प्रशासन और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। शुरुआत में यह गड़बड़ी 3.15 करोड़ रुपये बताई गई थी, जो बाद में 4.29 करोड़ तक पहुंची और अब जांच में यह रकम 6 करोड़ रुपये से अधिक होने के संकेत मिले हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, घोटाले का असली आकार सामने आता जा रहा है। 2016 से चल रहा था फर्जी निकासी का खेल उपायुक्त अजय नाथ झा के अनुसार, कोषागार से अवैध निकासी का यह मामला वर्ष 2016 से चल रहा था। पुलिस विभाग के एक लेखपाल द्वारा इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। जांच में कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें राम नरेश सिंह, उपेंद्र सिंह और एस कुमार शामिल हैं। इन लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से राशि निकाली गई। राज्य और जिला स्तर पर जांच तेज मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। इसके अलावा राज्य स्तर पर भी अलग से जांच जारी है, ताकि किसी भी पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई प्रशासन ने इस मामले को “जीरो टॉलरेंस” श्रेणी में रखा है। उपायुक्त ने साफ कहा है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आगे और बड़े खुलासे संभव अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस घोटाले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल प्रशासन और पुलिस दोनों मिलकर मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटे हैं, ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
बोकारो। बोकारो में ट्रेजरी से एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी के नाम पर करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। मामले में उस अकाउंटेंट को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसने पैसे की निकासी की। उसकी पत्नी को भी इस मामले में शामिल बताया जा रहा है। 4 करोड़ 29 लाख 71 हजार की अवैध निकासी बोकारो एसपी के अनुसार, एक हवलदार के नाम पर बीते करीब 25 महीनों में कुल 4 करोड़ 29 लाख 71 हजार की अवैध निकासी की गई है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी अकाउंटेंट कौशल कुमार पाण्डे को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। चौंकाने वाले खुलासे जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया गया कि ट्रेजरी पोर्टल में जन्म तिथि और बैंक खाता संख्या में बदलाव कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि निकाली गई पूरी राशि उसने अपनी पत्नी अनु पाण्डेय के खाते में ट्रांसफर कर दी थी। सुनियोजित तरीके से गबनः एसपी ने बताया कि वेतन मद के नाम पर बार-बार रकम निकाली जाती रही, जिससे यह साफ होता है कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया घोटाला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में शामिल सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में ट्रेजरी और पुलिस विभाग के अन्य कर्मियों की भूमिका क्या रही। विभागीय समन्वय में कहीं लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई, इसकी भी गहन पड़ताल जारी है।
बोकारो। रामनवमी जुलूस के दौरान झारखंड के बोकारो जिले में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको गांव में शोभायात्रा और अखाड़ा मिलन के दौरान धार्मिक ध्वज (महावीरी पताका) 1 लाख 33 हजार वोल्ट की हाई टेंशन लाइन की चपेट में आ गया, जिससे छह लोग झुलस गए। इनमें दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार स्थानीय लोगों के अनुसार, रामनवमी के मौके पर गांव में विभिन्न अखाड़ों द्वारा पारंपरिक जुलूस निकाला जा रहा था। जुलूस समाप्त होने के बाद धार्मिक ध्वज स्थापित करने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान ध्वज का लंबा डंडा ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइन के बेहद करीब पहुंच गया और अचानक उसमें करंट दौड़ गया। इसके संपर्क में आने से मौके पर मौजूद छह लोग झुलस गए। महावीरी पताका बना हादसे की वजह प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब अखाड़ा मिलन के बाद महावीरी पताका को खड़ा किया जा रहा था। ध्वज का डंडा ऊंचा होने के कारण वह 1,33,000 वोल्ट की लाइन के संपर्क में आ गया। करंट का तेज झटका लगते ही आसपास मौजूद लोग चीख-पुकार करने लगे और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। गांव के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर बीटीपीएस डीवीसी और जारंगडीह जनता अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए बोकारो जनरल अस्पताल रेफर किया गया। दो की हालत गंभीर, बाकी खतरे से बाहर घायलों में दो लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, हालांकि डॉक्टरों ने सभी को फिलहाल खतरे से बाहर बताया है। हादसे के बाद घायलों के परिजन और ग्रामीण अस्पताल में बड़ी संख्या में जुट गए। स्थानीय मुखिया साबिर अंसारी ने बताया कि प्रशासन द्वारा पहले ही 220, 440 और 11,000 वोल्ट की लाइन कटवा दी गई थी, ताकि जुलूस के दौरान कोई दुर्घटना न हो। लेकिन लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऊपर से 1,33,000 वोल्ट की हाई टेंशन लाइन भी गुजर रही है, जिसकी चपेट में आने से यह हादसा हो गया। प्रशासन और पुलिस ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही बेरमो एसडीएम मुकेश कुमार मछुआ, एसडीपीओ वशिष्ठ नारायण सिंह, पेटरवार बीडीओ संतोष महतो और थाना प्रभारी राजू कुमार मुंडा सहित प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल लिया।
बोकारो के गोमिया में दर्दनाक हादसा बोकारो जिले के गोमिया क्षेत्र में एक ही ट्रैक्टर से जुड़े दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन युवकों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और लोगों ने सड़क जाम कर दिया। अवैध बालू लदा ट्रैक्टर बना मौत का कारण पहली घटना गोमिया थाना क्षेत्र के तुलबुल गांव के पास हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेज रफ्तार में अवैध बालू लेकर जा रहा ट्रैक्टर ललपनिया की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान चंद्रकिशोर प्रसाद की बाइक ट्रैक्टर से टकरा गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ट्रैक्टर लेकर फरार हो गया। भागते समय दूसरी बाइक को भी मारी टक्कर पहली घटना के बाद भाग रहे उसी ट्रैक्टर ने दूसरी दुर्घटना को भी जन्म दिया। ललपनिया थाना क्षेत्र में अचानक ट्रैक्टर के रुकने से पीछे आ रही पल्सर बाइक उसकी ट्रॉली से जा टकराई। इस बाइक पर सवार कृष्ण मुर्मू और उमेश किस्कू की भी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का फूटा गुस्सा, सड़क जाम घटना के बाद मृतकों के परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। ललपनिया-गोमिया मार्ग पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया गया। परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि रात से ही सड़क जाम है, जिससे आवागमन प्रभावित हो गया है। पुलिस मौके पर, हालात पर नजर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। एक शव को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है, जबकि अन्य शवों को उठाने से परिजन इनकार कर रहे हैं। अवैध बालू खनन पर फिर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर अवैध बालू खनन और तेज रफ्तार वाहनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना नियंत्रण के चल रहे ऐसे ट्रैक्टर न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि आम लोगों की जान के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं।
बोकारो। Steel Authority of India Limited (SAIL) में नए चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक के चयन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस अहम पद के लिए 10 उम्मीदवारों का ऑनलाइन इंटरव्यू 28 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से 11 बजे तक आयोजित किया जाएगा। 28 मार्च को ऑनलाइन इंटरव्यू SAIL के शीर्ष पद के लिए तय इस इंटरव्यू प्रक्रिया में सभी 10 दावेदार हिस्सा लेंगे। साक्षात्कार समाप्त होने के बाद Public Enterprises Selection Board (PESB) चयनित नाम को आगे की मंजूरी के लिए भेजेगा। कुछ ही घंटों में आ सकता है फैसला सूत्रों के मुताबिक इंटरव्यू के तुरंत बाद ही नतीजों की घोषणा की जा सकती है। इसके बाद चयनित नाम को कैबिनेट कमेटी के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही नए चेयरमैन पदभार संभालेंगे। अंदर और बाहर के उम्मीदवारों में मुकाबला इस बार कुल 10 उम्मीदवारों में 6 SAIL के भीतर से हैं, जबकि 4 उम्मीदवार बाहरी संगठनों और रेलवे पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी से चयन प्रक्रिया और रोचक हो गई है। प्रमुख दावेदारों के नाम एके पांडा (निदेशक, वित्त) मनीष राज गुप्ता (निदेशक, माइनिंग) आलोक वर्मा (निदेशक प्रभारी, राउरकेला स्टील प्लांट) अनीश दासगुप्ता (ईडी, प्रोजेक्ट, बोकारो स्टील प्लांट) एमपी सिंह और विपिन कुमार गिरी (SAIL माइंस ग्रुप) कृष्ण गोपाल अग्रवाल (निदेशक, वित्त, RITES Limited) अनूप कुमार सतपति और डॉ. पुड़ी हरिप्रसाद (रेलवे पृष्ठभूमि) चेतन प्रकाश जैन (सीएमडी, Central Electronics Limited) नए चेयरमैन के सामने चुनौतियां नए प्रमुख के सामने कंपनी की विस्तार और आधुनिकीकरण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाले इन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। अंतरिम व्यवस्था पर विचार पूर्व चेयरमैन अमरेंदु प्रकाश के इस्तीफे के बाद पद खाली है। ऐसे में Ministry of Steel अंतरिम कार्यवाहक चेयरमैन नियुक्त करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि कामकाज प्रभावित न हो। पांच साल का होगा कार्यकाल बता दें नए चेयरमैन का कार्यकाल पांच वर्षों का होगा। सरकार ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर सके और SAIL को नई ऊंचाइयों तक ले जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।