वार्ड 18 के पार्षद प्रेमचंद साव को मिले 13 वोट, मतदान के बाद मतगणना में मिली जीत
झारखंड के चतरा नगर परिषद में उपाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में वार्ड संख्या 18 के पार्षद प्रेमचंद साव विजयी घोषित किए गए। मतदान के बाद हुई मतगणना में उन्हें कुल 13 वोट प्राप्त हुए।
वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी वार्ड संख्या 11 की पार्षद वेदवती जायसवाल को 9 वोट मिले। इस तरह प्रेमचंद साव ने चार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। हालांकि इस परिणाम की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की ओर से होना अभी बाकी बताया जा रहा है।
उपाध्यक्ष पद के लिए केवल दो ही प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। इनमें वार्ड 18 के पार्षद प्रेमचंद साव और वार्ड 11 की पार्षद वेदवती जायसवाल शामिल थीं।
दोनों उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला हुआ। मतदान के बाद जब मतों की गिनती की गई तो प्रेमचंद साव को स्पष्ट बहुमत मिला और वे चुनाव जीतने में सफल रहे।
उपाध्यक्ष पद के चुनाव से पहले नगर परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अताउर रहमान उर्फ बाबू भाई और सभी 22 वार्ड पार्षदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।
शपथ ग्रहण के बाद ही उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू कराई गई। पूरी चुनाव प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।
मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना कराई गई। गिनती में प्रेमचंद साव को 13 वोट मिले, जबकि वेदवती जायसवाल को 8 वोट प्राप्त हुए। इसके अलावा एक वोट रद्द घोषित किया गया।
इस तरह बहुमत मिलने पर प्रेमचंद साव को विजयी घोषित कर दिया गया। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। रिम्स 2 कांके में ही बनेगा, यह तय हो गया है। इसके साथ ही राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुल 6 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इन सभी पर कुल 5917 करोड़ खर्च किये जायेंगे। विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकृत समिति ने छह बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन योजनाओं के लागू होने से राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स पर मरीजों का दबाव कम होगा और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता भी घटेगी। कैबिनेट की मंजूरी जरूरी अब स्वास्थ्य विभाग इन प्रस्तावों पर कैबिनेट की मंजूरी लेगा। इसके बाद परियोजनाओं पर काम शुरू किया जाएगा। 4149 करोड़ से बनेगा RIMS-2.... इनमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट रांची में प्रस्तावित रिम्स-2 अस्पताल का है। इसके लिए 4149 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। नया RIMS-2 अस्पताल 2800 बेड का अत्याधुनिक सुपर स्पेशलिटी संस्थान होगा। मजबूत होगा मेडिकल एकेडेमिक ढांचा प्रस्तावित संस्थान में एमबीबीएस की 200 सीटें पीजी मेडिकल की 200 सीटें सुपर स्पेशलिटी की 200 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे राज्य में मेडिकल शिक्षा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। रिम्स से घटेगा मरीजों का बोझ 1960 में स्थापित रिम्स (पूर्व में आरएमसीएच) वर्तमान में 1500 बेड वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है। यहां प्रतिदिन करीब 3500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। लगातार बढ़ती मरीज संख्या के कारण सभी को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा देना चुनौती बनता जा रहा है। सरकार का मानना है कि RIMS-2 बनने के बाद मरीजों को बेहतर और तेज स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। राज्य से हर साल 1.20 लाख मरीज जाते हैं बाहरः स्वास्थ्य विभाग के अनुसार झारखंड की करीब 4 करोड़ आबादी के लिए अभी केवल 10 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें: 7 सरकारी और 3 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोगः (NMC) के मानकों के अनुसार हर 10 लाख की आबादी पर एक मेडिकल कॉलेज होना चाहिए। इस हिसाब से राज्य में करीब 40 मेडिकल कॉलेजों की आवश्यकता है। एमबीबीएस की केवल 246 सीटें सुपर स्पेशलिटी की मात्र 41 सीटें उपलब्ध हैं। विशेषज्ञ इलाज की कमी के कारण हर साल लगभग 1.20 लाख मरीज बेहतर उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। मेडिको सिटी बनाने की भी तैयारी राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए मेडिको सिटी विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इस परियोजना पर करीब 284 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना के लिए Indian Institute of Management Ranchi को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस Xavier Institute of Social Service को इंपैक्ट असेसमेंट के लिए नामित किया जाएगा। RIMS-2 के लिए जमीन चिन्हित रांची डीसी की ओर से रिम्स-2 के लिए 120 एकड़ भूमि की बाउंड्री कराई जा चुकी है। इसके अलावा रिंग रोड और पतरातू रोड के किनारे अतिरिक्त जमीन चिन्हित की जा रही है। साथ ही Indian Institute of Management Ranchi के लिए प्रस्तावित 77 एकड़ भूमि स्वास्थ्य विभाग को ट्रांसफर की जाएगी। अतिरिक्त 100 एकड़ जमीन कांके अंचल के मौजा हुसीर-नगड़ी से अधिग्रहित की जाएगी। जमशेदपुर और धनबाद मेडिकल कॉलेज भी होंगे अपडेट सरकार ने जमशेदपुर स्थित MGM Medical College को 500 बेड वाले अस्पताल में विकसित करने के लिए 542 करोड़ रुपए की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी है। वहीं एमबीबीएस और पीजी सीटें बढ़ाने के लिए 394 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मंजूरी भी दी गई है। इसके अलावा धनबाद स्थित Shahid Nirmal Mahto Medical College and Hospital में एमबीबीएस सीटें बढ़ाने और नए पीजी विषय शुरू करने के लिए 495 करोड़ रुपए की परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। रांची सदर अस्पताल में बनेगी कैथ लैब रांची सदर अस्पताल परिसर में कैथ लैब स्थापित करने के लिए 11 करोड़ रुपए की योजना को भी मंजूरी दी गई है। रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में बढ़ते मरीजों को देखते हुए यह सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे हृदय रोगियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा झारखंड सरकार की ये स्वास्थ्य परियोजनाएं राज्य के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती हैं। RIMS-2, मेडिको सिटी और मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से न केवल इलाज की सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि राज्य मेडिकल शिक्षा और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बन सकता है।
रांची। झारखंड में इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव से लोग परेशान है। राजधानी रांची समेत राज्य के अधिकांश हिस्सों में सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने 27 मई तक राज्य में हीटवेव जारी रहने की चेतावनी दी है। 12 जिलों का तापमान 40 डिग्री के पार पिछले चार-पांच दिनों से राज्य के 12 जिलों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। सबसे ज्यादा गर्मी पलामू, गढ़वा और चतरा में पड़ रही है, जहां पारा 44 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार अगले पांच दिनों तक तापमान में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। कई जिलों में हीटवेव और यलो अलर्ट 22 मई को पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिलों में हीटवेव चलने की संभावना जताई गई है। वहीं रांची, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, खूंटी, धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में तेज हवा और आकाशीय बिजली को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि 23 मई को कुछ जिलों में ऑरेंज अलर्ट भी लागू रहेगा। बारिश के बावजूद नहीं मिली राहत हालांकि पिछले 24 घंटों में राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 10.2 मिमी वर्षा धनबाद के पंचेत में रिकॉर्ड हुई, लेकिन इससे गर्मी से ज्यादा राहत नहीं मिली। डाल्टनगंज का अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि नामकुम में न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री रहा। ऐसा रहेगा रांची में अगले चार दिनों का तापमान 22 मई : अधिकतम 39 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस 23 मई : अधिकतम 39 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस 24 मई : अधिकतम 40 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस 25 मई : अधिकतम 40 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस तेज गर्मी को देखते हुए लोग सिर और चेहरे को कपड़ों से ढककर घरों से बाहर निकल रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
रांची। झारखंड के पुलिस थानों को अब मामला दर्ज होने के बाद 60 से 90 दिनों में अनुसंधान पूरा करना होगा। राज्य में नए आपराधिक कानूनों को धरातल पर बेहतर तरीके से लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय अब सख्त हो गया है। डीजीपी द्वारा सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को इस संबंध में निर्देश जारी किया गया है। आज की बैठक अहम आज यानी 21 मई को दोपहर तीन बजे पुलिस आईजी अभियान की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल ऑनलाइन समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राज्य के नए आपराधिक कानूनों के परिप्रेक्ष्य में पुलिस की तैयारियों और बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। 5 मुख्य बिंदुओं पर होगी समीक्षा – मोबाइल फोनः नए कानूनों के तहत डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिसकर्मियों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की प्रगति की जांच होगी। – ई-साक्ष्य पोर्टल पर अपलोडिंग: डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए ‘ई-साक्ष्य’ ऐप और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी। – 60 से 90 दिनों में जांच पूरी करना: नए कानूनों के प्रावधानों के तहत मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए पुलिस को 60 से 90 दिनों के भीतर अपनी जांच अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी, इसकी कार्ययोजना पर बात होगी। – हर जिले में CCTNS ऑपरेटर: क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर जिले में ऑपरेटरों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। – CCTNS में पुराने डेटा की एंट्री: पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और डेटा को डिजिटल सिस्टम में दर्ज करने को लेकर धनबाद एसएसपी द्वारा एक विशेष प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।