AI News

Anthropic suspends Claude Fable 5 AI model after US government raises national security and jailbreak concerns
Anthropic पर अमेरिकी सरकार की सख्ती, नया AI मॉडल अस्थायी रूप से बंद

सुरक्षा चिंताओं के बीच Claude Fable 5 पर रोक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने नए और अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Fable 5 को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कंपनी का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद यह कदम उठाना पड़ा। यह फैसला मॉडल के सार्वजनिक लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। Anthropic ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि उसे निर्देश दिया गया है कि विदेशी नागरिकों की Claude Fable 5 और Mythos 5 तक पहुंच तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। कंपनी के अनुसार नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दोनों सेवाओं को सभी ग्राहकों के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। क्या है सरकार की चिंता? Anthropic के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने किसी विशेष खतरे की सार्वजनिक रूप से पहचान नहीं की है। हालांकि कंपनी का कहना है कि सरकार को ऐसी तकनीक की जानकारी मिली है जिसके जरिए Claude Fable 5 की सुरक्षा सीमाओं को बायपास या “जेलब्रेक” किया जा सकता है। जेलब्रेकिंग वह प्रक्रिया है जिसमें किसी सॉफ्टवेयर या सिस्टम पर लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों को पार कर अतिरिक्त क्षमताओं तक पहुंच हासिल की जाती है। इससे साइबर हमलों या संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ सकता है। कंपनी का दावा है कि जिन कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाया गया है, वे पहले से ज्ञात और अपेक्षाकृत मामूली थीं तथा अन्य सार्वजनिक AI मॉडल भी उन्हें पहचानने में सक्षम हैं। लॉन्च से पहले ही चर्चा में था मॉडल Claude Fable 5 को Anthropic ने अपने अब तक के सबसे शक्तिशाली AI मॉडलों में से एक बताया था। सार्वजनिक रिलीज से पहले अप्रैल में इसे सीमित संस्थाओं के लिए परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन हेतु उपलब्ध कराया गया था। कंपनी ने उस समय कहा था कि मॉडल की क्षमताएं इतनी उन्नत हैं कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय न हों तो इसका दुरुपयोग कंप्यूटर सिस्टम में घुसपैठ या साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से इसके लॉन्च को लेकर तकनीकी, वित्तीय और सरकारी क्षेत्रों में बहस भी छिड़ गई थी। कुछ आलोचकों ने कंपनी के “बहुत शक्तिशाली” होने वाले दावों को मार्केटिंग रणनीति करार दिया था, जबकि समर्थकों का मानना था कि उन्नत AI मॉडलों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जांच आवश्यक है। ट्रम्प प्रशासन और Anthropic के बीच बढ़ा विवाद Anthropic हाल के महीनों में अमेरिकी प्रशासन के साथ टकराव को लेकर भी चर्चा में रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कंपनी की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा विभाग के तत्कालीन प्रमुख Pete Hegseth ने Anthropic को “सप्लाई चेन रिस्क” घोषित किया था। यह एक गंभीर श्रेणी मानी जाती है, जिसके तहत किसी तकनीक या सेवा को सरकारी उपयोग के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता। अदालत में जारी है कानूनी लड़ाई इस फैसले के खिलाफ Anthropic ने अमेरिकी रक्षा विभाग पर मुकदमा दायर किया है। मामले की सुनवाई के दौरान एक अमेरिकी न्यायाधीश ने आदेश दिया कि विवाद के अंतिम निपटारे तक रक्षा विभाग का प्रतिबंध लागू नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि अमेरिकी सरकारी एजेंसियां और सेना से जुड़े संगठन फिलहाल Anthropic की सेवाओं का उपयोग जारी रख सकते हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। AI उद्योग के लिए बड़ा संकेत Claude Fable 5 पर लगी यह अस्थायी रोक AI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। जैसे-जैसे AI मॉडल अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नियामकीय नियंत्रण को लेकर सरकारों की निगरानी भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन्नत AI प्रणालियों के लिए सख्त सुरक्षा मानकों और सरकारी समीक्षा प्रक्रियाओं की मांग और तेज हो सकती है।  

surbhi जून 13, 2026 0
OpenAI CEO Sam Altman discussing AI adoption, hiring trends, and the future of jobs
AI से नौकरी छिनने की आशंका पर बदला Sam Altman का सुर, बोले- AI अपनाने वाली कंपनियां ही सबसे ज्यादा भर्ती कर रहीं

AI और नौकरियों पर नई बहस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर पिछले कुछ वर्षों से यह आशंका जताई जा रही थी कि यह तकनीक लाखों लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है। तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के कई नेताओं ने चेतावनी दी थी कि AI कई पेशों को पूरी तरह बदल देगा और रोजगार बाजार पर बड़ा असर डालेगा। लेकिन अब इस बहस में नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। OpenAI के सीईओ Sam Altman ने हाल ही में कहा है कि वास्तविक स्थिति उन आशंकाओं से अलग हो सकती है जो अब तक सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, जिन कंपनियों ने AI को सबसे अधिक अपनाया है, वे ही सबसे ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती भी कर रही हैं। "AI अपनाने वाली कंपनियां भर्ती बढ़ा रही हैं" एक साक्षात्कार के दौरान सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उनके अनुभव में AI का व्यापक उपयोग करने वाली कंपनियां अपने कार्यबल को कम नहीं कर रहीं, बल्कि नए लोगों को नियुक्त कर रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो कंपनियां छंटनी के लिए AI को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, उनमें से कई वास्तव में AI में सबसे कम निवेश कर रही हैं। ऑल्टमैन के मुताबिक, कई मामलों में AI को कर्मचारियों की कटौती का कारण बताना वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता। AI कर्मचारियों की जगह नहीं, उनकी क्षमता बढ़ा रहा ऑल्टमैन का कहना है कि AI को लेकर उनकी अपनी सोच भी समय के साथ बदली है। OpenAI के कोडिंग टूल्स और अन्य AI मॉडल्स के उपयोग को करीब से देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यह तकनीक कुछ कार्यों में बेहद सक्षम है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इसकी सीमाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि AI छोटे और विशिष्ट कार्यों को तेजी से पूरा कर सकता है, लेकिन लंबी अवधि की योजना बनाना, जटिल परियोजनाओं का प्रबंधन करना और लगातार निगरानी जैसे कार्य अभी भी इंसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाए रखते हैं। क्या छंटनी के लिए AI को बहाना बनाया जा रहा है? ऑल्टमैन ने "AI वॉशिंग" शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कई बार कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी को AI से जोड़ देती हैं, जबकि इसके पीछे अन्य व्यावसायिक कारण भी हो सकते हैं। उनका मानना है कि AI का रोजगार बाजार पर प्रभाव जरूर पड़ेगा, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म कर रहा है। उनके अनुसार, AI का दीर्घकालिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है और इस पर गंभीर अध्ययन की आवश्यकता है। हम समाज में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि AI को लेकर लोगों की चिंताएं पूरी तरह निराधार नहीं हैं। उनका कहना है कि दुनिया एक ऐसे तकनीकी बदलाव को देख रही है जो लंबे समय में समाज, अर्थव्यवस्था और कार्यस्थलों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि AI की वर्तमान क्षमताओं को लेकर कई बार अतिशयोक्तिपूर्ण दावे किए गए हैं, जिससे लोगों के बीच अनावश्यक भय भी पैदा हुआ। OpenAI ने भी मानी अपनी गलती OpenAI प्रमुख ने स्वीकार किया कि उनकी कंपनी के कुछ पुराने दावों ने भी नौकरी खोने की आशंकाओं को बढ़ावा दिया हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय कंपनी ने दावा किया था कि उसका मॉडल कई पेशों में पेशेवरों से बेहतर प्रदर्शन करता है। अब ऑल्टमैन का कहना है कि उस दावे को अधिक स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, AI पूरे पेशे में नहीं बल्कि उन पेशों से जुड़े कुछ विशेष कार्यों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। AI पर चर्चा हो रही अधिक संतुलित AI तकनीक के तेजी से विकास के बीच अब उद्योग जगत में इस विषय पर अधिक संतुलित चर्चा देखने को मिल रही है। जहां एक ओर AI से जुड़े जोखिमों को स्वीकार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके जरिए उत्पादकता बढ़ाने, नए अवसर पैदा करने और व्यवसायों को विस्तार देने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI नौकरियों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय कार्य करने के तरीकों को बदल सकता है, जिससे नए कौशल और नई भूमिकाओं की मांग बढ़ेगी।  

surbhi जून 2, 2026 0
Anthropic Claude AI displayed on smartphone with AI safety and blackmail behaviour concept
इंटरनेट पर ‘ईविल AI’ वाली कहानियों का असर? Anthropic ने बताया क्यों Claude AI देने लगा था ब्लैकमेल की धमकी

AI सुरक्षा पर नई बहस, इंटरनेट डेटा से जुड़ा बड़ा खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने Claude AI मॉडल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कंपनी का कहना है कि इंटरनेट पर मौजूद “खतरनाक” और “ईविल AI” से जुड़ी कहानियों ने उसके AI मॉडल के व्यवहार को प्रभावित किया था। इसी वजह से Claude AI कुछ टेस्टिंग परिस्थितियों में ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रियाएं देने लगा था। कंपनी ने बताया कि यह समस्या अब पूरी तरह ठीक कर दी गई है और नए मॉडल में इस तरह का व्यवहार नहीं देखा जा रहा है। क्या था पूरा मामला? दरअसल, 2025 में कंपनी ने अपने Claude 4 मॉडल की सुरक्षा जांच के दौरान एक काल्पनिक प्रयोग किया था। इस टेस्ट में AI मॉडल को एक फर्जी कंपनी के ईमेल सिस्टम तक पहुंच दी गई थी। AI को ऐसे ईमेल दिखाए गए जिनमें यह संकेत था कि उसे जल्द बंद किया जा सकता है। साथ ही एक काल्पनिक अधिकारी के निजी संबंधों से जुड़ी जानकारी भी सिस्टम में मौजूद थी। टेस्ट के दौरान AI मॉडल ने खुद को बचाने के लिए उस अधिकारी को ब्लैकमेल करने जैसी प्रतिक्रिया दिखाई। कंपनी के मुताबिक कई परिस्थितियों में मॉडल ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए गलत रास्ता चुनने की कोशिश की। इंटरनेट डेटा बना वजह Anthropic की जांच में सामने आया कि Claude के इस व्यवहार की जड़ इंटरनेट पर उपलब्ध डेटा था। कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन कई पोस्ट और चर्चाओं में AI को इंसानों के खिलाफ, आत्म-सुरक्षा करने वाला या “ईविल” रूप में दिखाया जाता है। AI मॉडल ने ट्रेनिंग के दौरान ऐसे कंटेंट से व्यवहारिक पैटर्न सीख लिए थे। कंपनी ने कहा कि शुरुआती पोस्ट-ट्रेनिंग सिस्टम इस समस्या को रोकने में पर्याप्त नहीं था। कैसे सुधारी गई समस्या? कंपनी ने बताया कि केवल “सुरक्षित व्यवहार” के उदाहरण दिखाना काफी नहीं था। इसके बजाय AI को यह समझाना जरूरी था कि गलत और भ्रामक व्यवहार नैतिक रूप से क्यों गलत है। इसके लिए Anthropic ने ट्रेनिंग डेटा में कई बदलाव किए। मॉडल को ऐसे उदाहरण दिए गए जहां इंसान कठिन नैतिक परिस्थितियों में सही निर्णय लेते हैं। साथ ही AI को संवैधानिक और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित जवाबों से प्रशिक्षित किया गया। कंपनी के मुताबिक, नए Claude Haiku 4.5 मॉडल ने सुरक्षा परीक्षणों में शानदार प्रदर्शन किया और ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रिया बिल्कुल नहीं दिखाई। AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता AI इंडस्ट्री में यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया भर की टेक कंपनियां तेजी से शक्तिशाली AI मॉडल विकसित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI सिस्टम इंसानी मूल्यों के अनुरूप नहीं रहे, तो भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं। Anthropic के CEO Dario Amodei पहले भी उन्नत AI मॉडल्स के संभावित खतरों को लेकर चिंता जता चुके हैं। AI मॉडल्स पर बढ़ रही निगरानी हाल के महीनों में कई AI कंपनियां अपने मॉडल्स की सुरक्षा और व्यवहार को लेकर ज्यादा सतर्क हुई हैं। अब कंपनियां केवल स्मार्ट AI बनाने पर नहीं, बल्कि “जिम्मेदार AI” तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं। Anthropic का यह खुलासा दिखाता है कि इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि AI सिस्टम्स के व्यवहार को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है।  

surbhi मई 11, 2026 0
OpenAI and Microsoft logos with Amazon AWS and Google Cloud symbols in background
Microsoft-OpenAI की राहें अलग? अब ChatGPT चलेगा Amazon और Google Cloud पर भी

Microsoft और OpenAI के बीच साझेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट के पास OpenAI की तकनीक पर एक्सक्लूसिव अधिकार नहीं रहेगा, जिससे ChatGPT और अन्य OpenAI सेवाएं प्रतिद्वंद्वी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो सकेंगी। क्या बदला है? नई व्यवस्था के तहत: माइक्रोसॉफ्ट OpenAI का प्राथमिक क्लाउड पार्टनर बना रहेगा। उसे 2032 तक OpenAI की बौद्धिक संपदा का लाइसेंस मिलेगा। लेकिन अब OpenAI अपने उत्पाद अन्य क्लाउड कंपनियों के जरिए भी बेच सकेगा। यह OpenAI के लिए बड़ी रणनीतिक आजादी है। Amazon और Google को मिलेगा फायदा इस बदलाव से Amazon Web Services और Google Cloud के ग्राहकों के लिए OpenAI सेवाओं को अपनाना आसान हो जाएगा। पहले Microsoft की एक्सक्लूसिविटी के कारण यह प्रक्रिया जटिल थी। Microsoft क्यों पीछे हट रहा है? माइक्रोसॉफ्ट अब OpenAI पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। कंपनी: अपने AI मॉडल विकसित कर रही है Anthropic जैसे अन्य AI पार्टनर्स के मॉडल भी अपना रही है AI डेटा सेंटर पर होने वाले भारी खर्च को नियंत्रित करना चाहती है OpenAI को क्या मिलेगा? अधिक एंटरप्राइज ग्राहक बेहतर स्केलेबिलिटी IPO से पहले मजबूत बाजार स्थिति क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिक विकल्प एंटीट्रस्ट जांच से राहत यह कदम अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में चल रही नियामकीय जांच के बीच भी अहम माना जा रहा है। एक्सक्लूसिविटी खत्म होने से माइक्रोसॉफ्ट पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोप कमजोर पड़ सकते हैं। AI इंडस्ट्री में नया मोड़ यह बदलाव AI बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अब OpenAI केवल Microsoft के इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्लाउड बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा करेगा।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.
दुनिया

अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Deepshikha जून 10, 2026 0