अक्षय तृतीया

Badrinath Temple decorated with flowers during opening of doors for Char Dham Yatra in Uttarakhand
बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल से खुलेंगे, नवंबर तक कर सकेंगे भगवान बद्रीविशाल के दर्शन

उत्तराखंड के पवित्र चारधामों में शामिल Badrinath Temple के कपाट इस साल अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर वर्ष इसी दिन मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। इस बार भक्त 23 अप्रैल से 13 नवंबर तक भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर सकेंगे। कपाट खुलने की विशेष परंपरा कपाट खुलने की प्रक्रिया बेहद विधिपूर्वक और परंपराओं के अनुसार होती है। सुबह करीब 4 बजे: मुख्य पुजारी (रावल), धर्माधिकारी और हक-हकूकधारी गर्भगृह के द्वार पर पहुंचते हैं टिहरी राजघराने के प्रतिनिधि और प्रशासन भी मौजूद रहते हैं सबसे पहले कपाट की सील और ताले की जांच होती है इसके बाद मंत्रोच्चार और पूजा के साथ जैसे ही कपाट खुलते हैं, श्रद्धालुओं को भगवान के “निर्वाण दर्शन” होते हैं, जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है। ‘घृत कंबल’ और महाभिषेक का महत्व सर्दियों में भगवान को ओढ़ाया गया घृत कंबल (घी में डुबोया ऊनी वस्त्र) कपाट खुलते ही हटाया जाता है। इसके बाद: तिल के तेल से भगवान का महाभिषेक किया जाता है यह पवित्र तेल टिहरी राजघराने की ओर से विशेष विधि से तैयार किया जाता है ‘गाडू घड़ा’ की अनोखी परंपरा टिहरी राजघराने की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक तरीके से तिल का तेल निकालती हैं, जिसे ‘गाडू घड़ा’ कहा जाता है। यह पवित्र कलश यात्रा: ऋषिकेश → श्रीनगर → जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ धाम पहुंचती है। सर्दियों में जब Badrinath Temple के कपाट बंद रहते हैं, तब भगवान की पूजा Narsingh Temple Joshimath में की जाती है। बद्रीनाथ कैसे पहुंचें? हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट Jolly Grant Airport (देहरादून) है, जो लगभग 317 किमी दूर है। यहां से टैक्सी और बस मिल जाती हैं। रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन Rishikesh Railway Station है, जो करीब 297 किमी दूर है। सड़क मार्ग: बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर स्थित है। ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून और दिल्ली से बस और टैक्सी की नियमित सुविधा उपलब्ध है। श्रद्धालुओं के लिए खास जानकारी चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए जाते हैं।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
amir hamza firing lahore
लाहौर में लश्कर-ए-तैयबा अमीर हमजा पर ताबड़तोड़ फायरिंग

इस्लामाबाद, एजेंसियां। लाहौर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ नेता अमीर हमजा पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। यह हमला एक निजी न्यूज़ चैनल के कार्यालय के बाहर हुआ, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।   कई गोलियां लगने से हालत नाजुक हमले में अमीर हमजा को कई गोलियां लगी हैं, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।   हाफिज सईद का करीबी सहयोगी अमीर हमजा को हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता है और वह संगठन की केंद्रीय सलाहकार समिति का अहम सदस्य है। उस पर भारत विरोधी कई आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप रहे हैं, जिसके कारण वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था।   हमले से मचा हड़कंप लाहौर के व्यस्त और सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में हुए इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद इलाके को घेर लिया गया और सुरक्षा बलों ने जांच शुरू कर दी।   हमलावर फरार, जांच जारी स्थानीय पुलिस ने हमलावरों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जांच एजेंसियां इस हमले के पीछे की वजह और हमलावरों की पहचान जानने में जुटी हैं।   बढ़ सकती है अंदरूनी हलचल विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद आतंकी संगठन के भीतर और पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में हलचल बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में इस घटना के कई अहम पहलू सामने आने की संभावना है।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
Devotees worship Lord Vishnu and Goddess Lakshmi on Akshaya Tritiya with traditional offerings and charity.
अक्षय तृतीया पर दान क्यों है खास? जानें पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता

  हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को बेहद शुभ और पुण्यदायी पर्व माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जिसका कभी क्षय न हो। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाते, बल्कि उसका फल कई जन्मों तक मिलता है। साल 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही दान-पुण्य का अत्यधिक महत्व बताया गया है। लेकिन आखिर इस दिन दान क्यों इतना खास माना जाता है? इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है। पौराणिक कथा: धर्मदास की अटूट श्रद्धा प्राचीन समय में धर्मदास नाम का एक गरीब व्यापारी रहता था। उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन वह बेहद धार्मिक और श्रद्धालु था। एक बार उसे अक्षय तृतीया के महत्व के बारे में पता चला। जब यह दिन आया, तो उसने प्रातः स्नान कर विधि-विधान से पूजा की और अपनी क्षमता के अनुसार दान किया। उसने जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को जल से भरे घड़े, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गुड़, घी, पंखे और वस्त्र दान किए। परिवार का विरोध, लेकिन अडिग विश्वास धर्मदास की गरीबी को देखते हुए उसके परिवार ने उसे इतना दान करने से रोका। उन्हें चिंता थी कि घर का खर्च कैसे चलेगा। लेकिन धर्मदास ने विश्वास नहीं छोड़ा और हर साल अक्षय तृतीया पर दान करता रहा। भक्ति का मिला “अक्षय” फल धर्मदास की निस्वार्थ भक्ति और दान के प्रभाव से अगले जन्म में वह कुशावती नगर का एक समृद्ध और प्रतापी राजा बना। कहा जाता है कि उसके यज्ञ में स्वयं त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) भी ब्राह्मण रूप में शामिल होते थे। दान का आध्यात्मिक महत्व अक्षय तृतीया पर दान करने के पीछे मुख्य मान्यता यह है कि इस दिन किया गया हर शुभ कार्य “अक्षय” यानी कभी समाप्त न होने वाला पुण्य देता है। इसलिए लोग इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, जल, वस्त्र, सोना या अन्य जरूरी चीजें दान करते हैं। अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, त्याग और परोपकार का प्रतीक है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से किया गया छोटा सा दान भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है—और उसका फल कभी समाप्त नहीं होता।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Gold and silver jewelry displayed in a sarrafa market during Akshaya Tritiya festive shopping
अक्षय तृतीया से पहले सर्राफा बाजार में उछाल, सोना-चांदी की कीमतों में तेजी बरकरार

  देशभर के सर्राफा बाजार में एक बार फिर रौनक लौट आई है। Akshaya Tritiya और शादी के सीजन की वजह से सोने-चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है। 16 अप्रैल 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दोनों धातुओं के भाव में लगातार बढ़त दर्ज की गई है। सोने के दाम में लगातार तेजी ताजा रुझानों के मुताबिक: 24 कैरेट सोना ₹15,536 प्रति ग्राम तक पहुंच गया यानी ₹1,55,360 प्रति 10 ग्राम पिछले दो दिनों में 100 ग्राम पर करीब ₹29,000 तक की बढ़त शादी-ब्याह और त्योहारों के कारण बाजार में खरीदारी तेज है, जिससे कीमतों को मजबूती मिल रही है। आज का सोना भाव (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट: ₹1,55,360 (+₹10) 22 कैरेट: ₹1,42,410 (+₹10) 18 कैरेट: ₹1,16,520 (+₹10) प्रमुख शहरों में सोने के दाम (प्रति ग्राम) Delhi: ₹15,551 (24K) Mumbai: ₹15,536 (24K) Chennai: ₹15,623 (24K) Kolkata: ₹15,536 (24K) Patna: ₹15,698 (24K) चांदी भी रिकॉर्ड स्तर पर Silver की कीमतों में भी तेजी जारी है: 1 ग्राम: ₹270.10 1 किलो: ₹2,70,100 इंडस्ट्रियल डिमांड और ग्लोबल मार्केट की हलचल के चलते चांदी इस महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। शहरों में चांदी के दाम (1 किलो) Delhi / Mumbai: ₹2,70,100 Chennai: ₹2,75,100 Patna / Ranchi: ₹2,75,000 क्या आगे और बढ़ेंगे दाम? विशेषज्ञों का मानना है कि: अंतरराष्ट्रीय तनाव त्योहारों की मजबूत मांग इन कारणों से Gold के दाम आगे और बढ़ सकते हैं। अनुमान है कि आने वाले समय में सोना ₹1.60 लाख से ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। खरीदारी का सही समय? अगर आप निवेश या ज्वेलरी के लिए खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा तेजी को ध्यान में रखते हुए सही समय पर निर्णय लेना अहम होगा। अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर खरीदारी को पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है, जिससे मांग और बढ़ सकती है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Gold jewellery and coins displayed for Akshaya Tritiya with traditional Indian festive decorations.
500 ग्राम या 5 किलो? अक्षय तृतीया से पहले जानिए घर में कितना सोना रखना सुरक्षित है और कब हो सकती है जब्ती

Akshaya Tritiya के अवसर पर सोना खरीदना भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन इससे पहले यह समझना जरूरी है कि घर में कितना सोना रखना सुरक्षित है और किन परिस्थितियों में आयकर विभाग कार्रवाई कर सकता है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, भारत में सोना रखने की कोई तय सीमा नहीं है, लेकिन इसके स्रोत और दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। कितना सोना रख सकते हैं आप? भारत में कानून के तहत आप ज्वेलरी, सिक्के या गोल्ड बिस्किट के रूप में जितना चाहें सोना रख सकते हैं। कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है, बशर्ते आपने यह सोना कानूनी तरीके से खरीदा हो और जरूरत पड़ने पर उसके स्रोत को साबित कर सकें। आयकर विभाग की ‘सेफ लिमिट’ Central Board of Direct Taxes (CBDT) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आयकर छापेमारी के दौरान एक निश्चित मात्रा तक सोने के आभूषण जब्त नहीं किए जाते, भले ही आपके पास उनके बिल मौजूद न हों: विवाहित महिला: 500 ग्राम तक अविवाहित महिला: 250 ग्राम तक पुरुष सदस्य: 100 ग्राम तक यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सीमा केवल ‘जब्ती से सुरक्षा’ के लिए है, न कि सोना रखने की अधिकतम सीमा। यदि आपके पास वैध बिल और दस्तावेज हैं, तो आप इससे कहीं अधिक सोना रख सकते हैं। नए प्रकटीकरण नियम (FY 2025-26) सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कुछ नियम सख्त किए हैं: यदि आपकी सालाना आय ₹1 करोड़ से अधिक है, तो आपको ITR के Schedule AL (Assets and Liabilities) में सोने और अन्य संपत्तियों का विवरण देना अनिवार्य होगा। विरासत, शादी के गिफ्ट या पुराने निवेश के रूप में मिले सोने के लिए वसीयत, गिफ्ट डीड या पुराने बिल संभालकर रखना जरूरी है। टैक्स और पेनाल्टी का गणित सोना बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन्स टैक्स देना होता है। यदि छापेमारी के दौरान तय ‘सेफ लिमिट’ से अधिक सोना मिलता है और उसका स्रोत स्पष्ट नहीं होता, तो इसे अघोषित आय माना जा सकता है, जिस पर भारी टैक्स और जुर्माना लगाया जा सकता है। स्पष्ट है कि सोना रखने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन सही दस्तावेज और आय का स्पष्ट स्रोत ही आपको किसी भी कार्रवाई से सुरक्षित रख सकता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Illustration of Lord Parshuram holding axe, celebrating Parshuram Jayanti 2026 on Akshaya Tritiya festival
परशुराम जयंती 2026: 19 या 20 अप्रैल? जानिए सही तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में भगवान परशुराम की जयंती अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है। साल 2026 में यह पावन पर्व रविवार, 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। हालांकि तिथि को लेकर कुछ भ्रम बना रहता है, लेकिन पंचांग के अनुसार इस बार जयंती की सही तारीख 19 अप्रैल ही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, परशुराम जयंती वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जिसे अक्षय तृतीया के रूप में भी जाना जाता है। यही कारण है कि इस दिन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। तिथि और शुभ समय द्रिक पंचांग के अनुसार: तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 7:27 बजे भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल (संध्या समय) में हुआ माना जाता है, इसलिए 19 अप्रैल को ही जयंती मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है। कौन हैं भगवान परशुराम? भगवान परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे धरती पर अधर्म और अत्याचार के अंत के लिए अवतरित हुए थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने अन्यायी और अत्याचारी राजाओं का नाश कर धर्म की पुनः स्थापना की। पूजा विधि (पूजन कैसे करें) परशुराम जयंती के दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं: स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें स्थापना: भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें पूजन सामग्री: चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और तुलसी अर्पित करें भोग: फल और मिठाई का भोग लगाएं आरती व पाठ: परशुराम स्तुति और मंत्रों का पाठ करें दान-पुण्य: इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है धार्मिक महत्व परशुराम जयंती केवल एक जन्मोत्सव नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से व्यक्ति में साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम बढ़ता है। चूंकि यह दिन अक्षय तृतीया भी होता है, इसलिए इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Lord Parshuram with flowers and lamp
परशुराम जयंती 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे सप्त चिरंजीवियों में शामिल हैं, यानी आज भी जीवित माने जाते हैं। कब है परशुराम जयंती 2026? साल 2026 में परशुराम जयंती 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन अक्षय तृतीया का पावन पर्व भी पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। तिथि और समय तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल (शाम का श्रेष्ठ समय): 06:49 PM से 08:12 PM मध्याह्न काल: पूरे दिन अक्षय तृतीया के कारण दान-पुण्य के लिए शुभ मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए शाम का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। परशुराम जयंती का महत्व यह दिन शक्ति, साहस और धर्म के पालन का प्रतीक है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर: जीवन में सुख-समृद्धि आती है साहस और आत्मबल बढ़ता है पापों का नाश होता है दीर्घायु और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है अक्षय तृतीया के साथ होने के कारण इस दिन किया गया हर शुभ कार्य अक्षय फल देता है। कैसे करें पूजा? सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें घर या मंदिर में भगवान परशुराम और विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें पीले पुष्प, चंदन और मिठाई अर्पित करें शाम को घी का दीपक जलाकर मंत्र या चालीसा का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Vishnu during Vaishakh month with river bathing ritual at sunrise.
वैशाख मास 2026 कल से शुरू: क्यों है भगवान विष्णु को सबसे प्रिय यह पवित्र महीना?

हिंदू धर्म में हर महीने का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन वैशाख मास को अत्यंत पुण्यदायक और श्रेष्ठ माना गया है। 3 अप्रैल 2026 से वैशाख मास की शुरुआत हो रही है, जिसे धार्मिक ग्रंथों में मोक्ष प्रदान करने वाला और पापों का नाश करने वाला महीना बताया गया है। शास्त्रों, विशेषकर नारद पुराण और स्कंद पुराण में वैशाख मास की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार, जिस प्रकार वेदों का स्थान सर्वोच्च है, उसी तरह सभी महीनों में वैशाख का स्थान श्रेष्ठ माना गया है। माधव मास: नाम में ही छिपी है महिमा वैशाख मास को ‘माधव मास’ भी कहा जाता है। ‘माधव’ भगवान विष्णु का एक प्रमुख नाम है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु जल में निवास करते हैं। यही कारण है कि इस दौरान सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति इस महीने में नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। वैशाख में हुए भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार इस पावन महीने में भगवान विष्णु के कई महत्वपूर्ण अवतार प्रकट हुए, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है- परशुराम अवतार: वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) को भगवान परशुराम का जन्म हुआ। नृसिंह अवतार: वैशाख चतुर्दशी को भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान ने नृसिंह रूप धारण किया। कूर्म अवतार: समुद्र मंथन के दौरान भगवान ने कछुए का रूप लेकर मंदराचल पर्वत को सहारा दिया। इन दिव्य घटनाओं के कारण वैशाख मास को विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत पावन और उत्सवमय माना जाता है। दान-पुण्य और सेवा का विशेष महत्व वैशाख मास केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक कल्याण और सेवा का भी महीना है। गर्मी के इस समय में प्यासे लोगों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना, पेड़ लगाना, सत्तू और पंखे का दान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में किया गया दान सीधे भगवान विष्णु की सेवा के समान फल देता है। शास्त्रों का संदेश नारद पुराण में कहा गया है- “न वैशाख समो मासो, न सत्येन समं तपः” अर्थात् वैशाख के समान कोई महीना नहीं है और सत्य के समान कोई तप नहीं है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Devotee performing Akshaya Tritiya puja with gold, diya, and offerings for wealth and prosperity.
अक्षय तृतीया 2026: कब है यह पावन पर्व? जानें सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त, पूजा का सही समय और धन वृद्धि के उपाय

  हिंदू धर्म में Akshaya Tritiya का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। इस पावन दिन पर विशेष रूप से Vishnu और Lakshmi की पूजा की जाती है। साथ ही सोना खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे घर में सुख-समृद्धि और धन वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।   अक्षय तृतीया 2026 कब है साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन को सनातन परंपरा में अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत बिना विशेष मुहूर्त देखे भी की जा सकती है।   पूजा का शुभ मुहूर्त अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुभ समय: 19 अप्रैल 2026 सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन की वृद्धि होती है।   सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त पहला शुभ समय: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026, सुबह 05:51 बजे तक दूसरा शुभ समय: 20 अप्रैल 2026, सुबह 05:51 बजे से 07:27 बजे तक   चौघड़िया के अनुसार सोना खरीदने का शुभ समय सुबह: 10:49 बजे से 12:20 बजे तक दोपहर: 01:58 बजे से 03:35 बजे तक शाम: 06:49 बजे से 10:57 बजे तक उषाकाल (20 अप्रैल): 04:28 बजे से 05:51 बजे तक   अक्षय तृतीया पर धन वृद्धि के उपाय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। इस दिन सोना या चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। घर में दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का ध्यान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन किए गए शुभ कार्यों का फल जीवन भर बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0