चक्रधरपुर। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल के पोड़ाहाट जंगल में केड़ाबीर के पास मंगलवार की सुबह सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच घंटों मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में अब तक किसी नक्सली के मारे जाने की खबर सामने नहीं आई है। यह घटना सोनुवा थाना अंतर्गत केड़ाबीर इलाके में हुई। नक्सलियों का भारी सामान बरामद सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने जानकारी दी है कि मुठभेड़ स्थल की गहन तलाशी के दौरान नक्सलियों के दैनिक उपयोग की कई सामग्री और जरूरी सामान बरामद किए गए हैं। आईजी ने स्पष्ट किया कि इस मुठभेड़ में फिलहाल किसी भी नक्सली के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है। मिसिर बेसरा के दस्ते की तलाश खुफिया जानकारी के अनुसार, यह मुठभेड़ प्रतिबंधित नक्सली संगठन के मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ हुई है। लंबे समय से पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में मिसिर बेसरा के दस्ते की सक्रियता देखी जा रही थी, जिसे देखते हुए सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस इस दस्ते की तलाश में लगातार अभियान चला रही है।
पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड राज्य गठन के लगभग ढाई दशक बीत जाने के बावजूद पश्चिमी सिंहभूम जिले का मनोहरपुर क्षेत्र औद्योगिक विकास की राह देख रहा है। विश्व स्तरीय लौह अयस्क के भंडार और सारंडा वन के लिए विख्यात होने के बाद भी इस क्षेत्र में आज तक एक भी स्टील प्लांट स्थापित नहीं हो सका है। विडंबना यह है कि यहां की खनिज संपदा से देश-दुनिया के अन्य शहर चमक रहे हैं, लेकिन स्थानीय आदिवासी बहुल आबादी आज भी मूलभूत सुविधाओं और रोजगार के लिए संघर्ष कर रही है। नीतिगत विफलता और दिग्गज कंपनियों का पलायन क्षेत्र में स्टील प्लांट न लग पाने के पीछे सबसे बड़ा कारण राज्य की कमजोर पुनर्वास और भूमि अधिग्रहण नीति को माना जा रहा है। पिछले 25 वर्षों में मित्तल, जिंदल, टाटा स्टील, एस्सार और वीएस डेम्पो जैसी दिग्गज कंपनियों ने मनोहरपुर का दौरा किया और प्लांट के लिए जमीनें भी चिन्हित कीं। वीएस डेम्पो जैसी कंपनियों ने तो रैयतों से लगभग 125 एकड़ भूमि तक खरीद ली थी, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण इन कंपनियों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। औद्योगिक नीति के अभाव में बड़ी कंपनियों का इस क्षेत्र से मोहभंग हो रहा है। राजनेताओं द्वारा समय-समय पर किए गए वादे चुनावी रैलियों तक ही सीमित रह गए, जिसके परिणामस्वरूप मनोहरपुर आज भी एक अदद औद्योगिक इकाई के लिए संघर्ष कर रहा है। रोजगार की कमी और आदिवासियों का भारी पलायन स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध न होने का सबसे गंभीर असर जिले के आदिवासी समाज पर पड़ा है। नोवामुंडी, जगन्नाथपुर और मनोहरपुर प्रखंड के हजारों युवा काम की तलाश में अन्य राज्यों और बड़े शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में एक भी बड़ा स्टील प्लांट स्थापित होता, तो हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता था। वर्तमान में लोग केवल लौह अयस्क की उड़ती धूल फांकने को मजबूर हैं, जबकि विकास के नाम पर यहां केवल सन्नाटा पसरा है। वेदांता का ₹5,000 करोड़ का निवेश और अधूरी आस क्षेत्र की जनता की उम्मीदें अब भी वेदांता समूह से जुड़ी हुई हैं। 'मोमेंटम झारखंड' के दौरान वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने डिम्बुली और नंदपुर इलाके का सर्वे कर 5,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की इच्छा जताई थी। कंपनी ने मनोहरपुर में करीब 110 एकड़ जमीन भी खरीदी है, लेकिन काम अभी तक धरातल पर नहीं उतरा है। लौह अयस्क के भंडार पर बसे मनोहरपुर, नोवामुंडी और जगन्नाथपुर के लोग आज भी बिजली, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। जिले की जनता सीधे तौर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को इस पिछड़ेपन का जिम्मेदार मानती है। जब तक स्थायी विस्थापन और पुनर्वास की ठोस नीति नहीं बनती, तब तक खनिज संपदा से समृद्ध यह जिला उद्योगों की बाट जोहता रहेगा।
चाईबासा। झारखंड के चाईबासा जिले में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बरकुंडिया गांव के तुरामडीह टोला का है, जहां बीती रात एक जंगली हाथी ने हमला कर 56 वर्षीय महिला पुजारी चांदो देवी की जान ले ली। इस हमले में उनके साथ मौजूद एक अन्य पुजारी लखन कुदादा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। झोपड़ी में सो रही थीं चांदो देवी, अचानक टूट पड़ा हाथी जानकारी के अनुसार, तांतनगर प्रखंड के कुम्बराम गांव की रहने वाली चांदो देवी पूजा-पाठ करती थीं। सोमवार रात वह बरकुंडिया गांव की एक मंदिरनुमा झोपड़ी में भोजन करने के बाद सो रही थीं। इसी दौरान जंगल की ओर से आया एक जंगली हाथी अचानक झोपड़ी तक पहुंच गया और उसने चांदो देवी को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया। हमला इतना खतरनाक था कि उनकी हालत मौके पर ही गंभीर हो गई। साथी पुजारी ने भागकर बचाई जान, ग्रामीणों ने मशाल से खदेड़ा घटना के समय वहां मौजूद लखन कुदादा पर भी हाथी ने हमला किया, लेकिन वह किसी तरह भागकर झाड़ियों में छिप गए और अपनी जान बचाई। हाथी के हमले के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने टॉर्च, मशाल और शोर-शराबे की मदद से हाथी को खदेड़ने की कोशिश की, जिसके बाद वह वहां से भागा। अस्पताल पहुंचने से पहले मौत, इलाके में दहशत घटना के बाद ग्रामीणों ने चांदो देवी और घायल पुजारी को सदर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में ही चांदो देवी की मौत हो गई। मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा। विभाग ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। तीन महीने में 25 मौतें, गांवों में डर का माहौल पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथियों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले तीन महीनों में 25 लोगों की मौत हो चुकी है। जंगलों के सिमटने और हाथियों के गांवों की ओर बढ़ने से मानव-हाथी संघर्ष गंभीर होता जा रहा है। इस घटना के बाद आसपास के गांवों में भारी दहशत है और लोग रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
चक्रधरपुर: झारखंड के चक्रधरपुर रेल मंडल में सोमवार को बड़ा रेल हादसा हो गया। मुर्गामहादेव रोड स्टेशन के पास कोयला लदी मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतर गए, जिससे पूरे क्षेत्र में रेल यातायात ठप हो गया। इस घटना के कारण अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। दोनों लाइनें बाधित, कई ट्रेनें प्रभावित हादसे के बाद देवझर-बांसपानी रेलखंड पर परिचालन पूरी तरह बंद हो गया। इसका असर कई यात्री ट्रेनों पर पड़ा। टाटा-गुवा मेमू ट्रेन को रद्द कर दिया गया, जबकि कई ट्रेनों को बीच रास्ते से ही वापस लौटाना पड़ा। खुर्दा रोड-टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस को बांसपानी स्टेशन पर रोक दिया गया, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। बीच रास्ते में फंसी प्रमुख ट्रेनें इस घटना के चलते कई महत्वपूर्ण ट्रेनें बीच सेक्शन में ही अटक गईं। पुरी-बड़बिल इंटरसिटी बीच रास्ते में फंसी रही विशाखापटनम एक्सप्रेस को टाटानगर में ही रोक दिया गया हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी को टाटा में ही शॉर्ट टर्मिनेट करना पड़ा भीषण गर्मी के बीच फंसे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया। चक्रधरपुर से 140 टन की भारी क्रेन और डांगुवापोसी से एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन को मौके पर भेजा गया। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, मालगाड़ी में कोयला लदा होने के कारण बेपटरी डिब्बों को दोबारा ट्रैक पर लाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। राहत और बहाली का काम तेजी से जारी है। कई ट्रेनें रद्द और शॉर्ट टर्मिनेट इस हादसे के कारण कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया: रद्द ट्रेनें: टाटा-गुवा-टाटा मेमू (68003/68004) पुरी-बड़बिल एक्सप्रेस (आंशिक रूप से रद्द) बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस (आंशिक रूप से रद्द) शॉर्ट टर्मिनेट ट्रेनें: हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी टाटा में समाप्त बड़बिल-हावड़ा एक्सप्रेस टाटा से वापस पुरी-टाटा वंदे भारत बांसपानी में समाप्त लंबी दूरी की ट्रेनें बदले रूट से संचालित रेलवे ने कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया: टाटा-विशाखापटनम एक्सप्रेस को चक्रधरपुर-राउरकेला-झारसुगुड़ा मार्ग से भेजा गया आनंद विहार-पुरी एक्सप्रेस को चांडिल-कांड्रा-टाटा-हिजली रूट से चलाया गया व्यस्त रेलखंड पर पड़ा बड़ा असर मुर्गामहादेव रोड स्टेशन देवझर और बांसपानी के बीच स्थित है, जो चक्रधरपुर रेल मंडल का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है। यह इलाका लौह-अयस्क और कोयला परिवहन का प्रमुख रूट है, जहां बड़ी संख्या में मालगाड़ियां चलती हैं। ऐसे में इस हादसे का असर सिर्फ यात्री ट्रेनों पर ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई और रेलवे के राजस्व पर भी पड़ने की संभावना है। यात्रियों को राहत का इंतजार रेलवे की ओर से ट्रैक को जल्द बहाल करने की कोशिश जारी है, लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है। तब तक यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ सकती है।
पूर्वी सिंहभूम। पूर्वी सिंहभूम जिले में सुवर्णरेखा नदी के किनारे 227 किलोग्राम वजन का अमेरिकी बम बरामद होने से इलाके में हड़कंप मच गया। गैस सिलेंडर के आकार के इस बम पर AN-M64 मॉडल अंकित है और इसमें “Made in America” लिखा हुआ है। इसे अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस (UXO) बताया गया है। प्रशासन सक्रिय घटना की जानकारी मिलते ही बहरागोड़ा थाना और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गए। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया है और ग्रामीणों को बम के पास न जाने तथा किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचने की चेतावनी दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा घेरा तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार स्थानीय लोगों का अनुमान है कि यह बम कई दशक पुराना हो सकता है। क्षेत्र के इतिहास में महुलडांगरी के पास एक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना दर्ज है, जिससे संभावना है कि यह बम उसी विमान का हिस्सा हो सकता है। बम को निष्क्रिय करना जोखिम भरा कार्य होने के कारण दो स्तर पर तैयारी की जा रही है। रांची से विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है, साथ ही तकनीकी सलाह के लिए कलाईकुंडा एयरबेस के अधिकारियों को भी सूचित किया गया है।
झारखंड के Noamundi इलाके में LPG गैस सिलेंडर की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच बड़ा जामदा स्थित Rekha Bharat Gas Agency ने स्थिति स्पष्ट की है। एजेंसी ने कहा है कि उनके पास गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक एजेंसी के अनुसार फिलहाल घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के LPG सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। जब तक नियमित आपूर्ति मिलती रहेगी, तब तक क्षेत्र के उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से गैस सिलेंडर जमा करने की कोशिश न करें। रोजाना भेजी जा रही गैस की गाड़ियां एजेंसी की ओर से बताया गया कि उपभोक्ताओं तक समय पर गैस पहुंचाने के लिए रोजाना सिलेंडरों से भरी गाड़ियां विभिन्न क्षेत्रों में भेजी जा रही हैं। गुरुवार को भी तीन गैस गाड़ियां नोवामुंडी, Jaitgarh और डीपीएस क्षेत्र के लिए रवाना की गईं। इन गाड़ियों के जरिए उपभोक्ताओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है। 25 दिन के अंतराल पर हो रही बुकिंग एजेंसी ने बताया कि वर्तमान में गैस सिलेंडर की बुकिंग लगभग 25 दिनों के अंतराल पर की जा रही है। यानी उपभोक्ता पिछले सिलेंडर के करीब 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग करा सकते हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे तय समय पर ही बुकिंग करें। डिलीवरी के समय ओटीपी जरूरी गैस वितरण की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सिलेंडर डिलीवरी के समय ओटीपी (OTP) देना अनिवार्य किया गया है। जब डिलीवरी बॉय उपभोक्ता के घर सिलेंडर पहुंचाता है, तो उपभोक्ता के मोबाइल पर ओटीपी आता है। उसी ओटीपी की पुष्टि के बाद ही सिलेंडर की डिलीवरी की जाती है। गैस सिलेंडर की कीमत बड़ा जामदा क्षेत्र में गैस सिलेंडर की कीमत इस प्रकार है: घरेलू LPG सिलेंडर: 970 रुपये कमर्शियल गैस सिलेंडर: 2044 रुपये 5 किलो का छोटा सिलेंडर: 599 रुपये एजेंसी ने बताया कि 5 किलो का छोटा सिलेंडर उपभोक्ता बिना बुकिंग के भी सीधे एजेंसी से खरीद सकते हैं, लेकिन इसके लिए खाली सिलेंडर साथ लाना होगा। अफवाहों से दूर रहने की अपील एजेंसी ने सभी Bharat Gas उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे पहले गैस बुकिंग कराएं और फिर ही सिलेंडर प्राप्त करें। गैस गाड़ी से जबरदस्ती सिलेंडर लेने की कोशिश न करें। एजेंसी का कहना है कि यदि सभी लोग व्यवस्था का पालन करेंगे, तो हर उपभोक्ता को समय पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति मिलती रहेगी।
झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पश्चिमी सिंहभूम जिले में एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण एक गरीब पिता को अपने नवजात शिशु का शव कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा। यह घटना Chakradharpur Subdivisional Hospital से सामने आई है, जिसने सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। एम्बुलेंस नहीं मिलने पर डिब्बे में ले जाना पड़ा शव जानकारी के अनुसार चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में नवजात की मौत के बाद पिता को शव घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली। मजबूर होकर उसे अपने बच्चे के शव को कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा। यह घटना सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए। सांसद विद्युत वरण महतो ने उठाए सवाल घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद विद्युत वरण महतो ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की असंवेदनशीलता और लापरवाही का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग नजर आती है। दोषियों पर कार्रवाई की मांग सांसद ने कहा कि एक गरीब पिता को अपने नवजात बच्चे के शव को डिब्बे में रखकर घर ले जाने की मजबूरी झेलनी पड़ी, इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और क्या हो सकती है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत निलंबित किया जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को सम्मानजनक आर्थिक सहायता देने की भी बात कही। पहले भी उठ चुके हैं सवाल झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में एक बच्चे के शव को झोले में ले जाने की घटना और HIV पॉजिटिव रक्त चढ़ाने के मामले ने भी स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े किए थे।
पश्चिमी सिंहभूम (झारखंड): रिश्तों की मर्यादा और विश्वास को तार-तार करने वाली एक ह्रदयविदारक घटना हाटगम्हरिया थाना क्षेत्र से सामने आई है। यहाँ एक चचेरे चाचा ने अपनी ही 15 वर्षीय भतीजी के विश्वास का गला घोंटते हुए उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और शोक का माहौल पैदा कर दिया है। विश्वासघात और वारदात की पूरी कहानी घटना की शुरुआत तब हुई जब वह मासूम किशोरी सहज भाव से अपने चचेरे चाचा के घर गई थी। आरोपी ने पहले से ही मन में दुर्भावना पाल रखी थी। उसने किशोरी का मन बहलाने के लिए उसे मोबाइल पर फिल्में और वीडियो दिखाने का लालच दिया। सुनसान जगह का फायदा: कमरे में कुछ देर तक उसे मोबाइल में उलझाए रखने के बाद, आरोपी उसे बहला-फुसलाकर घर से दूर एक एकांत खलिहान में ले गया। हैवानियत: खलिहान की तन्हाई का फायदा उठाकर आरोपी ने अपनी चचेरी भतीजी के साथ जबरदस्ती की और उसके सम्मान को पैरों तले रौंद दिया। खौफनाक धमकी: दुष्कर्म के बाद जब किशोरी सहम गई, तो आरोपी ने उसे और उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी ताकि वह अपना मुँह न खोले। साहस और न्याय की पुकार इतनी बड़ी त्रासदी और आरोपी की धमकियों के बावजूद, नाबालिग पीड़िता ने हार नहीं मानी। उसने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने माता-पिता को पूरी सच्चाई बता दी। परिजनों ने बिना देर किए हाटगम्हरिया पुलिस से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (SP) अमित रेनू ने तुरंत एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया। पुलिस की सक्रियता का परिणाम यह रहा कि: छापेमारी: पुलिस ने संभावित ठिकानों पर दबिश दी और आरोपी को भागने का मौका नहीं दिया। जेल: आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मेडिकल जांच: कानून के प्रावधानों के तहत पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। बयान: जल्द ही अदालत में पीड़िता का धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया जाएगा।
रोजगार के नाम पर बाहर ले जाने का आरोप झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र से चार आदिवासी बच्चियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर तमिलनाडु ले जाने और वहां बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चियों को बेहतर रोजगार का लालच देकर बाहर ले जाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें वापस घर लौटने नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने विधायक से की हस्तक्षेप की मांग मामले की जानकारी मिलते ही गांव के लोगों ने जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सोनाराम सिंकु से संपर्क कर पूरी घटना से अवगत कराया। ग्रामीणों ने विधायक से अपील की कि वे तुरंत हस्तक्षेप कर बच्चियों को सुरक्षित उनके घर वापस लाने की व्यवस्था करवाएं। ग्रामीणों का कहना है कि तमिलनाडु में रखी गईं बच्चियां बीमार भी हैं और उन्हें पेट दर्द की शिकायत हो रही है। बंधक जैसी स्थिति में रहने के कारण वे काफी डरी और मानसिक रूप से परेशान बताई जा रही हैं। भोले-भाले परिवारों को बनाया जा रहा निशाना स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ दलाल और एजेंट भोले-भाले आदिवासी परिवारों को बहला-फुसलाकर बाहर नौकरी दिलाने का झांसा देते हैं। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाकर मुश्किल परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। विधायक ने प्रशासन को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश घटना की गंभीरता को देखते हुए विधायक सोनाराम सिंकु ने तुरंत क्षेत्र के डीएसपी को इसकी जानकारी दी और मामले की त्वरित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि बच्चियों को जल्द से जल्द सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जाए और इस घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। विधायक ने कहा कि क्षेत्र की बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है और इस तरह की घटनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय नेताओं ने भी जताई चिंता इस दौरान मौके पर कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष ललित कुमार दोराईबुरु, युवा कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष मामूर अंसारी, प्रखंड उपाध्यक्ष सूरज चंपिया, प्रखंड महासचिव प्रदीप प्रधान, रोशन पान, दानिश हुसैन समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई करने और बच्चियों को सुरक्षित वापस लाने की मांग की है।
पश्चिमी सिंहभूम: जगन्नाथपुर साप्ताहिक हाट क्षेत्र में भटकते हुए मिले एक छोटे बच्चे को प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) की तत्परता से सुरक्षित उसके परिजनों से मिला दिया गया। “प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा” के तहत चलाए गए इस अभियान में पारा लीगल वालंटियर और पुलिस की सक्रिय भूमिका रही, जिसकी बदौलत बच्चे की पहचान कर उसे सुरक्षित उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। हाट में अकेला घूमता मिला बच्चा जानकारी के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर साप्ताहिक हाट क्षेत्र में एक छोटा बच्चा अकेले भटकता हुआ मिला। बच्चा अपने माता-पिता या गांव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था, जिससे शुरुआत में उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया। स्थानीय लोगों ने जब बच्चे को अकेले घूमते देखा तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस और संबंधित अधिकारियों को दी। डीएलएसए चाईबासा ने की त्वरित कार्रवाई सूचना मिलने के बाद पश्चिमी सिंहभूम जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) चाईबासा ने तुरंत कार्रवाई की। माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर अहमद के मार्गदर्शन और सचिव रवि चौधरी के नेतृत्व में बच्चे को सुरक्षित रूप से जगन्नाथपुर थाना लाया गया। इसके बाद उसके परिजनों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। बच्चे का कराया गया स्वास्थ्य परीक्षण बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसका प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है। साथ ही मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को भी दी गई, ताकि आवश्यक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा सके। सोशल मीडिया और मीडिया से मिली मदद बच्चे के परिजनों तक सूचना पहुंचाने के लिए प्रशासन ने स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा लिया। बच्चे की जानकारी विभिन्न माध्यमों से प्रसारित की गई, जिससे कम समय में यह सूचना व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच गई। पारा लीगल वालंटियर की अहम भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पारा लीगल वालंटियर उमर सादिक ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर बच्चे की जानकारी को व्यापक स्तर पर साझा कराया, जिससे परिजनों तक सूचना पहुंचाना संभव हो सका। सूचना मिलते ही थाने पहुंचे परिजन सूचना मिलने के बाद बच्चे के परिजन जगन्नाथपुर थाना पहुंच गए। पुलिस ने पहले बच्चे की पहचान की पुष्टि की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को सुरक्षित रूप से उसके पिता के सुपुर्द कर दिया। बच्चे को परिवार से मिलते देख सभी ने राहत की सांस ली। ‘प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा’ के तहत सराहनीय पहल प्रशासन की यह त्वरित और मानवीय पहल “प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा” के तहत एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य भटके या असहाय बच्चों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।