मनोरंजन

Aamir Khan and Rachel Shelley reunite at Lagaan 25th anniversary celebration in London Indian Film Festival.
25 साल बाद फिर साथ दिखे आमिर खान और रेचल शेली, 'लगान' की सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन ने ताजा की पुरानी यादें

नई दिल्ली: बॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाने वाली 'लगान' ने अपनी रिलीज के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस खास अवसर पर लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में फिल्म की सिल्वर जुबली मनाई गई, जहां अभिनेता आमिर खान और फिल्म में एलिजाबेथ रसेल का किरदार निभाने वाली ब्रिटिश अभिनेत्री रेचल शेली एक बार फिर साथ नजर आए। दोनों की मुलाकात की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के बीच पुरानी यादें ताजा हो गईं। लंदन में हुआ खास पुनर्मिलन रेचल शेली ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर कार्यक्रम की कई तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में वह आमिर खान के साथ रेड कार्पेट पर पोज देती और गर्मजोशी से मुलाकात करती दिखाई दीं। इस मौके पर आमिर खान नीले रंग की टी-शर्ट और जींस में नजर आए, जबकि रेचल शेली ने सफेद रंग की ड्रेस पहनी थी। तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने 'लगान' के 25 साल पूरे होने की खुशी जाहिर की और कार्यक्रम के आयोजकों का आभार भी व्यक्त किया। फैंस ने सोशल मीडिया पर जताई खुशी आमिर खान और रेचल शेली की मुलाकात ने फिल्म प्रेमियों को भावुक कर दिया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे यादगार पल बताया। कई प्रशंसकों ने लिखा कि दोनों कलाकारों को एक साथ देखकर बचपन की यादें ताजा हो गईं। कुछ लोगों ने इच्छा जताई कि दोनों कलाकार भविष्य में किसी भारतीय फिल्म में फिर साथ काम करें। वहीं कई यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में फिल्म के किरदारों का जिक्र करते हुए दिलचस्प प्रतिक्रियाएं भी दीं। पहले भी साझा किया था खास संदेश इस वर्ष भारत में 'लगान' की री-रिलीज के दौरान भी रेचल शेली ने एक वीडियो साझा कर फिल्म से जुड़ी अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं। उन्होंने कहा था कि फिल्म बनाना कलाकारों और पूरी टीम का काम होता है, लेकिन दर्शकों का प्यार ही किसी फिल्म को हमेशा जीवित रखता है। उन्होंने यह भी बताया कि 'लगान' उनके करियर का बेहद अहम हिस्सा रही है और इस फिल्म से जुड़ी यादें आज भी उनके साथ हैं। भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल है 'लगान' निर्देशक आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी 'लगान' वर्ष 2001 में रिलीज हुई थी। ब्रिटिश शासनकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में एक गांव की कहानी दिखाई गई थी, जहां ग्रामीण अंग्रेज अधिकारियों को क्रिकेट मैच की चुनौती देकर भारी कर (लगान) से राहत पाने की कोशिश करते हैं। फिल्म में आमिर खान, ग्रेसी सिंह, रेचल शेली समेत कई कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं। ए.आर. रहमान का संगीत, दमदार कहानी और शानदार अभिनय इसकी सबसे बड़ी खूबियां रहीं। ऑस्कर तक पहुंची थी फिल्म 'लगान' ने भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्म को एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए नामांकन मिला था। आज भी इसे भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाता है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Alia Bhatt joins Tumbbad 2 alongside Sohum Shah and Nawazuddin Siddiqui for the upcoming fantasy horror sequel.
Alia Bhatt की 'Tumbbad 2' में हुई एंट्री, Sohum Shah और Nawazuddin Siddiqui के साथ आएंगी नजर

हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म 'तुम्बाड' के सीक्वल को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि वह 'Tumbbad 2' का हिस्सा बनने जा रही हैं। फिल्म में उनके साथ सोहम शाह और नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। आलिया की एंट्री के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। फैंस अब इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को लेकर पहले से ज्यादा उत्साहित हैं। सोशल मीडिया पर हुआ आधिकारिक ऐलान फिल्म के अभिनेता और निर्माता सोहम शाह ने सोशल मीडिया के जरिए आलिया भट्ट का स्वागत किया। उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। #Tumbbad2 में आपका स्वागत है, @aliaabhatt। #PralayAayega." इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। आलिया भट्ट ने जताई खुशी फिल्म से जुड़ने पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए आलिया भट्ट ने कहा कि 'तुम्बाड' उन फिल्मों में से है, जिसने पहली बार देखने के बाद से ही उन पर गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं जो अपनी अलग दुनिया रचती हैं और रिलीज के कई साल बाद भी दर्शकों की कल्पनाओं में जीवित रहती हैं। उनके मुताबिक, ऐसी कहानी का हिस्सा बनना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। आलिया ने यह भी कहा कि वह सोहम शाह और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं और दर्शकों को फिल्म की नई दुनिया दिखाने का इंतजार कर रही हैं। 'तुम्बाड' ने बनाई थी अलग पहचान साल 2018 में रिलीज हुई 'तुम्बाड' को शुरुआत में भले ही सीमित सफलता मिली हो, लेकिन समय के साथ यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक बन गई। फिल्म की रहस्यमयी कहानी, शानदार सिनेमैटोग्राफी और अनोखे फैंटेसी-हॉरर अंदाज ने इसे दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई। बाद में दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज होने पर भी फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। कब रिलीज होगी 'Tumbbad 2'? 'Tumbbad 2' का निर्माण सोहम शाह फिल्म्स और पेन स्टूडियोज मिलकर कर रहे हैं। फिल्म का निर्देशन आदेश प्रसाद कर रहे हैं। निर्माताओं के अनुसार, यह फिल्म 3 दिसंबर 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी। पहली फिल्म की सफलता को देखते हुए दर्शकों को इसके सीक्वल से भी काफी उम्मीदें हैं।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
अभिनेत्री एली अवराम - बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री पर बयान
‘भूख या बेहोशी मायने नहीं रखती’, एली अवराम ने खोली इंडस्ट्री की पोल

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री को लेकर अभिनेत्री एली अवराम ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दोनों इंडस्ट्री के कामकाज के तरीके पर खुलकर बात की और बताया कि उनके अनुभव काफी अलग रहे हैं।   साउथ इंडस्ट्री में मिला शांत और व्यवस्थित माहौल एली अवराम ने कहा कि उन्होंने तमिल, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया है और दोनों ही इंडस्ट्री से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि, उनके अनुसार साउथ फिल्म इंडस्ट्री का सेट ज्यादा शांत, व्यवस्थित और सम्मानजनक होता है। वहां लोग संवाद के लिए वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं और काम का माहौल अपेक्षाकृत अनुशासित रहता है।   बॉलीवुड सेट पर जल्दी-जल्दी काम का दबाव एली ने बताया कि बॉलीवुड में काम करने का तरीका काफी तेज और दबाव भरा होता है। उन्होंने कहा कि कई बार शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुविधा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। उनके अनुसार, यहां तक कि अगर कोई कलाकार खाना भी खा रहा हो, तब भी उसे तुरंत शॉट के लिए बुला लिया जाता है। एली ने यह भी कहा, “यहां तक कि अगर आप बेहोश भी हो जाएं, तब भी आपको शॉट देना पड़ सकता है।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह अनुभव हर प्रोडक्शन या टीम के साथ अलग हो सकता है।   हालिया प्रोजेक्ट में बदला अनुभव एली अवराम ने बताया कि हाल ही में उन्होंने एक नेटफ्लिक्स प्रोजेक्ट पर काम किया, जहां का अनुभव काफी बेहतर रहा। वहां पूरी टीम ने कलाकारों की सुविधा, आराम और खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा, जिसे उन्होंने बेहद सकारात्मक और सुखद अनुभव बताया।   फिल्मी करियर एली अवराम ने 2013 में फिल्म ‘मिक्की वायरस’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। वह रियलिटी शो ‘बिग बॉस 7’ में भी नजर आईं और बाद में ‘किस किसको प्यार करूं’ जैसी फिल्मों से उन्हें पहचान मिली।

Unknown अप्रैल 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0