सलमान खान

Salman Khan
सलमान खान ने 'मातृभूमि' से अपना दमदार नया लुक किया जारी, सोशल मीडिया पर फैंस ने की जमकर तारीफ

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने अपनी आगामी फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' से अपना नया लुक सोशल मीडिया पर साझा किया है। बारिश के बीच हरे-भरे प्राकृतिक माहौल में खिंचवाई गई तस्वीरों में सलमान ब्लैक बनियान, रिप्ड जींस और काउबॉय हैट में बेहद दमदार अंदाज में नजर आए। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में सिर्फ "MAATRUBHUMI" लिखा, जिसने फिल्म को लेकर प्रशंसकों की उत्सुकता और बढ़ा दी।   रग्ड लुक ने जीता फैंस का दिल   सलमान के नए लुक में उनका फिट फिजीक और रग्ड अवतार चर्चा का विषय बन गया। पोस्ट शेयर होते ही लाखों लाइक्स और हजारों कमेंट्स आए। फैंस ने उन्हें "ब्लॉकबस्टर लुक", "बॉलीवुड का असली टाइगर" और "ईद से पहले बड़ा धमाका" जैसे कमेंट्स के साथ सराहा। कई प्रशंसकों ने फिल्म की रिलीज डेट का भी अपडेट मांगा।   रिलीज डेट का इंतजार   'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं, जबकि फिल्म का निर्माण सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले किया गया है। फिल्म में चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। हालांकि, निर्माताओं ने अभी तक नई रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Pakistan Coast Guard camp in Jiwani, Gwadar, after the claimed BLA suicide attack in Balochistan.
ग्वादर के जिवानी में आत्मघाती हमले का दावा, BLA बोला- 30 से ज्यादा पाकिस्तानी जवान मारे गए

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी क्षेत्र में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के एक कैंप पर कथित आत्मघाती हमले का दावा किया गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा है कि उसके आत्मघाती हमलावर ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार, सेना या किसी आधिकारिक एजेंसी ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। BLA ने क्या दावा किया? BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच के नाम से जारी बयान में कहा गया है कि संगठन की मजीद ब्रिगेड ने ग्वादर जिले के जिवानी के पनवान इलाके में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप को निशाना बनाया। संगठन का दावा है कि आत्मघाती हमलावर पहले सुरक्षा कैंप के भीतर प्रवेश करने में सफल रहे और इसके बाद विस्फोट किया, जिससे भारी नुकसान हुआ। जिवानी क्यों है महत्वपूर्ण? जिवानी, ग्वादर जिले का एक रणनीतिक तटीय क्षेत्र है। यह अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जाता है। वायरल वीडियो पर नहीं हुई पुष्टि हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Bahotblch नाम के अकाउंट से साझा किया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हमले का है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी है। पाकिस्तान की ओर से नहीं आया बयान हमले के दावे के बावजूद पाकिस्तान सरकार, सेना या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। इसलिए हताहतों की संख्या और घटना के वास्तविक स्वरूप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Maatrubhumi
सलमान खान फिल्म्स का बयान- फिल्म अभी सेंसर बोर्ड को भेजी ही नहीं गई, रिलीज डेट पर भी जारी है काम

मुंबई, एजेंसियां। सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही सेंसर बोर्ड (CBFC) से जुड़े विवाद की खबरों पर आखिरकार मेकर्स ने चुप्पी तोड़ दी है। हाल के दिनों में दावा किया जा रहा था कि फिल्म का सर्टिफिकेशन रोक दिया गया है और यह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में अटक गई है। इन खबरों के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर प्रशंसकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई थी।   इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए सलमान खान फिल्म्स (SKF) ने आधिकारिक बयान जारी किया। प्रोडक्शन हाउस ने स्पष्ट किया कि फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास भेजा ही नहीं गया है। ऐसे में सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म रोकने या सर्टिफिकेट देने से इनकार करने जैसी खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।   आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा  सलमान खान फिल्म्स ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा कि फिल्म को लेकर प्रसारित की जा रही अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। मेकर्स ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म से जुड़ी हर आधिकारिक जानकारी केवल सलमान खान फिल्म्स के अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही साझा की जाएगी।   क्या है मामला ? गौरतलब है कि निर्देशक अपूर्व लाखिया की इस फिल्म का शुरुआती नाम 'बैटल ऑफ गलवान' था। फिल्म 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष से प्रेरित बताई जाती है। बाद में कहानी के व्यापक भावनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसका नाम बदलकर 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' कर दिया गया।   फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। पहले इसकी रिलीज अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थी, लेकिन इसे आगे बढ़ा दिया गया। फिलहाल निर्माता नई रिलीज डेट तय करने में जुटे हैं। ऐसे में मेकर्स ने साफ कर दिया है कि सेंसर बोर्ड से जुड़े विवाद की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और फिल्म की आधिकारिक प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Salman Khan Delhi High Court
'काला हिरण' विवाद: सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई टली, 1 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिनेता सलमान खान और विवादित फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी' को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फिल्म की शूटिंग, प्रमोशन और रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली सलमान खान की याचिका पर सुनवाई टाल दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को रोस्टर बेंच के समक्ष होगी।   सलमान खान ने कोर्ट से मांगी थी अंतरिम राहत   दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सलमान खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने दलील दी कि फिल्म निर्माता अभिनेता की अनुमति के बिना उनके जीवन और सार्वजनिक छवि का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म का टीजर पहले ही जारी किया जा चुका है और निर्माताओं को ऐसा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कोर्ट से तत्काल अंतरिम रोक लगाने की मांग की।   निर्माताओं ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें याचिका की प्रति हाल ही में प्राप्त हुई है, इसलिए जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक है। वहीं, सलमान खान के वकील ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि प्रतिवादियों को पहले ही विधिवत नोटिस भेजा जा चुका है और इसकी जानकारी अदालत को भी दी गई थी।   धमकियों का भी किया गया जिक्र सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माताओं के वकील ने अदालत को बताया कि फिल्म से जुड़े विवाद के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और इस संबंध में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। दूसरी ओर, सलमान पक्ष ने कहा कि अभिनेता की पहचान और छवि का बिना अनुमति इस्तेमाल लगातार जारी है, जिससे उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।   दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सलमान खान के वकील को सभी आवश्यक दस्तावेज प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी गई, जहां अदालत अंतरिम राहत और अन्य कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Salman Khan Kala Hiran
सलमान खान ने 'काला हिरण' फिल्म के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, टीजर और रिलीज पर रोक लगाने की मांग

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने विवादित फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभिनेता ने फिल्म के टीजर, प्रचार सामग्री और रिलीज पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की है। यह फिल्म कथित तौर पर 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित बताई जा रही है। इसी दिन फिल्म का फर्स्ट लुक भी जारी किया गया, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।   व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप याचिका में सलमान खान का कहना है कि फिल्म निर्माता उनकी अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका आरोप है कि फिल्म की प्रचार सामग्री, पोस्टर और मुख्य किरदार की प्रस्तुति उन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म के मुख्य पात्र का लुक, नाम और अभिनेता के चर्चित नीले ब्रेसलेट जैसी चीजें सीधे तौर पर उनकी छवि से जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं।   अदालत से अंतरिम राहत की मांग सलमान खान ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि मामले पर अंतिम फैसला आने तक फिल्म के निर्माण, प्रचार, वितरण, स्ट्रीमिंग और रिलीज पर अस्थायी रोक लगाई जाए। याचिका में निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स, निर्देशक भरत श्रीनेत और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों को पक्षकार बनाया गया है। अभिनेता का कहना है कि फिल्म की रिलीज से उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है और 1998 के मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाही पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।   फर्स्ट लुक रिलीज के बाद बढ़ा विवाद फिल्म का फर्स्ट लुक जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ दर्शकों ने फिल्म के कथित संदर्भों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सलमान खान के प्रशंसकों ने भी आपत्ति जताई है। अब सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि फिल्म की रिलीज और प्रचार पर अंतरिम रोक लगाई जाएगी या नहीं।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Varun Dhawan mimicking Salman Khan during a promotional event as viral video sparks online reactions
सलमान खान की मिमिक्री करना वरुण धवन को पड़ा भारी, एक छोटी गलती पर सोशल मीडिया ने किया ट्रोल

बॉलीवुड अभिनेता Varun Dhawan इन दिनों अपनी आगामी फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इसी बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह बॉलीवुड के दिग्गज सितारों की मिमिक्री करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो में हुई एक छोटी सी गलती ने उन्हें ट्रोलर्स के निशाने पर ला दिया। क्या है वायरल वीडियो में? सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वरुण धवन कुछ लोगों के साथ बातचीत करते दिखाई देते हैं। वीडियो का कॉन्सेप्ट यह है कि अगर बॉलीवुड सितारे क्रिकेट मैदान पर उतरें तो उनका अंदाज कैसा होगा। इस दौरान वरुण से पूछा जाता है कि अगर Salman Khan बल्लेबाजी करें तो वह कैसे खेलेंगे। सवाल सुनते ही वरुण हाथ में बैट लेकर सलमान खान की स्टाइल कॉपी करने लगते हैं। इसके बाद वह Shah Rukh Khan का मशहूर बाहें फैलाने वाला पोज भी देते हैं और अंत में Govinda के अंदाज में डांस स्टेप्स करके दिखाते हैं। वीडियो में मौजूद लोग उनकी एक्टिंग देखकर हंसते और एन्जॉय करते नजर आते हैं। आखिर किस बात पर भड़के यूजर्स? वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की नजर एक ऐसी बात पर गई, जिसने ट्रोलिंग को जन्म दे दिया। दरअसल, सलमान खान वास्तविक जीवन में बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं, जबकि वरुण धवन ने उनकी नकल करते हुए दाएं हाथ से बैटिंग की एक्टिंग की। यही बात सलमान के फैंस को पसंद नहीं आई। कमेंट सेक्शन में कई यूजर्स ने लिखा कि अगर किसी स्टार की मिमिक्री कर रहे हैं तो उसकी बेसिक जानकारी तो होनी चाहिए। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि "सलमान भाई लेफ्टी हैं, ये भी नहीं पता?" वहीं कुछ यूजर्स ने वरुण की परफॉर्मेंस को ओवरएक्टिंग बताते हुए आलोचना की। हालांकि, कई फैंस ने इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाया गया हल्का-फुल्का वीडियो बताते हुए ट्रोलिंग को जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया भी करार दिया। 5 जून को रिलीज होगी नई फिल्म वर्कफ्रंट की बात करें तो वरुण धवन की आगामी फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म का निर्देशन उनके पिता David Dhawan ने किया है, जो लंबे समय से कॉमेडी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म में वरुण के साथ Mrunal Thakur और Pooja Hegde मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी। इसके अलावा Maniesh Paul, Chunky Pandey, Jimmy Shergill और Mouni Roy भी फिल्म का हिस्सा हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा में बना वीडियो फिल्म की रिलीज से पहले यह वीडियो इंटरनेट पर खूब चर्चा बटोर रहा है। जहां कुछ लोग वरुण की मिमिक्री स्किल्स की तारीफ कर रहे हैं, वहीं सलमान खान के फैंस उनकी छोटी सी गलती को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।  

surbhi मई 30, 2026 0
Salman Khan in intense war look from Matrubhoomi film with army backdrop and dramatic scene
कब रिलीज होगी सलमान खान की ‘मातृभूमि’? जानिए पूरा अपडेट

सलमान खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘मातृभूमि: में वॉर रेस्ट इन पीस’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म की रिलीज डेट को लेकर फैंस काफी एक्साइटेड हैं, लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई फाइनल ऑफिशियल घोषणा नहीं हुई है। रिलीज डेट फिर टली! पहले फिल्म अप्रैल 2026 में रिलीज होने वाली थी फिर खबर आई कि इसे मई 2026 में लाया जाएगा लेकिन अब मई में रिलीज होना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है लेटेस्ट अपडेट: अगर सभी अप्रूवल (सेंसर आदि) समय पर मिल जाते हैं, तो फिल्म जून 2026 में रिलीज हो सकती है क्या बदली गई फिल्म की कहानी? जी हां, रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म में बड़े बदलाव किए गए हैं: फिल्म का नाम बदला गया पहले: ‘बैटल ऑफ गलवान’ अब: ‘मातृभूमि: में वॉर रेस्ट इन पीस’ लगभग 40% फिल्म री-शूट की गई सलमान के किरदार में रोमांस और बैकस्टोरी जोड़ी गई भारत-चीन हालात में बदलाव के चलते कहानी में बदलाव गानों को मिला शानदार रिस्पॉन्स फिल्म के अब तक रिलीज हुए गानों को फैंस से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है, जिससे फिल्म का हाइप बना हुआ है। देरी की वजह क्या है? सेंसर और अप्रूवल से जुड़ी समस्याएं नए कट में कुछ तकनीकी दिक्कतें री-शूट के कारण पोस्ट-प्रोडक्शन में देरी सलमान खान के अपकमिंग प्रोजेक्ट दिल राजू के साथ नई फिल्म (2027 रिलीज की चर्चा) इस फिल्म के लिए सलमान वजन कम कर रहे हैं राज & डीके के साथ प्रोजेक्ट शूटिंग: अगस्त से शुरू

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Salman Khan and Chitrangada Singh in emotional Eid song Chaand Dekh Lena from Maatrubhumi film
‘चांद देख लेना’ रिलीज: ईद पर सलमान खान का इमोशनल गाना, फौजी की जिंदगी और रिश्तों की कुर्बानी को दिखाता है

बॉलीवुड सुपरस्टार Salman Khan की आने वाली फिल्म Maatrubhumi: May War Rest In Peace का नया गाना ‘चांद देख लेना’ रिलीज हो गया है। ईद के मौके पर आए इस गाने ने फैंस के बीच फिल्म को लेकर उत्साह और बढ़ा दिया है। यह गाना फिल्म का तीसरा ट्रैक है, जो पहले रिलीज हुए टाइटल ट्रैक और वैलेंटाइन स्पेशल सॉन्ग ‘देख लेना’ के बाद सामने आया है। ईद और इमोशन का खास मेल ‘चांद देख लेना’ सिर्फ एक फेस्टिव गाना नहीं है, बल्कि यह एक फौजी की निजी जिंदगी और उसके रिश्तों में आने वाली चुनौतियों को भी बेहद भावुक अंदाज में दिखाता है। गाने में Salman Khan और Chitrangada Singh की केमिस्ट्री देखने को मिलती है, जहां एक सैनिक की ड्यूटी और परिवार के बीच संतुलन की कहानी को बारीकी से पेश किया गया है। गाने में दिखी रिश्तों की कुर्बानी वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे एक आर्मी ऑफिसर अपने देश के लिए कर्तव्य निभाते हुए अपने निजी रिश्तों में कई त्याग करता है। यह गाना देशभक्ति के साथ-साथ इमोशनल कनेक्ट भी बनाता है, जो दर्शकों को गहराई से जोड़ने की कोशिश करता है। फिल्म का बदला नाम, कहानी पर फोकस फिल्म का नाम पहले ‘Battle of Galwan’ रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर Maatrubhumi: May War Rest In Peace कर दिया गया। यह फिल्म 2020 में भारत और चीन के बीच हुए Galwan Valley clash पर आधारित है, जो भारतीय सेना के साहस और बलिदान को दर्शाती है। कब रिलीज होगी फिल्म? पहले यह फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ाकर जुलाई या अगस्त 2026 की जा सकती है। डायरेक्शन और आने वाले प्रोजेक्ट्स फिल्म का निर्देशन Apoorva Lakhia ने किया है, जो इससे पहले ‘Shootout at Lokhandwala’ और ‘Haseena Parker’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के बाद सलमान खान एक बड़े एक्शन प्रोजेक्ट पर भी काम करने वाले हैं, जिसमें उनके साथ Vamsi Paidipally और निर्माता दिल राजू जुड़े हो सकते हैं। इसके अलावा वह Raj & DK के साथ एक सुपरहीरो एक्शन-कॉमेडी पर भी चर्चा में हैं।

surbhi मार्च 19, 2026 0
सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवां’ का बदला नाम, अब इस नाम से रिलीज होगी फिल्म

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म बैटल ऑफ गलवां का नाम बदल दिया गया है। मेकर्स ने रिलीज से पहले फिल्म का नया टाइटल घोषित कर दिया है। अब यह फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ के नाम से सिनेमाघरों में रिलीज होगी। सलमान खान ने सोशल मीडिया पर फिल्म का नया पोस्टर साझा करते हुए नए नाम की घोषणा की। पोस्टर में वह सेना की वर्दी में नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर खून लगा हुआ है और बैकग्राउंड में युद्ध का दृश्य दिखाई दे रहा है, जिसमें सैनिक भी नजर आ रहे हैं।   रिलीज डेट को लेकर सस्पेंस फिल्म पहले 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन नए पोस्टर में रिलीज डेट का कोई जिक्र नहीं किया गया है। इसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या फिल्म की रिलीज डेट भी आगे बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल मेकर्स की ओर से नई रिलीज डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि फिल्म के नाम बदलने के बाद दर्शकों में इसे लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।

Unknown मार्च 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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