गिरिडीह। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान के तहत मंगलवार को गिरिडीह जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट-2 (BLA-2) की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसके साथ ही चुनाव पाठशाला के दूसरे चरण का भी सफल आयोजन हुआ। इस अभियान का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल हो और अपात्र नामों को हटाया जा सके। जिला निर्वाचन पदाधिकारी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर जिले के सभी वरीय पदाधिकारियों, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (ERO) और सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (AERO) ने अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बैठकों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए बीएलओ को गणना प्रपत्रों का शत-प्रतिशत सत्यापन, त्रुटिरहित संधारण और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान बैठक के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत एवं डुप्लीकेट (ASDD) श्रेणी के मतदाताओं के सत्यापन पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बीएलओ और बीएलए-2 के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के सहयोग से मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा उपायुक्त रामनिवास यादव ने अधिकारियों को नियमित रूप से मतदान केंद्रों का निरीक्षण करने और पूरे अभियान की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए शुद्ध मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि SIR-2026 के तहत सभी प्रखंडों में अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ संचालित किया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. बीएन झा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है। सोमवार सुबह उनका शव पचंबा थाना क्षेत्र के लखारी स्थित एक कुएं से बरामद किया गया। सुबह स्थानीय लोगों की नजर कुएं में शव पर पड़ी, जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पचंबा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। रिटायरमेंट के बाद भी कर रहे थे लोगों का इलाज भाजपा नेता विनय सिंह ने बताया कि डॉ. बीएन झा गिरिडीह सदर अस्पताल में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट (डीएस) के पद पर कार्यरत रह चुके थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे निजी स्तर पर मरीजों का इलाज कर रहे थे और जिले के बेहद सम्मानित चिकित्सकों में गिने जाते थे। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से डॉ. झा की तबीयत ठीक नहीं रहती थी, लेकिन इसके बावजूद वे नियमित रूप से मॉर्निंग वॉक पर निकलते थे। सोमवार सुबह भी वे रोज की तरह घर से निकले थे, लेकिन बाद में उनका शव कुएं में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। सभी ने डॉ. झा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। पुलिस हर पहलू से कर रही जांच पचंबा थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में मृतक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी मौत कुएं में गिरने से हुई हो सकती है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस ने पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। डॉ. बीएन झा के निधन से गिरिडीह के चिकित्सा जगत और स्थानीय समाज को गहरा आघात पहुंचा है। उनके परिवार, सहयोगियों और मरीजों में शोक का माहौल है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के धनवार थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में अनैतिक गतिविधियों की सूचना पर पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त छापेमारी कर चार लोगों को हिरासत में लिया है। कार्रवाई के दौरान होटल के एक कमरे से दो पुरुष और दो महिलाएं संदिग्ध परिस्थितियों में मिलीं। वहीं होटल का संचालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। होटल के मैनेजर को भी पूछताछ के लिए थाना लाया गया है। गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई पुलिस के अनुसार, धनवार के बड़ा चौक स्थित होटल डिस्कवरी में लंबे समय से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायत मिल रही थी। इस सूचना के आधार पर गिरिडीह पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर खोरीमहुआ के एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने मंगलवार रात होटल में छापा मारकर विभिन्न कमरों की तलाशी ली। पहचान पत्र नहीं दिखा सके लोग तलाशी के दौरान एक कमरे में दो पुरुष और दो महिलाएं आपत्तिजनक स्थिति में मिलीं। पूछताछ के दौरान वे तत्काल कोई वैध पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद सभी चारों को हिरासत में लेकर धनवार थाना लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। होटल के मैनेजर प्रदीप साहू से भी मामले में जानकारी ली जा रही है। होटल सील, संचालक की तलाश जारी छापेमारी के दौरान होटल संचालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। जांच के दौरान होटल का रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज भी जब्त कर उनकी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि होटल में कब से और किस स्तर पर गतिविधियां संचालित हो रही थीं। जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होटल को सील कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही होटल से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है।
गिरिडीह। गिरिडीह के सब-रजिस्ट्रार बालेश्वर पटेल की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार महिलाओं सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता भी शामिल बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी। जमीन विवाद बना हत्या की वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बालेश्वर पटेल की हत्या के पीछे जमीन विवाद मुख्य कारण था। जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह वह मांडू थाना क्षेत्र के बालसेग्रा गांव स्थित अपनी विवादित जमीन पर पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों से उनकी कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि हमलावरों ने पत्थरों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हूल दिवस की छुट्टी पर गांव आए थे बालेश्वर पटेल हूल दिवस की छुट्टी के अवसर पर अपने गांव आए हुए थे। छुट्टी के दौरान वह अपनी जमीन की स्थिति देखने पहुंचे थे। इसी दौरान उन पर हमला कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने के साथ जांच शुरू कर दी। आज होगा पूरे मामले का खुलासा पुलिस की विशेष टीम ने लगातार छापेमारी कर इस मामले में शामिल सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार लोगों में चार महिलाएं भी शामिल हैं। रामगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मुकेश लूनायत बुधवार को प्रेस वार्ता कर पूरे हत्याकांड का खुलासा करेंगे। पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा का माहौल है और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
गिरिडीह। गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र में एक 60 वर्षीय वृद्ध की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान वासुदेव मंडल के रूप में हुई है, जो ससारखो पंचायत के बसगोहरा गांव के निवासी थे। उनका शव मंगलवार सुबह बड़कीबेरगी पंचायत के जन्मबेडा गांव में सड़क किनारे मिला, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। ट्रैक्टर संचालन का काम करते थे वासुदेव परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, वासुदेव मंडल ट्रैक्टर चलवाने का काम करते थे। उनकी रोजाना की दिनचर्या के अनुसार वे सुबह करीब तीन बजे घर से निकलकर ट्रैक्टर चालक को लेने जाते थे। मंगलवार को भी वे बाइक से घर से निकले थे, लेकिन कुछ घंटों बाद उनके शव मिलने की सूचना पर परिवार और ग्रामीण स्तब्ध रह गए। बेरहमी से की गई हत्या मृतक के परिजनों का आरोप है कि उनकी हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई है। शव पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि डंडे या किसी भारी वस्तु से उनकी पिटाई की गई। परिजनों ने यह भी दावा किया कि मृतक के निजी अंगों पर भी चोट के निशान मिले हैं, जिससे हत्या की बर्बरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जमीन विवाद को लेकर उठे सवाल परिवार के लोगों का कहना है कि हत्या के पीछे जमीन विवाद कारण हो सकता है। हालांकि पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। परिजनों ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलने के बाद गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डुमरी के एसडीपीओ आबिद खान और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि परिजनों से रंजिश और अन्य संभावित कारणों के बारे में जानकारी ली जा रही है तथा जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
गिरिडीह। गिरिडीह जिले में अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर एसपी डॉ. विमल कुमार ने सख्ती दिखाई है। समीक्षा बैठक में कार्यों की प्रगति संतोषजनक नहीं मिलने पर तीन थाना प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया गया है। जानकारी के अनुसार, जिला स्तर पर आयोजित समीक्षा बैठक में लंबित कांडों, अनुसंधान की स्थिति और अपराध नियंत्रण की समीक्षा की गई। इस दौरान कुछ थानों में मामलों के निष्पादन और अनुसंधान कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर एसपी ने जमुआ थाना प्रभारी विभूति देव, सरिया थाना प्रभारी पिक्कू कुमार और तीसरी थाना प्रभारी शम्भूनाथ ईश्वर से जवाब तलब किया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई SP ने निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश देते हुए चेतावनी दी है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने, अपराध नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने और अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार लाने का निर्देश दिया। SP की इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इसे जिले में पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र स्थित दलान चलकरी गांव में हुए चर्चित दंपती हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया है कि इस दोहरे हत्याकांड के पीछे अंधविश्वास, जादू-टोना की आशंका और पुराना जमीन विवाद मुख्य कारण थे। पुलिस ने मामले में मृतक के ही रिश्तेदारों समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और खून से सने कपड़े भी बरामद किए हैं। विशेष टीम ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों से सुलझाई गुत्थी गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि 2-3 मार्च की रात दलान चलकरी के तिरिलटांड़ टोला में पतिया हांसदा और उनकी पत्नी परनी देवी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए डुमरी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी आबिद खान के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया। गोतिया पक्ष के लोगों ने रची थी साजिश जांच में पता चला कि मृतक परिवार और गोतिया पक्ष के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसके साथ ही जादू-टोना को लेकर भी आपसी तनाव था। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से दंपती की हत्या की साजिश रची। पुलिस के अनुसार रमेश हांसदा, विजय हांसदा और पांडु हांसदा ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या की, जबकि दोधमा हांसदा, बबलू हांसदा, मोती हांसदा और सिकरा हांसदा ने वारदात को अंजाम देने में सहयोग किया। हथियार और खून से सने कपड़े बरामद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त एक लोहे की तलवार, दो लोहे के छुरे, खून के धब्बों वाले कपड़े और गमछे बरामद किए हैं। बरामद सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। सभी सात आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच जारी है, ताकि अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के चिकसोरिया गांव की है, जहां पुलिस की छापेमारी के दौरान ग्रामीणों और आरोपित के परिजनों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। इस हमले में पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गुप्त सूचना पर पहुंची थी साइबर पुलिस जानकारी के अनुसार, चामलिटी गांव निवासी साइबर अपराधी चुरामण मंडल अपने ससुराल चिकसोरिया गांव में छिपकर रह रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद गिरिडीह साइबर थाना की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी। पुलिस ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, चुरामण मंडल को इसकी भनक लग गई। भीड़ ने किया विरोध, आरोपी भाग निकला पुलिस के पहुंचते ही आरोपी और उसके सहयोगियों ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया। हमले के दौरान पुलिस वाहन का शीशा टूट गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी मौके का फायदा उठाकर चुरामण मंडल अपने साथियों के साथ फरार हो गया। कई लोगों पर दर्ज हुआ मामला अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान ने बताया कि साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही थी, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते हुए हमला कर दिया। इस मामले में 5 से 7 नामजद और 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और अपराधी को भगाने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार साइबर अपराधी चुरामण मंडल और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
गिरिडीह। गिरिडीह के रजिस्ट्रार ऑफिस में जमीन विवाद को लेकर खूब लात-घूंसे चले। पूरा ऑफिस परिसर रणक्षत्र में तब्दील हो गया। जमीन की खरीद-बिक्री और मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट और धक्का-मुक्की में बदल गया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करते और हंगामा करते नजर आ रहे हैं। विवाद ने लिया हिंसक रूप जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। जब दोनों पक्ष रजिस्ट्रेशन कार्यालय पहुंचे, तो कहासुनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के लोग आपस में भिड़ गए और जमकर मारपीट होने लगी। घटना के दौरान कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मारपीट और हंगामे के बीच मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया। काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। घटना के कारण कुछ समय के लिए कार्यालय का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा और वहां मौजूद लोग दहशत में इधर-उधर भागते नजर आए।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी ही तीन मासूम बेटियों की बेरहमी से धारदार हथियार से हत्या कर दी। घटना मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के तुरुकडीहा गांव की है, जहां सोमवार सुबह इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पूरे इलाके में सनसनी जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता नंदू यादव ने धारदार हथियार से अपनी तीनों बेटियों पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। हत्या के कारणों का खुलासा बाकी मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ जीतबाहन उरांव और मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता नंदू यादव को गिरफ्तार कर लिया है। एसडीपीओ जीतबाहन उरांव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। हत्या के पीछे के कारणों का अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मधुबन थाना क्षेत्र के दलान चलकरी गांव में मंगलवार देर रात घर में सो रहे एक दंपती पर अज्ञात हमलावरों ने हमला कर दिया। इस हमले में पति की मौके पर मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला का इलाज धनबाद के एक अस्पताल में चल रहा है। रात में घर में घुसे हमलावर जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 45 वर्षीय पतिया हांसदा के रूप में हुई है। घटना मंगलवार रात करीब 12:30 बजे की बताई जा रही है। उस समय पतिया हांसदा और उनकी पत्नी परनी मरांडी अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीण मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि रात में घर से रोने और चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि पतिया हांसदा और उनकी पत्नी खून से लथपथ पड़े हुए थे, जबकि घर में मौजूद बच्चे रो रहे थे। इसके बाद तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। अस्पताल में पति को मृत घोषित किया गया सूचना मिलते ही डुमरी एसडीपीओ आबिद खान और मधुबन थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। दोनों घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने पतिया हांसदा को मृत घोषित कर दिया। वहीं उनकी पत्नी की गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर किया गया। हत्या के कारणों की जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मृतक के परिजनों का कहना है कि पतिया हांसदा मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे और उनकी किसी से दुश्मनी की जानकारी नहीं है। डुमरी एसडीपीओ आबिद खान ने बताया कि हत्या के पीछे के कारणों और हमलावरों की पहचान का पता लगाया जा रहा है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही मामले का खुलासा करने का दावा कर रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह सदर अस्पताल से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जहां 14 वर्षीय एक नाबालिग छात्रा ने अस्पताल के शौचालय में बच्चे को जन्म दिया। हर कोई इस घटना के बाद स्तब्ध है। लेकिन, मामला तब और तूल पकड़ा गया जब ये पता चला कि नाबालिग बच्ची को इस हाल लाने वाला और कोई नहीं उसका नाना है। बच्चे के जन्म होने के बाद प्रसूता नाबालिग के होश में आने के बाद परिजनों ने उससे पूछताछ की तब कई और चौकाने वाले खुलासे हुए। छात्रा ने बताया कि स्कूल से घर लौटने के दौरान रास्ते में उसके ही एक रिश्ते में लगने वाले नाना ने उसके साथ तीन बार दुष्कर्म किया था। आरोपी उसे लगातार धमकी देता था कि यदि उसने इस बारे में किसी को भी बताया, तो वह उसे जान से मार देगा। इसी डर और लोक-लाज के कारण पीड़िता महीनों तक खामोश रही। परिजनों के मुताबिक, आरोपी रिश्ते में गोतिया पक्ष से नाबालिग का नाना लगता है। वह शादीशुदा है और उसका एक बच्चा भी है। अब यहां एक नहीं कई सवाल खड़े होते है कि बच्ची प्रेग्नेंट है और किसी को भनक भी नहीं लगी। कैसे उसके माता- पिता को भी पता नही चला? ये बात किसी को हजम नहीं हो रही। क्योंकि, कोई भी बच्ची या औरत जब भी प्रेग्नेंट होती तब शरीर में काफी सारे बदलाव आते है। शरीर का अकार बदलता है, तो जाहिर सी बात है कि इस बच्ची के शरीर में भी काफी सारे बदलाव हुए होंगे और परिजनों को पता नहीं चला, ये तो हैरान करने वाली बात है। परिजनों का कहना है कि ढीले कपड़ों के कारण उन्हें उसके गर्भवती होने की भनक हीं लगी। जबिक बच्ची ने गुरुवार को ही माता-पिता को बताया कि उसके कमर में दर्द है, तो उसे अस्पताल ले जाया गया। क्या ये बात बच्ची को भी पता नहीं थी या वो सब कुछ छुपा रही थी? बता दें कि 14 वर्षीय छात्रा बेंगाबाद थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह नौवीं कक्षा की छात्रा है। परिजनों के अनुसार, शुक्रवार को स्कूल में गर्मी की छुट्टी होने के बाद छात्रा घर लौटी थी। घर पहुंचने के कुछ समय बाद उसने तेज कमर दर्द की शिकायत की। परिजनों ने तेज कमर दर्द को समान्य शारीरिक समस्या समझा, लेकिन ज़्यादा दर्द बढ़ने की शिकायत पर छात्रा को इलाज के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल ले गए। इसी दौरान वह शौचालय गई, जहां उसने एक नवजात को जन्म दे दिया। बताया जाता है कि नवजात को जन्म देने के बाद नाबालिग रक्तस्राव की गंभीर स्थिति में ही शौचालय से बाहर निकलकर जाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की नजर उस पर पड़ गई। नाबालिग की हालत देख कर्मियों ने तुरंत उसे रोका। इसके बाद उससे पूछताछ की, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। नवजात बच्चा शौचालय के पेन में फंसा हुआ था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों, अस्पताल कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए शौचालय से नवजात को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार शुरू किया। समय पर इलाज मिलने के कारण मां और बच्चे दोनों की जान बचाई गयी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सदर अस्पताल पहुंची। मामले की जांच शुरू की। चिकित्सकों की सलाह पर नाबालिग और नवजात को चैताडीह स्थित मातृत्व एवं शिशु अस्पताल रेफर किया गया, जहां नवजात को एसएनसीयू में भर्ती कर विशेष निगरानी में रखा गया है।बेंगाबाद थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी संतोष राम को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूरे मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर नाबालिगों की सुरक्षा, जागरूकता और पारिवारिक संवाद की जरूरत को सामने लाती है। पुलिस और प्रशासन अब पीड़िता को न्याय दिलाने और आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं।
गिरिडीह। गिरिडीह के सदर अस्पताल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां शुक्रवार की शाम 14 साल नाबालिग छात्रा ने अस्पताल के शौचालय में बच्चे को जन्म दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। नौवीं कक्षा की छात्रा है जानकारी के अनुसार जिस छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया वह बेंगाबाद थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह नौवीं कक्षा की छात्रा है। फिलहाल नवजात और प्रसूता दोनों को बेहतर इलाज के लिए चैताडीह स्थित मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां दोनों की स्थिति पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है। कमर दर्द की शिकायत पर अस्पताल पहुंची थी छात्रा परिजनों के मुताबिक, शुक्रवार को स्कूल में गर्मी की छुट्टी होने के बाद छात्रा घर लौटी थी। घर पहुंचने के कुछ समय बाद उसने कमर दर्द की शिकायत की। परिजनों ने इसे सामान्य शारीरिक समस्या समझते हुए उसे इलाज के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल ले गए। अस्पताल में भर्ती होने के बाद देर शाम वह शौचालय गई, जहां उसने एक नवजात को जन्म दे दिया। इस घटना से परिजन और अस्पताल कर्मी दोनों ही अचंभित रह गए। रक्तस्राव की हालत में बाहर निकली बताया जाता है कि नवजात को जन्म देने के बाद नाबालिग रक्तस्राव की गंभीर स्थिति में ही शौचालय से बाहर निकलकर जाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की नजर उस पर पड़ी। स्थिति को भांपते हुए कर्मियों ने तत्काल उसे रोका। इसके बाद उससे पूछताछ की, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए शौचालय से नवजात को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार शुरू किया। समय पर हस्तक्षेप के कारण मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकी। मातृत्व एवं शिशु अस्पताल भेजा गया चिकित्सकों की सलाह पर नाबालिग और नवजात को एंबुलेंस के माध्यम से चैताडीह स्थित मातृत्व एवं शिशु अस्पताल भेजा गया है। एसएनसीयू में भर्ती नवजात, जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सदर अस्पताल पहुंची। मामले की जांच शुरू कर दी। वहां नवजात को एसएनसीयू में भर्ती किया गया है। जबकि नाबालिग का भी यहीं इलाज जारी है। अस्पताल प्रबंधन ने घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
गिरिडीह। बिहार और झारखंड को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित नवादा-गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। रेलवे मंत्रालय ने बिहार के जिन 29 नई रेलवे लाईन के सर्वे को लेकर मंजूरी दी है। उसमें इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भी शामिल किया गया है। रेलवे लाइन के एलाइनमेंट तथा प्रारंभिक इंजीनियरिंग-सह-यातायात सर्वेक्षण को मंजूरी मिली है। इस निर्णय को गिरिडीह जिले के लिए विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस रास्ते से गुजरेगी नई लाइन प्रस्तावित रेल मार्ग बिहार के नवादा से शुरू होकर झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां होते हुए गिरिडीह जिले के गावां और तिसरी प्रखंड से गुजरते हुए जिला मुख्यालय गिरिडीह तक पहुंचेगा। इस परियोजना के भविष्य में पारसनाथ क्षेत्र से जुड़ने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे धार्मिक पर्यटन और अधिक मजबूत होगा। करीब 130 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल लाइन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य के लिए 2.67 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर आगे बजट में और वृद्धि की जाएगी। सर्वे के बाद तैयार होगा डीपीआर सर्वेक्षण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी द्वारा विस्तृत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसे रेलवे मंडल को सौंपा जाएगा। लाइन बनने से गिरिडीह से गया का होगा सीधा कनेक्ट सर्वे के बाद यदि रेलवे की ओर से इस रेल लाइन के बिछाने का कार्य शुरू किया जाता है, तो गिरिडीह जिला मुख्यालय से लेकर जिले के ग्रामीण इलाकों के लोगों का सीधा संपर्क गया से हो जाएगा। अभी तक जिले के लोगों को दिल्ली, मुंबई आदि स्थानों के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए कोडरमा जाना पड़ता है, लेकिन यह प्रस्तावित रेल लाइन एक बेहतर विकल्प के रूप में विकसित होगी। इससे खासकर गावां, तिसरी और देवरी इलाके के लोगों को गया तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। एक तरह से ग्रामीण इलाकों के लोगों के साथ-साथ गिरिडीह शहर के लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। लाइन से ग्रामीण इलाकों का होगा विकास प्रस्तावित नवादा–गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना के निर्माण के बाद गिरिडीह जिले के ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस रेल लाइन से जिले के गावां, तिसरी और देवरी जैसे दूरस्थ प्रखंड पहली बार सीधे रेल संपर्क से जुड़ जाएंगे, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार होगा। नई लाइफ लाइन मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा काफी आसान हो जाएगी।
गिरिडीह। गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड अंतर्गत मोतिलेदा पंचायत के लखठाही गांव में सोमवार को प्रेम प्रसंग को लेकर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। गांव का एक युवक अपनी प्रेमिका से शादी कराने की मांग को लेकर 150 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक के टावर पर चढ़ने की खबर फैलते ही गांव में अफरातफरी मच गई और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद बेंगाबाद थाना पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास में जुट गई। सुबह 4 बजे से शुरू हुआ ड्रामा दरअसल, लखठाही गांव निवासी 25 वर्षीय संजय रजक सोमवार सुबह करीब चार बजे गांव स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गया। बताया जा रहा है कि युवक नगर थाना क्षेत्र के चूड़ी मोहल्ला की रहने वाली एक युवती से प्रेम करता है। कुछ दिन पहले युवती अपने प्रेमी के घर भी पहुंची थी। दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पहले युवती अपने प्रेमी के घर भी पहुंची थी, जिसके बाद दोनों परिवारों के बीच शादी को लेकर बातचीत शुरू हुई थी। बताया जाता है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने की बात भी सामने आई थी। इसी बीच किसी बात को लेकर मामला बिगड़ गया और युवती पक्ष की ओर से थाना में युवक और उसके परिजन पर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई। कहा जा रहा है कि इस घटना से युवक काफी आहत हो गया। प्रेमिका और उसके परिजनों को बुलाने की मांग इसके बाद सोमवार सुबह वह सीधे गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गया और वहीं से अपनी मांग रखने लगा। युवक का कहना है कि जब तक उसकी प्रेमिका और उसके परिजनों को मौके पर नहीं बुलाया जाएगा, तब तक वह नीचे नहीं उतरेगा। ग्रामीणों ने देर तक युवक को समझाने की कोशिश की घटना की सूचना मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। काफी संख्या में ग्रामीण टावर के नीचे जमा होकर युवक को समझाने का प्रयास करते रहे। वहीं, पुलिसकर्मी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी युवक को समझाकर सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश में लगे रहे। पुलिस लगातार युवक से बातचीत कर रही है, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
गिरिडीह। गिरिडीह के DAV Public School CCL गिरिडीह के छात्र Avi Goyal ने सीबीएसई 12वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कॉमर्स स्ट्रीम में राज्य टॉप किया है। अवि ने 99.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय और पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन से स्कूल और परिवार में खुशी का माहौल है। अवि गोयल ने अकाउंटेंसी, अर्थशास्त्र और चित्रकला में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। वहीं बिजनेस स्टडीज में 99, अंग्रेजी में 98 और एप्लाइड मैथ्स में 97 अंक प्राप्त किए। स्कूल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कॉमर्स स्ट्रीम में कुल 10 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। साइंस स्ट्रीम में भी छात्रों का शानदार प्रदर्शन स्कूल के साइंस स्ट्रीम में भी छात्रों ने बेहतरीन सफलता हासिल की। Swati Bhadani और Adnan Alam ने 92.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया। साइंस स्ट्रीम में भी 10 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। मेहनत और शिक्षकों के सहयोग का मिला फल अवि गोयल ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों, विद्यालय के शैक्षणिक माहौल और परिवार के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल का वातावरण हमेशा पढ़ाई और सीखने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षकों का व्यवहार बेहद सहयोगात्मक और दोस्ताना है, जिससे छात्र बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर पाते हैं। पिता बोले- यह दोहरी खुशी का पल अवि के पिता Omprakash Goyal इसी विद्यालय के प्राचार्य हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए दोहरी खुशी लेकर आई है। स्कूल प्रबंधन ने मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति देने की भी घोषणा की है। वहीं सीसीएल के जीएम Girish Kumar Rathore ने विद्यालय और छात्रों को बधाई दी है।
गिरिडीह। गिरिडीह में हाल ही में हुए गोलगप्पा कांड ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना में गोलगप्पा खाने के बाद 49 लोग बीमार पड़ गए, जबकि एक बच्चे की मौत हो गई। इस मामले ने न सिर्फ ठेला-खोमचा विक्रेताओं की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली भी जांच के घेरे में आ गई है। लापरवाही से बिगड़ी हालत, जांच जारी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विक्रेता की लापरवाही इस घटना का मुख्य कारण हो सकती है। स्थानीय विक्रेताओं का कहना है कि गोलगप्पे का पानी सबसे संवेदनशील होता है और यदि उसे समय पर नहीं बदला जाए तो वह खराब हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। आशंका जताई जा रही है कि पुराने या दूषित पानी के उपयोग से ही यह घटना हुई। 800 से ज्यादा विक्रेता, कई बिना रजिस्ट्रेशन जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, गिरिडीह में लगभग 800 चाट और गोलगप्पा विक्रेता सक्रिय हैं, जिनमें से कई बिना पंजीकरण के काम कर रहे हैं। अब विभाग ने ऐसे सभी विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से हानिकारक रंग भी बरामद किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। घटना के बाद बिक्री पर असर इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर चाट और गोलगप्पे की बिक्री पर भी असर पड़ा है। ग्राहक अब सतर्क हो गए हैं और साफ-सफाई को लेकर ज्यादा जागरूक नजर आ रहे हैं। कई विक्रेताओं ने भी माना कि अब उन्हें स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि ग्राहकों का विश्वास फिर से जीता जा सके। खाद्य सुरक्षा विभाग पर उठे सवाल इस पूरे मामले ने Food Safety Department की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब खुलेआम अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य सामग्री बेची जा रही थी, तो विभाग पहले से कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया। साथ ही, जागरूकता अभियान की कमी को भी इस घटना के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। सावधानी और जागरूकता की जरूरत विशेषज्ञों ने विक्रेताओं को साफ पानी, ताजी सामग्री और स्वच्छ बर्तनों का उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि वे साफ-सुथरे स्थानों से ही खाद्य पदार्थ खरीदें।
गिरिडीह। गिरिडीह जिले में गोलगप्पा खाने के बाद 42 लोगों के बीमार होने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत भी हो गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना सदर प्रखंड के कुम्हरगड़िया और बजटो गांवों की है, जहां शनिवार को गोलगप्पा खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। देर रात गांव पहुंचे डीसी, मरीजों से की मुलाकात घटना की जानकारी मिलते ही जिला उपायुक्त Ramniwas Yadav देर रात गांव पहुंचे। उनके साथ एसडीएम और एसडीपीओ भी मौजूद थे। डीसी ने घर-घर जाकर मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की तथा साथ आए चिकित्सकों को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों को गर्मी में खानपान और स्वच्छता को लेकर सावधानी बरतने की सलाह भी दी। गोलगप्पा विक्रेता पर संदेह, पुलिस पूछताछ जारी जांच में सामने आया कि गोलगप्पा बेचने वाला व्यक्ति पास के पालमो गांव का रहने वाला है और अक्सर यहां आता था। बताया गया कि पहले दौर में गोलगप्पा खाने वालों की तबीयत ठीक रही, लेकिन बाद में खाने वालों की हालत बिगड़ने लगी। पुलिस ने विक्रेता को हिरासत में लेकर उससे मसाले और सामग्री की गुणवत्ता को लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एम्बुलेंस सेवा पर उठे सवाल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 108 एम्बुलेंस सेवा समय पर नहीं पहुंची और एक साथ कई मरीजों को ले जाने से भी इनकार किया गया। इस कारण कई मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाना पड़ा। डीसी ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। मृतक के परिवार को मदद का आश्वासन प्रशासन ने मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने भी गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वहीं, पूरे मामले की जांच जारी है ताकि बीमारी के सही कारण का पता लगाया जा सके।
गिरिडीह। गिरिडीह सदर प्रखंड के बजटो-कुम्हरगढ़िया गांव में फूड पॉइजनिंग का गंभीर मामला सामने आया है। यहां गोलगप्पा और छोला खाने के बाद एक 6 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि डेढ़ दर्जन से अधिक बच्चे और अन्य लोग बीमार पड़ गए। मृतक की पहचान रंजन कुमार के रूप में हुई है। ठेले पर खाये थे गोलगप्पे और छोले जानकारी के अनुसार गांव में एक ठेला विक्रेता गोलगप्पा और छोला बेचने आया था, जिसे बच्चों सहित कई लोगों ने खाया। रात तक सभी सामान्य थे, लेकिन रविवार सुबह अचानक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही डीसी रामनिवास यादव सहित तमाम अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट स्थिति बिगड़ने पर परिजनों ने पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया, लेकिन हालत गंभीर होने पर सभी को सदर अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सकों की टीम द्वारा सभी का इलाज किया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही डीसी रामनिवास यादव, एसडीएम श्रीकांत यशवंत बिस्पुते, सिविल सर्जन बच्चा सिंह और एसडीपीओ जीतवाहन उरांव समेत कई अधिकारी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने तत्काल गांव में मेडिकल टीम और एंबुलेंस भेजी है, ताकि अन्य प्रभावित लोगों को भी अस्पताल पहुंचाया जा सके। अधिकारियों ने स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी सतर्कता के साथ इलाज करने का निर्देश दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद खुलासा, जांच के आदेश डीसी रामनिवास यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चाट-छोला खाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि सभी बीमारों का इलाज जारी है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। वहीं, सिविल सर्जन बच्चा सिंह ने फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है। कहा कि मृतक बच्चे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। ये बच्चे हुए बीमार बीमारों में शिवम कुमार, दिवाकर कुमार, मनिता कुमारी, अनुराधा कुमारी, प्रिंस कुमार, सुजीत कुमार, रानी कुमारी, रिया कुमारी, प्रतीक कुमार, मधु कुमारी, जागृति देवी, रिंकी देवी, बलराम प्रसाद वर्मा और रेखा देवी सहित अन्य शामिल हैं। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। 18 बच्चों व अन्य को लाया गया अस्पताल वहीं एसडीएम श्रीकांत यशवंत विस्पुते ने कहा कि शाम लगभग 7 बजे प्रशासन को सूचना मिली। जिसके बाद प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने समन्वय बनाकर बीमार 18 बच्चों एवं अन्य लोगों को अस्पताल पहुंचाया। जहां सभी का इलाज चल रहा है।
गिरिडीह। गिरिडीह में एक निजी स्कूल से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक प्रिंसिपल पर नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह घटना पिछले करीब छह महीनों से लगातार हो रही थी। छात्रा ने विरोध किया तो उसे स्कूल से निकालने की धमकी दी जाती थी। मार्कशीट लेने के दौरान हुई कथित घटना परिजनों के अनुसार, 22 अप्रैल को छात्रा स्कूल में अपनी मार्कशीट लेने गई थी। आरोप है कि प्रिंसिपल ने उसे अपने कक्ष में बुलाकर अनुचित व्यवहार किया और किसी को न बताने की चेतावनी दी। घटना के बाद छात्रा मानसिक रूप से परेशान हो गई और उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। परिवार की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला जब परिजनों ने छात्रा से पूछताछ की, तब उसने पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजन और स्थानीय लोग छात्रा को लेकर Pachamba Police Station पहुंचे, जहां लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी राजीव कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। स्थानीय लोगों में रोष घटना के सामने आने के बाद इलाके में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाता है और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और सख्त निगरानी हो।
गिरिडीह। झारखंड की राजनीति में उभरते सितारे और डुमरी के चर्चित विधायक जयराम महतो एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गए हैं। गिरिडीह जिले में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक महतो का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने वहां वीडियो बना रहे एक युवक का मोबाइल छीनकर सड़क पर दे मारा। घटना उस वक्त की है जब विधायक पुष्पा कुमारी को न्याय दिलाने के लिए आयोजित एक कैंडल मार्च में शामिल होने पहुंचे थे। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। न्याय की मांग के बीच शुरू हुआ विवाद और आरोप-प्रत्यारोप रविवार की शाम पुष्पा कुमारी को इंसाफ दिलाने के लिए एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया था। इस मार्च में पीड़ित पुष्पा कुमारी की मां रेखा देवी भी शामिल थीं। मार्च के दौरान ही रेखा देवी ने विधायक की पार्टी जेएलकेएम (JLKM) की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रेखा कुमारी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी बेटी की तलाश में मदद करने के बदले पार्टी नेत्री ने उनसे 10,000 रुपये की राशि ली थी। महिला का कहना था कि यह रकम उन्होंने एक स्वयं सहायता समूह से कर्ज लेकर जुटाई थी। जब यह मुद्दा मार्च के दौरान विधायक के सामने उठा, तो वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया। बीच सड़क पर विधायक का 'हाई वोल्टेज ड्रामा' जैसे ही भ्रष्टाचार और पैसे लेने के आरोपों ने तूल पकड़ा, विधायक जयराम महतो आपा खो बैठे। वे वहां मौजूद महिलाओं और ग्रामीणों के साथ बहस करने लगे। इसी गहमागहमी के बीच उनकी नजर पास में खड़े एक युवक पर पड़ी जो अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना को रिकॉर्ड कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आक्रोशित विधायक ने आव देखा न ताव, सीधे युवक के हाथ से फोन छीन लिया और उसे पूरी ताकत से सड़क पर पटक दिया। इस अचानक हुए हमले से वहां मौजूद लोग अवाक रह गए। बताया जा रहा है कि पटकने के कारण युवक का मोबाइल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। पार्टी की साख और जनप्रतिनिधि के आचरण पर उठे सवाल विधायक जयराम महतो अक्सर खुद को युवाओं का हितैषी और आम जनता का सिपाही बताते रहे हैं, लेकिन इस ताजी घटना ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। हंगामे की स्थिति को देखते हुए विधायक और उनके समर्थक तुरंत वहां से अपनी गाड़ियों में सवार होकर रवाना हो गए। हालांकि, उनके जाने के बाद भी स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि एक जन प्रतिनिधि को सार्वजनिक रूप से इस तरह का हिंसक और अशोभनीय व्यवहार शोभा नहीं देता। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, जांच की मांग घटना के कुछ ही घंटों बाद मोबाइल तोड़ने और बहसबाजी के कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गए हैं। इस मामले में अब तक पुलिस के पास किसी लिखित शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्षी दल और आम नागरिक जयराम महतो के इस रवैये की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों और उसके बाद विधायक की इस प्रतिक्रिया ने जेएलकेएम के अंदरूनी अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। फिलहाल क्षेत्र में यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है कि आखिर न्याय दिलाने निकले विधायक खुद विवाद की वजह कैसे बन गए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।