नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक या इंजीनियर बनना देश के लाखों युवाओं का सपना होता है। चंद्रयान, आदित्य-एल1 और गगनयान जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों की सफलता के पीछे इसरो के वैज्ञानिकों की मेहनत है। हालांकि हाल के महीनों में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के इस्तीफा देने की खबरों के बीच इसरो की भर्ती प्रक्रिया, वेतन, कार्य संस्कृति और इस्तीफे के नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिकों ने इसरो छोड़ा है। इनमें यूआर राव सैटेलाइट सेंटर और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के कई अनुभवी वैज्ञानिक शामिल हैं। बढ़ते इस्तीफों को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़े ग्रुप-ए वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) पर अंतिम फैसला केंद्र स्तर पर लिया जाएगा। इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए उम्मीदवार के पास 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) होना जरूरी है। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, सिविल, एयरोस्पेस या फिजिक्स जैसे विषयों में बीई/बीटेक या समकक्ष डिग्री आवश्यक होती है। भर्ती प्रक्रिया इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड के माध्यम से आयोजित की जाती है, जिसमें लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन शामिल होता है। अधिकांश पदों के लिए न्यूनतम 65 प्रतिशत अंक या निर्धारित सीजीपीए जरूरी होता है। वेतन की बात करें वेतन की बात करें तो वैज्ञानिकों को सातवें वेतन आयोग के तहत पे लेवल-10 में 56,100 रुपये बेसिक सैलरी मिलती है। महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता और अन्य सुविधाओं के साथ मासिक वेतन 95 हजार से 1 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है। इसरो में सामान्य कार्य समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक होता है। सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन अवकाश रहता है, हालांकि मिशन की जरूरत के अनुसार अतिरिक्त समय भी देना पड़ सकता है। संस्थान में रिसर्च आधारित कार्य वातावरण, स्वास्थ्य सुविधाएं, आवास और परिवहन जैसी कई कर्मचारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। विज्ञान, तकनीक और अपराध जांच में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए फॉरेंसिक साइंस तेजी से उभरता हुआ करियर विकल्प बन रहा है। साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में 12वीं के बाद इस क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, जैसे Coursera, कई उपयोगी कोर्स उपलब्ध करा रहे हैं। फॉरेंसिक साइंस क्या है ? फॉरेंसिक साइंस वह विज्ञान है, जिसमें अपराधों की जांच के लिए वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग क्राइम सीन की जांच, डीएनए प्रोफाइलिंग, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सटीक प्रमाण उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। इसके अलावा बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए छात्रों को 12वीं विज्ञान संकाय (फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी या मैथ्स) से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके बाद बीएससी इन फॉरेंसिक साइंस या संबंधित विषयों में स्नातक किया जा सकता है। आगे एमएससी, विशेष डिप्लोमा या विशेषज्ञता वाले कोर्स करके बेहतर करियर बनाया जा सकता है। इस क्षेत्र में सफलता के लिए वैज्ञानिक सोच, तार्किक विश्लेषण, धैर्य, सूक्ष्म निरीक्षण क्षमता और आधुनिक तकनीकों की समझ जरूरी मानी जाती है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला कैसे होता है ? अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर प्रवेश कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) के माध्यम से होता है। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) भी अपने कई स्नातक कार्यक्रमों में CUET-UG स्कोर के आधार पर प्रवेश देता है, जबकि कुछ कोर्स के लिए अलग पात्रता और चयन प्रक्रिया लागू हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध और वैज्ञानिक जांच की बढ़ती जरूरत को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस आने वाले वर्षों में रोजगार के सबसे संभावनाशील क्षेत्रों में शामिल होगा। ऐसे में सही कोर्स और प्रशिक्षण के साथ छात्र इस क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की अग्रणी टायर निर्माता कंपनी MRF ने युवाओं के लिए 12 महीने की पेड इंटर्नशिप का अवसर शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत चयनित उम्मीदवारों को उद्योग में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। साथ ही उन्हें हर महीने ₹33,000 तक का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। कौन कर सकता है आवेदन? इस इंटर्नशिप के लिए BA, BCom, BSc, BBA, BE और BTech सहित विभिन्न विषयों के छात्र एवं स्नातक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। 12 महीने तक मिलेगा इंडस्ट्री का अनुभव इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने होगी। इस दौरान चयनित उम्मीदवारों को MRF के विभिन्न विभागों में कार्य करने और उद्योग की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। सफल अभ्यर्थियों को अनुभव प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा। ऑनलाइन होगी आवेदन प्रक्रिया इच्छुक उम्मीदवार MRF की आधिकारिक करियर वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर विशेषज्ञों का मानना है कि यह इंटर्नशिप छात्रों और फ्रेशर्स के लिए इंडस्ट्री का अनुभव हासिल करने का अच्छा अवसर है। स्टाइपेंड के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलने से भविष्य में रोजगार की संभावनाएं भी बेहतर हो सकती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने विभिन्न ट्रेडों में 6,777 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के लिए 10वीं पास और संबंधित ट्रेड में ITI करने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 20 जुलाई 2026 से शुरू होगी। किन पदों पर होगी भर्ती यह भर्ती नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के विभिन्न डिवीजनों और वर्कशॉप्स में अप्रेंटिस पदों के लिए की जाएगी। उम्मीदवार अपनी योग्यता और पसंद के अनुसार संबंधित यूनिट के लिए आवेदन कर सकेंगे। योग्यता और आयु सीमा आवेदन करने वाले उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही संबंधित ट्रेड में NCVT/SCVT से मान्यता प्राप्त ITI सर्टिफिकेट होना भी जरूरी है। आयु सीमा और आरक्षण से जुड़ी छूट का लाभ नियमानुसार दिया जाएगा। बिना परीक्षा होगा चयन इस भर्ती की खास बात यह है कि उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा नहीं देनी होगी। चयन 10वीं और ITI में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार मेरिट लिस्ट से किया जाएगा। दस्तावेज सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं के बाद अंतिम चयन होगा। 20 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन इच्छुक उम्मीदवार 20 जुलाई 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन से पहले अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन में पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, आवेदन शुल्क और महत्वपूर्ण तिथियों की पूरी जानकारी ध्यान से पढ़ लें। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा अवसर रेलवे की यह भर्ती तकनीकी ट्रेडों में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार का बेहतरीन अवसर मानी जा रही है। बिना लिखित परीक्षा मेरिट के आधार पर चयन होने से योग्य अभ्यर्थियों के लिए चयन की संभावना भी बढ़ गई है।
RRB Section Controller Recruitment 2026: रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने सेक्शन कंट्रोलर के 119 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के लिए 15 जुलाई 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इस भर्ती की खास बात यह है कि उम्मीदवारों का चयन मुख्य रूप से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के आधार पर किया जाएगा। हालांकि, अंतिम चयन से पहले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण भी अनिवार्य होगा। महत्वपूर्ण तिथियां ऑनलाइन आवेदन शुरू: 15 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 14 अगस्त 2026 (रात 11:59 बजे तक) आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 14 अगस्त 2026 एप्लिकेशन करेक्शन विंडो: बाद में घोषित होगी CBT परीक्षा की तिथि: बाद में घोषित होगी एडमिट कार्ड: परीक्षा से पहले जारी किए जाएंगे कुल रिक्तियां रेलवे भर्ती बोर्ड ने इस भर्ती अभियान के तहत 119 पदों पर नियुक्तियां निकाली हैं। श्रेणीवार पदों का विवरण श्रेणी पद सामान्य (UR) 50 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) 29 अनुसूचित जाति (SC) 19 अनुसूचित जनजाति (ST) 12 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) 9 कुल 119 शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री होना अनिवार्य है। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 20 वर्ष अधिकतम आयु: 33 वर्ष आरक्षण के अनुसार आयु में छूट: SC/ST: 5 वर्ष OBC: 3 वर्ष अन्य आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट मिलेगी। मेडिकल फिटनेस पर विशेष ध्यान इस भर्ती में मेडिकल मानकों का विशेष महत्व है। रेलवे के निर्धारित मेडिकल मानदंडों के अनुसार: कमजोर दृष्टि वाले उम्मीदवार पात्र नहीं होंगे। जिन उम्मीदवारों ने LASIK या अन्य प्रकार की आंखों की सर्जरी कराई है, वे इस भर्ती के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। अंतिम पात्रता का निर्धारण रेलवे के मेडिकल परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। आवेदन कैसे करें? रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Section Controller Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें। नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें। आवेदन पत्र में सभी आवश्यक जानकारी भरें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन निम्न चरणों के आधार पर किया जाएगा: कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जामिनेशन आवेदन शुल्क सामान्य / OBC / EWS आवेदन शुल्क: ₹500 CBT परीक्षा में शामिल होने पर ₹400 (बैंक शुल्क काटकर) वापस किए जाएंगे। SC / ST / PwBD / पूर्व सैनिक / महिला / ट्रांसजेंडर / अल्पसंख्यक / EBC आवेदन शुल्क: ₹250 भर्ती का संक्षिप्त विवरण भर्ती संस्था: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) पद: सेक्शन कंट्रोलर कुल पद: 119 आवेदन शुरू: 15 जुलाई 2026 अंतिम तिथि: 14 अगस्त 2026 योग्यता: स्नातक आयु सीमा: 20–33 वर्ष चयन प्रक्रिया: CBT, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट रेलवे में कंट्रोलिंग और ऑपरेशन से जुड़े पद पर करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक महत्वपूर्ण अवसर है। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिए गए मेडिकल मानकों, योग्यता और अन्य सभी शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए।
Railway Apprentice Recruitment 2026: रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने वर्ष 2026 के लिए 6777 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के तहत मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग, अकाउंट्स, मेडिकल, पर्सनल सहित कई विभागों में एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप कराई जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 जुलाई 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 19 अगस्त 2026 तक जारी रहेगी। चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के दौरान हर महीने स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 20 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 19 अगस्त 2026 कुल पद कुल रिक्तियां: 6777 यूनिट वाइज वैकेंसी यूनिट पद कटिहार (KIR) एवं तिंधारिया वर्कशॉप 1103 अलीपुरद्वार 651 रंगिया 750 लुमडिंग 1274 टिनसुकिया 860 न्यू बोंगाईगांव वर्कशॉप एवं इंजीनियरिंग वर्कशॉप 881 डिब्रूगढ़ वर्कशॉप 763 मुख्यालय मालीगांव (विभिन्न विभाग) 495 कुल 6777 शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं (मैट्रिक) में न्यूनतम 50% अंक। संबंधित ट्रेड में NCVT/SCVT से ITI सर्टिफिकेट अनिवार्य। मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नीशियन (पैथोलॉजी एवं रेडियोलॉजी) पदों के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ 12वीं भी आवश्यक है। एससी, एसटी और PwBD उम्मीदवारों को 10वीं में न्यूनतम अंकों की शर्त से छूट मिलेगी। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 15 वर्ष अधिकतम आयु: 24 वर्ष आरक्षण के अनुसार आयु में छूट: SC/ST: 5 वर्ष OBC: 3 वर्ष PwBD: 10 वर्ष आवश्यक दस्तावेज 10वीं की मार्कशीट ITI फाइनल मार्कशीट NCVT/SCVT ट्रेड सर्टिफिकेट 12वीं की मार्कशीट (जहां लागू हो) पासिंग सर्टिफिकेट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज स्टाइपेंड चयनित अप्रेंटिस उम्मीदवारों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान कम से कम ₹9,600 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया रेलवे इस भर्ती में कोई लिखित परीक्षा आयोजित नहीं करेगा। चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा। 10वीं और ITI में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर मेरिट तैयार होगी। समान अंक होने पर अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलेगी। लैब टेक्नीशियन पदों के लिए 10वीं एवं 12वीं (PCB) के अंकों के आधार पर मेरिट बनेगी। मेरिट लिस्ट के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट होगा। इसके बाद अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी। आवेदन शुल्क सामान्य/OBC/EWS उम्मीदवार: ₹100 SC/ST/PwBD/EBC एवं महिला उम्मीदवार: कोई आवेदन शुल्क नहीं भर्ती का संक्षिप्त विवरण भर्ती संस्था: नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) पद: अप्रेंटिस कुल पद: 6777 योग्यता: 10वीं + ITI आयु सीमा: 15–24 वर्ष आवेदन प्रारंभ: 20 जुलाई 2026 अंतिम तिथि: 19 अगस्त 2026 प्रशिक्षण अवधि: 1 वर्ष न्यूनतम स्टाइपेंड: ₹9,600 प्रतिमाह यदि आप 10वीं पास हैं और संबंधित ट्रेड में ITI कर चुके हैं, तो रेलवे में अनुभव और भविष्य के करियर के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन शुरू होते ही सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय पर आवेदन करें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। आईडीबीआई बैंक ने स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 14 जुलाई 2026 से 26 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट और निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवार 10 अगस्त 2026 तक अपने आवेदन पत्र का प्रिंटआउट भी डाउनलोड कर सकेंगे। 31 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत कुल 31 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें ऑडिट–इन्फॉर्मेशन सिस्टम (IS) के 10 पद, इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट (IMD) प्रीमाइसेस के 8 पद, लीगल विभाग के 9 पद और सिक्योरिटी ऑफिसर के 4 पद शामिल हैं। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न विशेषज्ञ विभागों में की जाएगी। योग्यता और आयु सीमा भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित पद के अनुसार मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक, विधि स्नातक (LLB), बीई/बीटेक, एमई/एमटेक, एमएससी या अन्य निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। साथ ही संबंधित क्षेत्र में निर्धारित कार्यानुभव भी आवश्यक है। आयु सीमा पद के अनुसार तय की गई है। न्यूनतम आयु 25 या 35 वर्ष तथा अधिकतम आयु 35, 40 या 45 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। ऐसे करें आवेदन उम्मीदवार ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर पहले नया पंजीकरण करें। इसके बाद आवेदन पत्र में आवश्यक जानकारी भरें, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें तथा निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान करें। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹1050 तथा एससी, एसटी और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ₹250 निर्धारित किया गया है। आकर्षक वेतन मिलेगा भर्ती में चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार लगभग ₹1.29 लाख से ₹2.04 लाख प्रति माह तक वेतन मिलेगा। बैंक ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक अधिसूचना पढ़कर पात्रता और अन्य सभी शर्तों की अच्छी तरह जांच कर लें।
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। UP Anganwadi Bharti 2026 के तहत राज्य के छह नए जिलों में 1110 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक और पात्र महिला अभ्यर्थी अपने जिले के अनुसार निर्धारित अंतिम तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। यह भर्ती आगरा, मथुरा, संभल, औरैया, श्रावस्ती और चंदौली जिलों में की जाएगी। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। किन जिलों में कितने पद? यूपी सरकार द्वारा जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार विभिन्न जिलों में रिक्त पद इस प्रकार हैं- जिला रिक्त पद आवेदन की अंतिम तिथि आगरा 322 25 जुलाई 2026 मथुरा 236 24 जुलाई 2026 औरैया 181 28 जुलाई 2026 संभल 177 28 जुलाई 2026 चंदौली 126 25 जुलाई 2026 श्रावस्ती 68 27 जुलाई 2026 कुल 1110 - कौन कर सकता है आवेदन? भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को निम्नलिखित पात्रता पूरी करनी होगी- केवल महिला अभ्यर्थी आवेदन कर सकती हैं। किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना आवश्यक है। ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र हैं। अभ्यर्थी की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र की उम्मीदवार संबंधित ग्राम सभा और शहरी क्षेत्र की उम्मीदवार संबंधित वार्ड की निवासी होनी चाहिए। कैसे होगा चयन? इस भर्ती में किसी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं होगी। उम्मीदवारों का चयन शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तैयार की जाने वाली मेरिट लिस्ट से किया जाएगा। मेरिट 12वीं, समकक्ष योग्यता, स्नातक या स्नातकोत्तर में प्राप्त अंकों के आधार पर बनेगी। 10वीं के अंक मेरिट में शामिल नहीं किए जाएंगे। CGPA या ग्रेडिंग सिस्टम से प्राप्त अंकों को निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिशत में बदला जाएगा। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके आवेदन कर सकते हैं- आधिकारिक वेबसाइट upanganwadibharti.in पर जाएं। अपने जिले की भर्ती अधिसूचना चुनें। Apply Online/New Registration पर क्लिक करें। आधार नंबर और मोबाइल नंबर से पंजीकरण करें। आवेदन फॉर्म में सभी आवश्यक जानकारी भरें। फोटो, हस्ताक्षर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। सभी विवरण जांचकर फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंट या PDF सुरक्षित रखें। समय रहते करें आवेदन हर जिले के लिए आवेदन की अंतिम तिथि अलग-अलग तय की गई है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखकर समय पर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
एक समय था जब सफल करियर की पहचान एक तयशुदा पांच वर्षीय करियर प्लान से की जाती थी। स्कूल, कॉलेज, करियर काउंसलर और इंटरव्यू लेने वाले अक्सर यही सवाल पूछते थे कि "आप खुद को अगले पांच साल में कहां देखते हैं?" लेकिन बदलती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलते जॉब मार्केट ने इस सोच को काफी हद तक बदल दिया है। आज की युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, निश्चित मंजिल की बजाय लचीलेपन, नए कौशल सीखने और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को अधिक महत्व दे रही है। करियर की परिभाषा बदल रही है आज के समय में करियर केवल पदोन्नति या ऊंचे पद तक पहुंचने का नाम नहीं रह गया है। युवा प्रोफेशनल्स ऐसे करियर की तलाश में हैं जहां वे नई चीजें सीख सकें, अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर सकें और जरूरत पड़ने पर बिना हिचकिचाहट अपने करियर की दिशा बदल सकें। इस बदलाव के पीछे तेजी से बदलती तकनीक, AI का बढ़ता प्रभाव और लगातार बदलती उद्योगों की जरूरतें प्रमुख कारण हैं। ऐसे माहौल में एक तयशुदा पांच साल की योजना बनाना पहले जितना आसान या व्यावहारिक नहीं रह गया है। Deloitte Survey: नेतृत्व नहीं, संतुलित जीवन है प्राथमिकता Deloitte 2026 Gen Z and Millennial Survey के अनुसार, केवल 6 प्रतिशत Gen Z प्रोफेशनल्स ही नेतृत्व (Leadership) की भूमिका को अपना प्रमुख करियर लक्ष्य मानते हैं। जो युवा नेतृत्व की भूमिका नहीं चाहते, उनके प्रमुख कारण हैं- तनाव और बर्नआउट का डर अत्यधिक जिम्मेदारियां बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखना सर्वे में यह भी सामने आया कि केवल 25 प्रतिशत Gen Z और 21 प्रतिशत Millennials ही तेजी से प्रमोशन और बड़े पदों की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं। इसके बजाय अधिकांश युवा नए अनुभव, अलग-अलग विभागों में काम करने, करियर बदलने और नई स्किल्स सीखने को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। करियर लैडर नहीं, अब 'करियर जंगल जिम' की सोच आज के युवा करियर को सीढ़ी की तरह नहीं बल्कि एक ऐसे सफर की तरह देख रहे हैं, जहां अलग-अलग रास्तों पर चलकर नए अनुभव हासिल किए जा सकते हैं। इस सोच में शामिल हैं- साइड प्रोजेक्ट्स पर काम करना फ्रीलांसिंग नई प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन लेना क्रॉस-फंक्शनल रोल निभाना अंतरराष्ट्रीय अवसरों की तलाश AI और नई तकनीकों से जुड़ी स्किल्स सीखना यानी करियर अब एक सीधी रेखा नहीं बल्कि लगातार सीखने और बदलने की प्रक्रिया बनता जा रहा है। AI के दौर में सबसे जरूरी स्किल कौन-सी? भर्ती विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बदलते समय में सबसे महत्वपूर्ण कौशल Adaptability (अनुकूलन क्षमता) बन चुका है। आज कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो- नई तकनीक जल्दी सीख सकें बदलती परिस्थितियों में खुद को ढाल सकें समस्याओं का समाधान खोज सकें टीम के साथ बेहतर सहयोग कर सकें लगातार सीखने की मानसिकता रखें AI के कारण कई पारंपरिक नौकरियां बदल रही हैं, जबकि नई भूमिकाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सीखते रहने वाले प्रोफेशनल्स भविष्य के लिए अधिक तैयार माने जा रहे हैं। Gen Z क्यों चुन रही है फ्लेक्सिबिलिटी? Gen Z ने अपने करियर की शुरुआत ऐसे दौर में की है, जहां आर्थिक अनिश्चितता, बड़े पैमाने पर छंटनी, AI का तेजी से विस्तार और बदलते बिजनेस मॉडल सामान्य बात बन चुके हैं। इसी वजह से यह पीढ़ी केवल ऊंचे पदों की बजाय- मानसिक स्वास्थ्य काम और निजी जीवन का संतुलन लचीला कार्य वातावरण व्यक्तिगत विकास सीखने के अवसर को अधिक महत्व दे रही है। कंपनियां भी बदल रही हैं अपनी सोच विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की सफलता उन कर्मचारियों की होगी जो केवल एक क्षेत्र के विशेषज्ञ नहीं बल्कि कई तरह की परिस्थितियों में काम करने की क्षमता रखते हों। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, नेतृत्व, कम्युनिकेशन, सहयोग और समस्या समाधान जैसी ट्रांसफरेबल स्किल्स अब लगभग हर उद्योग में महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। इंटरव्यू का सबसे अहम सवाल भी बदल सकता है पहले इंटरव्यू में पूछा जाता था- "आप खुद को पांच साल बाद कहां देखते हैं?" लेकिन अब विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे अधिक महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है- "आप इस समय कौन-सी नई स्किल सीख रहे हैं?" क्योंकि आज के दौर में भविष्य की सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है, लेकिन लगातार सीखने की क्षमता किसी भी प्रोफेशनल को लंबे समय तक सफल बना सकती है। बदलते समय में सफलता का नया मंत्र आज करियर में सफलता का मतलब केवल एक तय मंजिल तक पहुंचना नहीं है। बदलती तकनीक, AI और नए अवसरों के दौर में वही लोग आगे बढ़ेंगे जो नई चीजें सीखने, बदलाव को अपनाने और जरूरत पड़ने पर अपनी दिशा बदलने के लिए तैयार रहेंगे। पांच साल की योजना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन अब वह पहले की तरह कठोर नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाली रणनीति बन चुकी है।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में 47 स्थायी पदों पर सीधी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह भर्ती Advertisement No. 08/2026 के तहत की जा रही है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 31 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान में स्वास्थ्य, कानून, विज्ञान, कृषि और जांच एजेंसियों से जुड़े कई प्रतिष्ठित ग्रुप 'A' और ग्रुप 'B' गजटेड पद शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय में सबसे अधिक पद इस भर्ती में सबसे अधिक 37 पद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्पेशलिस्ट ग्रेड-III असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए निकाले गए हैं। इन पदों पर नियुक्ति दिल्ली के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में की जाएगी। विभिन्न विशेषज्ञताओं में रिक्तियां इस प्रकार हैं: नियोनेटोलॉजी (Neonatology): 13 पद एंडोक्रिनोलॉजी (Endocrinology): 10 पद क्लिनिकल हेमेटोलॉजी (Clinical Hematology): 9 पद न्यूक्लियर मेडिसिन (Nuclear Medicine): 3 पद पल्मोनरी मेडिसिन (Pulmonary Medicine): 3 पद पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी (Paediatric Cardiology): 1 पद इसके अलावा सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्पेशलिस्ट के लिए भी एक पद उपलब्ध है। अन्य मंत्रालयों में भी अवसर स्वास्थ्य क्षेत्र के अलावा कई अन्य विभागों में भी भर्ती की जाएगी। इनमें शामिल हैं: कानून एवं न्याय मंत्रालय में सुपरिंटेंडेंट (लीगल) Serious Fraud Investigation Office (SFIO) में प्रोसिक्यूटर Central Forensic Science Laboratory में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर (टॉक्सिकोलॉजी) कृषि मंत्रालय में असिस्टेंट सॉयल केमिस्ट National Centre for Vector Borne Diseases Control में विशेषज्ञ पद वेतनमान और आयु सीमा चयनित उम्मीदवारों को 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th CPC) के अनुसार वेतन मिलेगा। लेवल-11: असिस्टेंट प्रोफेसर (नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस के साथ) लेवल-10: वैज्ञानिक एवं एंटोमोलॉजी से जुड़े पद लेवल-8 और लेवल-7: कानूनी, अभियोजन और फॉरेंसिक पद पद के अनुसार अधिकतम आयु सीमा 30, 35 और 40 वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं SC, ST, OBC और PwBD अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी। आवेदन प्रक्रिया उम्मीदवारों को UPSC के Online Recruitment Application (ORA) पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को: पहले Universal Registration Number (URN) बनाना होगा। वेबकैम के माध्यम से लाइव फोटो कैप्चर करनी होगी। हस्ताक्षर, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, आयु प्रमाण और अनुभव प्रमाणपत्र PDF प्रारूप में अपलोड करने होंगे। आवेदन शुल्क सामान्य, OBC और EWS वर्ग के पुरुष उम्मीदवार: ₹25 महिला, SC, ST और PwBD उम्मीदवार: कोई आवेदन शुल्क नहीं महत्वपूर्ण तिथि ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। आवेदन शाम 6:00 बजे तक ही स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन जमा करने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन या वापसी की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। इसलिए अभ्यर्थियों को आवेदन भरने से पहले सभी जानकारी सावधानीपूर्वक जांचने की सलाह दी गई है।
बहुत से नौकरीपेशा लोगों के लिए हर महीने ₹1 लाख की सैलरी एक बड़ा लक्ष्य होती है। यह आर्थिक स्थिरता, बेहतर जीवनशैली और वर्षों की मेहनत का परिणाम मानी जाती है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने इस सोच को नई दिशा दे दी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या ₹1 लाख की मासिक आय लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के बजाय उन्हें "कम्फर्ट ट्रैप" में फंसा रही है? सोशल मीडिया पोस्ट ने शुरू की नई चर्चा Nidhi Kushwaha की एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में दावा किया गया है कि ₹1 लाख की मासिक सैलरी लोगों को इतना आरामदायक जीवन दे देती है कि वे अपने करियर में आगे बढ़ने की कोशिश कम कर देते हैं। उनका कहना है कि यह राशि इतनी पर्याप्त होती है कि लोग घर का किराया या ईएमआई चुका सकें, नियमित खर्च पूरे कर सकें, कभी-कभार यात्रा कर सकें और आरामदायक जीवन जी सकें। ऐसे में कई लोग नए अवसर तलाशने या जोखिम लेने से बचने लगते हैं। 'कम्फर्ट' कैसे बन सकता है रुकावट? पोस्ट के अनुसार समस्या सैलरी की राशि नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली मानसिक संतुष्टि है। जब व्यक्ति को लगता है कि उसकी आर्थिक स्थिति सुरक्षित है, तो वह अपने कौशल को और बेहतर बनाने, नई जिम्मेदारियां लेने या करियर में बदलाव करने की इच्छा खो सकता है। निधि का मानना है कि कई प्रतिभाशाली लोग अपनी क्षमता की कमी से नहीं, बल्कि आरामदायक स्थिति छोड़ने की अनिच्छा के कारण वर्षों तक एक ही स्तर पर बने रहते हैं। सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय पर तीखी बहस शुरू हो गई। एक वर्ग ने इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि आर्थिक स्थिरता मिलने के बाद कई लोग अपने करियर में आगे बढ़ने की कोशिश कम कर देते हैं और नए लक्ष्य तय नहीं करते। वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इस सोच का विरोध भी किया। उनका कहना था कि आज के समय में Mumbai, Bengaluru और Gurugram जैसे बड़े शहरों में बढ़ती महंगाई को देखते हुए ₹1 लाख की सैलरी पहले जितनी बड़ी नहीं रही। उनका मानना है कि परिवार, बच्चों की शिक्षा, घर का किराया और अन्य खर्चों के बीच यह आय भी सीमित महसूस हो सकती है। क्या ज्यादा कमाना ही सफलता का पैमाना है? बहस के दौरान कई यूजर्स ने यह भी कहा कि सफलता को केवल अधिक कमाई से नहीं मापा जाना चाहिए। उनके अनुसार आर्थिक सुरक्षा, परिवार के साथ समय, मानसिक शांति और बेहतर जीवन संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी वर्तमान आय से संतुष्ट है और उसका जीवन संतुलित है, तो उसे लगातार अधिक कमाने की दौड़ में शामिल होना जरूरी नहीं है। असली सवाल क्या है? यह पूरी बहस इस बात पर नहीं है कि ₹1 लाख महीने की सैलरी पर्याप्त है या नहीं। असली सवाल यह है कि किसी आर्थिक लक्ष्य तक पहुंचने के बाद व्यक्ति अपने विकास को कैसे देखता है। आर्थिक स्थिरता निश्चित रूप से एक उपलब्धि है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सीखते रहना, नए कौशल विकसित करना और व्यक्तिगत व पेशेवर विकास जारी रखना भी उतना ही जरूरी है। आगे बढ़ने का अर्थ हमेशा अधिक पैसा कमाना नहीं होता, बल्कि अपने जीवन और करियर में लगातार नए लक्ष्य तय करना भी होता है।
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सभी विभागों में रिक्तियों का आकलन कर भर्ती प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को अधिक से अधिक सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3,51,968 नियमित पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 1,87,610 पदों पर ही कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। यानी बड़ी संख्या में पद अब भी खाली पड़े हैं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में हैं, जिससे सरकारी सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी को मिली तेजी लाने की जिम्मेदारी सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को पहले से विज्ञापित पदों की परीक्षाएं जल्द कराने और चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया है। विभागों से प्राप्त रिक्तियों के आधार पर नई अधियाचनाएं भी भेजी जाएंगी। इन पदों पर होगी नियुक्ति भर्ती अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक, नर्स और मेडिकल स्टाफ, तथा सड़क, पुल और पुलिया निर्माण कार्यों के लिए अभियंता और तकनीकी कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ी तो स्वतंत्रता दिवस के आसपास करीब 25 हजार नई नियुक्तियां की घोषणा की जा सकती है। वित्त मंत्री ने क्या कहा वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य गठन के बाद पहली बार किसी सरकार ने मानव संसाधन की कमी दूर करने पर इतने बड़े स्तर पर ध्यान दिया है। उनके अनुसार वर्तमान कार्यकाल में 40 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं और सरकार आने वाले वर्षों में स्वीकृत पदों को अधिकतम संख्या में भरने के लिए तेजी से काम करेगी। सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर होने वाली यह भर्ती न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC) ने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 16 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 16 जुलाई 2026 से 16 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। चयनित उम्मीदवारों को लेवल-9 वेतनमान के तहत अधिकतम ₹1.12 लाख प्रति माह तक वेतन मिलेगा। कौन कर सकता है आवेदन? आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री होनी चाहिए। डिग्री में पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, भूविज्ञान, गणित, भौतिकी, सांख्यिकी, प्राणी विज्ञान, कृषि, वानिकी या इंजीनियरिंग जैसे निर्धारित विषयों में से कोई एक विषय होना आवश्यक है। आयु सीमा सामान्य वर्ग के पुरुषों के लिए 21 से 37 वर्ष और महिलाओं के लिए 40 वर्ष तक निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी। कैसे होगा चयन? भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता/मापदंड परीक्षण (PET/PST) और साक्षात्कार शामिल होंगे। अंतिम मेरिट सूची सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर तैयार की जाएगी। आवेदन शुल्क सामान्य, पिछड़ा वर्ग और अन्य राज्य के अभ्यर्थियों के लिए ₹100 निर्धारित किया गया है।
रांची के प्रतिष्ठित BIT Mesra से बीटेक (कंप्यूटर साइंस) करने वाले कुशाग्र सहाय को LinkedIn से करीब ₹1.4 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय जॉब ऑफर मिला है। हालांकि इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद कुशाग्र का कहना है कि छात्रों को केवल बड़े पैकेज के पीछे नहीं भागना चाहिए। उनके अनुसार मजबूत तकनीकी नींव, लगातार सीखने की आदत और वास्तविक समस्याओं पर काम करने वाले प्रोजेक्ट ही लंबे समय में सफलता दिलाते हैं। पैकेज नहीं, सीखने की क्षमता सबसे बड़ी पूंजी कुशाग्र सहाय का कहना है कि ₹1.4 करोड़ का ऑफर उनकी मंजिल नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सिर्फ सैलरी पर ध्यान देने के बजाय Computer Science की मजबूत समझ, Problem Solving Skills, Data Structures and Algorithms (DSA) और अच्छे प्रोजेक्ट्स पर फोकस करना चाहिए। यही चीजें भविष्य में बड़े अवसरों के दरवाजे खोलती हैं। BIT Mesra में मिली सही दिशा कॉलेज के शुरुआती दिनों में कुशाग्र ने उन सीनियर्स से सलाह ली, जो पहले से बड़ी टेक कंपनियों में काम कर रहे थे। लगभग सभी ने उन्हें एक जैसी सलाह दी— अच्छा CGPA बनाए रखें। DSA की नियमित प्रैक्टिस करें। Operating Systems, DBMS, Computer Networks और OOP जैसे Core Computer Science विषयों में मजबूत पकड़ बनाएं। केवल कॉलेज प्रोजेक्ट्स नहीं, बल्कि वास्तविक उपयोग वाले प्रोजेक्ट तैयार करें। उन्होंने पूरे कॉलेज जीवन में इसी रणनीति का पालन किया। ऐसे प्रोजेक्ट बनाए जिनका लोग वास्तव में इस्तेमाल करते हैं कुशाग्र ने केवल अकादमिक प्रोजेक्ट्स तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी हाउसिंग सोसाइटी के लिए Society Management Platform विकसित किया, जबकि BIT Mesra के कंप्यूटर साइंस विभाग के लिए Academic Management Platform भी तैयार किया। उनका कहना है कि LinkedIn इंटरव्यू के दौरान इंटरव्यूअर ने उनके प्रोजेक्ट्स के डिजाइन, डेटाबेस, बैकएंड आर्किटेक्चर और स्केलेबिलिटी पर विस्तार से सवाल पूछे। इससे उन्हें समझ आया कि रिज्यूमे में जो भी प्रोजेक्ट लिखा जाए, उसकी हर तकनीकी जानकारी उम्मीदवार को अच्छी तरह पता होनी चाहिए। Google से रिजेक्शन मिला, लेकिन हार नहीं मानी सफलता का यह सफर आसान नहीं था। कुशाग्र Google के Internship Interview के अंतिम चरण तक पहुंचे, लेकिन उन्हें चयन नहीं मिला। उन्होंने माना कि उस समय निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। बाद में उन्होंने दूसरी इंटर्नशिप की, फिर LinkedIn में Internship हासिल की। इसी इंटर्नशिप के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें Pre-Placement Offer (PPO) मिला, जो आगे चलकर ₹1.4 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय पैकेज में बदला। LinkedIn इंटरव्यू में क्या पूछा गया? LinkedIn की भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में हुई, जिसमें शामिल थे— ऑनलाइन Coding Assessment Data Structures and Algorithms इंटरव्यू Managerial Interview Computer Science Fundamentals Projects और Behavioural Questions कुशाग्र के अनुसार सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा अपने प्रोजेक्ट्स के पीछे लिए गए तकनीकी फैसलों को विस्तार से समझाना था। इंजीनियरिंग छात्रों के लिए कुशाग्र की सलाह कुशाग्र का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय पैकेज की खबरें आकर्षक जरूर लगती हैं, लेकिन वास्तविक CTC और हाथ में मिलने वाली वार्षिक सैलरी में काफी अंतर होता है। उन्होंने छात्रों को ये सुझाव दिए— Programming Fundamentals मजबूत करें। DSA की नियमित प्रैक्टिस करें। Core Computer Science विषयों में गहराई से पढ़ाई करें। Real-world Projects बनाएं। AI का इस्तेमाल सीखने के लिए करें, सोचने की जगह नहीं। अच्छा CGPA बनाए रखें। सीनियर्स और प्रोफेसर्स से मार्गदर्शन लें। मेहनती और सीखने वाले साथियों के बीच रहें। Communication Skills पर भी काम करें। रिजेक्शन से घबराने के बजाय उससे सीखें। सफलता का असली मंत्र कुशाग्र सहाय का मानना है कि करियर की सफलता केवल बड़े पैकेज से नहीं मापी जानी चाहिए। उनका संदेश है कि यदि छात्र लगातार सीखते रहें, अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाते रहें और उत्कृष्टता को लक्ष्य बनाएं, तो बड़े अवसर अपने आप मिलते हैं।
कभी कॉर्पोरेट दुनिया में करियर ग्रोथ का सबसे बड़ा लक्ष्य मैनेजर बनना माना जाता था। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। Microsoft की हालिया छंटनी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मैनेजरों की जगह लेने जा रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। कंपनियां मैनेजरों को खत्म नहीं कर रहीं, बल्कि अनावश्यक मैनेजमेंट लेयर कम करके नेतृत्व की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। Microsoft की छंटनी ने बढ़ाई चर्चा Microsoft ने हालिया जॉब कट्स के दौरान अपनी मैनेजमेंट लेयर को भी कम किया है। कंपनी AI पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है और संगठन को अधिक तेज, चुस्त (Agile) और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। यही रणनीति Amazon, Meta और Shopify जैसी कई बड़ी टेक कंपनियां भी अपना रही हैं। इस ट्रेंड को अब कॉर्पोरेट जगत में "Management Diet" कहा जा रहा है, जिसमें संगठन के भीतर गैर-जरूरी मैनेजमेंट स्तरों को हटाकर निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। AI नहीं, संगठनात्मक बदलाव है बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल AI की वजह से नहीं हो रहा है। True Balance के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) गौरव शर्मा का कहना है कि कंपनियां अब यह मूल्यांकन कर रही हैं कि कौन-सी मैनेजमेंट लेयर वास्तव में व्यवसाय को मूल्य दे रही है। यदि किसी स्तर की भूमिका केवल रिपोर्टिंग, समन्वय और प्रशासनिक कार्यों तक सीमित है, तो उसे अधिक प्रभावी तरीके से AI के जरिए संभाला जा सकता है। वहीं HireYou के CHRO अभिजीत घोष के मुताबिक कंपनियां अपने संगठन को अधिक तेज और लचीला बनाने के लिए संरचनात्मक बदलाव कर रही हैं। AI इस बदलाव को आसान बना रहा है क्योंकि अब कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां तकनीक संभाल सकती है। AI किन मैनेजमेंट कार्यों को संभाल रहा है? आज AI कई ऐसे कार्य तेजी से कर रहा है जो पहले मिडिल मैनेजर की जिम्मेदारी माने जाते थे। इनमें शामिल हैं: प्रदर्शन (Performance) की निगरानी प्रोजेक्ट की प्रगति पर नजर रखना मीटिंग का सारांश तैयार करना कर्मचारियों की शेड्यूलिंग संसाधनों का आवंटन ऑनबोर्डिंग और रिपोर्टिंग अनुपालन (Compliance) की निगरानी इन कार्यों के ऑटोमेट होने से मैनेजरों का समय बच रहा है और संगठन कम मैनेजमेंट लेयर के साथ भी प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं। AI नहीं कर सकता नेतृत्व की जगह विशेषज्ञ मानते हैं कि AI डेटा और प्रशासनिक कार्यों में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी नेतृत्व की जगह नहीं ले सकता। कर्मचारियों को प्रेरित करना, विवाद सुलझाना, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना, टीम का विश्वास जीतना और सकारात्मक कार्य संस्कृति बनाना ऐसे काम हैं जिनमें मानवीय समझ और अनुभव की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि भविष्य में प्रभावी नेतृत्व की अहमियत और बढ़ने वाली है। मैनेजर की भूमिका कैसे बदल रही है? अब भविष्य का मैनेजर केवल टीम की निगरानी करने वाला व्यक्ति नहीं होगा। नई भूमिका में मैनेजर को इन जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान देना होगा: कर्मचारियों का विकास और कोचिंग रणनीतिक निर्णय लेना नवाचार को बढ़ावा देना अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना व्यवसायिक समस्याओं का समाधान करना जो मैनेजर केवल अनुमोदन, रिपोर्टिंग और रोजमर्रा की निगरानी तक सीमित रहेंगे, उनके लिए भविष्य अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। करियर ग्रोथ का नया मतलब विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में करियर की सफलता केवल मैनेजर बनने से तय नहीं होगी। युवा पेशेवरों को अब इन कौशलों पर ध्यान देना होगा: AI टूल्स की समझ किसी क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता समस्या समाधान क्षमता विभिन्न टीमों के साथ सहयोग लगातार नई तकनीकों को सीखने की आदत व्यवसायिक परिणामों की जिम्मेदारी लेना यानी भविष्य में पदनाम (Designation) से अधिक महत्व कौशल और प्रभाव (Impact) का होगा। क्या भारत में भी दिखेगा यही ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कंपनियां भी धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी। डिजिटल-फर्स्ट कंपनियां अपेक्षाकृत तेजी से फ्लैट संगठनात्मक ढांचे को अपनाएंगी, जबकि बड़े पारंपरिक संगठनों में यह बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। हालांकि अंतिम लक्ष्य सभी का लगभग एक जैसा होगा—कम मैनेजमेंट लेयर, तेज निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी नेतृत्व। बदलते दौर में नेतृत्व ही बनेगा सबसे बड़ी ताकत AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद कंपनियों को अच्छे नेताओं की आवश्यकता बनी रहेगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि भविष्य में वही मैनेजर सबसे अधिक सफल होंगे जो लोगों को प्रेरित कर सकें, भरोसा कायम रखें, कठिन फैसले लें और लगातार बदलते कारोबारी माहौल में अपनी टीम का सही मार्गदर्शन कर सकें।
नई रिपोर्ट में सामने आया बड़ा बदलाव भारत की कार्य संस्कृति तेजी से बदल रही है। पहले जहां देर तक ऑफिस में रुकना, छुट्टी के बाद भी ईमेल का जवाब देना और जिम्मेदारियों से बढ़कर काम करना कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता था, वहीं अब यह सोच बदलती दिखाई दे रही है। Great Place To Work India 2026 की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश की करीब 63 प्रतिशत कंपनियों ने पिछले एक वर्ष के दौरान कर्मचारियों की स्वैच्छिक अतिरिक्त मेहनत (Discretionary Effort) में कमी दर्ज की है। अध्ययन में शामिल 380 कंपनियों में से 240 संस्थानों ने इस गिरावट की पुष्टि की है, जबकि औसतन इसमें लगभग 5 प्रतिशत की कमी देखी गई। क्या है 'एफर्ट रिसेशन'? रिपोर्ट के अनुसार, एफर्ट रिसेशन का मतलब कर्मचारियों की उस इच्छा में कमी आना है, जिसके तहत वे अपनी तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर संगठन के लिए अतिरिक्त योगदान देते हैं। इसमें बिना कहे देर तक काम करना, अतिरिक्त जिम्मेदारी उठाना, किसी समस्या के समाधान के लिए स्वयं आगे आना या नौकरी के दायरे से बाहर जाकर सहयोग करना शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता में कमी नहीं माना जाना चाहिए। आज के कर्मचारी अपनी ऊर्जा वहीं लगाना चाहते हैं जहां उन्हें सम्मान, सीखने का अवसर, करियर में विकास और अपने काम का स्पष्ट उद्देश्य दिखाई देता है। हर सेक्टर पर समान असर नहीं रिपोर्ट बताती है कि सभी उद्योगों में यह बदलाव समान नहीं है। रिटेल सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 88 प्रतिशत कंपनियों ने अतिरिक्त प्रयास में कमी दर्ज की। आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज में यह आंकड़ा 77 प्रतिशत रहा। कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट में 71 प्रतिशत कंपनियों ने गिरावट की जानकारी दी। फाइनेंशियल सर्विसेज में 62 प्रतिशत कंपनियां प्रभावित रहीं। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई दिया, जहां केवल 44 प्रतिशत कंपनियों ने ऐसी गिरावट दर्ज की। विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में कर्मचारियों का तेजी से बदलाव (High Attrition) होता है, वहां यह प्रभाव अधिक देखने को मिल रहा है। AI बदल रहा है मेहनत की परिभाषा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग ने भी कार्यस्थलों की सोच बदल दी है। जिन कामों में पहले कई दिन लग जाते थे, वे अब AI की मदद से कुछ ही मिनटों में पूरे हो रहे हैं। ऐसे में कंपनियां अब कर्मचारियों का मूल्यांकन केवल लंबे समय तक ऑफिस में बैठने से नहीं, बल्कि उनके द्वारा पैदा किए गए परिणाम, नई सोच और समस्या समाधान की क्षमता के आधार पर करने लगी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI के दौर में मेहनत का मतलब सिर्फ अधिक घंटे काम करना नहीं, बल्कि बेहतर निर्णय लेना, रचनात्मक सोच विकसित करना और ऐसी समस्याओं का समाधान करना है जिन्हें मशीनें नहीं कर सकतीं। Gen Z बदल रही है कार्य संस्कृति रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कुल कार्यबल में Gen Z की हिस्सेदारी अब 26 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो वर्ष 2023 की तुलना में लगभग दोगुनी है। नई पीढ़ी के कर्मचारी लंबे समय तक ऑफिस में रहने को सफलता का पैमाना नहीं मानते। वे बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस, लचीले कार्य घंटे, मानसिक स्वास्थ्य, सीखने के अवसर, करियर ग्रोथ और सार्थक कार्य वातावरण को अधिक प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि कंपनियों को अब अपनी पारंपरिक कार्य संस्कृति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को समझने में कंपनियों को हो रही चुनौती रिपोर्ट में शामिल कई मानव संसाधन (HR) प्रमुखों ने स्वीकार किया कि वे एक साथ दो बड़े बदलावों का सामना कर रहे हैं—AI का तेजी से बढ़ता प्रभाव और नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाएं। करीब आधे HR अधिकारियों ने माना कि वे अभी भी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि युवा कर्मचारियों को सबसे अधिक क्या प्रेरित करता है। नेतृत्व और भरोसा बढ़ाते हैं अतिरिक्त योगदान रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत का सबसे बड़ा आधार अच्छा नेतृत्व और विश्वास है। जिन कर्मचारियों को लगा कि उनके नेता उनकी परवाह करते हैं, उनमें स्वैच्छिक अतिरिक्त योगदान देने की संभावना लगभग 99 प्रतिशत रही। वहीं जहां ऐसा भरोसा नहीं था, वहां यह आंकड़ा घटकर 29 प्रतिशत रह गया। इसी तरह प्रेरणादायक नेतृत्व वाले संगठनों में भी कर्मचारियों का अतिरिक्त योगदान काफी अधिक देखा गया। काम का भविष्य बदल रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सफल वही संस्थान होंगे जो कर्मचारियों को केवल अधिक काम करने के लिए नहीं कहेंगे, बल्कि उन्हें ऐसा माहौल देंगे जहां वे सम्मानित महसूस करें, सीख सकें और अपने करियर को आगे बढ़ा सकें। आज के दौर में कर्मचारी अतिरिक्त मेहनत करने से पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि वे यह तय कर रहे हैं कि किस संगठन के लिए अपनी पूरी क्षमता से काम करना वास्तव में सार्थक है। क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण? भारत की कॉर्पोरेट दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Gen Z की नई सोच, AI का बढ़ता प्रभाव और कर्मचारियों की बदलती प्राथमिकताएं कार्य संस्कृति को नया रूप दे रही हैं। ऐसे में कंपनियों के लिए चुनौती केवल बेहतर प्रतिभा को नियुक्त करना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य वातावरण तैयार करना है जहां कर्मचारी स्वेच्छा से संगठन की सफलता में अतिरिक्त योगदान देना चाहें।
मुंबई, एजेंसियां। बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। जालना जिला केंद्रीय सहकारी बैंक ने विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। भर्ती अभियान के तहत कुल 70 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 18 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 7 जुलाई से शुरू हो चुकी है। इन पदों पर होगी भर्ती भर्ती के तहत मुख्य प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, बैंकिंग अधिकारी और क्लर्क के पद भरे जाएंगे। कुल 70 पदों में सबसे अधिक 55 पद क्लर्क के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा मुख्य प्रबंधक का एक, सहायक प्रबंधक का एक, बैंकिंग अधिकारी-1 के दो और बैंकिंग अधिकारी-2 के 11 पदों पर भर्ती की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी अलग निर्धारित की गई है। मुख्य प्रबंधक और सहायक प्रबंधक पदों के लिए वाणिज्य, सीए, एमबीए (फाइनेंस), एमएससी या एमई (कंप्यूटर) में स्नातकोत्तर डिग्री तथा न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। बैंकिंग अधिकारी पदों के लिए संबंधित विषय में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री मांगी गई है, जबकि क्लर्क पद के लिए किसी भी विषय में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री अनिवार्य है। सभी पदों के लिए एमएस-सीआईटी (MS-CIT) या समकक्ष कंप्यूटर प्रमाणपत्र होना जरूरी है। न्यूनतम आयु 21 वर्ष रखी गई है, जबकि अधिकतम आयु पद के अनुसार 38 से 45 वर्ष के बीच निर्धारित है। चयन प्रक्रिया और आवेदन शुल्क उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन, साक्षात्कार और अंतिम मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 1,000 रुपये, जबकि ओबीसी वर्ग के लिए 800 रुपये निर्धारित किया गया है। परीक्षा और प्रवेश पत्र जारी होने की तिथि बाद में घोषित की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले पात्रता संबंधी सभी शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और अंतिम तिथि से पहले अपना आवेदन पूरा कर दें।
भारतीय सेना ने 68वें शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) टेक्निकल महिला कोर्स के लिए आधिकारिक भर्ती अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातकों को सेना में अधिकारी बनने का अवसर मिलेगा। इच्छुक उम्मीदवार 8 जुलाई 2026 से 6 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण अप्रैल 2027 से ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया (बिहार) में शुरू होगा। 30 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं में कुल 30 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा सेवा के दौरान शहीद हुए रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी श्रेणी में विशेष प्रवेश का प्रावधान भी रखा गया है। भर्ती से जुड़ी प्रमुख जानकारी विवरण जानकारी भर्ती का नाम Indian Army SSC Tech Women 68 Course पद शॉर्ट सर्विस कमीशन (तकनीकी) महिला अधिकारी कुल पद 30 आवेदन शुरू 8 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 6 अगस्त 2026 प्रशिक्षण शुरू अप्रैल 2027 प्रशिक्षण स्थल OTA, गया (बिहार) कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाली उम्मीदवारों को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी। उम्मीदवार अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातक हो। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत छात्राएं भी आवेदन कर सकती हैं, यदि उनका परिणाम 1 अप्रैल 2027 तक घोषित हो जाए। 1 अप्रैल 2027 को उम्मीदवार की आयु 20 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी अभ्यर्थी का जन्म 1 अप्रैल 2000 से 31 मार्च 2007 के बीच हुआ होना चाहिए। शहीद रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित की गई है। ऐसे होगा चयन भारतीय सेना इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में करेगी। आवेदन पत्रों की जांच और शॉर्टलिस्टिंग सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू मेडिकल परीक्षण अंतिम मेरिट सूची जॉइनिंग लेटर जारी SSB इंटरव्यू लगभग पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, मानसिक योग्यता और व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाएगा। फिजिकल फिटनेस भी होगी जरूरी चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को निर्धारित शारीरिक मानकों पर भी खरा उतरना होगा। इसके तहत उम्मीदवार को— 13 मिनट में 2.4 किलोमीटर दौड़ पूरी करनी होगी। कम से कम 15 पुश-अप्स करने होंगे। 2 पुल-अप्स पूरे करने होंगे। 25 सिट-अप्स करने होंगे। तैराकी का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन कर आवेदन कर सकते हैं— भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट Join Indian Army पर जाएं। Officer Entry Apply/Login विकल्प चुनें। यदि पहले से पंजीकरण नहीं है तो नया रजिस्ट्रेशन करें। आधार या मैट्रिक प्रमाणपत्र के माध्यम से सत्यापन पूरा करें। लॉगिन करने के बाद Short Service Commission (Technical) Women Course का चयन करें। व्यक्तिगत, शैक्षणिक और संपर्क संबंधी जानकारी भरें। यदि पहले SSB में शामिल हुए हैं तो उसका विवरण दर्ज करें। सभी जानकारियां जांचने के बाद आवेदन पत्र सबमिट करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखें। महिला इंजीनियरों के लिए सुनहरा अवसर अगर आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं, तो यह भर्ती आपके लिए बेहतरीन अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
नई पीढ़ी के हाथों में कॉर्पोरेट नेतृत्व की कमान भारत के कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व की तस्वीर तेजी से बदल रही है। प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म LinkedIn की नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के 55% C-suite (शीर्ष प्रबंधन) पदों पर अब मिलेनियल्स (Millennials) का कब्जा है। पिछले सात वर्षों में इस वर्ग की भागीदारी में लगभग 14.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह भारत के वरिष्ठ कॉर्पोरेट नेतृत्व का सबसे बड़ा समूह बन गया है। रिपोर्ट बताती है कि आज के दौर में केवल एक ही उद्योग में लंबे समय तक काम करने के बजाय अलग-अलग सेक्टर और विभिन्न भूमिकाओं का अनुभव रखने वाले पेशेवर तेजी से शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच रहे हैं। पारंपरिक करियर मॉडल बदल रहा है कुछ साल पहले तक अधिकांश शीर्ष अधिकारी एक ही उद्योग में लंबे समय तक काम करने के बाद C-suite तक पहुंचते थे। लेकिन अब यह ट्रेंड बदल रहा है। LinkedIn के मुताबिक, एक ही इंडस्ट्री का अनुभव रखने वाले C-suite अधिकारियों की हिस्सेदारी करीब 80% से घटकर 58% रह गई है। इसका मतलब है कि कंपनियां अब ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास विविध उद्योगों, अलग-अलग कंपनियों और कई प्रकार की जिम्मेदारियों का अनुभव हो। AI बना बिजनेस फैसलों का अहम हिस्सा रिपोर्ट के अनुसार, 84% भारतीय C-suite अधिकारी मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी कंपनियों में नई नौकरियां और नई भूमिकाएं तैयार कर रहा है। सबसे अधिक भरोसा Chief Marketing Officers (CMOs) में देखा गया, जहां 94% अधिकारियों ने AI को नए अवसरों का प्रमुख स्रोत माना। इतना ही नहीं, 84% वरिष्ठ अधिकारी यह भी स्वीकार करते हैं कि अब बिजनेस से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में AI टूल्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। AI अपनाने की बढ़ती चुनौती हालांकि कंपनियां तेजी से AI को अपना रही हैं, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के सामने इसकी रफ्तार बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80% भारतीय C-suite नेताओं का कहना है कि उन पर AI को तेजी से लागू करने का दबाव है, जबकि उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। यह दबाव सबसे ज्यादा Chief Marketing Officers (82%) और Chief Technology Officers (81%) पर देखा गया। अनिश्चित माहौल में तेज फैसले लेना सबसे बड़ी चुनौती आज के कारोबारी माहौल में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच सही समय पर निर्णय लेना भी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 39% भारतीय C-suite नेताओं ने लगातार बदलते माहौल में तेज और सही फैसले लेना अपनी सबसे बड़ी नेतृत्व चुनौती बताया। यह चिंता विशेष रूप से CEOs और CMOs में अधिक देखने को मिली। वर्कफोर्स प्लानिंग अब केवल HR की जिम्मेदारी नहीं रिपोर्ट बताती है कि भविष्य में किन स्किल्स और किन भूमिकाओं की जरूरत होगी, इसे लेकर भी कंपनियों में स्पष्टता की कमी है। 51% भारतीय C-suite अधिकारी मानते हैं कि उनकी कंपनियों को भविष्य के टैलेंट और आवश्यक स्किल्स की सही समझ नहीं है। अब कर्मचारियों की योजना बनाना केवल HR विभाग का काम नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे नेतृत्व की साझा जिम्मेदारी बन चुकी है, क्योंकि इसका सीधा असर बिजनेस ग्रोथ, टेक्नोलॉजी अपनाने और ग्राहक रणनीति पर पड़ता है। AI से सबसे बड़ी उम्मीद इनोवेशन की भारतीय कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए AI का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल काम की गति बढ़ाना नहीं, बल्कि नए अवसर तैयार करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 90% भारतीय C-suite नेता AI निवेश से सबसे ज्यादा इनोवेशन की उम्मीद करते हैं। इनमें CMOs, CEOs और CTOs सबसे आगे हैं। उनका मानना है कि AI की मदद से नए उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं, ग्राहकों का अनुभव बेहतर बनाया जा सकता है और कंपनियां बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत कर सकती हैं। AI स्किल्स बन रही हैं भविष्य के नेताओं की पहचान LinkedIn रिपोर्ट के अनुसार, भारत में C-suite स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली पांच प्रमुख स्किल्स में से चार AI से जुड़ी हैं। इनमें AI Agents, AI Productivity, Retrieval-Augmented Generation (RAG) और AI Strategy शामिल हैं। सबसे तेज वृद्धि AI Agents स्किल में दर्ज की गई, जिसमें 18.6% सालाना वृद्धि हुई। वहीं, 2020 के बाद से AI और अन्य तकनीकी विशेषज्ञताओं की मांग में 10.9% की बढ़ोतरी देखी गई है। बदलते दौर में AI और विविध अनुभव बने सफलता की कुंजी LinkedIn की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत में कॉर्पोरेट नेतृत्व तेजी से बदल रहा है। मिलेनियल्स अब शीर्ष पदों पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं, जबकि AI केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि नेतृत्व, भर्ती, निर्णय प्रक्रिया और बिजनेस रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले वर्षों में AI की समझ और बहु-क्षेत्रीय अनुभव रखने वाले नेताओं की मांग और तेज़ी से बढ़ने की संभावना है।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने सिविल सेवा मुख्य (लिखित) परीक्षा 2025 की तिथियों में बदलाव कर दिया है। आयोग ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि मुख्य परीक्षा की पहले घोषित तिथियां झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की क्षेत्रीय कार्यकर्ता परीक्षा से टकरा रही थीं। इससे दोनों परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता। अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने संशोधित परीक्षा कार्यक्रम जारी किया है। नई तारीखों पर होगी मुख्य परीक्षा संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या 01/2026) अब 21, 22 और 23 जुलाई को आयोजित की जाएगी। पहले यह परीक्षा 18, 19 और 20 जुलाई को प्रस्तावित थी। आयोग के अनुसार, इस परीक्षा में कुल 2,204 अभ्यर्थी शामिल होंगे। बैकलॉग परीक्षाओं का भी जारी हुआ कार्यक्रम आयोग ने बैकलॉग मुख्य परीक्षाओं की नई तिथियां भी घोषित की हैं। बैकलॉग मुख्य परीक्षा 2023 (विज्ञापन संख्या 06/2026) का आयोजन 25, 26 और 27 जुलाई को किया जाएगा। वहीं, बैकलॉग मुख्य परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या 05/2026) 1, 2 और 3 अगस्त को आयोजित होगी। आयोग ने जारी की महत्वपूर्ण सलाह JPSC ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यही संशोधित कार्यक्रम प्रभावी रहेगा। हालांकि, यदि भविष्य में कोई अपरिहार्य परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो परीक्षा तिथियों में फिर से बदलाव किया जा सकता है। ऐसे में अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और केवल आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है। वेबसाइट पर रखें नजर आयोग ने उम्मीदवारों से कहा है कि परीक्षा से जुड़े सभी नवीनतम अपडेट, प्रवेश पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं के लिए नियमित रूप से JPSC की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें, ताकि किसी भी बदलाव की जानकारी समय पर मिल सके और परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो।
सप्ताह की शुरुआत अक्सर कई कर्मचारियों के लिए तनाव और लंबे टू-डू लिस्ट के साथ होती है। दो दिन की छुट्टी के बाद अचानक काम के मोड में लौटना कई लोगों को भारी लगता है। ऐसे में अब एक नया वर्कप्लेस ट्रेंड 'Bare Minimum Mondays' तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसका उद्देश्य सोमवार के तनाव को कम करते हुए पूरे सप्ताह की उत्पादकता को बेहतर बनाना है। क्या है Bare Minimum Mondays? Bare Minimum Mondays का मतलब काम से बचना या आलस करना नहीं है। इसका उद्देश्य सोमवार को केवल सबसे जरूरी और उच्च प्राथमिकता वाले कार्य पूरे करना है, जबकि कम महत्वपूर्ण कामों, गैर-जरूरी बैठकों और अन्य गतिविधियों को सप्ताह के बाकी दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है। इस तरीके से कर्मचारी बिना अधिक दबाव महसूस किए धीरे-धीरे पूरे सप्ताह की गति बना सकते हैं। कैसे अपनाएं Bare Minimum Mondays? 1. सबसे जरूरी काम पहले करें सोमवार की शुरुआत उन कार्यों से करें जिनकी समय-सीमा नजदीक हो या जिनका प्रभाव सबसे अधिक हो। बाकी कम जरूरी कार्य बाद में किए जा सकते हैं। 2. सोमवार का शेड्यूल हल्का रखें पूरे दिन को लगातार मीटिंग्स और भारी कामों से भरने के बजाय सीमित कार्य रखें। इससे मानसिक दबाव कम होता है और फोकस बेहतर रहता है। 3. गैर-जरूरी मीटिंग्स से बचें केवल उन्हीं बैठकों में शामिल हों जो वास्तव में आवश्यक हों। इससे महत्वपूर्ण कार्यों पर अधिक समय दिया जा सकता है। 4. वास्तविक लक्ष्य तय करें ऐसी टू-डू लिस्ट बनाएं जिसे कार्य समय के भीतर आसानी से पूरा किया जा सके। छोटे और पूरे होने वाले लक्ष्य आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। 5. बीच-बीच में ब्रेक लें लगातार काम करने की बजाय छोटे-छोटे ब्रेक लें। कुछ मिनट टहलना या स्ट्रेचिंग करना मानसिक थकान कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकता है। क्या हैं इसके फायदे? यदि इस तरीके को सही ढंग से अपनाया जाए तो इसके कई फायदे हो सकते हैं। सोमवार की चिंता और तनाव कम हो सकता है। कार्यस्थल पर बर्नआउट का जोखिम घट सकता है। जरूरी कार्यों पर बेहतर फोकस बना रहता है। पूरे सप्ताह के लिए सकारात्मक कार्य गति (Momentum) बनती है। काम की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार हो सकता है। क्या यह तरीका सभी के लिए उपयुक्त है? Bare Minimum Mondays हर पेशे में लागू नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन सेवाओं, कस्टमर सपोर्ट, रिटेल और ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए यह मॉडल व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि वहां तत्काल प्रतिक्रिया और तय समय पर काम करना जरूरी होता है। हालांकि, जिन कर्मचारियों के पास अपने कार्यों की प्राथमिकता तय करने की स्वतंत्रता होती है, वे इस रणनीति का उपयोग करके सप्ताह की शुरुआत अधिक संतुलित और कम तनावपूर्ण बना सकते हैं। निष्कर्ष Bare Minimum Mondays का उद्देश्य कम काम करना नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके से काम की प्राथमिकता तय करना है। सोमवार को केवल आवश्यक कार्यों पर ध्यान देकर कर्मचारी मानसिक दबाव कम कर सकते हैं, बेहतर फोकस बनाए रख सकते हैं और पूरे सप्ताह अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।