Aadhaar Update

New Aadhaar app interface showcasing face authentication, QR sharing and biometric security features.
बंद हुआ mAadhaar ऐप, क्या नए Aadhaar ऐप पर ट्रांसफर करना होगा पुराना अकाउंट? जानिए सभी जरूरी फीचर्स

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने पुराने mAadhaar ऐप को बंद कर दिया है और अब यह ऐप Google Play Store तथा Apple App Store से हटा दिया गया है। इसकी जगह UIDAI का नया और अधिक सुरक्षित Aadhaar ऐप लॉन्च किया गया है, जो यूजर्स को बेहतर सुरक्षा, अधिक नियंत्रण और कई नए फीचर्स प्रदान करता है। हालांकि mAadhaar ऐप बंद होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुराने अकाउंट को नए ऐप में ट्रांसफर करना होगा? इसका जवाब है—नहीं। पुराने mAadhaar अकाउंट को ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं UIDAI के नए Aadhaar ऐप में आपको पुराने mAadhaar अकाउंट को माइग्रेट या ट्रांसफर करने की आवश्यकता नहीं है। यूजर्स नए ऐप को एक फ्रेश यूजर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। लॉगिन के लिए आधार नंबर, फेस ऑथेंटिकेशन और अन्य पहचान सत्यापन विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। नया ऐप पूरी तरह डिजिटल अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। नए Aadhaar ऐप में क्या है खास? नया Aadhaar ऐप केवल डिजिटल आधार दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई एडवांस फीचर्स जोड़े गए हैं। फेस ऑथेंटिकेशन और बेहतर सुरक्षा पुराने mAadhaar ऐप में OTP और PIN आधारित लॉगिन सिस्टम था। नए ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन और बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक जैसे आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं। QR कोड के जरिए आधार शेयरिंग अब आपका आधार डिजिटल QR कोड के रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे आप आवश्यकता के अनुसार आसानी से आधार साझा कर सकते हैं। Selective Sharing फीचर नए ऐप में Masked Aadhaar और QR आधारित Selective Sharing फीचर दिया गया है। इसके जरिए आप केवल उतनी ही जानकारी साझा कर सकते हैं, जितनी सामने वाले व्यक्ति या संस्था को जरूरी हो। नाम और पता अपडेट करने की सुविधा यूजर्स नए ऐप की मदद से आधार में नाम और पते से जुड़ी त्रुटियों को सुधारने के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। एक ऐप में जोड़ सकते हैं 5 प्रोफाइल नए Aadhaar ऐप की सबसे उपयोगी सुविधाओं में से एक है मल्टी-प्रोफाइल सपोर्ट। एक मोबाइल नंबर से लिंक अधिकतम 5 प्रोफाइल जोड़ी जा सकती हैं। माता-पिता अपने बच्चों के आधार प्रोफाइल भी उसी ऐप में मैनेज कर सकते हैं। अलग-अलग परिवार के सदस्यों के आधार को एक ही डिवाइस में सुरक्षित रखा जा सकता है। बायोमेट्रिक लॉक- अनलॉक होगा आसान नए ऐप में बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक का विकल्प सीधे होम स्क्रीन पर उपलब्ध है। इससे यूजर्स जरूरत पड़ने पर तुरंत अपने बायोमेट्रिक डेटा को सुरक्षित कर सकते हैं। क्यों बेहतर है नया Aadhaar ऐप? नया ऐप केवल डिजिटल पहचान पत्र नहीं बल्कि एक सुरक्षित डिजिटल पहचान प्रबंधन प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है। फेस ऑथेंटिकेशन, QR आधारित शेयरिंग, मल्टी-प्रोफाइल सपोर्ट और बायोमेट्रिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं इसे पुराने mAadhaar ऐप की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाती हैं।  

surbhi जून 3, 2026 0
User setting up new Aadhaar App with face authentication and secure login features
mAadhaar ऐप बंद होने से पहले नए Aadhaar App पर ऐसे करें शिफ्ट, जानिए पूरा तरीका

Unique Identification Authority of India यानी UIDAI जल्द ही पुराने mAadhaar ऐप को बंद करने जा रहा है। ऐसे में अब यूजर्स को नए Aadhaar App पर शिफ्ट होना होगा। नया ऐप पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित, स्मार्ट और प्राइवेसी फ्रेंडली फीचर्स के साथ आता है। हालांकि, एक जरूरी बात यह है कि पुराने mAadhaar ऐप का डेटा अपने-आप नए ऐप में ट्रांसफर नहीं होगा। यानी यूजर्स को नए ऐप में दोबारा अकाउंट सेटअप करना पड़ेगा। अच्छी बात यह है कि यह प्रक्रिया बेहद आसान है और कुछ मिनटों में पूरी की जा सकती है। नए Aadhaar App को ऐसे करें सेटअप 1. नया ऐप डाउनलोड करें सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में Aadhaar App को डाउनलोड करें। एंड्रॉयड यूजर्स इसे Google Play Store और iPhone यूजर्स App Store से इंस्टॉल कर सकते हैं। 2. जरूरी Permissions Allow करें ऐप इंस्टॉल होने के बाद Camera, SMS और Call Permissions को Allow करें। ये Permissions वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन के लिए जरूरी होती हैं। 3. Registration शुरू करें अब “Begin Journey” बटन पर टैप करें और फिर “Continue to Register” ऑप्शन चुनें। 4. Aadhaar Number दर्ज करें इसके बाद अपना Aadhaar Number डालें और उसे कन्फर्म करें। 5. Terms and Conditions स्वीकार करें स्क्रीन पर दिए गए Terms and Conditions को ध्यान से पढ़ें और “Continue” बटन दबाएं। 6. SMS Authentication पूरा करें अब आपके मोबाइल नंबर के जरिए SMS Authentication होगा, जिससे आपकी पहचान वेरिफाई की जाएगी। 7. Facial Recognition करें ऐप अब Facial Recognition के लिए कहेगा। इसके लिए अपने चेहरे को कैमरे के सामने दिखाए गए सर्कल के अंदर रखें। 8. सिक्योर PIN सेट करें अंत में ऐप की सुरक्षा के लिए 6 अंकों का मजबूत PIN सेट करें। भविष्य में इसी PIN से ऐप में जल्दी लॉगिन किया जा सकेगा। सेटअप पूरा होते ही नया Aadhaar App आपकी जानकारी ऑटोमैटिक तरीके से फेच कर लेगा। नए Aadhaar App के बड़े फायदे बेहतर Privacy और Security नया ऐप यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित Identity Verification और मजबूत Data Privacy देता है। QR Code आधारित पहचान शेयरिंग अब आप डिजिटल Aadhaar QR Code शेयर करते समय अपनी निजी जानकारी जैसे पूरा पता छिपा सकते हैं। Face Unlock और Fingerprint Support ऐप में Face Unlock और Fingerprint Authentication जैसी एडवांस सिक्योरिटी सुविधाएं मिलती हैं। Offline Access की सुविधा इंटरनेट न होने पर भी यूजर्स अपनी Aadhaar Details एक्सेस कर सकते हैं। एक डिवाइस में 5 प्रोफाइल जोड़ने की सुविधा यूजर्स एक ही डिवाइस में परिवार के 5 सदस्यों की प्रोफाइल सुरक्षित तरीके से जोड़ सकते हैं। Digital Credentials का वन-स्टॉप समाधान यह ऐप Aadhaar से जुड़ी सभी डिजिटल सेवाओं और वेरिफिकेशन के लिए एक ऑल-इन-वन प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगा। नया Aadhaar App खासतौर पर डिजिटल सुरक्षा और यूजर प्राइवेसी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जिससे Aadhaar से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित हो जाएगा।  

surbhi मई 27, 2026 0
Tender scam
Tender scam: आरोपी इंजीनियर को सरेंडर के बाद मिली बेल

रांची। ग्रामीण विकास विभाग में हुए टेंडर घोटाला मामले के आरोपी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर संतोष कुमार को बेल मिल गई है। उसने बुधवार को ही रांची स्थित PMLA की स्पेशल कोर्ट में सरेंडर किया था। सरेंडर के बाद कोर्ट ने संतोष कुमार को बेल दे दी। उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके, पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ने की शर्त पर बेल मिली है। 14 आरोपियों के खिलाफ समनः इस मामले में ED  ने हाल ही में प्रमोद कुमार सहित 14 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया है। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों के विरुद्ध समन जारी कर दिया है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब तक कई आरोपियों ने सरेंडर किया है और उन्हें बेल मिल गई है।

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
Woman updating Aadhaar and PAN details online after marriage using a laptop at home.
शादी के बाद Aadhaar और PAN में नाम बदलना हुआ आसान, अब घर बैठे करें पूरा अपडेट

भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने अब सरकारी प्रक्रियाओं को पहले से कहीं अधिक सरल बना दिया है। शादी के बाद महिलाओं के लिए अपने आधिकारिक दस्तावेजों में नाम या उपनाम (सरनेम) बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन पहले यह काफी जटिल और समय लेने वाला काम माना जाता था। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी है, जिससे आप बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाए घर बैठे ही अपने Aadhaar और PAN कार्ड में नाम अपडेट कर सकती हैं। क्यों जरूरी है नाम अपडेट करना? शादी के बाद अगर आपने अपना सरनेम बदला है, तो बैंकिंग, टैक्स, पासपोर्ट, और अन्य सरकारी सेवाओं में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए आधार और पैन में सही नाम होना बेहद जरूरी है। PAN कार्ड में नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया PAN कार्ड में नाम अपडेट करने के लिए आप Protean (NSDL) या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं। स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं NSDL (Protean) या UTIITSL पोर्टल खोलें। एप्लीकेशन टाइप चुनें ‘Changes or Correction in existing PAN data’ विकल्प पर क्लिक करें। व्यक्तिगत जानकारी भरें अपना मौजूदा PAN नंबर, नया नाम (विवाहित नाम), जन्म तिथि और मोबाइल नंबर दर्ज करें। टोकन नंबर प्राप्त करें फॉर्म सबमिट करने के बाद एक टोकन नंबर मिलेगा, जिसे सुरक्षित रखें। दस्तावेज अपलोड करें पहचान प्रमाण और मैरिज सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी अपलोड करें। फीस का भुगतान करें लगभग ₹100-110 का ऑनलाइन भुगतान करें। अपडेटेड e-PAN प्राप्त करें कुछ दिनों में e-PAN ईमेल पर मिल जाएगा, जबकि फिजिकल कार्ड 2-3 हफ्तों में आपके पते पर पहुंचेगा। Aadhaar में नाम अपडेट करने की प्रक्रिया Aadhaar में नाम बदलने के लिए आपको UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: myAadhaar पोर्टल पर लॉग-इन करें वेबसाइट पर जाकर ‘Login’ पर क्लिक करें। OTP के जरिए सत्यापन करें आधार नंबर डालें और OTP से लॉग-इन करें। अपडेट सेक्शन में जाएं ‘Name/Gender/Date of Birth & Address Update’ पर क्लिक करें। नाम (Name) विकल्प चुनें ‘Update Aadhaar Online’ में जाकर Name चुनें। नया नाम दर्ज करें अपना नया विवाहित नाम सही स्पेलिंग के साथ भरें। मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करें जरूरी दस्तावेज के रूप में मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करें। ₹50 का भुगतान करें ऑनलाइन फीस जमा करें। स्टेटस ट्रैक करें SRN नंबर से आप अपने आवेदन की स्थिति चेक कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बातें जो ध्यान रखें नाम की स्पेलिंग बिल्कुल सही दर्ज करें मैरिज सर्टिफिकेट साफ और वैध होना चाहिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक्टिव होना जरूरी है PAN और Aadhaar में एक जैसा नाम होना चाहिए

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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