कोलकाता, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान उनका मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा, कानून व्यवस्था, प्रशासनिक स्थिति और विकास योजनाओं की समीक्षा पर रहेगा। BSF जवानों से करेंगे मुलाकात अमित शाह अपने दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वह सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात कर सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। खासतौर पर बांग्लादेश सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। कानून व्यवस्था और नए आपराधिक कानूनों पर समीक्षा गृह मंत्री राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति और केंद्र द्वारा लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेंगे। इसके अलावा राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दे सकते हैं। विकास परियोजनाओं का भी लेंगे जायजा अमित शाह के कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं। वह BSF से संबंधित परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी कर सकते हैं। राजनीतिक नजरिए से भी अहम दौरा अमित शाह का यह बंगाल दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी राजनीतिक रणनीति और पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बुधवार को अहम बैठक हुई। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन के पुनर्गठन, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। संगठन विस्तार पर हुआ मंथन सूत्रों के अनुसार, बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसमें नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और विभिन्न राज्यों में संगठन को सशक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। पार्टी नेतृत्व ने चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान बताया जा रहा है कि बैठक में हुई चर्चाओं के आधार पर भाजपा संगठन में जल्द ही नए पदाधिकारियों और जिम्मेदारियों को लेकर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को नई दिशा देने की तैयारी में है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इसी कड़ी में आज शाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नई दिल्ली स्थित आवास पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, विपक्ष की रणनीति और संसद में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होगी। मॉनसून सत्र की रणनीति पर होगा मंथन सूत्रों के अनुसार, बैठक में 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के लिए सरकार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों और सरकार की जवाबी तैयारी पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि संसद का सत्र सुचारु रूप से चले और महत्वपूर्ण विधेयकों को समय पर पारित कराया जा सके। कई वरिष्ठ मंत्री हो सकते हैं शामिल बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सर्वदलीय बैठक से पहले सरकार की तैयारी यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार 19 जुलाई को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक की तैयारी भी कर रही है। माना जा रहा है कि आज की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर सरकार विपक्ष के साथ होने वाली चर्चा में अपना रुख स्पष्ट करेगी। मॉनसून सत्र में कई अहम विधेयक और राष्ट्रीय मुद्दे सदन में आने की संभावना है, इसलिए सरकार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती है।
नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए सांसदों को लेकर नई राजनीतिक गतिविधियां सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सुदीप बंद्योपाध्याय बन सकते हैं सदन के नेता सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को लोकसभा में एनसीपीआई का नेता चुना जा सकता है। वहीं शताब्दी रॉय को उपनेता और काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाए जाने की संभावना है। पार्टी अपने संसदीय दल के गठन को अंतिम रूप देने में जुटी है। लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात जानकारी के अनुसार, सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान एनसीपीआई के 20 सांसदों के लिए लोकसभा में बैठने की व्यवस्था और नए संसद भवन में पार्टी कार्यालय आवंटित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। एनडीए को समर्थन पर भी चर्चा सूत्रों का कहना है कि एनसीपीआई के नेताओं की यह सक्रियता संसदीय मान्यता हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। एनडीए का सहयोगी दल बनने की प्रक्रिया के तहत पार्टी से केंद्र सरकार को समर्थन संबंधी औपचारिक पत्र देने को कहा गया है। टीएमसी ने दायर की अयोग्यता याचिकाएं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़ने वाले 20 सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। लोकसभा में टीएमसी के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत सभी 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए अलग-अलग याचिकाएं सौंपी हैं। टीएमसी का आरोप है कि इन सांसदों ने दूसरे दल में शामिल होकर स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में इन अयोग्यता याचिकाओं पर चर्चा नहीं हुई। विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुई बगावत 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में असंतोष बढ़ा और कई सांसदों एवं विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बागी सांसदों ने दावा किया कि उन्हें दो-तिहाई से अधिक समर्थन प्राप्त है और बाद में उन्होंने एनसीपीआई में विलय की घोषणा कर दी। अब संसद के मानसून सत्र से पहले एनसीपीआई की संसदीय मान्यता, सर्वदलीय बैठक में संभावित भागीदारी और टीएमसी की अयोग्यता याचिकाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सीमावर्ती जिलों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता जताते हुए कहा कि अवैध घुसपैठ इस बदलाव का प्रमुख कारण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार घुसपैठ पर रोक लगाने और सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठा रही है। सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन में दिया बयान अमित शाह ने सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सीमा क्षेत्रों में होने वाले असामान्य जनसांख्यिकीय बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सभी एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करना होगा। 'घुसपैठ मुक्त भारत' के लिए मजबूत तंत्र तैयार करने पर जोर गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश को अवैध घुसपैठ से मुक्त बनाना है। इसके लिए सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जा रही है, आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है और घुसपैठ के नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। चार-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड पर सरकार का फोकस अमित शाह ने बताया कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चार-स्तरीय 'स्मार्ट बॉर्डर' सुरक्षा ग्रिड विकसित किया जा रहा है। इसमें सीमा सुरक्षा बलों, राज्य प्रशासन, स्थानीय पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमा से लगे जिलों में संदिग्ध गतिविधियों, अवैध घुसपैठ और तस्करी पर कड़ी निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाया जाएगा।
नई दिल्ली: अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी पर सख्ती बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बड़े कानूनी अधिकार सौंप दिए हैं। अब CISF खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत सीधे कार्रवाई कर सकेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम "जीरो कोल लीकेज प्लान" को लागू करने में अहम साबित होगा। अब सीधे दर्ज कर सकेगी केस नए अधिकार मिलने के बाद CISF अवैध खनन, कोयला चोरी और तस्करी के मामलों में बिना किसी अन्य एजेंसी का इंतजार किए सीधे अदालत में मामला दर्ज करा सकेगी। इसके अलावा बल को संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी, तलाशी और अवैध रूप से निकाले गए कोयले व अन्य खनिजों को जब्त करने का अधिकार भी मिल गया है। मशीनें और वाहन भी होंगे जब्त CISF अब अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, भारी मशीनें और परिवहन में उपयोग किए जा रहे वाहनों को मौके पर ही जब्त कर सकेगी। इससे कोयला चोरी और तस्करी के नेटवर्क पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है। अधिकारियों ने संभाली कमान नए अधिकार मिलने के बाद CISF के डीआईजी के. पी. सिंह आसनसोल के शीतलपुर स्थित CISF मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने वरिष्ठ कमांडेंट राहुल सिंह गौतम और अधिकारियों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) मुख्यालय पहुंचकर सीएमडी सतीश झा के साथ भी बैठक की और अवैध खनन रोकने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। हाई लेवल बैठक के बाद लिया गया फैसला यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लागू किया जा रहा है। विशेष रूप से झारखंड के धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती कोयला चोरी की घटनाओं को देखते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। 'जीरो कोल लीकेज प्लान' पर जोर सरकार ने संवेदनशील खनन क्षेत्रों में CISF की तैनाती बढ़ाने और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अवैध कोयला परिवहन रोकने के लिए GST अधिकारियों की मदद से प्रत्येक कोयला वाहन के ई-वे बिल का मौके पर सत्यापन भी किया जाएगा। माफियाओं पर होगी कड़ी कार्रवाई सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय संपदा की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। CISF को मिले नए कानूनी अधिकारों से अवैध खनन और कोयला तस्करी में शामिल माफियाओं के खिलाफ तेज और प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि पिछले पांच वर्षों में मंत्रालय ने देश के सहकारी क्षेत्र को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की पहल से सहकारिता से जुड़े 30 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है और सहकारी संस्थाओं को आधुनिक, पारदर्शी तथा तकनीक-सक्षम बनाया गया है। सहकारिता क्षेत्र को मिली नई पहचान अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी संस्थाओं को एक अलग पहचान मिली। मंत्रालय ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण और बहुउद्देशीय गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। नई योजनाओं का भी किया ऐलान कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने और 'भारत टैक्सी' को अगले दो वर्षों में 500 शहरों तक विस्तार देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन पहलों से सहकारिता आंदोलन को नई मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। 'सहकार से समृद्धि' विजन पर जोर अमित शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 'सहकार से समृद्धि' के विजन को साकार करना है। इसके लिए सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण विकास, वित्तीय समावेशन और किसानों की आय बढ़ाने में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाया जा रहा है।
कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करने का भी आश्वासन दिया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में "सोनार बांग्ला" के निर्माण की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। UCC लागू करने के लिए बनेगी विशेष समिति गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने के उद्देश्य से एक विशेष समिति का गठन किया गया है। उनके अनुसार यह समिति राज्य में UCC लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और आगे की प्रक्रिया तय करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया होगी तेज अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन लोगों को कानून के तहत नागरिकता मिलने का अधिकार है, उन्हें जल्द इसका लाभ मिलेगा। अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख अपने संबोधन में गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर अवैध घुसपैठिए की पहचान करेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा की रखी आधारशिला कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रस्तावित प्रतिमा की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को लेकर दिया गया योगदान देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राजनीतिक संदेश भी दिया अपने संबोधन में अमित शाह ने राष्ट्रीय एकता, नागरिकता, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने सभी चुनावी संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और पश्चिम बंगाल में भी विकास तथा सुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।
आर्लिंग्टन (टेक्सास), एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में स्पेन ने पुर्तगाल को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस हार के साथ स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। 41 वर्षीय रोनाल्डो के लिए यह उनके करियर का आखिरी फीफा वर्ल्ड कप भी साबित हुआ। मैच खत्म होने के बाद रोनाल्डो भावुक नजर आए और मैदान छोड़ते समय स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाकर उनका सम्मान किया। स्पेन की मजबूत रक्षा बनी जीत की सबसे बड़ी वजह पूरे मुकाबले में स्पेन का डिफेंस बेहद मजबूत नजर आया। पुर्तगाल ने कई बार गोल करने की कोशिश की, लेकिन स्पेनिश गोलकीपर उनाई सिमोन और डिफेंस ने हर प्रयास को नाकाम कर दिया। रोनाल्डो ने पहले हाफ में दो बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन सिमोन ने शानदार बचाव करते हुए उन्हें गोल में बदलने नहीं दिया। उनकी एक डाइविंग सेव मैच के सबसे यादगार पलों में शामिल रही। सिमोन ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड 29 वर्षीय गोलकीपर उनाई सिमोन ने लगातार छठे वर्ल्ड कप मैच में क्लीन शीट रखते हुए नया इतिहास रच दिया। स्पेन अब वर्ल्ड कप इतिहास में लगातार सबसे अधिक मैचों तक गोल नहीं खाने वाली पहली टीम बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड इटली (1990) और स्विट्जरलैंड (2006-10) के नाम था, जिन्होंने लगातार पांच-पांच मैचों में विपक्षी टीम को गोल नहीं करने दिया था। सिमोन ने व्यक्तिगत उपलब्धि भी हासिल की। उन्होंने लगातार 609 मिनट तक गोल नहीं खाकर इटली के महान गोलकीपर वाल्टर जेंगा का 35 साल पुराना 517 मिनट का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मौजूदा टूर्नामेंट में स्पेन की मजबूत रक्षा ने उसे खिताब के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल कर दिया है। रोनाल्डो के शानदार करियर का वर्ल्ड कप अध्याय समाप्त क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 2006 में अपना पहला फीफा वर्ल्ड कप खेला था। उसी टूर्नामेंट में उन्होंने पुर्तगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जो उनके वर्ल्ड कप करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। 2018 वर्ल्ड कप में स्पेन के खिलाफ उनकी हैट्रिक आज भी यादगार मुकाबलों में गिनी जाती है। हालांकि इस बार रोनाल्डो अपने वर्ल्ड कप सफर का अंत जीत के साथ नहीं कर सके। मैच समाप्त होने के बाद उनकी आंखों में निराशा साफ दिखाई दी। मैदान से बाहर निकलते समय उन्होंने दर्शकों का अभिवादन किया, जबकि पूरे स्टेडियम ने तालियां बजाकर इस महान खिलाड़ी को सम्मानजनक विदाई दी। स्पेन की नजर अब खिताब पर क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी स्पेनिश टीम अब अपने मजबूत डिफेंस और शानदार फॉर्म के दम पर विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। लगातार क्लीन शीट और संतुलित प्रदर्शन ने स्पेन को इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीमों में शामिल कर दिया है।
कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए उनका यह दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भवानीपुर स्थित पैतृक आवास पर देंगे श्रद्धांजलि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अमित शाह दोपहर में कोलकाता पहुंचेंगे। इसके बाद शाम करीब 4:20 बजे वह भवानीपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक आवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इको पार्क में करेंगे प्रतिमा का भूमि पूजन श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद केंद्रीय गृह मंत्री शाम 4:50 बजे न्यूटाउन स्थित इको पार्क पहुंचेंगे। यहां वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रस्तावित प्रतिमा के निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे। भारतीय जनता पार्टी इस कार्यक्रम को पश्चिम बंगाल में अपने वैचारिक अभियान का अहम हिस्सा मान रही है। पार्टी का कहना है कि डॉ. मुखर्जी के विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। विश्व बांग्ला मेला प्रांगण में विशेष समारोह शाम करीब 7 बजे अमित शाह विश्व बांग्ला मेला प्रांगण में आयोजित विशेष श्रद्धांजलि समारोह में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान और विचारों को याद किया जाएगा। शाम को दिल्ली लौटेंगे अमित शाह सभी कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री शाम करीब 7:20 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों को लेकर भाजपा ने व्यापक तैयारियां की हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत बड़ा कदम उठाते हुए 17 पाकिस्तान/पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय व्यक्तियों और 6 भारतीय नागरिकों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की चौथी अनुसूची के तहत 'व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ केंद्र ने कुल 23 नए नाम आतंकियों की सूची में शामिल किए हैं। लश्कर, जैश समेत कई आतंकी संगठनों से जुड़े हैं आरोपी गृह मंत्रालय के अनुसार, घोषित किए गए सभी 23 व्यक्ति लश्कर-ए-तैयबा , जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन पर भारत में आतंकी हमलों की साजिश, घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, आतंकियों की भर्ती, फंडिंग और आतंकवादी नेटवर्क को संचालित करने जैसे गंभीर आरोप हैं। छह भारतीय नागरिक भी लंबे समय से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहकर आतंकी गतिविधियों में शामिल बताए गए हैं। UAPA के तहत मिलेगी सख्त कानूनी कार्रवाई की शक्ति सरकार द्वारा किसी व्यक्ति को UAPA के तहत "व्यक्तिगत आतंकवादी" घोषित किए जाने के बाद उसकी संपत्ति जब्त करने, वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करने का रास्ता खुल जाता है। गृह मंत्रालय का कहना है कि यह कदम सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसने और भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी और आतंकवाद से जुड़े हर नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य आतंकी संगठनों को कानूनी, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर कमजोर करना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर जारी असंतोष के बीच कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि रंधावा ने इस मुलाकात को पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताते हुए स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल पंजाब की सुरक्षा और सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। उन्होंने कहा कि इस बैठक को किसी भी तरह से राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा को लेकर उठाए गंभीर मुद्दे रंधावा ने बताया कि उन्होंने 4 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसकी प्रति गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजी गई थी। पत्र में गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टरों की गतिविधियों और पंजाब पुलिस के कथित राजनीतिक इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे। इसके बाद 23 जून को भेजे गए दूसरे पत्र में उन्होंने गैंगस्टरों की बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई थी। इन्हीं पत्रों के आधार पर उन्हें गृह मंत्री से मिलने का समय दिया गया। जबरन वसूली और जेलों से चल रहे नेटवर्क पर जताई चिंता बैठक के दौरान रंधावा ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब में जबरन वसूली, धमकियां और जेलों के भीतर से मोबाइल फोन के जरिए अपराध संचालित होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार मानती है कि पाकिस्तान इन गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, तो आवश्यक कदम उठाना उसकी जिम्मेदारी है। कांग्रेस के प्रति निष्ठा दोहराई, विवादों पर चुप्पी रंधावा ने कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह पार्टी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। वहीं, पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की नाराजगी से जुड़े सवालों पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में उनकी अमित शाह से मुलाकात ने भले ही राजनीतिक अटकलों को हवा दी हो, लेकिन रंधावा ने इसे पूरी तरह सुरक्षा और जनहित से जुड़ा मुद्दा बताया है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में वर्ष 2011 की जनगणना के बाद हुए जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee on Demographic Changes - HLCDC) का गठन किया है। गृह मंत्रालय की ओर से गठित यह समिति अवैध घुसपैठ, असामान्य बसावट और जनसंख्या संरचना में आए बदलावों की जांच करेगी तथा एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती राज्यों, महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या परिवर्तन के कारणों का अध्ययन करना और आवश्यक नीति एवं कानूनी सुधारों की सिफारिश करना है। राज्यों को भेजी जाएगी विस्तृत प्रश्नावली समिति ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विस्तृत प्रश्नावली तैयार की है। इसे मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों (DGP) और संबंधित विभागों को भेजा जाएगा, ताकि दौरे से पहले आवश्यक आंकड़े और सूचनाएं जुटाई जा सकें। सरकार का मानना है कि इससे समिति को जमीनी स्तर पर तथ्यात्मक और व्यापक अध्ययन करने में मदद मिलेगी। सीमावर्ती राज्यों और बड़े शहरों पर रहेगा विशेष फोकस सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई सीमावर्ती राज्यों का दौरा करेगी। इसके अलावा समिति देश के प्रमुख महानगरों और औद्योगिक शहरों में भी जनसंख्या पैटर्न और बसावट का अध्ययन करेगी। अमित शाह ने जल्द रिपोर्ट सौंपने के दिए निर्देश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समिति को जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गृह सचिव को भी समिति के कार्य और राज्यों के दौरों के दौरान हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करने को कहा है। अवैध प्रवास पर बन सकती है नई नीति समिति अपने अध्ययन के दौरान अवैध प्रवास, असामान्य जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय बदलावों के संभावित कारणों का विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर समिति निम्नलिखित विषयों पर सुझाव देगी: अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया हिरासत और निष्कासन की स्थायी व्यवस्था सीमा प्रबंधन को और मजबूत बनाने के उपाय केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की रणनीति आवश्यक कानूनी और नीतिगत सुधार एक साल में सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट गृह मंत्रालय ने समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया है। रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार अवैध घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और जनसंख्या प्रबंधन से जुड़ी नीतियों में बदलाव पर विचार कर सकती है। सरकार का कहना है कि इस अध्ययन का उद्देश्य देश में जनसंख्या से जुड़े बदलावों का तथ्यात्मक और वैज्ञानिक विश्लेषण करना है, ताकि भविष्य की नीतियां सटीक आंकड़ों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर तैयार की जा सकें।
नई दिल्ली: देश में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को तकनीक के जरिए और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को 'अभिज्ञान (Abhigyan) ऐप' लॉन्च किया, जो पुलिसकर्मियों को रियल टाइम में संदिग्धों की पहचान करने और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तक तुरंत पहुंचने की सुविधा देगा। यह नया सिस्टम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा विकसित किया गया है और इसे देश के विशाल फिंगरप्रिंट डेटाबेस NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) से जोड़ा गया है। अंगूठे का निशान लगाते ही सामने आएगा पूरा रिकॉर्ड अभिज्ञान ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पुलिसकर्मी अब किसी संदिग्ध व्यक्ति के फिंगरप्रिंट लेकर सीधे अपने स्मार्टफोन पर उसका आपराधिक इतिहास जांच सकेंगे। इसके लिए व्यक्ति को थाने ले जाने की जरूरत नहीं होगी। यह सिस्टम करीब 1.3 करोड़ आरोपियों, दोषियों और संदिग्धों के राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा हुआ है, जिससे कुछ ही सेकंड में जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। सड़क पर ही हो सकेगी जांच नई तकनीक के जरिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़क पर, चेकिंग के दौरान या किसी अभियान में मौके पर ही बायोमेट्रिक सत्यापन कर सकेंगी। डेमो के दौरान यह दिखाया गया कि फिंगरप्रिंट का मिलान मात्र 35 सेकंड में हो जाता है। इससे फरार अपराधियों और वांटेड आरोपियों की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से की जा सकेगी। पहले सिर्फ थानों तक सीमित थी सुविधा अब तक फिंगरप्रिंट मिलान की सुविधा देशभर के पुलिस थानों और जिला मुख्यालयों में स्थापित लगभग 1,556 वर्कस्टेशनों तक सीमित थी। किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट की जांच के लिए उसे संबंधित केंद्र तक ले जाना पड़ता था। अभिज्ञान ऐप आने के बाद यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल आधारित और रियल टाइम हो जाएगी। इसके अलावा ऐप में टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था भी दी गई है। NAFIS डेटाबेस में मौजूद हैं लाखों अपराधियों के रिकॉर्ड राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट डेटाबेस में विभिन्न प्रकार के अपराधों से जुड़े लाखों रिकॉर्ड मौजूद हैं। इनमें नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और जेल रिकॉर्ड से संबंधित बड़ी संख्या में डेटा शामिल है। टेक्नोलॉजी से अपराधियों को सजा दिलाने पर जोर अभिज्ञान ऐप लॉन्च करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केवल अपराधियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध तरीके से उन्हें सजा दिलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि फिंगरप्रिंट, डीएनए, मोबाइल टावर डेटा, फेस रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने से मजबूत चार्जशीट तैयार करने और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिलेगी। यह पहल देश की पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
त्रिपुरा: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने त्रिपुरा के भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र का दौरा करते हुए सीमावर्ती इलाकों में किसी भी प्रकार के डेमोग्राफिक बदलाव को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश किसी भी कीमत पर सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में बदलाव को स्वीकार नहीं करेगा। लंकामुरा सीमा चौकी पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों को संबोधित करते हुए शाह ने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। सीमावर्ती इलाकों में बदलाव पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति गृह मंत्री ने कहा कि भारत की नीति साफ है—सीमावर्ती राज्यों में किसी भी तरह के अवैध घुसपैठ या डेमोग्राफिक बदलाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ त्रिपुरा तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य सीमावर्ती राज्यों के लिए भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। शाह ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता से जुड़ा गंभीर विषय बताया। घुसपैठ रोकने के लिए ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्रोजेक्ट शाह ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार की नई पहल ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ का भी ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को पायलट आधार पर देश के 7 से 8 संवेदनशील स्थानों पर लागू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और स्थानीय प्रशासन के बेहतर समन्वय का उपयोग किया जाएगा। सीमा पर किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी। सीमा पर अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीमा क्षेत्रों में कट्टरपंथी गतिविधियों, संदिग्ध वाहनों और फर्जी कंपनियों पर लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा केवल भौतिक चौकसी नहीं, बल्कि तकनीकी और खुफिया तंत्र के माध्यम से भी मजबूत की जाएगी। बीएसएफ जवानों की सराहना और पर्यावरण संदेश अपने दौरे के दौरान Border Security Force के जवानों की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का भी उल्लेख किया और जवानों द्वारा पेड़ लगाने के प्रयासों की सराहना की। शाह ने कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक स्वाभाविक जिम्मेदारी होनी चाहिए। सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन पर जोर गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। यह दौरा भारत की सीमाई सुरक्षा रणनीति और घुसपैठ रोकने के प्रयासों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मंजूर किया इस्तीफा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अन्नामलाई द्वारा भेजे गए इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। पार्टी की ओर से इस फैसले की पुष्टि होने के बाद तमिलनाडु बीजेपी में भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं अन्नामलाई ने 2 जून को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। राजनीतिक गलियारों में यह भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि अन्नामलाई नई राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी कर सकते हैं, इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी। प्रदेश नेतृत्व ने पहले किया था खंडन इस्तीफे की खबरों के बीच तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नागेंद्रन ने गुरुवार को इन दावों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें अन्नामलाई के इस्तीफे से संबंधित कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है और पार्टी के भीतर किसी तरह के मतभेद नहीं हैं। नागेंद्रन ने यह भी कहा था कि अन्नामलाई ने नई पार्टी बनाने को लेकर न तो उनसे कोई चर्चा की है और न ही ऐसा कोई संकेत दिया है। तमिलनाडु बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम के. अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने राज्य में पार्टी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर रहेगी कि वह भविष्य में किस राजनीतिक दिशा का चयन करते हैं और इसका तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
अहमदाबाद, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को अहमदाबाद दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि पहले पश्चिम बंगाल में हर दिन घुसपैठ होती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और अवैध घुसपैठिए खुद वापस लौटने लगे हैं। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं। शाह ने कहा कि सरकार चाहती है कि जो लोग अवैध तरीके से भारत आए हैं, वे स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोग खुद वापस जाते हैं तो उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और सरकार उनकी वापसी में मदद भी करेगी। घुसपैठ रोकने के लिए बनी हाई लेवल कमेटी गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार देशभर से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी देश में हो रहे कृत्रिम जनसंख्या बदलावों, उसके कारणों और रोकथाम के उपायों पर अध्ययन करेगी। जरूरत पड़ने पर कानून बनाने की सिफारिश भी की जाएगी। BSF को जमीन सौंपने पर शुभेंदु अधिकारी की तारीफ अमित शाह ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से BSF को जमीन सौंपने के फैसले की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने केवल सात दिनों में 600 हेक्टेयर जमीन BSF को सौंप दी। इसके अलावा चिकन नेक इलाके की 121 हेक्टेयर भूमि भी सीमा सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराई गई है।
Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार Assam के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है। बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन ने राज्य में जीत की हैट्रिक लगाई और इसके साथ ही हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए। पीएम मोदी और अमित शाह रहे मौजूद शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी मैदान में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya ने हिमंत बिस्वा सरमा और चार अन्य मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत कई केंद्रीय मंत्री और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। शपथ के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हिमंत बिस्वा सरमा और नई सरकार को बधाई दी। इन नेताओं ने भी ली मंत्री पद की शपथ मुख्यमंत्री के साथ चार नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें शामिल हैं— Ajanta Neog Rameswar Teli Atul Bora Chandan Brahma अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो पहले भी हिमंत सरकार के मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली ने राज्य की राजनीति में वापसी की है। मां कामाख्या के दर्शन कर लिया आशीर्वाद शपथ ग्रहण से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने Kamakhya Temple जाकर पूजा-अर्चना की और राज्य में शांति, विकास और खुशहाली की कामना की। उनके परिवार के सदस्य भी समारोह में मौजूद रहे। उनकी पत्नी रिनिकी भुयान और बेटी सुकन्या सरमा ने इसे परिवार के लिए गर्व और खुशी का पल बताया। योगी आदित्यनाथ और शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे शपथ ग्रहण समारोह में Yogi Adityanath, Suvendu Adhikari और केंद्रीय मंत्री Annapurna Devi समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। असम में NDA की लगातार तीसरी सरकार असम में एनडीए गठबंधन की यह लगातार तीसरी सरकार है। गठबंधन पहली बार 2016 में Sarbananda Sonowal के नेतृत्व में सत्ता में आया था। बाद में हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की राजनीति में मजबूत नेतृत्व स्थापित किया और बीजेपी को लगातार दूसरी बार बड़ी जीत दिलाई। बीजेपी की इस जीत को पूर्वोत्तर में पार्टी की मजबूत पकड़ और हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है।
कोलकाता, एजेंसियां। सुवेंदु अधिकारी शनिवार को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। सुवेंदु ने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद सुवेंदु, पीएम के पास गए और उन्हें झुककर प्रणाम किया। बंगाल के गवर्नर आरएन रवि ने सुवेंदु के अलावा 5 और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टूडू और निषिथ प्रमाणिक शामिल रहे। दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं शपथ समारोह मे शपथ समारोह में PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, NDA और BJP शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री और मिथुन चक्रवर्ती मौजूद रहे। कार्यक्रम में सबसे पहले मोदी ने मंच पर रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी जयंती पर श्रद्धाजंलि दी। इस दौरान पीएम ने भाजपा के 98 साल के कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। मंच पर आते ही प्रधानमंत्री सीधे सरकार के पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और फिर उनके पैर छुए। जानिए शपथ लेने वाले मंत्रियों को 1. दिलीप घोष: खड़गपुर सदर सीट से दूसरी बार विधायक बन हैं। मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। वे BJP के महासचिव और प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। 2. अग्निमित्रा पॉल: अग्निमित्रा पॉल पश्चिम बंगाल की असनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं। वे 2021 में पहली बार इस सीट से विधायक चुनी गई थीं। 2026 में दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने 2022 का आसनसोल लोकसभा उपचुनाव और 2024 का मेदिनीपुर लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन दोनों चुनाव हार गईं। 3. अशोक कीर्तनिया: 52 साल के अशोक बनगांव उत्तर सीट से विधायक हैं। मतुआ समुदाय से आते हैं। राजनीतिज्ञ और व्यवसायी हैं। 4.खुदीराम टूडू: खुदीराम रानीबांध (ST) विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं। वे पेशे से शिक्षक रहे हैं। 2026 विधानसभा चुनाव में उन्होंने TMC उम्मीदवार तनुश्री हांसदा को हराकर जीत दर्ज की। खुदीराम टुडू ग्रेजुएट हैं और लंबे समय से आदिवासी इलाकों में संगठन के साथ सक्रिय रहे हैं। 5. निषिथ प्रमाणिक: निषिथ मथाभांगा विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे 2026 में पहली बार विधायक बने हैं। इससे पहले 2019 में कूचबिहार लोकसभा सीट से सांसद रहे। केंद्र में गृह राज्य मंत्री व युवा मामलों और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
Suvendu Adhikari Oath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है. भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी 9 मई 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है. इसी बीच सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यह बना हुआ है कि क्या निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगी या नहीं. क्या कहता है प्रोटोकॉल? संवैधानिक रूप से ऐसा कोई नियम नहीं है, जो किसी निवर्तमान मुख्यमंत्री को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बाध्य करता हो. यह पूरी तरह राजनीतिक परंपरा, शिष्टाचार और व्यक्तिगत-राजनीतिक संबंधों पर निर्भर करता है. भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में कई बार सत्ता छोड़ने वाले मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नए नेतृत्व के शपथ समारोह में शामिल होकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान जताते रहे हैं. हालांकि कई मामलों में राजनीतिक मतभेदों या तनावपूर्ण रिश्तों के कारण पूर्व मुख्यमंत्री समारोह से दूरी भी बनाते रहे हैं. अभी तक नहीं आया कोई आधिकारिक बयान फिलहाल तृणमूल कांग्रेस या ममता बनर्जी की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हालिया चुनावी मुकाबले और भाजपा-टीएमसी के बीच बढ़े तीखे टकराव को देखते हुए ममता बनर्जी के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना कम दिखाई दे रही है. बंगाल में गरमाया राजनीतिक माहौल शपथ ग्रहण से पहले पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है. 7 मई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा भंग करने की अधिसूचना जारी की थी. इसके बाद से नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई. हालांकि ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार किया था, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के तहत नई सरकार के शपथ लेने तक वह कार्यवाहक भूमिका में मानी जा रही हैं. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में तैयारियां पूरी भाजपा इस शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने में जुटी हुई है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विशाल मंच, सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं. कार्यक्रम में लाखों समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है. ड्रोन निगरानी, नो-फ्लाई जोन और कई ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किए गए हैं.
Amit Shah on Mamata Banerjee Bhabanipur Loss: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार के बाद बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस बार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में घुसकर हराया है. “नंदीग्राम में गई थीं चुनौती देने, अब भवानीपुर में मिली हार” कोलकाता में भाजपा नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी के पुराने बयान का जिक्र किया. शाह ने कहा कि 2021 में ममता बनर्जी खुद शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में चुनाव लड़ने गई थीं और इसे अपनी राजनीतिक ताकत बताया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दीदी कहती थीं कि वह शुभेंदु के गढ़ में जाकर लड़ रही हैं. लेकिन इस बार शुभेंदु दा ने उनके अपने घर भवानीपुर में जाकर उन्हें हरा दिया.” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान अमित शाह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. भाजपा समर्थक इसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, जबकि टीएमसी समर्थकों ने शाह के बयान को राजनीतिक उकसावे वाला करार दिया है. भवानीपुर में कैसे बदला चुनावी समीकरण? भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने यहां बड़ा उलटफेर करते हुए ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. मतगणना के शुरुआती राउंड में ममता बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के चरणों में शुभेंदु अधिकारी लगातार आगे निकलते गए और अंत में निर्णायक जीत दर्ज की. “भ्रष्टाचार और परिवारवाद से तंग आ चुकी है जनता” अमित शाह ने दावा किया कि भवानीपुर की जनता ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ वोट दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है. “शेरनी से भीगी बिल्ली” वाले बयान पर बढ़ा विवाद अपने भाषण में शाह ने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए कहा कि जो नेता खुद को बंगाल की “शेरनी” बताती थीं, अब हार के बाद “भीगी बिल्ली” बन गई हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. टीएमसी नेताओं ने शाह की भाषा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इसे चुनावी जवाब बता रही है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।