Apple ने अपने सालाना डेवलपर इवेंट WWDC 2026 में कई बड़े अपडेट्स का ऐलान किया। इस बार कंपनी का पूरा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर रहा। नए Siri AI, iOS 27, macOS Golden Gate और कई ऐप्स में AI इंटीग्रेशन के जरिए Apple ने अपने इकोसिस्टम को पहले से अधिक स्मार्ट और यूजर-फ्रेंडली बनाने की कोशिश की है। आइए जानते हैं WWDC 2026 के 7 सबसे बड़े ऐलान। 1. Siri AI हुआ पहले से ज्यादा स्मार्ट WWDC 2026 की सबसे बड़ी घोषणा नए Siri AI को लेकर रही। अब Siri सिर्फ वॉयस असिस्टेंट नहीं रहेगा, बल्कि यूजर्स के पर्सनल कॉन्टेक्स्ट को समझकर बेहतर सुझाव भी देगा। नए Siri में ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस, इन-ऐप एक्शन और बेहतर कन्वर्सेशन जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं। अब यह ट्रिप प्लानिंग, आइडिया जनरेट करने और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने में मदद करेगा। Siri Dynamic Island के अंदर भी दिखाई देगा। 2. Siri के लिए अलग ऐप लॉन्च Apple ने Siri के लिए एक नया डेडिकेटेड ऐप भी पेश किया है। इस ऐप में पुरानी बातचीत की हिस्ट्री दिखाई देगी और यूजर्स आसानी से नई चैट शुरू कर सकेंगे। यह ऐप iPhone, iPad, Apple Watch, Vision Pro और Mac सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। 3. कैमरा ऐप में आया AI सपोर्ट अब iPhone का कैमरा ऐप भी Siri AI के साथ काम करेगा। यूजर किसी वस्तु, दस्तावेज या खाने की तस्वीर पर कैमरा पॉइंट करके उससे जुड़ी जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा बिल स्कैनिंग, खर्च बांटने और खाने की न्यूट्रिशन डिटेल्स बताने जैसे फीचर्स भी जोड़े गए हैं। 4. macOS Golden Gate पेश Apple ने अपने नए macOS 27 "Golden Gate" की घोषणा की है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि अब नए macOS अपडेट Intel प्रोसेसर वाले Macs को सपोर्ट नहीं करेंगे। हालांकि पुराने Intel Mac यूजर्स को अगले तीन वर्षों तक सिक्योरिटी अपडेट मिलते रहेंगे, लेकिन नए फीचर्स सिर्फ Apple Silicon आधारित डिवाइसेज़ में उपलब्ध होंगे। 5. iOS 27 में बेहतर स्पीड और नया अनुभव Apple ने iOS 27 को भी पेश किया है, जिसमें इंटरफेस को पहले से अधिक स्मूद और ऑप्टिमाइज किया गया है। कंपनी के अनुसार: ऐप्स लगभग 30 प्रतिशत तेजी से खुलेंगे। फोटो लोडिंग स्पीड में करीब 70 प्रतिशत सुधार होगा। पिछले साल पेश किए गए Liquid Glass डिजाइन को और बेहतर बनाया गया है। यह अपडेट 2026 की तीसरी तिमाही तक सपोर्टेड iPhones में रोलआउट किया जाएगा। 6. Messages, Mail और Phone ऐप में AI फीचर्स Apple Intelligence के तहत कई ऐप्स को AI से अपग्रेड किया गया है। Messages ऐप बातचीत के अनुसार फोटो सुझाव देगा। Phone ऐप कॉल के दौरान जरूरी जानकारी अपने आप दिखाएगा। Mail ऐप स्मार्ट सुझाव और कैलेंडर मैनेजमेंट में सहायता करेगा। Image Playground में फोटो एडिटिंग के नए AI टूल्स जोड़े गए हैं। 7. Safari ब्राउजर हुआ और स्मार्ट Safari में AI आधारित नया "Notify Me" फीचर जोड़ा गया है। यह किसी वेबसाइट पर होने वाले बदलावों पर नजर रखेगा और जैसे ही कोई प्रोडक्ट उपलब्ध होगा या अपडेट आएगा, यूजर को तुरंत सूचना देगा। इसके अलावा Safari अब खुले हुए टैब्स को विषय के अनुसार ऑर्गनाइज भी कर सकेगा, जिससे ब्राउजिंग अनुभव पहले से बेहतर होगा। Apple का AI पर बड़ा दांव WWDC 2026 से साफ हो गया है कि Apple अब AI रेस में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है। Siri AI और Apple Intelligence के जरिए कंपनी अपने सभी डिवाइसेज़ के अनुभव को अधिक व्यक्तिगत और स्मार्ट बनाने पर जोर दे रही है।
उत्तर प्रदेश के एक युवक की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस युवक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी 25 पुश्तैनी जमीनों की सटीक लोकेशन खोज निकाली। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि AI अब केवल चैटिंग, कंटेंट लिखने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान भी कर सकता है। मोहम्मदपुर गांव से जुड़े इस मामले में जाहिद खान नाम के युवक को अपने परिवार की विरासत में मिली जमीनों की सही जानकारी नहीं थी। जमीनें उनके परदादा से दादा, फिर पिता और बाद में उन्हें मिली थीं, लेकिन समय के साथ रिकॉर्ड्स इतने बिखर गए कि उनकी सटीक पहचान करना मुश्किल हो गया। सरकारी रिकॉर्ड्स बने बड़ी चुनौती जाहिद के अनुसार, जमीन से जुड़े दस्तावेज अलग-अलग सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध थे। इनमें तकनीकी शब्दावली और जटिल हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिसे समझना आसान नहीं था। इसके अलावा उन्होंने गांव में बहुत कम समय बिताया था, इसलिए जमीनों की वास्तविक स्थिति का भी कोई स्पष्ट अंदाजा नहीं था। हालांकि रिकॉर्ड्स डिजिटल रूप में मौजूद थे, लेकिन उन्हें समझना और आपस में जोड़ना आम व्यक्ति के लिए बेहद कठिन काम था। Claude AI ने संभाली जिम्मेदारी इस समस्या का समाधान निकालने के लिए जाहिद ने AI असिस्टेंट Claude का उपयोग किया। Claude के "Computer Use" फीचर की मदद से AI ने स्वयं सरकारी वेबसाइटों पर जाकर रिकॉर्ड्स खंगालना शुरू किया। AI ने हिंदी ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड का उपयोग करते हुए उनके पिता का नाम दर्ज किया और उससे जुड़े भूमि रिकॉर्ड्स की खोज की। इसके बाद परिवार के नाम पर दर्ज 25 अलग-अलग जमीनों के गाटा नंबर निकाल लिए। जटिल मैपिंग डेटा को बनाया आसान असल चुनौती तब सामने आई जब जमीनों की लोकेशन UTM (Universal Transverse Mercator) कोऑर्डिनेट्स में उपलब्ध थी। सामान्य व्यक्ति के लिए इन आंकड़ों को समझना लगभग असंभव था। लेकिन AI ने इन कोऑर्डिनेट्स को प्रोसेस कर उन्हें सामान्य GPS लोकेशन में बदल दिया। इसके बाद सभी जमीनों की सीमाओं और लोकेशन को जोड़कर एक विस्तृत डिजिटल नक्शा तैयार किया गया। Google Maps पर दिखीं सभी जमीनें AI ने सभी जमीनों की सीमा रेखाओं को पहचानकर KML फाइल तैयार की। इस फाइल को Google My Maps पर अपलोड किया गया, जिससे हर जमीन की सटीक GPS लोकेशन और उसकी सीमा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी। जाहिद का कहना है कि यदि AI की सहायता नहीं मिलती, तो उन्हें पुराने दस्तावेजों, स्थानीय लोगों और सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते। लेकिन AI ने यह पूरा काम बेहद कम समय में आसान बना दिया। सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया जैसे ही जाहिद ने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा की, यह तेजी से वायरल हो गई। हजारों लोगों ने इसे AI के सबसे उपयोगी और व्यावहारिक उपयोगों में से एक बताया। कई यूजर्स का कहना है कि भारत में लाखों लोग जमीन, राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों की जटिल प्रक्रियाओं से जूझते हैं। ऐसे में AI आम नागरिकों के लिए एक बड़ी मदद साबित हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में AI सरकारी रिकॉर्ड्स, भूमि दस्तावेजों, भाषा संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं यह घटना दर्शाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल मनोरंजन या कंटेंट निर्माण का साधन नहीं रह गया है। सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर यह लोगों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान निकाल सकता है और जटिल डिजिटल सिस्टम्स को आम नागरिकों के लिए आसान बना सकता है।
Samsung, Xiaomi, Vivo और Realme समेत कई कंपनियों ने बढ़ाए दाम भारत में बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन खरीदना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है। पिछले कुछ महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे सीमित बजट वाले ग्राहकों की परेशानी बढ़ गई है। जिन स्मार्टफोन्स को कुछ समय पहले तक 18,000 से 20,000 रुपये के बीच खरीदा जा सकता था, वे अब 25,000 रुपये या उससे अधिक की कीमत में उपलब्ध हैं। बाजार में बढ़ती कीमतों का असर केवल एक या दो ब्रांड तक सीमित नहीं है। Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo, Realme और Nothing जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने कई लोकप्रिय मॉडलों की कीमतों में इजाफा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे वैश्विक तकनीकी बदलाव, AI सेक्टर की बढ़ती मांग और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। AI क्रांति का असर स्मार्टफोन बाजार पर स्मार्टफोन महंगे होने की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर का तेजी से विस्तार माना जा रहा है। दुनिया भर में AI आधारित सर्वर, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम्स की मांग बढ़ रही है। इन तकनीकों को बड़ी मात्रा में उन्नत मेमोरी चिप्स की जरूरत होती है। इसी कारण Samsung, Micron और SK Hynix जैसे बड़े मेमोरी चिप निर्माताओं ने अपना ध्यान AI सेक्टर की ओर अधिक केंद्रित कर दिया है। नतीजतन स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND मेमोरी चिप्स की उपलब्धता प्रभावित हुई है और उनकी कीमतों में भारी उछाल आया है। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार कई मामलों में इन चिप्स की कीमतें 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। यही वजह है कि कुछ विश्लेषक इस बढ़ती लागत को “AI टैक्स” तक कहने लगे हैं, क्योंकि AI की बढ़ती मांग का बोझ आखिरकार स्मार्टफोन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। बजट और मिड-रेंज ग्राहकों पर सबसे ज्यादा मार भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन बाजारों में से एक है और यहां सबसे अधिक बिक्री बजट तथा मिड-रेंज सेगमेंट में होती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Xiaomi के कुछ मॉडलों की कीमतों में लगभग 32 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। Samsung के कुछ फोन करीब 36 प्रतिशत, Vivo के लगभग 40 प्रतिशत और Realme के कुछ मॉडल 50 प्रतिशत से अधिक महंगे हो चुके हैं। इसके साथ ही कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले डिस्काउंट और आकर्षक ऑफर्स में भी कमी देखने को मिल रही है। इसका परिणाम यह है कि ग्राहक अब नया स्मार्टफोन खरीदने से पहले पहले की तुलना में अधिक सोच-विचार कर रहे हैं। लोग पुराने फोन को ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे महंगे होते स्मार्टफोन का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों पर भी दिखाई देने लगा है। पहले जहां कई लोग हर एक या दो साल में नया स्मार्टफोन खरीद लेते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने पुराने फोन को रिपेयर करवाकर अधिक समय तक इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। 2026 की शुरुआती बाजार रिपोर्ट्स में स्मार्टफोन बिक्री में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि ग्राहक अब खर्च को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। यदि पुराना फोन संतोषजनक प्रदर्शन कर रहा है, तो लोग नया डिवाइस खरीदने की जल्दबाजी नहीं कर रहे। बढ़ती शिपिंग लागत और वैश्विक तनाव भी जिम्मेदार स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के पीछे केवल मेमोरी चिप्स की कमी ही जिम्मेदार नहीं है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती शिपिंग लागत और विभिन्न क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की लागत बढ़ा दी है। कंपनियों को अब कच्चा माल और तैयार उत्पाद विभिन्न देशों तक पहुंचाने में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और कई इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स की सीमित उपलब्धता ने भी उत्पादन लागत बढ़ाई है। इन अतिरिक्त खर्चों का बड़ा हिस्सा अब सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट क्यों है अपेक्षाकृत सुरक्षित? दिलचस्प रूप से बढ़ती कीमतों का असर प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार पर अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रहा है। Apple के iPhone और Samsung Galaxy S-Series जैसे फ्लैगशिप डिवाइस खरीदने वाले ग्राहक आमतौर पर कीमत को लेकर कम संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन अधिक मजबूत और स्थिर मानी जाती है, जिससे वे लागत बढ़ने के प्रभाव को बेहतर तरीके से संभाल पाती हैं। यही कारण है कि बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में कीमतों का दबाव ज्यादा दिखाई दे रहा है, जबकि प्रीमियम श्रेणी फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। आगे और बढ़ सकते हैं दाम उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI सेक्टर में मेमोरी चिप्स की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। विशेष रूप से बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को इसका सबसे अधिक असर झेलना पड़ सकता है। ऐसे में यदि कोई उपभोक्ता निकट भविष्य में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहा है, तो अत्यधिक इंतजार करना उसके लिए फायदे का सौदा नहीं भी हो सकता, क्योंकि बाजार में कीमतों के और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
OpenAI ने डेवलपर्स के लिए लॉन्च किया स्मार्ट मोबाइल कोडिंग एक्सपीरियंस AI कंपनी OpenAI ने अपने AI कोडिंग असिस्टेंट Codex को अब सीधे ChatGPT मोबाइल ऐप में रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस नए फीचर की मदद से यूजर्स अब स्मार्टफोन से भी अपने कोडिंग प्रोजेक्ट्स को मॉनिटर और मैनेज कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार, यह फीचर खास तौर पर उन डेवलपर्स के लिए उपयोगी होगा जो लैपटॉप या डेस्क से दूर रहते हुए भी अपने प्रोजेक्ट्स पर नजर बनाए रखना चाहते हैं। क्या-क्या कर सकेंगे यूजर्स? नए Codex मोबाइल इंटीग्रेशन के जरिए यूजर्स कई एडवांस फीचर्स का इस्तेमाल कर पाएंगे: एक्टिव कोडिंग थ्रेड्स मॉनिटर करना टर्मिनल आउटपुट देखना कमांड अप्रूव करना मॉडल बदलना नए टास्क शुरू करना लाइव टेस्ट रिजल्ट्स और स्क्रीनशॉट्स देखना इससे डेवलपर्स चलते-फिरते भी अपने कोडिंग वर्कफ़्लो को कंट्रोल कर सकेंगे। सिक्योरिटी और डिवाइस सिंक पर खास फोकस OpenAI का कहना है कि Codex से जुड़े फाइल्स, परमिशन और क्रेडेंशियल्स उसी डिवाइस पर सुरक्षित रहेंगे जहां सिस्टम रन कर रहा होगा। मोबाइल ऐप केवल लाइव अपडेट्स और कंट्रोल इंटरफेस के रूप में काम करेगा। इसके लिए कंपनी ने सिक्योर रिले लेयर का इस्तेमाल किया है, जिससे अलग-अलग डिवाइसेज सुरक्षित तरीके से कनेक्टेड रहेंगे, बिना सीधे पब्लिक इंटरनेट पर एक्सपोज हुए। डेवलपर्स को कैसे मिलेगा फायदा? इस फीचर के जरिए डेवलपर्स: ऑफिस से बाहर रहते हुए बग डिबगिंग शुरू कर सकेंगे ट्रैवलिंग के दौरान कोडिंग कमांड अप्रूव कर पाएंगे मीटिंग से पहले प्रोजेक्ट समरी तैयार कर सकेंगे फोन से नए आइडियाज और टास्क भेज सकेंगे इसका मतलब है कि डेवलपमेंट वर्क अब केवल कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहेगा। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? Codex सपोर्ट फिलहाल iOS और Android प्लेटफॉर्म पर प्रीव्यू मोड में रोलआउट किया जा रहा है। OpenAI के मुताबिक: यह फीचर Free और Go प्लान्स में भी उपलब्ध होगा केवल सपोर्टेड रीजन में काम करेगा यूजर्स को ChatGPT मोबाइल ऐप और macOS Codex ऐप दोनों अपडेट करने होंगे Windows सपोर्ट बाद में जारी किया जाएगा AI कोडिंग का बदलता भविष्य टेक इंडस्ट्री में AI आधारित डेवलपमेंट टूल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में OpenAI का यह कदम डेवलपर्स के लिए अधिक फ्लेक्सिबल और मोबाइल-फ्रेंडली कोडिंग एक्सपीरियंस देने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
हाई-टेक वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौतों से बढ़ी चिंता दुनिया की दो महाशक्तियों–अमेरिका और चीन–में रक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े शीर्ष वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतों और लापता होने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। ये वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियार, न्यूक्लियर रिसर्च और स्पेस डिफेंस जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन घटनाओं ने अब राजनीतिक हलकों में भी बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिका में 11 संदिग्ध घटनाओं की जांच वॉशिंगटन में कम से कम 11 मामलों की जांच चल रही है, जिनमें वैज्ञानिक या तो लापता हुए हैं या संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए हैं। ये सभी मामले न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और एडवांस्ड हथियारों से जुड़े हैं। अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कुछ नेताओं ने इसे संभावित “विदेशी ऑपरेशन” तक बताया है, हालांकि अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एफबीआई (FBI) ने इन सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है। चीन में भी लगातार हो रही वैज्ञानिकों की मौतें दूसरी ओर, चीन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कम से कम 9 वैज्ञानिकों की मौतें संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हैं। इनमें से कई मामले सड़क दुर्घटना, अचानक बीमारी या अस्पष्ट कारणों से जुड़े बताए गए हैं। इन वैज्ञानिकों की उम्र 26 से 68 वर्ष के बीच बताई गई है और वे सभी अत्याधुनिक सैन्य तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे। “टॉप साइंटिस्ट गायब हो रहे हैं” – राजनीतिक बयानबाजी तेज अमेरिका में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं। रिपब्लिकन सांसद एरिक बर्लिसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका, चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच यह घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले को “गंभीर” बताया है, हालांकि उन्होंने यह संभावना भी जताई कि यह महज संयोग हो सकता है। चीन के वैज्ञानिक की मौत पर उठे सवाल सबसे चर्चित मामलों में एक नाम फेंग यांगहे का है, जो चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर थे। उनकी मौत 2023 में बीजिंग में एक कार दुर्घटना में हुई बताई गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह ताइवान से जुड़े सैन्य परिदृश्यों की AI सिमुलेशन पर काम कर रहे थे और देर रात एक बैठक से लौटते समय उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिक अधिक प्रभावित विशेषज्ञों के अनुसार, जिन वैज्ञानिकों की मौत या लापता होने की घटनाएं सामने आई हैं, वे मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से जुड़े थे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैन्य सिमुलेशन हाइपरसोनिक हथियार तकनीक ड्रोन और स्वॉर्म टेक्नोलॉजी न्यूक्लियर और स्पेस डिफेंस रिसर्च हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कुछ मामले दुर्घटनाओं या प्राकृतिक कारणों से जुड़े हो सकते हैं। क्या यह सिर्फ संयोग या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया और विश्लेषकों के बीच कई तरह की अटकलें चल रही हैं। कुछ लोग इसे महज संयोग बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहे हैं। फिलहाल किसी भी देश द्वारा किसी संगठित साजिश की पुष्टि नहीं हुई है। रहस्य गहराता जा रहा है, जांच जारी अमेरिका और चीन दोनों ही इस मामले की जांच में जुटे हैं। जैसे-जैसे नई घटनाएं सामने आ रही हैं, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। यह मामला अभी पूरी तरह रहस्य बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी में है।
हैदराबाद,एजेंसियां। YouTube ने अपनी सुरक्षा तकनीक को और मजबूत करते हुए Likeness Detection टूल को अब पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं तक बढ़ाने की घोषणा की है। पहले यह फीचर केवल YouTube Partner Program के क्रिएटर्स तक सीमित था, लेकिन अब इसका उद्देश्य डीपफेक और एआई से बन फर्ज़ी वीडियो की पहचान करना और उन्हें हटाने में मदद करना है। क्या है इस टूल में ? इस टूल की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने चेहरे या आवाज की नकली एआई कॉपी वाले वीडियो की पहचान कर सकता है और प्लेटफ़ॉर्म से हटाने की मांग कर सकता है। कंपनी का कहना है कि डीपफेक टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है और इसका गलत इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने या किसी की छवि खराब करने में किया जा सकता है। कैसे काम करता है Likeness Detection ? Likeness Detection टूल कुछ हद तक Content ID की तरह काम करता है। फर्क यह है कि Content ID कॉपीराइट वाले कंटेंट को पहचानता है, जबकि Likeness Detection किसी व्यक्ति की शक्ल या आवाज से मिलते-जुलते एआई कंटेंट की पहचान करता है। अगर कोई वीडियो प्लेटफ़ॉर्म की प्राइवेसी गाइडलाइंस का उल्लंघन करता है, तो संबंधित व्यक्ति उसे हटाने का अनुरोध कर सकता है।हालांकि, पैरोडी, व्यंग्य या सार्वजनिक हित से जुड़े वीडियो को हटाने से पहले अलग से रिव्यू किया जाएगा। टूल का उपयोग करने के लिए पात्र लोगों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें फोटो आईडी और चेहरे का वीडियो जमा करना आवश्यक है। डेटा का उपयोग इस डेटा का उपयोग केवल पहचान की पुष्टि और सुरक्षा फीचर के संचालन के लिए किया जाएगा और इसे गूगल के एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।YouTube का कहना है कि तकनीक के साथ-साथ मजबूत कानून भी जरूरी हैं ताकि लोगों की पहचान और क्रिएटिविटी को एआई टेक्नोलॉजी से होने वाले दुरुपयोग से सुरक्षित रखा जा सके। इस पहल से पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में भरोसेमंद जानकारी की रक्षा में मदद मिलने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।