बांकीपुर विधानसभा

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बांकीपुर उपचुनाव: 13 जुलाई को नामांकन भरेंगे प्रशांत किशोर, जन सुराज में शामिल हुए शिक्षक रामांशु सर

पटना, एजेंसियां।  बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर जन सुराज पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जन सुराज के सूत्रधार और पार्टी प्रत्याशी प्रशांत किशोर 13 जुलाई को सुबह 10 बजे नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ मौजूद रहेंगे।   पार्टी के अनुसार, सभी कार्यकर्ता सुबह छज्जूबाग स्थित स्काउट गाइड मैदान में एकत्रित होंगे। वहां से गांधी मैदान होते हुए पैदल मार्च के जरिए पटना समाहरणालय पहुंचेंगे, जहां प्रशांत किशोर अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।   422 बूथों और 24 वार्डों में तेज हुआ चुनाव प्रचार जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने बताया कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के 422 बूथों और 24 वार्डों में कार्यकर्ता लगातार घर-घर संपर्क अभियान चला रहे हैं। उनका दावा है कि क्षेत्र की जनता बदलाव चाहती है और प्रशांत किशोर को व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति की नई दिशा तय करने वाला चुनाव साबित हो सकता है।   जन सुराज में शामिल हुए रामांशु सर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चर्चित शिक्षक रामांशु सर ने जन सुराज की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने उन्हें पार्टी का गमछा पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षित और जागरूक लोगों के जुड़ने से संगठन को मजबूती मिलेगी।   पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने बताया कि रामांशु सर ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की है और उनका अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी साबित होगा।   विकास की राजनीति पर जोर जन सुराज में शामिल होने के बाद रामांशु सर ने कहा कि वे बिहार के विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर काम करने के उद्देश्य से पार्टी से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर जनता के वास्तविक मुद्दों को केंद्र में रखता है। उनके अनुसार, बिहार को बेहतर शिक्षा, रोजगार और विकास की जरूरत है और यही जन सुराज की प्राथमिकता है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Bankipur By - Election
बांकीपुर उपचुनाव: CM सम्राट चौधरी का प्रशांत किशोर पर तंज, बोले- जिन्हें बिहार से मतलब नहीं, वे भी वोट मांगने आएंगे

पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार ‘बंटी’ ने नामांकन दाखिल किया। इसके बाद आयोजित एनडीए की सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, विजय सिन्हा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय ऐसे लोग भी वोट मांगने आते हैं, जिनका बिहार और उसकी राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने मतदाताओं से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की।   एनडीए ने जताया जीत का भरोसा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बांकीपुर से एक समर्पित कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहा है और एनडीए पहले की तरह इस सीट पर भी बड़ी जीत दर्ज करेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने बिजली, सड़क और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जनता ने हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए पर भरोसा जताया था और इस बार भी बांकीपुर में जीत का नया रिकॉर्ड बनेगा।   राजद और जन सुराज भी मैदान में राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता ने भी गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर की जनता बदलाव चाहती है और इस बार राजद को समर्थन मिलेगा। कांग्रेस ने भी महागठबंधन के तहत राजद उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे और लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।   चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प नामांकन के दौरान एक रोचक घटना भी देखने को मिली, जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी मंच से उम्मीदवार अभिषेक कुमार का नाम लेने के बजाय बार-बार दूसरे नेता आशीष सिन्हा का नाम लेते रहे। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। प्रशांत किशोर की एंट्री और प्रमुख दलों के आमने-सामने होने से यह उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Abhishek Kumar Prashant Kishor
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए BJP ने अभिषेक कुमार को बनाया उम्मीदवार, मुकाबला हुआ दिलचस्प

पटना, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अभिषेक कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अभिषेक कुमार भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी के संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके नाम की घोषणा के साथ ही बांकीपुर का उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो गया है।   राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट   बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी कई वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल समेत कई बड़े नेता चुनावी रणनीति पर लगातार बैठकें कर रहे हैं।   प्रशांत किशोर से सीधी टक्कर   इस उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का चुनाव केवल एक सीट का उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बन सकता है।   30 जुलाई को मतदान   निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। सभी प्रमुख दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जुलाई 11, 2026 0