पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों के बाद हलचल तेज हो गई है। Mamata Banerjee ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। चुनाव परिणामों के बाद अब टीएमसी राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने जा रही है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विपक्ष की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा होगी। नगर निकायों को लेकर रणनीति बनेगी पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक का प्रमुख मुद्दा राज्य के नगर निकायों के कामकाज से जुड़ा होगा। पश्चिम बंगाल के कई नगर निकायों में अभी भी टीएमसी का नियंत्रण है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर सहयोग में कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। टीएमसी नेतृत्व इस बात पर चर्चा करेगा कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी अपने नगर निकायों और संगठनात्मक ढांचे को कैसे मजबूत बनाए रखे। अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर KMC का नोटिस यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब Kolkata Municipal Corporation (KMC) ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को कथित अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किया है। KMC अधिनियम की धारा 400(1) के तहत जारी इन नोटिसों में संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। अधिकारियों ने संबंधित संपत्तियों की दीवारों पर नोटिस की प्रतियां भी चस्पा की हैं। शुभेंदु अधिकारी ने दिए थे संकेत पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने पिछले सप्ताह ही इन संपत्तियों की जांच के संकेत दिए थे। उन्होंने बिना नाम लिए अभिषेक बनर्जी को “मिस्टर नेफ्यू” कहकर संबोधित किया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि उनके पास एक कंपनी से जुड़ी 24 संपत्तियों की सूची है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पिछली टीएमसी सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। दो नए जांच आयोग बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो अलग-अलग आयोग बनाने की घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज Biswajit Basu को सौंपी जाएगी। वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच रिटायर्ड जज Samapti Chatterjee की अध्यक्षता में गठित आयोग करेगा। सरकार के अनुसार, दोनों आयोग जून महीने से अपना काम शुरू कर देंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने पहली बार पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बड़ी बैठक की। कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से हार से निराश न होने और संगठन को दोबारा मजबूत करने की अपील की। ‘तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं झुकेगी’ ममता बनर्जी ने बैठक में कहा,“जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने रहेंगे, उनसे कहती हूं कि क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालयों का पुनर्निर्माण कीजिए, उन्हें रंगिए और फिर से खोलिए। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी उन्हें रंग दूंगी।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं और पार्टी फिर से जनता के बीच मजबूती से खड़ी होगी। बंगाल में TMC को मिली बड़ी हार इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार Suvendu Adhikari के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। वहीं ममता बनर्जी को भी अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट से हराया था। ‘जनादेश लूटा गया’ बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को छीना गया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने बढ़ाया उम्मीदवारों का मनोबल तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे उम्मीदवारों ने लगातार धमकियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा।” TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को बचाए रखना और नेताओं के संभावित पलायन को रोकना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।
Suvendu Adhikari PA Murder: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. भाजपा नेताओं ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने लगाया बड़ी साजिश का आरोप भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हिंसा फैलाने की पहले से तैयारी की गयी थी. मिश्रा ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग नवीन मिश्रा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति चरम पर पहुंच गयी है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य में हिंसा और बढ़ सकती है. भाजपा नेताओं का कहना है कि बंगाल में लोकतांत्रिक माहौल खत्म होता जा रहा है और विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. राजीव कुमार की भूमिका पर भी उठाये सवाल भाजपा नेता ने पूर्व पुलिस अधिकारी और वर्तमान राज्यसभा सांसद राजीव कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाये. उन्होंने डीजीपी और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) से मांग की कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाये. मिश्रा ने दावा किया कि जिस इलाके में यह हत्या हुई, वह बांग्लादेश सीमा के करीब है और इस घटना में कई बड़े लोगों की संलिप्तता हो सकती है. उन्होंने पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और सबूतों से छेड़छाड़ रोकने की मांग की. चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद इलाके में तनाव चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद मध्यमग्राम और उत्तर 24 परगना जिले में तनाव का माहौल है. इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया. भाजपा ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए एक अधिकार प्राप्त समिति गठित की जाये, ताकि निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी हो सके और दोषियों की पहचान हो सके. TMC की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है. हालांकि, पार्टी पहले भी चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को खारिज करती रही है और कई घटनाओं को स्थानीय विवाद या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताया है. फिलहाल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को गहराई से बदल दिया है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए यह हार सिर्फ सत्ता खोने तक सीमित नहीं है, बल्कि 15 साल में खड़े किए गए पूरे राजनीतिक ढांचे पर सवाल खड़े कर रही है। सिस्टम पर पड़ा झटका TMC लंबे समय से ‘कल्याणकारी राजनीति’ और मजबूत संगठनात्मक मॉडल के दम पर राज्य की राजनीति में अजेय मानी जाती थी। लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने न सिर्फ चुनावी जीत हासिल की, बल्कि उस मॉडल को भी चुनौती दी, जिस पर पार्टी टिकी थी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना सत्ता के सहारे क्या TMC खुद को एकजुट रख पाएगी। बदल गया वोट बैंक का समीकरण आंकड़ों के अनुसार, राज्य की राजनीतिक जमीन में बड़ा बदलाव आया है। BJP का वोट शेयर 2021 के 38% से बढ़कर करीब 44.8% तक पहुंच गया, जबकि TMC का आधार 48% से घटकर 41.7% पर आ गया। खासकर अर्ध-शहरी इलाकों में पार्टी को भारी नुकसान हुआ, जिसने चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। मतदाता सूची और सीटों पर असर करीब 177 सीटों पर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या पिछली बार के जीत के अंतर से ज्यादा बताई जा रही है। इन सीटों पर BJP ने मजबूत प्रदर्शन किया, जिसने TMC की स्थिति को और कमजोर किया। संगठन की कमजोरी उजागर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC की सबसे बड़ी ताकत—केंद्रीकृत नेतृत्व—अब उसकी कमजोरी बन गई है। पार्टी पूरी तरह ममता बनर्जी के चेहरे पर निर्भर रही है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के कमजोर पड़ते ही संगठन के पास खुद को संभालने का मजबूत विकल्प नहीं बचा। भ्रष्टाचार के आरोपों का असर शिक्षक भर्ती घोटाले समेत कई भ्रष्टाचार के आरोपों ने सत्ता विरोधी माहौल को और मजबूत किया। इसका सीधा फायदा BJP को मिला। साथ ही, TMC का अन्य राज्यों में विस्तार न कर पाना भी उसके लिए बड़ी रणनीतिक कमी साबित हुआ। अभिषेक बनर्जी के सामने चुनौती अभिषेक बनर्जी के लिए अब पार्टी को संभालना बड़ी जिम्मेदारी होगी। सत्ता से बाहर होने के बाद आंतरिक कलह और नेताओं के संभावित दल-बदल को रोकना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजनीति में TMC की भूमिका भी कमजोर पड़ सकती है। वापसी की राह आसान नहीं ममता बनर्जी ने पहले नंदीग्राम और सिंगूर जैसे आंदोलनों के जरिए मजबूत वापसी की थी, लेकिन अब हालात अलग हैं। 71 साल की उम्र में एक मजबूत BJP के सामने फिर से शुरुआत करना आसान नहीं माना जा रहा। क्या खत्म हो रहा एक राजनीतिक युग? यह नतीजे उस राजनीतिक दौर के अंत का संकेत भी माने जा रहे हैं, जिसकी शुरुआत 34 साल पुराने वामपंथी शासन को हटाकर हुई थी। अब TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता में वापसी से ज्यादा, खुद को नए सिरे से स्थापित करने की है। वहीं BJP के लिए भी यह परीक्षा होगी कि वह इस संवेदनशील और राजनीतिक रूप से ध्रुवीकृत राज्य में शासन को कैसे संभालती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद Abhishek Banerjee ने मंगलवार को कूचबिहार में एक विशाल रोड शो और जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को “बांग्लादेशी” कहकर उनकी पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने इसे न सिर्फ राजनीतिक हमला बल्कि “बंगाली अस्मिता और सम्मान पर चोट” बताया। “हमारी भाषा और पहचान को निशाना बनाया जा रहा” अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा की राजनीति विभाजनकारी है और वह भाषा तथा संस्कृति के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बांग्ला बोलने वालों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। उन्हें घुसपैठिया तक कहा जा रहा है। यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय है।” उन्होंने आगे कहा कि बंगाल के लोगों की पहचान और सम्मान की रक्षा करना टीएमसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है और पार्टी इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। खान-पान पर ‘पहरा’ का आरोप सभा को संबोधित करते हुए Abhishek Banerjee ने भाजपा पर लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कई भाजपा शासित राज्यों में मछली और मांस की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही है, जो सीधे तौर पर बंगाली संस्कृति पर हमला है। “हमारे यहां मछली-भात सिर्फ खाना नहीं, हमारी परंपरा और पहचान का हिस्सा है। अगर कोई हमारी थाली तक में दखल देगा, तो बंगाल की जनता उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी,” उन्होंने कहा। मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा अभिषेक बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए खासकर राजबंशी और मतुआ समुदाय के लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का “समर्थन” इन समुदायों के लिए सिर्फ दिखावा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि एक भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे। लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है,” उन्होंने जोर देकर कहा। केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप केंद्र की Government of India पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल को उसका उचित अधिकार नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि राज्य की जनता बार-बार तृणमूल कांग्रेस को चुनती है, इसलिए केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। “दिल्ली की सरकार बंगाल के विकास को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम झुकने वाले नहीं हैं,” उन्होंने कहा। “4 मई को जनता देगी जवाब” अपने भाषण के अंत में अभिषेक बनर्जी ने भरोसा जताया कि आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता भाजपा को करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा, “4 मई को नतीजे आएंगे और उस दिन बंगाल की जनता अहंकारी और बंगाल विरोधी ताकतों को सबक सिखाएगी।” कूचबिहार की इस रैली में Abhishek Banerjee ने बंगाली पहचान, संस्कृति, खान-पान और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। उनके इस आक्रामक तेवर से साफ है कि आगामी चुनाव में टीएमसी “बंगाली अस्मिता” को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत होने की संभावना है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव Abhishek Banerjee ने वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में वही लोग वोट देंगे जो पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। अगर कोई व्यक्ति हाल ही में दिल्ली या Bihar में वोट डाल चुका है और फिर बंगाल में वोट देने आता है, तो TMC कार्यकर्ता उसे ऐसा करने से रोकेंगे। “बाहरी वोटरों से जीतना चाहती है भाजपा” Abhishek Banerjee ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party (भाजपा) बाहरी वोटरों के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में रहने वाले गैर-बंगाली लोगों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाहर से आकर वोट डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वोटर लिस्ट पर विवाद गहराया राज्य में नई वोटर लिस्ट को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। करीब 1 करोड़ पुराने नाम हटाए जाने का दावा 27 लाख लोग SIR ट्रिब्यूनल में विचाराधीन, जिन्हें इस बार वोट का अधिकार नहीं मिलेगा Abhishek Banerjee ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटने का असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि: सभी मतभेद भुलाकर चुनाव पर ध्यान दें गुटबाजी से दूर रहें पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ें उन्होंने इसे Mamata Banerjee के नेतृत्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि पार्टी को जीत दिलाए। “आत्मसंतुष्टि से बचें” Abhishek Banerjee ने कहा कि भले ही सर्वे में पार्टी की स्थिति मजबूत दिख रही हो, लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल बनाकर काम करने पर भी जोर दिया। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं का मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। TMC और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब नजर चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद को दिशा दे सकता है।
कोलकाता: West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 अपने चरम पर है। राज्य की सभी 294 सीटों पर राजनीतिक सरगर्मी तेज है, लेकिन असली मुकाबला उन चुनिंदा ‘हॉट सीट्स’ पर केंद्रित है, जो सत्ता की दिशा तय करेंगी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इन सीटों पर परिणाम न सिर्फ All India Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (BJP) के भविष्य को प्रभावित करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि ‘नबान्न’ की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। प्रमुख ‘हॉट सीट्स’ और उनका समीकरण: 1. भवानीपुर: दीदी का किला मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पारंपरिक सीट भवानीपुर इस बार भी सबसे हाई-प्रोफाइल बनी हुई है। भाजपा यहां पूरी ताकत के साथ चुनौती दे रही है, जिससे यह मुकाबला प्रतिष्ठा का बन गया है। 2. नंदीग्राम: साख की जंग 2021 में सुर्खियों में रही नंदीग्राम सीट पर Suvendu Adhikari और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर है। यह सीट दोनों नेताओं की राजनीतिक साख का बड़ा इम्तिहान मानी जा रही है। 3. पानीहाटी: भावनात्मक मुद्दों का असर आरजी कर कांड से जुड़े भावनात्मक माहौल ने पानीहाटी को खास बना दिया है। यहां जनाक्रोश वोट में तब्दील होता है या नहीं, यह परिणाम तय करेगा। 4. सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग: उत्तर बंगाल की चाबी Siliguri और Darjeeling भाजपा का मजबूत गढ़ रहे हैं। टीएमसी यहां वापसी की कोशिश में है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है। 5. मालदा और मुर्शिदाबाद: कांग्रेस का फैक्टर Malda और Murshidabad में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। यहां Asaduddin Owaisi की पार्टी AIMIM और अन्य क्षेत्रीय समीकरणों ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। कांग्रेस नेताओं Mausam Noor और गनी खान चौधरी परिवार का प्रभाव भी टीएमसी के लिए चुनौती बन सकता है। 6. सिंगूर: आंदोलन की विरासत Singur, जहां से ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान की कहानी शुरू हुई, अब भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला देख रहा है। किसान और उद्योग से जुड़े मुद्दे यहां निर्णायक हैं। 7. डायमंड हार्बर और टॉलीगंज: शहरी वोटर का टेस्ट इन सीटों पर Abhishek Banerjee का प्रभाव माना जाता है। भाजपा यहां आक्रामक रणनीति के साथ घेराबंदी कर रही है। शहरी मतदाताओं का रुख यहां परिणाम तय करेगा। क्यों अहम हैं ये सीटें: सांकेतिक बढ़त: इन सीटों पर जीत पूरे क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक बढ़त देती है दिग्गजों की प्रतिष्ठा: बड़े नेताओं की साख दांव पर ध्रुवीकरण का केंद्र: भ्रष्टाचार, घुसपैठ और सुरक्षा जैसे मुद्दों की परीक्षा सीएम चेहरा तय: नतीजे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के चयन को प्रभावित करेंगे
पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावी सरगर्मी के बीच Abhishek Banerjee ने भाजपा और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने चुनावी रैलियों में धर्म की राजनीति को “छलावा” करार देते हुए इसे जनता को गुमराह करने की रणनीति बताया। कोलकाता और उत्तर बंगाल के कई इलाकों-नाटाबाड़ी, जलपाईगुड़ी और कुमारग्राम-में जनसभाओं को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि “विकास बनाम दमन” की सीधी लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म को केवल राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है। धार्मिक राजनीति पर सवाल Abhishek Banerjee ने प्रधानमंत्री मोदी के कूचबिहार दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वे मदनमोहन मंदिर तक दर्शन करने नहीं गए, जिससे उनकी धार्मिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठता है। बनर्जी ने इसे “राजनीतिक दिखावा” बताया और कहा कि भाजपा का धर्म से वास्तविक जुड़ाव नहीं, बल्कि चुनावी लाभ से है। ‘डबल इंजन सरकार’ पर निशाना तृणमूल नेता ने भाजपा के “डबल इंजन सरकार” के नारे को भी आड़े हाथों लिया। उनका आरोप था कि भाजपा के सांसद और विधायक जनता से कटे हुए हैं और चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया। उन्होंने नारायणी बटालियन, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालय और पर्यटन विकास जैसी अधूरी परियोजनाओं का मुद्दा उठाया। राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने सड़क, पुल, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक योजनाओं का हवाला दिया। ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘खाद्य साथी’, ‘युवा साथी’ और ‘बांग्लार बाड़ी’ जैसी योजनाओं को आम जनता के लिए लाभकारी बताया। चाय बागान मजदूरों के लिए बड़ा वादा जलपाईगुड़ी की रैली में बनर्जी ने चाय बागान मजदूरों की दैनिक मजदूरी ₹250 से बढ़ाकर ₹300 करने का वादा दोहराया। इसके साथ ही किसानों के लिए सस्ते बीज, कोल्ड स्टोरेज और ₹30,000 करोड़ के कृषि निवेश की घोषणा भी की गई। महंगाई और केंद्र पर आरोप महंगाई को बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने गैस, पेट्रोल, खाद और जरूरी वस्तुओं के बढ़ते दामों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही नागरिकता और अन्य मुद्दों के जरिए लोगों को डराने का आरोप भी लगाया। बनर्जी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि यह चुनाव “पहचान और अधिकार” की लड़ाई है और जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में चौथी बार तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनेगी।
पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। सिलीगुड़ी में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा- “जिस दिन ममता बनर्जी और INDI गठबंधन की सरकार बनेगी, हम पाकिस्तान को उनके घर में घुसकर मारेंगे।” क्या है पूरा मामला? हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बयान दिया था कि अगर भारत कोई कदम उठाता है, तो लड़ाई को कोलकाता तक ले जाया जा सकता है इस बयान के जवाब में अभिषेक बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा? “मैंने ख्वाजा आसिफ का नाम अपनी लिस्ट में लिख लिया है” “सरकार बनने पर हम उन्हें उनके घर में घुसकर जवाब देंगे” उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए केंद्र सरकार पर निशाना अभिषेक बनर्जी ने कहा- “अमित शाह और राजनाथ सिंह चुप हैं” “जब पाकिस्तान कोलकाता को धमकी देता है, तब कोई जवाब क्यों नहीं?” पाकिस्तान का बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था- भारत “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” की योजना बना सकता है अगर ऐसा हुआ तो “लड़ाई को कोलकाता तक ले जाया जाएगा” भारत की प्रतिक्रिया (पहले) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि पाकिस्तान की किसी भी हरकत का जवाब “अभूतपूर्व और निर्णायक” होगा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के 26वें चुनाव की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। राज्य की राजनीतिक हलचल के बीच सभी की नजरें चुनाव आयोग की ओर टिकी हैं, जो जल्द ही मतदान की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संकेत दिया है कि 15 या 16 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा संभव है। दरअसल, चुनाव आयोग की फुल बेंच हाल ही में दो दिनों तक पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने के बाद दिल्ली लौट चुकी है। इसके बाद राज्य की राजनीति में चुनाव कार्यक्रम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पर खुलकर टिप्पणी की है। चुनाव आयोग और भाजपा पर साधा निशाना अभिषेक बनर्जी के अनुरोध पर धरना समाप्त करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रभाव में काम कर रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि भाजपा की बड़ी राजनीतिक सभाओं के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित ब्रिगेड परेड ग्राउंड रैली 14 मार्च को है, और संभव है कि उसके बाद ही चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर ब्रिगेड की बैठक के बाद भी चुनाव की घोषणा होती है तो इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। हमने पहले भी देखा है कि बड़ी रैली के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाता है।” सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का भी जिक्र ममता बनर्जी ने इस मुद्दे से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग को कड़ी टिप्पणी करते हुए फटकार लगाई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अदालत के आदेश में सभी बातें लिखित रूप में नहीं हैं, लेकिन वीडियो रिकॉर्डिंग में इसे देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 25 तारीख को निर्धारित है। ममता बनर्जी ने इसे अपनी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की “महत्वपूर्ण जीत” बताया और कहा कि इससे चुनाव आयोग के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। चुनावी माहौल गर्म पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC )और भाजपा (BJP) के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। ऐसे में अब सभी की नजरें चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जो किसी भी समय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा कर सकता है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी और राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर जाएंगे।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच कोलकाता के धर्मतला में चल रहे धरना मंच से तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे को लेकर बीजेपी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार में साहस है तो संसद में ऐसा कानून लाकर दिखाए, जिसमें एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति को राजनीति में रहने की अनुमति हो। अपने संबोधन में Abhishek Banerjee ने कहा कि बीजेपी लगातार तृणमूल कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। लेकिन अगर पार्टी को वास्तव में इस मुद्दे पर आपत्ति है, तो उसके पास केंद्र में सत्ता है और संसद में बहुमत भी। ऐसे में वह “एक परिवार, एक नेता” का कानून क्यों नहीं लाती? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ऐसा कोई विधेयक संसद में लाया जाता है, तो वह स्वयं उस बिल के समर्थन में मतदान करेंगे और राजनीति से संन्यास लेने में भी पीछे नहीं हटेंगे। अपने राजनीतिक सफर का किया जिक्र अपने भाषण के दौरान Abhishek Banerjee ने अपने राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के बीच जाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया है और हर चुनाव में जनता के फैसले को स्वीकार किया है। वर्ष 2014 में उन्होंने पहली बार डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था और उसके बाद हुए चुनावों में भी उन्हें लाखों वोटों के अंतर से जीत मिली। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी परिवार की वजह से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और समर्थन का परिणाम है। साथ ही उन्होंने यह भी तंज कसा कि जो लोग खुद कभी जनता के बीच जाकर चुनावी परीक्षा नहीं देते, वही आज परिवारवाद पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठाए सवाल भाषण के दौरान Abhishek Banerjee ने Election Commission of India की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के कुछ फैसलों ने राज्य में तनाव का माहौल पैदा किया है और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ निर्णय दिल्ली के दबाव में लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और उनके ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना था कि जब बीजेपी के बड़े नेता जिस होटल में ठहरते हैं, उसी होटल में चुनाव आयोग के अधिकारी भी रुकते हैं, तो स्वाभाविक रूप से निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा होता है। “यह सिर्फ सत्ता का नहीं, न्याय का चुनाव” अपने संबोधन के अंत में Abhishek Banerjee ने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाला चुनाव केवल सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि अन्याय और राजनीतिक साजिशों के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव जनता की आवाज उठाने, विरोध दर्ज कराने और लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर है। उनका दावा था कि पश्चिम बंगाल की जनता पूरी मजबूती के साथ एकजुट होगी और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए अपना स्पष्ट जनादेश देगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।