भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 की तैयारियां तेज कर दी हैं। हॉकी इंडिया ने जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए 20 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। टीम की कप्तानी एक बार फिर झारखंड की स्टार मिडफील्डर सलीमा टेटे को सौंपी गई है। इस बार भारतीय टीम का लक्ष्य सिर्फ पदक जीतना नहीं, बल्कि स्वर्ण पदक हासिल कर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधा क्वालिफाई करना है। जापान में होगा एशियन गेम्स 2026 का आयोजन एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होगा। वहीं महिला हॉकी प्रतियोगिता 18 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच गिफू प्रीफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम, काकामिगाहारा में खेली जाएगी। इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक का सीधा टिकट मिलेगा, जिससे इस टूर्नामेंट का महत्व और बढ़ गया है। अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवाओं पर भी भरोसा टीम चयन में अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं का संतुलन देखने को मिला है। हाल ही में FIH Nations Cup में शानदार प्रदर्शन करने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को टीम में बरकरार रखा गया है। चयनकर्ताओं का मानना है कि मौजूदा टीम अनुभव, गति और आक्रामक खेल का बेहतरीन मिश्रण है, जो बड़े टूर्नामेंट में भारत को मजबूत दावेदार बना सकता है। गोलकीपिंग की जिम्मेदारी सविता और बिचू देवी पर गोलकीपिंग विभाग में अनुभवी सविता पुनिया और बिचू देवी खारीबाम को जगह मिली है। हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित सविता भारतीय महिला हॉकी की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में टीम की कप्तानी करते हुए भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। डिफेंस और मिडफील्ड में मजबूत संयोजन रक्षा पंक्ति में सुषिला चानू पुखरामबाम, ज्योति, लालथांतलुआंगी, शिल्पी डबास और इशिका चौधरी को शामिल किया गया है। मिडफील्ड की कमान कप्तान सलीमा टेटे संभालेंगी। उनके साथ निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनेलिता टोप्पो, नेहा और दीपिका सोरेंग टीम को मजबूती देंगी। सलीमा अपनी तेज रफ्तार, शानदार बॉल कंट्रोल और नेतृत्व क्षमता के लिए जानी जाती हैं। झारखंड की इस खिलाड़ी से टीम को बड़ी उम्मीदें हैं। आक्रामक फॉरवर्ड लाइन पर बड़ी जिम्मेदारी भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन में लालरेमसियामी, नवनीत कौर, दीपिका, रुतुजा पिसाल, इशिका, बलजीत कौर और ब्यूटी डुंगडुंग शामिल हैं। इन खिलाड़ियों से उम्मीद होगी कि वे विपक्षी टीमों के खिलाफ अधिक से अधिक गोल कर भारत को स्वर्ण पदक की दौड़ में बनाए रखें। मुख्य कोच ने जताया भरोसा मुख्य कोच शोर्ड मारिन ने टीम चयन के बाद विश्वास जताया कि खिलाड़ी शानदार फिटनेस और अच्छी लय में हैं। उन्होंने कहा कि टीम एशियन गेम्स जैसी बड़ी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है और स्वर्ण पदक जीतने की क्षमता रखती है। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम गोलकीपर सविता पुनिया बिचू देवी खारीबाम डिफेंडर इशिका चौधरी सुषिला चानू पुखरामबाम लालथांतलुआंगी ज्योति शिल्पी डबास मिडफील्डर सलीमा टेटे (कप्तान) निक्की प्रधान साक्षी राणा सुनेलिता टोप्पो नेहा दीपिका सोरेंग फॉरवर्ड लालरेमसियामी रुतुजा पिसाल नवनीत कौर दीपिका इशिका बलजीत कौर ब्यूटी डुंगडुंग 44 साल बाद स्वर्ण जीतने का लक्ष्य भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में शानदार रिकॉर्ड रहा है। टीम अब तक 1 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य सहित कुल 7 पदक जीत चुकी है। 1982 में भारत ने महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता था। वहीं हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया था। अब सलीमा टेटे की कप्तानी में भारतीय टीम 44 साल बाद फिर से स्वर्ण जीतकर सीधे LA 2028 ओलंपिक का टिकट हासिल करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
रांची। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम की घोषणा के साथ ही चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया की चयन समिति की सदस्य असुंता लकड़ा ने टीम चयन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चयन समिति की सदस्य होने के बावजूद उन्हें पूरी चयन प्रक्रिया से अलग रखा गया और उनकी राय नहीं ली गई। असुंता लकड़ा ने कहा असुंता लकड़ा ने कहा कि मार्च 2026 के बाद से चयन समिति की किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन बैठक की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित होने की सूचना भी उन्हें आधिकारिक बैठक के बजाय मीडिया के माध्यम से मिली। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय की भावना का पालन नहीं किया गया, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि उन्होंने टीम में शामिल खिलाड़ियों के चयन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने झारखंड की चार खिलाड़ियों सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और संगीता कुमारी को टीम में जगह मिलने पर खुशी जाहिर की। उनका कहना है कि उनका विरोध खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की कार्यशैली से है। पूर्व कप्तान ने यह भी आरोप लगाया पूर्व कप्तान ने यह भी आरोप लगाया कि महिला खिलाड़ियों के हित और उनके साथ होने वाले कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार यदि चयन समिति के सदस्यों को ही फैसलों से दूर रखा जाएगा, तो पारदर्शी और निष्पक्ष चयन संभव नहीं हो सकेगा। वहीं, हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया हमेशा असुंता लकड़ा का सम्मान करता रहा है और चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों तथा मानकों के अनुरूप पूरी की गई है। उनके मुताबिक लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। इस विवाद के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि टीम एशियन गेम्स की तैयारियों में जुट चुकी है, लेकिन चयन समिति की सदस्य द्वारा उठाए गए सवालों ने हॉकी प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर हॉकी इंडिया की आगे की कार्रवाई और इस मामले के संभावित समाधान पर टिकी है।
रांची। हॉकी इंडिया ने 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने वाले 20वें एशियाई खेल-2026 के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम में झारखंड की चार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, दीपिका सोरेंग और ब्यूटी डुंगडुंग को शामिल किया गया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि सिमडेगा की स्टार मिडफील्डर सलीमा टेटे को पहली बार एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तानी सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में टीम से स्वर्ण पदक जीतकर सीधे ओलंपिक क्वालिफिकेशन हासिल करने की उम्मीद जताई जा रही है। कौन है सलीमा टेटे? सलीमा टेटे का जन्म सिमडेगा के एक किसान परिवार में हुआ। उनके पिता सुलक्षण टेटे स्थानीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी रहे हैं और उन्होंने ही सलीमा को शुरुआती प्रशिक्षण दिया। अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन बॉल कंट्रोल, फिटनेस और नेतृत्व क्षमता के दम पर सलीमा भारतीय टीम की सबसे भरोसेमंद मिडफील्डरों में शामिल हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वह कई मौकों पर टीम की कमान संभाल चुकी हैं। झारखंड और कौन कौन हैं इस टीम में शामिल टीम में शामिल निक्की प्रधान दूसरी बार एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। खूंटी की रहने वाली निक्की 2016 रियो ओलंपिक में खेलने वाली झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनी थीं। वहीं, दीपिका सोरेंग और ब्यूटी डुंगडुंग पहली बार एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। फॉरवर्ड दीपिका अपनी तेज रफ्तार और गोल करने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं, जबकि मिडफील्डर ब्यूटी ने गंभीर घुटने की चोट से वापसी कर शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाई है। झारखंड की चार खिलाड़ियों का एक साथ भारतीय टीम में चयन राज्य के लिए गर्व का विषय है। खासकर सलीमा टेटे की कप्तानी यह साबित करती है कि सिमडेगा की धरती देश को लगातार विश्वस्तरीय हॉकी प्रतिभाएं दे रही है। अब पूरे देश की निगाहें एशियन गेम्स में भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन पर टिकी हैं।
रांची। झारखंड की महिला हॉकी को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राजधानी रांची स्थित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, बरियातू हॉकी सेंटर की तीन प्रतिभाशाली खिलाड़ी बिनीमा धान, पार्वती टोप्पो और रोशनी आइंद का चयन भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में हुआ है। तीनों खिलाड़ी 5 से 14 जुलाई तक होने वाले इंग्लैंड और स्कॉटलैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस दौरे के दौरान भारतीय जूनियर महिला टीम कुल सात अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलेगी। झारखंड के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि एक ही सेंटर से तीन खिलाड़ियों का राष्ट्रीय टीम में चयन राज्य की मजबूत खेल संस्कृति और प्रशिक्षण व्यवस्था को दर्शाता है। विदेशी दौरा देगा अंतरराष्ट्रीय अनुभव इंग्लैंड और स्कॉटलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम को यूरोप की मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने का अवसर मिलेगा। इससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलेगा, जो उनके खेल, आत्मविश्वास और भविष्य के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बरियातू हॉकी सेंटर लंबे समय से महिला हॉकी प्रतिभाओं को तराशने का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां से कई खिलाड़ी पहले भी भारतीय टीम का हिस्सा बन चुकी हैं। तीनों खिलाड़ियों से इस दौरे में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। खेल जगत ने दी बधाई, युवा खिलाड़ियों के लिए बनीं प्रेरणा हॉकी झारखंड के महासचिव विजय शंकर सिंह ने तीनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि बरियातू हॉकी सेंटर लगातार राष्ट्रीय टीम को खिलाड़ी देकर यह साबित कर रहा है कि झारखंड में जमीनी स्तर पर बेहतरीन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, सेंटर की कोच करुणा पूर्ति ने कहा कि बिनीमा, पार्वती और रोशनी ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने विश्वास जताया कि तीनों खिलाड़ी विदेशी दौरे का पूरा लाभ उठाते हुए भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करेंगी। लगातार राष्ट्रीय टीम में खिलाड़ियों का चयन इस बात का प्रमाण है कि झारखंड महिला हॉकी की नई प्रतिभाओं को तैयार करने में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
झारखंड की बेटी सलीमा ने किया नेतृत्व, भारत की लगातार दूसरी जीत भारतीय महिला हॉकी टीम ने एफआईएच नेशंस कप 2026 में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए जापान को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली है। ऑकलैंड में खेले गए इस मुकाबले में कप्तान Salima Tete और Lalremsiami ने गोल दागकर भारत को जीत दिलाई। झारखंड की बेटी सलीमा टेटे की अगुआई में भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत दर्ज की। इससे पहले भारत ने अपने पहले मुकाबले में अमेरिका को हराया था। तीसरे क्वार्टर में सलीमा ने दिलाई बढ़त मुकाबले के पहले हाफ में दोनों टीमें गोल करने में नाकाम रहीं। हालांकि तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने लगातार दबाव बनाए रखा। कई असफल प्रयासों के बाद कप्तान सलीमा टेटे ने 33वें मिनट में शानदार गोल कर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ गया और टीम ने आक्रामक खेल जारी रखा। जापान ने की वापसी, लेकिन भारत ने नहीं छोड़ा मौका भारत की बढ़त ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। जापान की ओर से Ai Hiramitsu ने 35वें मिनट में गोल दागकर मुकाबला 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने संयम बनाए रखा और लगातार आक्रमण करती रहीं। लालरेम्सियामी का गोल बना जीत का आधार मैच के 49वें मिनट में लालरेम्सियामी ने शानदार फिनिश के साथ भारत को फिर से बढ़त दिला दी। उनका यह गोल आखिरकार निर्णायक साबित हुआ। अंतिम मिनटों में जापान ने बराबरी हासिल करने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई, लेकिन भारतीय रक्षा पंक्ति ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी हमलों को विफल कर दिया। सेमीफाइनल में पहुंचा भारत, प्रो लीग का सपना बरकरार इस जीत के साथ भारतीय टीम के छह अंक हो गए हैं और उसने नेशंस कप के अंतिम चार में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। एफआईएच नेशंस कप की विजेता टीम को अगले सत्र की FIH Pro League में खेलने का मौका मिलेगा। ऐसे में भारतीय टीम के पास अब प्रो लीग में वापसी का सुनहरा अवसर है। गौरतलब है कि भारत पिछले सत्र में इस टूर्नामेंट से बाहर हो गया था, लेकिन इस बार टीम शानदार लय में नजर आ रही है।
रांची। झारखंड की बेटियों ने एक बार फिर भारतीय हॉकी में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। हॉकी इंडिया द्वारा जापान के काकामिगाहारा में 29 मई से 6 जून तक आयोजित होने वाले महिला अंडर-18 एशिया कप के लिए घोषित भारतीय टीम में झारखंड की 6 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। इस उपलब्धि से पूरे राज्य में खुशी और गर्व का माहौल है। भारतीय टीम में चयनित खिलाड़ियों में मिडफील्डर पुष्पा मांझी और श्रुति कुमारी, फॉरवर्ड संदीपा कुमारी, डिफेंडर सुगन सांगा और नीलम टोपनो, तथा गोलकीपर खिल्ली कुमारी शामिल हैं। सभी खिलाड़ी झारखंड सरकार द्वारा संचालित खेल प्रशिक्षण केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। इन खिलाड़ियों ने पिछले दो वर्षों में राष्ट्रीय सब-जूनियर हॉकी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा साबित की है। भोपाल में चला विशेष प्रशिक्षण शिविर एशिया कप की तैयारी के लिए भारतीय महिला U-18 टीम ने भोपाल में एक महीने का विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया था। यहां खिलाड़ियों ने फिटनेस, रणनीति और टीम संयोजन पर विशेष अभ्यास किया। टीम को पूर्व भारतीय कप्तान और स्टार खिलाड़ी Rani Rampal का मार्गदर्शन भी मिला। तैयारी के तहत भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैचों की अभ्यास सीरीज भी खेली। 30 मई को मलेशिया से पहला मुकाबला भारत को प्रतियोगिता के पूल-A में रखा गया है। भारतीय टीम अपना पहला मुकाबला 30 मई को मलेशिया के खिलाफ खेलेगी। इसके बाद टीम कोरिया और सिंगापुर से भिड़ेगी। टीम की कप्तानी स्वीटी कुजूर को सौंपी गई है। हॉकी झारखंड के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि झारखंड की बेटियां जापान में शानदार प्रदर्शन कर देश और राज्य का नाम रोशन करेंगी।
India women's national field hockey team ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2026 के फाइनल में जगह बना ली है। सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने Italy women's national field hockey team को 1-0 से हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट पक्का किया। हैदराबाद के GMC Balayogi Hockey Stadium में खेले गए इस मैच में भारत की ओर से मनीषा चौहान ने 40वें मिनट में मैच का एकमात्र गोल किया। अब फाइनल में भारत का सामना England women's national field hockey team से होगा। यह मुकाबला शनिवार शाम 7:30 बजे खेला जाएगा। पहले क्वार्टर में कांटे की टक्कर मैच की शुरुआत काफी रोमांचक रही। पहले क्वार्टर में दोनों टीमों के बीच मिडफील्ड में जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। भारत ने शुरुआती मिनटों में कुछ अच्छे अटैक किए, लेकिन इटली का डिफेंस मजबूत रहा। इटली ने भी कुछ मौके बनाए, मगर भारतीय गोलकीपर और डिफेंडर्स ने शानदार बचाव किया। दूसरे क्वार्टर में भारत का दबदबा दूसरे क्वार्टर में भारत ने खेल पर पकड़ मजबूत कर ली और इटली के डी (डिफेंसमैन) में लगातार हमले किए। 18वें मिनट में भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन इटली की गोलकीपर लूसिया इनेस कारुसो ने शानदार बचाव किया। 27वें मिनट में मिले दूसरे पेनल्टी कॉर्नर पर कप्तान सलीमा टेटे का शॉट डिफेंडर ने गोल लाइन पर रोक दिया। 29वें मिनट में भारत को एक और मौका मिला, लेकिन गोल नहीं हो सका। 40वें मिनट में मनीषा का निर्णायक गोल हाफ टाइम के बाद भी भारतीय टीम ने दबाव बनाए रखा। आखिरकार 40वें मिनट में मनीषा चौहान ने फील्ड गोल दागकर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद इटली ने बराबरी की कोशिश की, लेकिन भारतीय टीम ने कप्तान सलीमा टेटे की अगुवाई में अंत तक बढ़त कायम रखी। इंग्लैंड ने स्कॉटलैंड को हराया टूर्नामेंट के दूसरे सेमीफाइनल में England women's national field hockey team ने Scotland women's national field hockey team को 2-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इंग्लैंड के लिए लॉटी बिंघम और डार्सी बॉर्न ने गोल किए। अब शनिवार को भारत और इंग्लैंड के बीच खिताबी मुकाबले में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।